जयंत चौधरी ने सीएम योगी की लिखा पत्र, किसानों के लिए की ये बड़ी मांग…

जयंत चौधरी ने सीएम योगी की लिखा पत्र
जयंत चौधरी ने सीएम योगी की लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने पत्र लिखा है। आरएलडी प्रमुख ने अपने पत्र में सीएम योगी से गन्ना किसानों के भूगतान को लेकर मांग की है। पत्र में उन्होंने सीएम से बजट सत्र के दौरान गन्ने का लाभकारी मूल्य अतिशीघ्र घोषित करने की मांग रखी है। जयंत चौधरी ने अपने पत्र में लिखा, “गन्ने का वर्तमान पेराई सत्र आधे से ज्यादा बीत चुका है। किन्तु सरकार ने अभी तक गन्ना मूल्य की घोषणा नहीं की है। गन्ना किसान बिना यहा जाने कि उसके उत्पाद की क्या कीमत मिलेगी, मिलों को लगातार गन्ना की आपूर्ति करने को विवश हैं। कोई भी उत्पाद ऐसा नहीं होगा, जिसका मुल्य जाने बिना उत्पादक निरंतर उसकी आपूर्ति करता रहे।

तीन महीने गन्ना पेराई सत्र के बीते

गन्ना पेराई सत्र उत्तर प्रदेश में तीन महीने से चल रहा है, लेकिन अभी तक 2022-2023 का गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ है। किसान गन्ना उत्पादन की लागत बढ़ने की वजह बताते हुए मूल्य वृद्धि की आवाज उठा रहे हैं। किसानों की ओर से 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य तय करने की मांग की है। गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पिछले हफ्ते मुलाकात की थी। चौधरी ने जल्द ही गन्ना मूल्य वृद्धि घोषित करने का संकेत दिया।

गन्ना किसानों की आजीविका से जुड़ा है मामला

उत्तर प्रदेश में 120 सरकारी औऱ निजी चीनी मिल हैं। इन मिलों से 60 लाख से अधिक गन्ना किसानों की आजीविका जुड़ी है। नया गन्ना मूल्य घोषित नहीं होने से मिलें पिछले वर्ष घोषित 340-350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को भुगतान कर रही हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव को देखते हुए सपा, रालोद जैसे राजनीतिक दल भी गन्ना मूल्य के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटे हैं। भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत और नरेश टिकैत समेत कई अन्य किसान संगठन भी मोर्चेबंदी में जुट गए हैं।

एफआरपी पर बोनस की मांग

पीएम मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक में पिछले साल 2021-22 के विपणन वर्ष में गन्ने के मूल्य (FRP) में बढ़ोतरी प्रति क्विंटल 15 रुपये की रखी थी। मूल्य वृद्धि के बाद गन्ने का मूल्य 315 रुपये प्रति कुंतल हो गया था। इससे पांच करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा मिला था। करीब पांच लाख चीनी मिल मजदूर भी इससे लाभान्वित हुए थे।

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