सब्जी के स्वाद ने पुलिस को पहुंचाया कातिलों तक

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कोलकाता : कालीघाट के नेपाल भट्टाचार्य रोड में 6 नवंबर 2009 को मंजू घोषाल नामक एक वृद्ध महिला की हत्या कर दी गयी थी। महिला की हत्या करने के बाद हत्यारे उसके जेवरात और घर से 4 हजार रुपये लूटकर फरार हो गए थे। उस समय मकान में सीसीटीवी कैमरा या फिर अन्य चीजें नहीं रहने के कारण पुलिस को जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। खासतौर पर दिन-ब-दिन जैसे बीत रहे थे वैसे-वैसे हत्या का रहस्य गहराता जा रहा था। इस बीच एक दिन मामले के जांच अधिकारी का एक ढाबा में खाना खाने के दौरान सब्जी में स्वाद नहीं मिलने पर ढाबा के मलिक के साथ विवाद हो गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि बासी सब्जी बनाकर परोसी गयी है। इस पर ढाबा मालिक ने कहा कि उनके ढाबा में रोजाना ताजा सब्जी आती है। यहां पर कैनिंग और लक्ष्मीकांतपुर के सब्जी व्यवसायी ताजा सब्जियों की सप्लाई करते हैं। यह बात सुनने के बाद पुलिस अधिकारी ने किसी तरह भोजन समाप्त किया और पेमेंट कर अपने ऑफिस के लिए निकल गए। बीच रास्ते में उन्हें कैनिंग का नाम याद आया और फिर उन्हें हत्या की शिकार महिला के घर की रसोई में पड़ी हरी सब्जी पर पड़ी। इसके बाद पुलिस अधिकारी दोबारा ढाबा में गए और मालिक से बातचीत की तो पता चला कि कैनिंग और लक्ष्मीकांतपुर से आने वाले 5-6 लोग यहां पर सब्जी सप्लाई करते हैं। बस यही बात सुनते ही जांच अधिकारी को लगा कि उन्हें जैकपॉट हाथ लग गया और इसके बाद ही मंजू घोषाल हत्याकांड के रहस्य पर से पर्दा उठ गया।

क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार नेपाल भट्टाचार्य रोड स्थित मकान के फ्लैट में मंजू घोषाल और उनके पति नारायण चंद्र घोषाल किरायेदार के रूप में रहते थे। उन दोनों के अलावा उक्त मकान में 32 परिवार रहते थे। मंजू और उनके पति नारायणचंद्र दोनों ही डाक विभाग के कर्मी थे। नारायण घोषाल 1990 में ‌रिटायर हो गए थे। मंजू ने भी शारीरिक अस्वस्थता के कारण वर्ष 2005 में वीआरएस ले लिया था। घोषाल दंपति की एक मात्र संतान मानसी थी। उन्होंने 1999 में अपनी बेटी मानसी की शादी सिंथी के दीपंकर मित्रा से की थी। मानसी की शादी के एक साल बाद ही नारायण घोषाल की मौत हो गयी। इसके बाद मंजू अपने घर में अकेली ही रहती थी। मानसी और दीपंकर सप्ताह में एक दिन जाकर उसे राशन सामग्री और दवा पहुंचा देते थे। मंजू के घर में उषारानी नामक एक महिला नौकरानी का काम करती थी। वह मंजू के घर में रहती थी और बाकी आस-पड़ोस के मकान में भी काम करती थी। मंजू को गांव के खेतों की सब्जी और अन्य सामान पसंद थे। ऐसे में उषारानी का दामाद सुशील सरदार महीने में एक दिन आकर मंजू को हरी सब्जी अन्य सामान दे जाता था। इस बीच 6 नवंबर की सुबह मकान के चौथे तल्ले पर रहने वाली डॉली नामक महिला जब मंजू के घर पर गयी तो उसके कमरे का दरवाजा खुला हुआ पाया। अंदर घुसने पर डॉली ने देखा कि कमरे के अंदर बेड पर मंजू रक्तरंजित अवस्था में पड़ी हुई है। डॉली चीखकर अपने घर पहुंची और पति को घटना की जानकारी दी। उसके पति ने घटना की सूचना कालीघाट थाने की पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने जांच की जिम्मेदारी डीडी के होमीसाइड विभाग के अधिकारी को दी। होमीसाइड विभाग के तत्कालीन एसआई मलय दत्ता ने जांच शुरू की। जांच अधिकारी ने जांच के दौरान पाया कि घर के डाइनिंग टेबल पर दो चाय के कप रखे हुए हैं। इसका मतलब हत्यारे दो व्यक्ति थे और वे दोनों ही परिच‌ित थे। ऐसे में पुलिस के लिए यह थोड़ा आराम हो गया कि किसी परिचित ने ही हत्या की है। हालांकि जांच अधिकारी को यह पता नहीं था कि आसान दिखने वाला मामला काफी रहस्यमय होगा।
जांच के दौरान जांच अधिकारी ने आस पड़ोस में रहने वाले लोगों से लगातार पूछताछ की। इसके बाद उन्होंने वृद्धा के घर में आने-जाने वाले लोगों की लिस्ट बनायी। एक-एक कर सबसे पूछताछ की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पुलिस ने वृद्धा की नौकरानी उषारानी से पूछताछ की तो उसने पहले कहा कि उसकी बेटी और दामाद अलग रहते हैं। ऐसे में यहां भी पुलिस को निराशा हाथ लगी। दो सप्ताह बाद भी कुछ फायदा नहीं होने पर वह एक दिन अपने सोर्स से मिलने के लिए रासबिहारी पहुंचे। सुबह के वक्त सोर्स मिलने के बाद जब वह रासब‌िहारी में एक ढाबा में भोजन कर रहे थे तो वहां पर उन्हें सब्जी का स्वाद अटपटा लगा। तत्कालीन एसआई मलय दत्ता ने ढाबा मालिक से सब्जी की शिकायत की तो ढाबा मालिक ने कहा कि उनकी दुकान पर रोजाना ताजा सब्जियां कैनिंग और लक्ष्मीकांतपुर से आती हैं। फिर क्या था मलय बाबू के दिमाग की बत्ती जली और वह तुरंत कालीघाट थाने में पहुंचे और उषारानी को पूछताछ के लिए बुलाया। उषारानी ने पहले पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि ‌उसकी बेटी चुम्पा की शादी हुई है लेकिन दामाद अलग रहता है। इसके बावजूद पुलिस ने उसकी बेटी की ससुराल का पता पूछा तो वह नहीं बतारी। उसने बताया कि 6 महीने पहले उसकी बेटी अस्पताल में भर्ती हुई थी जहां प्रसव के कारण उसकी बेटी के बच्चे की मौत हो गयी। इसके बाद पुलिस तुरंत कैनिंग के माझेरहाट गांव पहुंची और अभियुक्त सुशील सरदार को पकड़ा। सुशील ने पूछताछ के दौरान हत्या की बात स्वीकार की। उसने बताया कि अपने चाचा स्वप्न सरदार के साथ मिलकर उसने वृद्धा की हत्या की थी। पुलिस ने मामले में स्वप्न को भी गिरफ्तार किया।

मदद मांगने गए थे मगर वृद्धा के चिल्लाने पर कर दी हत्या
पुलिस के अनुसार अभियुक्त सुशील सरदार ने बताया ‌कि उसकी मां और बाप में झगड़े के दौरान उसकी मां के सिर में चोट आयी थी। मां के इलाज के लिए उसे रुपये की जरूरत थी। वहीं उसके चाचा स्वप्न सरदार को जुआ खेलने की लत थी। जुआ खेलने के कारण स्वप्न के ऊपर काफी कर्ज हो गया था। लेनदारों से परेशान होकर वह घर से बाहर रहने लगा। एक दिन स्वप्न और सुशील में मुलाकात हुई तो सुशील ने कहा कि वह कोलकाता में एक महिला को जानता है जो उन्हें रुपये दे देगी। इस दौरान स्वप्न ने कहा कि अगर वृद्धा ने प्यार से रुपये नहीं दिये तो वे लोग उसे डराकर रुपये लूट लेंगे। प्लानिंग के तहत 6 नवंबर की सुबह दोनों वृद्धा के घर पहुंचे। पहले सुशील ने वृद्धा से रुपये मांगे लेकिन उसने देने से मना कर दिया। इसके बाद स्वप्न ने धारदार हथियार दिखाकर वृद्धा को डराने की कोशिश की तो वृद्धा शोर मचाने लगी। ऐसे में अभियुक्तों ने वृद्धा का मुंह दबाकर उसके पेट और गर्दन पर कटारी से वार कर उसकी हत्या कर दी। वृद्धा की हत्या के बाद उनलोगों ने वृद्धा के हाथ से 6 सोने के कंगन, एक सोने की चेन और 4 हजार रुपये नकद लूट कर फरार हो गए। अभियुक्तों ने वृद्धा के गहने को एक आभूषण दुकान में गिरवी रखा था। इसके बाद करीब 8 साल तक अदालत में सुनवाई के बाद दोनों अभियुक्तों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनायी।

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