Saturday, March 14, 2026
Homeविदेशईरान की ट्रंप को बड़ी धमकी, तेल संयंत्रों को बना देंगे राख...

ईरान की ट्रंप को बड़ी धमकी, तेल संयंत्रों को बना देंगे राख का ढेर

इजरायल और अमेरिका से चल रही 15 दिनों की भीषण जंग के बीच ईरान ने अमेरिका को बड़ी धमकी दी है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका से जुड़ी तेल सुविधाओं को “राख का ढेर” बना देगा। करीब दो सप्ताह पहले मध्-पूर्व में शुरू हुआ युद्ध अब वैश्विक तेल संकट की बड़ी वजह बन गया है। दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा का भारी संकट हो गया है। साथ ही तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल ढांचे पर हमले जारी रहे। तो मिडिल-ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी सभी प्रमुख तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। जिससे वे “राख का ढेर” बन जाएंगी। यह धमकी ऐसे समय में आई है, जब मध्य पूर्व में चल रहा दो सप्ताह पुराना युद्ध अब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल और संकट का कारण बन चुका है।

अमेरिका की ओर से शुक्रवार को खर्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर ईरान के तेल, आर्थिक या ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया। तो उसका तुरंत जवाब दिया जाएगा।

ईरान के सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर उसके देश के अंदर मौजूद तेल, आर्थिक या ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ। तो पूरे क्षेत्र में उन ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा जिनका संबंध अमेरिका से है। जो लोग वाशिंगटन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिका का हमला

वही बता दे कि खार्ग पर अमेरिका ने हमला किया है। द्वीप पर 15 धमाके सुने गए हैं। दुश्मन ने सेना के एयर डिफेंस, जोशान नेवल बेस, एयरपोर्ट कंट्रोल टॉवर और हेलीक़ॉप्टर हैंगर को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। खार्ग पर हमले में तेल संयंत्रों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। खार्ग का एयर डिफेंस सिस्टम हमले के एक घंटे बाद फिर से शुरू हो गया है। ईरान पहले ही कह चुका है ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया गया। तो पूरे इलाके में अमेरिका की हिस्सेदारी वाले हर ऊर्जा संयंत्र पर हमला होगा।

भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिली राहत

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम ने एक इंटरव्यू में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत को रियायत देने के सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि अधिकांश भारतीयों का दिल ईरान के साथ है। मैं तो यह भी कह सकता हूं कि वे युद्ध के खिलाफ हैं।

हमने ईरान में अपने लोगों को भारत में अपने भाइयों और बहनों की एकजुटता से अवगत कराया। हमने उन्हें यह भी बताया कि वे इस समय गैस और पेट्रोल की कमी से जूझ रहे हैं। हम उनकी मदद और समर्थन करते हैं। हमारे दूतावास ने भी इस मुद्दे पर कई बार मदद करने और भारत में हमारे भाइयों और बहनों की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया।

होर्मुज से गुजरा भारत का दूसरा एलपीजी टैंकर

अमेरिका-इजरायल और ईरान बीच छिड़े युद्ध का असर गैस सप्लाई पर दिखा है। भारत के नजरिए से देखों तो राहत भरी खबर सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत का दूसरा एलपीजी कैरियर जहाज नंदा देवी निकल चुका है। 17 मार्च को सुबह करीब 4 बजे यह भारत के गुजरात में कांडला पोर्ट पर पहुंचेगा।

होर्मुज में जारी रहेगी नाकाबंदी

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने एक दिन पहले जारी बयान में साफ कहा कि वह अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत का बदला लेंगे और होर्मुज को बंद रखेंगे। इस बीच ईरानी अधिकारियों ने जानकारी दी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और क्षेत्रीय हमलों के कारण दुनिया के पांचवें हिस्से से अधिक तेल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है। तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। जिसमें भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंचेगी खेप

अधिकारियों के अनुसार जहाज शिवारिक 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। जबकि नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। सरकार ने यह भी बताया कि फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 24 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से दो अब भारत की ओर आ चुके हैं। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज बाकी हैं। इन जहाजों में कुल 611 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं और सभी सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।

एलपीजी सप्लाई पर नजर

इस बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण एलपीजी सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि अभी तक देश में कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा घबराहट में गैस बुकिंग कराने के कारण मांग अचानक बढ़ गई है।

सरकार के अनुसार पहले जहां एलपीजी की बुकिंग करीब 75 से 76 लाख थी। वहीं अब यह बढ़कर करीब 88 लाख तक पहुंच गई है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है ताकि आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो। अधिकारियों ने यह भी कहा कि देश में कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

Read More :  …………..तो डीएम-एसपी को इस्तीफा दे देना चाहिए – इलाहाबाद हाईकोर्ट

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments