Sunday, August 31, 2025
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आखिरकार सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को मिली अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत दे दी। उन्हें 2002 के गुजरात दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित रूप से दस्तावेज बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तीस्ता सीतलवाड़ पर गवाहों के झूठे बयानों का मसौदा तैयार करने और उन्हें दंगों की जांच के लिए गठित नानावती आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी है | सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता से अपना पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने इस मामले पर केवल अंतरिम जमानत के दृष्टिकोण से विचार किया है। गुजरात उच्च न्यायालय तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई, किसी भी टिप्पणी से स्वतंत्र और अप्रभावित रूप से फैसला करेगा।

दरअसल, तीस्ता सीतलवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सत्र अदालत और हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई थी। तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी 24 जून को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ समाप्त हुई कार्यवाही के अलावा और कुछ नहीं थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हैरत जताई थी कि गुजरात हाईकोर्ट ने कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका को 19 सितंबर को सुनवाई के लिए क्यों सूचीबद्ध किया है। हाई कोर्ट द्वारा गुजरात सरकार को नोटिस दिए जाने के छह सप्ताह बाद शीर्ष अदालत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गुजरात सरकार से तीस्ता की याचिका पर जवाब मांगा था |

तीस्ता सीतलवाड़ पर लोगों को फंसाने के लिए झूठे सबूत गढ़ने का आरोप

तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों को जून में गिरफ्तार किया गया था | उन पर 2002 के गोधरा दंगों के बाद के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने का आरोप है। वे साबरमती केंद्रीय जेल में बंद हैं। श्रीकुमार ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। मामले के तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। संजीव भट्ट पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में थे | जब उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए

सुप्रीम अदालत ने तीस्ता सीतलवाड़ से अपना पासपोर्ट सरेंडर करने को कहा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय में लंबित तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका को लेकर कहा कि हमारे फैसले या टिप्पणी से उस पर कोई असर नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमने यह फैसला सिर्फ अंतरिम बेल को लेकर दिया है। गुजरात हाई कोर्ट स्वतंत्र रूप से इस मामले पर विचार कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से उसे प्रभावित नहीं होना चााहिए।

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