Sunday, April 5, 2026
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सबूतों के आभाव में सूरज पंचोली बरी, हाईकोर्ट जाएगी जिया की मां

मुंबई में एक विशेष सीबीआई अदालत शुक्रवार 28 अप्रैल को एक्ट्रेस जिया खान की आत्महत्या के मामले में अपना फैसला सुनाया। बता दें जिया खान 3 जून, 2013 को अपने घर में मृत पाई गई थी। अभिनेता आदित्य पंचोली के बेटे अभिनेता सूरज पंचोली पर जिया खान को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। वहीं कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए सूरज पंचोली को बरी कर दिया है। बता दें मुंबई में विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एएस सैय्यद ने कहा सबूतों की कमी के कारण, यह अदालत आपको (सूरज पंचोली) को दोषी नहीं ठहरा सकती, इसलिए बरी किया जाता है।

छह पन्नों का सुसाइड नोट

जिया खान 3 जून 2013 को अपने फ्लैट पर मृत पाई गई थीं। उनके शव के साथ उनका छह पन्नों का एक सुसाइड नोट भी मिला था। जिसके बाद जिया की मां राबिया खान ने भी इस मामले में सूरज पंचोली पर आरोप लगाया था। आरोपों के बाद सूरज पंचोली को 10 जून 2013 को गिरफ्तार किया गया था। दो सप्ताह से ज्यादा समय तक हिरासत में बिताने के बाद उनको जमानत पर रिहा हुए थे।

आइये जाने सूरज पंचोली की मां ने क्या कहा

फैसला आने से पहले सूरज पंचोली की मां जरीना सदमे में हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने फैसले के लिए 10 साल तक इंतजार किया है। ये हमारे बेटे के लिए नरक की तरह रहा। इस पूरे समय में हमें विश्वास है कि हमारे बेटे के साथ न्याय होगा। जब मेरा बेटी मेरी तरफ देखता है तो मैं उसका दर्द महसूस करती हूं।’

राबिया खान ने सूरज पर लगाए गंभीर आरोप

जिया खान की मौत के बाद से उनकी मां राबिया खान ने आरोप लगाया था कि सूरज पंचोली और उनके परिवार ने उनकी बेटी के साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने सूरज पर जिया को अबॉर्शन के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

फेसबुक के जरिए हुई थी मुलाकात

रिपोर्ट्स के अनुसार सूरज पंचोली और जिया खान की मुलाकात फेसबुक के जरिए हुई थी। उस वक्त जिया खान बॉलीवुड में नई थीं और सूरज स्टारकिड होकर काम की तलाश में थे। उसी वक्त दोनों के बीच अफेयर शुरू हुआ था।

तुमने मेरे सपने तोड़ दिए – जिया खान

जिया खान ने अपने लेटर में लिखा, ‘मुझे नहीं पता कि मैं तुमसे यह कैसे कहूं लेकिन मैं अब भी कह सकती हूं क्योंकि मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। मैं पहले ही सब कुछ खो चुकी हूं, अगर आप इसे पढ़ रहे हैं तो हो सकता है कि मैं पहले ही जा चुकी हूं या जानेवाली हूं। मैं अंदर से टूट चुकी हूं। आप यह नहीं जानते होंगे लेकिन आपने मुझे इस हद तक प्रभावित किया कि मैं आपसे प्यार करने में खुद को खो बैठी। फिर भी तुमने मुझे रोज सताया। इन दिनों मुझे कोई लाइट नहीं दिखती मैं जागना नहीं चाहती। एक वक्त था जब मैंने अपनी लाइफ और फ्यूचर तुम्हारे साथ देखती थी, लेकिन तुमने मेरे सपनों को चकनाचूर कर दिया।’

जिया खान की मां ने दायर की अर्जी

नफीसा रिजवी खान उर्फ जिया खान की मां राबिया ने अपने वकील के जरिये अर्जी दायर की है। अर्जी में कहा गया है कि फर्स्ट इंफॉर्मेट एविडेंस में मृतक के साथ रिलेशनशिप के दौरान आरोपी के फिजिकल और मेंटल दुर्व्यवहार को हाईलाइट करता है, जो क्लियरली आरोपी की हिंसक प्रकृति को बयां करता है, जिसे गवाह मेनका हरिसिंघानी द्वारा सपोर्ट किया गया था, हालांकि वह बाद में विरोधी हो गई थीं।

हाईकोर्ट जाएंगी राबिया खान

जिया खान की मां ने कहा, ‘मैं एक बात कहूंगी कि आज आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला खत्म हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि मेरी बच्ची की मौत कैसे हुई? इसलिए मौत के कारण का अब तक पता नहीं लग पाया है। मैंने शुरू से कहा है कि यह हत्या का मामला है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वे हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगी, उन्होंने कहा- ‘हां, क्यों नहीं।’

फैसले के बाद सूरज पंचोली का रिएक्शन

जिया खान सुसाइड मामले में सूरज पंचोली बरी हो गए हैं। जिसके बाद पहली बाद उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर रिएक्शन दिया है। अभिनेता ने अपनी इंस्टा स्टोरी में लिखा है- सच की हमेशा जीत होती है। इसके साथ उन्होंने हाथ जोड़ने वाला और दिल वाली इमोजी भी बनाई है।

इन फिल्मों में आई थी नजर

नफीसा रिजवी खान उर्फ जिया खान एक ब्रिटिश-अमेरिकी नागरिक थीं। बता दें जिया के बेस्ट एक्ट्रेस के साथ-साथ सिंगर थीं, उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘निशब्द’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ एक्टिंग की थी। साथ ही उन्होंने आमिर खान के साथ भी काम किया था। बता दें वह ‘गजनी’ में एक मेडिकल स्टूडेंट के रोल में देखा गया था।

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अतीक अहमद के कार्यालय में मिले खून के धब्बों का खुल गया राज

माफिया अतीक अहमद के चकिया स्थित दफ्तर में मिले खून के धब्बों का राज गुरुवार को पुलिस के सामने आ गया। खुल्दाबाद पुलिस ने शाहरुख को हिरासत में लिया है। शाहरुख नशे की हालत में अतीक के दफ्तर गया था और शीशे में हाथ मारने के कारण घायल हो गया था। शाहरुख का ही खून अतीक के दफ्तर में कई जगह मिला था

अतीक अहमद के तोड़े जा चुके कार्यालय में मिले खून के निशान

उमेश पाल हत्याकांड और फिर अतीक अहमद तथा अशरफ की हत्या के बाद भी सनसनीखेज गतिविधियां जारी हैं। हत्याकांड के 2 महीने बाद 24 अप्रैल को कर्बला में अतीक अहमद के तोड़े जा चुके कार्यालय भवन में चाकू और चारों तरफ खून के धब्बे मिले थे। खून के धब्बे निचले तल से लेकर दूसरी मंजिल के कमरों किचन और सीढ़ियों पर भी मौजूद थे। माफिया अतीक के दफ्तर में खून के निशान मिलने से हड़कंप मच गया था। खुल्दाबाद थाना प्रभारी अनुराग शर्मा पुलिस टीम के साथ छानबीन कर रहे हैं। अब इस मामले में शाहरुख नाम के युवक को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस की रिमांड में हुई अतीक-अशरफ की हत्या

अतीक-अशरफ को उमेश पाल हत्याकांड मामले में पुलिस ने रिमांड पर लिया था। हत्या वाले दिन दोनों पुलिस के साथ निशानदेही के लिए गए थे। अतीक अहमद और अशरफ की वापसी के समय में उनका मेडिकल काल्विन अस्पताल में हुआ था। वहां से निकलने के बाद मीडिया कर्मियों के वेश में आए अरुण मौर्य, लवलेश तिवारी और सनी ने मौका पाते ही अतीक-अशरफ को गोलियों से भून दिया था।

24 फरवरी को हुई थी उमेश पाल की हत्या

24 फरवरी को प्रयागराज में बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह रहे उमेश पाल और उसके दो सरकारी गनर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से इस हत्याकांड की जांच शुरू की, तो उसमें माफिया अतीक अमहद का बेटा उमेश पाल पर गोलियां बरसाते हुए नजर आया। पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल असद समेत 4 आरोपितों को मुठभेड़ में मार गिराया, बाकी अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

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विवादों में आई बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई, नीतीश सरकार दी प्रतिक्रया

बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई का डीएम जी कृष्णैया के परिवार समेत एक पक्ष जमकर विरोध कर रहा है। इस बीच बिहार सरकार का कहना है कि सरकार की नजर में आईएएस, बासा के अधिकारी या अन्य किसी भी आम आदमी में कोई अंतर नहीं है। जेल मैनुअल 2012 के तहत यह प्रावधान है कि कैदी ने जेल में कम से कम 14 साल बिताए हों। इस अवधि में उसका चाल-चलन अच्छा हो तो ऐसे कैदी को 20 वर्ष परिहार अवधि हो जाने पर जेल से रिहा किया जा सकता है।

मोबाइल रखने के मामले को टाल दिया

आमिर सुबहानी ने कहा कि रिहाई के पूर्व आनंद मोहन का पूरा रिकॉर्ड देखा गया है। यह पूछे जाने पर कि उन पर जेल में मोबाइल रखने से जुड़ी एक प्राथमिकी पिछले वर्ष दर्ज की गई। इस संबंध में मुख्य सचिव ने जानकारी होने से अनभिज्ञता जाहिर की। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्य सचिव ने कहा कि नियम के तहत प्रोबेशन अफसर अपराधी के गांव जाकर यह पता लगाते हैं कि उस कैदी के छूटने से सामाजिक माहौल पर कोई बुरा प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। इस आकलन को भी नियम में शामिल किया गया है और इसका पालन भी आनंद मोहन के मामले में किया गया है।

नियम – कानून के तहत हुई है आनंद मोहन की रिहाई

बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि आनंद मोहन ने भी 15 वर्ष 9 माह की अवधि जेल में बिताई है और परिहार सहित जेल में बिताई कुल अवधि 22 वर्ष 13 दिन की हो चुकी है। इस वजह से तमाम नियम कायदे-कानून का पालन करते हुए जेल मैनुअल में किए गए प्रावधानों के तहत उन्हें रिहा किया गया है। इस फैसले को राजनीतिक रंग देना कहीं से उचित नहीं है।

आनंद मोहन की रिहाई पर मचा सियासी बवाल

पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई पर दिल्ली से बिहार तक सियासी बवाल मचा है। आनंद मोहन की रिहाई के विरोध में बहुजन समाज पार्टी से लेकर आईएएस एसोसिएशन तक उतर आए हैं। बसपा ने इसे नीतीश सरकार का दलित विरोधी कदम बताया है। वहीं, भाजपा में इसे लेकर दो मत दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के कुछ नेता रिहाई का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जैसे नेता इसके समर्थन में हैं।

केंद्रीय आईएएस एसोसिएशन द्वारा आनंद मोहन की रिहाई का विरोध किए जाने पर मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को या किसी संगठन को अपनी मांग रखने का या अपनी बात कहने का पूरा अधिकार होता है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव के साथ ही गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद और कारा महानिरीक्षक शीर्षत कपिल अशोक भी मौजूद रहे।

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बड़ा जुगाड़ू था महाठग संजय शेरपुरिया, भाजपा के कई बड़े नेताओं संग है फोटो

महाठग संजय राय शेरपुरिया दिल्ली के एक बड़े उद्योगपति से छह करोड़ रुपये की डील में फंसा है। उद्योगपति का केंद्रीय जांच एजेंसी का केस रफादफा कराने का संजय ने ठेका लिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी व नोएडा एसटीएफ को इसकी जानकारी हुई। तफ्तीश कर साक्ष्य जुटाए और मंगलवार को लखनऊ के विभूतिखंड इलाके से उसे दबोच लिया। एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस्तेमाल करने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। अब उसका इतिहास खंगाला जा रहा है। कई बड़ी हस्तियां भी जांच की जद में आ गई हैं। संजय शेरपुरिया मूलरूप से गाजीपुर जिले का रहने वाला है।

महाठग है संजय शेरपुरिया

वर्तमान में वह दिल्ली में रहता है। गुजरात में बड़ा कारोबार रहा है। यूपी, दिल्ली व गुजरात में उसका नेटवर्क है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, उद्योगपति गौरव डालमिया की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी कर रही है। गौरव किसी के जरिये संजय के संपर्क में आया। संजय शेरपुरिया ने दावा किया वह केंद्रीय जांच एजेंसी का मामला रफादफा करवा देगा। इसके लिए उसने गौरव से छह करोड़ की डील की। ये रकम संजय को पहुंच गई।

चूंकि केंद्रीय जांच एजेंसी पहले से ही प्रकरण में सक्रिय थी, इसलिए उसको इसकी भनक लग गई। एसटीएफ की नोएडा यूनिट को भी जानकारी दी गई। एसटीएफ ने अपने स्तर से तफ्तीश की। संजय शेरपुरिया के बैंक खातों का विवरण निकाला। उसके बाद तलाश शुरू की थी। गिरफ्तारी करने के बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर सचिन ने केस दर्ज कराया। महाठग संजय शेरपुरिया दिल्ली में राइडिंग क्लब में करोड़ों के बंगले में रहता है। ये बंगला एक महिला का है, जो कब्जे का है। आवास से संबंधित दस्तावेजों में संजय का कहीं पर भी नाम नहीं है। इसके बावजूद उसने अपना आलीशान आवास बना रखा है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग व चुनाव में टिकट दिलाने का ठेका लेता है संजय शेरपुरिया

संजय शेरपुरिया बड़ी-बड़ी डीलिंग वहीं पर बैठकर करता है। खासकर ट्रांसफर-पोस्टिंग व चुनाव में टिकट दिलाने का ठेका लेता है। जिसके एवज में वह मोटी रकम वसूलता है। लोगों को अपने विश्वास में लेने के लिए वीवीआईपी इलाके में रहता है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली आवास पर उसने एक फोटो गैलरी बना रखी है, जहां पर उसने अपनी दर्जनों फोटो लगा रखी हैं। इसमें वह अलग-अलग नेताओं व नामचीन हस्तियों के साथ है।

अब ये जांच का विषय है कि ये फोटो सही हैं या फिर एडिटेड हैं। अगर एसटीएफ या अन्य किसी एजेंसी ने इस पहलू पर जांच की तो तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे। बड़े कामों की डील वह करता था और रकम नकद में लेता था। वह काम करवा पाता था या नहीं, इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। ये जरूर है कि लोग उसके झांसे में आसानी से आ जाते थे। सत्ताधिकारी शीर्ष नेताओं में कोई ऐसा नहीं होगा, जिसके साथ उसकी फोटो न हो।

संजय शेरपुरिया ने मांगा था टिकट, खुद को बताया था भाजपा प्रभारी

2022 विधानसभा चुनाव में संजय राय गाजीपुर से चुनाव लड़ना चाहता था। वह भाजपा से टिकट पाने की जद्दोजहद में लगा था। हालांकि उसको टिकट नहीं मिल पाया था। उस दौरान वह लंबे समय तक गाजीपुर में रुका था। पार्टी के कार्यकर्ता की तरह प्रचार-प्रसार में जुटा था। इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान वह पीएम के संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार करता था। वह खुद को उस संसदीय क्षेत्र का प्रभारी बताता था।

एक तरह से वह बड़े नेताओं का करीबी होने का दावा किया करता था। इससे उस पर लोगों का विश्वास बनता रहे और ठगी का जाल फैलाता रहे। इंटेलीजेंस ने भी जुटाई जानकारी विभूतिखंड थाने में दर्ज एफआईआर में लिखा गया है कि इस संबंध में इंटेलीजेंस से भी सूचना मिली थी। मतलब संजय शेरपुरिया को लेकर इंटेलीजेंस भी लंबे समय से सक्रिय थी। वह उसकी कुंडली खंगाल रही थी। जब पुख्ता साक्ष्य सामने आए तो कार्रवाई के लिए एसटीएफ को इनपुट साझा किया।

read more : कर्नाटक और यूपी का संबंध काफी पुराना है, त्रेतायुग से संबंध – सीएम योगी

कर्नाटक और यूपी का संबंध काफी पुराना है, त्रेतायुग से संबंध – सीएम योगी

कर्नाटक चुनाव में अब कम ही दिन बचे हैं और चुनाव प्रचार जोरों पर है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अपना पूरा दमखम लगा दिया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बुधवार को कर्नाटक के मांड्या में चुनाव प्रचार करने पहुंचे। वहां जनसभा को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि कर्नाटक और यूपी का संबंध काफी पुराना है, यह आज का नहीं, त्रेतायुग का संबंध है। भगवान राम का संबंध उत्तर प्रदेश से है तो वहीं भगवान हनुमान का संबंध कर्नाटक से है। जैसे भगवान श्रीराम और हनुमान का संबंध प्रगाढ़ है वैसे ही कर्नाटक और यूपी का संबंध है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मैसूर पहुंचकर मांड्या जिले में रोड शो और चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। इसके बाद वह दोपहर को विजयपुरा जिला में बसवेश्वर मंदिर का दर्शन करने पहुंचे और बसवना बागवाड़ी में चुनाव प्रचार किया।

कांग्रेस तुष्टिकरण करने का काम करती है

सीएम योगी आदित्यनाथ कर्नाटक ने बुधवार को अपनी पहली चुनावी रैली में बीजेपी के स्टार प्रचारक के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने भाषण में राज्य की डबल इंजन सरकार के काम की सराहना करते हुए कहा कि पीएफआई जैसे संगठनों को बैन करके उसकी कमर तोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ बीजेपी की सरकार पीएफआई को बैन करती है, तो दूसरी ओर कांग्रेस तुष्टिकरण का काम करती है।

धर्म के आधार पर आरक्षण सही नहीं – सीएम योगी

यूपी के सीएम ने धर्म आधारित आरक्षण को लेकर भी कांग्रेस पर हमला किया। सीएम योगी ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण भारत के संविधान के विपरीत है, यह असंवैधानीक है। उन्होंने इस पर कहा कि हमने आर्थिक रूप से गरीबों, अनुसूचित जाति और जनजाति, दिव्यांगजनों के आरक्षण के दायरे को बढ़ाया है। धर्म के आधार पर भारत आरक्षण की वकालत नहीं कर सकता है।

आरक्षण को बदलने का फैसला किया – सीएम योगी

बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मांड्या की रैली में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग की 2बी श्रेणी के तहत मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रा्वधान था, जिसे कर्नाटक में बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल में खत्म कर दिया। क्योंकि धर्म आधारित कोटा का कोई संवैधानिक समर्थन नहीं है।

इसके बाद कर्नाटक सरकार ने चार प्रतिशत आरक्षण को दो बराबर भागों में विभाजित कर दिया और राज्य के दो प्रमुख समुदायों, 2सी में वोक्कालिगा और 2डी श्रेणी में लिंगायतों के लिए प्रत्येक में दो प्रतिशत कोटा बढ़ा दिया। इसके बाद से वोक्कालिगाओं का आरक्षण चार प्रतिशत से बढ़कर छह प्रतिशत और लिंगायतों का पांच प्रतिशत से सात प्रतिशत हो गया। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी कभी तुष्टिकरण में विश्वास नहीं करती, इसलिए आरक्षण को बदलने का फैसला किया।

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छत्तीसगढ़ में बड़ा नक्सली हमला, 6 हेड कांस्टेबल सहित 10 जवान शहीद

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में अब तक 10 जवान समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। नक्सलियों ने यह हमला घात लगाकर किया था। नक्सलियों ने बारूदी सुरंग बनाकर डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड) के वाहन पर हमला किया। नक्सलियों ने आईईडी धमाका करके घटना को अंजाम दिया है। हमला करने के बाद नक्सली जंगल की तरफ भाग गए, जिसके बाद उसी टीम के बचे हुए जवानों ने उनका पीछा किया लेकिन ख़राब मौसम और जंगल की वजह से वे अभी भगाने में सफल हो गए।

इस हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बातचीत हुई है। इसके बाद जानकारी सामने आई है कि केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य सरकार के बल मिलकर संयुक्त रूप से इस हमले में शामिल नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चला सकते हैं।

गश्त के बाद वापस लौट रहे थे जवान

दंतेवाड़ा के अरनपुर थाना क्षेत्र ये जवान गश्त के बाद वापस लौट रहे थे। जवान गश्त के लिए पैदल गए हुए थे लेकिन लौटते वक्त थकान के कारण एक पिकअप वैन में लिफ्ट लेकर वापस कैंप की ओर आ रहे थे। उसी दौरान नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया। वहीं बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि एक सूचना पर अभियान चलाया था। अभियान पूरा करने के बाद टीम जब वापस लौट रही थी कि तभी वाहन आईईडी की चपेट में आ गया। वाहन में 10 डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड) जवान थे और एक वाहन चालक था। शहीद जवानों के शवों को वापस लाया जा रहा है। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।

नक्सल ऑपरेशन के बाद लौट रहे थे जवान

जानकारी के मुताबिक, माओवादी कैडर की मौजूदगी की सूचना पर दंतेवाड़ा से डीआरजी जवानों को रवाना किया गया था। इसके बाद सभी जवान वहां से लौट रहे थे। इसी दौरान घात लगाए नक्सलियों ने अरनपुर मार्ग पर पालनार में ब्लास्ट कर दिया। बताया जा रहा है कि जवान एक प्राइवेट वाहन से निकले थे। हमले में एक नागरिक की भी मौत हुई हैै। हमले के बाद जवानों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। इसमें कुछ नक्सली भी घायल हुए हैं। मौके पर फोर्स पहुंच गई है। वारदात की पुष्टि आईजी सुंदरराज पी. ने की है।

ये जवान हुए है शहीद

हेड कॉन्सटेबल जोगा सोढी, मुन्ना राम कड़ती, संतोष तामो, नव आरक्षक दुल्गो मण्डावी, लखमू मरकाम, जोगा कवासी, हरिराम मण्डावी, गोपनीय सैनिक राजू राम करटम, जयराम पोड़ियाम और जगदीश कवासी शहीद हुए हैं। इनके साथ ही प्राइवेट वाहन के चालक धनीराम यादव की भी मौत हो गई है।

घटना के बाद मौके पर पहुंची फोर्स, सर्चिंग जारी

बताया जा रहा है कि वाहन में 25 से 30 जवान सवार थे। घायल जवानों को जिला अस्पताल लाने के लिए चार एंबुलेंस को घटना स्थल के लिए रवाना किया गया है। घटना के बाद आसपास के एरिया में सर्चिंग तेज कर दी गई है। एसपी भी मौके पर पहुंच गए हैं।

नक्सलियों की चल रही टीसीओसी

बस्तर में नक्सलियों ने इस समय टीसीओसी (टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन) चला रखी है। इस दौरान नक्सली अक्सर बड़े हमले करते हैं। इसके चलते फोर्स पहले से ही अलर्ट माेड पर है। इसी के तहत जवानों की भी सर्चिंग लगातार जारी है। पिछले सप्ताह बीजापुर कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। वह साप्ताहिक बाजार में नुक्कड़ सभा कर लौट रहे थे। इसके तीन दिन बाद नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी कर टीसीओसी चलाए जाने की बात कही थी। हालांकि विधायक को निशाना बनाने की बात से इनकार किया था।

नक्सलियों से लड़ाई अंतिम दौर में – मुख्यमंत्री बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वारदात की पुष्टि करते हुए शोक जताया है। उन्होंने कहा है कि, इस प्रकार की जानकारी है और यह दुखद है। जो जवान शहीद हुए हैं उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। यह लड़ाई अंतिम दौर में चल रही है और नक्सलियों को किसी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। हम योजनाबद्ध तरीके से नक्सलवाद को खत्म करेंगे।

पूर्व सीएम रमन सिंह ने बताई कायराना हरकत

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी हमले को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि, दंतेवाड़ा के अरनपुर में पुलिस वाहन पर हमला करके नक्सलियों ने कायरता दिखाई है, इस हमले में शहीद हुए हमारे डीआरजी के 10 वीर जवान और 1 ड्राइवर की शहादत को नमन करते हुए मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

कमलनाथ ने जताया शोक

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी नक्सली हमले को लेकर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में 11 जवानों के शहीद होने का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। मैं इस तरह की कायरतापूर्ण कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं। मैं सभी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और दुख की इस घड़ी में हम सब उनके परिजनों के साथ हैं। जय हिंद।

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प्रकाश सिंह बादल को चंडीगढ़ में पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, उमड़ा जनसैलाब

पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे। पीएम के साथ मनोहर लाल खट्टर भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। प्रकाश सिंह बादल का पार्थिव शरीर शिरोमणि अकाली दल के मुख्य दफ्तर सेक्टर 28 चंडीगढ़ में आम जनता के दर्शन के लिए रखा गया है। बादल के पार्थिव शरीर को अकाली दल के झंडे में लपेटा गया है। इसके बाद दोपहर में पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा। वीरवार को उनका अंतिम संस्‍कार किया जाएगा। पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री के निधन के चलते पंजाब सरकार ने 27 अप्रैल को सामूहिक अवकाश की घोषणा की है।

चंडीगढ़ से बठिंडा तक निकलेगी अंतिम यात्रा

प्रकाश सिंह बादल का अंतिम संस्कार 27 अप्रैल गुरुवार को उनके पैतृक गांव बादल में दोपहर एक बजे होगा। इससे पहले 26 अप्रैल को उनके पार्थिव शरीर को आम लोगों के दर्शन के लिए सुबह 10 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर 28 स्थित शिरोमणि अकाली दल के कार्यालय में रखा जाएगा। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा राजपुरा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, रामपुरा फूल, बठिंडा के रास्ते गांव बादल पहुंचेगी।

1970 में पहली बार बने थे मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल

प्रकाश सिंह बादल पहली बार वर्ष 1970 में पंजाब के सीएम बने थे। वर्ष 2017 में वह आखिरी बार इस पद पर थे. वह सिख-केंद्रित पार्टी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के संरक्षक भी थे। बादल 12 फरवरी 1997 से 26 फरवरी 2002 की अवधि के बीच भी प्रदेश के सीएम बने थे।

प्रकाश सिंह बादल पद्म विभूषण से भी हुए थे सम्मानित

30 मार्च, 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। हालांकि उन्होंने 3 दिसंबर 2020 को भारतीय किसानों के विरोध का समर्थन करने के लिए इस सम्मान को वापस कर दिया था।

प्रकाश सिंह बादल को श्रद्धांजलि देने पहुंची देश की जानी-मानी हस्तियां

इस दौरान प्रकाश सिंह बादल के पार्थिव शरीर के दर्शन करने उनके करीबी दिखाई दिए। बसपा के प्रधान जसबीर सिंह गड़ी, सुखबीर बादल, एच एस हंसपाल, पूर्व वित्त मंत्री उपिंदर जीत कौर, भाजपा के विधायक के डी भंडारी समेत कई करीबी दोस्‍त और रिश्‍तेदार मौजूद रहे। पंजाब सरकार की तरफ से वित्त मंत्री हरपाल चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

दुष्यंत चौटाला ने प्रकाश सिंह बादल के निधन पर शोक जताया

हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने प्रकाश सिंह बादल के निधन पर शोक जताया है। दुष्यंत ने कहा की बादल साहब चौ. देवी लाल के पगड़ी बदल भाई थे। आज के दिन वो हमारे परिवार के सबसे बड़े बड़े सदस्य थे, हमारे परिवार के मुखिया थे। चौटाला ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल 17 साल तक देश की विभिन्न जेलों में रहे। पंजाब और देश के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं को उन्होंने लागू करवाया।

प्रकाश सिंह बादल के प्रयासों से ही क़ृषि क्रांति

पंजाब में प्रकाश सिंह बादल के प्रयासों से ही क़ृषि क्रांति आई। प्रकाश सिंह बादल जी से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। करीब एक महीने पहले दिग्विजय सिंह चौटाला की शादी में भी प्रकाश सिंह बादल ने पूरे परिवार को आर्शीवाद दिया था। जब भी कोई राजनीतिक सलाह-मशवरा करना होता था तो बादल साहब की सलाह ली जाती थी। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता।

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अतीक-अशरफ हत्या मामले में यूपी सरकार भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस की मौजूदगी में हत्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले ही याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। इनमें मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग की गई है। अब इस मामले में यूपी सरकार भी ने एक कैविएट दाखिल की है। योगी सरकार ने इस कैविएट के जरिए मांग की है कि बिना उसका पक्ष सुने इस मामले में कोई भी आदेश पास न किया जाए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में अतीक और अशरफ की हत्या की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 28 अप्रैल के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया है। यह याचिका वकील विशाल तिवारी ने दायर की है, जिन्होंने यूपी में 2017 के बाद से हुए 183 एनकाउंटरों की जांच की मांग की है। वकील विशाल तिवारी ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच के सामने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को 28 अप्रैल को लिस्ट करने के निर्देश दिए।

अतीक-अशरफ हत्या मामले में एक और याचिका दायर

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी सुप्रीम कोर्ट में लेटर पिटिशन दाखिल करके अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या मामले की सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की है। अमिताभ ठाकुर ने याचिका में कहा है कि ‘भले ही अतीक अहमद और उसका भाई अपराधी हों मगर जिस तरह से उनकी हत्या हुई, उससे इस घटना के राज्य पोषित होने की पर्याप्त संभावना दिखती है।

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शैली ओबेरॉय बनी दिल्ली की निर्विरोध मेयर, बीजेपी की शिखा राय ने नाम वापस लिया

आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय को सर्वसम्मति से दिल्ली एमसीडी का मेयर चुन लिया गया है। बीजेपी की मेयर पद की प्रत्याशी शिखा राय ने अपना नाम वापस ले लिया। इस तरह से लंबे अर्से से दिल्ली एमसीडी मेयर चुनाव को लेकर चल रही खींचतान का पटाक्षेप हो गया। बीजेपी ने डिप्टी मेयर पद से भी अपने प्रत्याशी का नाम वापस ले लिया।

पिछले साल दिसंबर में नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी बहुमत हासिल किया था। इसके बाद मेयर का चुनाव होना था। लेकिन काफी अड़चनों और हल्ला-हंगामे के बाद भी मेयर चुनाव में सफलता नहीं मिल पाई थी। इस मामले में कोर्ट को भी दखल देना पड़ा था। आखिरकार 26 अप्रैल यानी आज के दिन मेयर का चुनाव होना था। लेकिन इससे पहले ही बीजेपी मेयर पद की उम्मीदवार शिखा राय ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।

बता दें दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में हर वित्तीय वर्ष के अंत के बाद नए सिरे से महापौर का चुनाव होता है। एमसीडी में पहले वर्ष के लिए महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित रहता है, दूसरे वर्ष में पद किसी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता। तीसरे वर्ष आरक्षित वर्ग का व्यक्ति ही चुनाव लड़ सकता है और अन्य दो वर्ष किसी भी वर्ग का व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। तीन निगमों को एमसीडी में एकीकृत करने के बाद एक नए परिसीमन की कवायद की गई थी, जिसमें 2012 के मुकाबले वार्डों की कुल संख्या 272 से घटाकर 250 कर दी गई थी।

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सीएम बदले जाने की खबरों से शिंदे भी परेशान, महाराष्ट्र में बड़े उलटफेर के संकेत

क्या देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर महाराष्ट्र में सीएम की कुर्सी संभालेंगे ? अंदरखाने जो भी सियासत चल रही है उससे यही सवाल उभरकर सामने रहा है। सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक चुनाव की वोटिंग 10 मई को खत्म होने के बाद महाराष्ट्र में कभी-भी बड़ा उलटफेर हो सकता है। सूत्रों की मानें तो देवेंद्र फडणवीस फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे वहीं अजित पवार और अपने समर्थकों के साथ बीजेपी सरकार में शामिल होंगे। बदली हुई स्थिति में अजित पवार और एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं।

रैंडम सर्वे में बीजेपी को फायदा नहीं

बीजेपी ने जो अंदरुनी रैंडम सर्वे कराए हैं उसके मुताबिक यह अनुमान है कि लोकसभा के लिए बीजेपी को 48 में से 22 से 25 सीटों पर ही जीत मिलेगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को साथ लेकर भी बीजेपी को फायदा होता नही दिखाई दे रहा है। वहीं उद्धव ठाकरे के साथ कैडर भी है और सहानुभूति भी है। वहीं महाविकास आघाड़ी एकसाथ चुनाव लड़े तो बीजेपी को नुकसान होने की बात सामने आ रही है। यही कारण है कि अब बीजेपी राज्य की कमान अपने हाथ लेकर जल्द महाविकास आघाड़ी में फूट का लाभ और राज्य की सत्ता अपने हाथ में लेना चाहती है।

जल्दी फाइल क्लियर नहीं कर रहे शिंदे

ऐसी भी जानकारी सामने आ रही है कि एकनाथ शिंदे फाइल जल्द क्लियर नही कर रहे जिससे बीजेपी के मंत्रियों और नेताओं में भी बड़ी नाराजगी है। राज्य के बीजेपी नेताओं ने पार्टी के सीनियर नेताओं को दो से तीन महीने पहले ही सब जानकारी दी और हालात से अवगत कराया पर बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने राज्य बीजेपी के नेताओं को अप्रैल तक रुकने को कहा था।

सीएम बदले जाने की खबरों से शिंदे भी परेशान

उधर मुख्यमंत्री बदले जाने की खबरों से एकनाथ शिंदे भी परेशान हैं। अब बीजेपी के नेता भी ‘देवेंद्र फडणवीस ही हमारे मुख्यमंत्री’ ऐसा बोलने लगे हैं जिससे शिंदे भी नाराज हैं। वो लगातार कोशिश कर रहे हैं कि उनका सीएम पद बचा रहे। कल शाम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुम्बई एक कार्यक्रम में आएंगे जहां उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहेंगे।

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यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं में प्रियांशी, तो 12वीं में शुभ ने किया टॉप, देखें अपना रिजल्ट

यूपी बोर्ड ने आज कक्षा 10वीं, 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अपना रिजल्ट upmsp.edu.in और upresults.nic.in पर भी देख सकते हैं। रिजल्ट UPMSP द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषित किया गया। रिजल्टों की घोषणा के साथ ही प्रेस मीट में पास प्रतिशत, टॉपर्स के नाम भी जारी किए गए। इसके अलावा छात्र सीधे इस लिंक https://upresults.nic.in/ पर क्लिक करके भी यूपी बोर्ड कक्षा 10 और 12वी के रिजल्ट 2023 चेक कर सकते हैं। यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से 3 मार्च तक आयोजित की गई थी जबकि यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से 4 मार्च, 2023 तक आयोजित हुई। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए राज्य के 75 जिलों में 8,753 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

इन बच्चो ने कक्षा 10वी और कक्षा 12वी किया टॉप

यूपी बोर्ड ने टॉपर्स की लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें सीतापुर की प्रियांशी सोनी ने हाई स्कूल में टॉप किया। प्रियांशी सीता बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज महमूदाबाद की छात्रा हैं। 12 वीं में महोबा के शुभ ने स्टेट टॉप किया है।

यूपी बोर्ड ने बनाया नया रिकॉर्ड

बिना पुनर्परीक्षा वर्ष 2023 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा संपन्न कराकर 30 वर्ष का रिकार्ड तोड़ने के बाद यूपी बोर्ड ने अब परिणाम घोषित करने के मामले में पिछले सौ वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। बोर्ड के सौ वर्ष के इतिहास में इससे पहले कभी इतने कम समय में परिणाम घोषित नहीं किया जा सका है। पुराने रिकॉर्ड पर नजर डाले तो अब तक अप्रैल में सिर्फ दो बार यूपी बोर्ड के नतीजें घोषित किए गए हैं। एक बार 2018 में 29 अप्रैल को तथा दूसरी बार 2019 में 27 अप्रैल को। ऐसे में यूपी बोर्ड इस बार 27 अप्रैल से पहले 25 अप्रैल को रिजल्ट घोषित कर एक और रिकॉर्ड स्थापित किया है।

18 मार्च को शुरू हुआ था मूल्यांकन

यूपी बोर्ड की कक्षा 10 और 12 की उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने का कार्य 18 मार्च से शुरू हुआ था। कॉपियों के मूल्यांकन के लिए 1,43,933 परीक्षक लगे थे। ओएमआर शीट पर पहली बार हुई हाईस्कूल की 20 अंकों की परीक्षा का मूल्यांकन परीक्षा के दौरान ही शुरू करा दिया गया था। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन का कार्य रिकॉर्ड तोड़ते हुए निर्धारित तारीख एक अप्रैल से पहले ही यानी 31 मार्च को ही पूरा कर लिया गया था। रिकार्ड के संकेत पहली बार तय तिथि के एक दिन पहले संपन्न हुए मूल्यांकन से मिल भी गए हैं।

यूपी बोर्ड की वेबसाइट हैंग, ऐसे करें ऑफलाइन रिजल्ट चेक

सबसे पहले अपने फोन के मैसेज वाले सेक्शन में जाना होगा। यहां टाइप मैसेज में जाएं और आपको जिस क्लास का रिजल्ट देखना है, उसका नाम टाइप करें। जैसे UP12 या UP 10 फिर इसे टाइप करने के बाद स्पेस दें और अपना रोल नंबर लिखें। इतना करने के बाद इसे 56263 पर भेज दें। कुछ देर में आपका रिजल्ट फोन में मैसेज के रूप में आ जाएगा। यह तरीका सबसे कारगर है और बिना रुकावट के आप अपना रिजल्ट देख पाएंगे।

हाई स्कूल में 89.76 और इंटरमीडिएट में 75.52 फ़ीसदी परीक्षार्थी पास

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम घोषित हो चुका है। इस बार हाई स्कूल में कुल पंजीकृत में से 13,16,487 छात्र पास हुए हैं। वहीं उच्च माध्यमिक की परीक्षा में 27,69,258 बच्चों ने किया था पंजीकरण। हाई स्कूल 89.76 प्रतिशत पास हुए हैं जबकि उच्च माध्यमिक में 75.52 प्रतिशत पास हुए। हाईस्कूल में बालकों के उत्तीर्ण का प्रतिशत 86.64 और बालिकाओं के उत्तीर्ण प्रतिशत 93.34 रहा। इंटरमीडिएट में बालकों के उत्तीर्ण प्रतिशत 69.34 और बालिकाओं के उत्तीर्ण का प्रतिशत 83 रहा।

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सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली जान से मारने की धमकी, केस दर्ज

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर से जान से मारने की धमकी मिली है। किसी अज्ञात शख्स ने 112 नंबर पर मैसेज कर ये धमकी दी है, जिसके बाद हड़ंकप मच गया है। सीएम योगी को मिली धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसिया अलर्ट हो गई हैं और इस मामले की जांच में जुट गई हैं। सीएम योगी को धमकी मिलने के बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में अज्ञात शख्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 506 और 507 आईपीसी और 66 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

खबर के मुताबिक 23 अप्रैल की रात को 112 नंबर के व्हाट्स एप नंबर पर एक मैसेज आया। इस मैसेज को कम्युनिकेशन अधिकारी शिखा अवस्थी ने उठाया, जिसमें सीएम योगी को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जिसके बाद उन्होंने इस मैसेज का एक स्क्रीन शॉट ले लिया और तत्काल इसकी खबर बड़े अधिकारी की दी. इस मामले में अब लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई हैं कि ये धमकी देने वाला शख्स कौन है ? पुलिस आरोपी का पता लगा रही है।

पहले भी दी जा चुकी सीएम योगी को धमकी

ये पहली बार नहीं है जब सीएम योगी आदित्यनाथ को इस तरह की धमकी दी गई हो, योगी सरकार के सख्त कदमों के चलते कई बार उन्हें इस की धमकी दी जा चुकी है। एक हफ्ते पहले भी उन्हें फेसबुक के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई थी। ये फेसबुक पोस्ट बागपत के अमन रजा के प्रोफाइल से शेयर की गई थी, इस पोस्ट में भी सीएम योगी गोली से मारने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया था।

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आखिर संजय राउत क्यों कर रहे महाराष्ट्र में सरकार गिरने का दावा ?

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उथल-पुथल शुरू हो गई है। सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि अगले 15-20 दिन में राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार गिर जाएगी। वहीं, राउत की पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि राज्य में चुनाव कभी भी हो सकते हैं और इसके लिए उनकी पार्टी तैयार है। इससे पहले एनसीपी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार की उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात ने भी राज्य का सियासी पारा चढ़ा दिया था।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई में शिंदे सरकार गिरने वाली है? संजय राउत क्यों ऐसा दावा कर रहे हैं? इसके सियासी मायने क्या हैं? मौजूदा समीकरण क्या है? आइये जानते है……..

उद्धव ठाकरे ने क्या बोला ?

उद्धव ठाकरे ने जलगांव में एक रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि राज्य में चुनाव कभी भी हो सकते हैं। उनकी पार्टी इसके लिए तैयार है। ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य बीजेपी प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि शिंदे की पार्टी को कुल 288 में से केवल 48 सीटें आवंटित की जाएंगी। उन्होंने पूछा क्या बीजेपी केवल 48 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी ?

संजय राउत ने क्या कहा ?

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया, ‘इस सरकार का डेथ वॉरंट जारी हो चुका है। अब देखना यह है कि इसपर साइन कौन करता है? हम लोग अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले 15-20 दिनों के अंदर ही यह सरकार गिर जाएगी।’ राउत उद्धव ठाकरे नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने वाले 16 विधायकों (शिंदे गुट) को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिका पर लंबित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र कर रहे थे।

किस आधार पर सरकार गिरने का दावा कर रहे हैं संजय राउत ?

शिवसेना में हुई आंतरिक फूट का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले में उद्धव गुट ने शिंदे गुट के 16 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। अगर ये विधायक अयोग्य घोषित होते हैं, तो राज्य सरकार पर संकट आ जाएगा। दरअसल जिन विधायकों की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, उनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल हैं। हालांकि, 16 विधायकों के अयोग्य होने के बाद भी राज्य सरकार अल्पमत में नहीं आएगी। हालांकि, इसके बाद शिंदे गुट के बाकी विधायकों पर भी संकट आएगा। जो राज्य सरकार के लिए बड़ा खतरा होगा।

शिंदे के अयोग्य होने के बाद क्या अजीत पवार को साथ लाएगी भाजपा ?

महाराष्ट्र में सियासी हलचल इसलिए भी तेज है क्योंकि पिछले दिनों खबर आई थी कि एनसीपी नेता अजीत पवार अपने कई विधायकों को लेकर अलग हो सकते हैं। अजीत के भाजपा नेताओं से मुलाकात की भी खबर आई थी। हालांकि, बाद में अजीत पवार ने सफाई दी है कि वह मरते दम तक एनसीपी में ही रहेंगे।

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अब यूपी नहीं है किसी की बपौती, कहीं कर्फ्यू नहीं लगता – सीएम योगी आदित्यनाथ

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज सहारनपुर से निकाय चुनाव के चुनाव प्रचार का आगाज किया। सीएम योगी ने माफिया और अपराधियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि अब सहारनपुर में तो क्या, उत्तर प्रदेश में भी कहीं कर्फ्यू नहीं लगता, अब तो कांवड़ यात्रा निकलती है। ये कांवड़ यात्रा अप प्रदेश की पहचान बन चुकी है। पहले नौजवानों पर झूठे मुकदमे होते थे। आज यूपी में झूठा मुकदमा कोई नहीं कर सकता। पहले किसान आत्महत्या करता था, आज किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की रकम मिल रही है।

पहले दंगे होते थे कर्फ्यू लगता था

सीएम योगी ने कहा कि हमने किसी का कभी चेहरा नहीं देखा, सबका साथ सबका विकास इस रूप में कार्य किया। पहले सहारनपुर में बिजली नहीं आती थी, दंगे होते थे और कर्फ्यू लगते थे। अब दंगे नहीं होते, कर्फ्यू नहीं लगता। पहले मेरठ में डिग्री के लिए जाना होता था। अब मां शांकबरी विवि का निर्माण हो रहा है। इतना ही नहीं, दिल्ली की दूरी सात से आठ घंटे में तय होती थी। अब ये दूरी कम हो चुकी है, जल्द ही दिल्ली सहारनपुर एक्सप्रेस हाइवे का काम पूरा कर लिया जाएगा।

यूपी की विकास यात्रा पर – सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास का काम हो रहा है। माफिया आतंक के लिे जगह नहीं है। आज घर में काष्ठ कला देखने को मिलती है। 2017 से पहले सरकारों को दंगा कराने से फुर्सत नहीं मिलती थी। सिख भाइयों पर हमला करवाया गया था। कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी। आज प्रदेश विकास कर रहा है और यूपी की विकास यात्रा हर किसी को पता है।

तीसरे इंजन को जोड़ने के लिए हो रहा ये चुनाव – सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि यह चुनाव डबल इंजन की सरकार के साथ तीसरे इंजन को जोड़ने के लिए हो रहा है। जिसमें नगर निगमों के महापौर, पार्षद, नगर पालिका और नगर पंचायतों के अध्‍यक्षों और सभासदों को कमल निशान पर मत देकर चुनाव जिताना है और जब बहुमत का उनका बोर्ड बनेगा तो दिल्ली से जो पैसा आएगा उसका सदुपयोग होगा। ” उन्होंने कहा, ”हमें तय करना है कि हमें 2017 के पहले की जातिवादी सरकारें चाहिए या फिर गरीब कल्‍याण के लिए समर्पित सरकार चाहिए।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा गोलियों की तड़तड़ाहट होनी चाहिए या फिर भजन गंगा का प्रवाह

हमें तय करना है कि गलियों में अपराधियों की गोलियों की तड़तड़ाहट होनी चाहिए या फिर भजन गंगा का प्रवाह सुनाकर लोगों के जीवन में परिवर्तन।” सीएम आदित्यनाथ ने कहा, ”मां शाकंभरी का आशीर्वाद मिले, मैं इसलिए यहां से चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। हमने जाति, मजहब या किसी का चेहरा देखे बिना सभी तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया।” उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सहारनपुर विकास की एक नई आभा के साथ देश और दुनिया के सामने चमकता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्‍होंने सहारनपुर के लिए विकास योजनाओं को भी विस्तार से बताया।

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले बिहार के सीएम नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे। सीएम नीतीश कुमार और अखिलेश यादव की यह मुलाकात विपक्ष की एकजुटता को लेकर मानी जा रही है। क्योंकि इससे पहले सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात की है।

सतर्क रहना है इसलिए बातचीत कर रहे हैं – नीतीश कुमार

कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि अब पता नहीं, ये(भाजपा) इतिहास बदल देंगे या क्या कर देंगे ? इसके साथ ही जद(यू) नेता नीतीश कुमार ने कहा था कि सभी को सतर्क होना है। इसलिए हम सभी के साथ बातचीत कर रहे हैं। वहीं सीएम नीतीश ने कहा था कि हमारे बीच बहुत अच्छी बात हुई है। आवश्यकता अनुसार हम भविष्य में अन्य पार्टियों को साथ में लाकर बातचीत करेंगे।

सभी लोग आपस में बैठकर बातचीत करें – नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बातचीत हो ही गई है और पहले तो हमारा संबंध इनके साथ रहा ही है। आना जाना हमारा यहां से बराबर होता था। कुछ वर्षों से हम लोग नहीं आ पा रहे थे। उनसे बात हुई तो बहुत खुशी हुई है। हम लोगों की जो बातचीत हुई, वह मुख्य रूप से यह है कि हमलोगों को ज्यादा से ज्यादा सभी पार्टियों के साथ मिलकर कर अगले लोकसभा के चुनाव से पहले पूरी तैयारी करनी है। नीतीश कुमार ने कहा कि सभी लोग आपस में बैठकर बातचीत करें और आगे का सब कुछ तय करें। देश हित में आगे जो कुछ भी करना है इस पर विचार कर लें।

जेपी मूवमेंट की शुरुआत बिहार से हुई थी – ममता बनर्जी

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे खुशी हुई कि नीतीश और तेजस्वी जी अपने मंत्रियों के साथ आए। ममता बनर्जी ने कहा कि हम लोगों ने नीतीश जी से रिक्वेस्ट किया है कि जिस तरह से जयप्रकाश जी का आंदोलन बिहार से हुआ था तो हम भी बिहार में ऑल पार्टी मीटिंग करें हमें एक संदेश देना है कि हम सभी एक साथ हैं। मैंने तो पहले ही कह दिया है कि मुझे इससे कोई एतराज नहीं है, मैं चाहती हूं कि बीजेपी जीरो बन जाए। इसके साथ ही सीएम ममता बनर्जी ने कहा-” नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने बीजेपी के खिलाफ अच्छा काम किया है।

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पाकिस्तानी मूल के लेखक तारिक फतेह का हुआ निधन, लम्बे समय से थे बीमार

पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक और स्तंभकार तारिक फतेह का निधन हो गया है। वे पिछले काफी लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की जानकारी उनकी बेटी नताशा ने ट्वीट कर दी। वह 73 वर्ष के थे। उनकी बेटी नताशा ने अपने ट्वीट में लिखा, “पंजाब का शेर। हिंदुस्तान का बेटा। कनाडा का प्रेमी। सच्चाई का पैरोकार, न्याय के लिए लड़ने वाला। दबे-कुचलों और शोषितों की आवाज। तारिक फतेह नहीं रहे। उनकी क्रांति उन सभी के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे।

भारतीय फिल्ममेकर ने जताया दुख

उनके निधन पर भारतीय फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट कर दुख जताया है। उन्होंने लिखा, “एक ही था तारिक फतेह- साहसी, मजाकिया, जानकार, विचारक, महान वक्ता और एक निडर सेनानी. तारिक, मेरे भाई, आपको एक घनिष्ठ मित्र के रूप में पाकर प्रसन्नता हुई। “ओम शांति”

अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे तारिक फ़तेह

कनाडा में रहने वाले लेखक इस्लाम और आतंकवाद पर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे। फतेह ने कई बार पाकिस्तान की आलोचना करते हुए केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को अपना समर्थन व्यक्त किया था। उन्होंने कनाडा में एक राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार और टेलीविजन होस्ट के रूप में काम किया है, और कई किताबें लिखी हैं।

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यूपी बोर्ड ने किया ऐलान, जानें कब जारी होगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट

यूपी बोर्ड रिजल्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट 2023 का रिजल्ट कल यानि (25 अप्रैल) जारी किया जाएगा। बता दें कि ये पहली बार हो रहा है कि यूपी बोर्ड का रिजल्ट सीबीएसई बोर्ड से पहले जारी होगा। जो उम्मीदवार इस साल की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे, जारी होने के बाद यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। बता दें कि इस बार तय समय से एक दिन पहले 31 मार्च को उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पूरा हुआ था। बता दें कि राज्य भर में 258 केंद्रों पर 18 मार्च से मूल्यांकन शुरू हुआ था। यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने जानकारी दी।

कुल 3.19 करोड़ कापियों का मूल्यांकन

बोर्ड सचिव ने बताया कि हाईस्कूल की लगभग 1.86 करोड़ और इंटरमीडिएट की 1.33 करोड़ कॉपियों को मिलाकर कुल 3.19 करोड़ कापियों का मूल्यांकन किया गया है। इन कापियों के मूल्यांकन के लिए 143933 परीक्षक लगाए गए थे। वहीं, मूल्यांकन केंद्रों पर सुचिता के लिए सीसीटीवी लगाए गए थे और जिला व राज्य मुख्यालय की तरफ से इसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी। इस बार यह पहली दफा हुआ कि परीक्षकों को ट्रेनिंग दिया गया था।

इतने परीक्षार्थियों छोड़ी यूपी बोर्ड की परीक्षा

दिब्यकांत शुक्ल ने आगे जानकारी दी कि इस बार सरकार ने बोर्ड एग्जाम को लेकर काफी सख्ती की थी। जिस कारण हाईस्कूल में 208953 और इंटरमीडिएट में 222618 को मिलाकर 4,31,571 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। जानकारी के लिए बता दें कि हाई स्कूल में 13,16,487 और इंटरमीडिएट में 27,69,258 को मिलाकर बोर्ड परीक्षा के लिए 58,85,745 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इस बार योगी सरकार ने बोर्ड परीक्षा के लिए काफी सख्त तेवर अपनाया था। जिस कारण यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल करते 81 परीक्षार्थी सहित कुल 133 मुन्नाभाई पकड़े गए थे।

नक़ल विहीन हुई इस बार की यूपी बोर्ड परीक्षाएं

बता दें कि इस बार बोर्ड परीक्षाएं 16 फरवरी से 4 मार्च के बीच आयोजित हुई थी। प्रदेश भर में बोर्ड परीक्षा के लिए 8753 परीक्षा केंद्रों बनाए गए थे। सरकार की सख्ती के कारण इस बार राज्य में कोई पेपर लीक की घटना, गलत पेपर ओपनिंग नहीं हुई और बोर्ड परीक्षा नकलविहीन सम्पन्न हुई।

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अतीक के दफ्तर में मिला खून से सना चाकू, जगह-जगह बिखरा हुआ खून

प्रयागराज में अतीक अहमद के चकिया स्थित दफ्तर में खून के धब्बे मिलने से हड़कंप मच गया है। इन धब्बों को देखकर ये कहा जा सकता कि ये ज्यादा पुराने नहीं है। अतीक के पूरे दफ्तर में जगह-जगह खून के निशान दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं यहां पर एक खून से सना चाकू और एक सफेद रंग का दुपट्टा मिला है, जिस पर भी खून के धब्बे लगे हुए। इन हालातों को इस तरह की आशंका जताई जा रही है कि कहीं इस दफ्तर में कोई अनहोनी तो नहीं हुई है।

अतीक अहमद की हत्या के बाद उसके दफ्तर के अंदर इस तरह खून के धब्बे मिलना और पूरा दफ्तर अस्त व्यस्त होना बेहद चौंकाने वाला मामला है। खून के ये धब्बे ग्राउंड फ्लोर से होकर ऊपर की ओर तक दिखाई देते हैं। जबकि खून से सना चाकू नीचे ही पड़ा हुआ हैं. खून के निशान ग्राउंड फ्लोर से ऊपर सीढ़ियों पर भी जगह-जगह दिखाई देते हैं। ऊपर कमरे में सोफे पर एक सफेद रंग का दुपट्टा रखा हुआ है, जिस इस पर खून के निशान लगे हुए हैं। एक जगह टूटी हुई चूड़ियां भी मिली हैं।

मामले की जांच में जुटी पुलिस

इस खबर की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस की टीम मामले की जांच के लिए दफ्तर में पहुंची हुई है और मौके से सबूत इकट्ठा करने में जुटी हुई है। पुलिस अतीक के दफ्तर की तलाशी ले रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यहां पर क्या हुआ है। क्या यहां पर किसी की हत्या की गई है या फिर यहां कोई अनहोनी हुई है।

चकिया स्थित अतीक का ये वही दफ्तर है जहां पर लोगों का अपहरण कर लाया जाता था और फिर उन्हें टॉर्चर किया जाता था। अतीक अहमद के इस दफ्तर के आगे के हिस्से को बुलडोजर से ढहाया जा चुका है। वहीं अब इस मामले में पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस हाई प्रोफाइल केस में इस दफ्तर की निगरानी क्यों नहीं की गई, पुलिस ने इसे सील क्यों नहीं किया।

अतीक के दफ्तर में मिले खून के निशान

आपको बता दे कि अतीक के दफ्तर में सारा सामान बुरी तरह से अस्त व्यस्त है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि यहां पर कुछ ढूंढने की कोशिश की गई है। किचन में भी चावल और दूसरा सामान बेतरतीब हिसाब से फैला हुआ है। किचन के अंदर भी खून के निशान हैं, अलमारी के कपड़े बाहर फैले हुए हैं। कागजों में भी कुछ ढूंढने की कोशिश की गई है जिसकी वजह से दफ्तर में कागज भी बिखरे हुए हैं।

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प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड की योजना 11 फरवरी को बरेली के केंद्रीय कारागार टू में बनाई गई थी, यह बात काफी पहले साबित हो चुकी है। अब जेल में अशरफ से मिलने आए असद समेत शूटरों का वीडियो वायरल हो रहा है। 11 फरवरी को हुई इस मुलाकात का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें गुड्डू मुस्लिम उर्फ गुड्डू बमबाज, असद, उस्मान और गुलाम के चेहरे साफतौर पर पहचान में आ रहे हैं। इनमें से गुड्डू मुस्लिम को छोड़कर बाकी तीनों एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। बाकी शूटर अभी तक फरार हैं।

अशरफ से मिलने वाले नहीं जानते थे कौन है अशरफ

बिथरी पुलिस व एसआईटी ने अशरफ से मुलाकात करने वाले जिन राशिद और फुरकान को गिरफ्तार किया था, वे भी अशरफ को नहीं जानते थे। राशिद ने बताया कि लल्ला गद्दी उसका फुफेरा भाई है। बिरादरी का होने के नाते वह उसे 25 जनवरी को अशरफ से मिलवाने ले गया था। इस दौरान जाइद गद्दी, बब्बू गद्दी आदि लोग साथ थे।

उधर, फुरकान ने बताया था कि मौसेरे भाई नाजिश के दोस्त लल्ला गद्दी के साथ सद्दाम को दो साल पहले देखा था। सद्दाम से भी वह इंस्टाग्राम के जरिये जुड़ गया था। एक बार सद्दाम ने उसे बुलाया कि अशरफ से मिलने कुछ लोग आ रहे हैं तो वह भी कभी जेल न देखने की वजह से चला आया। इसी में वह फंस गया है।

असद की अतीक से मुलाकात जेल में हुई मैनुअल तरीके से

एसटीएफ की जांच में अतीक अहमद के बेटे असद का आधार कार्ड पर्ची के साथ मिला था। दोपहर 1.22 बजे सात से आठ लोग जेल आए थे जो 3.14 बजे बाहर निकले। पौने दो घंटे जेल में बिताने के बाद वे चले गए। इससे पहले 26 सितंबर 2021 से 26 जून 2022 के बीच में नौ मुलाकातें कंप्यूटराइज्ड पर्ची से कराई गई थीं। शेष 23 मुलाकातें 14 आवेदन पत्रों पर मैनुअल तरीके से कराई गई थीं।

इन मुलाकातों के लिए केवल दो से तीन लोगों के नाम पते और पहचान पत्र जमा कराए गए थे। इन बिंदुओं पर जांच के बाद पुलिस व डीआईजी जेल की रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक समेत सात अधिकारी व कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं। जेल वार्डर शिवहरि अवस्थी व मनोज गौड़ अभी जेल में बंद हैं। इनके खिलाफ एसआईटी मुकदमा भी दर्ज करा चुकी है। अब वीडियो वायरल होने से उमेश पाल हत्याकांड की दोबारा चर्चा होने लगी है।

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भिंडरावाला की कैसेट सुनने का शौकीन, जानें अमृतपाल सिंह की पूरी क्राइम कुंडली

अमृतपाल सिंह को आज पंजाब पुलिस ने मोगा से गिरफ्तार कर लिया है। ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख को अमस की डिब्रूगढ़ जेल लेकर जाया जा रहा है, जहां इसके दूसरे साथी भी कैद हैं। पुलिस के शिकंजे के बाद अब अमृतपाल की पूरी क्राइम कुंडली सामने आई है। अमृतपाल के पंजाब से लेकर इंटरनेशनल लिंक का खुलासा हुआ है। अमृतपाल सिंह पंजाब के अमृतसर देहात के जल्लुपुर खेड़ा गांव का रहने वाला है और ये 25 सिंतबर 2022 से हिंदुस्तान में मौजूद है। साल 2012 में अमृतपाल दुबई गया था और वहां अपने पिता तरसेम की संधू कार्गो कंपनी में काम करता था।

दीप सिद्धू की मौत के बाद मिली कमान

साल 2022, फरवरी में दीप सिद्धू की मौत के बाद एस सिमरजीत सिंह मान ने अमृतपाल को ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रेसिडेंट बनाया था। हिंदुस्तान आने के पहले अमृतपाल जॉर्जिया देश में एक महीने तक रुका हुआ था। 20 अगस्त साल 2022 को जैसे ही अमृतपाल सिंह एकदम से हिंदुस्तान आया उसका यहां भव्य स्वागत किया गया। वो अपने भड़काऊ भाषणों के जरिये पंजाब में बहुत मशहूर हुआ। ये अक्सर अपने भाषण से सिखों को यह कहकर भड़काया करता था कि सिखों को गुलामी की बेड़ियों से बाहर आने की जरूरत है।

भिंडरावाला के ऑडियो कैसेट सुनने का शौकीन है अमृतपाल सिंह

अमृतपाल एकदम कट्टरपंथी विचारधारा वाला शख्स है और जरनैल सिंह भिंडरावाला के ऑडियो कैसेट सुनने का शौक रखता है। जब तक ये दुबई में रहा, इसने हमेशा अपने बाल छोटे रखे और न पगड़ी बांधी। पिछले 4, 5 सालों से वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव था और अक्सर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये पंजाब और सिखों से जुड़े धार्मिक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपना भाषण देता रहा है। अमृतपाल के दुबई में पांच मोबाइल नंबर थे।

अमृतपाल युवाओं को करता था गुमराह

कानून का मजाक उड़ाते हुए अमृतपाल के जितने भी अंगरक्षक थे, वह कानून के आदेश का मजाक उड़ाते हुए खुले में हथियार लहराते हुए जाते हैं। नवंबर 2022 में अमृतपाल ने अपने गांव में एक नशा मुक्ति केंद्र भी खोला और इसी नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में वह युवाओं को भड़का रहा था। अपने परिवार की मौजूदगी में वो उन ड्रग्स एडिक्ट युवाओं की खुद मसाज करता था ताकि उसे लोग मसीहा समझने लगे। यह भी अमृतपाल का एक प्रोपेगेंडा था ताकि वह इन्हीं में से टैलेंट हंट एक्सरसाइज के जरिए अपने हार्डकोर सपोर्टर जिन्हें मरजी वाराज कहा जाता है, तलाश रहा था।

कट्टरपंथियों को ही चुभने लगा था अमृतपाल

सामने आया है कि अमृतपाल ईसाई समुदायों को लगातार टारगेट कर रहा था। उसके निशाने पर ईसाई समुदाय से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोग भी थे। हाल ही में अमृतपाल ने वहवाल इंसाफ मोर्चा जो कि आतंकियों कि बरसी पर मनाई जाती है, उसमें शिरकत की थी। वो अक्सर कट्टरपंथियों से, चाहे वो राजनीति से जुड़े हों या फिर धर्म से, उनसे अपने रिश्ते मजबूत कर रहा था। लेकिन अमृतपाल की पंजाब में बढ़ती लोकप्रियता कट्टरपंथियों को चुभ रही थी।

वह अपनी कट्टरपंथी गतिविधियों को धार्मिक आड़ और चोले में छिपाकर लोगों को गुमराह कर रहा था। 25 सितंबर 2022 को देखते ही देखते अमृतपाल ने बड़ा धार्मिक चोला ओढ़ लिया लेकिन उसके पीछे एक दूसरा अमृतपाल छुपा हुआ था। 23 नवंबर साल 2022 से वह श्री अकाल तख्त साहिब से तख्त श्री केसगढ़ साहिब तक पैदल मार्च का कार्यक्रम बनाने का प्लान किया था ताकि वो सिखों के बीच हर गांव, शहर, हर कस्बे में अपने अमृत संचार का प्रोपेगेंडा फैलाए।

कौन हैं अमृतपाल के बेहद खास लोग

अमृतपाल के बेहद करीबी उसके चाचा हरजीत सिंह हैं। जोडे प्रेसिडेंट ऑफ एएसआरआर, यूथ विंग एएसडी, हरमेल सिंह। अमृतपाल का पीएस वसंत सिंह, सुखदीप सिंह पहले दीप सिद्धू का खासम खास था, फिलहाल अमृतपाल से जुड़ा हुआ है। बलजिंदर सिंह से अमृतपाल के पारिवारिक संबंध हैं।

जगमोहन सिंह उर्फ जग्गू पेशे से किसान और अमृतपाल का कट्टर समर्थक है। गुरमीत सिंह बुक्कन वाला वारिस पंजाब का स्टेट कमिटी मेंबर है। वारिस पंजाब का डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट, बघेल सिंह। यह वही शख्स है जिसने लाल किले पर 26 जनवरी 2022 को केसरी झंडा लहराया था लेकिन अब अमृतपाल के कहने पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता था। दलजीत कलसी पेशे से एक्टर और अमृतपाल का कथित फाइनेंसर है। हरप्रीत सिंह देवगन पटियाला में एक होटल का मालिक और इसका कट्टर समर्थक है।

कहां से मिलती थी अमृतपाल को फंडिंग

एसपीएस ओबेरॉय मैनेजिंग ट्रस्टी ऑफ शरबत द भाला। जॉन सिंह सिख फॉर जस्टिस का एक्टिव मेंबर रेफरेंडम 2020 की हर एक्टिविटी में पार्ट लेने वाला महत्वपूर्ण सदस्य है। इमाम सिंह YAD का संस्थापक जॉन सिंह का करीबी है। सुरजीत नाट, इस शख्स ने वारिस पंजाब दे को कनाडा से ₹1,00,000 भेजे और इसमें गुरदीप सिंह जो कि संगरूर का रहने वाला है, उसे अमृतपाल को यह पैसे देने के लिए कहा था।

सुरेंद्र सिंह ने वारिस पंजाब के हरजिंदर सिंह को कहा था कि वह क्रिप्टो करेंसी के जरिए इस संस्था को मोटा चंदा देना चाहता है इसने हरजिंदर को एक क्रिप्टोकरंसी वॉलेट विदेश में क्रिएट करने के लिए कहा ताकि वह विदेश से पैसा फंड कर सके। ये रोपड़ का रहने वाला है लेकिन इस वक्त रांची झारखंड में इसके होने के इनपुट्स मिले हैं।

अवैध हथियारों से अमृतपाल सिंह सुरक्षा करते थे बॉडीगार्ड्स

अमृतपाल सिंह के 24 घंटे साथ रहने वाले बॉडीगार्ड्स के अवैध हथियारों की डिटेल भी सामने आई है। फरीदकोट का रहने वाला सुख राजकरण करण सिंह जिसका लाइसेंस 12 जून 2022 को खत्म हो चुका था उसके बावजूद 32 बोर की रिवाल्वर और 25 जिंदा कारतूस उस से बरामद किए गए और यह अमृतपाल के लगातार साथ रह रहा था। फरीदकोट के ही रहने वाला गुरबेज सिंह के कब्जे से 315 बोर की राइफल बरामद हुई। यह अमृतपाल का सशस्त्र बॉडीगार्ड है जोकि अवैध हथियार से अमृतपाल की रक्षा कर रहा था। मोगा का रहने वाला गुरमीत सिंह बुक्कन वाला के कब्जे से 32 बोर की रिवाल्वर बरामद की गई थी जो कि बिना लाइसेंस की थी।

अंगरक्षकों के पास हथियारों का जखीरा

12 बोर की डबल बैरल बंदूक पटियाला के रहने वाला अवतार सिंह से भी बरामद की गई थी जिसे बिना लाइसेंस के रखा गया था। पटियाला का ही रहने वाला हरप्रीत सिंह के कब्जे से 2 अवैध हथियार बरामद हुए जो 32 बोर के थे। 30 पॉइंट, 06 स्प्रिंगफील्ड राइफल बिना लाइसेंसी बरामद की गई थी। अमृतसर ग्रामीण का रहने वाला हरजीत सिंह, इसके भी हथियार का लाइसेंस रद्द हो चुका था।

उसके बावजूद 12 बोर की डबल बैरल बंदूक और साथ ही एक रिवाल्वर एक पिस्टल अपने साथ रख रहा था। तरनतारन का रहने वाला बलजिंदर सिंह इसका भी लाइसेंस काफी पहले रद्द हो चुका था, इसके पास से एक डबल बैरल गन रिवाल्वर और एक 315 बोर की राइफल बरामद की गई थी यह भी कनाडा में रहता था और कभी-कभी पंजाब आता था। तरनतारन का ही रहने वाला अमृतपाल सिंह पेशे से दुकानदार है इसके पास से भी 32 बोर की पिस्टल बरामद की गई।

अमृतपाल सिंह हमेशा देश विरोधी भाषण देता था

अमृतपाल की भड़काऊ स्पीच पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कहा गया है कि अमृतपाल सिंह हमेशा देश विरोधी भाषण देता था। साथ ही सिख नौजवानों को हथियार उठाने के लिए भड़का रहा था। इसके अलावा भारत के लोकतंत्र के खिलाफ सिख नौजवानों को भड़का कर गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने की बात करता था और कहता था कि गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी करने वाले का कत्ल करना कोई गलत बात नहीं है। अमृतपाल ने अपने टीवी भाषण में खालिस्थान बनाने की बात पर जोर दिया था।

हाल ही में अमृतपाल ने जितने भी समागम किये हैं या जितने भी सभाओं में वह शामिल रहा, वहां पर पब्लिक के बीच हथियार लहरा कर उन्हें भड़काने का काम कर रहा था। अमृतपाल सिंह पर एनएसए लगाना इसलिए जरूरी था क्योंकि जब से यह दुबई से भारत आया है तबसे यह पंजाब में ना सिर्फ अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा था, बल्कि देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहा था।

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अंत नहीं शुरुआत है – अमृतपाल, भिंडरावाला के गांव से पकड़ा गया अमृतपाल सिंह

अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पंजाब के एडीजी कानून व्यवस्था अर्पित शुक्ला ने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख अमृतपाल अब पंजाब पुलिस की गिरफ्त में है। खबरों के मुताबिक अमृतपाल सिंह को मोगा से पकड़ा गया है। अजनाला कांड के बाद से ही अमृतपाल फरार था और अब खबर है कि अमृतपाल सिंह पुलिस के शिकंजे में आ गया है।

पंजाब पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि ‘वारिस पंजाब दे’ का चीफ और खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह को पंजाब पुलिस ने पंजाब के मोगा जिले से गिरफ्तार किया है। जसबीर सिंह रोडई के अनुसार, अमृतपाल कल रोडे गांव पहुंचा जहां सुबह 7 बजे गांव की गुरुद्वारा में प्रार्थना के बाद उसने वहां भी उपदेश दिया और फिर जसबीर सिंह रोडई ने पुलिस को अमृतपाल के बारे में बताया जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

भिंडरावाला के गांव से हुआ गिरफ्तार

बता दें कि अमृतपाल सिंह 18 मार्च से ही फरार चल रहा था और करीब एक महीने से उसकी अलग-अलग राज्यों में मौजूद होने के इनपुट मिलते रहे। लेकिन आज पुलिस ने उसे पंजाब के मोगा से गिरफ्तार किया है। जानकारी मिली है कि मोगा के रोडे गांव से अमृतपाल को गिरफ़्तार किया गया है। ये गांव जरनैल सिंह भिंडरावाला का भी पैतृक गांव है। पंजाब पुलिस ने 18 मार्च को अमृतपाल सिंह और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन वह फरार होने में कामयाब हो गया था और अब जाके पुलिस के हाथ आया है।

असम की डिब्रूगढ़ जेल लेकर जायेंगे अमृतपाल सिंह को

गौरतलब है कि ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख अमृतपाल पुलिस के शिकंजे में 36 दिन बाद आया है। अमृतपाल 18 मार्च से ही अजनाला से फरार चल रहा था जो आज जाकर मोगा में मिला है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद अब अमृतपाल को सड़क मार्ग से अमृतसर लेकर जा रहे हैं और फिर वहां से सीधा फ्लाइट से असम की डिब्रूगढ़ जेल ले जाएंगे।

दो बार पुलिस के हाथों से फिसला था अमृतपाल

अमृतपाल और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई 18 मार्च से शुरू हुई थी। वह हालांकि दो बार पुलिस के शिकंजे से बच गया था – पहली बार 18 मार्च को जालंधर जिले में वाहनों को बदलकर और फिर 28 मार्च को होशियारपुर में जब वह अपने प्रमुख सहयोगी पपलप्रीत सिंह के साथ पंजाब लौटा।

अजनाला थाने पर बोला था धावा

कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह अपने एक गिरफ्तार सहयोगी की रिहाई के लिए अजनाला पुलिस थाने पर उसके समर्थकों द्वारा धावा बोलने के बाद पंजाब पुलिस की तरफ से की गई कार्रवाई के एक महीने बाद भी फरार है। उसकी पत्नी किरणदीप कौर को गुरुवार को अमृतसर हवाईअड्डे पर अधिकारियों ने उस समय रोक लिया जब वह लंदन जाने वाली एक फ्लाइट में सवार होने की कोशिश कर रही थी। अमृतपाल ने इसी साल फरवरी में ब्रिटेन में रहने वाली कौर से शादी की थी।

अमृतपाल के ऑडियो-वीडियो आए थे सामने

फरार रहने के दौरान अमृतपाल के दो वीडियो और एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर आए। 30 मार्च को सामने आए अपने दो वीडियो में से एक में अमृतपाल ने जोर देकर कहा कि वह भगोड़ा नहीं है और जल्द ही पेश होगा। खालिस्तान समर्थक उपदेशक ने दावा किया था कि वह उन लोगों की तरह नहीं है जो देश छोड़कर भाग जाएंगे। ऐसी अफवाहें थीं कि अमृतपाल बठिंडा के तलवंडी साबो में तख्त दमदमा साहिब में बैसाखी पर आत्मसमर्पण कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमृतपाल सिंह मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार हुआ है।

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जीप से उतरते वक्त जिसे देखकर अतीक अहमद ने किया था इशारा, क्या था मतलब

अतीक अहमद और उसका माफिया भाई अशरफ जैसे ही शनिवार रात मेडिकल के लिए प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल पहुंचते हैं, तो पुलिस की जीप से उतरते ही अतीक अहमद अपने बाईं ओर किसी को देखकर सिर हिलाता दिखता है। इसके कुछ ही सकेंड बाद अतीक और अशरफ पर गोलियों की बरसात होती है और दोनों ही मारे जाते हैं। बताया जा रहा है कि जिसकी और अतीक ने इशारा किया था वह शख्स उनके मर्डर की प्लानिंग के बारे में बताने आया था।

हत्याकांड की जांच करेगा न्यायिक आयोग

वहीं आज यूपी के सबसे बड़े माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की सरेआम मर्डर के मामले में अहम दिन है। शूटआउट के तुरंत बाद बना न्यायिक आयोग हत्याकांड की जांच करेगा। आयोग के सदस्य सीएम योगी से भी मुलाकात कर सकते हैं। वहीं सीएम योगी के निर्देश पर दो और जांच टीमें बनाई गई हैं। हत्याकांड की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी। वहीं एसआईटी के काम को मॉनिटर करने के लिए एक सर्वेयर टीम का भी गठन किया गया है। इतना ही नहीं शूटआउट का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

अतीक अहमद को क्या बताने आया था शख्स ?

सूत्रों की मानें तो अतीक की हत्या से ठीक पहले कॉल्विन अस्पताल के गेट पर अतीक अहमद से मिलने के लिए कोई अनजान व्यक्ति आया था। माना जा रहा है कि वो अनजान व्यक्ति क्या अतीक और अशरफ को उनके मर्डर के प्लानिंग की सूचना देने अस्पताल पहुंचा था। अतीक और अशरफ की हत्या से ठीक पहले ये कैमरे में भी कैद हुआ था कि पुलिस की गाड़ी से उतरते ही अतीक अहमद ने उस शख्स को देखकर अपना सिर हिलाया था। इस अनजान व्यक्ति को देखर अतीक अहमद पल भर के लिए ठहर भी गया था।

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