डिजिटल डेस्क : बड़ी उम्मीदों के साथ भाजपा की केंद्र सरकार ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया था। कश्मीर अब शांत है इस दावे को पूरा करने के लिए अजित डोबाल ने वहां जाकर बिरयानी तक खायी थी। कुछ समय तक लगा सबकुछ ठीक है, माहौल शांत है लेकिन इन दिनों धरती का स्वर्ग कश्मीर दहक रहा है। जिस कश्मीर में आतंक का साया था अंधाधुंध फायरिंग की की जाती थी उस कश्मीर में टार्गेट कीलिंग कर गैर कश्मिरियों को मारा जा रहा है। विशेषकर वहां बिहार के प्रवासी श्रमिकों को जिस तरीके से पहचानपत्र देखकर मौत के घाट उतारा गया वह न सिर्फ निंदनीय बल्कि सोच से भी परे की घटना है। पूरा देश इस घटना से अचंभित है सकते में है। यहां तक कि बिहार सरकार ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जतायी है। अपने राज्य के लोगों की सुरक्षा को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार लगातार केंद्र सरकार और कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा से बातचीत में लगे हुए है। वर्ष 2019 में अगस्त से दिसंबर तक दूसरे राज्यों के करीब 18 लोग श्रमिक कश्मीर में मारे गए और इस साल सिर्फ अक्टूबर में यह संख्या 5 हो चुकी है।
रोजगार में आये श्रमिकों को टार्गेट करना गलत
जम्मू कश्मीर नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने इस तरीके से गैर कश्मीरी श्रमिकों की हत्या की कड़ी निंदा की तथा कहा कि वे यहां रोजगार के लिए आये थे लेकिन घरवालों को उनकी मौत की खबर मिली जो ठीक नहीं है। उधर उनके बेटे उमर अब्दुला ने कहा कि हिंसा का यह खेल बहुत हुआ, अब इस पर विराम लगाने की जरूरत है। इस घटना के पीछे जिनका भी हाथ है वे कड़ी से कड़ी सजा के हकदार है।
पहली बार कश्मीर में टार्गेट बने प्रवासी श्रमिक
जदयू के प्रवक्ता व पार्टी के सेक्रेटरी जनरल के सी त्यागी ने इस पूरे प्रकरण पर साफ कहा कि यह बिहार या उत्तर प्रदेश का मामला नहीं है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति का मामला है। अफगानिस्तान में तालीबानी सरकार बनने के बाद अलकायदा से लेकर जितने भी उग्रवादी संगठन है उनका नया डेरा पाकिस्तान बना है। कश्मीर को अशांत करने में उन्हीं का हाथ है। उन्हें पता है यहां की पुलिस फोर्स पर हमला कर कुछ नहीं होगा इसलिए टार्गेट रोजगार करने वालों को बनाया जा रहा है। सिर्फ इसलिए कि वहांं का सांप्रदायिक माहौल खराब किया जा सके।
बिहारी बोझ नहीं, बोझा ढोते है
जदयू के प्रवक्ता व पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को किसी भी राज्य में जाने का वहां नौकरी करने का मौलिक अधिकार है। कश्मीर में जो हो रहा है उसमें पलायन शब्द का मैं विरोध करता हूं। रही बात बिहारियों की तो वे किसी पर बोझ नहीं है बल्कि वह बोझ ढोते है। किसी भी राज्य में उनका या किसी भी नागरिक का सम्मान करना जरुरी है।
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मिनी बिहार कहलाता है कुलगाम
कश्मीर का कुलगाम मिनी बिहार कहा जाता है। यहां बिहार से कई लोग रोजगार के लिए आते है। कहा जाता है कि रोजगार के लिए प्रवासी श्रमिकों की दक्षिण भारत में पसंद केरल है उत्तर में कश्मीर उनके लिए सहूलियत वाली जगह है। इसी तरह देश के हर राज्य में लोग अपनी सुविधानुसार रोजगार की तलाश में जाते है। नीरज कुमार ने कहा कि बिहारियों का कश्मीर जाना उतना ही सही है जितना कि कश्मीरी शॉल बेचने वालों का बिहार या बंगाल जाना है।