Thursday, April 9, 2026
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ज्ञानवापी मामला, मुस्लिम पक्ष ने दायर की याचिका

ज्ञानवापी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अंजुमन इंतेजामिया कमिशन ने एक नई याचिका दायर की है। इस याचिका में रमजान के लिए वजू खाना क्षेत्र को डी-सील करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है- ‘नमाजी के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक अस्थायी उपाय हो।

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में 14 अप्रैल को सुनवाई होगी। इसके साथ ही अदालत ने मुस्लिम पक्ष को एक याचिका को लेकर राहत दी है। अदालत ने कहा कि वह मुस्लिम पक्ष को मस्जिद परिसर में वजू को अनुमति देने की मांग को लेकर याचिका दायर करने की इजाजत देगा।

वही आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी हुआ है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

वकील विष्णु जैन ने कोर्ट को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वाराणसी की एक अदालत में याचिकाएं दायर की गई हैं और जिला न्यायाधीश इस मामले पर पांच बार फैसला टाल चुकी है। वकील विष्णु जैन की दलील सुनने के बाद सीजेआई ने कहा कि इस मामले पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेंगे।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दवा 

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में ‘शिवलिंग’ पाए जाने का दावा किया गया है। हिंदू पक्षकारों को वाराणसी जिला न्यायाधीश के समक्ष एक आवेदन दायर करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति की अपील पर हिंदू पक्षकारों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

मई महीने में ज्ञानवापी मस्जिद का हुआ सर्वे 

वही आपको बताते चले कि पिछले साल मई के महीने में ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे हुआ था। तब दावा किया गया था कि मस्जिद से एक प्राचीन शिवलिंग पाया गाया है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना था कि ये कोई शिवलिंग नहीं है, बल्कि फव्वारा है।हिंदू पक्ष ने दावा किया कि नंदी की मूर्ति के ठीक सामने मिले शिवलिंग का व्यास 12 फीट 8 इंच है। इसकी गहराई भी काफी है। 12.8 फीट का शिवलिंग वजू स्थल से मिला है। मामला सामने आने के बाद इस जगह को सील करा दिया गया था।

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सिसोदिया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को जारी किया नोटिस

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को आबकारी नीति मामले में आप नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने मामले को 20 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और जांच एजेंसी को अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। सिसोदिया के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा, ”इस मामले में मेरे अलावा सभी को जमानत दे दी गई है। मैं मामले में सबसे कम संभव तारीख का अनुरोध कर रहा हूं।

राउज एवेन्यू कोर्ट का जमानत देने से इनकार

राउज एवेन्यू कोर्ट के सीबीआई जज एम.के. नागपाल ने सोमवार को सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 17 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सिसोदिया की हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, क्योंकि जांच महत्वपूर्ण चरण में है। न्यायाधीश नागपाल ने उन्हें जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया सिसोदिया को ‘आपराधिक साजिश रचने वाला’ माना जा सकता है। उन्होंने पाया कि लगभग 90-100 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत का भुगतान उनके और आप सरकार में उनके अन्य सहयोगियों के लिए था।

सिसोदिया की रिहाई से जांच में आएगी बाधा

राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि जांच के इस चरण में अदालत सिसोदिया को जमानत पर रिहा करने के लिए इच्छुक नहीं है, क्योंकि उनकी रिहाई से चल रही जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और प्रगति में भी गंभीर बाधा आएगी। जांच एजेंसी द्वारा अब तक एकत्र किए गए सबूतों से पता चलता है कि सह-आरोपी विजय नायर के माध्यम से आवेदक ‘साउथ लॉबी’ के संपर्क में था और उनके लिए एक अनुकूल नीति तैयार करना हर कीमत पर सुनिश्चित किया जा रहा था और एक कार्टेल बनाया गया था।

सत्येंद्र जैन को जमानत देने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार

वही दूसरी तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन और उनके दो सहयोगियों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे धन शोधन मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने 22 मार्च को उनकी जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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आरबीआई ने दी बड़ी राहत और नहीं बढ़ाया रेपो रेट, नहीं बढ़ी लोन ईएमआई

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2024 की पहली मौद्रिक पॉलिसी का एलान कर दिया है। आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट पर अपने फैसले और महंगाई दर व विकास दर पर अपने अनुमानों से इस बात बाजार को सरप्राइज किया है। इससे पहले अनुमान था कि एमपीसी की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी कर सकता है। लेकिन लगातार छह बार रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद इस बार इसे अपरिवर्तित रखा गया है।

पिछली आठ मॉनिटरी पॉलिसी में से छह बार हुई है बढ़ोतरी

केंद्रीय बैंक ने आठ मॉनिटरी पॉलिसी बैठकों में से छह बार रेपो रेट में इजाफा किया है। पिछले साल मई से ये सिलसिला शुरू हुआ था। तब आरबीआई रेपो रेट 4 फीसदी पर था और अब रिजर्व बैंक का रेपो रेट 6.5 फीसदी पर पहुंच चुका है। आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास का कहना है कि ग्लोबल स्तर पर बढ़ रहे संकट को ध्यान में रखते हुए भी ये फैसला लिया गया है।

महंगाई पर क्या बोले आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महंगाई के मोर्चे पर देश के केंद्रीय बैंक के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं और हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक महंगाई दर आरबीआई के तय लक्ष्य के करीब या इसके तहत नहीं आ जाती है, हमें लगातार काम करना होगा। आज की जाने वाले घोषणा में रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और अन्य संबंधित निर्णय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आरबीआई गवर्नर ने वर्तमान घरेलू और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा की। बता दें कि बहुत से अर्थशास्त्रियों का मानना था कि रेपो रेट में एक चौथाई अंक या 25 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि हो सकती है।

आरबीआई ने महंगाई का अनुमान घटाया

वित्त वर्ष 2024 के लिए आरबीआई ने महंगाई दर का अनुमान 5.3 फीसदी से घटाकर 5.2 फीसदी कर दिया है. पूरे साल की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 के लिए महंगाई दर का अनुमान इस प्रकार है-

>>  वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में महंगाई दर 5.1 फीसदी

>>  इसी वित्त वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही में महंगाई दर 5.4 फीसदी

>>  वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में महंगाई दर 5.4 फीसदी

>>  वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में महंगाई दर 5.2 फीसदी

ओपेक द्वारा कच्चे तेल में कटौती से बुरा असर

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने को 2023-24 की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए कहा कि तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के कच्चे तेल के उत्पादन को घटाने के फैसले से मुद्रास्फीति का परिदृश्य गतिशील बना हुआ है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सामान्य मानसून के बीच यदि कच्चे तेल के दाम औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल रहते हैं, तो चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहेगी।

क्या आ गई कोरोना की अगली लहर ? एक दिन में दर्ज हुए 4 हजार से भी ज्यादा मामले

देश में एक बार फिर कोरोना मामले डराने लगे हैं। कोरोना को लेकर सावधान रहने की जरूरत है और गाइडलाइंस का पालन करना भी, क्योंकि आज यानी बुधवार 5 अप्रैल को एक बार फिर से इस साल कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए बुलेटिन के मुताबिक पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना से संक्रमित 4,435 नए मरीज मिले हैं।

इसके साथ ही पूरे देश में अब कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 23,091 हो गए हैं। कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के साथ ही अब मौत के मामले भी हर दिन रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। बता दें कि दिल्ली में बीते दिन (4 अप्रैल) एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई. वहीं, महाराष्ट्र में 711 मामले सामने आने के साथ ही 4 लोगों ने कोरोना के कारण दम तोड़ दिया है। वहीं, उत्तराखंड में भी कोरोना ने टेंशन बढ़ा दी है।

24 घंटे में 15 मौतें, चार दिन में 40 ने गंवाई जान

कोरोना से होने वाली मौतें भी बढ़ गईं हैं। पिछले 24 घंटे के अंदर 15 लोगों ने जान गंवा दी। इनमें चार-चार केरल और महाराष्ट्र में मौतें हुईं। छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पुडुचेरी और राजस्थान में एक-एक कोरोना संक्रमित ने जान गंवा दी। अब तक संक्रमण के चलते कुल पांच लाख 30 हजार 916 मौतें हो चुकी हैं।

यूपी में कोरोना जांच का दायरा बढ़ा रहे – डिप्‍टी सीएम बृजेश पाठक

यूपी के डिप्‍टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा है कि यूपी में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए हम कोरोना जांच का दायरा बढ़ा रहे हैं। यूपी के डिप्‍टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा है कि अब कोई चिंताजनक स्थिति नहीं है। हम स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और चिकित्सा अधिकारियों को पूरी तरह से सतर्क कर दिया गया है। कोई घबराहट की स्थिति नहीं है। 12-13 अप्रैल को मॉक ड्रिल करेंगे।

कोरोना के मामलो के बीच वकीलों को वर्चुअली पेश होने की छूट

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए वकीलों को वर्चुअली पेश होने की छूट दी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच वकील वर्चुअली सुनवाई के लिए पेश हो सकते हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें अखबारों के माध्यम से पता चला है कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। वकील हाइब्रिड मोड से सुनवाई में शामिल हो सकते है।

कैसी रही पॉजिटिविटी दर ?

कोविड के कारण बढ़े केस में पॉजिटिविटी रेट (प्रति 100 टेस्ट में पॉजिटिव सैंपल) भी 15 दिनों में 0.6 से बढ़कर 1.1 हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा, हम वायरस के संचरण को खत्म करने के लिए ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। प्रत्येक सकारात्मक मामले के लिए लगभग 50 व्यक्तियों का परीक्षण किया जा रहा है। लोगों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना शुरू करना चाहिए।

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मीडियावन चैनल को मिलेगा लाइसेंस,सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक स्वतंत्र प्रेस महत्वपूर्ण

देश की सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम न्यूज चैनल मीडियावन पर केंद्र सरकार के लगाए गए बैन को यह कहते हुए हटा दिया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर देश के नागरिकों के अधिकार नहीं कुचल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम न्यूज चैनल की विशेष याचिका में यह आदेश पारित किया।

खबर के मुताबिक सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने केंद्र सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। जिसमें चैनल को बैन करने की बात के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया गया था। याचिका को सुनते हुए कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा के दावे हवा में नहीं किए जा सकते हैं, इसके समर्थन में ठोस सबूत होने चाहिए।

मजबूत लोकतंत्र के लिए एक स्वतंत्र प्रेस आवश्यक- सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने आज इस मामले पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए एक स्वतंत्र प्रेस आवश्यक है। सरकार की नीतियों की आलोचना व अभिव्यक्ति की आजादी को प्रतिबंधित करने का आधार नहीं हो सकता। प्रेस की सोचने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है।

किसी मीडिया संगठन के आलोचनात्मक विचारों को प्रतिष्ठान विरोधी नहीं कहा जा सकता है। जब ऐसी रिपोर्ट लोगों और संस्थाओं के अधिकारों को प्रभावित करती हैं, तो केंद्र जांच रिपोर्ट के खिलाफ पूर्ण छूट का दावा नहीं कर सकता है। लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को उठाया नहीं जा सकता।

सरकार की नीतियों की आलोचना करना राष्ट्रविरोधी नहीं – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि केवल ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का आह्वान करके सभी सामग्री को गुप्त नहीं बनाया जा सकता है। अदालतें एक दस्तावेज़ से संवेदनशील हिस्सों को हटा सकती है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने के लिए न्यायिक कार्यवाही के दौरान इसे दूसरे पक्ष को बता सकती हैं। मीडिया द्वारा सरकार की नीतियों की आलोचना को राष्ट्रविरोधी नहीं करार दिया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला ?

मीडिया वन टीवी को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस चैनल को सिक्योरिटी क्लीयरेंस देने से मना कर दिया था। इसके बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस चैनल का ब्राडकॉस्ट लाइसेंस रिन्यू करने से मना कर दिया था। 9 फरवरी को इस कंपनी ने केरल हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी। जिसे केरल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर उनका जवाब मांगा था। जिस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अपना पक्ष दिया। इस बात पर नाराजगी जताते हुए,अदालत ने कहा, सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब देना न्याय मांग रहे याचिकाकर्ता को अंधेरे में लड़ने के लिए छोड़ देने जैसा है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ भी है।

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रामनवमी के जुलूस में बंदूक लहरा रहा लड़का, बिहार के मुंगेर से गिरफ्तार

हावड़ा में रामनवमी की रैली में हथियार ले जाते दिख रहे 19 वर्षीय सुमित शॉ को बिहार के मुंगेर के कासिम बाजार इलाके से गिरफ्तार किया गया है। हावड़ा पुलिस ने ये जानकारी दी है। सुमित शाह की गिरफ्तारी पर मुंगेर के एसपी ने कहा है कि मैं केवल इतना कह सकता हूं कि पश्चिम बंगाल पुलिस आई थी और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया।

अब अदालत की अनुमति के बाद वे गिरफ्तार युवक को हावड़ा पुलिस को सौंपेंगे। हावड़ा में शोभायात्रा के दौरान उपद्रव फैलाने के बाद आरोपी सुमित शॉ बिहार के मुंगेर जिले में अपने दोस्त के घर पर छिपकर बैठा था। हावड़ा में रामनवमी के जुलूस के दौरान उसका रिवॉल्वर लहराते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

टीएमसी ने लगाया बीजेपी पर बड़ा आरोप

टीएमसी पश्चिम बंगाल के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा है कि हावड़ा में रामनवमी के दिन हुई घटना में बीजेपी के जुलूस में एक लड़का रिवॉल्वर लिए हुए दिखाई दे रहा था। भाजपा की उकसाने की यह साजिश अब साबित हो चुकी है। हावड़ा पुलिस ने उसे बिहार के मुंगेर में गिरफ्तार किया। यह मामला सीआईडी ​​को सौंपा गया है। वहीं चंदननगर पुलिस कमिश्नर ने हिंसा के बाद हुगली जिले के रिशरा और सेरमपोरे इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी है।

हावड़ा हिंसा में बिहार से हुई गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल पुलिस ने बिहार से एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सुमित शॉ (19 वर्ष) के रूप में हुई है। दरअसल सुमित शॉ हावड़ा में निकाले गए रामनवमी के जुलूस में शामिल था और उस जुलूस में वह हथियार लेकर शामिल हुआ था। एक वीडियो फुटेज में सुमित शोभायात्रा के दौरान रिवॉल्वर हवा में लहराता दिख रहा है। वहीं बिहार से युवक की गिरफ्तारी पर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को घेरा है और भाजपा पर सुनियोजित तरीके से हिंसा कराने का आरोप मढ़ दिया है।

आपको बता दे कि हुगली में सोमवार को भी पत्थरबाजी की घटना हुई है और कुछ उपद्रवियों ने सोमवार रात को हुगली में रिशरा रेलवे स्टेशन पर पथराव कर दिया। ऐसे में रेलवे ने एहतियातन हावड़ा-बर्धमान मेन लाइन पर सभी लोकल और मेल एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

राज्यपाल की सख्त टिप्पणी

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने हिंसक घटनाओं पर कहा “हम कभी भी समाज विरोधी ताकतों को फैलने नहीं देंगे। हम गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। लोगों को शांति से रहने का अधिकार है, यह अधिकार किसी भी कीमत पर स्थापित किया जाएगा।

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नाम बदलने’ पर चीन को भारत का दो टूक जवाब, अरुणाचल प्रदेश हमारा अभिन्न अंग

अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करने के लिए चीन समय-समय पर नाकाम कोशिश करता रहता है। एक बार फिर चीन ने अरुणाचल से जुड़ी जगहों का नाम अपने नक्शे में बदला है। इस पर अब विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह की कोशिश की है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न, अविच्छेद्य अंग है। उन्होंने कहा कि आविष्कार किए गए नामों को सौंपने का प्रयास इस वास्तविकता को नहीं बदलेगा।

पहले भी ऐसी हरकत कर चुका है चीन

यह तीसरी बार है जब चीन के नागरिक मंत्रालय की ओर से अपने रिकॉर्ड में अरुणाचाल प्रदेश के नाम को बदला गया है। इससे पहले 2017 में छह और 2021 में 15 जगहों का नाम चीन ने जारी किया था। हालांकि पहले भी भारत की ओर से इसे लेकर चीन को करारा जवाब मिलता रहा है। भारत ने पहले भी चीन के इस तरह के कदम को खारिज कर दिया था। भारत ने पहले भी कहा था कि यह राज्य हमेशा भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। नाम बदलने से यह तथ्य नहीं बदल जाएगा।

चीन ने नक्शे में अरुणाचल से जुड़ी जगहों का नाम बदला

दरअसल, चीन ने एक बार फिर अरुणाचल से जुड़ी जगहों का नाम अपने नक्शे में बदला है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नए नाम जारी किए। चीन अरुणाचल पर अपना दावा करता रहा है। मंत्रालय की ओर से रविवार को 11 जगहों के आधिकारिक नाम जारी किए गए, जिसमें दो भूमि क्षेत्र, दो आवासीय क्षेत्र, पांच पर्वत चोटियां और दो नदियां शामिल हैं।

तीन भाषाओ में है अरुणाचल प्रदेश के बदले हुए नाम की लिस्ट

चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे पर फिर से जोर देने के मकसद से इस भारतीय राज्य के लिए ‘‘चीनी, तिब्बती और पिनयिन’’ अक्षरों में नामों की तीसरी सूची जारी की है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के लिए 11 स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए। जिसे वह स्टेट काउंसिल, चीन की कैबिनेट द्वारा जारी भौगोलिक नामों पर नियमों के अनुसार ‘तिब्बत का दक्षिणी भाग ज़ंगनान’ बताता है।

दलाई लामा की यात्रा के बाद बदला था नाम

साल 2017 में दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे। चीन ने उनकी इस यात्रा की आलोचना की थी और कुछ दिनों बाद पहली बार नाम को बदला था। पिछले कुछ वर्षों में चीन और भारत के संबंध तनावपूर्ण देखने को मिले हैं। 2017 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच डोकलान को लेकर स्टैंडऑफ देखने को मिला था। इसके अलावा व्यापार को लेकर भी चीन और भारत के बीच तनाव रहा है। भारत ने पिछले कई वर्षों में कई चीनी एप को बैन किया है।

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आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के साईं बाबा के खिलाफ बयान पर हुई सियासत गर्म

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के साईं बाबा को लेकर दिए बयान पर हंगामा हो गया है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की सियासत भी गरमा गई है। अब शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता राहुल कनल ने पुलिस को एक पत्र लिखा है, जिसमें बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिवसेना नेता धीरेंद्र शास्त्री द्वारा साईं बाबा को लेकर की गई टिप्पणी से नाराज हैं। बल्कि उनके बल्कि इस बयान से महाराष्ट्र की सियासत भी सुलग गई है।

साईं बाबा को लेकर महाराष्ट्र में क्यों हुई सियासत गर्म

दरअसल महाराष्ट्र में लाखों लोग हैं जो साईं बाबा को न सिर्फ मानते हैं बल्कि उनकी पूजा भी करते हैं। ऐसे में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साईं बाबा को लेकर दिए बयान पर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सांसद इम्तियाज जलील ने आचार्य पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। हमारे देश में साईं बाबा के करोड़ों भक्त हैं। उनको लेकर किसी को भी इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। आए दिन ऐसे कई बाबा हैं जो अपने आपत्तिजनक बयान को लेकर चर्चा में बने रहते है। इन बाबाओं का अंजाम होता है वह सभी को पता है।

वहीं एनसीपी (NCP) नेता जितेंद्र आव्हाड ने भी शिंदे-फडणवीस के जवाब मांगा कि वह बागेश्वर के ऐसे बयान पर क्या कार्रवाई करेंगे। जितेंद्र आव्हाड ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में सभी को महापुरुषों के अपमान करने का आमंत्रण दिया जा रहा है। जिन्होंने बागेश्वर बाबा को यहां बुलाया था वह अब साईं बाबा के विषय में अपना रुख साफ करें।

धीरेंद्र शास्त्री के बयान से जताई नाराजगी

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले और कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विक्खे पाटिल ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ‘उन्हें (धीरेंद्र शास्त्री) बाबा पर सवाल उठाने का क्या अधिकार है? अगर उन्हें किसी खास धर्म या संगठन के लिए कैंपेन करना है तो वह अपनी चार-दीवारी में रहकर यह काम करें पर ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान सांप्रदायिक हिंसा को जन्म दे सकते हैं।

साईं बाबा को लेकर क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपने एक बयान में कहा कि ‘हमारे धर्म के शंकराचार्य ने साईं बाबा को देवताओं का स्थान नहीं दिया है। शंकराचार्य की बात मानना हर सनातनी का धर्म है क्योंकि वह हमारे धर्म के प्रधानमंत्री हैं। कोई भी संत…चाहे हमारे धर्म के हों या फिर कोई और हों…वे संत, युगपुरुष और कल्पपुरुष हो सकते हैं लेकिन भगवान नहीं।’ उन्होंने कहा कि ‘साईं बाबा संत हो सकते हैं, फकीर हो सकते हैं मगर भगवान नहीं हो सकते हैं। यह बोलना विवाद का विषय हो जाएगा लेकिन यह बोलना भी जरूरी है कि शेर की खाल पहन लेने से कोई गीदड़ शेर नहीं हो जाता है।

भड़के साईं भक्तों ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को लेकर क्या कहा ?

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर शिरडी सहित पूरे राज्य से तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। शिरडी के ग्रामीणों और साईं भक्तों ने धीरेंद्र शास्त्री से माफी मांगने की मांग की है। शिरडी के ग्रामीणों का कहना है कि हमेशा ही एक खास विचारधारा के लोग साईं बाबा के बारे में विवादित बयान देते आ रहे हैं। साईंबाबा भगवान हैं या नहीं ये जानने और मानने के लिए हमें धीरेंद्र शास्त्री के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

कौन हैं आचार्य धीरेंद्र शास्त्री

धीरेंद्र शास्त्री की वेबसाइट के अनुसार उनका बचपन गरीबी में बीता लेकिन परिवार पूजा-पाठ करने वाला था। उनका परिवार पूजा पाठ में मिले दक्षिणा से चलता था। धीरेंद्र तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनकी बहन का नाम रीता गर्ग और भाई का नाम शालिग्राम गर्ग हैं। धीरेंद्र शास्त्री की वेबसाइट के अनुसार, ”आचार्य धीरेंद्र ने अपनी पढ़ाई बचपन में छोड़ दी थी। उनकी जिंदगी अपने भाई-बहनों को पालने और उनके खर्चे उठाने में बीता। फिर एक दिन आचार्य धीरेंद्र बालाजी महाराज की सेवा में जुट गए।

कैसे मिली आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को सफलता

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने का फायदा आचार्य धीरेंद्र को भी मिला है। उनके वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे जिसके कारण लोगों ने उन्हें पहचानना शुरू किया। धीरेंद्र ये विडियो यू-ट्यूब से लेकर वॉट्स ऐप और फिर संस्कार चैनल के ज़रिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने लगे। आज आलम ये है कि शायद ही कोई उन्हें नहीं पहचानता होगा। इन यूट्यूब बाबा के लगभग सभी वीडियोज को लाखों लोगों ने देखा है। वहीं यू-ट्यूब पर 37 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स और तीन साल में व्यू 54 करोड़ से ज़्यादा हैं।

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के भक्तों में आम से खास लोग तक शामिल

बागेश्वर बाबा के दरबार में उन्हें सुनने जाने वाले भक्तों की सूची में सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि कई नेता भी शामिल हैं। सबसे पहला नाम आता है कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी का जिनकी बागेश्वर बाबा को आगे बढ़ने में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है। इसके अलावा कैलाश विजयवर्गीय, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और नितिन गडकरी, गिरिराज सिंह जैसे केंद्रीय नेता भी बाबा के कथाओं को सुन चुके हैं और इनके भक्तों की लिस्ट में शामिल हो चुके हैं।

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थोड़ी देर में सूरत पहुंचेंगे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, कोर्ट में दाखिल करेंगे याचिका

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को सूरत की ही सेशन अदालत में चुनौती देंगे। राहुल फैसले के खिलाफ अपील दायर करने आज सूरत जाएंगे। राहुल गांधी के साथ कांग्रेस शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्री और कई बड़े नेता भी सूरत जा रहे हैं। इसके अलावा उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी गुजरात जाएंगी।

राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के बड़े नेताओं का सूरत जाना शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। सूरत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत ने ‘मोदी सरनेम’ को लेकर राहुल की ओर से की गई एक टिप्पणी के संबंध में दायर आपराधिक मानहानि के मुकदमे में उन्हें 23 मार्च को दोषी करार देते हुए 2 साल की जेल और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। कोर्ट द्वारा 2 साल की सज़ा सुनाए जाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने उन्हें संसद सदस्यता के लिए अयोग्य कर दिया था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी सूरत में रहेंगे मौजूद

ऐसे में कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी मेट्रोपोलिटन अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल करने के लिए सत्र अदालत में मौजूद रहेंगे। उनके वकील किरीट पानवाला ने कहा, राहुल गांधी दोपहर करीब 3 बजे अपील दाखिल करने के लिए सूरत में सत्र अदालत पहुंचेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी जब यहां पहुंचेंगे, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी सूरत में मौजूद रहेंगे।

राहुल गांधी के पोस्टर से पटी सूरत की सड़कें

राहुल गांधी के सूरत आने से पहले यहां एयरपोर्ट से लेकर कोर्ट तक का रास्ता गांधी परिवार के पोस्टर्स से पटा पड़ा है। कांग्रेस के इस कदम को एक तरह के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच कोर्ट के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है और कोर्ट परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

अडानी के मुद्दे को छोड़ेंगे नहीं राहुल गांधी

राहुल गांधी इस मुद्दे के जरिये जनता को यह भी संदेश देने की कोशिश कर रहे है कि वो क्रोनी कैपिटलिज्म के मुद्दे पर सरकार के तमाम हमलों को सहते हुए भी अडानी का मुद्दा उठाते रहेंगे। यही वजह रही कि मोदी सरनेम मामले में दोषी करार दिये जाने के राहुल गांधी जब प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए तो उन्होंने अडानी का मुद्दा उठाया। कांग्रेस इस मुद्दे को ऐसे प्रोजेक्ट करना चाह रही है कि बकौल कांग्रेस बड़े उद्योगपतियों को सरकार की ओर से मिल रहे अनुचित फेवर पर सवाल उठाने के लिए सत्ता पक्ष कांग्रेस की टॉप लीडरशिप को टारगेट कर रहा है।

अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी – किरण रिजिजू

कानून मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘अपील दायर करने राहुल गांधी सूरत जा रहे हैं। इसके लिए व्यक्तिगत रूप से उन्हें जाने की आवश्यकता नहीं है। आमतौर पर कोई भी अपराधी व्यक्तिगत रूप से नहीं जाता है। उनके साथ चल रहे नेताओं और सहयोगियों के एक प्रेरक समूह के साथ उनका व्यक्तिगत रूप से जाना केवल एक नाटक है। राहुल गांधी जो कर रहे हैं वह भी अपीलीय अदालत पर दबाव बनाने की बचकानी कोशिश है। देश की सभी अदालतें ऐसे हथकंडों से अछूती हैं।

अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर बोला हमला

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पिछड़ों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। बार-बार राहुल ने पिछड़े वर्ग का अपमान किया। दुख इस बात का है कि इसके बावजूद राहुल ने माफी मांगने की बजाय दबाव बनाने का काम किया। जब तीन वर्ष थे, तब तो इनके साथ कोई नहीं गया। पूर्व में नरसिम्हा राव जी, पी चिदम्बरम, डीके शिवकुमार जी जेल गए, लेकिन तब तो उनके साथ कोई नहीं दिखा। क्या एक परिवार संविधान, संसद और देश से बड़ा हो गया ?

हिमाचल के सीएम का रिजिजू पर पलटवार

कानून मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं बना सकता। हम सूरत जा रहे हैं। कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है और राहुल गांधी हमारी पार्टी के बड़े नेता हैं। यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं है। हम उनके साथ खड़े हैं।

खरगे बोले- हम सरकार के खिलाफ लड़ सकते हैं

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम अदालत के फैसले पर बहस नहीं कर सकते लेकिन हम केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ सकते हैं। वे (केंद्र) अडानी विवाद में जेपीसी नहीं बनाना चाहते। उनकी योजना है कि सदन न चले…।

मैं अपने नेता के साथ जा रहा हूं – सीएम भूपेश बघेल

कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘मैं अपने नेता (राहुल गांधी) के साथ जा रहा हूं, यह न्यायपालिका पर दबाव कैसे हो सकता है ? वे (भाजपा) पश्चिम बंगाल और बिहार में हुड़दंग कर रहे हैं। अभी तक पीएम मोदी और अमित शाह की ओर से कोई अपील नहीं आई है। इनकी ट्रेनिंग ही यही है। ये लोग सिर्फ दंगा करवाते हैं।

हिरासत में कांग्रेस के कई कार्यकर्ता

कांग्रेस नेता राहुल के समर्थन में भरूच से सूरत जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका और हिरासत में लिया। सूरत की सेशन कोर्ट के बाहर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। कांग्रेस कार्यकर्ता ने राहुल के समर्थन में हाथों में पोस्टर लिए हुए हैं।

राहुल गांधी के साथ ये नेता रहेंगे मौजूद –

1 >> प्रियंका गांधी

2 >> केसी वेणुगोपाल

3 >> अशोक गहलोत

4 >> भूपेश बघेल

5 >> सुखविंदर सुक्खू

6 >> दिग्विजय सिंह

7 >> कुमारी शैलजा

8 >> पवन के. बंसल

9 >> तारिक अनवर

10 >> अविनाश पांडे

11 >> आनंद शर्मा

12 >> हरीश रावत

13 >> सुब्बीरामी रेड्डी

14 >> रघु शर्मा

15 >> भक्त चरण दास

16 >> सुखजिंदर सिंह रंधावा

17 >> मनीष चतरत

18 >> देवेंद्र यादव

19 >> माणिकराव टकरे

20 >> नाना पटोले

21 >> बाला साहेब थोराट

read more : मंदिर के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, बावड़ी में गिरकर हुई थी 36 लोगों की मौत

मंदिर के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, बावड़ी में गिरकर हुई थी 36 लोगों की मौत

इंदौर में मंदिर हादसे के बाद प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। पटेल नगर के श्री बेलेश्वर महादेव मंदिर के अवैध निर्माण को आज तोड़ने की कारवाई की गई है। नगर निगम की टीम ने बुलडोजर लेकर अवैध निर्माण को ढहाया। इस कार्रवाई में 5 पोकलेन मशीन लगी थीं और जिला प्रशासन पुलिस विभाग सहित नगर निगम के 250 से अधिक अधिकारी ओर कर्मचारियों ने मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।

मंदिर तोड़ने का बजरंग दल कार्यकर्ता विरोध करने पहुंचे, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई प्रभावित नहीं हुई। मौके पर भारी पुलिस फोर्स की तैनाती भी की गई। बता दें कि रामनवमी के दिन के मंदिर की बावड़ी में हुए हादसे में 36 लोगों की जान चली गई थी।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दिए थे सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कड़े निर्देश के बाद सोमवार की सुबह पटेल नगर के निर्माणाधीन मंदिर और बावड़ी पर कार्रवाई की गई जिसमें भारी पुलिस बल के साथ पहुंची नगर निगम की टीम ने निर्माणाधीन मंदिर के हिस्से को तोड़ने के साथ पुराने मंदिरों से मूर्तियों की शिफ्टिंग कर दी। रविवार को ही मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को दो टूक कहा था कि इंदौर जैसी घटना अब कहीं नहीं होना चाहिए।

बावड़ी को मंदिर से निकले मलबे से भरा

श्री बेलेश्वर महादेव मंदिर की बावड़ी को मलबे से भर दिया गया है, जहां रामनवमी पर हुए हादसे में 36 लोगों की मौत हुई थी। नगर निगम ने उसका नामो-निशान मिटा दिया है। बावड़ी के ऊपर बने अवैध मंदिर को भी तोड़ दिया गया है। इसके अलावा नए मंदिर के ढांचे को भी जेसीबी और पोकलेन की मदद से तोड़ा गया। अवैध निर्माण तोड़ने से जो मलबा निकला, उससे बावड़ी को बंद कर दिया गया। अफसरों का कहना है कि बावड़ी में दरारें होने से उसका सरंक्षण संभव नहीं है। इस वजह से उसे भरने का ही फैसला लिया गया।

मंदिर की मूर्तियां बावड़ी के दूसरी तरफ रखी थी

पटेल नगर उद्यान का अवैध निर्माण तोड़ने के लिए नगर निगम का अमला सुबह पांच बजे मौके पर पहुंचा। 50 से ज्यादा मजदूर, तीन जेसीबी और एक पोकलेन मशीन की मदद से सुबह कार्रवाई शुरू की गई। पटेल नगर की तरफ जाने वाले मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए गए और अनावश्यक लोगों को नहीं आने दिया जा रहा थाा।

कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी तैनात था। सुबह दस बजे तक नए मंदिर के निर्माण को आधा तोड़ा जा चुका था। कार्रवाई शुरू होने से पहले बेलेश्वर मंदिर की मूर्तियों को सम्मान के साथ शिफ्ट किया गया। मूर्तियां बावड़ी के दूसरी तरफ रखी थी, वहां तक जानेे के लिए क्रेन और झूले की मदद ली गई। झूले में ही मूर्तियों को रखकर लाया गया।

ढक्कनवाला कुआं का भी अतिक्रमण तोड़ा

नगर निगम ने पटेल नगर के अलावा ढक्कनवाला कुआं से भी अतिक्रमण हटाया। इस बावड़ी पर भी एक समुदाय धार्मिक पूजा करता था। इसके अलावा सुखलिया ग्राम और गाड़राखेड़ी में भी बावड़ी से अतिक्रमण हटाए गए।

रविवार रात ही चस्पा किया गया था नोटिस

जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात 12 बजे ही प्रशासन की तरफ से नोटिस चिपकाया गया था और जेसीबी मंगा लिए गए थे। फिर सोमवार की सुबह 6 बजे कारवाई शुरू कर दी गई। हर घर के आगे पुलिस मौजूद रही। पहले निर्माणाधीन मंदिर की दीवारें तोड़ी गई और फिर आम बावडी वाले मंदिर से मूर्तियों को सम्मान के साथ हटाया गया है।

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सासाराम में नहीं थम रही हिंसा, सुबह फिर सुनाई दी धमाके की आवाज

रोहतास जिले के सासाराम में रामनवमी जुलूस के दौरान उपजे विवाद के बाद हिंसा थमने का नहीं ले रही है। सासाराम में आज सोमवार तड़के फिर तेज धमाके की आवाज सुनी गई। सोमवार सुबह 4:30 बजे सासाराम के नगर थाना क्षेत्र के मोची टोला में तेज धमाके की आवाज सुनी गई। इसके बाद यहां एसएसबी के जवानों को बुलाया गया। इस घटना में किसी के जख्मी होने की जानकारी नहीं है।

आपको बता दे कि रामनवमी के मौके पर देश के कई राज्यों में हिंसा की घटनाएं देखने को मिली थी। हालांकि, पांच दिन के बाद भी कई जगहों पर माहौल अभी भी तनावपूर्ण है। इनमें बंगाल का हुगली और झारखंड का साहिबगंज शामिल हैं। इनमें कई जगहों पर तो इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। साथ ही स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।

महिला ने 4 बदमाशों को भागते भी देखा

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज सुबह 4: 52 बजे अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने एक घर पर बम फेंक दिया। दरवाजा बंद होने के बाद बम घर के छज्जे पर बम गिर गया। तेज धमाके की आवाज सुनकर हमलोग बाहर निकले। एक महिला ने 4 बदमाशों को भागते भी देखा। धमाके के वक्त करीब 10-15 पुलिसकर्मी तैनात थे।

लोगों ने आरोप लगाया कि धमाके के वक्त पुलिस इलाके में मौजूद थी। पुलिस अगर चाहती तो बदमाशों को पकड़ सकती थी। धमाके के बाद हमलोग डरे हुए हैं। लोगों ने कहा कि पुलिस सुरक्षा तो दे रही है लेकिन पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरत रहे हैं। ड्यूटी पर होने के बाद 4 बदमाश बम धमाका कर चले गए और पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई। यह जांच का विषय है।

सासाराम में हुए विस्फोट से सहमे लोग

वहीं, बिहार के सासाराम में शुक्रवार को रामनवमी पर भड़की हिंसा के चार दिन बीत जाने के बाद भी माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। सोमवार को धमाका हुआ है। बताया जा रहा है कि ये धमाका सुबह चार बजे हुआ। इसकी आवाज इतनी तेज थी कि लोग भी दहशत में आ गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। एसएचओ संतोष कुमार ने कहा हमें तेज आवाज के बारे में पता चला, जो स्थानीय लोगों ने सुनी थी, जब हम मौके पर गए तो हमने पाया कि यह आवाज एक पटाखे से संबंधित थी। इसके अलावा और कुछ नहीं है।

सासाराम में इस घटना से फिर तनाव की स्थिति

बमबाजी की इस घटना के बाद सासाराम इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर बम निरोधक दस्ता मौते पर पहुंचा है। पुलिस ने कहा है कि घटना को जिसने भी अंजाम दिया है, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिहारशरीफ और सासाराम में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा में कई लोगों के जख्मी होने की खबर है। वहीं पुलिस ने दोनों शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी है, पुलिस की कई टीमें इलाके में गश्त कर रही हैं। पुलिस ने अब तक 109 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों से बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने खुद जानकारी ली है, साथ ही उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

बिहार पुलिस ने की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील

वहीं, बिहार पुलिस ने भी सासाराम की घटना को लेकर ट्वीट किया है। बिहार पुलिस ने ट्वीट कर बताया है कि आज प्रातः करीब 5:00 बजे सासाराम नगर थाना के करीब मोची टोला स्थित मन्नौवर राईन के घर की बाहरी दीवार पर किसी अज्ञात द्वारा पटाखा फोड़ा गया था, जिससे वहां उपस्थित लोगों में बम विस्फोट होने का अफवाह फैल गया। सूचना पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य पदाधिकारी द्वारा पहुंचकर मामले की छानबीन की गई। घर की बाहरी दीवार पर पटाखा का काला निशान मौजूद है। घटनास्थल से सूतली इत्यादि जब्त की गई है, जिसकी जांच कराई जाएगी। अफवाहों पर ध्यान न दें।

सासाराम और बिहारशरीफ में इंटरनेट सेवा बंद

हिंसा की घटनाओं के बाद सासाराम और बिहारशरीफ में इंटरनेट सेवा 4 अप्रैल तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। स्थिति पर काबू पाने के लिए दोनों शहरों में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके साथ ही सासाराम में सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस की टीम लोगों से अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने हिंसा के दौरान जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को पांच लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

साहिबगंज में माहौल बिगाड़ने की कोशिश

उधर, झारखंड के साहिबगंज में अराजक तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। जानकारी के अनुसार, साहिबगंज के पटेल चौक पर स्थित भगवान हनुमान की प्रतिमा को किसी अज्ञात ने खंडित कर दिया है। हालांकि, किसी ने इस घटना को होते नहीं देखा है, लेकिन इसको लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लोग धरने पर बैठ गए हैं। बता दें कि इससे पहले शनिवार को मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन जुलूस पर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया था। जिसे लेकर भी स्थिति काफी बिगड़ गई थी।

मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी पर उठाए सवाल

वहीं, रामनवम पर हुई हिंसा को लेकर कंग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी को जब पता चलता है कि वह कमजोर हो रही है तो वह दंगे भड़काती है और लोगों का ध्रुवीकरण करती है। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का कारनामा है।

तेजस्वी ने बीजेपी पर साधा निशाना

वहीं, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि हर एक उपद्रवी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, तेजस्वी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाईचारे को तोड़ने के किसी भी भाजपाई ‘प्रयोग’ का हमने हमेशा करारा जवाब दिया है। आगे भी देते रहेंगे। तेजस्वी ने कहा कि सद्भाव बिगाड़ने की संघी कोशिश पर प्रदेश सरकार की पैनी नज़र है।

read more : नीतीश के लिए एनडीए के दरबाजे बंद, अमित शाह ने किया तीखा हमला

नीतीश के लिए एनडीए के दरबाजे बंद, अमित शाह ने किया तीखा हमला

बिहार दौरे पर पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने नवादा में जनसभा को संबोधित करते हुये बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे की चर्चा काफी दिनों से हो रही थी। राज्य के दौरे पर पहुंचे अमित शाह ने नवादा में एक जनसभा को संबोधित कर एक तरफ चुनावी शंखनाद किया। उनके इस बयान से राजनीतिक हलचल तेज होने वाली है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की तरह तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। अमित शाह ने कहा, “आज मैं सासाराम जाने वाला था लेकिन वहां दुर्भाग्यपुर्ण घटना हुई। लोग मारे जा रहे हैं, गोलियां चल रही हैं, आंसू गैस छुट रहे हैं। मैं वहां नहीं जा पाया। आज मैंने राज्यपाल को फोन किया तो लल्लन सिंह बुरा मान गए कि आप क्यों बिहार की चिंता करते हो।”

लालू यादव को दी नसीहत

इस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव से भी कहा, “नीतीश बाबू सत्ता के लालच ने आपके लालू की गोदी में बैठने के लिए विवश कर दिया। मैंने ऐसी स्वार्थी सरकार नहीं देखी है। एक व्यक्ति को पीएम बनना है और लालू जी के बेटे को मुख्यमंत्री बनना है। लालू जी से भी कहने आया हूं कि लालू जी नीतीश जी प्रधानमंत्री बनने वाले नहीं हैं। वहां जगह खाली नहीं है और अगर मोदी जी पीएम बने तो नीतीश जी आपके बेटे को सीएम नहीं बनाएंगे।

अमित शाह का दावा- बिहार में जीतेंगे 40 की 40 सीटें

अमित शाह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटें जीतने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में कमल खिलने वाला है। 2024 में फिर से मोदी जी सभी 40 सीट जितने जा रहे हैं। शाह ने केंद्र द्वारा किए कामों का उल्लेख किया और कहा कि कश्मीर हमारा है। हमनें राम मंदिर बनाया।

तीसरी बार भी पीएम बनेगे मोदी – अमित शाह

अमित शाह ने सासाराम में सभा नहीं होने पर अफसोस जताया और कहा कि अगले दौरे में सासाराम में ही सम्राट अशोक के सम्मेलन में जरूर आएंगे। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद के साथ जाने वाली सरकार बिहार में शांति कभी नहीं ला सकती है। नीतीश जी को सत्ता के गोद में बैठने को मजबूर किया। हमारी कोई मजबूरी नहीं है जनता के बीच में जाकर सत्ता में जाएंगे। तीसरी बार भी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। बिहार की जनता गलतफहमी में नहीं है।

अमित शाह ने कहा, नीतीश कुमार ने जीवन में कई पार्टियां बदलीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार की सरकार बुरी नीयत और बुरी नीति की सरकार है। भ्रष्टाचार का B, अराजकता का A और दमन का D, इन तीनों से मिलकर ये सरकार बनी है और इसे उखाड़कर फेंक देना है। नीतीश बाबू आपने अपने जीवन में कई पार्टियां बदली हैं, कई लोगों को धोखा दिया हैं लेकिन जिस यू पी ए में लालू के साथ आप गए हैं, उसने बिहार को क्या दिया ? उन्होंने कहा कि 2009 से 2015 में बिहार को सिर्फ 50 हजार करोड़ रुपये का बजट केंद्र ने दिया था।

बिहार को फंड दे रही केंद्र सरकार – गृह मंत्री अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि बिहार के हर एक पंचायत में कोऑपरेटिव डेयरी बनेगी। केंद्र ने बिहार को 1 लाख 9 हजार करोड़ रुपये दिए। पीएम मोदी 8 करोड़ 70 लाख लाभुकों को मुफ्त अनाज बिहार में दे रहे हैं। 85 लाख किसनों को सस्ती बिजली, 1.10 करोड़ महिला को केंद्र ने गैस दिया। नवादा में रेललाइन, एनएच बनाया। मंच के बगल में रेललाइन गुजरी है। नवादा में खेती हो रही है। बिजली सुधरी है, रजौली में परमाणु क्षमता यूनिट की योजना बन चुकी है।

नालंदा, सासाराम में जानबूझकर कराया गया दंगा – सुशील मोदी

नवादा जिले के हिसुआ स्थित इंटर विद्यालय के मैदान में आयोजित जनसभा में बीजेपी की ओर से राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। सुशील मोदी ने कहा कि सासाराम में गृह मंत्री अमित शाह को जाने से रोकने के लिए जानबूझकर दंगा कराया गया। कल रात में भी बम विस्फोट हुआ, जिसमें छह लोग घायल हुए। बिहार शरीफ में कर्फ्यू की स्थिति है। तीन दिनों से बिहार शरीफ हिंसा की आग में जल रहा है। लेकिन नीतीश न तो सासाराम के दंगे को रोक पाए न ही नालंदा के दंगे को।

बिहार में भ्रष्टाचार की सरकार – नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा

हिसुआ की जनसभा में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया है कि बिहार में भ्रष्टाचार की सरकार चल रही है। बिहार के नवादा में पांच लोगों की हत्या हुई थी। उस हत्या को आत्महत्या बताया गया और इस मामले की कोई जांच नहीं की गई। बिहार में भ्रष्टाचार के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने सरकार बनाई है।

read more : टीम इंडिया के दिग्गज क्रिकेटर सलीम दुर्रानी का हुआ निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

टीम इंडिया के दिग्गज क्रिकेटर सलीम दुर्रानी का हुआ निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

भारतीय क्रिकेट जगत के लिए रविवार को एक दुखद खबर सामने आई। भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सलीम दुर्रानी का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वह कैंसर से जूझ रहे थे। सलीम ने गुजरात के जामनगर में आखिरी सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सलीम दुर्रानी के निधन पर दुख जताया है। हालांकि, वह लंबे समय से बीमार थे और कैंसर जैसी जटिल बीमारी से जूझ रहे थे। उनके बारे में अगर खास बात जान लें तो वह पहले ऐसे क्रिकेटर थे जिन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला था। वह 1960 में खेल की दुनिया के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजे गए थे। साथ ही क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी हाथ आजमाया था।

अफ़ग़ानिस्तान में हुआ था जन्म

सलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था। हालांकि, जब वह सिर्फ आठ वर्ष के थे तब उनका परिवार पाकिस्तान के कराची जाकर बस गया था। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय दुर्रानी का परिवार भारत आ गया था। धीरे-धीरे सलीम की क्रिकेट में दिलचस्पी बढ़ी। 1960-70 के दशक में सलीम ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से पहचान बनाई थी। वह भारत के दिग्गज ऑलराउंडर्स में से एक रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि मैच में जब भी फैंस सलीम से छक्का लगाने की मांग करते थे, वह छक्का जड़ देते थे। इसी तरह सलीम फैंस के खास बन गए थे।

फैंस के साथ सलीम दुर्रानी का खास रिश्ता

प्रथम श्रेणी मैचों की बात करें तो उन्होंने 33.37 की औसत से 8,545 रन बनाए। इनमें 14 शतक शामिल हैं। अपना दिन होने पर सलीम दुर्रानी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की क्षमता रखते थे। हालांकि, एक गेंदबाज के रूप में उन्होंने पहली बार भारतीय टीम में खेलते हुए अपनी पहचान बनाई थी। सलीम का फैंस के साथ भी खास रिश्ता था। एक बार कानपुर में एक मैच के लिए टीम से बाहर किए जाने के बाद फैंस ने अपना गुस्सा व्यक्त किया था। वह बैनर और प्लेकार्ड के साथ मैदान में पहुंचे थे, जिस पर लिखा था- ‘नो दुर्रानी, नो टेस्ट!’। घरेलू क्रिकेट में सलीम दुर्रानी ने ढाई दशक के करियर के दौरान गुजरात, राजस्थान और सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया।

इंग्लैंड पर ऐतिहासिक जीत में सलीम दुर्रानी निभाई थी अहम भूमिका

सलीम दुर्रानी ने 1961-62 में इंग्लैंड पर ऐतिहासिक 2-0 की सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने इस पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में जमकर विकेट लिए थे। भारत ने कोलकाता और मद्रास में दो टेस्ट जीते थे। कोलकाता टेस्ट में सलीम ने आठ और मद्रास टेस्ट में 10 विकेट लिए थे। इसके अलावा उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐतिहासिक पोर्ट ऑफ स्पेन मैच में भारत की जीत में भी अहम किरदार निभाया था। इस मैच में सलीम ने तब के महान बल्लेबाज क्लाइव लॉयड और सर गारफील्ड सोबर्स के विकेट झटके थे।

फिल्म में भी काम कर चुके सलीम दुर्रानी

सलीम ने 1960 में मुंबई टेस्ट में डेब्यू किया था। वह छक्के लगाने के लिए ज्यादा मशहूर हैं। सलीम ने आखिरी टेस्ट फरवरी 1973 में मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सलीम ने फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। इंडस्ट्री में आते ही उन्हें डेब्यू का मौका मिला उस वक्त की सबसे खूबसूरत और लीडिंग एक्ट्रेस के साथ। सलीम दुर्रानी ने बॉलीवुड फिल्म ‘चरित्र’ से अपने फिल्मी करियर का डेब्यू किया। इस फिल्म में उनके साथ एक्ट्रेस परवीन बॉबी थीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने शोक व्यक्त किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को महान भारतीय क्रिकेटर सलीम दुरानी के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक ट्वीट में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- सलीम दुर्रानी जी क्रिकेट के दिग्गज थे, अपने आप में एक संस्था थे। उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैदान पर और मैदान से बाहर, वह अपनी शैली के लिए जाने जाते थे। उनके निधन से आहत हूं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। उनकी आत्मा को शांति मिले।

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कल सूरत जा सकते हैं राहुल गांधी, अपनी सजा को सूरत कोर्ट में देंगे चुनौती

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामले में दो साल की सजा के खिलाफ 3 अप्रैल को सूरत कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। राहुल को सीजेएम (CJM) कोर्ट ने हाल में ही मोदी सरनेम के मानहानि केस में सजा सुनाई थी। सूत्रों के अनुसार फैसले को चुनौती देने वाली याचिका तैयार है। कल राहुल कोर्ट में दाखिल कर सकते हैं। वह मानहानि मामले में सजा पर रोक की मांग करेंगे। सजा पर रोक लगी तभी उनकी संसद सदस्यता बहाल हो सकेगी।

क्या है मामला ?

दरअसल, राहुल गांधी पर 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी सरनेम’ पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसी मामले में राहुल पर गुजरात के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था। जिसपर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों सूरत की एक अदालत ने अपना फैसला सुनाया। राहुल गांधी को इस मामले में दोषी छठराते हुए दो साल की सजा सुना दी। नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अगले ही दिन लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया।

राहुल गांधी को सजा, मची राजनीतिक उथल-पुथल

बीजेपी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की कानूनी टीम ने कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए पर्याप्त मुस्तैदी नहीं दिखाई क्योंकि पार्टी कर्नाटक चुनाव से पहले इसे भुनाने का लक्ष्य बना रही थी। सवाल उठे रहे थे कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की गिरफ्तारी पर तत्काल कार्रवाई हुई। लेकिन राहुल गांधी की सजा के बाद नहीं हुई। इसपर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि कानूनी टीम इस पर काम कर रही है। उन्होंने कहा था, हम जानते हैं कि कहां और कब अपील करनी है क्योंकि हमारे पास 30 दिनों का समय है।

राहुल गांधी को लेकर बीजेपी को घेरने की रणनीति

इससे पहले ये भी बात सामने आई थी कि कांग्रेस ने अपने नेता राहुल गांधी को संसद से अयोग्य ठहराए जाने के बाद एक महीने के लंबे आंदोलन की योजना बनाई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा से राहुल गांधी की अयोग्यता 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को घेरने के लिए प्रमुख मुद्दों में से एक होगी।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर उठाए सवाल

वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि कांग्रेस कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा था एक कानूनी टीम उस मामले पर काम कर रही है, जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को गुजरात की एक अदालत ने दोषी ठहराया था। जिसके बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। खरगे ने कहा था कि पार्टी राजनीतिक और कानूनी रूप से मामले का सामना करने के लिए तैयार है। कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी की अयोग्यता को प्रतिशोध करार दिया।

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सासाराम और बिहार शरीफ में तनाव जारी, इंटरनेट बंद-धारा 144 लागू

बिहार के सासाराम और नालंदा जिले में राम नवमी के आयोजन के दौरान उत्पन्न तनाव के मद्देनजर दोनों शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई। नालंदा के बिहार शरीफ में हिंसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है। इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। बिहार पुलिस का कहना है कि नालंदा में 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सासाराम में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों जिलों में कुल 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सासाराम में 12 लोग हुए घायल

सासाराम में घटना की शुरुआत नवरत्न बाजार से हुई, जो कई मोहल्लों में फैल गई। पथराव में 12 लोग घायल हो गए। वहीं, कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। उपद्रवियों ने छिटपुट आगजनी भी शुरू कर दी। इस दौरान एक घायल सिपाही और एक स्थानीय निवासी को इलाज के लिए सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

बिहार शरीफ में धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद

वही, नालंदा के बिहार शरीफ के गगंडीवां मोहल्ले के पास दो गुटों में भिड़ंत हो गई। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग हुई। इसमें 14 लोगों के घायल होने की खबर है। इस घटना से गुस्साई भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों में तोड़फोड़ कर आग लगाने का भी प्रयास किया। मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने लोगों को समझ-बुझाकर हालात को काबू में किया। आगे हालात और नहीं बिगड़े इसे देखते हुए प्रशासन ने सासाराम और नालंदा में धारा 144 लगाने के साथ ही अगले आदेश तक के लिए इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी है। दोनों जिलों में सोशल मीडिया पर विशेष नजर रखी जा रही हैं।

बिहार शरीफ छावनी में तब्दील ,माहौल को शांत रखने की अपील

पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है एवं अतिरिक्त बल को भी बुलाया गया है। घटनास्थल पर डीएम-एसपी से लेकर कई वरीय अधिकारी मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है लोगों को चिन्हित करके उनकी गिरफ्तारी की जाएगी रही है एवं माहौल को शांत करने की अपील भी की जा रही है।

लूटपाट-हंगामा और आगजनी

जानकारी के मुताबिक पहले पत्थरबाजी हुई फिर कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया गया। दो पहिया से लेकर बड़े वाहनों को भी आग के हवाले किया गया, साथ ही कई दुकानों में भी आग लगाई गई। इसके साथ ही कुछ दुकानों को लूटने की भी खबर मिली है। बिना काम के घर से बाहर निकलने वाले लोगों को रोका जा रहा है। लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। पटना के प्रमंडल आयुक्त कुमार रवि, पुलिस अधीक्षक सहित वरीय अधिकारी जगह-जगह पर जाकर क्षतिग्रस्त जगहों का मुआयना कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह नगर है नालंदा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के बिहार शरीफ में भी गगन दीवान, मंसूर नगर और नबी नगर में झड़पें होने के बाद धारा-144 लागू कर दी गई है। यहां हुई झड़पों में 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं और कई दुकानों तथा वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया है। नालंदा के जिलाधिकारी शशांक सुभांकर ने कहा,‘‘हम लोगों से संयम बरतने की अपील करते हैं। हम उपद्रवियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रहे हैं।
और वही रामनवमी जुलूस पर बिहार में हिंसा अब धीरे-धीरे भारत के अन्य राज्यों में भी फैल रही है।

गुजरात और महाराष्ट्र में भी हिंसा

बिहार और झारखंड के अलावा गुजरात के वडोदरा, महाराष्ट्र के संभाजीनगर में रामनवमी के जुलूस को लेकर हिंसा हुई। इन जगहों पर पत्थरबाजी के साथ आग भी लगाए गए थे। इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी की। कई जगहों पर महौल शांत करने के लिए पुलिस को सुरक्षा भी बढ़ानी पड़ी।

read more : आईपीएल में इस तरह करेगा काम इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल, हुआ बड़ा बदलाव

आईपीएल में इस तरह करेगा काम इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल, हुआ बड़ा बदलाव

इस बार आईपीएल 2023 में कई सारे बदलाव आपको देखने के लिए मिलेंगे। इसमें सबसे ज्‍यादा चर्चा जिस नए नियम की हो रही है, वो है इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल। ये नियम ऐसा है कि एक झटके में मैच का पांसा पलट सकता है। अब आईपीएल में प्‍लेइंग इलेवन नहीं, बल्कि प्‍लेइंग इलेवन 12 बोलना ज्‍यादा बेहतर होगा। क्‍योंकि अब 12 खिलाड़ी खेलते हुए नजर आएंगे। वैसे तो इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल ऑप्‍शनल होगा, यानी कप्‍तान चाहें तो इसका इस्‍तेमाल करें और चाहें तो न भी करें।

लेकिन ये ऐसा नियम है, जो ज्‍यादातर मैचों में होता हुआ नजर आएगा। हालांकि पहले ये खबरें आ रही थीं कि इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल पारी के 14वें ओवर से पहले पहले इस्‍तेमाल में लाना होगा, साथ ही एक टीम दो पारियों में से किसी भी एक पारी में इसका इस्‍तेमाल कर सकेंगी, लेकिन अब इसको लेकर तस्‍वीर साफ हो गई है। इससे कप्‍तानों ने काफी राहत की सांस ली होगी।

टॉस के बाद कर सकेंगे अपनी प्‍लेइंग इलेवन का ऐलान

बीसीसीआई की ओर से इस बार आईपीएल में इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल शुरू होने जा रहा है। इससे पहले कि हम आपको बताएं कि इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल क्‍या है, उससे पहले ये जान लीजिए कि इस बार के आईपीएल में कप्‍तानों के पास ऑप्‍शन होगा कि वे टॉस के बाद अपनी प्‍लेइंग इलेवन का ऐलान करें। इससे पहले होता ये था कि जब टॉस होने वाला होता था, उससे पहले ही कप्‍तानों को अपनी प्‍लेइंग इलेवन दूसरे कप्‍तान के साथ शेयर करनी होती थी।

ऐसे में टॉस होने के बाद अगर कप्‍तान चाहे तो भी अपनी प्‍लेइंग इलेवन में प्‍लेइंग कंडीशन के हिसाब से बदलाव नहीं कर सकता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दोनों टीमों के कप्‍तान जब टॉस के लिए जाएंगे, जो उनके हाथ में दो शीट होगी। टॉस से पहले उन्‍हें नहीं बताना होगा कि उनकी आज की टीम कैसी रहेगी। लेकिन जैसे ही टॉस हो जाएगा और ये साफ हो जाएगा कि कौन सी टीम पहले बैटिंग कर रही है, दो में से एक शीट कप्‍तान विरोधी वाली टीम के कप्‍तान को सौंप देगी। इससे ये फायदा होगा कि टीम पहले बैटिंग करेगी तो एक प्‍लेइंग इलेवन काम करेगी, वहीं अगर टीम बाद में बैटिंग करेगी तो उसके हिसाब से दूसरी प्‍लेइंग इलेवन का ऐलान किया जा सकता है।

इस तरह काम करेगा इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल

अब आपको बताते हैं कि इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल कैसे काम करेगा। ये ऐसा नियम है, जो एक टीम को टॉस के बाद XI से एक खिलाड़ी को बदलने के लिए एक पारी में किसी भी समय पर एक इम्पैक्ट प्लेयर लाने की अनुमति देता है। कप्‍तान ने अगर अपनी प्‍लेइंग इलेवन में चार विदेशी खिलाड़ी पहले ही शामिल कर लिए हैं तो इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर के तौर पर आने वाला खिलाड़ी भारतीय ही होगा। लेकिन अगर पहले घोषित की गई प्‍लेइंग इलेवन में तीन विदेशी खिलाड़ी हैं तो कप्‍तान चाहे तो भारतीय खिलाड़ी और चाहे तो विदेशी खिलाड़ी को इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर के तौर पर शामिल कर सकता है।

ऐसा नियम इसलिए लाया गया है ताकि भारतीय प्‍लेयर्स को ज्‍यादा से ज्‍यादा मैच खेलने का मौका मिल सके। पहले खबरें इस तरह की आ रही थी कि पारी के 14 वें ओवर से पहले कभी भी टीमें इसका इस्‍तेमाल कर सकती हैं, लेकिन अब पता चला है कि पारी के 20 ओवर में किसी भी वक्‍त किसी भी पारी में इसका इस्‍तेमाल कर सकती हैं। यानी पहले से 20 ओवर तक कभी भी ये प्रयोग में लाया जा सकता है।

हालांकि इतना जरूर है कि प्‍लेइंग इलेवन के ऐलान के वक्‍त टीमों को अपने उन चार चार प्‍लेयर्स के नाम देने होंगे जो इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर के रूप में इस्‍तेमाल किया जा सकते हैं। उन चार में से किसी एक खिलाड़ी को कभी भी खेलने के लिए मैदान में भेजा जा सकता है। बाकी तीन खिलाड़ी नहीं खेल पाएंगे। हां, ये भी ध्‍यान रखना होगा कि एक टीम इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर रूल का इस्‍तेमाल मैच के दौरान केवल एक ही बार कर सकेगी।

read more : इंदौर में रामनवमी पर बड़ा हादसा, मंदिर की बावड़ी धंसी, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

इंदौर में रामनवमी पर बड़ा हादसा, मंदिर की बावड़ी धंसी, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

मध्य प्रदेश (रविंद्र तिवारी) के इंदौर में रामनवमी पर बड़ा हादसा हो गया। स्नेह नगर के पास पटेल नगर में श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर बावड़ी की छत धंसने से 25 से अधिक लोग बावड़ी में गिर गए। बावड़ी में गिरे लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हादसे के बाद भी काफी देर तक मौके पर फायर बिग्रेड, एम्बुलेंस और 108 गाड़ियां नहीं पहुंची। कुछ लोगों को जैसे-तैसे बाहर निकाला गया। गिरने वाले लोगों के परिजन बदहवास हैं। अब तक दस लोगों को निकाला जा चुका है।

कैसे हुआ हादसा

दरअसल, मंदिर में ही एक बावड़ी है, जिसकी छत धंस गई। उस समय मंदिर में हवन चल रहा था। लोग छज्जे पर बैठे थे। हवन की वजह से भीड़ भी अधिक थी।इस दौरान ऊपर की जमीन धंस गई। इस वजह से 25 से अधिक लोगों की गिरने की आशंका व्यक्त की जा रही है। बावड़ी के अंदर कितना पानी है, ये अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। राहत की बात यह है कि स्थानीय लोगों ने तत्काल सक्रियता दिखाई और करीब दस लोगों को बाहर निकाल लिया।

बावड़ी में लोगों को पहुंचाया जा रहा ऑक्सीजन

घटनास्थल की स्थिति काफी खराब है। हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अन्य लोगों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई की गई है। हादसे के बाद से ही लोगों में काफी आक्रोश है। अब तक कई बच्चे और महिलाएं बावड़ी में ही फंसे हुए हैं।

बावड़ी में फसे लोगो को रस्सी से खींचकर बाहर निकालने का प्रयास जारी

पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर समेत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। मंदिर से सभी श्रद्धालुओं को बाहर कर दिया गया है। एंबुलेंस भी पहुंच गई है। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि जो लोग बाउडी में गिरे हैं, उनकी स्थिति कैसी है। उन्हें रस्सी से खींचकर बाहर निकालने का प्रयास भी किया जा रहा है।

तंग गलियों के कारण बचाव कार्य में हो रही परेशानी

इस हादसे के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि तंग गलियां होने से राहत कार्य में थोड़ी परेशानी आ रही है। एंबुलेंस व 108 की गाड़ी निकलने में भी परेशानी हो रही है। बावड़ी में गिरे कुछ लोगों को जैसे-तैसे बाहर निकाला जा रहा है। कलेक्टर और प्रशासन की टीम सूचना मिलते ही यहां पहुंच गए।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घटना का लिया संज्ञान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बावड़ी में कुछ श्रद्धालुओं के फंसे होने की घटना का संज्ञान लिया है। सीएम शिवराज ने इंदौर के कलेक्टर और कमिश्नर से फोन पर चर्चा कर रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय, इंदौर जिला प्रशासन से निरंतर संपर्क में है। रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर अधिकारियों से जानकारी ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि नगर निगम की जेसीबी अंदर पहुंची है। एक दीवार को तोड़ा गया है, लोगों को निकालने में दीवार की वजह से दिक्कत आ रही थी। बावड़ी में 13 लोग और सुरक्षित है, जिन्हें निकाला जा रहा है। शेष लोगो को रेस्क्यू करने के तेजी से प्रयास किए जा रहे है।

हादसा होते ही मची अफरा-तफरी

बता दें, जिस वक्त मंदिर में हवन हो रहा था उस वक्त भारी भीड़ मंदिर के अंदर मौजूद थी। इस बीच जैसे ही बावड़ी धंसी तो पहले तो किसी को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। लोगों ने एक-दूसरे को पकड़कर बचने का प्रयास किया। इसके बावजूद कई लोग बावड़ी में गिर गए।

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श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर, रामलला के दर्शन के लिए शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा..

अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। 29 मार्च 2023 से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो गई है। इसके जरिए आसमान से भक्त न सिर्फ मंदिर के मनोरम दृश्य का बल्कि पूरी अयोध्या नगरी का दीदार कर सकेंगे। यह हेलीकाप्टर सेवा यूपी पर्यटन विभाग ने शुरू की है। श्रद्धालु सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक हेलीकॉप्टर के जरिए अयोध्या धाम का दर्शन कर सकेंगे। हेलीकॉप्टर में एक बार में कुल सात लोग सफर कर सकते हैं। एक बार का सफर 8 मिनट का होगा और इसके लिए प्रत्येक श्रद्धालु को 3 हजार रुपए चुकाने होंगे। टिकट बुकिंग के लिए पहले से अप्लाई करना पड़ेगा। आसमान से अयोध्या में सरयू नदी, रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी और अयोध्या के अन्य मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे।

हेरिटेज एविएशन पहले भी दे चूका है सेवाएं

इस पूरी सेवा को देख रहे राज्य पर्यटन विकास निगम के अधिकारी अक्षय नागर कहते हैं कि यह 2024 में रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के पहले का रिहर्सल भी है। हेरिटेज एविएशन वैष्णो देवी, प्रयागराज और कुंभ समेत देश के कई स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुकी है। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो हेलीकॉप्टर की संख्या बढ़ाई जाएगी और यह सेवा नियमित रूप से जारी रहेगी। सुबह 9 बजे से शाम को सूर्य ढ़लने के पहले 6 बजे तक यह सेवा यात्रियों को मिलेगी। अयोध्या के लिए यह पहली और सबसे बड़ी शुरुआत है।

पहली बार अयोध्या में हेलीकॉप्टर से होंगे रामलला दर्शन

राज्य पर्यटन विकास निगम अधिकारी अक्षय नागर ने आगे कहा कि रामनवमी के अवसर पर पहली बार अयोध्या में हेलीकॉप्टर चलाया जाएगा। एक बार में 7 लोग हेलीकॉप्टर पर सफर कर सकेंगे और एक व्यक्ति का किराया ₹3000 होगा। टिकट की बुकिंग अभी से ही प्रारंभ हो गई है। हेलीकॉप्टर चलाने का प्लान राम भक्तों की इच्छा पर निर्भर करेगा, क्योंकि अभी इसे 15 दिनों तक चलाया जाएगा। लेकिन बढ़ते श्रद्धालुओं की अगर मांग होती है तो यह निरंतर चलता रहेगा। यह सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक चलाया जाएगा। पहले यह कैलाश मानसरोवर में किया है, कुंभ में किया है, माता वैष्णो देवी में किया गया है और अब अयोध्या में चलाया जाएगा।

श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवा को लेकर उत्साहित

दूरदराज से भगवान राम की नगरी से अयोध्या पहुंच रहे श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवा को लेकर उत्साहित हैं और प्रशंसा कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान राम की नगरी में यह एक अनूठी सुविधा होगी और इससे पर्यटकों और वृद्धजनों समेत हर व्यक्ति को बहुत लाभ मिलेगा।

योगी सरकार श्रद्धालुओं का रख रही खास ध्यान

योगी सरकार की मंशा है कि भगवान राम की नगरी को पर्यटन की दृष्टि से विश्व के मानचित्र पर स्थापित किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वह हर एक काम कर रहे हैं। जिससे रामनगरी आने वाले श्रद्धालुओं को हर एक सुविधा उपलब्ध मिले और राम नगरी की गरिमा बढ़े। योगी सरकार की इस पहल का अयोध्या में आने वाले श्रद्धालु भी प्रशंसा कर रहे हैं।

read more : राहुल गांधी मामले पर पहले अमेरिका और अब जर्मनी ने की टिप्पणी

राहुल गांधी मामले पर पहले अमेरिका और अब जर्मनी ने की टिप्पणी

राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने पर जर्मनी की सरकार ने बयान जारी किया है। जारी अपने बयान में जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विपक्षी नेता राहुल गांधी के मामले में न्यायिक स्वतंत्रता के मानक और मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत लागू होने चाहिए। बता दें कि राहुल गांधी मामले पर किसी यूरोपीय देश की यह पहली प्रतिक्रिया है। इससे पहले अमेरिका ने भी राहुल गांधी मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

क्या था मामला

बता दें कि मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई है। साल 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया गया था। बीते दिनों सूरत की कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई। दो साल की सजा होने के बाद कानून के मुताबिक राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई। फिलहाल राहुल गांधी जमानत पर जेल से बाहर हैं।

जर्मनी ने क्या की टिप्पणी

जर्मन विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा हमने भारतीय विपक्षी राजनेता राहुल गांधी के खिलाफ आए फैसले के साथ-साथ उनके संसदीय जनादेश के निलंबन पर भी ध्यान दिया है। हमारी जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी फैसले के खिलाफ अपील करने की स्थिति में हैं। अपील से साफ होगा कि कि फैसला कायम रहेगा या नहीं और सदस्यता निलंबन का आधार है या नहीं। हम उम्मीद करते हैं कि न्यायिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के मानकों को लागू किया जाएगा। जर्मनी के विदेश मंत्रालय के बयान के बाद अभी तक भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बात पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

अमेरिका ने भी की थी टिप्पणी ?

इस मामले पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका अपने भारतीय भागीदारों के साथ हमारे संबंधों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर भारत सरकार के साथ है। उन्होंने कहा था कि कानून और शासन और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए सम्मान किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है। इस मामले को हम भारतीय अदालतों में देख रहे हैं।

read more : हज में वीआईपी कोटा हुआ समाप्त, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हज लेकर किए बड़े बदलाव

हज में वीआईपी कोटा हुआ समाप्त, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हज लेकर किए बड़े बदलाव

केंद्र सरकार ने हज में ‘वीआईपी कोटा’ खत्म करने का फैसला किया है ताकि देश के आम लोगों को इससे फायदा हो और इस धार्मिक यात्रा में ‘वीआईपी कल्चर’ खत्म हो। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ईरानी ने यह जानकारी दी। आपको बता दे कि मुस्लिम समाज में हज यात्रा बेहद ही पाक मानी जाती है। कहा जाता है कि हज किए बिना किसी मुस्लिम का जीवन पूरा नहीं होता है।

हर मुस्लिम कोशिश करता है कि वह अपने जीवन में एक बार हज यात्रा कर सके। भारत से हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों का सरकार काफी सुविधाएं उपलब्ध कराती है और यात्री सरकार की देखरेख में ही हज पर जाते हैं। सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय समझौते के अनुसार इस साल के लिए भारत का हज कोटा 1,75,025 तय किया गया है।

हज यात्रा को लेकर किये कई बड़े बदलाव

इस बार भारत सरकार ने हज यात्रा को लेकर कई बड़े बदलाव किये हैं। अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि इस बार हज के लिए वीआईपी कोटा खत्म कर दिया गया है। इससे पहले वीआईपी लोग सरकारी खर्चे पर सऊदी अरब जाया करते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही इस बार कोई भी वीआईपी डेलिगेशन का सऊदी अरब नहीं जाएगा। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय की एक टीम सऊदी अरब के शहर मक्का और मदीना जाएगी और वहां के हालात का जायज़ा लेगी।

मुस्लिम महिलाएं बिना सगे संबंधियों के हज पर जाएंगी

उन्होंने बताया कि इस बार 4314 मुस्लिम महिलाएं इस बार बिना सगे संबधी के हज पर यात्रा पर जाएंगी। इसके साथ ही इस बार भारतीय हज यात्रियों को लेकर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर काम कर रहा है। इससे पहले अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ही अकेले काम देखता था। स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ आने से हज यात्रियों के जो मेडिकल टेस्ट प्राइवेट होते थे, वे इस बार सरकारी भी हो सकेंगे। इसके साथ ही जिन यात्रियों को वैक्सीन नहीं लग सकी है उन्हें राज्य सरकार कैम्प लगाकर सब हज यात्रियों को वैक्सीन लगवायेगी। वहां भारतीय हज यात्रियों के मद्देनजर हालात का जायज़ा लेगी। उन्होंने बताया कि हज यात्रियों के लिए यह सभी सुविधाएं फ्री में उपलब्ध होंगी।

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क्या अप्रैल से यूपीआई भुगतान होगा महंगा, 2000 से ज्‍यादा पर देना पड़ेगा 1.1% शुल्‍क

क्या यूपीआई पेमेंट महंगा होने जा रहा है ? क्या आपको अब 2000 से अधिक के पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज देना होगा ? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अगले महीने से 2000 रुपये से ज्‍यादा के यूपीआई भुगतान पर 1.1 फीसदी शुल्‍क देना होगा। मीडिया में आ रही ऐसी खबरों को सिरे से नकारते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कहा कि बैंक खाते से लेकर बैंक खाता आधारित यूपीआई भुगतान या सामान्य यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। एनपीसीआई ने एक बयान में स्पष्ट किया कि इंटरचेंज शुल्क केवल प्रीपेड भुगतान उपकरणों (पीपीआई) मर्चेंट लेनदेन के लिए लागू होते हैं और ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

पीपीआई के तहत होने वाले लेन-देन पर देना होगा चार्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपीआई का संचालन करने वाली संस्था एनपीसीआई ने अपने सर्कुलर में कहा कि 2,000 रुपये से अधिक की राशि के लिए यूपीआई पर पीपीआई का उपयोग करने से लेनदेन मूल्य का 1.1 प्रतिशत शुल्क के रूप में देना पड़ेगा। इंटरचेंज शुल्क आमतौर पर कार्ड भुगतान से जुड़ा होता है और लेनदेन को स्वीकार करने, संसाधित करने और अधिकृत करने की लागत को कवर करने के लिए लगाया जाता है। पीपीआई के तहत होने वोले मर्चेंट टू मर्चेंट लेन-देन पर 0.5 – 1.1 प्रतिशत तक शुल्क वसूले जाने का प्रस्ताव दिया गया है। जिसमें ईंधन के लिए इंटरचेंज 0.5 प्रतिशत, दूरसंचार, उपयोगिताओं/ डाकघर, शिक्षा, कृषि के लिए 0.7 प्रतिशत, सुपरमार्केट के लिए 0.9 प्रतिशत और म्यूचुअल फंड, सरकार, बीमा और रेलवे के लिए 1 प्रतिशत चार्ज लग सकता है।। ये शुल्क 1 अप्रैल, 2023 से लागू होंगे।

हर महीने यूपीआई से 8 अरब भुगतान

एनपीसीआई ने ट्वीट कर बताया कि यूपीआई के जरिये हर महीने करीब 8 अरब ट्रांजेक्‍शन होता है। इसका फायदा खुदरा ग्राहकों को मिल रहा है। यह सुविधा आगे भी मुफ्त बनी रहेगी और खाते से खाते में लेनदेन पर किसी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब हुआ कि फोन पे, पेटीएम, गूगल पे से यूपीआई भुगतान पहले की ही तरह मुफ्त बना रहेगा।

यूपीआई लेनदन पर शुल्क लगने से पड़ेगा असर

एनपीसीआई के सर्कुलर से संकेत मिल रहे हैं कि एक अप्रैल से यूपीआई भुगतान यानी गूगल पे, फोन पे और पेटीएम के माध्यम से अगर पीपीआई का इस्तेमाल करते हुए 2,000 रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया तो इसके लिए आपको अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ सकता है। हालांकि ऐसे लेनदेन फिलहाल यूपीआई के तहत होने वाले कुल लेन-देन के महज 0.1 प्रतिशत ही हैं, ऐसे में आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

बता दें कि पिछले कुछ महीनों में सरकार की ओर से भी कई बार इस बात के संकेत दिए गए थे कि यूपीआई मुफ्त बना रहेगा। यूपीआई से भुगतान भारतीय अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में यूपीआई लेनदन पर शुल्क लगने से इस पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

क्‍या होता है पीपीआई

पीपीआई यानी प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट एक ऐसी सुविधा है कि जिसमें 10 हजार रुपये तक का लेनदेन किया जा सकता है। इस सुविधा में पहले सही रिचार्ज की तरह पैसे डाले जाते हैं और उसके जरिये सामान खरीदने या किसी को पैसे भेजने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। एनपीसीआई ने कहा है कि इसी तरह के भुगतान पर इंटरचार्ज शुल्‍क 1 अप्रैल से लिया जाएगा। अब पीपीआई के जरिये 2000 रुपये से ज्‍यादा का भुगतान किया गया। तो 1.1 फीसदी शुल्‍क देना पड़ेगा।

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कर्नाटक में बजा चुनावी बिगुल, 10 मई को एक चरण में मतदान, 13 मई को नतीजे

कर्नाटक के चुनावी बिगुल का काउंटडाउन शुरू हो गया है। चुनाव आयोग ने आज कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। कर्नाटक की 224 सीटों पर एक चरण में विधानसभा चुनाव होगा। राज्य में 10 मई को मतदान होगा और 13 मई को नतीजे आएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि राज्य में 9.17 लाख नए वोटर्स हैं जो पहली बार मतदान करेंगे। 1 अप्रैल को जिनकी उम्र 18 साल हो रही है, वे भी वोट कर सकेंगे।

224 ऐसे बूथ बनाए गए हैं, जिनमें यूथ कर्मचारी तैनात रहेंगे और 100 बूथों पर दिव्यांग कर्मचारी तैनात रहेंगे। बता दें कि कर्नाटक में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी दमखम के साथ जुटी है।

नामांकन की आखिरी तारीख 20 अप्रैल

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 13 अप्रैल गजट नोटिफिकेशन जारी होगा। नामांकन की आखिरी तारीख 20 अप्रैल होगी। 21 से 23 अप्रैल तक नामांकन की जांच होगी और उम्मीदवार 24 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। कर्नाटक में मतदान 10 मई को एक चरण में सपन्न होगा और 13 मई को नतीजे घोषित किए आएंगे। कर्नाटक विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 24 मई, 2023 को समाप्त हो रहा है। उसस पहले चुनाव संपन्न कराकर नई सरकार का गठन होना है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सीटें आरक्षित

कर्नाटक में कुल 224 विधानसभा सीटों में से 36 अनुसूचित जाति और 15 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 173 सीटें सामान्य श्रेणी के अंतर्गत हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि 1 अप्रैल तक 18 साल के हो रहे सभी युवा मतदाता कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वोट डाल सकेंगे।

चुनाव में ज्यादा उम्र और दिव्यांगों के लिए घर से मतदान की सुविधा

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव करवाना हमारी प्राथमिकता है। 224 विधानसभा सीटें हैं, राज्य में करीब 17 हजार वोटर्स ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल के पार जा चुकी है। कर्नाटक में 5.22 करोड़ कुल मतदाता हैं। उन्होंने कहा, आयोग का अच्छा फैसला ये है कि 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और दिव्यांगों के लिए घर से मतदान की सुविधा शुरू की गई है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 58,000 से अधिक मतदान केंद्र

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 58,000 से अधिक मतदान केंद्र होंगे। इनमें 28,866 शहरी मतदान केंद्र होंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि 1,300 से अधिक मतदान केंद्रों को विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संभाला जाएगा। 224 ऐसे बूथ बनाए गए हैं, जिनमें यूथ कर्मचारी तैनात रहेंगे। 100 बूथों पर दिव्यांग कर्मचारी तैनात रहेंगे।

राज्य में 41,000 ट्रांसजेंडर मतदाता के रूप मे पंजीकृत

राज्य में कुल 42,756 ट्रांसजेंडर हैं, जिनमें से 41,000 पंजीकृत हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ लोग खुद को ट्रांसजेंडर के तहत चिन्हित करने में झिझक रहे हैं, लेकिन हम उनसे आगे आने की अपील करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि वे आगे आएं और खुद को जिस भी जेंडर कैटेगरी के अंतर्गत रजिस्टर कराना चाहते हैं, कराएं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इस बार 9.17 लाख नए वोटर्स

कर्नाटक में इस बार 9.17 लाख नए वोटर्स जुड़े हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे। राज्य में 24 मई से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में कर्नाटक में चुनाव कराने की अपनी अलग चुनौतियां हैं।

पिछले चुनाव में BJP की 104 सीटों पर जीत

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 104 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस ने 80 जीती, हालांकि किसी दल को बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी। जेडीएस नेता कुमारस्वामी गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बने थे लेकिन करीब 14 महीने बाद कई कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी के साथ आ गए थे। इससे कुमारस्वामी सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। हालांकि, 2 साल बाद येदियुरप्पा ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और बसवराज बोम्मई राज्य के सीएम बने।

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