Sunday, August 31, 2025
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राष्ट्रपति मूर्मू का बड़ा कदम, लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले

हरियाणा और गोवा में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा लद्दाख में भी फेरबदल किया गया है। यहां अब कविंद्र गुप्ता उपराज्यपाल होंगे, जबकि अब तक एलजी रहे ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। हरियाणा में अब प्रोफेसर असीम कुमार घोष राज्यपाल होंगे। यही नहीं गोवा में गजपति राजू को राज्यपाल बनाकर भेजा गया है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इनकी नियुक्ति की जानकारी दी है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले
लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम हैं कविंद्र गुप्ता

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सीनियर नेता कविंद्र गुप्ता को लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। जब जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी थी, उस समय कविंद्र गुप्ता को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। कविंद्र गुप्ता को लद्दाख की राजनीति, संस्कृति और अन्य चीजों के बारे में अच्छी जानकारी है। ऐसे में उन्हें लद्दाख में एलजी पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति माना जा रहा है। कविंद्र गुप्ता दशकों से भाजपा के समर्पित नेता रहे हैं।

गोवा के राज्यपाल बने पशुपति अशोक गजपति राजू

टीडीपी के सीनियर नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी पशुपति अशोक गजपति राजू को गोवा का नया राज्यपाल बनाया गया है। वह भारत सरकार में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। दशकों लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने आंध्र प्रदेश और केंद्र दोनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

हरियाणा में अब तक बंडारू दत्तात्रेय थे राज्यपाल

अब तक हरियाणा में बंडारू दत्तात्रेय राज्यपाल थे और अब उनकी जगह प्रोफेसर असीम कुमार घोष लेंगे। बंडारू दत्तात्रेय 2021 से ही हरियाणा के राज्यपाल थे। अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि बंडारू दत्तात्रेय को अब क्या जिम्मेदारी मिलेगी। गजपति राजू तेलुगु देशम पार्टी के नेता रहे हैं और अब गोवा में राज्यपाल के तौर पर काम देखेंगे।

ऐसा पहली बार है, जब मोदी सरकार में शामिल किसी गठबंधन सहयोगी के नेता को राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक सरकार की नीति भाजपा के नेताओं, सैन्य सेवा में रहे लोगों को ही राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी देने की रही है। ऐसा पहली बार है, जब किसी गैर-भाजपा दल के नेता को यह मौका मिला है।

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