Sunday, April 5, 2026
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अतीक अशरफ हत्याकांड में बड़ा खुलासा, तीन शूटर्स नहीं बल्कि इतनों ने की …..

अतीक अहमद अशरफ हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में यह जानकारी सामने आई है कि हत्याकांड में तीन शूटरों के अलावा दो अन्य लोग भी शामिल थे। यह वह थे जो मौके पर मौजूद रहकर शूटरों को कमांड दे रहे थे। इनमें से एक स्थानीय था और उसने ही शूटरों के रहने, खाने से लेकर उन्हें अतीक अशरफ की लोकेशन देने तक का काम किया था।

दरअसल, वारदात के बाद कुछ ऐसी बातें सामने आईं थीं, जिससे शुरू से ही अंदेशा जताया जा रहा था कि हत्याकांड में तीन से ज्यादा लोग शामिल थे। दरअसल शूटरों का सटीक टाइमिंग से मौके पर पहुंचना, उनसे मोबाइल या रुपये बरामद न होना, तीनों का अलग-अलग जनपदों का होना, प्रयागराज से कोई पुराना कनेक्शन न होना, जैसी तमाम बातें थीं जो कुछ और ही इशारा कर रही थीं।

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने कस्टडी रिमांड पर लिए गए तीनों शूटरों से इन्हीं के बाबत सवाल पूछे गए कि जब उनके पास मोबाइल नहीं था तो आखिर कैसे पता चला कि माफिया भाई कितने बजे अस्पताल पहुंचेंगे।

इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढ़ने के दौरान यह बात सामने आई कि घटनास्थल पर शूटरों के दो मददगार भी मौजूद थे। हालांकि, यह लोग कॉल्विन अस्पताल के भीतर नहीं गए थे बल्कि, बाहर ही रहकर शूटरों को लोकेशन दे रहे थे। यह बात भी सामने आई कि इन दोनों में से एक स्थानीय था जिसे शहर के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी। उसने ही शूटरों के ठहरने, खाने से लेकर अन्य इंतजाम किया था। फिलहाल इन दाेनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

दो हैंडलरों के संपर्क में थे शूटर

शूटरों से पड़ताल में यह पता चला है कि उन्हें इन दोनों हैंडलरों के ही संपर्क में रखा गया था। लेकिन यह नहीं बताया गया कि दोनों हैंडलर किसके कहने पर उनकी मदद कर रहे हैं। वह किसी से फोन पर बातें करते थे और फिर उसके अनुसार ही उन्हें कमांड देते थे। कहा जा रहा है कि हैंडलरों के पकड़े जाने के बाद ही पता चल सकेगा कि उनका आका कौन है, जिसके कहने पर वह शूटरों की मदद कर रहे थे।

अतीक अशरफ की हत्या का प्लान बदलना पड़ा

दोनों हैंडलर एक दिन पहले भी शूटरों के साथ ही थे। वह उस दिन भी कॉल्विन अस्पताल के पास मौजूद थे जब अतीक व अशरफ को मेडिकल के लिए लाया गया था। हालांकि तब मीडियाकर्मियों की भीड़ ज्यादा होने के कारण उन्हें अपना प्लान बदलना पड़ा था। इसके बाद वह बिना वारदात अंजाम दिए ही वापस चले आए थे।

अतीक-अशरफ की कस्टडी रिमांड के बाद आए थे शहर

शूटरों के बारे में यह भी पता चला है कि वह अतीक-अशरफ की कस्टडी रिमांड मंजूर होने के बाद प्रयागराज पहुंचे थे। इसके बाद उन्हाेंने धूमनगंज थाने के आसपास भी रेकी की थी। अगले दिन यानी 14 अप्रैल को भी वह धूमनगंज क्षेत्र में ही घूमते रहे। रात में जब अतीक-अशरफ को लेकर धूमनगंज पुलिस कौशाम्बी के महगांव की ओर गई थी तो उन्होंने भी वहां जाने की कोशिश की थी। लेकिन पुलिस के अचानक लौटने से उनकी प्लानिंग फेल हो गई थी। इसके बाद जब दोनों को लेकर पुलिस मेडिकल के लिए कॉल्विन पहुंची तो भी वह नाकाम रह गए। इसके बाद फिर वह मौके की तलाश में लग गए।

पुलिस लाइन में ही शूटरों मेडिकल

सूत्रों का कहना है कि कस्टडी रिमांड में अतीक-अशरफ की हत्या के बाद पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इसी क्रम में शूटरों की सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां तक कि उन्हें मेडिकल के लिए भी बाहर नहीं ले जाया जा रहा है। मेडिकल के लिए डॉक्टरों की टीम पुलिस लाइन में ही बुलाकर जांच कराई जा रही है।

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आर के पुरम थाने पहुंचे पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक, आखिर क्या है मामला

जम्मू-कश्मीर सहित चार प्रदेशों के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक, जिनकी छवि एक ‘दबंग’ जाट नेता के तौर पर रही है, लगभग तीन घंटे बाद दिल्ली के आर के पुरम थाने से बाहर आ गए हैं। दिल्ली पुलिस के डीसीपी साउथ-वेस्ट मनोज सी. ने उनकी गिरफ्तारी या हिरासत से इनकार किया है। इससे पहले उनके दर्जनों समर्थक भी थाने पहुंचे थे।

शनिवार को जैसे ही पूर्व राज्यपाल को थाने ले जाए जाने की खबरें मिलीं, तो कई राज्यों से खाप पंचायतों के प्रतिनिधि थाने के बाहर एकत्रित होने लगे। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की तैनाती भी थाने के बाहर की गई।

पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक का सम्मान करने के लिए हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खाप प्रतिनिधि, आरके पुरम के सेक्टर-12 स्थित सेंट्रल पार्क में एकत्रित हुए थे। वहां पर जैसे ही पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें कार्यक्रम में भाग लेने से रोक दिया। वहां पर टेंट गिरा दिया गया।

खाप प्रतिनिधियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। वह सामान भी इधर-उधर बिखरा पड़ा था। पुलिस ने कहा, पार्क में आयोजन की मंज़ूरी नहीं ली गई थी। दिल्ली पुलिसके मुताबिक पार्क में मीटिंग करने को लेकर उनके पास अनुमति नहीं थी, इस पर पुलिस ने आपत्ति जताते हुए कुछ नेताओं को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक थाने पहुंचे और धरना देने की घोषणा कर दी।

उन्हें बुलाया और न ही हिरासत में लिया

डीसीपी साउथ-वेस्ट के मुताबिक पूर्व गवर्नर सत्यपाल मालिक के बेटा और बेटी आरके पुरम इलाके में रहते हैं। पूर्व गवर्नर सत्यपाल मालिक भीड़ के साथ एक पार्क मीटिंग कर रहे थे, जिसकी वजह से जब पुलिस ने उनसे पूछा कि सार्वजनिक जगह पर मीटिंग की परमिशन है, तो उन्होंने कहा नहीं है, जिसके बाद सत्यपाल मालिक अपनी कार से थाने आए। पुलिस ने न तो उन्हें बुलाया और न ही हिरासत में लिया है।

आखिर पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने क्या कहा ….

बता दें कि 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक, उस वक्त जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा, प्रधानमंत्री को कश्मीर के बारे में ‘गलत जानकारी’ है। वे वहां से ‘अनभिज्ञ’ हैं।

पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की चूक के कारण फरवरी 2019 में पुलवामा में जवानों पर घातक हमला हुआ, मुझे (सत्यपाल मलिक) उसके बारे में बोलने से मना किया था। सत्यपाल मलिक ने कहा, सीआरपीएफ ने एयरक्रॉफ्ट की मांग की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विमान देने से इनकार कर दिया था। सड़क मार्ग पर प्रभावी ढंग से सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।

किसी को कुछ न बताने को कहा गया – सत्यपाल मालिक

बतौर सत्यपाल मलिक, वह हमला गृह मंत्रालय की ‘अक्षमता और लापरवाही’ का नतीजा था। उस समय राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे। मलिक ने कहा, उन्होंने इन सभी चूकों को प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया। पुलवामा हमले के दौरान प्रधानमंत्री कॉर्बेट पार्क में थे। जब पीएम से बात हुई तो उन्होंने इस बारे में चुप रहने और किसी को न बताने के लिए कहा था। एनएसए अजीत डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने और इस बारे में बात न करने के लिए कहा। मलिक ने कहा, उन्हें फौरन एहसास हुआ कि यहां इरादा पाकिस्तान पर दोष मढ़ना और सरकार और भाजपा के लिए चुनावी फायदा पाना था।

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आईआईटी मद्रास में नहीं रुक रहे आत्महत्या के मामले, एक और छात्र ने की आत्महत्या

आईआईटी (IIT) मद्रास भारत के सबसे बढ़िया तकनीकी संस्थानों में आता है। इस संस्थान में एडमिशन और पढ़ाई के लिए छात्र जबरदस्त मेहनत करते हैं और साथ ये भी कहा जाता है कि आईआईटी (IIT) से पासआउट छात्र जीवन में कभी फेल नहीं हो सकता है। लेकिन पिछले कुछ समय से छात्र यहां पढ़ाई के दौरान ही मौत के मुंह में समा रहे हैं। छात्र यहां खूब मेहनत करके अपने और देश के भविष्य बनाने का सपना देखते हैं। लेकिन छात्रों की मौत की खबर से हर कोई सकते में है। यहां छात्रों की मौत के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।

कैमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र ने की आत्महत्या

शुक्रवार 21 अप्रैल की शाम को खबर आई कि आईआईटी (IIT) मद्रास के एक और छात्र की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि शुरूआती जांच में यह मामला आत्महत्या का लगता है। हालांकि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जानकारी के अनुसार मृतक छात्र आईआईटी (IIT) मद्रास से कैमिकल इंजीनियरिंग में दूसरे वर्ष का छात्र था और वह महाराष्ट्र का रहने वाला था। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ़ हो जाता है कि छात्र ने आत्महत्या की है तो इस साल में अब तक इस तरह आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या बढ़कर 4 हो जाएगी।

पहला आत्महत्या का मामला तब आया सामने

वहीं इससे पहले 1 अप्रैल को भी आईआईटी (IIT) मद्रास से पीएचडी कर रहे सचिन कुमार जैन का शव फांसी के फंदे से लटका मिला था। बताया जा रहा है कि छात्र ने मरने से पहले अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर ‘आई एम सॉरी, नॉट एनफ’ का मैसेज लिखा, जिसे देखकर उसके साथी छात्र घबरा गए। जब तक वे उसके पास पहुंचते हैं तो वह छात्र उसे उसके घर के डाइनिंग हॉल में फांसी के फंदे पर लटका हुआ पाते हैं।

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अतीक अहमद के समर्थन में हुई नारेबाजी, जुमे की नमाज के बाद लगाए गए नारे

पटना में माफिया अतीक अहमद के समर्थन में नारे लगे हैं। पटना में जुमे की नमाज के बाद माफिया डॉन अतीक अहमद के समर्थन में जमकर नारे लगाए। इस दौरान नारे लगा रहे लोगों द्वारा अतीक अहमद को शहीद भी बताया गया। इन लोगों ने अतीक अहमद को अपना हीरो बताया। जानकारी के अनुसार, पटना जंक्शन के पास मस्जिद में जुमे की नमाज अता करने के बाद जब लोग निकल रहे थे, तब वहां कुछ यूट्यूबर्स ने यूपी के अतीक अहमद और अशरफ के शूटआउट प्रकरण पर राय मांगी।

इस दौरान कुछ लोग ‘अतीक अहमद अमर रहे’ के नारे लगाने लगे। इसके साथ ही, लोगों ने ‘मोदी-योगी मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। आपको ता दें कि जुमे की नमाज को लेकर मस्जिदों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने कहा कि वरीय अधिकारियों से अनुमति लेकर सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की चेष्टा करने के आरोप में यूट्यूबर्स पर भी प्राथमिकी की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज निकाला जा रहा है।

5 अप्रैल को हुई अतीक अहमद और अशरफ की हत्या

माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल की रात प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अतीक और अशरफ को पुलिस अभिरक्षा में मेडिकल के अस्पताल लाया गया था। जीप से उतरने के बाद अतीक और अशरफ मीडियाकर्मियों और पुलिस से घिरे हुए थे। मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देने के दौरान अचानक ताबडतोड़ फायरिंग शुरू हो गई। तीन हमलावरों ने अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी।

अतीक अहमद का बेटा एनकाउंटर में मारा गया, पत्नी अभी भी फरार

अतीक अहमद का बेटा असद 13 अप्रैल को झांसी में यूपी एसटीएफ के साथ एनकाउंटर में मारा गया। असद के साथ शूटर गुलाम को भी एसटीएफ ने ढेर कर दिया। इन दोनों की उमेश पाल मर्डर केस में तलाश थी। इसी साल 24 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज में उमेश पाल और उसके दो गनर की गोली और बम मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस को अतीक अहमद के बेटे असद और अतीक की बीवी शाइस्ता को तलाश रही थी। असद एनकाउंटर में मारा गया जबकि शाइस्ता अभी फरार है।

विजय सिन्हा की मामले पर प्रतिक्रिया

अतीक अहमद अमर रहे के नारे लगाए जाने पर नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार के अंदर आज जिस तरह से आतंकवादियों, उग्रवादगियों व अपराधियों का सरण स्थल बना रहा है। ये सरकार अपराधी और भ्रष्टाचारी को संरक्षित कर रहा है। आतंकवादी कभी शहीद नहीं हो सकता, शहीद वह है जो राष्ट्रहित और समाज हित मेंए काम कर के अपराधियों का शिकार लगा रहे हैं।

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गोधरा कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सजा काट रहे आठ दोषियों को राहत

गुजरात के गोधरा में 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आठ दोषियों को जमानत दे दी। सभी दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। सभी दोषी 17 से 20 साल की सजा काट चुके हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इन दोषियों में वह आरोपी शामिल थे, जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, आपको बता दे कि निचली अदालत ने 11 दोषियों को मौत की सजा, जबकि 20 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिन आरोपियों को मौत की सजा हुई थी। उन्हें गुजरात हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था।

गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में मौत की सजा को कम करते हुए कुछ दोषियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इनमें से कुछ ने अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपनी अपीलों के निस्तारण तक जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आगजनी के चलते 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा भड़क हुई थी।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कही थी यह बात

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा था कि मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील के अलावा दोषियों की जमानत याचिकाओं से कुशलतापूर्वक निपटने के लिए भेद करने की आवश्यकता थी। अभी वह उन लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर रहा है, जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि हम उन दोषियों को मौत की सजा देने के लिए गंभीरता से दबाव डालेंगे, जिनकी मौत की सजा को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया। यह दुर्लभ से दुर्लभ मामला है जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 59 लोग जिंदा जल गए। हर जगह यही कहा गया कि बोगी (कोच) पर बाहर से ताला लगा हुआ था। यह केवल पथराव का सामान्य मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को कहा था कि वह मामले की सुनवाई की अगली तारीख पर दोषियों की जमानत याचिकाओं का निस्तारण करेगी।

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नरोदा गाम दंगा मामले में सभी आरोपी बरी, जानें कब क्या क्या हुआ ?

गुजरात के नरोदा गाम दंगा मामले में अहमदाबाद की कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया है। अदालत ने 68 आरोपियों को बरी कर दिया है। गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी आरोपियों में शामिल थे, जिनको बरी किया गया है।

माया कोडनानी गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। गुजरात की पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की नेता माया कोडनानी, बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी और प्रदेश वीएचपी के पूर्व अध्यक्ष जयदीप पटेल उन 86 आरोपियों में शामिल हैं। जिन पर इस मामले में मुकदमा चल रहा है। मुकदमें के 86 अभियुक्तों में से 18 की इस बीच मौत हो चुकी है।

नरोदा गाम दंगा मामले में अभी तक क्या हुआ है

नरोदा गाम दंगा मामले में गुरुवार को फैसला आया। एसआईटी मामलों के विशेष जज एसके बक्शी की अदालत ने बाकि बचे 68 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। बरी होने वालों में गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी शामिल हैं। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि 8 फरवरी 2002 को नरोदा गाम में दंगा भड़क गया। जिसमें 11 लोगों की जान गई थी और कुछ घरों को जलाया गया था। कोर्ट ने 2009 में 86 आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किया था। जिसमे आज कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

क्या है नरोदा गाम दंगा मामला ?

27 फरवरी 2002 को कारसेवकों से भरी एक ट्रेन अयोध्या से लौट रही थी, जिसपर हमला कर दिया गया था। गोधरा ट्रेन कांड में 58 कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके एक दिन बाद अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में हिंसा हो गई थी। 28 फरवरी, 2002 को हुई इस सांप्रदायिक हिंसा में 11 लोग मारे गए थे। इस मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी 86 आरोपियों में शामिल थे, जिन पर मुकदमा चल रहा था। दंगे के बाद सरकार ने इस पूरे मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। पूरे केस की जांच करने के बाद एसआईटी की टीम ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को मुख्य आरोपी बनाया था।

आरोप जिनसे बरी हुईं भाजपा नेता माया कोडनानी

भाजपा नेता कोडनानी पर गोधरा ट्रेन कांड में मारे गए कारसेवकों की मौत का बदला लेने के लिए नरोदा गाम में भीड़ का नेतृत्व करने और भड़काने का आरोप था। यह घटना 2002 के नौ प्रमुख सांप्रदायिक दंगों के मामलों में से एक है, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने की थी। मामले में कोडनानी पर दंगा और हत्या के अलावा आपराधिक साजिश रचने और हत्या के प्रयास का भी आरोप लगाया गया था। हालांकि, कोडनानी अब सभी आरोपों से बरी हो गई हैं।

आरोपियों को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश

2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान अहमदाबाद के नरोदा गाम इलाके में 11 लोगों की हत्य्रा के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। इस दौरान सभी आरोपियों को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया था। बता दें कि अदालत ने पिछले सप्ताह ही इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2010 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने क्रमशः 187 और 57 गवाहों की जांच की और लगभग 13 साल तक चले इस केस में 6 जजों ने लगातार मामले की सुनवाई की।

कोर्ट में गवाह के रूप में पेश हुए थे अमित शाह

सितंबर 2017 में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष (अब केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह पूर्व मंत्री माया कोडनानी के पक्ष में, बचाव पक्ष के गवाह के रूप में पेश हुए थे। वर्ष 2002 के गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी का यह 9वां मामला है। इस मामले में कुल 86 आरोपी थे, लेकिन उनमें से 18 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। इन आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किए गए थे।

गोधरा कांड के बाद की है घटना

गोधरा में ट्रेन आगजनी की घटना में अयोध्या से लौट रहे 58 यात्रियों की मौत के एक दिन बाद 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में दंगों के दौरान 11 लोग मारे गए थे। आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना), 129 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चला। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 187 जबकि बचाव पक्ष ने 57 गवाहों का परीक्षण किया। जुलाई 2009 में शुरू हुए इस मुकदमे में करीब 14 साल बाद अब फैसला आया है।

आया था बाबू बजरंगी का नाम

इस मामले में एक स्टिंग ऑपरेशन से बजरंग दल के बाबूभाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी का नाम सामने आया था। बाबूभाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी बाद में वीएचपी और शिवसेना में शामिल हो गया था। स्टिंग ऑपरेशन में बाबू बजरंगी महाराणा प्रताप जैसा कुछ काम करने की बात कहता नजर आया था और उसने माना था कि दंगे के वक्त वह नरोदा में मौजूद था। उसे मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।

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अब कोर्ट भी सुरक्षित नहीं, वकील की ड्रेस में आये व्यक्ति ने महिला को मारी गोली

दिल्ली के साकेत कोर्ट में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जिसने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस के इंतजाम पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के एक मामले में गवाही देने आई एक महिला को वकील की ड्रेस पहनकर आए उसके पति ने कोर्ट रूम में ही ओपन फायर कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।

एनएससी थाना अध्यक्ष ने महिला को अपनी गाड़ी से अस्पताल में भर्ती कराया है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस में हड़कंप मच गया है। सूचना के बाद सारे वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि महिला को एक के बाद एक चार गोली मारी गई हैं।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दिल्ली की साकेत कोर्ट में ये महिला एक मामले में पति के खिलाफ ही गवाही देने के लिए आईं थी। तभी इनका पहले से इंतजार कर रहे पति ने फायरिंग कर दी। महिला को आनन-फानन में अस्पताल लेकर जाया गया। मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला का पति आदतन अपराधी है, और दोनों काफी समय से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे।

महिला की पहचान एम राधा के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 40 से अधिक बताई जा रही है। घायलवस्था में महिला को मैक्स साकेत अस्पताल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शी रणजीत सिंह दलाल के अनुसार कुल 4-5 राउंड फायरिंग की गई। आरोपित व्यक्ति सस्पेंडेड वकील है, गोली मारने के बाद वह कैंटीन के बैक एंट्री के रास्ते फरार हो गया।

दिल्ली कोर्ट में फायरिंग का ये कोई पहला मामला नहीं

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी चाक-चौबंद है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर आए दिन फायरिंग होती रहती है। ये ऐसा पहला मामला नहीं है, जब दिल्ली की अदालत में गोली चली हो। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद, सुरक्षा चिंताओं के बावजूद दिल्ली की पुलिस सुरक्षा देने में नाकाम रही है। इससे पहले पिछले साल सितंबर 2021 में दिल्ली की तीस हजारी रोहिणी कोर्ट में घुसकर भरी कोर्ट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी।

कोर्ट में वकील की ड्रेस पहने हुए दो शख्स आए और उन्होंने गोगी पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं। टिल्लू गिरोह के शूटरों ने जितेंद्र गोगी की हत्या की थी। इसमें पुलिस ने दोनों शूटरों को मार गिराया था, लेकिन कोर्ट रूम में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती हैं ?

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कैसे मारे गए माफिया ब्रदर्स, कॉल्विन अस्‍पताल के सामने हुआ सीन रिक्रिएशन

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए माफिया ब्रदर्स अतीक-अशरफ हत्याकांड की न्यायिक आयोग की टीम ने जांच शुरू कर दी है। अतीक अहमद हत्याकांड की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग की टीम घटनास्थल पर पहुंची है। कॉल्विन अस्पताल में पहुंचकर घटना की जांच की जा रही है। मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय काल्विन के गेट पर माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ की हत्या का सीन दोहराया गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पूरे सीन को फिर से तैयार किया, अतीक और हमलावरों के बीच की दूरी को फीते से नापा। इसके बाद यह भी देखा कि पुलिस की प्रतिक्रिया में कितना समय लगा।

प्रयागराज से कॉल्विन अस्पताल में हत्यारे कैसे पहुंचे ? किन रूट का इस्तेमाल किया ? माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ को कॉल्विन हॉस्पिटल लाने की जानकारी उन तक कैसे पहुंची ? इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़े जा रहे हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल में किस प्रकार घटना को अंजाम दिया गया, इस बारे में जानकारी ली जा रही है।

रिटायर्ड जज अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में योगी सरकार की ओर से घटना की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। इसके अलावा डीजीपी और प्रयागराज कमिश्नर की ओर से दो एसआईटी का गठन किया गया है। इस दौरान लखनऊ से गई फॉरेंसिक विभाग की टीम भी मौजूद रही। तमाम घटनाओं को क्रिएट कर स्थिति को समझने का प्रयास किया गया।

माफिया ब्रदर्स को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले एसएचओ और सिपाही मौके पर

माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ को लेकर कॉल्विन अस्पताल लाने वाले धूमनगंज एसएचओ राजेश मौर्य को मौके पर बुलाया गया। वहीं, अतीक अहमद पर फायरिंग के दौरान घायल सिपाही भी मौके पर पहुंचे। न्यायिक आयोग और एसआईटी ने दोनों से उस रात की घटना के बारे में दोनों से पूछताछ की। किस प्रकार से पूरी वारदात को अंजाम दिया गया, इसकी जानकारी ली गई। एसआईटी की ओर से सीन को रीक्रिएट कर उस दिन की घटना के विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश की गई है।

15 अप्रैल को हुई थी माफिया ब्रदर्स अतीक और अशरफ की हत्या

अतीक-अशरफ को उमेश पाल हत्याकांड मामले में पुलिस ने रिमांड पर लिया गया। हत्या वाले दिन दोनों पुलिस के साथ निशानदेही के लिए गए थे। वापसी में उनका मेडिकल काल्विन अस्पताल में हुआ था। वहां से निकलने के बाद मीडिया कर्मियों के वेश में आए अरुण मौर्य, लवलेश तिवारी और सनी ने मौका पाते ही माफिया ब्रदर्स अतीक-अशरफ को गोलियों से भून दिया था।

दो महीने में पूरी करनी है माफिया ब्रदर्स हत्याकांड की जांच

इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित आयोग पूर्व डीजीपी सुबेश कुमार सिंह व पूर्व जज बृजेश कुमार सोनी जांच के सिलसिले में गुरुवार को प्रयागराज पहुंचे। जांच के दौरान आयोग पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ करेगा। दो महीने में इस केस की जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। काल्विन अस्पताल में बिना आईडी कार्ड के मीडियाकर्मियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

हुई थी उमेश पाल की हत्या

24 फरवरी को प्रयागराज में विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह रहे उमेश पाल और उसके दो सरकारी गनर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से इस हत्याकांड की जांच शुरू की तो उसमें माफिया अतीक अहमद का बेटा उमेश पाल पर गोलियां बरसाते हुए नजर आ रहा आया। पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल 4 आरोपितों को मुठभेड़ में मार गिराया, बाकी अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

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भागने वाली थी भगोड़े अमृतपाल की पत्नी किरण दीप कौर, पुलिस ने लिया हिरासत में

बीते कुछ दिनों से पंजाब में भगोड़े घोषित और पूरे देश में वॉन्टेड खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल की पत्नी किरणदीप कौर को गुरुवार (20 अप्रैल) को लंदन जाते वक्त अमृतसर एयरपोर्ट पर पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक किरणदीप कौर अमृतसर एयरपोर्ट से बर्मिंघम भागने की फिराक में थी, इसी सिलसिले में वह अमृतसर एयरपोर्ट पहुंची थी।

लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर एयरपोर्ट पर पहले से ही मौजूद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। गौरतलब है कि किरणदीप कौर पर खालिस्तानी समर्थकों को फंडिंग करने का आरोप है। मिली जानकारी के अनुसार, किरणदीप कौर की फ्लाइट का समय 1.30 बजे है। वह 11.30 पर एयरपोर्ट पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों ने किरणदीप कौर को इमीग्रेशन काउंटर से ही हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।

यूके पुलिस की रडार में भी थी किरण दीप कौर

आपको जानकर हैरानी होगी अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणदीप कौर पंजाब पुलिस ही नहीं यूके पुलिस की रडार में भी थी। दरअसल 28 साल की किरणदीप कौर यूके की नागरिक है और वह पहले से ही खालिस्तानी समर्थक है। वह अमृतपाल से शादी करने से पहले ही अलगाववादी संगठन बब्बर खालसा के संपर्क में थी और अपने पति अमृतपाल सिंह की अध्यक्षता वाली डबल्यूपीडी के लिए धन का मैनेजमेंट करती थी। इसकी इन हरकतों की वजह से वह 2020 में यूके पुलिस के रडार में आ गई थी।

कहां छिपा हो सकता है अमृतपाल

बता दें कि किरणदीप कौर एनआरआई है। 28 साल की किरणदीप और अमृतपाल की शादी 10 फरवरी को हुई थी। पुलिस अमृतपाल की पत्नी से न केवल उसके पति के ठिकाने के बारे में बल्कि उसके काम के बारे में भी पूछताछ कर रही है। गौरतलब है कि पंजाब पुलिस अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश कर रही है। बीते कई दिनों से उसकी गिरफ्तारी को लेकर ऑपरेशन चल रहा है।

भगोड़े अमृतपाल के कई साथियों को भी दबोचा जा चुका है, लेकिन वो अभी तक पुलिस के हाथों से बाहर है। तीन दिन पहले पुलिस को इनपुट मिले थे कि वर्तमान में अमृतपाल सिंह पुलिस से छिपते हुए अमृतसर व तरनतारन के आसपास के इलाके में कहीं छिपा बैठा है।

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अतीक ने असद को फायरिंग से किया था मना, फिर किसके कहने पर चलाई गोलियां

अतीक अहमद ने अपनी हत्या से पहले पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान उमेश पाल हत्याकांड में असद की भूमिका को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अतीक अहमद ने पूछताछ में यह कबूल किया था कि हां उमेश पाल की हत्या मैंने ही करवाई लेकिन असद को यह कहा था कि तुम बाहर मत निकलना, गाड़ी में ही रहना और ये देखना कि काम ठीक से जाए।

कहा था अतीक अहमद ने – तुम सीधे गोली मत चलाना

अतीक अहमद ने पूछताछ में बताया कि उसने असद को हिदायत दी थी कि तुम सीधे गोली मत चलाना, यह काम शूटर्स को करने देना ताकि बाद में खौफ भी बना रहे और तुम बाहर रहकर गद्दी संभाल सको। अतीक अहमद ने बताया कि असद ने उस वक़्त मेरी बात पर हां कर दिया था। लेकिन मेरे मुखबिरों ने बताया है कि असद को गाड़ी से गुड्डू मुस्लिम ने उतरने के लिए कहा था। गुड्डू मुस्लिम ने वारदात की जगह पर पहुंचने से ठीक पहले असद को गाड़ी से उतर कर खुद गोली चलाने के लिए कहा था।

असद से कहा की तुम शेर के बच्चे हो

अतीक ने बताया कि गुड्डू मुस्लिम ने असद से कहा था कि शेर के बच्चे हो, इलाहाबाद को ऐसा दहलाओ जैसा भाई ने दहलाया था। इसके बाद असद ने गाड़ी से उतरकर बंदूक लोड कर ली। असद के बंदूक लोड करने की तस्वीर सीसीटीवी में भी आई थी। उस वक्त उमेश पाल पर फायरिंग शुरू हो गई थी और वह जान बचाने के लिए भाग रहा था। तभी असद भी पीछे से आया और उसने भी फायरिंग शुरू कर दी। सभी शूटर्स पहले से ही गन लोड किये हुए स्पाट पर आए थे।

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राहुल गांधी को बड़ा झटका, सूरत सेशंस कोर्ट से नहीं मिली राहत

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को मोदी सरनेम केस में सूरत सेशंक कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने राहुल गांधी की अर्जी खारिज कर दी है। 2019 में राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर अपने भाषण में टिप्पणी की थी जिसे लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था। इसी केस में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और सजा मिलने के बाद राहुल गांधी की संसद की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। राहुल ने इसी फैसले पर रोक लगाने के लिए सेशंस कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

बीजेपी विधायक ने किया था मानहानि का केस

दरअसल, पिछले 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने बीजेपीक विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में राहुल को दोषी करार दिया था और दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी। जिसके एक दिन बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया। राहुल ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ तीन अप्रैल को सत्र अदालत का रुख किया। उनके वकीलों ने दो आवेदन भी दाखिल किये जिनमें एक सजा पर रोक के लिए और दूसरा अपील के निस्तारण तक दोषी ठहराये जाने पर स्थगन के लिए था।

अब हाईकोर्ट जायेगे राहुल गांधी

अदालत ने राहुल को जमानत देते हुए शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किये थे। उसने पिछले बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों को सुना और फैसला 20 अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। आज इस मामले कोर्ट ने राहुल को कोई राहत नहीं दी और उनकी अर्जी खारिज कर दी। जानकारी के मुताबिक सूरत सेशंस कोर्ट के फैसले के खिलाफ राहुल हाईकोर्ट जाएंगे।

राहुल गांधी ने की थी टिप्पणी

बता दें कि यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एक प्रचार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी द्वारा ‘मोदी’ उपनाम का उपयोग करने वाली टिप्पणी से संबंधित है। अप्रैल 2019 में कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?

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तो एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में सरकार का नहीं होंगे हिस्सा………संजय शिरसाट बड़ा दावा

एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के बीजेपी में जाने की अटकलों के बाद महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इस मामले पर अब शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की ओर से भी बड़ा बयान दिया गया है। शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि अगर अजित पवार एनसीपी के नेताओं के समूह के साथ बीजेपी के साथ हाथ मिलाते हैं। तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे।

संजय शिरसाट ने मंगलवार (18 अप्रैल) को मुंबई में कहा कि उन्हें लगता है कि एनसीपी प्रत्यक्ष रूप से बीजेपी से हाथ नहीं मिलाएगी। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और बीजेपी की गठबंधन सरकार है। संजय शिरसाट ने कहा कि हमारी रणनीति स्पष्ट है, एनसीपी वह पार्टी है जो धोखा देती है। हम उनके साथ मिलकर शासन नहीं करेंगे। अगर बीजेपी, एनसीपी के साथ जाती है तो महाराष्ट्र को ये पसंद नहीं आएगा। हमने (उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना से) बाहर होने का फैसला किया क्योंकि लोगों को हमारा कांग्रेस और एनसीपी के साथ होना पसंद नहीं था।

अगर अकेले आए तो स्वागत है

संजय शिरसाट को हाल ही में एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना का प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। संजय शिरसाट ने कहा कि अजित पवार ने कुछ नहीं कहा है, इसका मतलब है कि वह एनीसीपी में नहीं रहना चाहते है। शिवसेना के नेता ने कहा कि हमने कांग्रेस और एनसीपी को छोड़ा, क्योंकि हम उनके साथ नहीं रहना चाहते थे। अजित पवार को वहां पूरी आजादी नहीं है। इसलिए अगर वह एनसीपी को छोड़ते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। अगर वे एनसीपी के नेताओं के साथ आएंगे तो हम सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे।

बेटे के चुनाव हारने की वजह से नाराज – संजय शिरसाट

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि अजित पवार अपने बेटे पार्थ पवार के चुनाव हारने की वजह से नाराज हैं। उनकी नाराजगी का सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिका के मामले से कोई संबंध नहीं है। पार्थ पवार को लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र के मावल निर्वाचन क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ा था।

संजय शिरसाट ने 2019 के शपथ ग्रहण समारोह का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि नवंबर 2019 में आयोजित हुए शपथ ग्रहण समारोह, जिसमें देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली थी, उसके लिए अजित पवार को जिम्मेदार ठहराया गया था। ढाई साल के बाद, शरद पवार ने कहा कि यह राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए एक प्रयोग था। अजित पवार ने आज तक इस पर स्पष्टीकरण नहीं दिया है। नवंबर 2019 में गुपचुप तरीके से बनाई गई देवेंद्र फडणवीस-अजित पवार सरकार तीन दिन ही टिक सकी थी।

अजित पवार ने अटकलें की खारिज

शिरसाट ने कहा कि अजित पवार बड़े नेता हैं और उनके मन में क्या चल रहा है, ये वो आसानी से नहीं बताते। बीजेपी की जाने की अफवाहों को खारिज करते हुए अजित पवार ने कहा है कि मैं जब तक जीवित हूं, अपनी पार्टी के लिए काम करता रहूंगा। एनसीपी में किसी तरह के मतभेद और उनके बीजेपी से हाथ मिलाने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। हम सभी (पार्टी विधायक) एनसीपी के साथ हैं।

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महाराष्ट्र के बीड में माफिया ब्रदर्स के लगे शहीद वाले बैनर, दो गिरफ्तार

महाराष्ट्र के बीड जिले में माफिया ब्रदर्स अतिक अहमद और अशरफ के बैनर लगाए गए हैं। इन बैनर में दोनों माफिया ब्रदर्स को शहीद का दर्जा दिया गया है। दरअसल, बीड जिले के मजलगांव शहर में अतीक अहमद के समर्थन में बैनर लगाए गए और इसमें दोनों को शहीद बताया गया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि 100 से ज्यादा आपराधिक मुकदमों का आरोपी माफिया और पूर्व सांसद की हाल ही में उसके भाई अशरफ के साथ गोली मारकर हत्या कर दी गई।

मोहसिन भैया मित्र मंडल ने लगाया बैनर

ये बैनर मोहसिन भैया मित्र मंडल की ओर से लगाया गया था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस मोहसिन पटेल की तलाश कर रही है। इस मामले में और भी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है, पुलिस जांच में जुटी है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के टॉप माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ को पत्रकारों के रूप में आए तीन लोगों ने शनिवार की रात उस वक्त गोली मार दी जब पुलिसकर्मी उन्हें मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के एक मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे।

माफिया ब्रदर्स को शहीद बताने वाले दो लोग गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में फायरिंग में मारे गए माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के समर्थन में मजलगांव कस्बे में बैनर लगाए गए तो पुलिस की नजर पड़ते ही तुरंत बैनर हटा दिया गया। ये बैनर मौसिन भैया मित्र मंडल की तरफ से लगाया गया था। पुलिस ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए तफ्तीश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस बैनर पर अतीक अहमद और अशरफ दोनों को शहीद के रूप में बताया गया था।

पुलिस ने 4 लोगों पर किया मामला दर्ज

वहीं इस मामले पर पुलिस अधिकारी स्वप्निल राठौड़ ने बताया कि माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ को शहीद बताने और श्रद्धांजलि देने वाला फ्लेक्सबोर्ड मजलगांव में लगाया गया था। उस फ्लेक्सबोर्ड पर कुछ शब्द धार्मिक तनाव पैदा कर देने वाले लिखे गए थे। उसके चलते उस जगह से हमने फौरन बैनर हटा दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने फ्लेक्सबोर्ड छापने वाले और उसे लगाने वाले ऐसे कुल 4 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इसमें से 2 लोगों को फौरन अरेस्ट कर लिया गया है। उसके चलते कोर्ट ने उन दोनों को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है।

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लो अब पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, एसआईटी ने शुरू की जांच

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। इस मामले में शाहगंज के इंस्पेक्टर, दो दरोगा और दो सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है। यह एक्शन एसआईटी (SIT) की प्राथमिक जांच के आधार पर लिया है। अतीक अहमद और अशरफ की 15 अप्रैल शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अतीक और अशरफ की हत्या के मामले की जांच कर कर रही एसआईटी (SIT) ने अतीक की सुरक्षा में लगे और थाने के पुलिसकर्मियों से मंगलवार को पूछताछ की थी। जिसके बाद पुलिसकर्मियों पर यह कार्रवाई की गई। शाहगंज के जिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया उनका नाम अश्वनी सिंह है।

अतीक और अशरफ की पुलिस हिरासत में हुई हत्या से हड़कंप मच गया था। कानून और व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। अब एसआईटी इस मामले की जांच में जुट गई है। इसी सिलसिले में सस्पेंसन की यह कार्रवाई की गई है।

बता दें कि शनिवार (15 अप्रैल) को अतीक अहमद और अशरफ की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को देर रात मेडिकल के लिए केल्विन अस्पताल लाया गया था। पुलिस की जीप से उतर कर दोनों मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे। इसी दौरान तीनों हमलावरों ने अतीक अहमद और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी।

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अतीक-अशरफ अहमद हत्याकांड को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में पुलिस हिरासत में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के मामले में संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रयागराज पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है।

वहीं माफिया अतीक अहमद की हत्या सहित कई एनकाउंटर की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। सीजीआई (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले को 24 अप्रैल को सुनवाई के लिए रखा है।

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई। इस दौरान मौजूद उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 जवान और अफसर मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ साल से अपराधियों के खिलाफ लगातार सफल एनकाउंटर को अंजाम देने का दावा करने वाली यूपी पुलिस के भारी सुरक्षा बंदोबस्त को भेदते हुए तीन युवकों ने अतीक और उसके भाई को गोली मार दी।

अतीक-अशरफ हत्याकांड के बाद उठ रहे कई सवाल

मीडिया की मौजूदगी में हुई इस घटना को लाइव देखा गया। पुलिस तीनों आरोपियों को जिंदा पकड़ने में कामयाब रही। अब कहा जा रहा कि मुठभेड़ों के लिए मशहूर यूपी की पुलिस फोर्स आखिर अतीक और अशरफ पर हमला करने वालों को मौके पर ही मार गिराने में नाकाम क्यों रही ?

उत्तर प्रदेश के एक रिटायर सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि ये सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि पुलिस को समय नहीं मिला। वहीं एक एक दूसरे रिटायर आईपीएस अफसर ने कहा कि अगर तीनों को मौके पर ही ढेर कर दिया गया होता, तो दोनों हत्याओं के पीछे की साजिश को उजागर करने का कोई रास्ता नहीं बचता।

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सेब की तुलना संतरे से नहीं की जा सकती – सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी

बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दो मई को अंतिम सुनवाई करेगा। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”सेब की तुलना संतरे से नहीं की जा सकती, वैसे ही नरसंहार की तुलना एक हत्या से नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (18 अप्रैल) को गुजरात सरकार ने रिहाई से जुड़ी फ़ाइल दिखाने के आदेश का विरोध किया। राज्य सरकार ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ही रिहाई हुई है। बता दें कि पीड़िता बिलकिस बानो के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी अली और टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने मामले के 11 दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से माफी की फाइलें नहीं दिखाने पर सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध भयावह था। गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वे 27 मार्च के आदेश की समीक्षा दायर कर सकते हैं, जिसमें कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को छूट पर मूल फाइलें मांगी थीं। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने 11 दोषियों को उनकी कैद की अवधि के दौरान दी गई पैरोल पर सवाल उठाया और कहा कि अपराध की गंभीरता पर राज्य द्वारा विचार किया जा सकता है।

बिलकिस बनो मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

पीठ ने कहा, “एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और कई लोग मारे गए। आप पीड़ित के मामले की तुलना मानक धारा 302 (हत्या) के मामलों से नहीं कर सकते। जैसे आप सेब की तुलना संतरे से नहीं कर सकते, उसी तरह नरसंहार की तुलना एक हत्या से नहीं की जा सकती।”

पीठ ने कहा, ” सवाल यह है कि क्या सरकार ने अपना दिमाग लगाया और छूट देने के अपने फैसले के आधार पर क्या योजना बनाई।” उन्हों ने कहा कि आज यह बिलकिस बानो है, लेकिन कल यह कोई भी हो सकता है, यह आप या मैं हो सकते हैं। यदि आप छूट देने के अपने कारण नहीं बताते हैं। तो हम खुद निष्कर्ष निकालेंगे।”

सुभाषिनी के तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल

याचिकाकर्ता सुभाषिनी अली ने भी बिलकिस बानो मामले में याचिका दायर की थी। उनकी तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, उन्होंने कहा कि ये नॉर्मल केस नहीं है। बल्कि सावर्जनिक महत्व का मामला है। हम किसी पर केस करना नहीं चाहते लेकिन चाहते हैं कि ये जेल से अपराधियों को छोड़ने वाली जो पॉलिसी है वो क्लियर हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या 1992 के बाद छूट नीति में कोई बदलाव या संशोधन हुआ है।

मामला क्या है ?

बता दें कि गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आगजनी की घटना के बाद दंगे भड़क उठे थे। इस दौरान साल 2002 में बिलकिस के साथ गैंगरेप किया गया था, साथ ही उनके परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कोर्ट ने 21 जनवरी 2008 को 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से सभी 11 दोषी जेल में बंद थे और पिछले साल 15 अगस्त को सभी को रिहा कर दिया गया था। इसी रिहाई को कोर्ट में चुनौती दी गई है।

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प्रयागराज से बड़ी खबर माफिया ब्रदर्स के वकील के घर के पास बम से हमला

रिपोर्ट फहीम सिद्दीकी:  माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद प्रयागराज से एक और बड़ी खबर सामने आई है। जहा दहशत फैलाने की कोशिश की गई है और कटरा इलाके में देसी बम फेंका गया है। पुलिस बम फेंकने वाले की तलाश में जुटी हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, ये बम माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ के वकील विजय मिश्रा की गली में फेंका गया है। वही इस मामले में पुलिस ने बताया है कि गली में बम तो फेंका गया है लेकिन यह मामला वकील विजय मिश्रा के ऊपर हमले का नहीं था।

जानिए पुलिस ने क्या बताया ?

पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए बताया, “कटरा में गोबर वाली गली में बम चलने की सूचना प्राप्त हुई। मौके पर पहुंचने पर ज्ञात हुआ की हर्षित सोनकर व आकाश सिंह छोटू रानू और रौनक यादव के बीच में कुछ विवाद हुआ, जिसके कारण हर्षित सोनकर ने आकाश रौनक पर छोटे बम से हमला किया लेकिन किसी को चोट नहीं आई है। यह हमला विजय मिश्रा के घर के सामने गली में हुआ है और यह अफवाह फैल गई कि हमला विजय मिश्रा के ऊपर हुआ है। यह सूचना झूठी है। मौके पर जांच की जा रही है कानून और व्यवस्था कोई समस्या नहीं है।

माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ हत्या कब हुई ?

अतीक और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को उस वक्त हत्या कर दी गई थी, जब प्रयागराज में मेडिकल कॉलेज के पास उसे मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अतीक और अशरफ मीडिया से बात कर रहे थे। नकली मीडियाकर्मी बनकर पहुंचे हमलावरों ने अतीक के सिर के पास गन सटाकर गोली मार दी थी। हमलावरों ने अतीक और उसके भाई पर कई राउंड फायरिंग की थी। गोली लगते ही अतीक और उसका भाई अशरफ जमीन पर गिर पड़े थे और दोनों की मौत हो गई थी।

माफिया ब्रदर्स पर हमला करने वाले लोग कौन हैं ?

अतीक अहमद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि उसे 8 गोलियां लगीं। पुलिस ने अतीक की हत्या मामले में 3 हमलावरों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था। इनकी पहचान सनी, अरूण और लवलेश के रूप में हुई थी। कोर्ट ने इन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। इनके पास से जो आधुनिक हथियार बरामद हुए थे, उनके बारे में भी अहम जानकारी सामने आई है कि ये हथियार कानपुर के हिस्ट्रीशीटर बाबर ने इन लोगों को उपलब्ध करवाए थे।

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अतीक हत्याकांड की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या के बाद अब ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। पहले जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। लेकिन अब इस हत्याकांड की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी हुई गठित (SIT) का गठन किया गया है। एसआईटी जांच की जिम्मेदारी राज्य के तीन सीनियर अधिकारियों को सौंपी गई है।

इस हत्याकांड की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन पुलिस कमिशनर ने किया है। एसआईटी जांच का नेतृत्व डीसीपी क्राइम करेंगे। इसके अलावा एसीपी सतेंद्र तिवारी और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ओम प्रकाश सिंह को भी तीन सदस्यीय टीम में रखा गया है। हालांकि इससे पहले रविवार को ही न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन कर दिया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के सेवानिवृत्त न्‍यायाधीश अरविन्‍द कुमार त्रिपाठी द्वितीय की अध्‍यक्षता में पूर्व पुलिस महानिदेशक सुबेश कुमार सिंह और सेवानिवृत्त जनपद न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी को बतौर सदस्‍य आयोग में शामिल करते हुए तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अतीक अहमद और अशरफ की सनसनीखेज हत्‍या में उच्‍च स्‍तरीय जांच के आदेश दिये थे। इसके साथ ही यह भी कहा कि इसमें तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा था कि ‘मुख्यमंत्री ने अहमद और अशरफ की हत्या की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन का निर्देश दिया है।’

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अतीक का पूरा माफिया नेटवर्क मैनेज करता है गुड्डू मुस्लिम, एसटीएफ जुटी है तलाश में

माफिया से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई पूर्व विधायक अशरफ अहमद की हत्या के बाद अब उसके नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक गुड्डू मुस्लिम ही अतीक का सारा नेटवर्क संभालता था। यह जानकारी एसटीएफ को रिमांड के दौरान मिली थी। यूपी एसटीएफ ने गुड्डू मुस्लिम की तलाश तेज कर दी है। एसटीएफ के मुताबिक आईएसआई से मंगवाए गए, हथियार पंजाब के रास्ते लाने में गुड्डू मुस्लिम ही मैनेज करता था। गुड्डू मुस्लिम अपने पांच संदिग्धों के साथ झांसी में सतीश पांडेय उर्फ बबलू पांडेय के घर पांच दिन रुका था। इसके बाद गुड्डू मुस्लिम दोबारा भी झांसी जल्दी पहुंचा था। केयरटेकर विनय सिंह ने भी बताया कि पांच दिनों में नाम तक नहीं जान सका था, यहां तक उसके सामने बातचीत तक नहीं करते थे।

कई राज ऐसे हैं, जो वह उगल ना दे गुड्डू मुस्लिम

गुड्डू मुस्लिम झांसी में सुबह से लेकर शाम तक रेकी करता रहता था। जबकि झांसी में बबीना रेंज सैन्य ठिकाना सहित काई महत्वपूर्ण जगह है। अतीक को डर था कि कहीं गुड्डू मुस्लिम पकड़ा न जाए। पुलिस रिमांड में अतीक ने कई बार गुड्डू मुस्लिम का नाम लिया और उसके पकड़े जाने का डर था। डर था कि कहीं पुलिस उसका एनकाउंटर ना कर दें और कई राज ऐसे हैं, जो वह उगल ना दे। अतीक और अशरफ सिर्फ असद और गुलाम का बचाव कर रहे थे। ऐसे में गुड्डू मुस्लिम ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था। गुड्डू, साबिर और अरमान को एनकाउंटर का डर सता रहा था। हत्या के पहले भी अशरफ गुड्डू मुस्लिम को लेकर कुछ बताने जा रहा था,लेकिन उससे पहले हत्या हो गई। माना जा रहा है कि गुड्डू मुस्लिम के पास बड़े राज है। एसटीएफ गुड्डू मुस्लिम की तलाश कर रही है।

अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश तेज

इस बीच अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश तेज हो गई है। अतीक और अशरफ मारे गए,एसटीएफ ने एनकाउंटर में असद और शूटर गुलाम को मार गिराया, लेकिन उमेश पाल हत्याकांड में फरारी काट रही शाइस्ता परवीन अभी तक सामने नहीं आई। अतीक और अशरफ की हत्या के बाद अब शाइस्ता ही है, जो पिछले 50-55 दिन के अंदर हुई सात हत्याओं की पूरी कहानी की सबसे बड़ी राज़दार हो सकती है। मौत से चंद पल पहले अतीक और अशरफ की गुड्डू मुस्लिम वाली जो बात अधूरी रह गई। उस गुड्डू मुस्लिम वाली बात की सबसे बड़ी राज़दार अब शाइस्ता परवीन ही बची है,लेकिन शाइस्ता तो अदालत के सामने सरेंडर कर रही है और न ही पुलिस उस तक पहुंच पा रही है। अतीक और अशरफ 3 दिनों तक पुलिस की रिमांड में थे।

एसटीएफ की पूछताछ में अतीक ने किये कई खुलासे

इस दौरान पुलिस और एसटीएफ की पूछताछ में अतीक और अशरफ ने कई बड़े खुलासा किया था। उन खुलासों और निशानदेही के आधार पर प्रयागराज के ठिकाने से हथियार बरामद भी हुए थे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अतीक ने पुलिस को 14 ऐसे लोगों के नाम बताए थे जो उसे फंडिंग किया करते थे। अतीक के कहने पर ही ये लोग शाइस्ता तक पैसे पहुंचाते थे। इनमें 11 नाम ऐसे हैं जो प्रयागराज के कालिंदीपुरम, चकिया, मरियाडीह, बम्हरौली, असरौली, कौशाम्बी के महगांव और बेली के रहने वाले हैं। अतीक इन्हें आसपास के किसानों की जमीन औने पौने दाम पर लेकर प्रॉपर्टी डीलर्स को कारोबार करने में मदद करता था। इसके बदले अतीक अहमद को भारी भरकम रकम पहुंचाई जाती थी।

अतीक की सबसे बड़ी राज़दार है पत्नी शाइस्ता परवीन

अतीक के उन 14 मददगारों की सबसे बड़ी राज़दार शाइस्ता परवीन ही है। शाइस्ता परवीन का पकड़ा जाना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि अतीक अहमद ने पुलिस की पूछताछ में ऐसी दो सौ से अधिक फर्जी कंपनियों के बारे में बताया है,जिससे उसकी काली कमाई का कनेक्शन है। सूत्रों के मुताबिक अतीक ने 50 से ज्यादा ऐसे सफेदपोश नामों का भी खुलासा किया है, जिनके काले पैसे अतीक के धंधे में लगाए गए हैं।

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आजम खान की बिगड़ी तबियत, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को सोमवार के दिन दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में स्वास्थ्य खराब होने के कारण भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में भर्ती आजम खान फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं और बताया जा रहा है कि उनका स्वास्थ्य स्थिर है। आजम खान के अचानक स्वास्थ्य में गिरावट आने के कारण उन्हें तड़के 3 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आजम के साथ अस्पताल में उनके परिवार के लोग भी मौजूद हैं। परिवार वालों का कहना है कि कल शाम रोजा इफ्तार के बाद आजम खान की तबियत खराब हुई जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पहले भी आज़म खान हो चुके है बीमार

बता दें कि डॉक्टरों का कहना है कि आजम खान की स्थिति में सुधार है। गौरतलब है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी नेता कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इससे पहले उन्हें सितंबर 2022 में हार्ट अटैक के बाद दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां डॉक्टरों द्वारा आजम खान के दिल की एंजियोप्लास्टी सर्जरी कई गई। वहीं वर्तमान में आजम हार्निया और पैर में गैंरीन की समस्या से जूझ रहे हैं।

सपा नेता आज़म खान की विधानसभा सदस्यता हो चुकी है रद्द

बता दें कि आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और अखिलेश यादव के भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं। वे कुल 10 बार विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में आजम खान ने जेल में रहकर चुनाव लड़ा और उन्होंने जीत हासिल की। इसके बाद आजम खान को भड़काऊ भाषण देने के मामले में कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई।

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अतीक अहमद और अशरफ के हत्यारों का लॉरेन्स बिश्नोई गैंग से निकला कनेक्शन

अतीक-अशरफ मर्डर केस में एक और नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक अतीक और अशरफ के हत्यारों का कनेक्शन लॉरेन्स बिश्नोई गैंग के साथ साथ अन्य कई बड़े गैंग से था। ये शूटर्स सुंदर भाटी गैंग के भी संपर्क में रहते थे। हमीरपुर जेल में सनी सिंह की मुलाकात सुंदर भाटी से हुई थी वहीं से दोनों के बीच कनेक्शन बना। वहीं से सनी को मेड इन तुर्की जिगाना पिस्टल मिली, इसी पिस्टल से सनी ने अतीक पर पहली गोली चलाई। बताया जा रहा है कि चार दिन पहले सनी सिंह ने अपने कुछ करीबी लोगों से कहा था कि वो कुछ ऐसा बड़ा करने वाला है जिससे सब लोग उसका नाम जान जाएंगे।

अतीक अहमद के काफिले को कर रहे थे फॉलो

सूत्रों के मुताबिक दूसरी बार साबरमती जेल से अतीक और बरेली जेल से अशरफ को लाने की खबर मीडिया में देखते ही, तीनों शूटर्स ने उनकी हत्या का प्लान बनाना शुरू कर दिया था। तीनों कई दिनों से अतीक अहमद और अशरफ की रेकी कर रहे थे। जिस वक्त अतीक अहमद को साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था। उस वक्त प्रयागराज से ठीक पहले मीडिया के काफिले के साथ उन्होंने अतीक को फॉलो किया था।

खबर ये है कि कोर्ट में पेशी के दौरान भी तीनों शूटर्स अतीक अहमद को फॉलो कर रहे थे। पुलिस जब दोनों को मेडिकल चेकअप के लिए लेकर निकली थी उस वक़्त भी तीनों शूटर्स उनके आस-पास थे। हत्यारे पत्रकारों के भेष में उन्हें फॉलो करते थे। वो गले में प्रेस का आईकार्ड, हाथ में माइक और कैमरा लेकर अतीक को फॉलो कर रहे थे। इनका मकसद दोनों की हत्या करके अपना खौफ कायम करना था। इस डबल मर्डर की प्लानिंग में इन तीनों के साथ कुछ और लोग भी शामिल थे। फिलहाल पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है जिसमें दो अज्ञात हैं।

अतीक अहमद से पहले सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में इस्तेमाल हुई थी जिगाना पिस्टल

शूटर्स ने माफिया ब्रदर्स को मारने के लिए जिस गन का इस्तेमाल किया है वह अवैध तरीके से भारत आती है। इतना ही नहीं इस पिस्टल का सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से भी कनेक्शन है। वहीं मर्डर केस की FIR से ये भी खुलासा हुआ है कि हमलावरों का एक साथी भी घायल हुआ है। अतीक और अशरफ पर जब हमलावर गोली चला रहे थे, तो वहां मौजूद उनके एक साथी को भी गोली लग गई।

मिट्टी में मिलाने वाले बयान की वजह से हुई हत्या’

बता दें कि अतीक-अशरफ के मर्डर के बाद सोशल मीडिया पर चल रहा है कि प्रयागराज के चकिया इलाके में टेंशन है। लोग घरों में कैद हैं, दुकानें बंद हैं। वहीं रामगोपाल यादव ने कहा है कि सीएम योगी के मिट्टी में मिलाने वाले बयान की वजह से अतीक और अशरफ की हत्या हुई है। योगी के करीबी अफसर माफिया से मिले हैं और वो अफसर साजिश में शामिल हैं। रामगोपाल यादव ने ये भी सवाल उठाया कि रात में मेडिकल चेकअप के लिए क्यों ले गए।

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अतीक-अशरफ के कातिलों ने कहा- बड़ा माफिया बनना है,कब तक रहेंगे छोटे मोटे शूटर

आपको बताते चले कि 17 साल की उम्र से खून की नदियां बहाकर बलवान बने माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कॉल्विन अस्पताल के बाहर कर दी गई। हत्या के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार पर बड़े सवाल उठ रहे हैं‌। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। यूपी में धारा 144 लागू कर दी गई है। इस बीच बड़ा खुलासा हुआ है। अतीक और अशरफ की हत्या करने वाले तीनों प्रयागराज के बाहर के नहीं है बल्कि बाहर के रहने वाले हैं। अतीक और अशरफ को गोली मारने वाले तीनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास है। पुलिस इस बात की जांच में जुटी हुई है कि आरोपियों पर पहले कहां-कहां मामले दर्ज हैं।

आरोपी बनना चाहते थे बड़ा माफिया

पुलिस पूछताछ में तीनो आरोपियों ने अपना नाम सनी, लवलेश और अरुण बताया है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग बड़ा माफिया बनना चाहते हैं। कब तक छोटे मोटे शूटर रहेंगे। बड़ा माफिया बनना है, इसलिए इस हत्याकांड को अंजाम दिया। बरहाल पुलिस अभी पूरी तरह से तीनों के बयानों पर भरोसा नहीं कर रही है। क्योंकि तीनों के बयानों में विरोधाभास है। तीनों से पूछताछ जारी है।

सूत्रों के अनुसार अभी तक हुई पूछताछ में पता चला है कि अतीक और अशरफ की हत्या करने वाला लवलेश तिवारी बांदा जिले का रहने वाला है। अरुण मौर्य हमीरपुर जिले का रहने वाला है और सनी कासगंज जिले का रहने वाला है।पुलिस इनके बयानों को वेरिफाई कर रही है। जांच में एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि तीनों अतीक और अशरफ की हत्या करने के इरादे से ही प्रयागराज आए थे।

एफआईआर दर्ज कराएगा अशरफ का परिवार

इस बीच अतीक और अशरफ की हुई हत्या में अशरफ का परिवार एफआईआर दर्ज कराएगा। सूत्रों के मुताबिक अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा सकती है। जैनब फातिमा पति अशरफ और जेठ अतीक अहमद की पुलिस हिरासत में हत्या की एफआईआर दर्ज करवा सकती है। अतीक के वकील एफआईआर की तहरीर शाहगंज थाने लेकर जाएंगे।

फर्जी बाइक है नंबर

इंस्पेक्टर धूमनगंज राजेश मौर्य की टीम अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को लेकर आयी थी। इंस्पेक्टर राजेश मौर्य ही सबसे सीनियर अफसर थे, जो अतीक और अशरफ को लाए थे। हमलावर जिस बाइक Cd 100ss UP 70M7337 से आए थे। वो सरदार अब्दुल मन्नान खान के नाम से रजिस्टर बताई जा रही है। बाइक 3 जुलाई 1998 को नगद खरीदी गयी थी। कहीं ये नंबर फर्जी तो नही इसकी भी जांच की जाएगी। बाइक कहां से लाई गई, किसकी है। इसकी जांच जारी है। इसके अलावा कैमरा कहां से लिया, फेक कैमरा है या कही से खरीद कर लाये इसकी भी जांच की जाएगी। फोरेंसिक टीम के 5 अधिकारी मौके पर हर सबूत जुटा कर मौके से रवाना हो गए है।

पूरे उत्तर प्रदेश में धारा 144 लागू

प्रयागराज में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद यूपी में धारा 144 लागू हो गई है और हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद पूरे उत्तर प्रदेश की पुलिस अलर्ट हो गयी है। हर ज़िले में पुलिस अधीक्षक रात से ही गाड़ियों से गश्त करते हुए दिखाई दिए। अलीगढ़, मुरादाबाद, बाराबंकी, संभल और लखीमपुर खीरी में पुलिस ने रात को सड़कों पर फ्लैग मार्च किया। आधी रात में सड़कों पर बेहद सख्त चेकिंग अभियान चला।

सरेंडर सरेंडर बोलते हुए किया आरोपियों ने सरेंडर

यह हत्याकांड अतीक अहमद के बेटे असद अहमद को दफनाए जाने के लगभग 12 घंटे के आसपास हुआ है। अतीक अहमद और अशरफ की हत्या करने के बाद तीनों हमलावरों ने फौरन सरेंडर कर दिया। पुलिसकर्मियों ने तीनों को गिरफ्तार किया। मौके से तीन हथियार और कारतूस मिले हैं। हमलावरों के पास से एक कैमरा, एक माइक आईडी भी बरामद हुई है।अतीक और अशरफ की हत्या के बाद से यूपी में हाई अलर्ट जारी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस का प्रयास है कि किसी भी तरह से माहौल न बिगड़ने दिया जाए।

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