Monday, April 6, 2026
Home Blog Page 37

रिटर्निंग ऑफिसर ने मेयर की चुनावी प्रक्रिया में की छेड़छाड़ – सुप्रीम कोर्ट

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर चल रहे विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। वहीं सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बहुत ही सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ की। सीजेआई (CJI) ने रिटर्निंग ऑफिसर से कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। आप जो कुछ भी कहते हैं, यदि कोई झूठ है तो आपके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आप कैमरे में क्यों देख रहे थे और मतपत्रों में निशान क्यों लगा रहे थे। रिटर्निंग ऑफिसर मसीह ने कहा कि सभी मतपत्र विकृत हो गए थे। मैं सिर्फ उन पर निशान लगा रहा था। वहां इतने सारे कैमरे थे कि मैं बस उन्हें ही देख रहा था। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह स्पष्ट है कि आप मतपत्र पर एक्स का निशान लगा रहे हैं।

क्या है मेयर चुनाव का मामला

बता दें कि चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर का चुनाव 30 जनवरी को हुआ था। वोटों की गिनती में विपक्ष के 8 वोट इनवैलिड हो गए थे। ऐसे में बीजेपी ने जीत दर्ज की। इन चुनावों में बीजेपी सभी तीनों पदों पर जीत गई थी। महापौर पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा के मनोज सोनकर ने आप के कुलदीप कुमार को हराया था। सोनकर को 16, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कुमार को 12 वोट मिले थे। वहीं, आठ वोट को अवैध घोषित कर दिया गया था।

रिटर्निंग ऑफिसर ने मतपत्रों पर लगाए निशान

सीजेआई ने कहा कि आप मतपत्रों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन उन मतपत्रों पर टिक या एक्स क्यों लगा रहे थे। नियम 11 कहता है कि आप हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन कौन सा नियम कहता है कि आप उन मतपत्रों पर टिक या एक्स लगा सकते हैं। आप उन मतपत्रों पर निशान क्यों लगा रहे थे। आपने इसे चिह्नित किया है। सीजेआई ने कहा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि वह चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे थे। चुनावी लोकतंत्र में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

नियुक्त होगा नया रिटर्निंग ऑफिसर

सीजेआई ने कहा कि हम डिप्टी कमिश्नर से एक नया रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त करने के लिए कहेंगे जो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा न हो और प्रक्रिया को उसी चरण से फिर से शुरू करने दें जहां यह रुकी थी और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल गिनती आदि की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। हम यहां मतपत्र मंगवाएंगे। हम हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार से एक व्यक्ति को नियुक्त करने और जमा करने के लिए कहेंगे सभी रिकॉर्ड कल हमारे सामने होंगे। हम इसे कल सूचीबद्ध करेंगे और मतपत्र देखेंगे और तय करेंगे कि क्या करना है।

कल दोपहर 2 पेश कोर्ट में लाए जाएंगे मतपत्र

सीजेआई ने कहा अंतरिम आदेश के अनुपालन में मतपत्रों को जब्त कर लिया गया और उच्च न्यायालय ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मतपत्र जो हिरासत में रखे गए हैं, उन्हें कल दोपहर 2 बजे तक न्यायिक अधिकारी द्वारा इस अदालत के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। न्यायिक अधिकारियों के साथ सुरक्षित पारगमन और मतपत्रों के उचित संरक्षण और अभिरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी।

खरीद-फरोख्त का कारोबार परेशान करने वाला

सीजेआई ने कहा कि खरीद-फरोख्त का ये जो पूरा कारोबार चल रहा है, वो बहुत परेशान करने वाला है। बता दें कि वोटों की गिनती का पूरा वीडियो भी कल दोपहर में पेश किया जाएगा। सीजेआई ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह का कहना है कि उन्होंने अन्य पर हस्ताक्षर करने के अलावा 8 मतपत्रों को चिह्नित किया और कहा कि यह विकृत मतपत्रों को चिह्नित करने के लिए किया गया था। हम खरीद-फरोख्त से परेशान हैं जो कि हुई थी।

read more : चंडीगढ़ के मेयर मनोज सोनकर ने दिया इस्तीफा, आप के तीन पार्षद भाजपा में शामिल

चंडीगढ़ के मेयर मनोज सोनकर ने दिया इस्तीफा, आप के तीन पार्षद भाजपा में शामिल

चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद को लेकर राजनीतिक दलों में घमासान मचा हुआ है। अब इसी बीच भाजपा के मनोज सोनकर ने मेयर पद से इस्‍तीफा दे दिया है। भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा ने इस बात की पुष्टि की है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले मनोज सोनकर ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा आम आदमी पार्टी के तीन पार्षदों को अपने यहां पर शामिल करवा कर अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। ताकि फिर से मेयर चुनाव होने पर भाजपा सोनकर को उम्मीदवार नहीं बनाना चाहती है। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव अधिकारी अनिल मसीह को जमकर फटकार लगाई थी और चुनाव अधिकारी को कोर्ट में भी पेश होने के लिए कहा गया था।

30 जनवरी को हुए थे मेयर चुनाव

गौरतलब हो कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में पीठासीन अधिकारी की एक वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसमें वह कथित रूप से अवैध करार दिए पार्षदों के वोटों पर निशान लगाते दिखाई दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई थी और मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को रखी गई। जिसको लेकर चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा।

आप के तीन पार्षदों ने भाजपा ज्वाइन की

आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, वहीं आप के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए हैं। ये पहले से ही भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। भाजपा ज्वाइन करने वालों में पूनम, नेहा मुसावत और गुरुचरण सिंह काला शामिल हैं। अब भाजपा के पास 14 की जगह 17 पार्षद हो गए हैं और एक वोट भाजपा सांसद का पार्टी के खाते में होगा। आम आदमी पार्टी की दो महिला पार्षद और एक अन्य शुक्रवार रात से शहर से बाहर थे। हालांकि शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उनसे बात हुई थी। एक पार्षद ने शादी में जाने की बात कही थी तो एक पार्षद ने स्पष्ट तौर से कह दिया है कि वह पार्टी के अंदर खुश नहीं है। हालांकि शनिवार से ही इनके फोन स्विच ऑफ पाए गए थे।

भाजपा पार्षदों की बैठक

नगर निगम में इस समय 35 पार्षद है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले रविवार दोपहर को सभी भाजपा पार्षदों की आपातकालीन बैठक बुलाई गई। यह बैठक पंचकूला के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी मौजूद रहे। मेयर चुनाव विवाद को पूरी तरह से सुलझाने की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे को दी गई है। इस उठक बैठक के बीच कांग्रेस ने अपने साथ पार्षदों की घेराबंदी मजबूत कर दी है उन्हें लगता है कि कहीं उनके भी कोई पार्षद टूट कर भाजपा में शामिल न हो जाए।

कांग्रेस के पार्षद को मिला ऑफर

यह भी जानकारी है कि कांग्रेस के पार्षद जसबीर सिंह बंटी को भी भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया है‌। उन्‍हें कहा गया है कि अगर वह भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो उसे फिर से होने वाले चुनाव में मेयर पद का उम्मीदवार बना दिया जाएगा। अगर आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो उनकी संख्या 18 हो जाएगी। इन 18 में एक सांसद किरण खेर का वोट है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने-अपने पार्षदों को संपर्क करने लग गई है।

read more : क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई इस पर रोक ?

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई इस पर रोक ?

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्‍ड योजना को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्‍ड स्कीम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, “काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सूचना के अधिकार का उल्लंघन उचित नहीं है। चुनावी बॉन्ड योजना सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है। राजनीतिक दलों के द्वारा फंडिंग की जानकारी उजागर न करना उद्देश्य के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्‍ड तुरंत रोकने के आदेश दिये हैं। अदालत ने निर्देश जारी कर कहा, “स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) चुनावी बॉन्ड के माध्यम से अब तक किए गए योगदान के सभी विवरण 31 मार्च तक चुनाव आयोग को दें।” साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 13 अप्रैल तक अपनी वेबसाइट पर जानकारी साझा करे।

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड ?

भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी। इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानूनन लागू कर दिया था। आसान भाषा में अगर हम समझें तो इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को चंदा देने का एक वित्तीय जरिया है। यह एक तरह का वचन पत्र है जिसे भारत का कोई भी नागरिक या कंपनी एसबीआई की चुनिंदा शाखाओं से खरीद सकता है और अपनी पसंद के किसी भी राजनीतिक दल को गुमनाम तरीके से दान कर सकता है।

कौन ख़रीद सकता है और कैसे दिया जाता है ?

इलेक्टोरल बॉन्ड को ऐसा कोई भी दाता खरीद सकता है, जिसके पास एक ऐसा बैंक खाता है, जिसकी केवाईसी की जानकारियां उपलब्ध हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड में भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है। इस योजना के तहत एसबीआई की निर्दिष्ट शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये में से किसी भी मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं।

चुनावी बॉन्ड्स की अवधि केवल 15 दिनों की होती है, जिसके दौरान इसका इस्तेमाल सिर्फ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान देने के लिए किया जा सकता है। केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लोकसभा या विधानसभा के लिए पिछले आम चुनाव में डाले गए वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो।

इस योजना के तहत चुनावी बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। इन्हें लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के दौरान भी जारी किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में कहा तक पहुंचा मामला ?

इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने किया। इसमें सीजेआई के साथ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं। संविधान पीठ ने 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक पक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर से दी गई दलीलों को सुना था। तीन दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मत से सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवी चंद्रचूड़ ने कहा कि इस मामले में सुनवाई कर रहे सभी जजों ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया है। केंद्र सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का कहना है कि दो अलग-अलग फैसले हैं। एक उनके द्वारा लिखा गया और दूसरा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा और दोनों फैसले सर्वसम्मत हैं। फैसला सुनाते हुए सीजेआई ने कहा कि चुनावी बॉन्ड सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। सरकार से पूछना जनता का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, चुनावी बॉन्ड योजना अनुच्छेद 19(1) (ए) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करते हुए कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द करना होगा।

एसबीआई बैंक पूरी जानकारी दे – सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया। हालांकि पीठ में दो अलग विचार रहे, लेकिन पीठ ने सर्वसम्मति से चुनावी बॉन्ड पर रोक लगाने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एसबीआई बैंक को 2019 से अब तक चुनावी बॉन्ड की पूरी जानकारी देने का आदेश दिया है। एसबीआई को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को प्राप्त चंदे का विवरण तीन सप्ताह के अंदर चुनाव आयोग को देना होगा। शीर्ष अदालत ने एसबीआई और चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि वह​ चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी पब्लिश करे।

इलेक्टोरल बॉन्ड पर क्यों हो रहा था विवाद ?

इलेक्टोरल बॉन्ड पर कांग्रेस नेता जया ठाकुर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) समेत चार लोगों ने याचिकाएं दाखिल की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए गुपचुप फंडिंग में पारदर्शिता को प्रभावित करती है। यह सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन करती है। उनका कहना था कि इसमें शेल कंपनियों की तरफ से भी दान देने की अनुमति दी गई है। इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुनवाई पिछले साल 31 अक्टूबर को शुरू हुई थी। सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।

READ MORE : सीएम नीतीश कुमार ने साबित किया बहुमत, तेजस्वी यादव के साथ हुआ हुआ खेला

सीएम नीतीश कुमार ने साबित किया बहुमत, तेजस्वी यादव के साथ हुआ हुआ खेला

बिहार की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आग्रह के बाद सदन में वोटिंग कराई गई। विधानसभा में नीतीश कुमार ने विश्वास मत हासिल कर लिया है। डिप्टी स्पीकर को जोड़कर 130 वोट विश्वास मत के पक्ष में पड़े हैं। वहीं विश्वास मत पर वोटिंग से विपक्ष ने वॉकआउट कर लिया। सत्ता पक्ष के समर्थन में 130 वोट पर पड़े। राजद समेत महागठबंधन ने वॉकआउट का रास्ता अपनाया। इस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फ्लोर टेस्ट में पास हो गए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि खरीदने की कोशिश हुई, लेकिन या कोशिश सफल नहीं हो पाई। सरकार के पास पहले 128 विधायक थे।

एनडीए और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों के बीच शह-मात का खेल चलता रहा और दोनों ही गठबंधनों की तरफ से अपने-अपने विधायकों को साधने का प्रयास चलता रहा। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में इस बात की आशंका जतायी जा रही थी कि जेडीयू और बीजेपी के कुछ विधायक विद्रोह कर सकते हैं।

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर बोला बड़ा हमला

सियासी उठापटक के बीच तेजस्वी ने नीतीश पर जमकर हमला बोला। तेजस्वी ने कहा एक ही टर्न में तीन बार यू टर्न लेना, ऐसा तो कहीं देखा ही नहीं। नीतीश कुमार ने तो नौ बार सीएम की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। नीतीश कुमार की भी राजा दशरथ की तरह कोई ना कोई मजबूरियां रही होंगी। तेजस्वी ने कहा कि नीतीश आदरणीय हैं और रहेंगे। बिहार के युवाओं को हमने नौकरी बांटी, जो भी असंभव था उसे संभव किया। हमने 2 लाख लोगों को रोजगार दिया। सब जानना चाहते हैं कि नीताश ने पाला क्यों बदला। दशरथ ने नहीं कैकयी ने राम को वनवास भेजा था, नीतीश कुमार समझाएं कि कैकयी कौन है। नीतीश जी एक बार बता देते कि अलग होना है।

तेजस्वी यादव ने जदयू खेमे में गए तीन विधायकों को भी किया संबोधित

तेजस्वी यादव ने जदयू खेमे में गए तीन विधायकों को भी संबोधित करते हुए कहा कि प्रह्लाद जी आप इतने साल राजद के साथ रहे मैं आपका धन्यवाद देता हूं। चेतन आनंद मेरे छोटे भाई समान हैं। जब कोई दल इन्हें टिकट नहीं दे रहा तब राजद ने इन्हें टिकट दिया और विधायक चुने गए। हमने इन्हें इनके पिता में गुण पर नहीं बल्कि इनके गुण के आधार पर इन्हे अपने साथ लाये थे।

नीलम जी आप महिला हैं हम आपका सम्मान करते हैं। जो भी बातें हुई हैं, अगर नहीं पूरा होता है तो हमें याद कीजिएगा। तेजस्वी यादव ने कहा कि ओल्ड पेंशन नीति लागू करवाइए। सम्राट चौधरी से उन्होंने कहा कि आप इसे लागू करवाइए हम क्रेडिट आपको देंगे। यह कहते हुए तेजस्वी याद सदन से निकल गए।

read more : आरजेडी विधायक चेतन आनंद के गायब होने की खबर, भाई ने थाने में की शिकायत

आरजेडी विधायक चेतन आनंद के गायब होने की खबर, भाई ने थाने में की शिकायत

इस वक़्त की बड़ी खबर बिहार के पटना से है जहा पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे और आरजेडी विधायक चेतन आनंद के गायब होने की खबर सामने आई है। चेतन आनंद के भाई अंशुमान आनंद ने थाने में उन्हें खोजने के लिए लिखित अर्जी लगाई है। आपको बता दे कि चेतन आनंद को 10 फरवरी को पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के आवास में देखा गया था। वह एक आरजेडी विधायक के गिटार बजाते हुए वीडियो में भी दिखे थे।
भाई अंशुमान आनंद ने थाने में की लिखित शिकायत
भाई अंशुमान आनंद ने थाने में की लिखित शिकायत

चेतन आनंद के भाई की अर्जी के आधार पर पटना पुलिस पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर जांच पड़ताल के लिए पहुंची थी। हालांकि आरजेडी नेताओं से बातचीत के बाद पुलिस वापस लौट गई। मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस जब पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के आवास पर पहुंची तो बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता जुट गए। पुलिस के बाहर आने और लौटने के दौरान आरजेडी कार्यकर्ताओं ने पुलिस और नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बिहार की सियासत में मची हुई है उथलपुथल

बिहार की सियासत में इसलिए उथलपुथल मची हुई है क्यूंकि 12 फरवरी को मौजूदा सरकार का फ्लोर टेस्ट होना है। 11 फरवरी को जेडीयू ने एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें जेडीयू विधायक शामिल हुए थे। लेकिन इस मीटिंग में जेडीयू के भी 4 विधायक नहीं पहुंचे और उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है। इस मीटिंग में जेडीयू के 4 विधायक बीमा भारती, सुदर्शन, डॉ संजीव और दिलीप राय नहीं पहुंचे। ये सभी विधायक 10 फरवरी को श्रवण कुमार के आवास पर हुए भोज में भी नहीं पहुंचे थे। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इन चारों विधायकों के मोबाइल भी स्विच ऑफ जा रहे हैं और बता दें कि जेडीयू की इस मीटिंग में सीएम नीतीश कुमार खुद भी मौजूद थे।

आरजेडी विधायकों को रोका गया

शनिवार को ही खबर सामने आई थी कि बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव ने सभी आरजेडी विधायकों को पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर रोका हुआ है। विधायकों के बैग तक घर से मंगवाए गए हैं, जिसमें उनके कपड़े हैं। एक विधायक का स्टाफ तो विधायक का गिटार भी लेकर आया था।

चेतन आनंद के क्रिकेट खेलने का वीडियो हुआ वायरल

आवेदन मिलने के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के आवास पर दलबल के साथ पहुंची। फिर अंदर से निकल कर चुपचाप चली गई। अचानक वहां आने के क्या कारण थे ? क्या इनपुट मिला था ? इन सारे सवालों का एसपी ने कोई जवाब नहीं दिया। फिर कांग्रेस के विधायक वहां से निकलकर होटल में चले गये। पुलिस के वहां से निकलते ही आरजेडी के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर आरजेडी विधायक चेतन आनंद के क्रिकेट खेलने का वीडियो वायरल किया। अब सबकी नजर सोमवार के फ्लोर टेस्ट पर है।

read more : धर्मांतरण के खेल का पुलिस ने किया खुलासा, 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार

धर्मांतरण के खेल का पुलिस ने किया खुलासा, 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार

जनपद बहराइच के फखरपुर थाना क्षेत्र में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। इसके साथ ही पुलिस ने अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के आरोप में दो महिलाओं सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इन सभी लोगों पर धर्मांतरण के मकसद से हिंदुओं के आराध्य देवताओं के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप है। फिलहाल पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

पुलिस ने दर्ज की शिकायत

अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) रामानन्द प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि आरोपियों खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी धर्मांतरण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आपको बता दे कि यह प्राथमिकी एक दक्षिणपंथी हिंदू समूह के स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने ग्रामीणों को ईसाई धर्म अपनाने की धमकी दी है।

दो महिलाओं को भी किया गिरफ्तार

एएसपी ने बताया कि हुजूरपुर थाना क्षेत्र के पंडित पुरवा निवासी मंशाराम व रामबचन तथा रामबचन की पत्नी नीलम और फखरपुर थाना क्षेत्र के घरूआ नौबस्ता निवासी रेशमा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295- क व धारा 298 तथा उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्मांतरण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर सभी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश कर विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

चोरी छिपे करते थे धर्मांतरण का काम

फखरपुर थाना क्षेत्र के घेरूआ नौबस्ता गांव व आसपास के गांवों के कुछ मजदूर पंजाब में मजदूरी करने गये थे। वहीं (पंजाब) पर वह ईसाई धर्म के निकट आ गये और यहां वापस आकर उन लोगों ने गांवों के छोटे छोटे मजरों में चोरी छिपे धर्मांतरण की गतिविधियां शुरू कर दीं। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) रामानन्द प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि ये सभी ग्रामीणों को लालच देकर और डरा धमका कर इस तरह से बरगलाते थे कि उनसे प्रभावित ग्रामीण किसी अन्य व्यक्ति को कुछ बताते नहीं थे।

उन्होंने बताया कि जब इस बात की जानकारी विश्व हिंदू परिषद के एक स्थानीय कार्यकर्ता को हुई तो उन्होंने शुक्रवार को फखरपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी धर्मांतरण के मकसद से हिंदुओं के आराध्य देवताओं के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते थे।

read more : हल्द्वानी हिंसा पर बड़ा खुलासा … सीएम धामी का सख्त एक्शन , जानिए अब कैसा है माहौल

हल्द्वानी हिंसा पर बड़ा खुलासा … सीएम धामी का सख्त एक्शन , जानिए अब कैसा है माहौल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अवैध मदरसा और धार्मिक स्थल को हटाए जाने को लेकर हिंसा हुई। हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में इस बवाल के बाद सुरक्षा को देखते हुए शहर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। साथ ही कर्फ्यू भी लगा दिया गया। अब इस मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। देवभूमि को पहले से ही आगजनि करने की तैयारी कर ली गयी थी। इसकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को दी गयी थी। जिसमें कहा गया था कि मस्जिद और मदरसे हटाने की कार्रवाई को लेकर अब्दुल मालिक के साथ मुस्लिम संगठन और कट्टरपंथी लोग विरोध कर सकते हैं।

दंगाइयों को देखते हीं गोली मारने का आदेश

हल्द्वानी में हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दंगाइयों को देखते हीं गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है और दंगाइयों पर कार्रवाई का भरोसा जताया है। हिंसा पर सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए है। बता दें , जिलाधिकारी वंदना सिंह ने बनभूलपुरा क्षेत्र में शान्ति बनाए रखने को मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है। पुरे क्षेत्र को पांच जोन में बाटा गया है।

आपको बता दें , हिंसा मामले में अब तक 19 नामजद आरोपियों सहित पांच हज़ार लोगों लोगों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस दंगाइयों की पहचान में लगी हुई है।

हल्द्वानी में कैसे फैली हिंसा

हल्द्वानी में गुरुवार को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम जब अवैध मदरसा और धार्मिक स्थल को तोड़ने पहुंची थी तभी उन्हें भारी भीड़ का सामना करना पड़ा। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिसकर्मी और नगर निगम कर्मचारियों पर पथरवा किया और आगजनी शुरू कर दी थी। इस हिंसा में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए है।

डीएम वंदना सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया, ‘भीड़ ने थाने को घेर लिया और थाने के अंदर मौजूद लोगों को बाहर नहीं आने दिया गया। पहले पथराव किया गया और फिर पेट्रोल बम से हमला किया गया। थाने के बाहर वाहनों में आग लगा दी गई और धुएं के कारण दम घुटने लगा। उन्होंने कहा कि ,साजिश के तहत पुलिस टीम पर हमला किया गया और हमले की लंबी प्लानिंग की गई थी। जिसके तहत पत्थर इकट्ठा किए गए , पेट्रोल बम बनाए गए और फिर हमला किया गया।

Read More : अपने गुरु आशुतोष महाराज को वापस लाने के लिए मां आशुतोषाम्‍वरी ने ली समाधि

 

अपने गुरु आशुतोष महाराज को वापस लाने के लिए मां आशुतोषाम्‍वरी ने ली समाधि

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मौजूद आनंद आश्रम इन दिनों सबके लिए रहस्य का विषय बना हुआ है। इस आश्रम के शिष्यों की मानें तो बीती 28 जनवरी को इनकी गुरु मां आशुतोषाम्‍वरी समाधि में गईं। सुबह 4.33 पर समाधि लिया और आपको बता दे इस समाधि को निर्बीज समाधि कहते हैं। इसका उद्देश्य विश्वशांति, विश्वकल्याण और गुरु आशुतोष महाराज को समाधि से वापस लाना बताया जा रहा है। बाबा आशुतोष महाराज का शरीर पंजाब के नूरमहल में फ्रिजर में रखा गया है और ऐसा दावा है कि 28 जनवरी 2014 को गुरु आशुतोष महाराज जी समाधि में गए हैं।

फ्रीजर में रखा हुआ शव

ऐसा बताया गया है कि साध्‍वी आशुतोषाम्‍वरी ने अपने गुरु आशुतोष महाराज को उनके शरीर से वापस लाने के लिए समाधि ले लिया है। 10 साल पहले 2014 में आशुतोष महाराज ने जालंधर स्थित नूरमहल आश्रम में समाधि ले ली थी। उनका शव आज तक फ्रीजर में रखा हुआ है। उनके अनुयायियों को विश्‍वास है कि आशुतोष महाराज एक दिन अपने शरीर में जरूर वापस लौटेंगे।

मां आशुतोषाम्‍वरी के ईसीजी में दिखी हलचल

समाधि में गईं मां आशुतोषाम्‍वरी के लिए डॉक्टरों की टीम बुलाई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हार्टबीट और प्लस नहीं है पर ईसीजी में हलचल दिख रही है। इतने दिनों के बाद भी आज तक शरीर सुरक्षित है। हालांकि शिष्यों ने अपनी गुरुमां का शरीर काफी दिनों से सुरक्षित रखा हुआ है। चिकित्सकों की टीम ने जब इसे देखा है तो ईसीजी रिपोर्ट में पल्स पाया। अब देखना ये होगा कि शरीर में पूर्ण रूप से जान कब तक वापस आती है अगर आती है तो ये भी आज के युग के हिसाब से बहुत बड़ी बात होगी।

हाईकोर्ट में याचिका भी दायर

जानकारी के मुताबिक उनके शिष्‍यों ने साध्‍वी आशुतोषाम्‍वरी के शरीर को सुरक्षित रखने के लिए हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है, इधर लखनऊ स्थित आनंद आश्रम में साध्‍वी के दर्शन के लिए भीड़ लगनी शुरू हो गई है। उनको शरीर में वापस लाने के लिए आश्रम में यज्ञ और हवन भी करवाया जा रहा है। जबकि उधर सोशल मीडिया पर जैसे ही साध्‍वी की समाधि की बात सामने आई, तो लोग इसे पाखंड और अंधविश्‍वास का नाम दे रहे हैं।

read more : ज्ञानवापी(Gyanvapi) परिसर में अभी भी दो तहखाने है बंद , सर्वे की मांग पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति

मदरसे पर बुलडोजर एक्शन, थाने पर हमला, जाने कैसे सुलग उठा देवभूमि हल्द्वानी ?

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने को लेकर गुरुवार को दंगाइयों ने जो उत्पात मचाया उसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए जबकि 2 लोगों की मौत हो गई। हालात इस कदर बिगड़ गए कि प्रशासन को वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा। प्रशासन और सरकार दावा कर रहे हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही मदरसे को हटाने का काम किया गया था। आपको बता दे कि उत्तराखंड में नैनीताल जिले के हल्द्वानी में गुरुवार को उपद्रवियों ने जमकर उत्पात मचाया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए। इस हिंसा में अभी तक 2 लोगों की मौत हो गई है और 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

दरअसल पुलिस प्रशासन की टीम हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में ‘अवैध’ रूप से निर्मित मदरसा एवं मस्जिद को हटाने गई थी। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में महिलाओं सहित गुस्साए स्थानीय निवासी कार्रवाई का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए। उन्हें बैरिकेड तोड़ते और विध्वंस की कार्रवाई में लगे पुलिसकर्मियों के साथ बहस करते देखा गया।

दर्जनों गाड़ियों को फूंका

जिस समय जेसीबी का एक्शन चल रहा था तो उसी दौरान भीड़ हिंसक हो गई और नारेबाजी करने के बाद पथराव करने लगी, देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए। बुलडोजर चलाने पहुंचे प्रशासन पर उपद्रवियों ने जमकर पथराव किया। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को शांत करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया तो बवाल और बढ़ गया। इसके बाद रामनगर से अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई और बनभूलपुरा थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने फिर मोर्चा संभाल लिया।

बवाल करने वालों ने थाने में आगजनी की और दर्जनों गाड़ियों को फूंक दिया, बवाल के बाद अब पूरे इलाके में कर्फ्यू लगाया गया है और अब उपद्रवियों पर एक्शन लिया जा रहा है। कांग्रेस ने कहा कि दोनों पक्षों को धैर्य से काम लेना चाहिए था।

हाईकोर्ट के आदेश पर मदरसे पर लिया एक्शन

प्रशासन और सरकार दावा कर रहे हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही मदरसे को हटाने का काम किया गया। आपको बता दे कि ये सारा बवाल एक मदरसे और नमाज स्थल के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद हुआ। प्रशासन के मुताबिक, मदरसा अवैध था 30 जनवरी को नगर निगम ने ढहाने का नोटिस दिया था। तीन एकड जमीन का कब्जा निगम ने पहले ही ले लिया था। मदरसा और नमाज स्थल भी सील कर दिया गया था। मदरसा चलाने वाली संस्था हाईकोर्ट गई थी लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आज एक बजे अवैध मदरसा ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई।

दोनों पक्ष धैर्य बरतें – पूर्व सीएम हरीश रावत

सीएम से लेकर पुलिस के अफसर कह रहे हैं कि सारा एक्शन कोर्ट के आदेश पर किया गया था। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद मीणा ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई है। उधर कांग्रेस का कहना है कि शांति पूर्ण हल्द्वानी की ये घटना शर्मनाक है। दोनों पक्ष धैर्य बरतें हरीश रावत पूर्व सीएम उत्तराखंड हालात बेकाबू होने की वजह जो भी हो लेकिन ये तय है कि इस शांत पहाडी सूबे में इस तरह की हिंसा चिंता पैदा करने वाली है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी की हाईलेवल बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजधानी देहरादून में हाईवेल मीटिंग बुलाई और हालात की समीक्षा की। इस बैठक में तय किया गया कि दंगाइयों को देखते ही गोली मार दिया जाएगा। उन्होंने अराजक तत्वों से सख्ती से निपटने के लिये अधिकारियों को निर्देश दिए। देहरादून में अपने आधिकारिक आवास पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार तथा अन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों से शान्ति बनाये रखने की अपील की।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस घटना के दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही कर क्षेत्र में शान्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

दंगाइयों से की जाएगी नुकसान की भरपाई

नैनीताल की जिलाधिकारी ने बताया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हमारे पास वीडियो रिकॉर्डिंग से लेकर दंगाइयों के अनेक इनपुट हैं, उन सबको एकत्र किया जा रहा है। नुकसान की भरपाई उन्हीं दंगाइयों के द्वारा की जाएगी, जानकारी जुटाने के लिए दंगाइयों के पोस्टर भी जारी किए जाएंगे। पुलिस और प्रशासन ने धैर्य का परिचय दिया है। अवैध अतिक्रमण पर हमारा अभियान रुकने वाला नहीं है।

स्कूल बंद, इंटरनेट सस्पेंड

नैनीताल की जिला मजिस्ट्रेट वंदना ने कहा कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए हल्द्वानी में कर्फ्यू लगाया गया है। जबकि शहर में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं, साथ ही क्षेत्र में स्कूलों को बंद रखने का आदेश भी जारी किया गया है। कोई भी शख्स अत्यावश्यक कार्यों (मेडिकल इत्यादि) को छोड़कर घर से बाहर नहीं निकलेगा।

read more : “I.N.D.I.A गठबंधन का अंतिम संस्कार …..” -आचार्य प्रमोद कृष्णम

“I.N.D.I.A गठबंधन का अंतिम संस्कार …..” -आचार्य प्रमोद कृष्णम

हमेशा अपनी बेबाकी को लेकर सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आज एक और बड़ा बयान देते हुए अटकलों के बाजार को गर्म कर दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी कहे जाने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णम का कहना है कि नीतीश कुमार ने I.N.D.I.A गठबंधन का अंतिम संस्कार कर दिया है और राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी अब उत्तर प्रदेश में इसका श्रद्धा करेंगे।

बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम की ओर से दिए गए बयान ने इंडिया गठबंधन में पूरी तरह से हलचल पैदा कर दी है। बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मिलने के लिए पहुंचे कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा था कि मैं कल्कि धाम के शिलान्यास के लिए केंद्रीय मंत्री को निमंत्रण देने के लिए पहुंचा था।
किसी बीजेपी नेता की हैसियत से नहीं। बल्कि एक राम भक्त, कृष्ण भक्त, देवी भक्त और कल्कि भक्त के नाते। उन्होंने कहा है कि  स्मृति ईरानी और रक्षा मंत्री को आमंत्रित करना अपराध है तो मैं इसके लिए सजा भुगतने को तैयार हूं।

I.N.D.I.A गठबंधन का अंतिम संस्कार

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि देश में इंडिया गठबंधन नाम की अब कोई चीज नहीं बची है। बिहार में नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन का अंतिम संस्कार कर दिया है और अब उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया जयंत चौधरी इंडिया गठबंधन का श्रद्धा करेंगे। आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस बयान के बाद अब अटकलों का बाजार गर्म हो गया है कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। क्योंकि अभी 2 दिन पहले ही आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

Read More : ज्ञानवापी( Gyanvapi ) परिसर में अभी भी दो तहखाने है बंद , सर्वे की मांग पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति

ज्ञानवापी(Gyanvapi) परिसर में अभी भी दो तहखाने है बंद , सर्वे की मांग पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति

ज्ञानवापी परिसर में स्तिथ व्यास जी के तहखाने में पूजा चल रही है। जिसे रुकवाने के लिए मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट पहुंचा हुआ है। जिला जज के आदेश के खिलाफ दायर की गई याचिका पर आज सुनवाई होनी है। इसके साथ ही मंगलवार को ज्ञानवापी (Gyanvapi) परिसर में बंद तहखाने एस-1 और एन-1 के ASI सर्वे कराने की मांग हुई। इस पर जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान दोनों पक्षों को कोर्ट ने सुना और मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 15 फरवरी को तय किया।

ज्ञानवापी (Gyanvapi) में बंद तहखानों के सर्वे की मांग

याचिका दाखिल करने वाली राखी सिंह के अधिवक्‍ता अनुपम द्विवेदी ने कहा कि ASI सर्वे में ज्ञानवापी के आठ में से दो तहखाने बंद मिले हैं। सर्वे रिपोर्ट में बंद तहखानों को एन-1 और एस-1 नाम दिया गया है। सर्वे में पाया गया कि , बंद तहखानों के नीचे ही आठ मंडप वाली प्राचीन संरचना है। इसमें प्रवेश के लिए मुख्‍य द्वार पश्चिम की ओर से था । जिसे ईंट-पत्‍थर की दिवार से बंद कर दिया गया है। यह द्वार मंदिर के गर्भगृह की ओर जा रहा था।

साथ ही जो तहखाने नज़र आ रहे हैं । उनके अलावा अन्‍य तहखाने भी वहां हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि , ज्ञानवापी (Gyanvapi) के दक्षिण तहखाने के पास कुआं भी है, जिसका भी सर्वे नहीं हुआ है। अधिवक्‍ता ने सर्वे में सामने आए तथ्‍यों को देखते हुए । ज्ञानवापी का धार्मिक स्‍वरूप तय करने के लिए बंद तहखानों और बाकी हिस्‍सों के सर्वे को जरूरी बताया।

मुस्लिम पक्ष ने जताई आपत्ति

मुस्लिम पक्ष की ओर से बंद तहखानों के सर्वे पर आपत्ति जताई गई है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के अधिवक्‍ता एखलाक अहमद व रईस अहमद ने कहा कि , तहखानों का सर्वे कराने से मस्जिद को क्षति पहुंचेगी। उन्होंने आपत्ति दाखिल करने के लिए समय दिए जाने का भी अनुरोध किया। वहीं , मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर राखी सिंह के अधिवक्‍ता कहना था कि , अदालत अगर चाहे तो बंद तहखानों का सर्वे करवाने के संबंध में ASI से रिपोर्ट मांग सकती है।

हिंदू पक्ष के अन्‍य अधिवक्‍ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने ज्ञानवापी (Gyanvapi) से संबंधित मामलों के लिए अपील की है। इन्होने इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को देखते हुए तहखाना सर्वे मामले की सुनवाई कुछ दिन बाद करने का अनुरोध किया। इस पर प्रभारी जिला जज ने अगली सुनवाई की तारीख 15 फरवरी दी है।

Read More : मेयर चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पर भड़के सुप्रीम कोर्ट ने कहा – यह लोकतंत्र की हत्या है

मेयर चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पर भड़के सुप्रीम कोर्ट ने कहा – यह लोकतंत्र की हत्या है

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हुआ बवाल अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। सोमवार को मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव कराने वाले रिटर्निंग ऑफिसर की आलोचना की और कहा कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने मतपत्रों को विकृत किया है। जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया का वीडियो देखने के बाद ये बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर को सख्त लहजे में लताड़ लगाई है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल चंडीगढ़ में हुए मेयर के चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी। जिसको लेकर आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने बेईमानी से चुनाव जीता है। इस मामले को लेकर खूब हंगामा हुआ और दोनों पार्टियों की तरफ से बयानबाजी भी हुई। आम आदमी पार्टी ने नगर निगम कार्यालय के बाहर अनशन भी शुरू कर दिया था। चंडीगढ़ मेयर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप पर आप संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधा और उस पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इस मामले में आप और बीजेपी आमने-सामने है।

यह तो लोकतंत्र की हत्या है – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा है कि ये साफ है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने मतपत्रों को विकृत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर को लेकर कहा- “क्या वह इसी तरह से चुनाव आयोजित करते हैं? यह लोकतंत्र का मजाक है। यह लोकतंत्र की हत्या है। हम हैरान हैं। इस आदमी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। क्या यह रिटर्निंग ऑफिसर का व्यवहार है?”

आगामी बैठक को टालने का आदेश 

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से मतपत्र, वीडियोग्राफी और अन्य सामग्री सहित चुनाव प्रक्रिया के पूरे रिकॉर्ड को संरक्षित करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने ये भी निर्देश दिया कि चंडीगढ़ निगम की आगामी बैठक को सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए टाल दिया जाए।

read more : लाक्षाग्रह और मजार विवाद : पांडवों के लाक्षागृह पर हिंदू पक्ष को मिला मालिकाना हक

लाक्षाग्रह और मजार विवाद : पांडवों के लाक्षागृह पर हिंदू पक्ष को मिला मालिकाना हक

यूपी के बागपत से एक बड़ी खबर सामने आई है। लाक्षाग्रह और मजार विवाद पर एडीजे कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। इस फैसले में लगभग 100 बीघा जमीन और मजार पर हिंदू पक्ष को मालिकाना हक दिया गया है। इस मामले में 10 से ज्यादा हिंदू पक्ष के गवाहों ने गवाही दी थी। सिविल जज शिवम द्विवेदी ने मुस्लिम पक्ष का वाद खारिज कर दिया। बता दें कि पिछले 50 साल से हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के बीच मुकदमा चल रहा था।

बागपत के बरनावा में है लाक्षागृह

यूपी के बागपत के बरनावा में लाक्षागृह बना हुआ था। इस पर 50 साल से ज्यादा समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चल रहा था। कोर्ट ने इस मामले में हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया है। मिली जानकारी के मुताबिक, मेरठ की एक अदालत में 1970 में केस दायर हुआ था, जिसकी सुनवाई फिलहाल बागपत जिला एवं सत्र न्यायालय में हो रही थी।

लाक्षागृह पर हिंदू पक्ष को मिला मालिकाना हक

मुस्लिम पक्ष ने जब कोर्ट में अपील दायर की थी उस वक्त उन्होंने प्रतिवादी कृष्णदत्त महाराज को बाहरी व्यक्ति बताया था। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा था कि कृष्णदत्त महाराज मुस्लिम कब्रिस्तान को खत्म करके हिंदुओं का तीर्थ बनाना चाहते हैं। बता दें कि हिंदू पक्ष की ओर से साक्ष्य पेश करने वाले और मुस्लिम पक्ष से वाद दायर करने वाले मुकीम खान और कृष्णदत्त महाराज दोनों का ही निधन हो चुका है। इनकी जगह पर दूसरे लोग ही कोर्ट में पैरवी कर रहे थे, मुस्लिम पक्ष ने यह भी दावा किया था कि उनके शेख बदरुद्दीन की यहां पर मजार भी है जिसे हटा दिया गया था। ज्ञानवापी मामले के बाद इसे हिंदू पक्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है। सोमवार को कोर्ट के फैसले से हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है।

read more : उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट , जानिए “आम” के लिए क्यों खास

उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट , जानिए “आम” के लिए क्यों खास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने यूपी वित्तीय वर्ष 2024-25 का वार्षिक बजट पेश किया। ये बजट उत्तर प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इस बजट का आकर 7 लाख 36 हजार 437 करोड़ 71 लाख रुपये है। इसमें 24 हज़ार करोड़ रुपए की नई योजनाएं लाई गई है। बता दें कि , इसमें कनेक्टिविटी विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ ही युवाओं , किसानों , महिलाओं और गरीबों पर फोकस किया गया है।

बजट में सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपए से अधिक धार्मिक स्थलों के विकास और इससे सम्‍बन्‍धित इन्फ्रास्ट्रक्टर के विकास के लिए दिए हैं। यूपी के धार्मिक शहरों के विकास पर जोर दिया गया है। साथ ही अयोध्‍या एयरपोर्ट के विस्‍तार के लिए 150 करोड़ के प्रावधान के साथ ही अयोध्या की तर्ज पर ही काशी और मथुरा के विकास की भी योजना तैयार की गई है।

यूपी बजट में क्या है खास

  • यूपी बजट की नीतियां खासतौर पर युवा, महिलाओं, किसानों और गरीबों के उत्‍थान के लिए समर्पित हैं।
  • बजट 2024 में राज्य राजमार्गों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिए 2881 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • धर्मार्थ मार्गों के विकास के लिए 1750 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित किया गया है।
  • राज्य सड़क निधि से सड़कों के अनुरक्षण के लिए 3000 करोड़ रुपये और निर्माण के लिए 2500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • चीनी मिल परिक्षेत्र में कृषि विपणन सुविधाओं के लिए मार्गों का चौड़ीकरण एवं सदृढ़ीकरण, नवनिर्माण, पुर्ननिर्माण कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • रेलवे उपरिगामी – अधोगामी सेतुओं के निर्माण के लिए 1350 करोड़ रुपये एवं ग्रामीण सेतुओं के लिए 1500 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
  • लखनऊ में दिल्ली की तर्ज पर एयरोसिटी का निर्माण किया जाएगा।इसका विकास 1500 एकड़ में होगा।
  • फ्यूचर एनर्जी पर 4000 करोड़ का एमओयू हुआ है। इसके तहत सेवेन स्टार होटल और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

यूपी के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना वर्ष 2024-25 का वार्षिक बजट पेश करने के साथ ही योगी सर्कार की उपलब्धियां भी बताई। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्‍या अब वैश्विक पर्यटन का केंद्र बन गया है। योगी सरकार में यूपी की कानून व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से मातृ मुत्यु दर में भी कमी दर्ज की गयी ही। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

सीएम योगी ने रामलला को अर्पित किया बजट

आपको बता देयों , यूपी में योगी सरकार का आज आठवां बजट पेश हो गया है।वहीं बजट पेश होने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुशी जताते हुए कहा कि , इस बजट को हम श्री रामलला को अर्पित करते हैं। इस बजट की शुरुआत में , मध्य में और अंत में , सबमें प्रभु श्रीराम हैं। इसके विचार में , संकल्प में , एक-एक शब्द में श्रीराम हैं।

Read More : भाजपा ने नीतीश के लिए दरवाजा बंद किया पर कुंडी लगाना भूल गए – प्रशांत किशोर

भारत से मुकाबला हारकर भी इंग्लैंड ने बनाया एक नया रिकॉर्ड, इन दो टीमों किया पीछे

इंग्लैंड की टीम भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मुकाबला हार गई है। इससे सीरीज अब एक बार फिर से 1-1 की बराबरी पर आ गई है। सीरीज का पहला टेस्ट हैदराबाद में खेला गया था, जिसे इंग्लैंड ने 28 रन से अपने नाम किया था, वहीं टीम इंडिया ने पलटवार कर विशाखापट्टनम में खेला गया दूसरा मैच 106 रन से जीत लिया है। इस बीच भले ही इंग्लैंड की टीम ये मैच हार गई हो, लेकिन उसने एक रिकॉर्ड जरूर बना लिया है। इसलिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये मुकाबला ​बैजबॉल के कारण हुआ या फिर कोई और कारण है।

जब श्रीलंका ने चौथी पारी में बनाया था सबसे बड़ा स्कोर

टेस्ट क्रिकेट में भारत में चौथी पारी में सबसे बड़ा स्कोर श्रीलंका ने दिल्ली में साल 2017 में बनाया था, तब टीम ने 299 रन बना दिए थे। ये मुकाबला ड्रॉ यानी बराबरी पर खत्म हुआ था, क्योंकि श्रीलंका के ​5 ही विकेट गए थे। वहीं अब इंग्लैंड ने अपने सभी विकेट खोकर विशाखापट्टनम में 292 रन बना लिए हैं। यानी इंग्लैंड ने भारत में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बनाया।

इसके बाद वेस्टइंडीज की ओर से साल 1987 में दिल्ली में बनाया गया पांच विकेट पर 276 रनों का स्कोर अब तीसरे स्थान पर चला गया है। साल 2003 में अहमदाबाद में खेले गए टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड की टीम ने छह विकेट पर 272 रन बनाए थे। ये मैच भी ड्रॉ पर खत्म हुआ था। वेस्टइंडीज ने ही साल 1967 में चेन्नई में 7 विकेट पर 270 रन बना लिए थे। यानी टीम भले हार गई हो, लेकिन इंग्लैंड ने आखिर तक हार नहीं मानी और लड़कर मैच हारे हैं।

399 के टारगेट के सामने इंग्लैंड ने चौथी पारी में बनाए 292 रन

भारतीय टीम ने विशाखापट्टनम टेस्ट की आखिरी यानी चौथी पारी में 399 रनों का टारगेट रखा था। चौथी पारी में इतना बड़ा स्कोर हासिल करना कोई आसान काम नहीं होता। वो भी तब जब मुकाबला भारत में खेला जा रहा हो और पिच स्पिन के लिए मददगार हो। लेकिन फिर भी इंग्लैंड पिछले कुछ वक्त से जिस फॉर्मूले पर खेल रही है, उससे लग रहा था कि अगर इंग्लैंड के सभी बल्लेबाजों ने उसी स्टाइल में बल्लेबाजी की तो मैच यहां से भी जीता जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

भारत की ओर से दिया गया 399 का टारगेट तो इंग्लैंड की टीम प्राप्त नहीं कर सकी, लेकिन टीम ने फिर भी 292 रन बना लिए थे। ये भारत में किसी विदेशी टीम की ओर से चौथी पारी में बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। अब श्रीलंका ही उनसे आगे रह गई है। इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड को पीछे कर दिया है।

इंग्लैंड और भारत के बीच राजकोट में खेला जाएगा तीसरा टेस्ट मैच

भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा मैच 15 फरवरी से राजकोट में खेला जाएगा। यानी दूसरे और तीसरे मैच के बाद करीब 10 दिन का फासला है। इस दौरान टीम अपनी तैयारी करेगी। खास बात ये भी है कि बीसीसीआई की ओर से 2 ही टेस्ट मैचों के लिए टीम का ऐलान किया गया था, जो अब खत्म हो गए हैं। तीसरे टेस्ट से पहले अजीत अगरकर और बाकी टीम को बताना होगा कि बाकी मैचों के लिए भारत का स्क्वाड क्या होगा। क्या कुछ बदलाव किए जाएंगे। माना जा रहा है कि एक से दो दिन के भीतर ही स्क्वाड आ जाएगा, ताकि खिलाड़ी अभी से अपनी अपनी तैयारी में जुट जाएं।

read more : भाजपा ने नीतीश के लिए दरवाजा बंद किया पर कुंडी लगाना भूल गए – प्रशांत किशोर

भाजपा ने नीतीश के लिए दरवाजा बंद किया पर कुंडी लगाना भूल गए – प्रशांत किशोर

जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा है। प्रशांत किशोर ने तंज करते हुए कहा कि नीतीश जी पलटूराम हैं ये तो बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है, लेकिन अभी कुछ दिन पहले जो हुआ उससे ये भी पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह भी उतने ही बड़े पलटूराम हैं।

बिहार में आज से कुछ महीने पहले अमित शाह ने एक रैली में लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि बिहार का एक-एक आदमी कान खोल कर सुन लें। नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। लेकिन मौजूदा समय में मजाक क्या हो रहा है ? मजाक तो यह हो रहा है कि अमित शाह ने दरवाजा तो ठीक से बंद किया था पर कुंडी लगाना भूल गए थे।

प्रशांत किशोर ने तेजस्वी पर भी बोला हमला

प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव पर भी हमला बोला। प्रशांत किशोर ने कहा कि वे जब विपक्ष में होते हैं तो उनको शराब में माफियागिरी दिखने लगती है, लेकिन जैसे ही नीतीश के साथ उप-मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बना लेते हैं। नीतीश कुमार राजद से पलट कर भाजपा के साथ गए हैं तो भाजपा वाले भी तो उनके साथ गए हैं। यही हाल आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव का है। तेजस्वी यादव साल भर पहले नीतीश कुमार को पलटूराम बता रहे थे, पर जैसे ही नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को उप-मुख्यमंत्री बनाया।

तो तेजस्वी यादव नीतीश कुमार को विकास का मसीहा बताने लगे। तेजस्वी जब विपक्ष में थे तो शराब में उनको माफियागिरी दिख रही थी, लेकिन ठीक जैसे ही उनको उप-मुख्यमंत्री बनाया गया तो नीतीश कुमार में उनको अपना राजनीतिक गुरु दिखने लगा। तो सिर्फ नीतीश कुमार ही पलटूराम नहीं हैं। नीतीश कुमार सिर्फ पलटूराम के सरदार हैं, बाकी सभी नेता भी उतने ही बड़े पलटूराम निकले हैं।

read more : लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) क्यों दिया जा रहा भारत रत्न

लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) क्यों दिया जा रहा भारत रत्न

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप – प्रधानमंत्री रह चुके Lal Krishna Advani जी को भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर आडवाणी के साथ अपनी तस्वीरें शेयर कीं और लिखा- मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने उनसे बात भी की और उन्हें यह सम्मान दिए जाने पर बधाई दी।

लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलेगा

लाल कृष्ण आडवाणी ने भारत रत्न मिलने पर अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने कहा , मैं अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथ भारत रत्न स्वीकार करता हूं जो आज मुझे प्रदान किया गया है। साथ ही कहा , आज मैं उन दो व्यक्तियों को कृतज्ञतापूर्वक याद करता हूं। जिनके साथ मुझे करीब से काम करने का सम्मान मिला – पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी। इसके साथ ही उन्होंने सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया। भाजपा संघ और दिवंगत पत्नी कमला आडवाणी को भी याद किया।

Lal Krishna Advani को 2015 में मिला पद्म विभूषण

आडवाणी स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के संस्थापक सदस्य नाना जी देशमुख के बाद भारत का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भाजपा के तीसरे नेता हैं। वहीं अब तक भारत रत्न से सम्मानित लोगों में वे 50वीं शख्सियत हैं। बता दें , 2015 में आडवाणी को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। इसी साल स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया गया था। उस समय के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी खुद वाजपेयी के घर गए थे और उन्हें यह सम्मान दिया।

राममंदिर के लिए निकाली रथयात्रा

राममंदिर के लिए चल रहे आंदोलन को लालकृष्ण आडवाणी ने ही नई दिशा प्रदान की थी। उन्होंने साल 1990 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली थी। आडवाणी ने पूरे देश में एक हिन्दूवादी नेता के तौर पर पहचान बनाई। बता दें कि , भाजपा को नई ऊंचाई पर पहुँचाने में आडवाणी का ही विशेष भूमिका रही है। उनकी हिंदूवादी राजनीति के कारण ही आज भाजपा देश भर में अपनी पकड़ बना पाई है। अब 96 साल की आयु में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना है।

Read More : मुस्लिम पक्ष ने ज्ञानवापी में पूजा का किया विरोध , जानिए इसपर क्या है कोर्ट का फैसला

मुस्लिम पक्ष ने ज्ञानवापी में पूजा का किया विरोध , जानिए इसपर क्या है कोर्ट का फैसला

ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ही व्यासजी के तहखाने में पूजा शुरू हो गई है। इस बीच, आज यानि शुक्रवार को तहखाने में आरती और पूजा हुई। वहीँ , आज पहला जुम्मा है। मुस्लिम पक्ष ने नियत जगह पर नमाज़ पढ़ी इसके साथ ही शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का फैसला किया है। ज्ञानवापी में पूजा पाठ के विरोध में मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट का भी रुक किया।

इलाहाबाद कोर्ट ने शुक्रवार (आज ) को ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई की , जिसमें हिन्दू पक्ष को वाराणसी कोर्ट द्वारा मस्जिद में पूजा पाठ करने की अनुमति पर चुनौती दी गयी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट का कहना है कि जब तक 17 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी जाती , तब तक कुछ नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही मस्जिद समिति को 6 फ़रवरी तक अपील में संशोधन करने को कहा है। अब ज्ञानवापी मामले में अगली सुनवाई 6 फ़रवरी को होगी।

ज्ञानवापी परिसर में एक साथ हुई नमाज़ और पूजा

आज दूसरे दिन भी विधि विधान से व्यासजी के तहखाने में पूजा पाठ किया गया। वहीँ , जुम्मे की नमाज़ भी हुई। इसे मद्देनज़र रखते हुए ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर के में भारी पुलिसबल की तैनाती की गई है। इसके साथ-साथ आसपास की हर जगह पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। नमाज़ से पहले संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल ने फ्लैग मार्च किया।

कोर्ट के आदेशानुसार ज्ञानवापी तहखाने में आज भी आरती और पूजा की गई। लोगों के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया। आपको बता दें कि अब हर दिन तहखाने में पांच बार आरती की जाएगी। तहखाने में पुजारी के अलावा आम लोगों को भी दर्शन की इजाजत है , हालांकि अब तक दूर से ही दर्शन की अनुमति है।

ज्ञानवापी परिसर में ही देवताओं की प्रतिमा स्थित

बुधवार को वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा पाठ करने की इजाज़त हिंदू पक्ष को दे दी है। आपको बता दें , कोर्ट ने प्रशासन को 7 दिन का समय दिया था जिसमें वह पूजा पाठ करने हेतु पुजारी नियुक्त कर सकें। लेकिन अगले सात घंटे में ही मंदिर में पूजा हो गई। फैसले की देर रात ही अष्ट देवताओं की प्रतिमा स्थित कर पूजा शुरू की गई और भोग अर्पित कर रात्री शयन भी कराया गया। ज्ञानवापी की पहली आरती की तस्वीर और वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं।

Read More : हेमंत सोरेन मामले में पीएमएलए कोर्ट का आया बड़ा फैसला, 5 दिन की मिली रिमांड

हेमंत सोरेन मामले में पीएमएलए कोर्ट का आया बड़ा फैसला, 5 दिन की मिली रिमांड

हेमंत सोरेन मामले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस मामले में पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने अपना फैसला दिया है। फैसले में ईडी को कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड दी है। जानकारी के लिए बता दें कि ईडी ने कोर्ट से 10 दिनों की रिमांड मांगी थी, पर कोर्ट ने उन्हें महज 5 दिनों की रिमांड मंजूरी दी है। हेमंत सोरेन के वकीलों ने कोर्ट से अपील की है कि पूर्व सीएम को कल जिस होटवार जेल में रखा गया था, हेमंत सोरेन को फिर वहीं रखा जाए।

क्या है मामला ?

ईडी का दावा है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अवैध कब्जे व उपयोग में यहां करीब 8.5 एकड़ कुल क्षेत्रफल के एक दर्जन भूखंड हैं और यह मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत अपराध से कमाई गई संपत्ति है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के शीघ्र बाद सोरेन (48) को ईडी ने बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया था। एजेंसी ने दिन में उनसे 7 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी।

हेमंत सोरेन से जेल में ही होगी पूछताछ

बता दें कि वकीलों ने कोर्ट से आगे कहा कि वो जेल सुरक्षा के लिहाज से सेफ है।, इसलिए ईडी जेल में ही 5 दिन पूछताछ करे। कोर्ट ने दोनों को पक्षों को सुनने के बाद 5 दिन की ईडी को कस्टडी दे दी है। कोर्ट ने आगे सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए ईडी को कहा है कि हेमंत से जेल में ही पूछताछ करे और अगर कहीं ले जाना होगा तो उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इस पर ईडी ने कोर्ट को अपनी सहमति दी है। यानी ईडी जेल में हेमंत से पूछताछ करेगी।

झारखंड को मिला नया सीएम

इससे पहले आज झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राज्यपाल सी.पी.राधाकृष्णन ने उन्हें यहां राजभवन में पद की शपथ ग्रहण कराई है। चंपई सोरेन के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आलमगीर आलम और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता सत्यानंद भोक्ता ने राज्य के मंत्रियों के रूप में शपथ ली। जानकारी दे दें कि हेमंत सोरेन ने ही विधायक दल की बैठक में चंपई सोरेन का नाम आगे किया था।

read more : पूनम पांडे का 32 साल की उम्र मे निधन, सर्वाइकल कैंसर से जूझ रही थीं एक्ट्रेस

पूनम पांडे का 32 साल की उम्र मे निधन, सर्वाइकल कैंसर से जूझ रही थीं एक्ट्रेस

एक्ट्रेस पूनम पांडे की अचानक मौत ने सभी को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया गया है जिसमें सर्वाइकल कैंसर से उनकी मौत की खबर की पुष्टि की गई है। आपको बता दे कि 32 साल की पूनम लॉकअप ओटीटी कंटेस्टेंट रह चुकी हैं। वह एरोटिका एक्ट्रेस के रूप में फेमस थीं और कई कॉन्ट्रोवर्सीज में नाम आ चुका था। एक्ट्रेस पूनम पांडे के निधन की खबर पर उनके फॉलोअर्स यकीन नहीं कर पा रहे।

अब उनकी टीम ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया है कि पूनम का गुरुवार रात उनके होमटाउन कानपुर में निधन हो गया। अंतिम संस्कार कब होगा, इस बात की सूचना नहीं मिल पाई है। पूनम पांडे के इंस्टाग्राम पर शुक्रवार को एक पोस्ट दिखे जिससे हर कोई हैरान हो गया। इसमें सूचना दी गई थी, यह सुबह हमारे लिए काफी मुश्किल है। आपको यह सूचना देते हुए काफी दुख हो रहा है कि हमारी प्यारी पूनम का सर्वाइकल कैंसर से निधन हो गया है।

पूनम पांडे की मैनेजर पारुल चावला ने भी निधन की पुष्टि की है।
पूनम पांडे की मैनेजर पारुल चावला ने भी निधन की पुष्टि की है।

हमेशा विवादों में रही पूनम पांडे

पूनम पांडे के विवादों की बात करें तो, साल 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैच में भारतीय टीम जब सारे मैच जीत रही थी तो पूनम ने एलान किया था कि अगर टीम ने वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया तो वह बिना कपड़ों के नजर आएंगी। पूनम पांडे अपने इस बयान से वह खूब चर्चे में आ गई थीं। इसके अलावा एक बार सनी लियोनी से खुद की तुलना करने को लेकर भी वह भड़क गई थीं।

इसके अलावा पूनम उस वक्त भी सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अपना बाथरूम डांस वीडियो यूट्यूब पर रिलीज कर दिया था। इस वीडियो में वह बाथरूम में डांस करती हुई नजर आ रही थीं। इस वीडियो के बाद पूनम काफी विवादों में फंस गई थीं और इसके चलते यूट्यूब ने उनका वीडियो ब्लॉक भी कर दिया था।

आखिर कितना खतरनाक है ये सर्वाइकल कैंसर और आइये जानने इसके लक्षण ……….

जानलेवा होता है ये कैंसर

सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में विकसित होता है। नॉर्मली इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे में कई बार सही समय पर सर्वाइकल कैंसर का पता नहीं चल पाता है। अगर समय पर इसका इलाज ना किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसीलिए शरीर में होने वाले परिवर्तनों पर खास ध्यान देना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर क्यों है जानलेवा

आपको बता दे सर्वाइकल कैंसर होने पर सर्विक्स में कोशिकाएं असामान्य और तेजी से बढ़ने लगती हैं। सर्वाइकल कैंसर के लक्षण शुरुआत में पता नहीं चल पाते हैं इसलिए इसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। सर्वाइकल कैंसर होने की कई मुख्य कारण हैं जिसमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), यौन संचारित रोग (STDs), ज्यादा दिनों तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करना, धूम्रपान, HIV संक्रमण और कई बार अंग प्रत्यारोपण होने के कारण खतरा बढ़ता है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

>> सर्वाइकल कैंसर में महिलाओं को बिना पीरियड्स के ब्लीडिंग होने लगती है। ये स्थिति कैंसर के फैलने के बाद होती है।
>> लगातार डिस्चार्ज होने की वजह भी सर्विक्स हो सकती है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
>> सर्विक्स में भी सामान्य कैंसर की तरह अचानक वजन कम होने लगता है और भूख में कमी आने लगती है।
>> कई बार तेज दर्द और घबराहट होना भी इसके संकेत हैं।
>> पेल्विक या पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द होना भी सर्विक्स कैंसर के लक्षण हैं।
>> शुरुआती सर्विक्स कैंसर के लक्षणों में टॉयलेट और मल त्यागने में परेशानी होने लगती है।

read more :  Interim Budget 2024 : जानिए बजट में आम लोगों के लिए क्या है ख़ास

Interim Budget 2024 : जानिए बजट में आम लोगों के लिए क्या है ख़ास

आज भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का अंतरिम Budget 2024 पेश किया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह अंतिम बजट है। वैसे तो ये साल का आखिरी बजट नहीं है , क्योंकि अप्रैल-मई में आम चुनाव होने हैं। नई सरकार बनने के बाद पूर्ण बजट जुलाई में पेश होने की सम्भावना है । अंतरिम बजट को खास माना जा रहा है। पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साफ कर दिया था कि इस बजट में कोई बड़ी घोषणा नहीं की जाएगी। इस अंतरिम बजट में ऐसी बहुत खास बातें हैं जो आम जनता की रोजमर्रा की जिदंगी को प्रभावित करेंगी। बजट में 4 सेक्‍टर्स पर फोकस रहा। जोकि गरीब, महिलाएं, युवा और अन्‍नदाता (किसान)।

Budget 2024 में महिलाओं के लिए क्या है खास

इस बजट में सरकार का गरीब , किसान , युवा और महिलाओं पर विशेष ध्यान रहा है। अंतरिम बजट में आशा बहनों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाएगा, 9 से 14 साल की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर का मुफ्त टीका लगाया जाएगा। वहीं मोदी सरकार के शासन में 10 वर्षों में करीब 1 करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बनीं। अब 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है। साथ ही मातृ शक्ति और बच्चियों के लिए नया कार्यक्रम लाया जाएगा।

Budget 2024 में गरीबों के लिए क्या है खास

किराए के मकान में रहने वाले लोग भी अब अपना घर बना पाएंगे। वहीं एक करोड़ घरों को 300 यूनिट सोलर बिजली मुफ्त मिलेगी। पीएम आवास योजना के तहत अब तक 3 करोड़ घर बनाए गए हैं। आने वाले 5 साल में 2 करोड़ और घर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही पिछली बार की तरह इस बार भी 7 लाख रूपए तक की आय पर कोई टेक्स नहीं लगेगा।

किसानों के लिए कैसा है ये बजट

1 फरवरी को पेश किए गए इस बजट में किसानों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बता दें कि बजट में किसानों को सशक्त बनाने पर जोर डाला गया है। अबतक पीएम किसान योजना से 11.8 करोड़ लोगों को आर्थिक मदद मिली है।

युवाओं के लिए बड़ी घोषणाएं

देश में उच्च शिक्षा के लिए नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, 7 आईआईटी 7 आईआईएम नए शुरू किए जाएंगे, युवाओं को स्टार्टअप के लिए टैक्स छूट 1 साल तक बड़ाई गई है। स्किल इंडिया मिशन के तहत 1.4 करोड़ युवाओं को ट्रेंड और 54 लाख लोगों को दोबारा से सिखाया गया। 3 हजार नई आईटीआई बनाई गईं।

बजट की बड़ी बातें

इस बजट में सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। साथ ही जुलाई में आने वाले फाइनल बजट में विकसित भारत को लेकर पूरा रोडमैप बताया जाएगा। वहीँ 1361 मंडियों को e-NAM से जोड़ा जाएगा। फिशरीज स्कीम में 1 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट लक्ष्य है। इसके अलावा रिसर्च के लिए शून्य या कम ब्याज पर 1 लाख करोड़ के लोन की सुविधा दी जाएगी। रेलवे के लिए भी निति बताई जिसमें 40 हजार सामान्य बोगियों को वंदे भारत बोगी में बदला जाएगा।

Read More : Chandigarh Mayor Election : “यह लोकतंत्र की हत्या , हम 20 वे 15 फिर कैसे … ” : भगवंत मान

Chandigarh Mayor Election : “यह लोकतंत्र की हत्या , हम 20 वे 15 फिर कैसे … ” : भगवंत मान

हरियाणा हाईकोर्ट की दखलंदाज़ी और काफी विवादों के बाद मंगलवार को Chandigarh Mayor Election हुआ जिसका परिणाम चौंकाने वाला रहा। भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर ने जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया। मनोज चंडीगढ़ नगर निगम के नए मेयर बन गए हैं। उन्होंने आप-कांग्रेस के I.N.D.I.A अलायंस के कैंडिडेट कुलदीप टीटा को हरा दिया। सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत संधू और डिप्टी मेयर राजेंद्र शर्मा चुने गए हैं।

कम होने के बाद भी भाजपा की जीत कैसे

चुनाव परिणाम के बाद पंजाब के सीएम और आप नेता भगवंत मान ने चुप्पी थोड़ी। उन्होंने एक बयान में कहा , “आज का दिन हमारे देश के लोकतंत्र में ‘काले दिन’ के रूप में लिखा और याद किया जाएगा। ” इसके साथ ही उन्होंने कहा , हम विपक्ष वाले 20 थे और वे 15 । अब सोचने वाली बात यह है की ऐसा कैसे हो गया 20 वाले हार गए और 15 वाले जीत गए।

https://x.com/ANI/status/1752281344200282246?s=20

आपको बता दें , भगवंत मान का आरोप है की मॉनिटरिंग करने वालों के मुताबिक हमारे 8 लोगों को वोट करना नहीं आता था। इसलिए उन सभी का वोट अमान्य कर दिया गया। जबकि उनमें से कई पिछली बार वोट कर चुके है। मॉनिटरिंग टीम के अनुसार उनके 16 वोट सही थे। इसके साथ ही मान ने भाजपा पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट तक जाने की बात कही।

I.N.D.I.A अलायंस को झटका

चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए सांसद और 35 पार्षदों ने वोट डाला। भाजपा के मनोज सोनकर ने 35 में से 16 वोट हासिल किए। जबकी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रत्याशी कुलदीप टीटा सिर्फ 12 वोट हासिल कर पाए। इसके अलावा 8 वोट कैंसिल कर दिए गए। कांग्रेस ने अपने मेयर प्रत्याशी जसबीर सिंह बंटी का नामांकन वापस लेकर कुलदीप टीटा को समर्थन देकर दाव चला लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। बता दें कि, चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था। आप और कांग्रेस के कुल 20 पार्षद थे।

Read More : मुनव्वर फारूकी बने Bigg Boss 17 के विजेता , कॉन्ट्रोवर्सीज के बीच मारी बाज़ी