Wednesday, July 17, 2024
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जिस कार से हुआ कंझावला कांड, फोरेंसिक टीम क्रेन से उस कार को टांग के कर रही जांच

दिल्ली के कंझावला में हुए एक्सीडेंट कांड में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU), गांधीनगर की फोरेंसिक टीम मृतका अंजलि को घसीटने वाली कार की जांच कर रही है। इसके अलावा पांच फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने मृतका अंजलि की मौत के मामले की जांच के लिए सुल्तानपुरी का भी दौरा किया। फोरेंसिक टीम को इस बलेनो कार की जांच के लिए उसके निचले हिस्से तक पहुंचना जरूरी है। लिहाजा एक क्रेन मंगवाकर कार को हवा में टांगा गया। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने कार के नीचे से सबूत जुटाने शुरू किए।

राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय से आई जांच टीम

आपको बताते चले कि दिल्ली के कंझावला में 31 दिसंबर को हुई कार दुर्घटना में साक्ष्य और नमूने एकत्र करने के लिए गुजरात से आई फोरेंसिक टीम ने सुल्तानपुरी का दौरा किया। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता सुमन नलवा ने बताया कि मामले की जांच कर रहे डीसीपी (बाहरी) हरेंद्र के. सिंह के अनुरोध पर राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के पांच फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम दौरा कर रही है। अंजलि सिंह (20) की स्कूटी को एक कार ने 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरमियानी रात को टक्कर मार दी थी। जिसमें वह कार के नीचे फंस गईं और वाहन के साथ सड़क पर करीब 12 किलोमीटर तक घसीटे जाने के कारण उसकी मौत हो गई।

कंझावला कांड में अब तक 7 लोग गिरफ्तार

बता दे कि पुलिस ने कंझावला कांड में अब तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में दीपक खन्ना (26), अमित खन्ना (25), कृष्ण (27), मिथुन (26) और मनोज मित्तल को पहले गिरफ्तार किया था। बाद में दो और लोगों- आशुतोष और अंकुश खन्ना – को कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हालांकि कंझावला कांड में आरोपी आशुतोष भारद्वाज की जमानत अर्जी पर दिल्ली की एक अदालत ने आज अपना फैसला सुना दिया है।

आरोपी आशुतोष भारद्वाज की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आशुतोष के खिलाफ जांच शुरुआती दौर में है। आरोपी आशुतोष भारद्वाज के वकील ने सोमवार को यह कहते हुए याचिका दायर की थी कि अपराध की प्रकृति जमानती हैं और आरोपी ने घटना के बाद पुलिस से सहयोग किया। इस पर अतिरिक्त सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी आशुतोष भारद्वाज ने दुर्घटना में शामिल कार, एक अन्य सह-आरोपी को सौंप दी थी। जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं था।

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