घर-परिवार में जब भी विचार-विमर्श करें तो सभी की सलाह पर ध्यान दें

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पांडवों का द्रौपदी से विवाह हो चुका था। द्रौपदी के पिता द्रुपद पांडवों को हर सहायता देने को तैयार थे। दूसरी ओर कौरवों में इस बात की चर्चा हो रही थी कि हम पांडवों को समाप्त करना चाहते हैं और इनका हित होता जा रहा है।एक दिन कौरवों की सभा में शकुनि ने अपनी कुनीति सुनाई। शकुनि ने कहा, ‘जब भी अवसर मिले, हमें शत्रुओं को निर्बल कर देना चाहिए। हमें पांडवों को जड़ से मिटाना पड़ेगा। अन्यथा एक दिन ये हम पर भारी पड़ेंगे। जब तक उनके पीछे कृष्ण और बलराम हैं, हम उन्हें सामने से हरा नहीं सकेंगे। हमें कृष्ण और बलराम की अनुपस्थिति में पांडवों का वध कर देना चाहिए।’

उस सभा में सोमदत्त के पुत्र भूरिश्वा भी उपस्थित थे। भूरिश्वा बहुत बलवान थे। महाभारत युद्ध में भीष्म ने इन्हें अपने 11 सेनापतियों में से एक बनाया था। चौदहवें दिन अर्जुन ने उनका वध किया था।

कौरवों की उस सभा में भूरिश्वा ने कहा, ‘अपने और शत्रु पक्ष की सात प्रकृतियों और छह गुणों को जाने बिना युद्ध नहीं करना चाहिए। सात अंगों को सात प्रकृतियां कहते हैं, ये हैं- स्वामी, अमात्य, सुह्रत, कोष, राष्ट्र, दुर्ग और सेना। इसी तरह छह गुण हैं- संधि यानी शत्रु से मेल रखना। विक्रह यानी लड़ाई छेड़ना। यान यानी आक्रमण करना। आसन्न यानी अवसर की प्रतिक्षा में बैठे रहना। द्वैदीभाव यानी दुरंगी नीति बरतना। समाश्रय यानी अपने से बलवान राजा की शरण लेना।’

भूरिश्वा ने आगे कहा, ‘मैं देखता हूं कि पांडवों के पास मित्र और खजाना दोनों हैं। इसलिए शकुनि आप गलत सलाह न दें।’

कौरवों ने भूरिश्वा की सलाह नहीं मानी और शकुनि की बात मानी। परिणाम स्वरूप कौरवों को पांडवों से पराजित होना पड़ा।

सीख
हम जब भी घर-परिवार में सलाह-मशविरा करते हैं तो किसी सलाह भले ही चुभ रही हो, लेकिन सही हो तो उसे मान लेना चाहिए। वर्ना बाद में पछताना पड़ता है।

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