Wednesday, April 8, 2026
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सुप्रीम कोर्ट से अडानी ग्रुप को बड़ी राहत, एक्सपर्ट कमेटी को नहीं मिले हेराफेरी के सबूत

हिंडनबर्ग मामले में अडानी ग्रुप को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एक्सपर्ट कमेटी को अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच में कोई सबूत नहीं मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट की एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी ग्रुप द्वारा शेयर की कीमत में मैनिपुलेशन के कोई सबूत नहीं मिले हैं। जांच कमेटी ने सेबी की 4 रिपोर्टस का हवाला दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, ये रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की गई है। साथ ही एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट ने कहा है कि अडानी ग्रुप ने स्टॉक एक्सचेंज को सभी जरूरी जानकारियां दी थीं। अडानी ग्रुप के शेयर पहले से ही एडिशनल सर्विलांस की निगरानी में थे। आपको बता दें कि सेबी ने भी ईडी (ED) को जो रिपोर्ट दी है। उसमें अडानी ग्रुप पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। यह अडानी ग्रुप के लिए बड़ी राहत की खबर है।

सेबी को मिला तीन महीने का समय

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को गौतम अडानी की अगुवाई वाले समूह द्वारा शेयर मूल्यों में हेराफेरी करने के आरोपों की जांच पूरी करने के लिए तीन महीने यानी 14 अगस्त तक का समय दिया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेबी को गौतम अडानी की अगुवाई वाले समूह पर लगे शेयर मूल्यों में हेराफेरी के आरोपों की जांच पर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने दो मार्च को गौतम अडानी की अगुवाई वाले समूह द्वारा शेयर मूल्यों में हेराफेरी करने के आरोपों की जांच करने के लिए छह सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया था। कारोबारी समूह पर यह आरोप अमेरिकी शॉर्ट-सेलर कंपनी हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लगाए थे। उच्चतम न्यायालय अडानी हिंडनबर्ग विवाद मामले पर 11 जुलाई को आगे की सुनवाई करेगा। पीठ ने कहा ‘‘सेबी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दिया गया समय 14 अगस्त 2023 तक बढ़ाया जाता है।

हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप पर लगाए थे गंभीर आरोप

आपको बता दें कि अमेरिकी वित्तीय शोध और निवेश कंपनी हिंडनबर्ग ने इस साल जनवरी में अडानी समूह पर आरोप लगाया था कि साइप्रस और मॉरीशस स्थित इनमें से कुछ कोष अडानी से जुड़े थे, जिनका इस्तेमाल समूह की कंपनियों शेयरों के भाव में गड़बड़ी करने में किया गया। हालांकि, अडानी समूह ने सभी आरोपों से इनकार किया था। उसके बाद जांच कमेटी गठित की गई थी।

अडानी ग्रुप कंपनियों के शेयरों में आया उछाल

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में अडानी ग्रुप को राहत मिलने के बाद ग्रुप कंपनियों के शेयरों में उछाल देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार में लिस्टेड 10 कंपनियों में से सिर्फ 1 में गिरावट बल्कि 9 में तेजी देखने को मिल रही है। अडानी इंटरप्राइजेट 2.20 फीसदी की तेजी के साथ 1931.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है। वहीं, अडानी पावर में 3.27 की तेजी देखने को मिल रही है। अडानी ट्रांसमिशन, अडानी विल्मर, अंबुजा सीमेंट, एनडीटीवी में भी अच्छी तेजी देखने को मिल रही है।

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आखिर सिद्धारमैया को ही कांग्रेस ने क्यों बनाया कर्नाटक का सीएम ?

पांच दिनों तक मंथन के बाद आखिरकार कांग्रेस ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर ही लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। पांच दिनों से चल रहे कर्नाटक कांग्रेस के सियासी नाटक का आज अंतिम दिन है। अब कांग्रेस की वो प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है जिसका इंतज़ार पिछले पांच दिन से हो रहा था।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया। इससे पहले बुधवार को आधी रात सिद्धारमैया के नाम पर डीके शिवकुमार ने अपनी सहमति दे दी थी जिसके बाद आज दोनों केसी वेणुगोपाल के घर पर पहुंचे। वहां ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार एक कार में सवार होकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पहुंचे। खरगे के साथ दोनों की तस्वीर रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट की है।

सिद्धारमैया सीएम की रेस में कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को पीछे छोड़ दिया। डीके शिवकुमार भी लगातार कोशिश करते रहे। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी से लेकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तक से मुलाकात की, लेकिन बात नहीं बनी। सिद्धारमैया डीके शिवकुमार पर भारी पड़े।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर जिस चेहरे को आगे करके कांग्रेस ने पूरा चुनाव लड़ा उसे सीएम क्यों नहीं बनाया? सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाने की क्या वजह है? आखिर कैसे डीके शिवकुमार पर सिद्धारमैया भारी पड़े ? आइए जानते हैं…

डीके शिवकुमार पर मुकदमों की है बड़ी मुसीबत

एक तो सबसे बड़ा कारण डीके शिवकुमार पर चल रहे मुकदमे हैं। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता यही रही कि डीके शिवकुमार के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। इस बीच, कर्नाटक के डीजीपी को ही सीबीआई का नया डायरेक्टर भी बना दिया गया है। कहा जाता है कि सीबीआई के नए डायरेक्टर डीके शिवकुमार को करीब से जानते हैं। दोनों के बीच बिल्कुल नहीं बनती है। ऐसे में कांग्रेस को लगा कि अगर डीके शिवकुमार को सीएम बना दिया जाता है तो सीबीआई उनकी पुरानी फाइलों को खोल देगी, जिसका नुकसान सरकार को उठाना पड़ेगा।

सिद्धारमैया को मिला ज्यादातर विधायकों ने समर्थन दिया

इस चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत हासिल की है। बताया जाता है कि विधायक दल की बैठक में 95 विधायकों ने खुलकर सिद्धारमैया का नाम लिया। मतलब विधायक सिद्धारमैया को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस ने सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दिया होता तो संभव है कि आगे चलकर सिद्धारमैया बगावत कर सकते थे।

पिछड़े वर्ग में सिद्धारमैया की है मजबूत पैठ

ये सबसे बड़ा कारण है। सिद्धारमैया की पकड़ हर तबके में काफी अच्छी है। खासतौर पर दलित, पिछड़े और मुसलमानों के बीच वह काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में अगर सिद्धारमैया को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया होता तो संभव है कि वह पार्टी के खिलाफ जा सकते थे। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के हाथों से दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग का एक बड़ा वोट बैंक भी खिसक सकता था।

लोकसभा चुनाव पर कांग्रेस का फोकस

2013 और फिर 2018 में सरकार बनाने के बावजूद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का परफॉरमेंस ठीक नहीं था। ऐसे में इस बार पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। सिद्धारमैया को पार्टी और सरकार दोनों ही चलाने का अनुभव है। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं, जिसमें से 2019 में कांग्रेस को सिर्फ एक सीटें मिली थी। खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी गुलबर्गा से चुनाव हार गए थे। ऐसे में अब जब फिर से सूबे में सरकार बन चुकी है तो कांग्रेस ने इस बार ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य बनाया है। इसके लिए पार्टी हाईकमान को सिद्धारमैया का चेहरा ज्यादा मजबूत समझ में आया।

सिद्धारमैया का ‘अहिन्दा’ फॉर्मूला रहा था सफल

सिद्धारमैया लंबे समय से अल्पसंख्यातारु (अल्पसंख्यक), हिंदूलिद्वारू (पिछड़ा वर्ग) और दलितारु (दलित वर्ग) फॉर्मूले पर काम कर रहे थे। अहिन्दा समीकरण के तहत सिद्धारमैया का फोकस राज्य की 61 प्रतिशत आबादी है। 2004 से ही वह इस फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं और काफी हद तक ये सफल भी रहा। ये ऐसा फॉर्मूला है, जिसमें अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़ा वर्ग के वोटर्स को एक साथ लाया जा सकता है। कर्नाटक में दलित, आदिवासी और मुस्लिमों की आबादी 39 फीसदी है, जबकि सिद्धारमैया की कुरबा जाति की आबादी भी सात प्रतिशत के आसपास है। 2009 के बाद से कांग्रेस कर्नाटक में इसी समीकरण के सहारे राज्य की राजनीति में मजबूत पैठ बनाए हुई है। यही कारण है कि कांग्रेस इसे कमजोर नहीं करना चाहती है।

चुनाव से पहले किया बड़ा ऐलान

चुनाव से पहले ही सिद्धारमैया ने एलान कर दिया था कि ये उनका आखिरी चुनाव है। इसके बाद वह राजनीति में तो रहेंगे, लेकिन कोई पद नहीं सभालेंगे। चुनाव के बाद भी हाईकमान के सामने उन्होंने यही दांव खेला। उन्होंने कहा कि वह इसके बाद कोई पद नहीं लेंगे। ऐसे में आखिरी बार उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। पार्टी को भी ये बात ठीक लगी। ऐसा इसलिए भी क्योंकि कर्नाटक में अब बीएस येदियुरप्पा के बाद सिद्धारमैया ही सबसे वरिष्ठ नेता हैं। ऐसे में पार्टी को उनके अनुभव का फायदा मिल सकता है।

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पत्नी और बेटी की चाकू से गोदकर हत्या, अब करने जा रहा हूं सुसाइड

दिल्ली के शाहदरा इलाके में पिता ने अपनी एक बेटी और पत्नी की चाकू मारकर हत्या की कर दी। इसके बाद हत्यारे पिता ने खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जबकि एक बेटे का अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोपी की पहचान 43 साल के सुशील सिंह के तौर पर हुई है। मृतक पत्नी अनुराधा की उम्र 40 साल, मृतक बेटी अदिति की उम्र 6 साल और घायल बेटे युवराज की उम्र 13 साल है। युवराज के शरीर में चाकू के गहरे निशान हैं, उसको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। युवराज का इलाज जारी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों की हत्या करने से पहले इंटरनेट पर ‘हाउ टू टाई नॉट’ सर्च किया था।

ईस्ट विनोद नगर डिपो में तैनात था

शाहदरा के ज्योति कॉलोनी में रहने वाला आरोपी सुशील दिल्ली मेट्रो (DMRC) में सुपरवाइजर था। सुशील ईस्ट विनोद नगर डिपो में डीएमआरसी में मेंटेनेंस सुपरवाइजर के पद पर काम करता था। एफएसएल की टीमें मौके पर पहुंच कर घटना का मुआयना कर रही हैं। एफएसएल के मुआयना करने के बाद प्रथम दृष्टया सामने आया है कि मृतक सुशील ने परिवार के सदस्यों की हत्या की है और बाद में उसने खुद को फांसी लगा ली। पुलिस सभी एंगल से आगे की जांच कर रही है।

अब करने जा रहा हूं सुसाइड

इस मामले में एक बड़ी जानकारी ये सामने आ रही है कि सुशील ने आत्महत्या से पहले अपने दफ्तर के एक कलीग से फोन पर बात की थी। दरअसल आज जब सुशील दफ्तर नहीं पहुंचा तो उसके साथ काम करने वाले एक शख्स ने उसे फोन कर पूछा कि तुम दफ्तर क्यों नहीं आए। उस वक्त तक सुशील जिंदा था और उसने कलीग से बात की। सुशील ने कलीग को बताया कि उसने अपनी पत्नी-बेटी और बेटे की हत्या कर दी है और अब खुद सुसाइड करने जा रहा है। जब दोस्त ने ये बात सुनी तो उसने तुरंत पुलिस को फोन किया और सारी बात बताई। पुलिस जब तक घटनास्थल पर पहुंची तब तक सुशील, उसकी पत्नी, बेटी तीनों की मौत हो चुकी थी और बेटा घायल था।

पुलिस को मिला सुसाइड नोट भी मिला

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तहकीकात शुरू कर दी। शाहदरा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मौके का मुआयना कर रही है और उसे सुसाइड नोट भी मिला है। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों की हत्या करने से पहले इंटरनेट पर ‘हाउ टू टाइ नॉट’ सर्च किया था। घटना स्थल पर 3 शव मिले हैं। एफएसएल की टीमें घटना स्थल का मुआयना कर रही हैं।

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यूपी निकाय चुनाव में हार के बाद पहली बार अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सोमवार को यूपी के इटावा पहुंचे। जिले के जसवंत नगर के फतेहपुरा गांव में अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता स्वर्गीय महावीर सिंह यादव को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कर्नाटक से बीजेपी साफ हुई है उसी तरह आने वाले समय में यूपी और देश के दूसरे राज्यों से भी सफाया होगा।

उन्होंने कहा, निकाय चुनाव में अधिकारियों ने बेईमानी न की होती तो आज परिणाम कुछ अलग होते। वोटर लिस्ट से लेकर सरकारी कर्मचारियों के व्यवहार से लगता है कि सरकार के दबाव में निकाय चुनाव कराया गया, लेकिन जनता अबकी बार बीजेपी को पूरे देश से बाहर करने का काम करेगी।

वोटों के ध्रुवीकरण पर बोले अखिलेश यादव

आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम की ओर से मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी कहीं पर खुद चुनाव लड़ती है तो कहीं पर दूसरे दलों को आगे कर देती है। इसलिए इन दलों को सोचना पड़ेगा कि आने वाले समय में कि किसके साथ रहने से लोकतंत्र बचेगा और किसके साथ रहने से नहीं बचेगा।

समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा – अखिलेश यादव

सपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि पिछले मेयर और नगर पालिका के चुनाव से तुलना करें तो इस बार पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा है। केंद्र सरकार की 9 साल की उपलब्धियों पर अखिलेश यादव ने कहा कि 9 महीने में एक नया जीवन मिल जाता है। जो बुनियादी समस्याएं और सवाल थे, वहीं के वहीं हैं, महंगाई और बेरोजगारी आज भी चरम सीमा पर है। देश और प्रदेश के अधिकारी बीजेपी के पदाधिकारी बन कर काम कर रहे हैं। शहरों में गंदगी और किसानों की समस्या का 9 साल में कोई भी समाधान नहीं हुआ, वह आज भी वैसी की वैसी ही है। 2024 की तैयारी में मीडिया के प्रचार से बचने का प्रयास रहेगा।

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इमरान खान को फांसी दे दी जाए, पाकिस्तान की संसद में उठी मांग

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी और जमानत के बाद से लेकर आज तक पाकिस्तान में बवाल मचा है। यहां की सियासी पार्टियां आमने सामने हैं और लोग सड़कों पर हैं। पाकिस्तान की संसद में आज पीटीआई प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को फांसी दिए जाने की मांग उठी। नेशनल असेंबली में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल आसिफ अली जरदारी की पार्टी के सांसद राजा रियाज अहमद खान ने इमरान खान को फांसी दिए जाने की मांग उठाते हुए कहा, यहूदियों के एजेंट को सरेआम फांसी दी जानी चाहिए।

लेकिन अदालतें उनका ऐसे स्वागत कर रही हैं जैसे कि वह उनके दामाद हों। इसके साथ ही नेशनल असेंबली (एनए) ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) न्यायमूर्ति उमर अता बंदियाल के खिलाफ संदर्भ दायर करने के लिए समिति के गठन को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है। इस मामले में संसद में निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ सत्ताधारी गठबंधन का प्रदर्शन

उधर इमरान की रिहाई के खिलाफ पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) ने सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं उग्र भीड़ ने वहां अपना कैंप लगा लिया है। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) कई पार्टियों से मिलकर बना संगठन है। इसमें सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUIF) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) सहित कई पार्टियां शामिल हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों की ओर से इमरान का ‘‘समर्थन’’ करने पर न्यायपालिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एक इस्लामी दल ने कई मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कथित रूप से ‘‘राहत’’ देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट समेत देश की न्यायपालिका के खिलाफ प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर मुख्य न्यायाधीश को डराने की कोशिश – इमरान खान

इमरान खान ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के बाहर किए जा रहे जेयूआई-एफ के ‘‘नाटक’’ का एकमात्र उद्देश्य पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को डराना है। ताकि वह संविधान के अनुसार फैसला न करें। इमराम खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में मंगलवार को हिंसक प्रदर्शन शुरू हुए थे। जो शुक्रवार तक जारी रहे। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों सैन्य एवं सरकारी संस्थानों के परिसरों को नुकसान पहुंचा था।

संविधान के खिलाफ काम कर रही शरीफ सरकार – इमरान खान

पाकिस्तान की सियासत में फिर बड़ा बवाल मचा है।रेड जोन का गेट तोड़े जाने पर इमरान खान भड़क गए और उन्होंने एक वीडियो ट्वीट कर सरकार पर बहुत बड़ा आरोप लगा दिया। इमरान ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ जा रहे उपद्रवियों की सुरक्षा बलों ने मदद की और उनका रास्ता आसान बनाया। इमरान ने कहा कि सरकार संविधान के ख़िलाफ़ काम कर रही है।

इमरान खान ने पेश की है 6 मामलों में जमानत के लिए याचिका

इसी बीच इमरान खान अपनी पत्नी के साथ आज लाहौर हाईकोर्ट पहुंचे। दोनों को आज कोर्ट में पेश होना था। बुशरा बीबी को 23 मई तक जमानत मिल गई है। वहीं इमरान खान 6 मामलों में जमानत के लिए अर्जी दे रहे हैं। 9 मई की हिंसा के बाद दर्ज हुए हैं इमरान पर केस। इनमें इमरान, समर्थकों पर हत्या और आतंकवाद की धाराएं लगी हैं। लाहौर में कोर कमांडर के घर पर आगजनी हुई थी। लाहौर के जिन्ना हाउस को भी भीड़ ने निशाना बनाया था। रावलपिंडी में आर्मी हेडक्वार्टर में भी इमरान खान के समर्थकों ने तोड़फोड़ की थी।

read more : अभी खत्म नहीं हुआ कारोबार, अतीक अहमद की हत्या के बाद भी उसके गुर्गे बेखौफ

अभी खत्म नहीं हुआ कारोबार, अतीक अहमद की हत्या के बाद भी उसके गुर्गे बेखौफ

अतीक अहमद और अशरफ की हत्या से भले ही दोनों के करीबी सदमे में हों, लेकिन जमीन के कारोबार में लगे अतीक के गुर्गे अपना धंधा जारी रखे हुए हैं और लगातार पीड़ितों को धमका रहे हैं। ताजा मामला कसारी मसारी की रहने वाली अख्तरी बेगम का है। अख्तरी बेगम ने साल 2020 में अतीक के गुर्गे अकरम, आजम साहिल पर मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें उसके पति और देवर को गवाही बदलने के लिए धमकाया जा रहा है। पीड़ित महिला का आरोप है कि ये तीनों लोग जमीन कब्जे का अवैध धंधा करते हैं और 2020 में जमीन कब्जे को लेकर उसके पति और देवर पर 60 फीट रोड पर गोलियां चलाकर जानलेवा हमला किया गया। जिसका मुकदमा भी धूमन गंज थाने में दर्ज है। अब ये लोग गवाही बदलने और मुकदमा खत्म कराने का दबाव बना रहे हैं।

अख्तरी बेगम ने अर्जी देकर पुलिस अफसरों से तीनों आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि तीनों लोग अपराधी किस्म के हैं। सभी हिस्ट्रीशीटर हैं। कभी भी कोई वारदात पीड़ित के साथ कर सकते हैं। खास बात ये है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी तीनों अब तक फरार हैं। पुलिस ने आगे भी मुकदमे के बाद कोई कार्रवाई नहीं की।

क्या है आरोप

ऐसा एक मामले भी सामने आया है जिसमें अतीक अहमद ने पीड़ित को धमकी भी दी कि जमीन भूल जाओ, नहीं तो इसी जमीन पर तुम्हारी कब्र खुदवा दूंगा। अतीक अहमद ने पिछले साल ये धमकी पीड़ित को गुर्गों के फोन द्वारा दी थी। अब अतीक की मौत के बाद पीड़ित विकास बक्शी ने धूमनगंज थाने में अतीक के 8 करीबियों पर मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि इन लोगों ने कागजों में हेर-फेर करके सरकारी जमीन उसको बेच दी। जब उसने जमीन पर निर्माण कराया तो पीडीए ने निर्माण गिरा दिया। तब पता चला ये जमीन पीडीए के अधीन है। पीड़ित से इस जमीन के बदले अतीक के करीबियों ने 12 लाख रुपए लिए लेकिन वापस नहीं किए।

होता था अतीक अहमद – अशरफ का हिस्सा

प्रयागराज शहर में माफिया अतीक और अशरफ के सैकड़ों गुर्गे जमीन का धंधा करते हैं, जिसमें अधिकतर जमीनों की खरीद फरोख्त में अतीक और अशरफ का कमीशन बंधा होता था। अतीक के गुर्गे या तो विवादित जमीन को सस्ते दामों में खरीदकर महंगे में बेचते थे, या फिर ऐसी जमीनों पर कब्जा करते थे, जिसका मालिक गरीब और असहाय हो ताकि वो आवाज न उठा सके। कभी-कभी तो धमकी के लिए गुर्गे पीड़ित की फोन पर अतीक से सीधा बात भी करा देते थे।

अतीक अहमद के नाम पे होता था कारोबार

अतीक अहमद अपने नाम से जमीन का कारोबार तो करता ही था लेकिन करेली खुल्दाबाद धूमनगंज के पीपल गांव झलवा, पुरामुफ्ती कौशाम्बी के तमाम इलाको में जिस भी जमीन की खरीद फरोख्त होती, उसमें अतीक का कमीशन बनता था और जेल जाने के बाद ये पैसा उसकी पत्नी शाइस्ता को पहुंचाया जाता था। अतीक के 1 दर्जन हार्डकोर क्रिमिनल शाइस्ता के सीधा टच में रहते थे। उनसे शाइस्ता और असद सीधा बात करते थे। कई जमीनों का कमीशन शूटर अरमान ने भी शाइस्ता को लाकर दिया था।

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एफआईआर में हुआ खुलासा, समीर वानखेड़े ने गोसावी के साथ मिल कर रची थी साजिश

आर्यन खान ड्रग्स केस एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। बीते दिनों शाहरुख खान के बेटे के मामले की जांच करने वाले अधिकारी समीर वानखेड़े का मुश्किलों में फंसना और फिर उनका इस्तीफा इस केस को लाइमलाइट में ले आया है। सीबीआई ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ कथित तौर पर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले में फंसाने के लिए 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। अब इस मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

25 करोड़ रुपये लेने की थी योजना

खबर है कि, ड्रग्स क्रूज मामले में एनसीबी के पूर्व जांच अधिकारी समीर वानखेड़े और उनके साथियों के खिलाफ एक एफआईआर में सीबीआई ने उनके खिलाफ 25 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के सबूत होने का जिक्र किया है। सीबीआई ने खुलासा किया कि इनडिपेंडेंट विटनेस केपी गोसावी ने कथित तौर पर आर्यन खान ड्रग्स मामले में आर्यन खान के परिवार से 25 करोड़ रुपये वसूलने की योजना बनाई थी।

समीर वानखेड़े के लिए गोसावी कर रहा था डील

एफआईआर की कॉपी के अनुसार, समीर वानखेड़े ने डील के लिए पैसों के मामले में गोसावी को पूरी छूट दे रखी थी। जांच में ये भी पता चला की संदिग्धों को स्वतंत्र गवाह के. पी. गोसावी के वाहन में लाया गया। गोसावी को एनसीबी अधिकारी की तरह दिखाया गया था। समीर वानखेड़े के कहने पर गोवासी ने आर्यन खान को एनसीबी अधिकारी बनकर ऑफिस में यहां से वहां खींचा और धमकाया। उसके साथ सेल्फी ली, आर्यन खान के परिवार से 25 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश रची, उसे मामले में फंसाने की धमकी दी और आखिरकार 18 करोड़ में डील फाइनल हो गई। के. वी. गोसावी ने टोकन मनी के तौर पर 50 लाख रुपये लिया था। हालांकि, बाद में इसमें से कुछ हिस्सा वापस कर दिया गया।

सीबीआई ने डाला था समीर वानखेड़े के घर पर छापा

आर्यन खान को 2 अक्टूबर, 2021 को कॉर्डेलिया क्रूज पर कथित ड्रग रेड में गिरफ्तार किया गया था। साल 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी वानखेड़े और चार अन्य – एनसीबी अधिकारी विश्व विजय सिंह, खुफिया अधिकारी आशीष रंजन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके साथ ही मुंबई, दिल्ली, रांची, लखनऊ, गुवाहाटी और चेन्नई में 29 जगहों पर तलाश अभियान शुरू किया गया था। सीबीआई ने समीर वानखेड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके परिसरों पर छापेमारी की थी। सीबीआई की टीम ने वानखेड़े के मुंबई स्थित घर पर 13 घंटे से ज्यादा पूछताछ की थी। सीबीआई अधिकारी वानखड़े के पिता, सास-ससुर और बहन के घर भी पहुंचे थे। तलाश के घेरे में दो प्रावेट लोग भी थे, जिनका नाम केपी गोसावी और सिविल डिसूजा है।

आर्यन खान को मिली थी क्लीन चिट

बता दें कि एनसीबी ने ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले में चार्जशीट दायर की थी। उसने बाद में आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी थी। वहीं, एनसीबी द्वारा गठित एक एसआईटी की रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि समीर वानखेड़े के नेतृत्व वाली जांच में चूक हुई थी।

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 : कांग्रेस की जीत ,बीजेपी को सबक

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 का नतीजा साफ़ नज़र आ रहा है। विधानसभा की 224 सीटों पर कांग्रेस पूर्ण बहुमत की सर्कार बनाती दिख रही है। हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक ने भी कांग्रेस को ज़ोरदार जीत दिलाई। विधानसभा चुनाव में हार के साथ ही दक्षिण भारत में बीजेपी का सफाया हो गया। पांच साल पहले भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी , पर जनादेश नहीं मिला था। इस बार भी वोट प्रतिशत बना रहने के बावजूद बीजेपी दूसरे नंबर पर आ गई।

कांग्रेस की बड़ी जीत पर राहुल गांधी ने राज्य के लोगों को बधाई और धन्यवाद दिया। उन्होंने राज्य में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई भी दी।राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘शक्ति ने ताकत को हरा दिया, यह हर राज्य में होगा. हमने अभद्र भाषा का प्रयोग करके लड़ाई नहीं की. हमने राज्य में गरीबों के लिए लड़ाई लड़ी. कर्नाटक में नफरत की राजनीति हार गई और राज्य में प्यार की जीत हुई है.’

कौन होगा मुख्यमंत्री ?

कर्नाटक में अब मुख्यमंत्री तय करना आसान नहीं होगा। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को मोदी के लिए गाली साबित करने में बीजेपी नाकाम रही। गुजरात का फार्मूला कर्नाटक में नहीं चला क्योंकि सामने कर्नाटक का अपना बेटा ही था। कर्नाटक के घर-घर का मिल्क ब्रांड नंदिनी के सामने गुजरात के अमूल को लाने का मुद्दा बीजेपी के खिलाफ गया। आधा लीटर नंदिनी दूध देने के वादे ने इस मुद्दे पर बीजेपी को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की। आने वाले चुनावों में अन्य राज्यों में भी बीजेपी को ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ सकता है।

अपने गृह राज्य हिमाचल में पार्टी की सरकार बरकरार ना रख सके बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को कर्नाटक की पराजय का कुछ तो हलाहल पीना ही पड़ेगा। दूसरी तरफ अपने गृह राज्य कर्नाटक में बंपर जीत से मल्लिकार्जुन खरगे को ताकत मिलेगी और उन्हें कठपुतली बताने वाली बीजेपी की जुबान पर इस मामले में ताला लग सकेगा। सोनिया गांधी की कर्नाटक चुनाव में उपस्थिति भी कांग्रेस के लिए संजीवनी बनी, ऐसा कहा जा सकता है, इसका उल्टा करें तो सवाल बनता है कि मोदी ना गए होते तो बीजेपी का और क्या हुआ होता?

भाजपा ने नहीं लिया हिमाचल की हार से सबक

हिमाचल में हारने के बाद बीजेपी ने शायद सबक नहीं लिया, कांग्रेस ने हिमाचल की जीत को कर्नाटक में जारी रखा। महाराष्ट्र-कर्नाटक विवाद का हल दोनों राज्यों और केंद्र में भी बीजेपी सरकार होने के बावजूद नहीं करना बीजेपी की कर्नाटक में पराजय की बड़ी वजह बनी। मुंबई कर्नाटक और महाराष्ट्र कर्नाटक कहे जाने वाले क्षेत्रों में बीजेपी को इस बार काफी नुकसान हुआ।

कर्नाटक में कांग्रेस को राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का लाभ मिला और पार्टी में आज तक एकजुटता भी बनी रही, इसे बरकरार रखने की चुनौती अब कांग्रेस के सामने होगी।

सीएम बोम्मई ने ली हार की जिम्मेदारी

कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने विधानसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा, ‘मैं इस हार की जिम्मेदारी लेता हूं. इसके कई कारण हैं. हम सभी कारणों का पता लगाएंगे और संसदीय चुनावों के लिए एक बार फिर से पार्टी को मजबूत करेंगे.’

सीएम बसवराज बोम्मई ने ली हार की जिम्मेदारी, बोले- फिर से पार्टी को करेंगे मजबूत

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अब तक रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे निकल चुकी है। हालांकि, अभी नतीजे आने बाकी है उससे पहले ही कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने हार की जिम्मेदारी ले ली है। उन्होंने कहा कि वे इस हार की जिम्मेदारी लेते हैं। सीएम बोम्मई ने कहा कि इस हार के कई कारण है, हम सभी कारणों का पता लगाएंगे और संसदीय चुनावों के लिए एक बार फिर से पार्टी को मजबूत करेंगे।

कांग्रेस ने अब 103 सीटों पर दर्ज की जीत

गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजों में खबर लिखे जाने तक कांग्रेस 103 सीटें जीत चुकी है, जबकि 33 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, नतीजों में बीजेपी 50 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 14 सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा जेडीएस अब तक 16 सीटें जीत चुकी है और 4 सीटों पर आगे चल रही है। 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के लिए 113 सीटों का आंकड़ा चाहिए और कांग्रेस रुझानों में इस जादुई आकड़े से काफी आगे निकलती दिख रही है।

अपनी सीट हारे सीएम बसवराज बोम्मई

कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई राज्य के हावेरी जिले की अपनी सीट शिग्गांव से हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस के पठान यासिर अहमद खान ने 35978 वोटों के मार्जिन से हराया है। बता दें कि 2018 में शिग्गांव सीट बीजेपी की तरफ से जीती गई 104 सीटों में से एक थी। इसे पिछले चुनाव में सीएम बोम्मई ने ही जीता था। इस सीट से कांग्रेस के सैयद अजीमपीर कादरी दूसरे और निर्दलीय उम्मीदवार सोमन्ना उर्फ ​​स्वामीलिंग बेविनमाराद तीसरे स्थान पर रहे थे।

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सीबीआई ने एनसीबी के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े पर दर्ज किया केस

सीबीआई ने एनसीबी के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में केस दर्ज किया है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक समीर वानखेड़े समेत 5 लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें एनसीबी के अन्य अधिकारी शामिल है। सीबीआई की 20 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन जारी है।

जिसमे मुंबई , रांची, कानपुर और दिल्ली शामिल है। सीबीआई की ओर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाए गए हैं कि समीर वानखेड़े औऱ अन्य ने कोडिला क्रूज आर्यन खान मामले में 25 करोड़ की डिमांड की थी और 50 लाख उगाही के तौर पर ले लिए थे।

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समीर वानखेड़े ने कथित क्रूज ड्रग्स मामले में बॉलीवुड के सुपर स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। उस वक्त समीर मुंबई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुंबई जोन के प्रमुख थे। आर्यन खान को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया था। मई 2022 में पर्याप्त सूबतों के अभाव में आर्यन खान को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। एनसीबी ने भी समीर वानखेड़े की विजिलेंस जांच की थी जिसमें उनपर गंभीर आरोप लगे थे।

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हाई कोर्ट ने सर्वे में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर विवाद मामले में एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराई जाए। साइंटिफिक सर्वे का काम आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को करना होगा। कथित शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए बिना साइंटिफिक सर्वे करना है।

साइंटिफिक सर्वे के जरिए यह पता लगाना होगा कि बरामद हुआ कथित शिवलिंग कितना पुराना है, यह वास्तव में शिवलिंग है या कुछ और है। कोर्ट ने जिला जज के उस आदेश को भी रद्द कर दिया। जिसमे जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। कथित शिवलिंग का साइंटिफिक सर्वे कार्बन डेटिंग के जरिए कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया है। इस मामले में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने कल ही सील बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

क्या है पूरा मामला

ज्ञानवापी विवाद को लेकर हिन्दू पक्ष का दावा है कि इसके नीचे 100 फीट ऊंचा आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करीब 2050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को तुड़वा दिया। दावे में कहा गया है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर उसकी भूमि पर किया गया है जो कि अब ज्ञानवापी मस्जिद के रूप में जाना जाता है।

हाई कोर्ट ने एएसआई को सर्वे का दिया आदेश

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कर यह पता लगाया जाए कि जमीन के अंदर का भाग मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे का फर्श तोड़कर ये भी पता लगाया जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ भी वहां मौजूद हैं या नहीं।

मस्जिद की दीवारों की भी जांच कर पता लगाया जाए कि ये मंदिर की हैं या नहीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों से ही ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ था। इन्हीं दावों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की एक टीम बनाई। इस टीम को ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने के लिए कहा गया था।

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अडाणी-हिंडनबर्ग मामले सुप्रीम कोर्ट ने कहा इतना वक्त नहीं दे सकते

अडाणी-हिंडनबर्ग मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बाजार नियामक सेबी से कहा कि जांच के लिए 6 महीने का वक्त बहुत ज्यादा है। कोर्ट ने कहा कि हम आपको 6 महीने नहीं दे सकते, हम 3 महीने तक का समय बढ़ा सकते हैं। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इसका विरोध किया। कोर्ट इस मामले पर अब सोमवार यानी 15 मई को सुनावई करेगा।

6 महीने के समय की मांग उचित नहीं – सुप्रीम कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सेबी से कहा कि जांच पूरी करने के लिए 6 महीने के समय की मांग उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हम 14 अगस्त के आस-पास सुनवाई करेंगे और 3 महीने के भीतर आप जांच पूरी कर लें। सुनावई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने कहा,” हमने जो कमिटी बनाई थी उसने अब तक पढ़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 मई को सुनवाई के दौरान सेबी के आवेदन पर विचार करेंगे।

जांच होगी प्रभावित – सुप्रीम कोर्ट

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट से आग्रह किया कि कमेटी की रिपोर्ट को सीलबंद कवर में दाखिल करने की अनुमति न हो। उन्होंने कहा कि अब तक क्या जांच की है, इसका खुलासा करना होगा। इस पर सीजेआई ने कहा कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में नहीं है। सीजेआई ने कहा कि ये कोई आपराधिक मुकदमे की जांच से जुड़ा मामला नहीं है, जांच से जुड़ी जानकारी का खुलासा करने से जांच प्रभावित होगी।

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तो उद्धव ठाकरे के खिलाफ कर देंगे कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का केस

महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को शुक्रवार को ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ का केस करने की बड़ी चेतावनी दी। बावनकुले ने उद्धव के सचेत करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार को बार-बार ‘अवैध सरकार’ बोलना भारी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अपमान कर रहे हैं। बावनकुले ने कहा कि अगर वे ऐसे ही बार-बार सरकार को ‘अवैध’ बोलेंगे तो बीजेपी उनके ऊपर ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ का केस कर सकती है।

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने

महाराष्ट्र में पिछले साल शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद उद्धव सरकार गिरने और संबंधित राजनीतिक संकट से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर 5 जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में सर्वसम्मति से कहा कि शिंदे गुट के भरत गोगावाले को शिवसेना का व्हिप नियुक्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ‘अवैध’ था। हालांकि अदालत ने पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार करते हुए कहा कि ठाकरे ने शक्ति परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

बार-बार असंवैधानिक बोल रहे उद्धव ठाकरे

बावनकुले ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आए तो न्याय व्यवस्था सही है। कुछ पॉइंट्स उनके पक्ष में आए, वे उनको सही लगते हैं। लेकिन, जब सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद बनी सरकार पूरी तरह से संवैधानिक सरकार है, उसके बाद भी अदालत के फैसले की अनदेखी करते हुए शिंदे सरकार को बार-बार असंवैधानिक बोला जा रहा है।’ महाराष्ट्र बीजेपी चीफ ने कहा कि हम उनके बयानों के क्लिप लेकर ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ का केस दाखिल कर सकते हैं।

‘नैतिकता है तो इस्तीफा दे दें शिंदे – उद्धव ठाकरे

उद्धव ने गुरुवार को कहा कि अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस में नैतिकता है तो दोनों नेताओं को उसी प्रकार इस्तीफा दे देना चाहिए, जिस प्रकार उन्होंने पिछले साल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उद्धव ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सत्ता के लिए की जाने वाली गंदी राजनीति को उजागर कर दिया है। सबसे अहम बात यह है कि राज्यपाल की भूमिका की भी आलोचना की गई है।’

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली का मुख्यमंत्री ही होगा बॉस, एल जी का कद घटा

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए आज सुकून वाली खबर आई। दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार की कंट्रोवर्सी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा। कोर्ट के इस फैसले को दिल्ली सरकार की जीत के रूप में देखा जा रहा है, इस पर सीएम केजरीवाल का रिएक्शन सामने आया है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा है, ”दिल्ली के लोगों के साथ न्याय करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का तहे दिल से शुक्रिया। इस निर्णय से दिल्ली के विकास की गति कई गुना बढ़ेगी। जनतंत्र की जीत हुई।

सीजेआई ने फैसले में क्या कहा ?

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, चुनी हुई सरकार को प्रशासन चलाने की शक्तियां मिलनी चाहिए अगर ऐसा नहीं होता तो यह संघीय ढांचे के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। अधिकारी जो अपनी ड्यूटी के लिए तैनात हैं उन्हें मंत्रियों की बात सुननी चाहिए अगर ऐसा नहीं होता है तो यह सिस्टम में बहुत बड़ी खोट है। चुनी हुई सरकार में उसी के पास प्रशासनिक व्यस्था होनी चाहिए। अगर चुनी हुई सरकार के पास ये अधिकार नहीं रहता तो फिर ट्रिपल चेन जवाबदेही की पूरी नहीं होती। उन्होंने कहा कि एनसीटी एक पूर्ण राज्य नही है ऐसे में राज्य पहली सूची में नहीं आता है। एनसीटी दिल्ली के अधिकार दूसरे राज्यों की तुलना में कम है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बुलाई मंत्रियों की बैठक

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ट्वीट करते हुए लिखा, ”लंबे संघर्ष के बाद जीत, अरविंद केजरीवाल जी के जज्बे को नमन। दिल्ली की दो करोड़ जनता को बधाई। सत्यमेव जयते।” वहीं, आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मंत्रियों की बैठक बुलाई है। सौरभ भारद्वाज इस वक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।

ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार अब मुख्यमंत्री को

दिल्ली में अफसरो के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार को लेकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ का फैसला सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा पढ़ा गया। फैसला सुनाने से पहले उन्होंने कहा था कि ये फैसला सभी जजों की सहमित से लिया गया है। उन्होंने कहा कि ये बहुमत का फैसला है। सीजेआई ने फैसला सुनाने से पहले कहा कि दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित करने को लिए केंद्र की दलीलों से निपटना आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ये मामला सिर्फ सर्विसेज पर नियंत्रण का है।

काफी समय से लंबित था यह विवाद

4 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र बनाम दिल्ली विवाद के कई मसलों पर फैसला दिया था लेकिन सर्विसेज यानी अधिकारियों पर नियंत्रण जैसे कुछ मुद्दों को आगे की सुनवाई के लिए छोड़ दिया था। 14 फरवरी 2019 को इस मसले पर 2 जजों की बेंच ने फैसला दिया था लेकिन दोनों जजों, जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण का निर्णय अलग-अलग था। इसके बाद मामला 3 जजों की बेंच के सामने लगा और आखिरकार चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने मामला सुना। अब आज इस मामले पर फैसला आया है।

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किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं का हंगामा, बैरिकेड तोड़ धरना स्थल की ओर बढ़े

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते 2 हफ्तों से पहलवानों का प्रदर्शन जारी है। बीते दिनों पहलवानों ने दिल्ली पुलिस पर अपने साथ गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए लोगों से धरना स्थल पर पहुंचने की मांग की थी, जिसके बाद भारतीय किसान यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा का पदाधिकारियों ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं से धरना स्थल पर कूच करने का आह्वान किया था।

राकेश टिकैत ने किया पहलवानों का समर्थन

बीते दिनों दिल्ली पुलिस से धरना स्थल पर पहलवानों से हुई झड़प के बाद पहलवानों ने किसानों से धरना स्थल पर पहुंचे की अपील की थी, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने 7 मई को देशभर में पहलवानों के समर्थन में प्रदर्शन करने का एलान किया था। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के अध्यक्ष नरेश टिकैत और किसान नेता राकेश टिकैत अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहलवानों का समर्थन करने जंतर मंतर पहुंचे थे।

किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं का हंगामा

इसके बाद आज सोमवार को किसान यूनियन के कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे हैं, जहां उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। पहलवानों की अपील के बाद जंतर-मंतर पहुंचे किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया है और दिल्ली पुलिस के लगाए को भी कार्यकर्ताओं ने तोड़ दिया है और धरनास्थल की ओर कूच करने शुरू कर दिया है। किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं द्वारा बैरिकेड्स तोड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा कि किसानों के एक समूह को जंतर मंतर ले जाया गया है। वह एंट्री लेकर धरना स्थल पर पहुंचने की जल्दी में थे और इसी वजह से वह बैरिकेड्स पर चढ़ गए जो नीचे गए। अब उन बैरिकेड्स को हटा दिया गया है। पुलिस टीम ने उनके प्रवेश की सुविधा के लिए बैरिकेड्स को पीछे की ओर खींच लिया है।

दिल्ली पुलिस ने जारी किया बयान

पहलवानों की अपील के बाद हरियाणा की कई खाप पंचायतों और संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा पहलवानों को समर्थन देने और दिल्ली आने की घोषणा के बाद से बदरपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिसकर्मियों व अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा, “असत्य और भ्रामक खबरों से बचे!जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को आवश्यक सहूलियतें दी जा रही है। धरना स्थल पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, आवाजाही DFMD से चेकिंग होने के बाद की जा रही है। कृपया शांति बनाए रखें और कानून का सम्मान करें… जय हिन्द।”

बृजभूषण शरण सिंह खिलाफ पहलवान कर रहे हैं प्रदर्शन

पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 23 अप्रैल से प्रदर्शन कर रहे हैं। एक नाबालिग समेत 7 महिला पहलवानों ने उनपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगया है। इससे पहले उन्होंने इस साल के शुरुआत में जंतर मंतर पर धरना दिया। तब खेल मंत्रालय के दखल के बाद पहलवानों ने अपना धरना खत्म कर दिया और इस मामले में जांच के लिए एक समिति का गठन किया था, लेकिन अब पहलवानों ने समिति पर ही सवाल उठा दिए हैं।

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पहलवानों के समर्थन में जा रही महिला किसानों को बॉर्डर पर रोका, जमकर हुई नारेबाजी

दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर रविवार को एक बार फिर से किसान और दिल्ली पुलिस आमने-सामने हो गए। महिला पहलवानों के समर्थन के लिए जंतर मंतर के लिए निकले किसानों के जत्थे को दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर पर रोक लिया। लेकिन महिला किसान दिल्ली पुलिस के नाकों को तोड़कर पैदल ही आगे बढ़ चली। महिला किसानों ने एमसीडी के कमर्शियल टोल प्लाजा पर जाकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क पर जाम लगा दिया। जिसके बाद दिल्ली पुलिस के हाथ पैर फूल गए और आनन-फानन में महिला किसानों के जत्थे को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई। लगभग 10 बसों में सवार होकर महिला किसान पंजाब के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली के जंतर मंतर के लिए आई हैं। अपने साथ में खाना बनाने का सामान भी लेकर किसान पहुंचे हैं।

महिला किसानों का कहना है कि सरकार को भारतीय कुश्ती महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को तुरंत गिरफ्तार करना होगा। महिला पहलवान लगातार धरना प्रदर्शन कर रही हैं और मंच से बता रही हैं कि उनके साथ यौन शोषण हुआ है। ऐसे में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। महिलाओं ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया तो वहीं रुक जाएंगी। फिलहाल वे एक दिन के प्रदर्शन के लिए दिल्ली आई हैं।

पहलवानों के समर्थन में प्रदर्शन करने का ऐलान

पंजाब की भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) से जुड़ी हुई सैकड़ों महिलाएं कल ही पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना हो गई थी। महिलाओं का पहला पड़ाव जींद में था और आज का पड़ाव जंतर मंतर पर रहने वाला है। महिलाओं के साथ भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रधान जोगेंद्र सिंह उगराहां भी जंतर-मंतर गए हैं। जोगिंदर उगराहां का कहना है कि इस मामले में जांच की जरूरत नहीं है। जब बेटियां कह रही हैं कि उनके साथ यौन शोषण हुआ है तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए। बृजभूषण शरण सिंह को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना चाहिए और सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। अगर सरकार ने जल्द ही बृजभूषण शरण को गिरफ्तार नहीं किया तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे। इतना ही नहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने भी देश भर में 11 मई से 18 मई तक महिला पहलवानों के समर्थन में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

किसानों के जत्थे की गाड़ियों के नोट किए नंबर

दिल्ली पुलिस ने किसानों के जत्थे की गाड़ियों के नंबर नोट करके किसानों को दिल्ली जाने की अनुमति दे दी। काफी समय तक किसानों और पुलिस की आमने सामने आने से तनाव की स्थिति बनी रही। आज हरियाणा की खाप पंचायतें दिल्ली महापंचायत करने जा रही हैं। इसे देखते हुए दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।

किसानों व खापों के समर्थन की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट पर

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों को दिल्ली पुलिस से हुई झड़प के बाद हर तरफ से समर्थन मिल रहा है। किसानों व खाप पंचायतो के समर्थन की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट पर है। दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर पर नाका लगा रखा है। वाहनों को जांच के बाद ही दिल्ली में प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं कुंडली बॉर्डर पर सोनीपत पुलिस की भी एक कंपनी तैनात कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रखने के साथ ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात है।

पहलवानों को मिल रहा लगातार समर्थन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवान ओलंपियन बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक व विनेश फोगाट लगातार धरना दे रहे हैं। पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह शरण की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। सांसद बृजभूषण सिंह शरण पर दिल्ली पुलिस पॉक्सो समेत दो धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चुकी है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। जिसकी मांग को लेकर पहलवान डटे हैं। 3 मई की रात को पहलवानों संग दिल्ली पुलिस की झड़प के बाद उन्हें लगातार समर्थन मिल रहा है। ऐसे में पंजाब व हरियाणा के किसानों व खाप संगठनों के दिल्ली कूच को लेकर पुलिस अलर्ट पर है। पंजाब व हरियाणा के किसानों व खाप प्रतिनिधियों के दिल्ली में पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए हैं।

सोनीपत पुलिस भी अलर्ट पर, एक कंपनी तैनात

दिल्ली पुलिस की तरफ से सुरक्षा बढ़ाने के बाद सोनीपत पुलिस भी अलर्ट पर है। इंस्पेक्टर जोगेंद्र ग्रेवाल के नेतृत्व में 100 जवानों की कंपनी को तैनात किया गया है। हालांकि सोनीपत पुलिस वाहनों को नहीं रोक रही है। इंस्पेक्टर जोगेंद्र ग्रेवाल का कहना है कि पुलिस को सुरक्षा की दृष्टि से तैनात किया गया है। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

चेकिंग के चलते बनी जाम की स्थिति

दिल्ली पुलिस की तरफ से सिंघु बॉर्डर पर नाका लगाकर वाहनों की जांच कर ही आगे भेजे जाने के चलते नेशनल हाईवे-44 पर जाम की स्थिति बन गई है। वाहन रेंगते हुए दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर रहे है। नेशनल हाईवे पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक वाहन फंसे हुए है। दिल्ली पुलिस के साथ ही सोनीपत पुलिस भी वाहनों को निकालने में लगे है। कुंडली की बॉर्डर के बजाय वाहनों को अन्य संपर्क मार्गों से निकाला जा रहा है। जिसके चलते सफियाबाद व औचंदी बॉर्डर पर भी वाहनों की लाइन लगी है। पुलिस को वाहनों को निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।

सिंघु बॉर्डर पर बैरिकेडिंग और मिट्टी से भरे डंपर किए गए तैयार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को पहलवानों के धरने पर शामिल होने के लिए पंजाब व हरियाणा से लोग आ सकते हैं। इसके मद्देनजर सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद कर दी गई है। सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर बैरिकेडिंग की जा रही है, साथ ही मिट्टी के बड़े-बड़े डंपर भी एतिहात के तौर पर खड़े कर दिए गए हैं ताकि यदि अचानक से बॉर्डर को बंद करना पड़े तो उन डंपर को आगे लगाया जा सके और रास्ता बंद किया जा सके। अगर ट्रैक्टर आदि आते हैं तो उस वक्त उन्हें रोकना पुलिस के लिए चुनौती होगी और उसी के मद्देनजर ये सब तैयारियां की जा रही हैं।

खाप पंचायतों ने दी सरकार को चेतवानी

हरियाणा के सोनीपत में लववंशीय खत्री खाप व जटवाड़ा 360 खाप ने शनिवार को दिल्ली में धरने पर बैठे पहलवानों के प्रति समर्थन जताया। दोनों खाप ने चेताया कि यदि सरकार आरोपी भाजपा सांसद एवं भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। तो जिस तरह किसान आंदोलन के समय दिल्ली को जाम कर दिया था, उसी तरह खापें पहलवानों के समर्थन में फिर से दिल्ली जाम करने से पीछे नहीं हटेंगी।

पानी, दूध व राशन की आपूर्ति बाधित करने की धमकी

खाप सदस्यों ने दावा किया कि दिल्ली के अंदर पानी, दूध व राशन की आपूर्ति भी बाधित कर दी जाएगी। सोनीपत के रेलवे रोड स्थित एक निजी कार्यालय में लववंशीय खत्री खाप व जटवाड़ा 360 खाप की एक सामूहिक बैठक हुई, जिसमें धरने पर बैठे पहलवानों को सर्वसम्मति से अपना समर्थन दिया गया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने की बृजभूषण को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने घोषणा की कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन करेगा। संगठन ने सिंह को तत्काल गिरफ्तार करने की भी मांग की। उसने एक बयान में कहा कि सात मई को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश से एसकेएम के कई वरिष्ठ नेता सैकड़ों किसानों के साथ जंतर मंतर पर एक बार फिर प्रदर्शन स्थल का दौरा करेंगे और प्रदर्शनरत पहलवानों को अपना समर्थन देंगे।

धारा 144 लागू

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली को जोड़ने वाले सभी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिसकर्मियों के अलावा सीआरपीएफ और आरएएफ के जवान भी तैनात किए गए हैं। पुलिस सभी बॉर्डर पर सख्ती से निगरानी रख रही है। प्रतिबंधित जगहों पर पुलिस की तरफ से धारा-144 के लागू होने के बोर्ड भी लगाए गए हैं।

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पीएफआई से जुड़े मामले में एटीएस और यूपी एसटीएफ की छापेमारी

आज यूपी के दो जनपदों में पीएफआई से जुड़ी ताबड़तोड़ छापेमारियां हुईं। यूपी के कई शहरों में यूपी एटीएस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, आजमगढ़ समेत कई शहरों में एटीएस की टीमों ने एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया है। गाजियाबाद और मेरठ में यूपी एसटीएफ और एटीएस की टीमों ने कुछ संदिग्ध लोगों को हिसारत में लिया है।

यूपी एसटीएफ ने गाजियाबाद के मोदीनगर में भोजपुर के कलछीना में छापेमारी की है। तो वहीं लखनऊ के विकास नगर से भी एक युवक को उठाया है। मेरठ पहुंची एटीएस की टीम ने लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र से एक 32 साल के युवक को डिटेन किया है। यूपी एसटीएफ और एटीएस की अलग-अलग टीमों ने मेरठ और गाजियाबाद में पीएफआई से जुड़े होने के संदेह में ये छापेमारियां की और कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया।

एटीएस ने लखनऊ से 2 लोगों को उठाया

इस सर्च ऑपरेशन में एटीएस की एक टीम ने लखनऊ के विकास नगर से भी एक युवक को उठाया है। युवक को उठाने का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। बीकेटी के अचरामऊ गांव में भी एटीएस ने छापा मारा है। पीएफआई से जुड़े 2 लोगों को एटीएस ने हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

पीएफआई से जुड़े होने की आशंका में हुई छापेमारी

गाजियाबाद में यूपी एसटीएफ ने मोदीनगर के भोजपुर के कलछीना में आज छापेमारी की है। मुरादनगर के रावली कला और नूरपुर में भी एटीएस ने छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि देर रात्रि हुई इस छापेमारी में पीएफआई से जुड़े 4 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं मेरठ पहुंची एटीएस की टीम ने भी थाना लिसाड़ी गेट क्षेत्र से एक 32 साल के व्यक्ति को हिरासत में लिया है। डिटेन किए गए शख्स की पहचान अताउरर्हमान पुत्र हफीजुद्दीन के तौर पर हुई है।

जानकारी है कि अताउरर्हमान गली नंबर 4 शाहजहां कॉलोनी थाना लिसाड़ी गेट मेरठ का रहने वाला है। पीएफआई से जुड़े होने की आशंका के चलते एटीएस की टीम इसे अपने साथ लेकर गयी है। एटीएस ने उसके दोनों मोबाइल भी कब्जे में लिए हैं।

पीएफआई के ‘मॉड्यूल’ से जुड़े मामले में यूपी का शख्स गिरफ्तार

वहीं इससे पहले राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के बिहार में एक संदिग्ध ‘मॉडयूल’ की अपनी जांच के तहत उत्तर प्रदेश के एक शख्स को मंगलवार को गिरफ्तार किया था। एनआईए के प्रवक्ता ने कहा कि गिरफ्तार किया गया अनवर राशिद नाम का व्यक्ति मामले में 14वां आरोपी है। यह मामला शुरूआत में, पिछले साल 12 जुलाई को बिहार के फुलवारी शरीफ पुलिस थाने में दर्ज किया गया था और संघीय एजेंसी ने 10 दिन बाद इसे पुन:दर्ज किया था।

एक अधिकारी ने बताया कि 25 अप्रैल को राशिद के घर में ली गई तलाशी के दौरान जब्त कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरणों और पत्रों की विस्तृत जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘जांच में यह खुलासा हुआ कि राशिद प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया) का पूर्व सदस्य है और वह अभी बिहार और उत्तर प्रदेश में पीएफआई के कई सदस्यों से जुड़ा हुआ है।

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तिहाड़ गैंगवार में एक के पीछे एक दो मर्डर के बाद जागा जेल प्रशासन

दिल्ली की सबसे सुरक्षित जेल माने जाने वाली तिहाड़ जेल में लगातार 19 दिनों में दो गैंगवार सामने आई हैं। इनमें हाल ही में एक नामी गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया का मर्डर हुआ है और पिछले महीने अप्रैल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य प्रिंस तेवतिया की हत्या कर दी गई थी। तिहाड़ में लगातार दो मर्डर के बाद अब जेल प्रशासन नींद से जागा है। डीजी तिहाड़ ने जेल के नए सिक्योरिटी प्लान के साथ आदेश जारी किया है। नए आदेश के मुताबिक अब जेल में हाई सिक्योरिटी वार्ड के बाहर क्यूआरटी यानी क्विक रिस्पॉन्स टीम तैनात होगी।

तिहाड़ जेल के अंदर टिल्लू ताजपुरिया को बेखौफ होकर मारा

गौरतलब है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में खूंखार गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की हत्या के बाद से ही जेल की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। तिहाड़ जेल के अंदर से सामने आई सीसीटीवी फुटेज में हत्यारे टिल्लू ताजपुरिया को बेरहमी से चाकू मारते हुए साफ दिख रहे हैं। सितंबर 2021 में रोहिणी कोर्ट शूटआउट मामले में सुनील बालियान उर्फ ताजपुरिया मुख्य आरोपी था, जिसमें उसके दोस्त से गैंगस्टर बने जितेंद्र मान उर्फ गोगी की मौत हो गई थी।

तेवतिया की भी तिहार जेल हुई थी हत्या

वहीं इसके अलावा, इस साल अप्रैल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्य प्रिंस तेवतिया की भी तिहाड़ जेल के अंदर गैंगवार में हत्या कर दी गई थी। जेल नंबर 3 में बंद, तेवतिया को पांच से सात बार चाकू मारा गया था। इसके बाद उसे दिल्ली के दीन दयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया था।

एंटी-राइट्स इक्विपमेंट से लैस होगी क्यूआरटी टीम

तिहाड़ डीजी के निर्देशों के मुताबिक हाई सिक्योरिटी वार्ड के बाहर क्यूआरटी (QRT) की जो टीम तैनात होगी, उसमें तमिलनाडु स्पेशल पुलिस, सीआरपीएफ के जवान तैनात होंगे। इन जवानों के पास एंटी-राइट्स इक्विपमेंट होंगे। इसमें हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट, चिल्ली पावडर जैसी चीजें शामिल होंगी। डीजी के निर्देश के मुताबिक, ना सिर्फ हाई सिक्योरिटी वार्ड के बाहर बल्कि जेल के बाहर भी ये क्यूआरटी (QRT) टीम तैनात की जाएगी। इतना ही नहीं, तिहाड़ जेल के बाहर ITBP के जवानों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

read more : मैं अध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान वापस लेता हूं – शरद पवार

शरद पवार से इस्तीफा वापस लेने की उठी थी मांग

शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपना पुराना निर्णय वापस ले रहे हैं, वापस अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। पवार ने कहा कि लोगों ने विनती की कि मैं पद पर वापस आऊं। पवार ने कहा कि मैंने इस्तीफे की बात किताब विमोचन के दिन कहा था। उन्होंने कहा, “2 मई को लोक माझे सांगाती के प्रकाशन के दौरान मैंने एनसीपी के अध्यक्ष पद से निवृत होने का निर्णय जाहिर किया था। सार्वजनिक जीवन में 63 वर्ष होने के बाद सभी जवाबदारी से मुक्त होने का फैसला लेने के कारण लोगों में नाराजगी थी।”

मैं अध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान वापस लेता हूं – शरद पवार

सबके साहेब शरद पवार ने 2 मई को अचानक अध्यक्ष पद से इस्तीफे का एलान कर सबको चौंका दिया था। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता पवार से अपना इस्तीफा वापस लेने की लगातार मांग कर रहे थे। शरद पवार ने कल गुरुवार को आंदोलन और नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने अपना फैसला बदलने का इरादा जाहिर कर दिया था। शरद पवार ने कहा था, “मैं आप सभी की इच्छा को नजरअंदाज नहीं करूंगा और उसी के मुतबिक फैसला लूंगा। मैं अगले एक या दो दिन में फैसला लूंगा और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप लोगों को मेरे फैसले के बाद आंदोलन नहीं करना पड़ेगा। मुझे इस्तीफा का फैसला लेने से पहले सभी सहकारियों से बात करनी चाहिए थी, पर मुझे पता था कि आप मुझे ये फैसला लेने नहीं देंगे।”

समिति ने शरद पवार का इस्तीफा किया नामंजूर

इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की समिति ने आज शरद पवार का इस्तीफा नामंजूर किया। पार्टी का नया अध्यक्ष चुनने के लिए पवार ने 18 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, पीसी चाको, नरहरि जिरवाल, अजीत पवार, सुप्रिया सुले, जयंत पाटिल, छगन भुजबल, दिलीप वलसे-पाटिल, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, जितेंद्र आव्हाड, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, जयदेव गायकवाड़ आदि लोग शामिल थे।

read more : टिल्लू ताजपुरिया की तिहाड़ जेल में हुई हत्या, पुलिस बनी रही तमाशबीन

टिल्लू ताजपुरिया की तिहाड़ जेल में हुई हत्या, पुलिस बनी रही तमाशबीन

दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुनील उर्फ टिल्लू ताजपुरिया हत्याकांड अभी भी सुर्खियों में है। अब इस हत्याकांड से जुड़ा दूसरा सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है। इस वीडियो में घायल टिल्लू को पुलिसकर्मी सेंट्रल गैलरी में लेकर आ रहे हैं। तभी अचानक से वहां मौजूद पीछे से कैदी आते हैं और घायल टिल्लू पर एक-एक कर वार कर रहे हैं। लेकिन पुलिसकर्मी मूक दर्शक बने हुए हैं। ये वीडियो 47 सेकेंड का है। इससे पहले एक और सीसीटीवी फुटेज बृहस्पतिवार को सामने आया था। करीब 2:49 मिनट के वीडियो में चारों आरोपी योगेश उर्फ टुंडा, दीपक उर्फ तीतर, राजेश और रियाज खान टिल्लू को बेरहमी से हमला कर रहे थे।

तिहाड़ जेल से सामने आया एक और सीसीटीवी फुटेज

दिल्ली की तिहाड़ जेल में टिल्लू ताजपुरिया पर हुए हमले के बाद पुलिसकर्मी उसे बाहर लाते हुए दिख रहे हैं। तिहाड़ के सेंट्रल गैलरी के कैमरा नंबर 2 में साफ दिखाई दे रहा है कि जैसे ही पुलिस वाले टिल्लू को एक चादर में रखकर ला रहे हैं। तो तभी पीछे से कुछ कैदी आ जाते हैं और एक एक कर घायल टिल्लू पर हमला कर देते हैं। एक के बाद एक उसके ऊपर हमला कर रहे हैं। लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी मूक दर्शक बने वारदात को देखते हैं।

एक पुलिसकर्मी कैदियों को पीछे करते हुए दिख रहा है। एक कैदी तो टिल्लू के चेहरे पर ही लात मार देता है। घायल टिल्लू को बहुत बेरहमी से हत्यारे मार रहे हैं। उनके हाथों में सुआ है, जिससे उसके ऊपर लगातार हमला कर रहा है। ये वीडियो 2 मई 2023 का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे पुलिस कर्मी पीछे हट रहे हैं। ऐसे में इस हत्याकांड में पुलिस की मिलीभगत हो सकती है।

तीन आरोपी टिल्लू को सुए नुमा हथियार से मार रहे

वहीं दूसरी तरफ बीते बृहस्पतिवार को भी तिहाड़ जेल से एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इस वीडियो में चारों आरोपी योगेश उर्फ टुंडा, दीपक उर्फ तीतर, राजेश और रियाज खान टिल्लू को बेरहमी से मार रहे थे। ये वीडियो करीब 2:49 मिनट का था। वीडियो में तीन आरोपी टिल्लू को सुए नुमा हथियार से मार रहे थे। वहीं चौथा आरोपी बाकी कैदियों को रोक रहा है। वीडियो में कहीं भी सुरक्षाकर्मी दिखाई नहीं दे रहे थे। कुछ कैदियों ने इनको समझाकर रोकने का भी प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। आरोपी टिल्लू के अचेत होने के बाद भी उस पर हमला करते रहे।

टिल्लू ताजपुरिया पर सुए से 92 वार किए

जब आरोपियों को यह सुनिश्चित हो गया कि टिल्लू अब मर चुका है। तब ही उन्होंने उस पर हमला करना बंद किया। आरोपियों ने महज डेढ़ मिनट में टिल्लू पर सुए के 92 से अधिक वार किए थे। वीडियो में टिल्लू खुद को बचाते हुए दिख रहा था। ये सीसीटीवी फुटेज सुबह 6 बजे का बताया जा रहा है। फुटेज में दिख रहा है कि अचानक हाई सिक्योरिटी सेल की पहली मंजिल से बेडशीट के सहारे एक-एक कर चारों बदमाश योगेश, दीपक, राजेश और रियाज उतरे। उस समय टिल्लू अपनी सेल से बाहर निकल चुका था। उसने इनको आते हुए देखा तो वह भागकर अपनी सेल में घुस गया।

read more : मुरैना में कूड़ा फेंकने को लेकर हुए विवाद में छह लोगों की गई जान

मुरैना में कूड़ा फेंकने को लेकर हुए विवाद में छह लोगों की गई जान

मध्यप्रदेश के मुरैना में जमीनी विवाद (कूड़ा फेंकने) को लेकर छह लोगों की गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया है। गोलीबारी में छह लोगों की मौत हो गई है जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार जिले के सिंहोंनिया थाना अंतर्गत लेपा गांव में शुक्रवार सुबह धीर सिंह ने हथियारों सहित गजेंद्र सिंह के घर पर पुरानी रंजिश को लेकर हमला किया था।

दोनों परिवारों के बीच 2013 से घूरे पर कूड़ा डालने को लेकर विवाद चल रहा है। पुरानी रंजिश में धीर सिंह ने गजेंद्र सिंह के परिवार के छह लोगों को गोली मारी, जिनमें तीन महिला और तीन पुरुषों को गोली लगी। गोली लगने से तीन पुरुष और दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। फिलहाल दो गंभीर अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद गांव में तनाव के हालात हैं। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

इन लोगों की हुई मौत

लेपा गांव में जमीन विवाद के दौरान जिन लोगाें की मौत हुई है, उनमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष हैं। सभी मृतक रंजीत ताेमर पक्ष के हैं। मरने वालों के नाम लेस कुमारी पत्नी वीरेंद्र सिंह, बबली पत्नी नरेंद्र सिंह तोमर, मधु कुमारी पत्नी सुनील तोमर, गजेंद्र सिंह पुत्र बदलू सिंह, सत्यप्रकाश पुत्र गजेंद्र सिंह व संजू पुत्र गजेंद्र सिंह है। घायलाें में विनोद सिंह पुत्र सुरेश सिंह तोमर और वीरेंद्र पुत्र गजेंद्र सिंह शामिल हैं।

कूड़ा फेंकने को लेकर शुरू हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि 10 साल पहले 2013 में धीर सिंह तोमर और गजेंद्र सिंह तोमर के परिवार के बीच कूड़ा फेंकने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इस दौरान धीर सिंह के परिवार के दो लोगों की मौत हो गई थी। हत्या का आरोप गजेंद्र सिंह के परिवार पर लगा था। जिसके बाद कोर्ट में केस चला और फिर बाद में दोनों परिवारों ने सामाजिक तौर पर समझौता कर लिया था।

सुलह होने के बाद गजेंद्र सिंह का परिवार लेपा गांव में फिर से रहने के लिए पहुंचा था। पुराने विवाद को लेकर धीर सिंह के परिवार के लोगों ने गजेंद्र सिंह के परिवार पर पहले लाठी डंडों से हमला किया। जब विवाद और बढ़ा तो धीर सिंह के पक्ष के श्यामू और अजीत ने मिलकर गजेंद्र सिंह और उसके परिवार पर गोलियां चलाना शुरू कर दी। इस दौरान तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई और बाद में दो और लोगों ने दम तोड़ दिया।

लेपा गांव के नजदीक ही है डकैत पान सिंह तोमर का गांव

लेपा गांव के पास ही भिड़ोसा गांव है, जो डकैत पान सिंह तोमर का गांव है। दोनों गांवों को लेपा-भिड़ोसा के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि जमीन विवाद को लेकर ही पान सिंह तोमर डकैत बना था। गौर करने वाली बात तो यह है कि दिमनी से विधायक रविंद्र तोमर का गांव भी भिड़ोसा है। इसलिए यह गांव जिले में अपनी खास पहचान रखता है।

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मोबाइल भी बना वोट, प्रतिशत कम करने का बड़ा और मुख्य कारण

लखनऊ (सं)। निकाय चुनाव में कम वोट पड़ने का बड़ा और मुख्य कारण मोबाइल भी रहा। आज के समय में हर व्यक्ति के पास मोबाइल है चाहे वह महिला हो या पुरुष। 21वीं सदी में मोबाइल ने संचार के क्षेत्र में एक क्रांति ला दी है। हर व्यक्ति के शासन के तरीकों में परिवर्तन लाने के लिए फ़ोन को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है।

आज इस संचार के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, व्यवसाय इत्यादि से संबंधित सेवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। अब इसी का नकारात्मक रूप भी देखने को मिल रहा है। जैसे घर से निकलते वक़्त व्यक्ति के पास कुछ हो न हो मोबाइल जरूर होता है। लोग वोट डालने के दौरान भी मोबाइल अपने साथ ले गये, लेकिन मतदान केन्द्रों पर लोगों को मोबाइल ले जाने से रोका गया। मतदाताओं ने अपने मोबाइल सुरक्षा कर्मियों के पास रखकर वोट डालने की अपील की, पर उन लोगों ने मोबाइल की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।

उसके बाद मतदाताओं ने पोलिंग एजेन्ट के पास मोबाइल रखने की कोशिश की तो उसने भी मना कर दिया। जब मतदाताओं को मोबाइल रखने के लिए सही स्थान नहीं मिला तो वह बिना वोट डाले ही वापस हो गये। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से पहले से मतदान केन्द्र में मोबाइल ले जाने पर रोक लगा रखी है। मोबाइल वाला मामला शहर के अधिकतर मतदान केन्द्रों पर देखने को मिला। लोग मोबाइल के चक्कर में बिना वोट डाले ही वापस चले गये।

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