मोदी सरकार की सफल कही जाने वाली योजना का सच

मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना

मोदी सरकार उज्ज्वला योजना को अपनी सबसे सफल योजनाओं में एक बताती रही है। हालांकि सामने आए आंकड़े के मुताबिक उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने एक बार भी सिलेंडर नहीं भरवाया , जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक और मौका मिला गया है। आंकड़े के सामने आने के बाद सरकार लोगों के निशाने पर आ गई है।

राज्यसभा में मोदी सरकार ने दी ये जानकारी

उच्च सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार से पीएमयूवाई के ऐसे लाभार्थियों का ब्योरा मांगा था जिसके बाद राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने लिखित जवाब में बताया कि “उज्ज्वला योजना के 4.13 करोड़ लाभार्थियों ने एक बार भी रसोई गैस सिलेंडर को रिफिल नहीं करवाया है, जबकि 7.67 करोड़ लाभार्थियों ने एक ही बार सिलेंडर भरवाया है।’ अब यह जानकारी सामने आने के बाद सरकार पर लोग तंज कस रहे हैं।

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कांग्रेस ने घेर लिया

महिला कांग्रेस ने ट्वीट किया कि ‘रसोई गैस सिलेंडर मोदी सरकार में इतना महंगा कर दिया है कि उज्ज्वला योजना का वादा चूल्हे के काले धुएं में उड़ गया है।’ ओडिशा कांग्रेस सेवादल ने लिखा कि ‘निशिकांत दुबे जी इसके लिए भी प्रधानमंत्री को बधाई दी जानी चाहिए।’ मल्लिकार्जुन खडगे ने लिखा कि उज्ज्वला “प्रचार” योजना का झांसा, मोदी सरकार के आंकड़ों से ही उजागर होता है। FY21-22 में, 2 Cr+ लोग LPG की सिंगल रिफिल का खर्च नहीं उठा सकते थे, जबकि 2.11 Cr ने इसे केवल एक बार रिफिल किया। मोदी जी, रीफिल की लागत ₹1053 और बिना सब्सिडी के साथ आपने गरीब भारतीयों को अंधकार युग में धकेल दिया है!

मई 2016 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से ग्रामीण और वंचित परिवारों, खासकर ईंधन के रूप में जलावन लकड़ी, कोयला, गोबर के उपले आदि जैसे पारंपरिक ईंधन का उपयोग करने वालों के लिए एलपीजी जैसे खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक प्रमुख योजना के रूप में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की शुरुआत की गई थी। मंत्रालय के मुताबिक, पारंपरिक ईंधन के उपयोग से ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

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