जापान की राजधानी टोक्यो में मंगलवार को होने वाले क्वाड सम्मेलन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान पहुंच चुके हैं। उनके अलावा इस संगठन के बाक़ी तीन देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के राष्ट्राध्यक्ष भी इस सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। माना जाता है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के दबदबे को कम करने के लिए चार देशों के इस संगठन का गठन हुआ है।
क्या है क्वाड?
क्वाड शब्द ‘क्वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता’ के क्वाड्रीलेटरल (चतुर्भुज) से लिया गया है. इस समूह में भारत के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। क्वाड जैसे समूह को बनाने की बात पहली बार 2004 की सुनामी के बाद हुई थी जब भारत ने अपने और अन्य प्रभावित पड़ोसी देशों के लिए बचाव और राहत के प्रयास किए और इसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी शामिल हो गए थे।
लेकिन इस आइडिया का श्रेय जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे को दिया जाता है। 2006 और 2007 के बीच आबे ने क्वाड की नींव रखने में कामयाब हुए और चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता की पहली अनौपचारिक बैठक वरिष्ठ अधिकारीयों के स्तर पर अगस्त 2007 में मनीला में आयोजित हुई थी। 2017 में गति मिलने के बाद क्वाड के विदेश मंत्री अक्टूबर 2020 में टोक्यो में मिले और कुछ ही महीनों बाद बीते साल मार्च में जो बाइडन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के कुछ ही हफ़्तों बाद अमेरिका ने क्वाड के वर्चुअल शिखर सम्मलेन की मेज़बानी की।
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चीन ने सम्मलेन को बताया साज़िश
क्वाड को लेकर चीन हमेशा मुखरता रहा है | इसको अपने ख़िलाफ़ साज़िश बता रहा है। चीन ने एक बार फिर क्वाड को लेकर बयान दिया है | कहा है कि यह नाकाम होकर रहेगा। एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान वांग यी से क्वाड सम्मेलन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिका की भारत-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति ‘विफल होने को बाध्य’ है | साथ ही उन्होंने अमेरिका की भारत-प्रशांत रणनीति को एशिया-प्रशांत की मौजूदगी को मिटाने की कोशिश बताया है और कहा कि यह क्षेत्रीय सहयोग के एक ढांचे को नकारता है |
अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक मंच पर लाने वाले क्वाड संगठन के उद्देश्यों में एक मुक्त और स्वतंत्र भारत-प्रशांत क्षेत्र शामिल है | जबकि बीजिंग इसे ‘एशियन नेटो’ की संज्ञा दे चुका है और कहता है कि इसका उद्देश्य उसके उदय को रोकना है। चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन जैसे देश इस क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए अनुकूल पहलों को देखकर ख़ुश हैं लेकिन विभाजित टकराव पैदा करने की साज़िश का विरोध करता है।
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