जानिए आचार्य चाणक्य के जीवन से जुड़े वो तथ्य, जिनके बारे में अक्सर लोग नहीं जानते

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आचार्य चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है. आचार्य ने अपने अनुभवों से लोगों को बहुत कुछ सिखाया. लेकिन हम में से तमाम लोग आज भी आचार्य के विषय में बहुत कुछ नहीं जानते. यहां जानिए आचार्य चाणक्य के जीवन से जुड़ी अनकही बातें.

आचार्य चाणक्य के मुंह में उनके जन्म के समय ही एक दांत मौजूद था. उस समय एक जैन मुनि उनके घर पहुंचे और उन्हें देखकर कहा कि ये बच्चा बड़े होकर एक राजा बनेगा. इससे उनके माता पिता बुरी तरह से घबरा गए. इसके बाद मुनि उनके माता पिता से बोले आप क्या चाहते हैं? इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर आप इसका दांत निकलवा देंगे तो ये राजा का निर्माता बनेगा.

आचार्य को कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि उनका वा​स्तविक नाम विष्णुगुप्त था. श्री चणक के पुत्र होने के कारण उन्हें चाणक्य कहा गया. कूटनीति, अर्थनीति, राजनीति के महाविद्वान और अपने महाज्ञान का ‘कुटिल’ सदुपयोग करने के कारण उन्हें कौटिल्य कहा जाता है.

आचार्य चाणक्य के पिता की मृत्यु के बाद एक विद्वान पंडित राधा मोहन ने उनकी क्षमताओं को भांप लिया और उनका दाखिला तक्षशिला विश्वविद्यालय में करा दिया. यहां से उनके जीवन की नई शुरुआत हुई. शिक्षा ग्रहण करने के बाद आचार्य ने उसी विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य संपन्न किया और अनेक ग्रंथों की रचना की.

कहा जाता है कि आचार्य चंद्रगुप्त को भोजन में थोड़ी मात्रा में जहर भी दिया करते थे, क्योंकि वे चंद्रगुप्त के शत्रुओं को अच्छे से समझते थे. वे चाहते थे कि भविष्य में कभी अगर चंद्रगुप्त पर उसके शत्रु जहरीला आघात करे, तो चंद्रगुप्त उसे आसानी से सह सके.

आचार्य की मृत्यु को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं. कुछ लोगों का कहना है कि अपने सभी कार्यों को पूरा करने के बाद वे रथ से एक दिन जंगल की ओर निकल गए, फिर कभी वापस नहीं लौटे. वहीं कुछ लोग ये भी कहते हैं कि मगध की रानी हेलेना ने उन्हें जहर देकर मार दिया था. कुछ लोग कहते हैं हेलेना ने उनकी हत्या करवा दी थी.

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