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मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर राज्यसभा में विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया बयान

मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर आज राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

तेहरान में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर कही ये बात

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान में फंसे कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की है। छात्रों को देश से बाहर स्थानांतरित करने के लिए दूतावास ने सक्रिय सहयोग किया। उन्होंने आगे बताया कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते निकालकर वापस भारत लौटने में सहायता प्रदान की गई। दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट मोड पर है। हम भारतीय समुदाय की सुरक्षा और सहायता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमने दो भारतीय नाविकों (व्यापारिक जहाज पर) को खो दिया है। एक अभी भी लापता है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय – एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय है। हम एक पड़ोसी क्षेत्र हैं और पश्चिम एशिया की स्थिरता हमारे लिए बहुत अहम है। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ईरान में भी अध्ययन या रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय हैं। यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है।

इसमें तेल और गैस के कई महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता शामिल हैं। आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान और अस्थिरता का माहौल गंभीर मुद्दे हैं। जयशंकर ने कहा कि संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र में सुरक्षा के हालतों में गिरावट सामने आई है। ये संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है और विनाश बढ़ता जा रहा है। सामान्य जीवन और गतिविधियां स्पष्ट रूप से प्रभावित हो रही हैं।

तीन जहाजों को डॉक करने की मांगी थी अनुमति- एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि ईरान ने भारत से अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी। जिसे 1 मार्च को मंजूरी दे दी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का मानना ​​है कि यह ‘सही कदम’ था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया कि तीनों जहाजों में से एक 4 मार्च को दक्षिणी बंदरगाह कोच्चि पर पहुंचा। उसका चालक दल भारतीय नौसेना सुविधाओं में ठहरा हुआ था। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संसद के निचले सदन को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।

लोकसभा में एस जयशंकर के भाषण पर विपक्ष का हंगामा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष और इस संकट पर भारत के रुख के संबंध में लोकसभा में अपना संबोधन शुरू कर दिया है। विपक्षी सांसदों ने लोकसभा भवन को घेर लिया है। जोर-जोर से नारे लगाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर के पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा में दिए जा रहे भाषण को बाधित किया।

विपक्ष ने सरकार की चुप्पी की आलोचना की

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इससे संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की “चुप्पी” की कड़ी आलोचना की। लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने के बाद विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। जिसके चलते सदन की कार्यवाही 3 बजे तक स्थगित कर दी गई।

दूसरा मोशन लाने का क्या मतलब है – किरेन रिजिजू

लोकसभा में पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि विदेश मंत्री गल्फ देशों के हालात पर सदन को संबोधित कर रहे हैं। वे वहां मौजूद भारतीयों की स्थिति के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने सारी बातों का जवाब दिया है। इस बीच किरेन रिजिजू ने कहा- विपक्ष को पता ही नहीं वो क्या करना चाहते हैं। वे कंफ्यूज है, पहले विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नोटिस दिया। लेकिन अब ये दूसरा नोटिस दे रहे हैं, दूसरा मोशन लाने का क्या मतलब है ? मैंने आज तक इतना गैर जिम्मेदाराना विपक्ष नहीं देखा है। आप लोग एक पार्टी, एक आदमी, एक पार्टी से बाहर आना नहीं चाहते हैं क्या ?

मिडिल ईस्ट पर सरकार का चर्चा से इनकार

सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार मिडिल ईस्ट के हालातों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के बाद फिलहाल अब चर्चा के पक्ष में नहीं है। जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर आ रहा है और हंगामा कर रहा है। अनुराग ठाकुर ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। अब जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो उसे भाग रहे हैं। आप दूसरे नोटिस की बात कर रहे हैं। अगर हम दूसरे मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होंगे। तो फिर वह एक तीसरा मुद्दा लेकर आ जाएंगे। क्योंकि उनका नेतृत्व ही दिशा विहीन है।

सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है – कांग्रेस

कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि हम मिडिल ईस्ट संकट और उससे पैदा हुए एनर्जी संकट पर थोड़ी देर की चर्चा चाहते थे। ऐसा लगता है कि अमेरिका के प्रेसिडेंट हमारे बॉस बन गए हैं। जो हमें बता रहे हैं कि तेल किससे खरीदना है। ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई ? हम भारत की फॉरेन पॉलिसी, एनर्जी संकट से बचाव, भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा चाहते हैं। ऐसे में बयान जारी करने का कोई फायदा नहीं है। क्योंकि हम सरकार से कोई सवाल नहीं पूछ सकते। क्यूंकि सरकार चर्चा से भाग रही है।

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