Sunday, April 6, 2025
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MBBS स्टूडेंट्स ने मंत्री के नाम ज्ञापन सौंप मूलभूत सुविधाएं प्राप्त की लगाई गुहार

डूंगरपुर-सादिक़ अली – मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सड़को पर उतरे 350 से अधिक धरती के भगवान।बीते 4 से 5 माह से परेशान एमबीबीएस स्टूडेंट्स को समाधान के लिए जिला कलक्टर तक पहुँचना पड़ा।स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंप मूलभूत सुविधाएं प्राप्त करने की लगाई गुहार।

बीते 4 से 5 माह तक मेडिकल कॉलेज डूंगरपुर में कॉलेज कैम्पस के भीतर रह रहे करीब 350 से ज्यादा एमबीबीएस स्टूडेंट्स अपनी मूलभूत सुविधाओं की माँग को लेकर जिला कलक्टर कार्यालय पहुँचे। शनिवार को जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर तेज़ गर्मी में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के खिलाफ अपनी माँगो को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते नज़र आए।मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट्स ने स्वास्थ्य मंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला कलक्टर को सौप अपनी माँगो को जल्द से जल्द बहाल करने की अपील की गई।

स्वास्थ्य मंत्री को लिखे ज्ञापन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की पूरी पोल खोलते हुए स्टूडेंट्स ने उन सभी असुविधाओं से स्वास्थ्य मंत्री को रूबरू कराया गया जिन सुविधाओं के लिए एक एमबीबीएस नियमानुसार करीब साल भर के लिए 90 हज़ार के आसपास रुपए चुकाता आ रहा है।वर्षभर के लिए लॉजिंग और बोर्डिंग के नाम पर प्रति वर्ष 1 स्टूडेंट् से मेडिकल कॉलेज 24 हज़ार 200 रुपये।इलेक्ट्रिसिटी और वाटर के लिए 8 हज़ार 500 रुपये,खेल एवं अकैडमी फण्ड के नाम से 12 हज़ार 800 रुपये और प्रवेश के दौरान 42 हज़ार 500 रुपये सभी सुविधाओं के नाम पर लेने के बावजूद स्टूडेंट्स को सुविधाओं के पाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे है!

 यूक्रेन संकट, महामारी से प्रभावित MBBS छात्रों के लिए योजना बनाएं NMC

 यूक्रेन संकट और कोविड के कारण कठिनाइयों का सामना करने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों के एमबीबीएस छात्रों की मदद के लिये आगे आते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू स्तर पर ही उनके क्लीनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए कहा है। न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को निर्देश दिया कि वह दो महीने में एक योजना तैयार करे, जिससे छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेजों में क्लीनिकल प्रशिक्षण पूरा करने की अनुमति दी जा सके।

शीर्ष अदालत मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एनएमसी की एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसे एक चीनी विश्वविद्यालय के एमबीबीएस स्नातक को अस्थायी रूप से पंजीकृत करने के लिए कहा गया था।

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, ”इसमें कोई संदेह नहीं है कि महामारी ने छात्रों सहित पूरी दुनिया के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं, लेकिन एक ऐसे छात्र को इंटर्नशिप पूरा करने के लिए अस्थायी पंजीकरण देना, जिसने क्लीनिकल प्रशिक्षण नहीं लिया है, किसी भी देश के नागरिकों के स्वास्थ्य और बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के साथ समझौता होगा।”

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