अयोध्या को पुराना वैभव मिलना हर भारतीय के लिए गौरव की अनुभूति : स्वाती सिंह

अयोध्या

पूरी दुनिया में अयोध्या इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। 22 जनवरी 2024 की तारीख का रामभक्त बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 500 साल के लंबे इंतजार के बाद 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि परिसर में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगी। भारत के इतिहास में 22 जनवरी 2024 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। अयोध्या न केवल देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक स्थल के रूप में विकसित होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बनेगी।

अयोध्या का हर दौर रहा बेहद खास

कुछ वर्षों पहले तक जो अयोध्या उपेक्षित थी, जहां विकास का दूर—दूर तक नाता नहीं था, आज उसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। देखा जाए तो राम मंदिर निर्माण एक साथ कई तरह की सौगात लेकर आया है। ये सिर्फ धार्मिक लिहाज से श्रद्धालुओं के लिए भावुक और गर्व की अनुभूति नहीं है, बल्कि विकास के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण है। आज राम नगरी में विश्वस्तरीय सुविधाओं की मौजूदगी ये बताती है कि रामनगरी को उसका पुराना वैभव वापस मिला है। वहीं ये तो शुरुआत है, आने वाले दिनों में नव्य अयोध्या की तस्वीर पूरी दुनिया को हैरत में डालने वाली होगी।

अयोध्या को पौराणिक मान्यता से लेकर इतिहास के नजरिए से देखा जाए तो हर दौर में ये बेहद खास रही। कौशल राज्य की राजधानी साकेत अर्थात जो स्वर्ग के सामान हो। इसी साकेत को आगे चलकर अयोध्या नाम मिला। जो ‘अ योध्य’ है अर्थात जिसे कभी पराजित, परास्त नहीं किया जा सकता। अयोध्या के इतिहास में वात्सल्य, राग, करुणा, श्रद्धा, द्वेश, श्रृंगार, विध्वंस और निर्माण समाहित है। अयोध्या का अस्तित्व अति प्राचीन है। किसी भी कालखंड़ का इतिहास टटोलने पर अयोध्या का किसी न किसी नाम, रूप में वर्णन मिल जाता है।

500 साल के युद्ध का परिणाम – स्वाती सिंह

युग बदले, सदियां बदली, इतिहास बदलता रहा। कुछ नहीं बदला तो अयोध्या का अस्तित्व। अयोध्या नगरी राम से भी प्राचीन है। अयोध्या कई बार बनी, मिटी सजी और संवरी। सतयुग में मनु के मन में अयोध्या बसी। त्रेता में अयोध्या ने महाराज दशरथ का स्वर्णिम युग और भागवान राम का राम राज्य देखा। फिर उन्मादी बर्बरता की गवाह भी बनी। अयोध्या ने अनेक युद्ध देखे हैं। भूमि पर अस्त्र—शस्त्रों से लड़े जाने वाले भी और अन्तस में चलने वाले भयंकर महायुद्ध भी। लेकिन 1528 में एक आक्रांता के आक्रमण से अयोध्या की आत्मा, राम के नगर, भारत की सांस्कृतिक पहचान, राम के जन्म स्थान पर प्रहार हुआ था। तब भी अयोध्या हारी नहीं।

1528 से 2020 तक अयोध्या के पूरे 492 सालों के इतिहास में कई मोड़ आए। इसमें 9 नवंबर 2019 का दिन बेहद खास रहा, जब सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।25 मार्च, 2020 को पूरे 28 साल बाद रामलला टेंट से निकलकर फाइबर मंदिर में शिफ्ट हुए और इसके बाद 5 अगस्त को भूमि पूजन किया गया।आखिरकार , वह इंतजार अब 22 जनवरी 2024 को रामलला के भव्य मंदिर में गर्भगृह में विराजमान होने के साथ खत्म होने जा रहा है ।

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