शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
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सम्मेद शिखर जी मामले में चार दिन में दो जैन मुनियों ने दिया बलिदान, थे उपवास पर

झारखंड में स्थित जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर जी के लिए एक और जैन मुनि ने अपने प्राण त्याग दिए। गुरुवार देर रात एक बजे मुनि समर्थ सागर का निधन हो गया। चार दिन में ये दूसरे संत हैं,जिन्होंने अपनी देह त्याग दिया है। वे मुनि सुज्ञेय सागर महाराज के निधन के बाद अन्न-जल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठ गए थे। शुक्रवार को सुबह 8.30 बजे संघी जी जैन मंदिर से मुनिश्री की डोल यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुगण शामिल हुए और आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ सानिध्य में जैन परंपराओं के अनुसार उनके देह को पंचतत्व में विलीन किया गया।

बता दें कि सांगानेर स्थित जैन समाज के मंदिर में सम्मेद शिखर को बचाने के लिए मुनि सुज्ञयसागर अनशन पर बैठ गए थे। नौ दिनों बाद मुनि सुज्ञय सागर का निधन भी हो गया था। झारखंड सरकार ने सम्मेद शिखर को पर्यटक स्थल घोषित कर दिया है। उसके इस कदम का देशभर में जैन समाज विरोध कर रहा है। जैन समाज का कहना है कि झारखंड समाज के इस कदम से सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को खतरा है।

मांगें नहीं मानी तो जैन समाज देह त्यागने से पीछे नहीं हटेगा

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि मुनि सुज्ञेय सागर महाराज और मुनि समर्थ सागर महाराज के बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा। सम्मेद शिखर जैन तीर्थ था, है और रहेगा। केंद्र और झारखंड सरकार को 'तीर्थ स्थल' हर हाल में घोषित करना ही होगा। अगर सरकार ने समाज की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो जैन समाज मुनिराजों के मार्गों पर चलकर अपने देह त्यागने से पीछे बिल्कुल भी नहीं हटेगा।

मुनि समर्थ सागर ने कहां त्यागे प्राण

मुनि समर्थ सागर जयपुर के सांगानेर स्थित संघीजी दिगम्बर जैन मंदिर में आमरण अनशन कर रहे थे। उन्होंने तीन दिन से अन्न का त्याग कर रखा था.सुज्ञेयसागर महाराज ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। तब समर्थ सागर जी ने धर्मसभा के दौरान अनशन का संकल्प लिया था। उसी समय से वह उपवास पर चल रहे थे।

केंद्र सरकार का ऑर्डर गुमराह करने वाला

अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि सम्मेद शिखर जैन तीर्थ जैन समाज और साधु समाज में कितना महत्व रखता है। इसका अंदाजा ना केंद्र सरकार लगा रही है और ना ही झारखंड सरकार लगा रही है। पिछले 4 दिनों में मुनि समर्थ सागर महाराज दूसरे मुनिराज हैं। जिन्होंने सम्मेद शिखर जी को लेकर अपना देह त्यागा है। गुरुवार को केंद्र सरकार ने जो ऑर्डर जारी किया है। वह केवल जैन समाज को गुमराह करने के लिए जारी किया है। जिसका फायदा सत्ता के बल पर उठाया जा रहा है।

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि जो ऑर्डर जारी किया है, उससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। क्योंकि केंद्र सरकार ने ना 2 अगस्त 2019 का गजट नोटिफिकेश रद्द किया और ना ही 'पर्यटक' शब्द हटाया। ना ही तीर्थ स्थल की घोषणा की। इसके अलावा जो इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था, केवल उस पर रोक लगाई है।

जबकि उसे रद्द करना था। झारखंड और केंद्र सरकार पत्रबाजी कर केवल फुटबाल मैच खेल रही है। किंतु जैन समाज इनके षड्यंत्रों से गुमराह नहीं होगा और आंदोलन यथावत जारी रहेगा।

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