वाराणसी : अमित गुप्ता : नमामि गंगे की तरफ से बृहस्पतिवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा की तलहटी में सफाई अभियान चलाया गया । सफाई में प्लास्टिक, सड़े कपड़े , सीसा व प्लास्टिक की तस्वीरें अन्य सामग्री निकाली गई । इस दौरान पूजन सामग्रीयों को निकालने के साथ सिल्ट की भी सफाई की गई । वहीं जन जागरुकता के क्रम में ध्वनि विस्तारक यंत्र द्वारा लोगों से गंगा और घाट को साफ रखने की अपील की गई ।
श्रमदान के बाद नमामि गंगे काशी शेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कारों में शामिल मां गंगा के संरक्षण के लिए सभी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए । भारत की सिंचाई, पेयजल, तीर्थाटन एवं अन्य कई आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश हम जन जन तक पहुंचाएं ।श्रमदान में प्रमुख रूप से काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला रश्मि साहू, सारिका गुप्ता , पुष्पलता वर्मा, बीना गुप्ता , सरित सिंह, संतोष पांडेय आदि शामिल रहे ।
जहरीले रसायनों से कराह रही रामगंगा
गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में से एक रामगंगा की हालत भी काफी खराब है। सीवरेज का दूषित पानी सीधे रामगंगा में जाता है। सैकड़ों फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी व अन्य दूषित अवयव भी नदी में ही डाले जाते हैं। लगातार दूषित और रासायनिक तरल पदार्थ गिरने से नदी में बायो केमिकल अॉक्सीजन डिमांड (बीओडी) तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, अॉक्सीजन की मात्रा जरूरी छह डीओ (डिमांड अॉक्सीजन) से लगातार कम हो रही है। इसके अलावा पानी में टीडीएस का लेवल भी 300 के करीब पहुँच गया है।
पीएच वैल्यू सामान्य की तुलना में 7.6 है। सीवरेज का पानी गिरने से नदी में पानी पारदर्शी नहीं रहा है। नगर निगम सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से जल-मल सीधे रामगंगा में बह रहा है। कई जगह तो रामगंगा इतनी काली हो गई है कि गन्दे नाले में जमी कीचड़ के समान दिखाई देती है। रामगंगा बहगुल, शंखा, भाखरा और किच्छा नदियाँ मिलती हैं। मुरादाबाद से रामपुर होकर आते समय रामगंगा और ज्यादा मैली होती है। बरेली में रामगंगा 125 किमी. क्षेत्र में बहती है, जो मंडल के शाहजहाँपुर जिले से आगे जाकर फर्रुखाबाद के पास गंगा में मिलती है।
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