ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर आज वाराणसी जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया, मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ज्ञानवापी का मामला सुनने लायक है। इसलिए इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी। जिला कोर्ट का ये फैसला हिंदू पक्ष के हक में आया है। ज्ञानवापी परिसर को लेकर दायर मुकदमा नंबर 693/2021 (18/2022) राखी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में वाराणसी के जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने अपना ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा कि, उपरोक्त मुकदमा न्यायालय में सुनवाई के योग्य है।
जिसके बाद प्रतिवादी संख्या 4 अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के द्वारा दिए गए 7/11 के प्रार्थना पत्र को उन्होंने खारिज कर दिया। हालांकि अभी भी इस मामले में हाईकोर्ट और सु्प्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद पक्ष के अधिवक्ता विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। वही उधर, इस दौरान मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे यूपी में पुलिस अलर्ट पर है।
वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ने कल यानी 11 सितम्बर की शाम से ही पूरे वाराणसी में धारा-144 लागू कर दी थी। सोमवार को सुबह से ही वाराणसी के चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात है। बता दें कि पिछली सुनवाई पर दोनों पक्ष की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख तय की थी। पिछले साल सिविल जज (सीनियर डिविजन) की कोर्ट में शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन और सौंपने सम्बंधी मांग को लेकर वादी राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने गुहार लगाई थी। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने प्रार्थनापत्र देकर वाद की पोषणीयता पर सवाल उठाया था।
ज्ञानवापी का वीडियोग्राफी सर्वे
दरअसल ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर वाराणसी के जिला जज ए. के. विश्वेश की कोर्ट में चल रहा मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गयी थी | कोर्ट ने इस मामले में आदेश को सुरक्षित रख लिया था | इससे पहले दिल्ली की राखी सिंह तथा वाराणसी की निवासी चार महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हिंदू देवी देवताओं की प्रतिदिन पूजा अर्चना का आदेश देने के आग्रह वाली एक याचिका पिछले साल कोर्ट में दाखिल की थी |
उसके आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराया गया था | वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान टीम को वजूखाने से एक स्ट्रक्चर मिला था जो दिखने में शिवलिंग जैसा था। हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि ये ज्ञानवापी का शिवलिंग है जो मंदिर में मौजूद था जिसे मस्जिद में छिपा दिया गया। कहानी में तब पेंच फंस गया जब मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग के स्ट्रक्चर को फव्वारा बताया लेकिन अब उसी पर हिंदू पक्ष का दावा है कि वो शिवलिंग है लेकिन उसे फव्वारा बनाया गया है एक बड़ी साजिश के तहत और उसके सबूत भी मौजूद है।
ज्ञानवापी मामले पर पूरे देश की नजर
ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन के मामले पर पूरे देश की नजर टिकी है। आज अदालत के फैसले से यह तय हो जाएगा कि देश की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को ज्ञानवापी में मस्जिद थी या मंदिर। इसके साथ ही प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट 1991 लागू होगा या नहीं।
कचहरी परिसर में तैनात किए गए 2 हजार से ज्यादा जवान
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस की मेरिट पर आ रहे फैसले के मद्देनज़र पुलिस कचहरी परिसर की सुरक्षा को लेकर भी खासी सतर्क रही। वाराणसी के एएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि परिसर की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई। कचहरी परिसर में कोई अराजक गतिविधि न हो इसके लिए पूरी व्यवस्था रही। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 2000 से अधिक फोर्स यहां तैनात की गई।
मुस्लिम पक्ष जायेगा हाईकोर्ट
वहीं जिला न्यायालय में याचिका ख़ारिज होने के बाद अब मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। मुस्लिम पक्ष के वकीलों में से एक मेराजुद्दीन सिद्दकी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष याचिका खारिज होने पर हाई कोर्ट जाएगा।
केस की मेरिट के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य
– 20 मई को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले को सिविल जज की कोर्ट से जिला जज की कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था
– 24 मई को जिला जज ने केस की मेरिट पर सुनवाई का आदेश दिया
– 16 तिथियों में वाद की पोषणीयता पर हुई सुनवाई
– 24 अगस्त को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया
– 08 हफ्ते में सुनवाई का उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था |