Sunday, April 5, 2026
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बदली रणनीति, ज्यादा तबाही, कितनी अलग इजराइल-हिजबुल्लाह की जंग ?

इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्ध जारी है। ये दिन बा दिन खतरनाक होता जा रहा है। 2006 के बाद ये पहला मौका है, जब इजराइल और हिजबुल्लाह आमने सामने आए हैं। 2006 के युद्ध के बाद इजराइल और हिजबुल्लाह ने अपने दृष्टिकोण में बदलाव किए हैं। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की हाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल अब अपने अंतरराष्ट्रीय सम्मान को कमतर समझता है, खासतौर पर तब जब वह गाजा पर कहर बरसाने के बाद लेबनान में भी इसी तरह की हताहतों की ओर बढ़ रहा है।

हाल में इजराइल सेना ने दक्षिण लेबनान में एक सीमित कार्रवाई शुरू की है, जो 2006 के संघर्ष की याद दिला रही है। लेकिन इजराइल इस बार और ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है और वह अंतरराष्ट्रीय निंदा और युद्ध विराम की अपीलों के बावजूद आगे बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी 2006 के मुकाबले अपनी सैन्य ताकत को बहुत मजबूत किया है और अपने नेताओं की हत्या के बाद भी वह अपनी कार्रवाइयों को जारी रखने में सक्षम है।

हिजबुल्लाह की रणनीति में सुधार

इस जंग में हिजबुल्लाह रणनीति में भी कई बदलाव देखने मिल रहे हैं। 2006 के अनुभवों से सीख कर हिजबुल्लाह ने अपने अंदर कई सुधार किए हैं और वे इजराइल की खुफिया एजेंसियों की ओर से उसके नेताओं के निशाना बनाए जाने के बाद भी हमले करने में सक्षम है। हिजबुल्लाह ने समूह की अंदरूनी स्ट्रक्चर को ऐसा बना लिया है कि किसी भी कमांडर की हत्या के बाद भी उसके सैन्य अभियान प्रभावित नहीं हो रहे हैं।

हिजबुल्लाह 2006 के बाद इजराइल की तकनीकी ताकत को समझ गया है। जिसका मुकाबला सिर्फ लड़ाकों के बल पर नहीं किया जा सकता है। हिजबुल्लाह ने अपने पास एक लाख से दो लाख रॉकेट और मिसाइलें जमा की हैं, जो 2006 में सिर्फ 15 हजार थी। यह नया जंगी सामान इजराइल की सुरक्षा के लिए चिंता का मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा हिजबुल्लाह ने इजराइल के हवाई हमलों से बचने और गुरिल्ला वार को मजबूत करने के लिए अपने टनल और गुप्त नेटवर्क को भी एडवांस किया है। जो हिजबुल्लाह को इजराइली हमलों का मुकाबला करने में मदद कर रहे हैं।

इजराइल की नई रणनीति और चुनौतियां

इजराइल के अधिकारी भी 2006 में हुई गलतियों से बहुत कुछ सीख चुके हैं। इजराइल अब ज्यादा विनाशकारी हमलों के तरीकों को अपना रहा है। जिससे वे हिजबुल्लाह की कमर तोड़ सके। हालांकि, जानकारों का मानना है कि एक नए जमीनी जंग में इजराइल को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुड ओल्मर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर इजराइल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ नए आक्रमण का फैसला किया, तो यह बहुत कठिन और खूनी हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय युद्ध की संभावना बढ़ जाएगी। 2006 की जंग के मुकाबले ये जंग सिर्फ हिजबुल्लाह और इजराइल तक सीमित नहीं है। अगर दोनों पक्षों ने अपने रुख में नरमी नहीं लाई तो ये जंग पूरे क्षेत्र में फैल सकती है। जहां इजराइल अपार बल को प्राथमिकता दे रहा है। वहीं हिजबुल्लाह के लिए जीवित रहना और मजबूती से खड़ा होना महत्वपूर्ण है।

हताहतों की बढ़ती संख्या और इजराइल का रुख

इजराइल लेबनान में अपने ऑपरेशनों में हिजबुल्लाह के लक्ष्यों को निशाना बना रहा है, लेकिन उसके हमलों में कई रेसिडेंशियल टावरों को भी निशाना बनाया गया है। इन हमलों में करीब 37 हिजबुल्लाह लड़ाकों की मौत हुई है, जबकि 2 हजार से ज्यादा नागरिकों की जान जा चुकी है। जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, ये आंकड़ा 2006 की जंग की हताहतों से दो गुना है और जबकि इसे जंग की शुरुआत कहा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन कार्रवाई को युद्ध अपराध माना है, लेकिन इजराइल का रुख लेबनान में भी गाजा जैसा ही है। जानकार मानते हैं कि इजराइल इस जंग के सहारे 2006 की हार का दाग धुलना चाहता है और उसने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए मानवीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की अपीलों पर ध्यान देना छोड़ दिया है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में करनी है नौकरी, तो न चूकें मौका है इन पदों पर भर्ती

अगर आप टीचिंग लाइन में नौकरी की तलाश में हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। हालांकि, अभी इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। एक बार शुरू होने के बाद उम्मीदवार आधिकरिक वेबसाइट du.ac.in पर जाकर अप्लाई कर सकेंगे। इन पदों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 14 अक्टूबर से शुरू होगी और 24 अक्टूबर या रोजगार समाचार में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि से दो सप्ताह बाद समाप्त होगी, जो भी बाद में हो। पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य विवरणों के लिए नीचे पढ़ें।

क्या है आवेदन शुल्क ?

सभी पदों के लिए आवेदन शुल्क अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 2000 रुपये है। OBC/EWS श्रेणी और महिला आवेदकों के लिए आवेदन शुल्क 1500 रुपये है। SC/ST श्रेणी के लिए 1000 रुपये और PwBD श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 500 रुपये है। भुगतान केवल ऑनलाइन, क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग के माध्यम से किया जाना चाहिए। एक बार भुगतान की गई फीस किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं की जाएगी। जो उम्मीदवार एक से अधिक पद/विभाग के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें अलग-अलग आवेदन करना होगा और अलग-अलग शुल्क का भुगतान करना होगा। अधिक संबंधित विवरण के लिए उम्मीदवार दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

नौकरी के क्या है चयन प्रक्रिया ?

साक्षात्कार के लिए बुलाए गए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को सभी मूल प्रमाण-पत्रों/प्रमाण-पत्रों के साथ वैध फोटो पहचान-पत्र (आधार/मतदाता पहचान-पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/पासपोर्ट) के साथ रिपोर्ट करना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्शाए गए योग्यता, अनुभव और श्रेणी के संबंध में प्रमाण-पत्रों/प्रमाण-पत्रों की स्व-सत्यापित फोटोकॉपी का एक सेट, आवेदक द्वारा विधिवत प्रमाणित साक्षात्कार के समय प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

नौकरी के लिए रिक्ति विवरण

इस भर्ती अभियान के तहत संगठन में 575 फैकल्टी पदों को भरा जाएगा।
>> सहायक प्रोफेसर : 116 पद
>> प्रोफेसर : 145 पद
>> एसोसिएट प्रोफेसर : 313 पद

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रावण की जन्मभूमि: यहां दशानन को जलाते नहीं बल्कि पूजा करते हैं लोग

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित बिसरख गांव को दशानन रावण की जन्मस्थली माना जाता है। गांव में ही भगवान शिव की शिवलिंग स्थापित है। गांव के लोगों का कहना है कि रावण यहां ही भगवान शिव की पूजा करता था। उसके वध के कारण गांव में न तो कभी रामलीला होती है और न ही दशहरा पर कोई उत्सव मनाया जाता है। बिसरख गांव में दशहरे को लेकर न तो कोई खुशी है और न ही उल्लास होता है। गांव के किसी भी व्यक्ति ने जब पुरानी परंपरा को तोड़कर रामलीला का आयोजन कराया या रावण दहन का काम किया तो उसके साथ अशुभ हुआ।

इसके चलते कोई भी रामलीला और रावण दहन नहीं करते हैं। समय बदला है, युवाओं के विचार भी बदल रहे हैं, लेकिन पुरानी परंपराओं और मान्यताओं के विरुद्ध अभी तक कोई भी परिवार या व्यक्ति सामने नहीं आया है, जिसके चलते यह परंपरा आज भी कायम है। बिसरा गांव में स्थित रावण के मंदिर में शाम 5:30 बजे हवन व पूजन होगा। महंत रामदेव ने बताया कि गांव के लोग सुबह पूजा के लिए आए थे। शाम को मंदिर परिसर में विधि विधान से पूजा अर्चना होगी।

गांव में है रावण का मंदिर

बिसरख गांव में रावण का एक मंदिर भी है। महंत रामदेव ने बताया कि दशानन रावण के पिता ऋषि विश्वश्रवा द्वारा स्थापित अष्टकोणीय शिवलिंग मौजूद है। मान्यता है कि रावण और उनके भाई कुबेर इस शिवलिंग की पूजा करते थे। रावण ने भगवान शिव की तपस्या करते हुए इसी शिवलिंग पर अपने सिर को अर्पित किए थे, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें 10 सिर का वरदान दिया था। गांव के अन्य लोग बताते हैं कि दूर-दूर से लोग भगवान शिव और रावण से वरदान मांगने के लिए यहां आते हैं।

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अमेरिका में राष्ट्रपति कैसे चुना जाता है? आईये इन अहम तारीखों के जरिए समझे

दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका का सबसे ताकतवर आदमी यानी अगला राष्ट्रपति कौन होगा ? क्या डोनाल्ड ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिलेगा या अमेरिका को पहली महिला राष्ट्रपति कमला हैरिस ? इसका जवाब मिलने में महज अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। 5 नवंबर 2024 को अमेरिक के लोग अपने अगले राष्ट्रपति को चुनने के लिए मतदान करेंगे। मगर अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव इतना कठिन और लंबा होता है कि वोटिंग खत्म होने के बाद भी इसे कई अहम पड़ाव से गुजरना पड़ता है। तब जाकर नए राष्ट्रपति को अगले साल यानी 2025 के जनवरी महीने में शपथ दिलाई जाएगी और वो चार साल का अपना कार्यकाल शुरू कर पाएंगे।

तो आइए इन अहम तारीखों के जरिए समझते हैं कि आखिर अमेरिका में राष्ट्रपति कैसे चुना जाएगा, हर एक तारीख इस चुनाव में क्या अहमियत रखती है ?

पहली अहम तारीख

अमेरिका में नए राष्ट्रपति के चुनाव से लेकर शपथ ग्रहण समारोह तक के लिए अमेरिकी संविधान में नियम बनाए गए हैं। इसके हिसाब से वोटिंग का दिन भी पहले से तय है। अमेरिका में नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को ही चुनाव होता है। मतलब 2024 में 1 नवंबर को शुक्रवार है पर पहला सोमवार 4 को है। तो मतदान की तारीख 5 नवंबर को होगी, इस दिन को इलेक्शन डे भी कहते हैं। एक और बात अमेरिका में वोटिंग की तारीख का मतलब यह नहीं है कि वोटिंग इस दिन शुरू होगी बल्कि उस दिन खत्म होगी। 5 नवंबर तक, लाखों लोग पहले ही मतदान कर चुके होंगे। बैलट और मेल इन के जरिए। जिसे अर्ली वोटिंग कहा जाता है, इसकी अनुमति हालांकि कुछ राज्य ही देते हैं।

जो मतदाता बीमारी या अपाहिज होने के कारण, राज्य के बाहर होने की वजह से वोट नहीं डाल पाते उन्हें ये सहूलियत मिलती है और ऐसा इसलिए भी होता है ताकि इलेक्शन डे के दिन लंबी लाइनों से बचा जा सके। 5 नवंबर को जो लोग मतदान करते हैं, उन्हें पोलिंग स्टेशन जाना होता है। उनके पास ऑनलाइन वोटिंग का ऑप्शन नहीं होता है।

दूसरी अहम तारीख 6 से 10 नवंबर

आम तौर पर विजेता का एलान मतदान की रात को ही हो जाता है लेकिन वोटों की गिनती में कुछ दिन भी लग भी सकते हैं। मिसाल के तौर पर 2020 में ऐसा हुआ था। समय इसलिए लगता है क्योंकि हर एक वोट की गिनती करनी होती है। ऊपर से अमेरिका में, फेडरल वोट काउंटिंग का प्रोसेस नहीं है। इसके बजाय, गिनती का जिम्मा राज्यों पर छोड़ दिया जाता है। इसलिए फाइनल ऑफिशियल टैली आने में वक्त लगता है। मगर शुरुआती घंटों में ही रुझान से पता चलने लगता है कि कौन जीत रहा है।

तीसरी अहम तारीख

10 नवंबर के बाद अलग अलग स्टेट्स में वोटिंग के बाद की स्थिति के आधार पर इलेक्टर को सर्टिफाई करने का प्रोसेस शुरू होता है। इसे सर्टिफिकेट ऑफ असर्टेनमेंट कहते हैं। अगर कोई विवाद होता है और दोबारा काउंटिंग की स्थिति बनती है तो इस प्रक्रिया में देर भी लग सकती है। इस बार इस प्रोसेस को पूरा करने की आखिरी तारीख 11 दिसंबर है। सर्टिफिकेट में हर एक राज्य के भीतर जितने भी इलेक्टर्स जीते हैं, वो किस उम्मीदवार को सपोर्ट करते हैं, ये जारी जानकारी दी गई होती है। हर एक सर्टिफिकेट की सात कॉपियां बनती हैं जिस पर गवर्नर का साइन और राज्य का मुहर लगा होता है। तो 11 दिसंबर तक सभी 50 राज्यों में 538 इलेक्टर्स तय हो चुके होंगे।

चौथी अहम तारीख 17 दिसंबर

17 दिसंबर को सभी 50 स्टटे्स में जो 538 इलेक्टर चुने गए हैं, वो अपना अपना वोट डालेंगे। अमेरिका के संविधान में यह कहीं नहीं लिखा है कि इलेक्टर को पॉपुलर वोट को फॉलो करना होगा। लेकिन ज्यादातर स्टेट्स में कानून में ऐसा करना जरूरी है। जुलाई 2020 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिन स्टेट्स में कानून लागू है। वहां इलेक्टर्स को पॉपुलर वोट को फॉलो करना होगा, यानी जिसे जनता चुनेगी उसे ही वोट देना होगा।

पांचवी अहम तारीख 6 जनवरी 2025

सभी राज्यों से इलेक्टर के वोट वॉशिंगटन पहुंचेंगे। यहीं अमेरिका का संसद कैपिटल हिल है, जनवरी के पहले हफ्ते में सांसदों का संयुक्त सत्र बुलाया जाता है। इसी सत्र में उपराष्ट्रपति के सामने ही इलेक्टर्स के वोटों को गिना जाता है और विजेता के नाम की घोषणा होती है। क्योंकि मौजूदा उपराष्ट्रपति सीनेट के अध्यक्ष के रूप में भी काम करते हैं तो कमला हैरिस ही 2025 में इस गिनती की अध्यक्षता करेंगे। जैसा कि उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने जनवरी 2017 में किया था जब डोनाल्ड ट्रम्प आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति बन गए थे।

छठी अहम तारीख 20 जनवरी 2025

अमेरिका चुनाव की तारीख के अलावा ये भी पहले से तय होता है कि नया प्रेसिडेंट कब शपथ लेगा। अमेरिका के संविधान के मुताबिक, 20 जनवरी को नया प्रेसिडेंट पद की शपथ लेता है। इसे इनॉगरेशन डे भी कहते हैं। पहली बार साल 1937 में इस तारीख को शपथ ली गई थी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लिया था।

इस नियम के तहत अगर 20 जनवरी को रविवार पड़ जाता है तो शपथ समारोह 21 जनवरी को आयोजित किया जाता है। ऐसा साल 2013 में हुआ था जब बराक ओबामा अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने वाले थे तब 20 जनवरी को रविवार पड़ गया था। उसके बाद राष्ट्रपति एक परेड में व्हाइट हाउस जाते हैं और अगले चार साल का कार्यकाल शुरु करते हैं।

वोटिंग का तरीका भी सबसे रोचक है

अमेरिका में जनता सीधे प्रेसिडेंट नहीं चुनती, पहलो वो कुछ लोगों को चुनती है, जिन्हें इलेक्टर कहा जाता है। ये सारे इलेक्टर मिलकर बनाते हैं इलेक्टोरल कॉलेज जो अमेरिका के चुनावी तंत्र का सबसे अहम हिस्सा है। अमेरिका में कुल 50 स्टेट्स है, जो राज्य जितना बड़ा होता है उस हिसाब से उस राज्य में इलेक्टर्स की संख्या तय होती है। मिसाल के तौर पर कैलीफोर्निया जहां सबसे ज्यादा 54 इलेक्टर है। डेलावेयर में सबसे छाटे 3 इलेक्टर है। कुल मिलाकर अमेरिका में 538 इलेक्टर्स है। 538 इलेक्टर्स में 435 रिप्रेजेंटेटिव्स, 100 सीनेटर्स और तीन डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के इलेक्टर्स होते हैं।

ये सभी इलेक्टर्स किस पार्टी के उम्मीदवार को सपोर्ट कर रहे हैं ये वो पहले से ही जनता को बता देते हैं। तो जब वोटर्स 5 नवंबर को वोट करने जाएंगे तो वे अपने पंसदीदा उम्मीदवार के इलेक्ट्रस को अपने स्टेट में चुनेंगे। अगर हैरिस वर्मोंट राज्य जीतती हैं, तो उन्हें इसके तीन इलेक्टोरल वोट मिलेंगे और ट्रम्प अलास्का जीतते हैं, तो उनके खाते में तीन इलेक्टोरल वोट जाएंगे। तो दोनों में से जो भी पहले 270 का जादुई आकड़ा पार कर लेता है वो विजेता होता है। जनता हालांकि पॉपुलर वोट भी देती है, माने वो ये सीधे बताते हैं कि उन्हें कौन पसंद है – हैरिस या ट्रंप। कुछ स्टेट्स में जो पॉपुलर वोट्स जीतता है, उसे ही सभी इलेक्टर सीटें मिल जाती है पर कुछ स्टेट्स में ऐसा बिलकुल भी नहीं है।

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पाकिस्तान की शर्मनाक हार, 147 साल के क्रिकेट में ऐसा कभी नहीं हुआ

इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान दौरे की शुरुआत जीत के साथ की है। दोनों टीमों के बीच 3 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच मुल्तान स्टेडियम में खेला गया। इस मुकाबले में इंग्लैंड की टीम ने पारी और 47 रनों से बाजी मारी। पाकिस्तान के लिए ये उनके क्रिकेट इतिहास की सबसे शर्मनाक हार है। इस हार के साथ पाकिस्तान क्रिकेट के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी जुड़ गया है। उनकी टीम को एक ऐसी हार का सामना करना पड़ा है, जो 147 साल के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी टीम को नहीं मिली थी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि दिसंबर 2023 के बाद से पाकिस्तान ने अपने पिछले 6 टेस्ट मैच हारे हैं। यह टीम की पिछली 11 टेस्ट मैचों में सातवीं घरेलू हार भी है। बाकी चार मैच ड्रा रहे हैं। पाकिस्तान ने आखिरी टेस्ट मैच फरवरी 2021 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीता था। यानी 1341 दिन से पाकिस्तान को जीत नसीब नहीं हुई है। इस मैच में हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में हलचल मची हुई है। इस हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बड़ा फैसला किया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नई सेलेक्शन कमेटी का ऐलान कर दिया गया है। इस सेलेक्शन कमेटी में एक अंपायर का भी नाम है।

नई सेलेक्शन कमेटी की घोषणा

वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बाद से ही पाकिस्तान क्रिकेट में कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। हाल में ही मोहम्मद यूसुफ ने सेलेक्शन कमेटी से अलग हो गए थे। वहीं, अब बोर्ड ने नई सेलेक्शन कमेटी में कई बड़े बदलाव किए हैं। नई सेलेक्शन कमेटी में अलीम डार, आकिब जावेद, असद शफीक, अजहर अली और हसन चीमा को जगह मिली है।

इंग्लैंड की टीम का दमदार प्रदर्शन

इंग्लैंड ने 556 रन के जवाब में अपनी पहली पारी 150 ओवर में 823 रन बनाकर घोषित की थी। इस तरह इंग्लैंड ने पहली पारी में 267 रन की बढ़त ली थी। लेकिन इस सपाट पिच पर पाकिस्तान की दूसरी पारी 220 रनों पर ही ढेर हो गई, जिसके चलते उसे पारी से हार का सामना करना पड़ा। खेल के आखिरी दिन पाकिस्तान ने 152 रनों से आगे खेलना शुरू किया और उसके हाथों में 4 विकेट बाकी थे। लेकिन पाकिस्तान की टीम पांचवें दिन एक सेशन भी मैदान पर नहीं टीक सकी।

पाकिस्तान क्रिकेट के लिए सबसे शर्मनाक दिन

पाकिस्तान की टीम ने इस मुकाबले की पहली पारी में 556 रन बनाए थे। ऐसे में उसने मुकाबले की शुरुआत काफी शानदार अंदाज में की थी। मुकाबले के शुरुआती साढ़े तीन दिन तक खेल ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, लेकिन चौथे दिन के आखिरी सेशन से मुकाबले ने ऐसी करवट ली कि पाकिस्तान को पारी और 47 रनों से हार का सामना करना पड़ा। बता दें, टेस्ट क्रिकेट के 147 साल के इतिहास में ये पहला मौका है जब कोई टीम पहली पारी में 500 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी पारी से टेस्ट मैच हारी है।

जो रूट और हैरी ब्रूक रहे जीत के हीरो

जो रूट और हैरी ब्रूक ने इस मुकाबले में कमाल की बल्लेबाजी की ओर पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर ली। दोनो खिलाड़ियों के बीच ऐतिहासिक साझेदारी भी देखने को मिली। जो रूट ने पहली पारी में 262 रन बनाए, वहीं हैरी ब्रूक ने तो तिहरा शतक जड़ते हुए 317 रनों की पारी खेली। इंग्लैंड के लिए वे सबसे तेज तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बने। दूसरी ओर दोनों खिलाड़ियों के बीच 454 रनों की साझेदारी भी हुई जो इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी है।

वही डॉन ब्रैडमैन का एक और रिकॉर्ड ध्वस्त

दरअसल, जो रूट टेस्ट जीत में सबसे ज्यादा शतक ठोकने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में डॉन ब्रैडमैन से आगे निकल गए हैं। जो रूट ने जीते हुए टेस्ट मैचों में 24 शतक लगाए हैं जबकि डॉन ब्रैडमैन ने 23 शतक जड़े थे। ब्रैडमैन ने 1948 में अपना आखिरी शतक जड़ा था जिसमें ऑस्ट्रेलिया को जीत मिली थी। रूट से आगे अब सिर्फ 2 बल्लेबाज हैं। पहले नंबर 30 शतक के साथ रिकी पोंटिंग हैं जबकि दूसरे पायदान पर स्टीव स्मिथ हैं। स्मिथ ने 25 शतक जीते हुए टेस्ट मैचों में ठोके हैं।

जीते हुए मैचों में सबसे ज्यादा टेस्ट शतक

>> 30 – रिकी पोंटिंग

>> 25 – स्टीव वॉ

>> 24 – जो रूट

>> 23 – डॉन ब्रैडमैन

>> 23 – मैथ्यू हेडन

>> 22 – जैक्स कैलिस

>> 21 – केन विलियमसन

>> 21 – स्टीव स्मिथ

>> 20 – सचिन तेंदुलकर

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ग्राहकों की चांदी! ओला से लेकर टीवीएस तक दे रहे महादिवाली ऑफर

इस बार फेस्टिव सीजन में गाड़ियों पर काफी अच्छा डिस्काउंट मिल रहा है। इस महीने अगर आप एक नया इलेक्ट्रिक स्कूटर ख़रीदने की सोच रहे हैं तो आपको काफी फायदा होने वाला है। इस दिवाली ओला (OLA), एथर (Ather), हीरो विडा (Hero Vida) और टीवीएस (TVS) समेत कई इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल (EV) ब्रांड्स अपने स्कूटरों पर काफी अच्छे ऑफर्स दे कर रही हैं। जिसमे ग्राहक 30,000 रुपये तक की बचत कर सकते है।

बजाज ऑटो में अपने प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर चेतक पर तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य में ग्राहकों के लिए दिवाली ऑफर पेश किया है। ऑफ़र के तहत 20,000 रुपये तक की बचत की जा सकती है। सेल्स की बात करें तो बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर पिछले महीने दूसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला स्कूटर रहा है। इस फेस्टिव सीजन में टीवीएस मोटर ने भी अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर iQube पर काफी अच्छा ऑफर पेश किया है। इस महीने अगर आप इस स्कूटर को खरीदते हैं तो आप पूरे 30,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। यह एक सेफ और बेहतरीन स्कूटर है। iQube की कीमत 84,999 रुपये से शुरू होती है।

ओला दे रही ज्यादा फयदा, वही दूसरी कम्पनिया भी पीछे नहीं

वही बात अगर एथर एनर्जी की करे तो इस महीने एथर एनर्जी ने अपने 450X और 450X Apex इलेक्ट्रिक स्कूटर पर 25,000 रुपये तक की बचत का ऑफर दिया है। इस स्कूटर की बिक्री की काफी अच्छी है। यह देश का सबसे भरोसेमंद स्कूटर है। पिछले महीने 12000 से ज्यादा लोगों ने इसे खरीदा है। एथर इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 1.40 लाख रुपये से शुरू होती है। हीरो मोटोकॉर्प के ईवी ब्रैंड Vida V1 प्लस और V1 Pro इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने पर आप पूरे 29,000 रुपये तक बचा सकते हैं। डिजाइन और फीचर्स के मामले में यह स्कूटर काफी अच्छा है।

लेकिन अब यह किफायती दाम में उपलब्ध है अब इसकी कीमत 1.03 लाख रुपये से शुरू होती है। फेस्टिव सीजन पर ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर ने इस महीने अपने पॉपुलर स्कूटर S1 X के दाम 74,999 रुपये से घटाकर 49,999 रुपये कर दिए हैं। यानी यह अब तक की बेस्ट डील मानी जा रही है जिसमें सीधा फायदा ग्राहकों को ही होगा।

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पीएम मोदी ने फिर ललकारा: कांग्रेस के जातिवाद का किया पर्दाफाश

पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हरियाणा के चुनाव नतीजे देश के मूड को दर्शाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस का एजेंडा नफरत और ज़हर फैलाना है, वोटों के चक्कर में कांग्रेस हिन्दुओं को बांटना चाहती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सनातन से नफरत करती है क्योंकि इसमें उसको वोटों का फायदा होता दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि गांधी जी ने आजादी के बाद कहा था कांग्रेस को अब खत्म हो जाना चाहिए। कांग्रेस तो खत्म नहीं हुई लेकिन अब देश को खत्म करने की साजिश में जुटी है। पीएम मोदी का हमला कल से और ज्यादा करारा था। पीएम मोदी ने कहा कि हरियाणा के लोगों ने कांग्रेस को आइना दिखा दिया। उन्होने कहा कि कांग्रेस का चुनावी फॉर्मूला है, मुसलमानों को डराओ और हिन्दुओं को बांटों।

कांग्रेस मुस्लिम जातियों की बात नहीं करती – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम जातियों की बात नहीं करती क्योंकि इससे उसके वोटबैंक के बिखरने का खतरा होता है लेकिन हिन्दुओं को जातियों में बांटती है क्योंकि हिन्दुओं की एकजुटता से कांग्रेस को डर लगता है। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस समाज में ज़हर घोलने वाली जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टी बन गई है और ये बात अब देश समझ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के तेवर, उनकी आवाज़ और उनके अंदाज़ में एक बार फिर पुरानी खनक दिखाई दी। ऐसा लगा जैसे प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास अब बहुत ऊंचाई पर है। पीएम मोदी ने आज हर उस सवाल का जवाब दिया जो लोकसभा चुनाव में कम सीटें आने के बाद उठाए गए थे। पीएम मोदी ने जता दिया कि न तो पीएम मोदी की लोकप्रियता कम हुई है, न देश का मूड बदला है और न ही कांग्रेस बीजेपी को जीतने से रोक पाई है।

एंटी – मोदी मोर्चे का आत्मविश्वास हिल गया

पीएम मोदी के आज के भाषण का दूसरा हिस्सा लोगों को ये बताने के लिए था कि कांग्रेस मुसलमानों के वोट पाने के लिए हिंदुओं को आपस में बांटती है। ये लोकसभा चुनाव में हिंदू वोटों के जातियों में बंटने के संदर्भ में था लेकिन आज लगा कि अब मोदी आश्वस्त हैं, कि काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती। हरियाणा में बीजेपी को सब वर्गों के वोट मिले और इससे बीजेपी में एक नया विश्वास जागृत हुआ है और एंटी-मोदी मोर्चे का आत्मविश्वास हिल गया है।

इसका असर महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र में कांग्रेस लोकसभा चुनाव नतीजों के आधार पर ज्यादा सीटों पर दावा ठोंक रही थी, लेकिन हरियाणा के चुनाव नतीजों ने बाजी पलट दी। कांग्रेस की सौदेबाजी की शक्ति खत्म हो गई। अब उद्धव ठाकरे इस बात का दबाव बना रहे हैं कि उन्हें महाविकास अघाड़ी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया जाए, चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाए।

अलायन्स का फायदा सपा को कम कांग्रेस को ज्यादा

यूपी में अखिलेश यादव ने 10 विधानसभा उपचुनावों में 6 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का एकतरफा ऐलान कर दिया। अखिलेश यादव को ये बात तो लोकसभा चुनाव के वक्त ही समझ आ गई थी कि उत्तर प्रदेश में अलायन्स का फायदा समाजवादी पार्टी को कम कांग्रेस को ज्यादा हुआ है। मध्य प्रदेश और हरियाणा में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को एक भी सीट नहीं दी। अखिलेश यादव कांग्रेस को जवाब तो देना चाहते थे, वो सही मौके के इंतजार में थे। हरियाणा के चुनाव नतीजों ने मौका दे दिया और अखिलेश ने उसे लपक भी लिया है।

विधानसभा चुनाव में कोई गठबंधन नहीं – आप

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने ऐलान कर दिया कि विधानसभा चुनाव में कोई गठबंधन नहीं होगा। वैसे हकीकत ये है कि अरविन्द केजरीवाल हरियाणा में कांग्रेस की मदद से पैर जमाना चाहते थे लेकिन कांग्रेस को लग रहा था कि हवा उसके पक्ष में हैं, इसलिए कांग्रेस ने आखिरी वक्त तक केजरीवाल को लटकाए रखा और ऐन मौके पर अलायन्स से इंकार कर दिया। नाराज़ केजरीवाल ने सभी नब्बे सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। केजरीवाल का तो खाता भी नहीं खुला, लेकिन कांग्रेस का सत्ता में लौटने का सपना टूट गया।

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रतन टाटा कर गए सबकी आंखें नम, अंतिम दर्शन करने उमड़ा जनसैलाब

भारत के मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का निधन हो गया। करोड़ों देशवासियों की आखें नम कर रतन टाटा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। रतन टाटा ने बुधवार की रात को मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली, वह 86 साल के थे। अब उनके आखिरी सफर की तैयारी हो रही है। अभी एनसीपीए ग्राउंड पर रतन टाटा को नम आखों से विदाई दी जा रही है। उनके अंतिम दर्शन को भीड़ उमड़ी है और हर सेक्टर के दिग्गज उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित कर रहे हैं। अमित शाह ने एनसीपीए ग्राउंड पहुंच कर श्रद्धांजलि दी।

उनका पार्थिव शरीर तिरंगे से लपेट कर दर्शन के लिए रखा गया है। शाम चार बजे तक उनका अंतिम दर्शन किया जा सकता है। राष्ट्रपति और पीएम मोदी समेत कई दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है। रतन टाटा के लिए झारखंड और महाराष्ट्र सरकार ने एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। रतन टाटा के निधन के बाद शिवसेना ने उनके लिए भारत रत्न की मांग की है। शिवसेना नेता राहुल कनाल ने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वे केंद्र सरकार से रतन टाटा के नाम को भारत रत्न पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करें।

वही उनके निधन के साथ ही उनके लिए भारत रत्न की मांग तेज हो गई है। इस बीच शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्‍ट्र कैबिनेट ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से दिवंगत रतन टाटा को सम्मानित करने का केंद्र से आग्रह करने का प्रस्ताव पारित किया है।

सिमी ग्रेवाल ने रतन टाटा के निधन पर बयां किया दर्द

एक्ट्रेस सिमी ग्रेवाल ने रतन टाटा के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने इसे अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा विश्वास करना मुश्किल है। सिमी ग्रेवाल और रतन टाटा की दोस्ती गहरी थी और इसका अंदाजा सिमी के सोशल पोस्ट से हो जाता है। कम शब्दों में उन्होंने दिल का दर्द जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा है – वो कह रहे हैं तुम नहीं रहे…विश्वास करना मुश्किल है…बहुत मुश्किल, अलविदा में दोस्त रतन टाटा।

रतन टाटा की विरासत हमारे लिए प्रेरणा: अमित शाह

अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान रतन टाटा के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा, ‘कल श्री रतन टाटा का निधन हुआ है। मैं रतन टाटा को श्रद्धांजलि देता हूं। रतन टाटा के साथ मेरा गहरा परिचय रहा है। टाटा समूह के उद्योगों को रतन टाटा ने धैर्यपूर्वक अध्यन किया और नई उचाइयों पर वे ले गए। रतन टाटा ने देश के सारे कायदे कानून का पालन किया और अपने उद्योग समूह का प्रमुख स्थान बनाया। उन्होंने अपने समूह से सोशल वर्क किया। रतन टाटा नहीं हैं लेकिन जो विरासत उन्होंने छोड़ी है वो प्रेरणा है।

वह सच्चे विजनरी व्यक्ति थे – आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रतन टाटा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा, ‘रतन टाटा के बारे में दो चीजें सबसे अलग दिखती हैं। पहला, वह एक सच्चे विजनरी व्यक्ति थे। दूसरा, वह कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नैतिकता को बहुत मानते थे। मुझे लगता है कि जब भी आधुनिक भारत का आर्थिक इतिहास लिखा जाएगा, तो मुझे पूरा यकीन है कि उनकी उपलब्धियों का वर्णन करने के लिए एक पूरी किताब भी काफी नहीं होगी… भारत के सच्चे सपूत और एक असाधारण व्यक्तित्व के इंसान थे। उनकी आत्मा को शांति मिले।’

एक युग का हुआ अंत – अमिताभ बच्चन

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने गुरुवार को रतन टाटा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टाटा के निधन से एक युग का अंत हो गया। अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘अभी रतन टाटा के निधन के बारे में पता चला… मैं बहुत देर तक काम करता रहा। एक युग समाप्त हो गया है। एक अत्यंत सम्मानित, विनम्र लेकिन दूरदर्शी नेता, जिनकी दृष्टि और संकल्प अद्वितीय थे।’ रतन टाटा के साथ बिताए गए विशेष क्षणों को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि हमने उनके साथ कई शानदार पल बिताए, कई अभियानों के दौरान हम साथ-साथ शामिल रहे।

आईये जानते है टाटा नाम केवल उद्योग की ऊंचाई के लिए ही विख्यात नहीं है बल्कि उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी शिद्दत से महसूस किया है और उसका निर्वाह भी, टाटा औद्योगिक उन्नति के साथ-साथ प्रकृति को भी यथावत् बनाये रखने के लिए जाने जाते थे।

टाटाओं की लोकप्रियता आम-जन के बीच

देश के अधिकतर औद्योगिक परिवार अपनी इन जिम्मेदारियों को पूरा करने से बचते रहे हैं, पर टाटा समूह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने से कभी नहीं कतराया। इसकी वजह टाटा समूह के चेयरमैन चाहे जेआरडी टाटा रहे हों या नवल टाटा अथवा रतन टाटा, सबके लिए देश और समाज हित ऊपर था। भले ही सामाजिक जिम्मेदारियां उठाने के चलते उनको निजी क्षति पहुंची हो। यही कारण रहा कि इन सभी टाटाओं की छवि आम जन मानस में बहुत शानदार रही है। बुधवार की रात उनके निधन की खबर आते ही पूरा देश स्तब्ध रह गया।

रतन टाटा ने मार्च 1990 में टाटा समूह (टाटा संस) की कमान अपने हाथों में ली थी और दिसंबर 2012 तक वे इसके चेयरमैन रहे। लगभग 32 वर्षों में उन्होंने टाटा के डूबते जा रहे जहाज को फिर से नई ऊंचाई दी। विश्व प्रसिद्ध जगुआर कंपनी को टाटा संस ने 2008 में खरीद कर तहलका मचा दिया था।

इंडिका ने पलट दिया बाजार

रतन टाटा के चेयरमैन बनते ही टाटा ने कारों की दुनिया में उतरना शुरू किया। पहले टाटा सियरा बनाई, यह व्यावसायिक कार एक पूरी फ़ैमिली कार थी। जिसका लुक SUV जैसा था। एक परिवार के पांच-छह लोग पूरे आराम से लंबी दूरियों के लिए निकल सकते थे। ऐसा लगता था, मानो पूरे कमरे के साथ सफर कर रहे हैं। इसके बाद टाटा सूमो को ला कर टाटा मोटर्स ने एक और क्रांति की. लेकिन 1998 में जैसे ही टाटा इंडिका आई, कार मार्केट में तहलका मच गया। तब तक इतने कम दामों में इतनी बड़ी गाड़ी उपलब्ध नहीं थी। मारुति की कारों में कहा जाता था कि मारुति सस्ती है और माईलेज भी खूब देती है किंतु चेसिस के मामले में कमजोर, इसके विपरीत टाटा मोटर्स की ख्याति लोहा-लाट कार बनाने की थी। अंबेसडर की तुलना में छोटी और स्पेस उतना ही तथा सस्ती भी, इसलिए उसने मार्केट ले लिया।

ग़रीबों को कार देने का वायदा

उस समय सबको लग रहा था कि जगुआर में दांव लगा कर टाटा ने अपने पांवों पर कुल्हाड़ी मार ली। यह कंपनी बुरी तरह घाटे में चल रही थी, ऐसे में रतन टाटा ने जगुआर लैंड रोवर को खरीद लिया। आज यह कंपनी विश्व की सिरमौर है और उसको फिर से पहले जैसी प्रतिष्ठा मिल गई। इसके पहले सन् 2000 में टाटा संस से टेटली (ब्रिटिश चाय कंपनी) को खरीद था और 2007 में कोरस (योरोप की स्टील कंपनी) को, ये सब रतन टाटा की दूर-दृष्टि के चलते ही संभव हुआ। उनकी कोई कंपनी घाटे में नहीं गई।

टिस्को और टेल्को टाटा संस की दो बड़ी कंपनियां हैं। पूरा टाटा समूह इन्हीं के बूते टिका है, टिस्को के ज़रिए स्टील के क्षेत्र में टाटा बादशाह हैं तो टेल्को के माध्यम से ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में, रतन टाटा ने इंडिका से ले कर नैनो तक कई कार कंपनियाँ खड़ी कीं। जिनका मकसद था, देश के मिडल क्लास और ग़रीबों को सस्ती क़ीमत पर कार उपलब्ध कराना।

जब नैनों से लगा झटका

यह रतन टाटा की बड़ी सफलता थी। इंडिका मिडिल क्लास की चहेती गाड़ी बन गई। फिर रतन टाटा गरीबों के लिए और सस्ती कर नैनों बनाने की घोषणा की। उसका शुरुआती मूल्य एक लाख बताया गया। तब तक मारुति 800 नॉन एसी कार की कीमत भी ढाई लाख से अधिक थी, पर यह कार रतन टाटा के लिए शुभ नहीं साबित हुई। एक तो इसके निर्माण के लिए पश्चिम बंगाल के सिंगूर इलाके को चुना गया। टाटा मोटर्स को इस कार को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के CPM मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने वायदा भी कर दिया। बुद्धदेब बाबू चाहते थे कि पश्चिम बंगाल में उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि पिछले 30 वर्ष की CPM सरकार पर लगा धब्बा मिट जाए कि CPM उद्योग विरोधी है। परंतु सिंगूर के किसानों ने अपनी ज़मीन देने से मना कर दिया। किसानों ने विरोध शुरू कर दिया।

जगुआर ने टाटा को उबारा

किसानों के विरोध को TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हवा दी, विरोध इस कदर बढ़ गया कि खुद टाटा समूह पीछे हट गया और टाटा नैनो का कारख़ाना गुजरात ले जाया गया। यह रतन टाटा के लिए बहुत बड़ा धब्बा था, टाटा समूह के लोग ही इस सबसे सस्ती कार का विरोध करने लगे। खरीददारों को लगा कि सस्ती कार खरीदने से उनकी छवि खराब होगी क्योंकि लखटकिया कार खरीदने के चलते उन्हें कार वालों के बीच बेचारा कहा जाएगा।

कार 2009 में बाजार में आ तो गई, लेकिन उसे वैसे खरीदार नहीं मिले जैसे कि टाटा इंडिका और विस्टा इंडिका के वक्त मिले थे। शेयर बाजार में टाटा मोटर्स के शेयर भी गिरे। रतन टाटा भी हताश हो गए, लेकिन इसी बीच रतन टाटा ने जगुआर लैंड रोवर के काफ़ी शेयर ख़रीद कर फिर सबको चौंका दिया। उनके विरोधी भी औंधे मुंह गिरे।

लेकिन अब सबसे बड़ी और सबकी दुविधा

क्या पारसी समुदाय के पूर्व अध्यक्ष साईरस मिस्त्री को लाया जाएगा या रतन टाटा के सौतेले भाई नोविल टाटा अध्यक्ष बनेंगे ? या फिर एन. चंद्रशेखर अध्यक्ष बने रहेंगे। ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब पाने को हर आदमी लालायित है।

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कोलकाता रेप मर्डर केस : सीबीआई की चार्जशीट में हुआ अहम खुलासा

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या और रेप मामले में सीबीआई की चार्जशीट में कई अहम बातें सामने आई हैं। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, पीड़िता का पोस्टमार्टम हत्या के 12 घंटे बाद शाम 6:10 बजे हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, गला दबाने और दम घुटने से पीड़िता की मौत हुई। चार्जशीट में कहा गया है कि पीड़िता के साथ जबरन रेप हुआ। आरोपी के शरीर पर चोट के 5 निशान मिले थे। सीसीटीवी फुटेज के हिसाब से आरोपी 9 अगस्त की सुबह 4:03 बजे सेमिनार हाल में घुसा और 4:32 बजे बाहर निकला। रॉय की जींस और जूतों पर पीड़ित का खून पाया गया। अपराध स्थल पर मिले उसके बाल और ब्लू टूथ कान का टुकड़ा उसके मोबाइल फोन के साथ सिंक हो गया। लार/वीर्य/छोटे बाल/डीएनए विश्लेषण से पता चला कि संजय रॉय आरोपी है।

आरजी कर अस्पताल में क्या हुआ था ?

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ नाइट शिफ्ट के दौरान दुष्कर्म हुआ था और इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई थी। आरोपी पश्चिम बंगाल पुलिस का वॉलंटियर था, जो अस्पताल आता-जाता रहता था। घटना वाले दिन वह नशे की हालत में अस्पताल में आया था। इससे पहले वह रेड लाइट एरिया में भी गया था। अस्पताल में उसने सेमिनार हॉल में वारदात को अंजाम दिया और पुलिस स्टेशन जाकर सो गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसने पूछताछ में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया।

हाल ही में सीबीआई ने दाखिल की थी चार्जशीट

हाल ही में आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट आरोपी संजय रॉय के खिलाफ कलकता की सियालदह कोर्ट में दुष्कर्म और हत्या के मामले में दायर की गई थी। 200 से ज्यादा पेज की चार्जशीट में 200 लोगों के बयान हैं। अहम बात यह है कि इसमें सिर्फ दुष्कर्म और हत्या की बात कही गई है। चार्जशीट में सामूहिक दुष्कर्म की बात नहीं कही गई है। इससे पहले जब इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, तब कई तरह की बातें सामने आई थीं। कई नेताओं ने भी यह दावा किया था कि महिला के साथ हुए दुष्कर्म में एक से ज्यादा लोग शामिल थे। उन्हें बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने झूठ बोला और संजय रॉय घटना के समय अकेला नहीं था।

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टाटा नेक्सॉन से लेकर सफारी पर लाखों का डिस्काउंट, जानें क्या है ऑफर

टाटा मोटर्स की बिक्री में लगातार गिरावट देखने को मिले रही है। महिंद्रा के हाथों कार बाजार में अपना तीसरा स्थान खोने के बाद, टाटा मोटर्स ने अक्टूबर में अपनी स्थिति फिर से मजबूत करने को उत्सुक है। बिक्री में सुधार लाने में मदद के लिए, कंपनी ग्राहकों को लुभाने के लिए अपने पूरे पोर्टफोलियो पर बड़े डिस्काउंट और ऑफर पेश किया है। दरअसल कई डीलरशिप पर अभी भी साल 2023 के काफी मॉडल उपलब्ध हैं, जिन पर ज्यादा डिस्काउंट देकर क्लियर किया जा रहा है। ऑटो कार इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस समय टाटा के पास काफी पुराना स्टॉक शो-रूम में पड़ा धूल खा रहा है।

आइये जानते हैं कि मॉडल पर आपको होगी कितनी बचत।

टाटा नेक्सॉन पर हो रही इतनी बचत

वही टाटा मोटर्स अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी नेक्सॉन पर इस महीने पूरे 95,000 रुपये तक की बचत का मौका दे रही है। यह डिस्काउंट प्री-फेसलिफ्ट पेट्रोल मॉडल पर है। जबकि डीजल मॉडल पर 80,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। लेकिन इस साल के नए मॉडल पर 40,000 रुपये तक की बचत की जा सकती है। इस समय नेक्सॉन की कीमत 7.99 लाख रुपये से शुरू होती है। इसमें 1.2L पेट्रोल और 1.5L डीजल इंजन ऑप्शन मिलते हैं।

टाटा सफारी के नए मॉडल पर भी बचत

इस महीने टाटा सफारी पर आप पूरे 1.33 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं। यह डिस्काउंट प्री-फेसलिफ्ट पेट्रोल मॉडल पर उपलब्ध है। जबकि नए मॉडल पर 25,000 रुपये तक की बचत की जा सकती है। टाटा सफरी की कीमत 15.49 लाख रुपये से लेकर 26.79 लाख रुपये तक जाती है। सफारी का सीधा मुकाबला महिंद्रा की एसयूवी 700 और एमजी हेक्टर प्लस से है।

टाटा हैरियर का पुराना स्टॉक रखा हुआ है

टाटा मोटर्स की कुछ डीलरशिप पर अभी भी हैरियर का पुराना स्टॉक (MY2023 inventory) पड़ा हुआ है, जो अभी तक क्लियर नही हुआ है। ऐसे में कंपनी पुराने मॉडल्स को क्लियर करने के लिए काफी बड़ा डिस्काउंट ऑफर कर रही है। टाटा हैरियर के प्री-फेसलिफ्ट मॉडल पर 1.33 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। जबकि नए मॉडल पर 25,000 रुपये तक की बचत की जा सकती है। हैरियर में 2.0 लीटर का डीजल इंजन लगा है, जो 170hp की पावर जनरेट करता है। इस गाड़ी की कीमत 14.99 लाख रुपये से लेकर 25.89 लाख रुपये तक जाती है।

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रेलवे कर्मचारियों को बोनस में कितने रुपये मिलते हैं, जानें कब मिलेगा बोनस

भारत में त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। अभी शारदीय नवरात्रि चल रही है, जिसके ठीक बाद दशहरा का त्योहार आ जाएगा। दशहरा के बाद दीपावली और फिर छठ महापर्व भी मनाया जाएगा। भारत में ये वो समय होता है जब देश का प्रत्येक नौकरीपेशा व्यक्ति अपनी-अपनी कंपनी से बेहतर बोनस और दिवाली गिफ्ट की उम्मीद रखता है। इसी सिलसिले में भारतीय रेल इस बार भी अपने कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस देने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की एक अहम मीटिंग में रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के बोनस को मंजूरी दी गई थी।

कर्मचारियों को कितने रुपये का बोनस मिलेगा

रेल मंत्रालय के मुताबिक कर्मचारियों को दिए जाने वाले बोनस के रूप में अधिकतम 17,951 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि रेलवे के कर्मचारियों को बोनस के रूप से ज्यादा से ज्यादा 17,951 रुपये मिलेंगे। रेलवे के सभी कर्मचारियों को, चाहे वह किसी भी पद पर हो, सभी को एक समान बोनस दिया जाता है।

रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिनों का बोनस

आमतौर पर रेल मंत्रालय दीपावली से पहले ही अपने कर्मचारियों को बोनस का भुगतान कर देती है। रेल कर्मचारियों को दुर्गा पूजा या दशहरा की छुट्टी से पहले ही बोनस दे दिया जाता है। हर बार की तरह, इस बार भी रेल मंत्रालय अपने कर्मचारियों को दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टी से पहले ही बोनस का भुगतान कर देगी। रेल मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस साल रेलवे के कुल 11,72,240 कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस दिया जाएगा। ये एक प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) है, जो कर्मचारियों को प्रोडक्टिविटी के आधार पर दिया जाएगा। रेल मंत्रालय अपने अलग-अलग क्लास के 11.72 लाख कर्मचारियों में कुल 2029 करोड़ रुपये का बोनस बांटेगी।

पहले ही मिल गया बोनस

उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि कैबिनेट की घोषणा के तुरंत बाद कर्मचारियों को बोनस का भुगतान कर दिया गया था। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपने कुल 46,087 नॉन-गैजेटेड कर्मचारियों को कुल 78.19 करोड़ रुपये के बोनस का भुगतान किया है।

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एनएसडीएल समेत ये 3 कंपनियां लाएंगी आईपीओ, मार्केट में बढ़ेगी सरगर्मी

एक बार फिर से आईपीओ मार्केट में सरगर्मी बढ़ने वाली है। पूंजी बाजार नियामक से कई कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी मिली है। इसके चलते आने वाले दिनों में कई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन खुलेंगे। आपको बता दें कि अग्रणी डिपॉजिटरी नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को यह जानकारी दी। एनएसडीएल के अलावा, स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग टेक्नोलॉजी और जिंका लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस को भी आईपीओ के जरिये धन जुटाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है।

दो कंपनियां जुटाएगी इतने करोड़

स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग टेक्नोलॉजी और जिंका लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस को क्रमशः एक और तीन अक्टूबर को सेबी से आईपीओ के लिए मंजूरी मिली है। दोनों कंपनियों ने जुलाई 2024 में सेबी के समक्ष आईपीओ के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे। हैदराबाद स्थित स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग टेक्नोलॉजी के 600 करोड़ रुपये के आईपीओ में 250 करोड़ रुपये तक के नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें 1.84 करोड़ शेयरों की बिक्री पेशकश भी शामिल है। इससे कुल 350 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। बेंगलुरु स्थित जिंका लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस का आईपीओ 550 करोड़ रुपये के नए शेयरों की पेशकश और प्रवर्तकों तथा निवेशक शेयरधारकों की 2.16 करोड़ शेयर की बिक्री पेशकश का संयोजन है।

एनएसडीएल में ये बैंक बेचेंगे अपने शेयर

सेबी के समक्ष दाखिल किए गए आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, एनएसडीएल का प्रस्तावित आईपीओ एनएसई, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एचडीएफसी बैंक सहित शेयरधारकों द्वारा 5.72 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित है। इसके लिए कंपनी को 30 सितंबर को सेबी की मंजूरी मिली। बिक्री पेशकश के तहत, आईडीबीआई बैंक 2.22 करोड़ शेयर, एनएसई 1.80 करोड़ शेयर, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 56.25 लाख शेयर और भारतीय स्टेट बैंक तथा एचडीएफसी बैंक 40 – 40 लाख शेयर बेचेंगे।

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एआई द्वारा कृषि के क्षेत्र में रोजगार और स्थिरता का आखिर क्या है भविष्य ?

कृषि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। दुनिया की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे खाद्य और रोज़गार की मांग बढ़ रही है। नतीजतन, खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए स्वचालित तरीके पेश किए जा रहे हैं क्योंकि किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक तरीके इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हैं, साथ ही दुनिया भर में अरबों लोगों को रोज़गार के अवसर भी प्रदान करते हैं। श्रम की कमी, सख्त कानून, बढ़ती वैश्विक आबादी और किसानों की घटती संख्या के कारण किसान नए समाधान तलाशने को मजबूर हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डेटा और एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी तकनीकें लगभग हर उद्योग में पैठ बना रही हैं। इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए बात अगर यहाँ सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की जाये तो एआई द्वारा उत्पन्न अनिश्चितता के विपरीत, कृषि क्षेत्र भारत के भविष्य के रोजगार परिदृश्य के लिए एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है। दुनिया की सबसे बड़ी कृषि अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में, भारत में अपने कृषि आधार को एक संपन्न, सम्मानित उद्योग में बदलने की क्षमता है जो रोजगार सृजन में अन्य अग्रणी क्षेत्रों को पीछे छोड़ सकता है।

कृषि विश्व स्तर पर सबसे सम्मानित उद्योगों में से एक

वही अन्य उद्योगों के विपरीत, कृषि रोजगार सुरक्षा प्रदान करती है जिसे एआई द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। आखिरकार, एआई फसलों की खेती नहीं कर सकता, पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकता या अपने आप खाद्य सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता। अब आने वाले दशकों में, कृषि विश्व स्तर पर सबसे सम्मानित उद्योगों में से एक बन सकती है। जिसमें किसान प्रमुख पेशेवरों के रूप में उभरेंगे जो न केवल राष्ट्रों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। बल्कि संधारणीय प्रथाओं के माध्यम से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला भी करते हैं। COVID-19 महामारी ने खाद्य सुरक्षा के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित किया, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों ने मजबूत, आत्मनिर्भर कृषि प्रणालियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

हो रहा एआई तकनीक का उपयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नामक अध्ययन का एक अंतःविषय क्षेत्र रोबोट में मानव बुद्धिमत्ता को दोहराने का लक्ष्य रखता है जो सीखने और समस्या-समाधान सहित मानव अनुभूति और व्यवहारों से मिलता जुलता हो। अनुसंधान वैज्ञानिक और विस्तार विशेषज्ञ अब कृषि उत्पादकता में समस्याओं के समाधान के लिए एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। एआई तकनीक किसानों को उपयुक्त फसल प्रकारों को चुनने, बेहतर मिट्टी और पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने, कीटों और बीमारियों का प्रबंधन करने, फसल उत्पादन का अनुमान लगाने और कमोडिटी की कीमतों का पूर्वानुमान लगाने में सहायता करके पैदावार बढ़ाने में मदद कर सकती है।

एआई कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए डीप लर्निंग, रोबोट, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, इमेज प्रोसेसिंग, आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क , वायरलेस सेंसर नेटवर्क (WSN), मशीन लर्निंग और अन्य अत्याधुनिक तरीकों का उपयोग करता है। एआई तकनीकें अब किसानों को उनके खेतों से प्राप्त कई वस्तुओं, जैसे मौसम, तापमान, पानी के उपयोग या मिट्टी की स्थिति की वास्तविक समय की निगरानी में सहायता कर सकती हैं, ताकि उनके निर्णयों को बेहतर ढंग से सूचित किया जा सके।

निष्कर्ष: समाधान के रूप में कृषि

निष्कर्ष के तौर पर, जबकि एआई भारत के रोजगार परिदृश्य के लिए अवसर और खतरे दोनों प्रदान करता है। कृषि एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आती है जो दीर्घकालिक, स्थायी रोजगार प्रदान कर सकता है। अब समय आ गया है कि भारत के युवा अपना ध्यान कृषि की ओर मोड़ें और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा और नौकरी की सुरक्षा बनाने का मार्ग प्रशस्त करें। किसान दुनिया के सबसे सम्मानित पेशेवरों में से एक के रूप में उभरेंगे और रोजगार सृजन के मामले में कृषि क्षेत्र अन्य उद्योगों से आगे निकल जाएगा।

भारत के कार्यबल का भविष्य शहरों के शीशे के टावरों में नहीं बल्कि देश को बनाए रखने वाले खेतों और फार्मों में निहित हो सकता है। इस वास्तविकता को अपनाने और भारत की अर्थव्यवस्था और उसके लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कृषि में निवेश करने का समय आ गया है।

कृषि में एआई के उपयोग की कमियां

कृषि में एआई का उपयोग करने की मुख्य कमियाँ यह हैं कि सिस्टम को लागू करने में उच्च प्रारंभिक लागत आ सकती है, कुछ नौकरियाँ खत्म हो सकती हैं और यह 100% विश्वसनीय नहीं हो सकता है। इसलिए लोगों को एआई का उपयोग करते समय थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए और इस पर अत्यधिक निर्भर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें कुछ त्रुटि हो सकती है।

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रुझानों में हरियाणा में कमल की हैट्रिक, J&K में कांग्रेस गठबंधन की सरकार

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। हरियाणा के रुझानों और नतीजों में भारतीय जनता पार्टी की लगातार तीसरी बार सरकार बन रही है। वहीं जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के रुझानों में बहुमत मिल चुका है। यहां बीजेपी और पीडीपी पीछे चल रही है। दोनों ही राज्यों में 90-90 सीटों के लिए वोटिंग हुई थी। जम्मू-कश्मीर में तीन फेज जबकि हरियाणा में एक फेज में वोटिंग हुई थी। हरियाणा में सत्तारूढ़ बीजेपी पहले भी यह भरोसा जता चुकी थी कि वह लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए सत्ता बरकरार रखने में कामयाब होगी। मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

भूपेंद्र हुड्डा ने किया जीत का दावा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, “कांग्रेस को बहुमत मिल रहा है। हमने कई सीटें जीती हैं लेकिन उन्हें अपडेट नहीं किया गया है। हम कई सीटों पर आगे चल रहे हैं लेकिन इसे अपडेट नहीं किया जा रहा है। कई जगहों पर मतगणना रोक दी गई है। मैं अपने साथियों से अनुरोध करता हूं कि वे डटे रहें, हमें बहुमत मिल रहा है।

रेणुका चौधरी ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में जीत का किया दावा

कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी ने जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में कांग्रेस की जीत का दावा किया। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के रुझानों पर कहा, “यह तो होना ही था, जो बात राहुल गांधी ने कही, जो वादे हमने किए उसके बाद यह तो होना ही था, हम वहां जीत रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है, हरियाणा में हमने मेहनत की है, हमें उम्मीद है कि हमारी सरकार बनेगी।

हरियाणा में चौटाला परिवार को बड़ा झटका

चौटाला परिवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। चौटाला परिवार से जुड़े कई लोग चुनाव हार गए हैं। अभय चौटाला, दुष्यंत चौटाला, सुनैना चौटाला, रंजीत चौटाला, दिग्वजीय चौटाला हार गए। अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला रानिया विधानसभा से चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। आदित्य चौटाला अभी आगे चल रहे हैं।

उमर अब्दुल्ला बनेंगे J&K के सीएम – फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “10 साल बाद लोगों ने हमें अपना जनादेश दिया है। हम अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि हम उनकी उम्मीदों पर खरे उतरें। यहां ‘पुलिस राज’ नहीं बल्कि ‘लोगों का राज’ होगा। हम जेल में बंद निर्दोष लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करेंगे। मीडिया को आजादी मिलेगी। हमें हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विश्वास पैदा करना होगा। मुझे उम्मीद है कि इंडिया गठबंधन सहयोगी यहां राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए हमारे साथ लड़ेंगे। मुझे लगता है कि उमर अब्दुल्ला सीएम बनेंगे।” हरियाणा में कांग्रेस के प्रदर्शन पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मुझे दुख है कि वे (कांग्रेस) हरियाणा में जीत नहीं पाए। मुझे लगता है कि यह उनके अंदरुनी विवादों के चलते हुआ।

जनता काम करने वालों के साथ – मनोज तिवारी

दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि मैंने सबसे कहा कि ग्राउंड की सच्चाई कुछ अलग है। जो लोग टी.वी चैनलों या लिविंग रूम में बैठकर बातें कर रहे हैं उनकी बातों से जमीनी हकीकत मेल नहीं खाती है। हरियाणा के अन्य क्षेत्रों में मैंने ऐसा सैलाब देखा कि अन्य लोगों की बातों से मैं कंफ्यूज्ड हो जाता था। अभी रुझान आ रहा है, मैं अभी तो कुछ नहीं कहना चाहता हूं, लेकिन हमें ऐसे नतीजे की रुपरेखा पहले से ही दिखाई दे रही थी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि जनता काम करने वालों, सच्चाई के साथ चलने वालों के साथ चलने के लिए तैयार है।

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नई रेनॉल्ट डस्टर 7 सीटर जल्द होगी लॉन्च, कीमत हुई लीक

रेनॉल्ट ग्रुप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह 2024 पेरिस मोटर शो में उपस्थित होगा। रेनॉल्ट, डेसिया, अल्पाइन, मोबिलाइज़ और रेनॉल्ट PRO+ सहित समूह के सभी ब्रांड इवेंट में नई कारों को पेश किया जाएगा। ग्रुप ने 7 वर्ल्ड प्रीमियर आयोजित करने की घोषणा की है और 2 कॉन्सेप्ट कारें पेरिस मोटर शो में डेब्यू करेंगी। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में डस्टर (Duster) है जिसका काफी समय से इंतजार किया जा रहा है।

7 सीटर डस्टर

इस बार खास बात ये है कि नई रेनॉल्ट डस्टर अब पहले की तुलना में बड़ी होगी। इसे C सेगमेंट में लाया जाएगा। 2024 पेरिस मोटर शो (Paris Motor Show) में पहली बार इसे पेश किया जाएगा। आपको बता दें कि रेनॉल्ट के डेसिया ब्रांड ने नई एसयूवी के कॉन्सेप्ट मॉडल को शोकेस किया था। 3rd जनरेशन डस्टर और इसके 7 सीटर मॉडल को जल्दी ही देखने को मिलेगा।

नई डस्टर का मुकाबला होगा अर्टिगा से

भारत में 7 सीटर मारुती अर्टिगा और किआ कैरेंस काफी पसंद की जाती हैं। है। ऐसा माना जा रहा है कि कंपनी ट्रिबेर की जगह अब डस्टर को बाजार में उतार सकती है। दरअसल कंपनी ऐसा इसलिए कर सकती है क्योंकि डस्टर नाम बेहद पॉपुलर है। इस समय भारत में 7 सीटर कारों की खूब मांग है। आपको बता दें अपने समय में डस्टर बेहद लोकप्रिय एसयूवी रही है और कंपनी इस नाम को कैश करना चाहेगी।

कैसा होगा नई डस्टर का डिजाइन ?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी नई रेनॉल्ट डस्टर पर तेजी से काम कर रही है। नए मॉडल को इस साल के अंत तक या फिर अगले साल ऑटो एक्सपो 2025 तक लॉन्च किया जा सकता है। नए मॉडल में इस बार कई बड़े बदलाव देखने को मिलने वाले हैं। इसके फ्रंट में नई ग्रिल, नया बोनट और बंपर भी देखने को मिलेगा। इतना ही नहीं इसके साइड प्रोफाइल और रियर लुक को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा।

नई डस्टर में होगा हाइब्रिड इंजन

नई डस्टर के इंटीरियर को अब ज्यादा प्रीमियम बनाया जाएगा, साथ ही इसमें नए फीचर्स को भी शामिल किया जाएगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि नए मॉडल को 1.0L ,1.2L और 1.5L हाइब्रिड इंजन में उतारा जा सकता है। कंपनी इसे 10 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च कर सकती है। इसमें सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम के सतह EBD, क्रूज कंट्रोल और Level 2 ADAS को शामिल किया जाएगा। नई डस्टर 5 और 7 सीटर ऑप्शन में आएगी।

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एसबीआई में निकलेंगी 10 हजार नई नौकरियां, जाने इस योजना के बारे में….

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिलने वाला है। बैंक चालू वित्त वर्ष (2024-25) में 10,000 नए कर्मचारियों को भर्ती करने की योजना बना रहा है। बैंक यह नई भर्ती आम बैंकिंग जरूरतों और अपनी अपनी तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए करेगा। बैंक ने डिजिटल चैनल को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण निवेश किया है।

एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा, हम अपने कार्यबल को प्रौद्योगिकी पक्ष के साथ-साथ सामान्य बैंकिंग पक्ष पर भी मजबूत कर रहे हैं। हमने हाल ही में प्रवेश स्तर और थोड़े उच्चस्तर पर लगभग 1,500 टेक्नोलॉजी के जानकारों लोगों की भर्ती की घोषणा की है। उन्होंने कहा, हमारी प्रौद्योगिकी भर्ती डेटा ज्ञानिकों, डेटा आर्किटेक्ट्स, नेटवर्क संचालकों आदि जैसी विशेष नौकरियों पर भी है। हम उन्हें प्रौद्योगिकी पक्ष में विभिन्न प्रकार की नौकरियों के लिए भर्ती कर रहे हैं।

लगातार नया कौशल प्रदान कर रहे

वही एसबीआई (SBI) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा ग्राहकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं। तकनीक बदल रही है, डिजिटलीकरण को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है। इसलिए, हम सभी स्तर पर अपने कर्मचारियों को लगातार नया कौशल प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और बेहतर बैंकिंग अनुभव प्रदान करने के लिए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में विशेष कौशल विकास प्रदान करता है। जहां तक ​​नेटवर्क विस्तार की बात है, शेट्टी ने कहा कि एसबीआई चालू वित्त वर्ष में देशभर में 600 शाखाएं खोलने की योजना बना रहा है। मार्च, 2024 तक एसबीआई के पास देशभर में 22,542 शाखाओं का नेटवर्क है।

एसबीआई में इन पदों के लिए होंगी नियुक्तियां

एसबीआई लगभग 8,000 से 10,000 लोगों की नियुक्ति करेगा। इनमें आम बैंकिंग पद और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल होंगे। मार्च, 2024 तक बैंक के कुल कर्मचारियों की संख्या 2,32,296 थी। इसमें से पिछले वित्त वर्ष के अंत में 1,10,116 अधिकारी बैंक में कार्यरत थे। क्षमता निर्माण के बारे में पूछे जाने पर शेट्टी ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और बैंक ग्राहकों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा कर्मचारियों को पुनः प्रशिक्षित और उन्नत बनाता है।

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आईआरसीटीसी ने निकाला कश्मीर का सस्ता पैकेज, जानें कहां घूम सकेंगे

कश्मीर को धरती का स्वर्ग माना जाता है। हर भारतीय की एकबार यहां जाकर बर्फबारी देखने की ख्वाइश होती है। आपकी इस ख्वाइश को पूरा करने के लिए आईआरसीटीसी बढ़िया प्लान लाया है। अगर कश्मीर घुमने का प्लान है तो एक बार आईआरसीटीसी के इस विंटर स्पेशल पैकेज के बारे में भी जान लीजिए। यह टूर पैकेज 5 रातें और 6 दिन का रहेगा। इसमें आप खूबसूरत जगहों की सैर कर सकते हैं। जिसमें गुलमर्ग, पहलगाम, श्रीनगर और सोनमर्ग शामिल है। इस पैकेज का लाभ उठाने के लिए आपको आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाना होगा। ऑफिशियल साइट पर आपको पैकेज से जुड़ी तमाम जानकारी मिल जाएगी और आवेदन भी किया जा सकेगा। यह पैकेज 41 हजार से शुरू हो रहा है।

जानें कितना आएगा खर्च ?

यह सफर हैदराबाद से बाय फ्लाइट शुरू होगा। इस पैकेज के प्राइस की बात करें तो आईआरसीटीसी 5 रातों और 6 दिन के लिए आपसे अलग-अलग चार्ज करेगा। इसमें सिंगल (Single Occupancy) 43670 रुपये, डबल (Double Occupancy) 41710 रुपये , ट्रिपल (Triple Occupancy) में 41050 रुपये, चाइल्द विद बैड (Child with Bed, 5-11 Yrs) 37130 रुपये, चाइल्ट विदआउट बैड (Child Without Bed, 5-11 Yrs) 34830 रुपये और चाइल्ट विदआउट बैड (Child Without Bed-2-4 Yrs) का 27990 रुपये का खर्च आएगा।

आईआरसीटीसी प्लान
आईआरसीटीसी प्लान

कश्मीर में कहां-कहां घूम सकते हैं ?

इस पैकेज के अनुसार, आपको कश्मीर की इन चार खूबसूरत जगहों पर घूमने का मौका मिलेगा। जिसमें गुलमर्ग, पहलगाम, श्रीनगर और सोनमर्ग शामिल है। इस पैकेज में सुबह के नाश्ते और डिनर को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही फ्लाइट के दौरान भी आपको खाना मिलेगा। पैकेज में घूमने जा रहे दार्शनिक स्थलों की टिकट के प्राइस भी शामिल है। आईआरसीटीसी के इस पैकेज में आप चार रातों के लिए बढ़िया होटल ठहरेंगे और 1 रात के लिए हाउसबोट में रहने का भी मौका मिलेगा।

कैंसिल करने के नियम

अगर आप यात्रा से 21 दिन पहले बुकिंग कैंसिल करते हैं तो पैकेज से 30% शुल्क काटा जाएगा। वहीं, 21 से 15 दिनों के अंदर पहले बुकिंग कैंसिल करने पर 55% शुल्क लिया जाएगा और 14 से 8 दिन पहले कैंसिल करने पर 80% शुल्क कटेगा और 1 हफ्ते पहले बुकिंग कैंसिल होने पर कोई पैसा वापिस नहीं मिलेगा।

कैंसिलेशन प्राइस कंपनी की नीति के अनुसार है। आईआरसीटीसी के पास बिना कोई कारण बताए भी आप दौरे के लिए की गई बुकिंग को रद्द कर सकते हैं। यात्रियों को घूमने के दौरान सभी जरूरी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

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महाकुंभ के दौरान नहीं बिकेगी मांस-मदिरा, सीएम ने तैयारियों का लिया जायजा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ को लेकर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने कुंभ के लोगो का उद्घाटन की भी किया। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि अगले साल जनवरी में आयोजित होने वाले महाकुंभ के दौरान यहां मांस-मदिरा की बिक्री नहीं होगी। उन्होंने 13 अखाड़ों, खाक चौक, दंडी बाड़ा और आचार्य बाड़ा के प्रतिनिधियों के साथ महाकुंभ को लेकर एक बैठक भी की।

सीएम योगी ने लिया जायजा

इससे पहले सीएम योगी परेड स्थित हेलीपैड पर उतरने के बाद मोटर बोट से संगम नोज पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा यमुना का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद सीएम योगी ने पवित्र अक्षयवट, पातालपुरी, सरस्वती कूप और लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन किया और कुंभ के सफल आयोजन के लिए प्रार्थना की। दोपहर बाद उन्होंने भारद्वाज कोरिडोर के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने आईईआरटी सेतु का निरीक्षण करते निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के दौरान मुख्यमंत्री ने वेणीमाधव मंदिर का भी दर्शन-पूजन किया।

संतों को समाधि के लिए प्रयागराज में ही मिलेगी जमीन – सीएम योगी

वहीं प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, सीएम योगी ने बैठक में कहा कि साधु-संतों, संन्यासियों व वैरागियों सहित समस्त सनातन समाज की भावनाओं का सम्मान रखते हुए प्रयागराज की शास्त्रीय सीमा में मांस-मदिरा का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पवित्र नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सरकार के स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन साधु-संत समाज का भी सहयोग अपेक्षित है। वही सीएम योगी ने यह भी कहा कि महाकुंभ के दौरान ब्रह्मलीन होने वाले साधु-संतों की समाधि के लिए प्रयागराज में शीघ्र ही भूमि आरक्षित कर दी जाएगी।

यूपी में है गोहत्या अपराध

इसके अलावा संत समाज की ओर से गो-हत्या पर प्रतिबंध की मांग पर सीएम योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में गोहत्या अपराध है। गोहत्या के विरुद्ध उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही, राज्य सरकार सात हजार से अधिक गोवंश आश्रय स्थल का संचालन कर रही है, जहां 14 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।” सीएम योगी ने सभी संतों-संन्यासियों व आचार्यों से अनुरोध किया कि वह अपने आश्रम में तब तक किसी को प्रवास की अनुमति न दें जब तक उनका विधिवत सत्यापन न हो जाए।

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आप सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भाजपा विधायक का पकड़ा पैर

दिल्ली में बस मार्शलों की बहाली पर लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को इस मुद्दे पर जमकर बवाल हुआ। बवाल के बीच एक अलग ही नजारा देखने को मिला। दिल्ली की सीएम आतिशी बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता की कार में बैठ गईं। जबकि आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी नेता के पैर पकड़ लिए। आम आदमी पार्टी ने खुद अपने एक्स हैंडल पर ये तस्वीर पोस्ट की है और इसके बारे में बताया है।

वही आप ने अपने एक्स हैंडल पर कहा, ‘ऐतिहासिक। बस मार्शलों की बहाली के लिए आज बीजेपी विधायकों के सामने कैबिनेट नोट पास करने के बाद उस नोट को लेकर एलजी के पास सीएम आतिशी, आप के मंत्री और विधायक गए। भाजपा विधायकों ने भागने का पूरा प्रयास किया लेकिन मंत्री सौरभ भारद्वाज और आप नेताओं ने उन्हें भागने नहीं दिया। सीएम आतिशी खुद बीजेपी विधायक की गाड़ी में बैठकर एलजी हाउस गईं। जिससे बीजेपी विधायकों को भागने का कोई भी मौका ना मिल सके।’

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बस मार्शलों की बहाली के लिए आप किसी भी हद तक जाएगी’

बस मार्शलों की बहाली के लिए आम आदमी पार्टी किसी भी हद तक जाएगी। बस मार्शलों की बहाली के लिए जब भाजपा के विधायक एलजी हाउस जानें से बचकर भाग रहे थे। तो मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उनके पैर पकड़ लिए। कठिन संघर्ष के बाद आखिर भाजपा के विधायकों को एलजी हाउस ले जाया जा सका।’

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा

सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘दिल्ली में भर्तियों का काम बीजेपी के एलजी के पास है, लेकिन बीजेपी विधायकों ने बस मार्शलों की अपने ही एलजी द्वारा बहाली कराने के लिए कैबनेट नोट पास कराने की बात कही। हमने उसी समय कैबिनेट की बैठक बुलाई और बस मार्शलों की बहाली का प्रस्ताव पास कर दिया। इसके बाद भी बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता अपने ही एलजी साहब से मिलने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने वहां से कई बार भागने की कोशिश की। हम उनके पैरों में लेट गये। सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘अब एलजी हाउस के अंदर केवल सीएम आतिशी और बीजेपी के विधायकों को जाने दिया गया है। यह गलत है, हमें आतिशी की सुरक्षा को लेकर चिंता है।’

केजरीवाल का भी सामने आया बयान

सौरभ भारद्वाज के पैर पकड़ने वाले मामले पर अरविंद केजरीवाल का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे गर्व है अपने मंत्रियों पर, जो लोगों के काम करवाने के लिए किसी के पैरों में भी लेट जाते हैं। मेरी एलजी साहिब और बीजेपी वालों से विनती है कि इस मुद्दे पर और राजनीति ना करें और तुरंत बस मार्शलों को नौकरी पर रखा जाए।

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कोकेन का कनेक्शन क्या कहता है ? जिससे हुई कांग्रेस पार्टी की फ़ज़ीहत

हरियाणा में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी परेशानी सबब बन गया। बता दे दिल्ली में पकड़ी गई 5600 करोड़ रुपए की ड्रग्स के केस में जिस ड्रग कारोबारी तुषार गोयल को पुलिस ने पकड़ा है, उसका कनेक्शन कांग्रेस से निकला। पुलिस ने बुधवार को दिल्ली में पांच सौ किलो से ज्यादा कोकेन बरामद की थी। तुषार गोयल को राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस के आरटीआई (RTI) सेल का दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। जो कोकेन तुषार गोयल की निशानदेही पर बरामद किया गया। वो पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में सप्लाई किया जाना था। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इतनी भारी मात्रा में इंटरनेशनल क्वालिटी की कोकेन तुषार गोयल ने किन-किन देशों से मंगवाई और साथ ही ड्रग्स किस रूट से दिल्ली तक पहुंचा।

बीजेपी ने इसको लेकर कांग्रेस से पूछे सवाल

इस रेकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस सारी कड़ियां जोड़ने में लगी है। पुलिस ने अब तक इस मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है लेकिन चूंकि तुषार गोयल का कनेक्शन कांग्रेस से जुड़ा था, इसलिए बीजेपी ने इसको लेकर राहुल गांधी से सवाल पूछे। सुधांशु त्रिवेदी ने तुषार गोयल की कांग्रेस के नेताओं दीपेंदर हुड्डा, के.सी.वेणुगोपाल के साथ खिंची तस्वीरें जारी की। ये भी दावा किया कि तुषार गोयल के फोन से कांग्रेस के सांसद दीपेन्द्र हुड्डा का मोबाइल नंबर भी मिला है। दीपेन्द्र हुड्डा के साथ उसकी बहुत सारी पिक्चर्स भी हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने पूछा कि अब कांग्रेस बताए कि ये रिश्ता क्या कहलाता है।

ड्रग्स सप्लायर का मिला कांग्रेस से कनेक्शन

वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि नेताओं के साथ फोटो तो कोई भी खिंचवा लेता है, नेता सबका बैकग्राउंड थोड़े चेक करते हैं ? भूपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आरोपी की फोटो तो बीजेपी के नेता अनिल जैन के साथ भी है, उस पर बीजेपी क्या कहेगी ? दिल्ली में 5600 करोड़ रु. की ड्रग्स का पकड़ा जाना एक गंभीर मसला है। इसके सप्लायर का कांग्रेस से कनेक्शन मिलना और भी गंभीर बात है।

कांग्रेस के नेताओं ने माना कि ड्रग सप्लायर तुषार गोयल 20 साल तक कांग्रेस में रहा, पर ड्रग्स का ये मामला वाकई में बहुत बड़ा है। राहुल गांधी ने ड्रग्स का मुद्दा उठाया, लेकिन ड्रग्स के मुद्दे को अडानी से जोड़ा और ये भी कहा कि अडानी के पोर्ट्स से देश में ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। नरेन्द्र मोदी कुछ नहीं करते लेकिन दिल्ली में 5600 करोड़ रु. की ड्रग्स मिलने का जिक्र तक नहीं किया।

कांग्रेस पार्टी ने नहीं दी कोई सफाई

वही अपने करीबी के.सी. वेणुगोपाल की ड्रग्स सप्लायर के साथ तस्वीरों का जवाब भी नहीं दिया। तुषार गोयल के दो साल पहले तक के कांग्रेस कनेक्शन पर भी कोई सफाई नहीं दी। ये बातें शक पैदा करती हैं। राहुल गांधी या तो ड्रग्स का जिक्र ही ना करते और अगर किया था तो जो आरोप लगे हैं। फिर उनका जवाब देना चाहिए था। अब बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के नेता तुषार गोयल से ही पूछ लेते कि वो किस रास्ते से पांच सौ किलो ड्रग दिल्ली तक लाया था।

कांग्रेस ये कहकर नहीं छुड़ा सकती पीछा

कांग्रेस सिर्फ ये कहकर पीछा नहीं छुड़ा सकती कि तुषार गोयल को तो दो साल पहले पार्टी से निकाल दिया था। हरियाणा में वोटिंग से दो दिन पहले तुषार गोयल का पकड़ा जाना, दीपेन्द्र हुड्डा के साथ उसकी तस्वीरें और उसके मोबाइल में दीपेन्द्र हुड्डा का नंबर मिलना, कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है। कांग्रेस की ये सफाई किसी काम की नहीं है कि बीजेपी ने हरियाणा चुनाव को प्रभावित करने के लिए ये मामला उठाया। अगर कांग्रेस को बीजेपी के किसी नेता का ऐसा कनेक्शन मिल जाता तो वो भी इतना ही शोर मचाती। अगर उसे बीजेपी नेताओं की ऐसी तस्वीरें मिल जाती, तो वो भी उन्हें हवा में लहराती। आजकल तो छोटी-छोटी बातें चुनाव में बड़ा मुद्दा बन जाती हैं। लेकिन 5600 करोड़ की ड्रग्स की सप्लाई, 500 किलो कोकेन बहुत बड़ा मुद्दा है। इसे सिर्फ हरियाणा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

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पीएम इंटर्नशिप योजना : पहले ही दिन 111 कंपनियों ने किया रजिस्टर

युवाओं को रोजगार के काबिल बनाने के उद्देश्य से पायलट आधार पर शुरू हुई ‘पीएम इंटर्नशिप योजना’ के तहत पहले ही दिन 111 कंपनियों ने पोर्टल पर रजिस्टर कर लिया है। इस स्कीम के तहत एक करोड़ युवाओं को बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप में मदद की जाएगी। कंपनियां अब तक 2,200 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देने की पेशकश कर चुकी हैं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इंटर्नशिप पोर्टल पर चार अक्टूबर को दोपहर तीन बजे तक कंपनियों ने 2,200 से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण देने की पेशकश की है।’’

हर महीने मिलेंगे 5000 रुपये

पायलट आधार पर शुरू की गयी इस योजना के तहत इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को 5,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा, उन्हें इंटर्नशिप का हिस्सा बनने पर एकबारगी 6,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इंटर्नशिप 12 महीने के लिए होगी। चालू वित्त वर्ष में 1.25 लाख इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इस पर 800 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए एक व्यापक योजना शुरू करेगी। इसके तहत पांच साल में एक करोड़ युवाओं को 500 शीर्ष कंपनियों में प्रशिक्षण का अवसर दिया जाएगा। उन्हें वास्तविक रूप से कारोबारी माहौल, विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में 12 महीने कामकाज के गुर सीखने का मौका मिलेगा और साथ ही रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

2 दिसंबर से शुरू होगी इंटर्नशिप

पीएम इंटर्नशिप योजना को ऑनलाइन पोर्टल ‘पीएम इंटर्नशिप डॉट एमसीए डॉट जीओवी डॉट इन’ (pminternship.mca.gov.in) के जरिये लागू किया गया है। पोर्टल का विकास कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने किया है। पहले चरण में उम्मीदवार पोर्टल पर 12 से 25 अक्टूबर के बीच अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदनकर्ताओं को 26 अक्टूबर को छांटा जाएगा। कंपनियां उम्मीदवारों का चयन 27 अक्टूबर से सात नवंबर के दौरान करेंगी।

उसके बाद चुने गये उम्मीदवारों के पास कंपनियों की इंटर्नशिप पेशकश स्वीकार करने के लिए आठ से 15 नवंबर तक का समय होगा। इंटर्नशिप दो दिसंबर से शुरू होगी और 12 महीने के लिए होगी। इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवर दिया जाएगा। इसके लिए प्रीमियम का भुगतान सरकार करेगी। इसके अलावा कंपनियां चयनित उम्मीदवार को अतिरिक्त दुर्घटना बीमा उपलब्ध करा सकती हैं।

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महिलाओं के लिए कौन से टेस्ट हैं सबसे जरूरी, ये जानना है जरुरी

महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सबसे ज्यादा लापरवाह होती हैं। खासतौर से शादी से बाद महिलाएं अपना सब कुछ परिवार और बच्चे के लिए छोड़ देती हैं। शादी से पहले एकदम फिट रहने वाली लड़कियां शादी के बाद एकदम बदल जाती हैं। इसका एक बड़ा कारण महिलाओं में हार्मोंसल बदलाव भी है। खासतौर से बच्चा होने के बाद शरीर में काफी परिवर्तन आने लगते हैं। लेकिन जब तक आप स्वस्थ नहीं होंगी घर को भी फिट नहीं रख सकती हैं। अगर आप 40 की उम्र के पास हैं या पार कर चुकी हैं तो शरीर में कई तरह की परेशानियां पैदा हो सकती हैं। आपको जरा जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

आइये जानते हैं 40 के बाद महिलाओं के लिए कौन से मेडिकल टेस्ट जरूर करवा लेने चाहिए।

लिपिड प्रोफाइट कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग

इस टेस्ट में खून के नमूने से कोलेस्ट्रॉल की जांच की जाती है। इस टेस्ट को करना से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल का पता लगता है। जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। हार्ट के लिए आपको ईसीजी भी करवा लेना चाहिए।

महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग है जरुरी

पेप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। आपको 40 की उम्र के बाद ये टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा नियमित ब्रेस्ट एग्जामिन करवाना न भूलें। इसके लिए आप हर 2 – 3 हफ्ते में खुद भी टेस्ट कर सकती हैं। ब्रेस्ट में कही दर्द या किसी तरह की गांठ फील हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

महिलाओं के बहुत ज़रूरी है थायरॉइड और शुगर का टेस्ट

महिलाओं में एक उम्र के साथ थायरॉइड भी बढ़ने लगता है। इससे बॉडी का सिस्टम प्रभावित होने लगता है। इसलिए 40 की उम्र होने पर आपको डॉक्टर की सलाह से हर साल थायरॉइड और शुगर का टेस्ट भी करवा लेना चाहिए।

हर साल आई टेस्ट करवाए महिलाएं

जो महिलाएं चश्मा पहनती हैं या कॉन्टैक्ट लेंस लगती हैं उन्हें हर साल अपना आई टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। अगर चश्मा नहीं लगा है तो हर साल अपनी आंखों का चेकअप करवा लें। इससे आंखों की रौशनी का पता चल जाएगा। जिनकी नजर सही है उन्हें 2 साल में या कोई परेशानी होने पर टेस्ट करवा लेना चाहिए।

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