असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने करीब चालीस सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं। कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की ऑनलाइन बैठक में उम्मीदवारों के नाम तय किए गए। असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। पार्टी उन्हें दो सीटों से चुनाव लड़ाने की योजना बना रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई के बीच दिलचस्प भिड़ंत देखने को मिल सकती है।
वही दूसरी तरफ असम में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हमले तेज हो गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। हेमंता ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गौरव गोगोई पाकिस्तान के एजेंट हैं। उनकी पत्नी भी पाकिस्तान की एजेंट है। अगर उनमें हिम्मत है, तो मेरे खिलाफ केस दर्ज करें।
मुख्यमंत्री के इस बयान ने तुरंत ही राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। मुख्यमंत्री हेमंता ने कहा कि उनका मकसद किसी को डराना नहीं है। बल्कि वह सिर्फ वही बोलते हैं जो उन्हें सच लगता है। उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई डरने वाला नहीं है, यह अच्छी बात है। लेकिन जो सच है, वो सच ही रहेगा और जो झूठ है, वो झूठ ही रहेगा।
ध्रुवीकरण को मिल सकती है हवा
असम की राजनीति में हेमंता और गोगोई के बीच शब्दों की जंग कोई नई बात नहीं है। लेकिन विधानसभा चुनाव करीब होने के कारण यह तीखी बयानबाजी की अधिक चर्चा हो रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप एक बार फिर असम की राजनीति में ध्रुवीकरण को हवा दे सकते हैं।
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। असम में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज होना तय माना जा रहा है। हेमंता बिस्वा सरमा पहले भी अपनी बेबाक बयानबाजी को लेकर चर्चा में रहे हैं।
इतिहास दोहराना चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, गौरव गोगोई जोरहाट सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। गौरव फिलहाल ऊपरी असम की जोरहाट लोकसभा सीट से ही सांसद हैं। उनके पिता और तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई ने अपनी राजनीति की शुरुआत जोरहाट नगर निगम से ही की थी और बाद में यहां से सांसद भी चुने गए। 2024 लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई को सीट बदलनी पड़ी थी।
इससे पहले वो दो बार कलियाबोर सीट से चुनाव जीत चुके थे। लेकिन परिसीमन में बदलाव के बाद उन्हें जोरहाट से लड़ना पड़ा। उनके लिए लड़ाई आसान नहीं थी, लेकिन पिता की विरासत और सहानुभूति का फायदा गौरव गोगोई को लोकसभा चुनाव में मिला था। अब उसी कहानी को विधानसभा चुनाव में दुहराने की रणनीति बनाई जा रही है। बीते दो चुनाव से जोरहाट विधानसभा सीट बीजेपी जीत रही है।
जालुकबारी से पीछे हट रहे गौरव गोगोई
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को सीएम हेमंता बिस्वा सरमा के सामने जालुकबारी से भी उतारना चाहती है। हालांकि, खुद गौरव इसके लिए तैयार नहीं हैं। सीएम हिमंत इस सीट से लगातार पांच बार से (तीन बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी ) जीत रहे हैं और हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ रहा है।
पिछली बार हिमंता बिस्वा सरमा ने एक लाख से अधिक अंतर से जीत दर्ज की थी। गौरव गोगोई कांग्रेस के अघोषित सीएम उम्मीदवार हैं। वैसे भी असम में इस बार मुकाबला हिमंता बनाम गौरव ही है। अगर गौरव सीएम की सीट से लड़ जाते हैं। तो इससे पूरे राज्य में बड़ा संदेश जाएगा। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
असम में तेलंगाना मॉडल अपना रही कांग्रेस
करीब ढाई साल पहले तेलंगाना में कांग्रेस ने यही मॉडल अपनाया था। तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और सीएम के चंद्रशेखर राव को उनकी सीट से भी सीधी चुनौती दी थी। इससे बने माहौल से तेलंगाना में कांग्रेस को ऐसी जीत मिली। जो पहले असंभव लग रही थी /वैसे ही हालत असम के भी हैं।
