Saturday, April 4, 2026
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संजौली मस्जिद विवाद, नमाज के विरोध में सड़क पर उतरे हिंदू संगठन

शिमला के संजौली की विवादित मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शुक्रवार को यहां नमाज अदा करने को लेकर माहौल गरम हो गया, जहां एक ओर मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे। वहीं दूसरी ओर हिंदू संगठन देवभूमि संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर इसका विरोध किया और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

वही समिति का कहना है कि नगर निगम शिमला के आयुक्त की अदालत द्वारा तीन मई को मस्जिद के संपूर्ण निर्माण को अवैध करार देते हुए उसे ढहाने के आदेश दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके मस्जिद में धार्मिक गतिविधियां जारी हैं। इसी के विरोध में समिति के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं।

पुलिस ने रोका, फिर दी नमाज की इजाजत

शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व बैरिकेडिंग के बीच जब मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज के लिए मस्जिद की ओर बढ़े तो पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए रोका और पूछताछ के बाद ही आगे जाने दिया। इस दौरान देवभूमि संघर्ष समिति के सदस्य भी वहां पहुंचे और नमाज के विरोध में सड़क पर ही हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।

प्रशासन पर पक्षपात के आरोप

समिति के सह-संयोजक मदन ठाकुर और विजय शर्मा ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक ओर उन्हें मस्जिद के बाहर धार्मिक पाठ करने से रोका गया। वहीं मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की छूट दी गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन का यही रवैया रहा तो आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होगा। शुक्रवार शाम समिति की एक आपात बैठक भी बुलाई गई है। जिसमें भविष्य की रणनीति पर निर्णय होगा। मदन ठाकुर ने मस्जिद परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद करने और वहां आवाजाही पर रोक लगाने की भी मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब निर्णायक संघर्ष शुरू होगा।

देवभूमि संघर्ष समिति ने कहा है कि जब तक मस्जिद को पूरी तरह गिराया नहीं जाता तब तक वहां किसी भी धार्मिक गतिविधि को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विजय शर्मा ने कहा कि यदि प्रशासन हिंदू संगठनों को रोक सकता है। तो मुस्लिम समुदाय को भी वही नियम लागू होने चाहिए।

पहले भी भड़क चुका है मस्जिद विवाद

बता दें कि यह मामला पहली बार अगस्त 2024 में तब सुर्खियों में आया जब शहर के मल्याणा क्षेत्र में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ था। इसके बाद 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर तनाव और बढ़ गया। 11 सितंबर को हिंदू संगठनों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपिंदर अत्री की अदालत ने 3 मई 2025 को मस्जिद के संपूर्ण निर्माण को अवैध घोषित करते हुए, इसे ढहाने का अंतिम आदेश जारी किया था। मुस्लिम पक्ष इस मामले को जिला अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

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इंसान की खोपड़ी का सूप बनाकर पीने वाले सीरियल किलर को उम्रकैद

लखनऊ के एडीजे कोर्ट ने सीरियल किलर राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर को उम्र कैद की सजा सुनाई है। राजा कोलंदर के साथी वक्षराज को भी उम्रकैद की सज़ा मिली है। दोनों साल 2000 में हुए डबल मर्डर में दोषी पाए गए हैं। राजा कोलंदर पर 20 से ज़्यादा हत्या के मामले दर्ज किए गए थे। ज़्यादातर मामलो में सुबूतो के आधार पर बरी हो चुका है ।

मर्डर करके दिमाग निकालकर बनाता था सूप

राजा कोलंदर को जब गिरफ्तार किया गया था तो उस समय प्रयागराज के उसके पिगरी फार्म हाउस से बहुत बड़ी संख्या में नरकंकाल और नरमुंड बरामद हुए थे। कोलंदर पर आरोप है कि वो तांत्रिक था और खोपड़ी का सूप बनाकर पीता था। कहा जाता है कि ये लोगों का क़त्ल करता था, फिर इनके शरीर के कई टुकड़े करता था और फिर लाश के टुकड़ो को अलग-अलग फेंक देता था, लेकिन ये लाश के सिर को अपने साथ ले जाता था। इसके बाद दिमाग़ निकालकर सूप बनाकर पीता था।

कोर्ट ने दोनों को ठहराया था दोषी

इससे पहले जज रोहित सिंह की अदालत ने सोमवार को राजा कोलंदर और वक्षराज कोल को नाका इलाके में 22 वर्षीय मनोज कुमार सिंह और उनके ड्राइवर रवि श्रीवास्तव के अपहरण और हत्या में शामिल होने का दोषी पाया था। सरकारी वकील एमके सिंह के अनुसार, अदालत ने राजा कलंदर और उसके सहयोगी को आईपीसी की धारा 364 (हत्या के इरादे से अपहरण या अपहरण से संबंधित), 396 (हत्या के साथ डकैती), 201 (साक्ष्यों को गायब करना), 412 (डकैती से प्राप्त संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) और 404 (मृत व्यक्ति की संपत्ति का दुरुपयोग) के तहत दोषी पाया था।

आखिर सीरियल किलर राजा कलंडर कौन हैं ?

राजा कलंडर का बचपन का नाम राम निरंजन कोल था। वह अपने जघन्य अपराधों और कथित नरभक्षण के लिए कुख्यात था। वह एक बार उत्तर प्रदेश में एक आयुध कारखाने में कार्यरत था। वह खुद को एक राजा मानता था जो किसी को भी दंडित कर सकता था जिसे वह नापसंद करता था। कलंडर को पत्रकार धीरेंद्र सिंह सहित कई हत्याओं का दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने उनके फार्महाउस से मानव खोपड़ी बरामद की, जिससे नरभक्षण के भयावह आरोप सामने आए थे। मनोचिकित्सकों ने उन्हें मनोरोगी बताया, हालांकि अदालतों ने उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ घोषित किया।

2012 में पहली सज़ा राजा कलंडर और उसके साले वक्षराज को नवंबर 2012 में पत्रकार धीरेंद्र सिंह की निर्मम हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। पीड़ित को बहला-फुसलाकर ले जाया गया, गोली मारकर हत्या कर दी गई। शव को विकृत कर दिया गया और दफना दिया गया।

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टेरर फंडिंग के सबूतों से एफएटीएफ में पाकिस्तान को घेरेगा भारत

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़े एक्शन की तैयारी कर ली है। भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल करने की बात कर सकता है। एफएटीएफ का काम मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नजर रखना है। यह एक वैश्विक संस्था है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी। इसमें पाकिस्तान का ही हाथ था।

पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ रहा है और वह सालों से आतंकियों के लिए फंडिंग करता रहा है। उसे इसकी वजह से कई बार ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है। पाकिस्तान को जून 2018 में एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग के लिए ग्रे लिस्ट में डाला था, लेकिन अक्तूबर 2022 में इसे ग्रे लिस्ट से निकाल दिया गया था। पाक को 2008 में भी ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था, लेकिन फिर 2009 में हटा दिया गया था। वह 2012 और 2015 के दौरान भी ग्रे लिस्ट में रहा था।

धन का दुरुपयोग कर रहा पाकिस्तान

खबर के मुताबिक, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। भारत को लगता है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से पैदा होने वाले आतंकवाद पर कार्रवाई करने में विफल रहा है और हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए बहुपक्षीय एजेंसियों से धन का दुरुपयोग कर रहा है। जो देश धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए अपने शासन में रणनीतिक कमियों को दूर करने में विफल रहते हैं और अधिक निगरानी के अधीन हैं, उन्हें एफएटीएफ की ग्रे सूची में रखा जाता है।

ग्रे लिस्ट में शामिल होने पर पाकिस्तान को क्या होगा नुकसान

अगर किसी देश को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है तो उसे आर्थिक रूप से काफी नुकसान होता है। पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ तो उसकी दिक्कत बढ़ जाएगी। जब कोई देश ग्रे लिस्ट में आता है तो वहां निवेश की कमी होती है। इसके साथ ही राजस्व भी कम हो जाता है। इंटरनेशनल लेवल पर लेनदेन में भी कठिनाई आती है। अगर राजनीतिक रूप से देखें तो भी काफी नुकसान होता है। देश की साख पर बट्टा लगता है।

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहने का मतलब

जब एफएटीएफ किसी क्षेत्राधिकार को बढ़ी हुई निगरानी के तहत रखता है, तो इसका मतलब है कि देश ने पहचानी गई रणनीतिक कमियों को तय समय-सीमा के भीतर तेजी से हल करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है और उस पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। एफएटीएफ की पूर्ण बैठक एक निर्णय लेने वाली संस्था, साल में तीन बार – फरवरी, जून और अक्टूबर में होती है।

2018 में, पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रखा गया था और उसने देश को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए एक कार्य योजना दी थी। इसके बाद, 2022 में, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को सूची से हटा दिया। भारत ने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान को आईएमएफ (IMF) के बेलआउट पैकेज की किस्त जारी करने का विरोध किया था।

भारत ने तबाह किए पाकिस्तान के आतंकी ठिकाने

भारत ने पहलगाम हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर से लिया। उसने पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके साथ ही 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। पाकिस्तान ने मारे गए आतंकियों का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। अहम बात यह है कि आतंकियों के जनाजे में पाक आर्मी के कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। इससे पाकिस्तान खुद ही दुनिया के सामने बेनकाब कर लिया।

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अब भारतीयों के जीवन से खेलने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी – पीएम मोदी

संवाददाता-सादिक़ अली-डूँगरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीकानेर पहुंचे जहा राजस्थान के बीकानेर में 26,000 करोड़ रुपये की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास करने के साथ-साथ इन्‍हें राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया और ऑनलाइन शामिल हुए 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों की महत्वपूर्ण भागीदारी के प्रति भी आभार प्रकट किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित किया।

इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा और ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धियां गिनाईं। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, ‘पाकिस्तान एक बात भूल गया। मां भारती का सेवक मोदी यहां सीना तानकर खड़ा है। मोदी का दिमाग ठंडा है, ठंडा रहता है, लेकिन मोदी का लहू गरम रहता है। मोदी की नसों में अब लहू नहीं, गरम सिंदूर बह रहा है। उन्होंने कहा 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हमारी बहनों की मांग का सिंदूर उजाड़ दिया। गोलियां पहलगाम में चलीं लेकिन उन गोलियों से 140 करोड़ देशवासियों का सीना छलनी हुआ है।

जलापूर्ति योजनाओं के पुनर्गठन कर राष्ट्र को समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में बुनियादी ढांचे, संपर्क सुविधा, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और पानी की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए पूरे राजस्थान में 25 महत्वपूर्ण राज्य सरकार की परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित किया। इनमें 3,240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 750 किलोमीटर से अधिक लंबाई के 12 राज्य राजमार्गों के उन्नयन और रखरखाव के लिए परियोजनाओं का शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है। कार्यक्रम के तहत आगे विस्तार में अतिरिक्त 900 किलोमीटर नए राजमार्ग शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बीकानेर और उदयपुर में बिजली परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने राजसमंद, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, धौलपुर में नर्सिंग कॉलेजों का भी उद्घाटन किया, जो राज्य में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने झुंझुनू जिले में ग्रामीण जलापूर्ति और फ्लोरोसिस शमन परियोजना, अमृत 2.0 के अंतर्गत पाली जिले के 7 शहरों में शहरी जलापूर्ति योजनाओं के पुनर्गठन सहित क्षेत्र में विभिन्न जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। चलिए बताते हैं कि पीएम मोदी के भाषण की दमदार बातें।

जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो नतीजा क्या होता

पीएम नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 22 तारीख के हमले के जवाब में हमने 22 मिनट में आतंकवादियों को 9 सबसे बड़े ठिकानों को तबाह कर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया ने और देश के दुश्मनों ने भी देख लिया कि जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो नतीजा क्या होता है। पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान एक बात भूल गया। मां भारती का सेवक मोदी यहां सीना तानकर खड़ा है। मोदी का दिमाग ठंडा है, ठंडा रहता है, लेकिन मोदी का लहू गरम रहता है। मोदी की नसों में अब लहू नहीं, गरम सिंदूर बह रहा है।

ना ही देश मिटने दूंगा ना ही झुकने दूंगा – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, ‘मैंने कहा था सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा। वो जो सिंदूर मिटाने निकले थे, उन्हें मिट्टी में मिलाया है। वो हिंदुस्तान का लहू बहाते थे, आज कतरे कतरे का हिसाब चुकाया है। पीएम मोदी ने कहा कि वो सोचते थे भारत चुप रहेगा, आज कोने में दुबके पड़े हैं। वो अपने हथियारों पर घमंड करते थे, आज वो मलबे के ढेर में दबे हुए हैं। ये शोध प्रतिशोध का खेल नहीं, ये न्याय का नया स्वरूप है। ये ऑपरेशन सिंदूर है। ये सिर्फ आक्रोश नहीं है, ये समर्थ भारत का रौद्र रूप है। ये भारत का नया स्वरूप है। पहले घर में घुसकर किया था वार। अब सीधा सीने पर किया प्रहार है। आतंक का फन कुचलने की, यही नीति है, यही रीति है, यही भारत है, नया भारत है।

आतंकी हमला हुआ तो करारा जवाब मिलेगा – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद से निपटने के 3 सूत्र तय कर दिए हैं। पहला भारत पर आतंकी हमला हुआ तो करारा जवाब मिलेगा। समय हमारी सेनाएं तय करेंगे। तरीका भी हमारी सेनाएं तय करेंगी और शर्ते भी हमारी होंगी। दूसरा कि एटम बम की गीदड़ भभकियों से भारत डरने वाला नहीं है और तीसरा आतंक के आकाओं और आतंकी सरपरस्त सरकार को अलग-अलग नहीं देखेंगे। उन्हें एक ही मानेंगे। पाकिस्तान का स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर वाला खेल अब नहीं चलेगा।

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हर आतंकी हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान भारत से कभी सीधी लड़ाई जीत ही नहीं सकता। जब भी सीधी लड़ाई होती है तो बार बार पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ती है। इसलिए पाकिस्तान ने आतंकवाद को भारत के खिलाफ लड़ाई का हथियार बनाया है। आजादी के बाद पिछले कई दशकों से यही चला रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि हर आतंकी हमले की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

ये कीमत पाकिस्तान की सेना चुकाएगी, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चुकाएगी। जब मैं दिल्ली से यहां आया तो नाल एयरपोर्ट पर उतरा। पाकिस्तान ने इस एयरबेस को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। लेकिन इस एयरबेस को वो रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाएं। पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पार पाकिस्तान का रहीमयार खान बेस है। पता नहीं आगे कब खुलेगा। आईसीयू में पड़ा है। भारत की सेना के अचूक प्रहार ने इस एयरबेस को तहस नहस कर दिया है।

बात होगी तो सिर्फ पीओके की – प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ ना ट्रेड होगा, ना टॉक। अगर बात होगी तो सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की पीओके की। अगर पाकिस्तान ने आतंकियों को एक्सपोर्ट करना जारी रखा तो पाई पाई के लिए मोहताज होना होगा। पाकिस्तान को भारत के हक का पानी नहीं मिलेगा। भारतीयों के खून से खेलना पाकिस्तान को महंगा पड़ेगा। ये भारत का संकल्प है। दुनिया की कोई ताकत हमें इस संकल्प से डिगा नहीं सकती है।

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कानपुर में ऑटो चला रहे म्यांमार के युवक को पकड़ा, पुलिस ने शुरू की जांच

कानपुर नगर:  कोतवाली पुलिस ने शहर में ऑटो चला रहे म्यांमार के युवक को बड़े चौराहे से पकड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उसके पास से कोई वैद्य पहचान पत्र नहीं मिला है। वह शुक्लागंज में रह रहा है। यहां उसके साथ उसके परिजन व रिश्तेदार भी रहते हैं। पुलिस ने वहां जाकर पूछताछ की है। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि कोतवाली पुलिस ने गश्त के दौरान बड़ा चौराहे से एक संदिग्ध ऑटो चालक को दबोचा। उसकी पहचान म्यांमार के साइडुय मंगडो शहर (आईकब) निवासी मो. साहिल के रूप में हुई। वह परिवार के साथ पिछले कई साल से उन्नाव के शुक्लागंज मनोहर नगर, पानी टंकी के पास झुग्गी झोपड़ी डालकर रह रहा है। पुलिस ने पत्नी, बहन, बहनोई, बीमार पिता, बच्चों समेत 10 लोगों से पूछताछ की। युवक के पास से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।

थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया, जिसे पूछताछ हेतु थाना लाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि वह वर्ष 2013-14 में अपने परिवार के साथ नाव द्वारा म्यांमार से बांग्लादेश स्थित Cox’s बाजार शरणार्थी कैंप पहुंचा, जहां वह अपने परिवार के साथ लगभग तीन वर्ष रहा। तत्पश्चात ₹1200 प्रति व्यक्ति के हिसाब से दलालों को भुगतान कर असम होते हुए भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया और ट्रेन से कानपुर आया। वर्ष 2017-18 से वह शुक्लागंज उन्नाव में रह रहा है और उसके पास भारत का डीएल व आधार कार्ड भी उपलब्ध है।

उक्त प्रकरण में थाना कोतवाली पर अपराध संख्या 117/25 धारा 318(4)/338/336(3)/340(2) BNS व विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में शराब रिटेल से जुड़े सरकारी निगम तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग निगम (TASMAC) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान ईडी के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताई। बेंच ने कहा कि एजेंसी ने सभी हदें पार कर दी हैं।

तमिलनाडु सरकार का कहना था कि उसने 2014 से 2021 के बीच खुद तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग निगम (TASMAC) के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 41 एफआईआर दर्ज करवाई हैं। शराब बिक्री का लाइसेंस देने में गड़बड़ी समेत दूसरे आरोपों की जांच राज्य की एजेंसियां कर रही हैं। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में केस दर्ज कर लिया। यह केस सीधे निगम के खिलाफ है।

अपने निगम को ही आरोपी बना दिया – चीफ जस्टिस

इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त हैरानी जताई। उन्होंने कहा, ‘निगम को ही आरोपी बना दिया? ईडी सभी सीमाएं तोड़ रही है। तमिलनाडु सरकार के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग निगम (TASMAC) के लिए पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने निगम के दफ्तर में छापे के दौरान कर्मचारियों से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सभी के फोन की क्लोनिंग कर ली गई है। ईडी ने निजता के अधिकार का हनन किया।

कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने यह भी कहा कि मामले में ईडी की कोई भूमिका नहीं थी। इस पर चीफ जस्टिस ने एक बार फिर कहा कि ईडी सारी सीमाएं तोड़ रही है। संघीय ढांचे का लिहाज नहीं किया जा रहा है। जब राज्य सरकार जांच कर रही है, तो इस तरह दखल की क्या जरूरत थी?

ईडी के पास कार्रवाई के पर्याप्त आधार

ईडी के लिए पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने मामले में 1000 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईडी के पास कार्रवाई के पर्याप्त आधार हैं। इस पर कोर्ट ने उन्हें 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा और साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल मामले में ईडी की कार्रवाई स्थगित रहेगी।

इससे पहले 23 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग निगम (TASMAC) के खिलाफ ईडी की जांच और छापे को सही ठहराया था। कर्मचारियों से दुर्व्यवहार के आरोप भी हाई कोर्ट ने खारिज किए थे। हाई कोर्ट ने कहा था कि जानबूझकर महिला कर्मचारियों को आगे किया गया ताकि ईडी के छापे में अड़चन आए।

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क्या एआई इंसानों के लिए खतरा है? सभी टेक कंपनियों की बढ़ी टेंशन

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी जिंदगी को आसान बनाने के साथ-साथ एक नया खतरा बनता जा रहा है। खास तौर पर जेनरेटिव एआई के आने के बाद से एआई का इस्तेमाल बढ़ता रहा है। हाल में सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एआई के जरिए होने वाले नए खतरे की तरफ सबका ध्यान खींचा है। हालांकि, हर चीज के दो पहलू होते हैं, जिनके बारे में हमें सोचने की जरूरत है।

दरअसल एआई के इस नए खतरे का आभास अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के एक दर्दनाक मामले की वजह से हुआ है। पिछले साल फरवरी में एक 14 साल के बच्चे ने एआई के चक्कर में आत्महत्या कर ली। इस मामले में बच्चे की मां मेगन गार्सिया ने एआई कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इस मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने गूगल और एआई स्टार्ट-अप कंपनी कैरेक्टर.एआई पर कानूनी कार्रवाई करने की इजाजत दे दी।

क्या है मामला ?

फ्लोरिडा की रहने वाली मेगन गार्सिया ने एआई कंपनी पर दायर मुकदमें में बताया कि उसके 14 साल के बेटे सेवेल सेट्जर III (Sewell Setzer III) ने एआई पर भरोसा करके इस साल फरवरी में आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले सेवेल कैरेक्टर.एआई के चैटबॉट के साथ चैटिंग कर रहा था। मेगन का आरोप है कि एआई के उकसाने की वजह से ही उसके नाबालिग बेटे ने आत्महत्या करने का फैसला किया था।

एआई फर्म के खिलाफ माना जाने वाला मुकदमा

अमेरिकी डिस्ट्रिक जज एनी कॉन्वे ने अपने फैसले में कहा कि कंपनियों ने कानूनी कार्यवाही के इस प्रारंभिक चरण में यह प्रदर्शित नहीं किया था कि अमेरिकी संविधान की मुक्त-भाषण सुरक्षा ने उन्हें मेगन गार्सिया के मुकदमे से बचाया था। यह बच्चों को मनोवैज्ञानिक नुकसान से बचाने में कथित विफलता के लिए एआई फर्म के खिलाफ अमेरिका में पहले मुकदमों में से एक माना जाने वाला मुकदमा है, जो दर्शाता है कि एआई-संचालित चैटबॉट के प्रति जुनून विकसित होने के बाद किशोर ने आत्महत्या कर ली।

हालांकि, कैरेक्टर.एआई और गूगल इस मुकदमे को लड़ना चाहते हैं और अपने प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की सुरक्षा के लिए उपायों को नियोजित करने की बात करते हैं, जिनमें “खुद को नुकसान पहुंचाने के बारे में बातचीत” को रोकने के लिए डिजाइन की गई सुविधाएं भी शामिल हैं। मेगन गार्सिया ने गूगल और कैरेक्टर.एआई पर पिछले साल अक्टूबर में यह मुकदमा दायर किया था।

जज ने टेक कंपनियों के सभी दलीलों को नाकारा

इस मुकदमे की सुनवाई करने वाली जज ने टेक कंपनियों के सभी दलीलों को नकार दिया। यही नहीं, जज ने गूगल के इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया कि उसमें उसका कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि कैरेक्टर.एआई गूगल के लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) पर काम करता है। इसकी वजह से कोर्ट ने कैरेक्टर.एआई के साथ-साथ गूगल को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। गूगल के दो पुराने इंजीनियर ही एआई स्टार्टअप कंपनी कैरेक्टर.एआई के फाउंडर हैं।

एआई का इस्तेमाल पर क्यों उठ रहे सवाल ?

एआई को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। खास तौर पर पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले डीपफेक वीडियो और फोटो के सामने आने के बाद से एआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठना शुरू हो गया। इसके बाद सोशल मीडिया कंपनियों ने एआई द्वारा जेनरेट किए जाने वाले फोटो और वीडियो को लेबल करना शुरू कर दिया है, ताकि लोग ये पहचान सके कि ये वीडियो या फोटो सही नहीं हैं, बल्कि एआई द्वारा बनाए गए हैं। हालांकि, अभी भी लाखों की संख्यां में एआई द्वारा बनाए गए वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं, जिन्हें आम लोगों के लिए पहचान करना बेहद मुश्किल है।

इसके अलावा एआई की समझ को लेकर भी सवाल उठे हैं। जेनरेटिव एआई डिजाइन करने वाली कंपनियां दावा करती हैं कि एआई पूरी तरह से निष्पक्ष है और वो डेटा के आधार पर ही जानकारी उपलब्ध करवाता है। हालांकि, ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें एआई द्वारा इस्तेमाल किए गए डेटा में गड़बड़ी और आकलन में दिक्कत की वजह से गलत रिजल्ट सामने आए हैं। गूगल के एआई मॉडल जैमिनी एआई (तब Bard) द्वारा उपलब्ध कराई गई एक जानकारी की वजह से कंपनी को माफी तक मांगनी पड़ गई थी।

जब एआई बेस्ड रोबोट ने की आत्महत्या

जेनरेटिव एआई की कोडिंग में अगर किसी भी तरह की दिक्कत आती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पिछले दिनों चीन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें एआई बेस्ड रोबोट में तकनीकी दिक्कत आने के बाद वो भीड़ से लड़ने के लिए सामने आ गया था। यही नहीं एक एआई बेस्ड रोबोट ने तो आत्महत्या तक कर ली थी। ऐसे में एआई द्वारा विनाशकारी व्यवहार विकसित करने का भी बड़ा खतरा है, जो टेक कंपनियों के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है।

पिछले दिनों सामने आई एक सर्वे में यह पता चला है कि एआई का इस्तेमाल हमें आलसी बना रहा है। इस सर्वे में लोगों ने एआई का इस्तेमाल पर अपनी निर्भरता की बात कबूली थी। एआई की वजह से वो किसी चीज के बारे में रिसर्च करने से बचते हैं और एआई द्वारा दी गई जानकारी पर निर्भर रहते हैं। इस सर्वे के मुताबिक, एआई लोगों को आलसी बनाने के साथ-साथ उसकी सोचने-समझने की शक्तियों को भी खत्म कर रहा है।

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ज्योति मल्होत्रा का पुलिस ने कराया मेडिकल, फिर किया कोर्ट में पेश

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार की गई ज्योति मल्होत्रा को आज को हरियाणा के हिसार कोर्ट में किया पुलिस ने पेश किया। कोर्ट से पुलिस को ज्योति मल्होत्रा की पांच दिन की रिमांड और मिली है। इससे पहले पुलिस ने ज्योति का रात 11.30 बजे ही मेडिकल करवा लिया था। गौरतलब है कि हरियाणा के हिसार की रहने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए जासूसी करने और संवेदनशील जानकारी शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हिसार पुलिस ने 17 मई को उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया था।

कैसे हुई थी ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी?

ज्योति की गिरफ्तारी पंजाब के मलेरकोटला से पकड़ी गई गजाला नामक महिला से पूछताछ के बाद हुई, जिसमें जासूसी नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम सामने आए। ज्योति मल्होत्रा पर जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप है। डीएसपी कमलजीत ने बताया था कि हमें मिली सूचना के आधार पर हमने हरीश कुमार की बेटी ज्योति को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और बीएनएस की धारा 152 के तहत गिरफ्तार किया। उसका मोबाइल और लैपटॉप बरामद होने के बाद कुछ संदिग्ध चीजें मिलीं।

उन्होंने बताया था कि वह लगातार एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थी। मिली जानकारी के मुताबिक, ज्योति पिछले दो वर्षों में तीन बार पाकिस्तान, एक बार चीन, और यूएई, बांग्लादेश, भूटान और थाईलैंड की यात्रा कर चुकी है। जांच में पता चला कि दो साल पहले वह पाकिस्तानी हाई कमिशन के अधिकारी दानिश के संपर्क में आई थी।

भारत लौटने के बाद क्या कर रही थी ज्योति मल्होत्रा ?

पाकिस्तान यात्रा के दौरान ज्योति ने वहां के खुफिया अधिकारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से मुलाकात की। भारत लौटने के बाद उसने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर संवेदनशील जानकारी शेयर की और पाकिस्तान की सकारात्मक छवि बनाने का प्रयास किया।

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पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व ट्रेनी अधिकारी पूजा खेडकर को अग्रिम जमानत दे दी। पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पर सिविल सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी करने और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा दिव्यांगता श्रेणी के तहत आरक्षण का गलत लाभ उठाने का आरोप है। जज बी.वी. नागरत्ना और जज सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने खेडकर को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह एक उपयुक्त मामला है जहां दिल्ली हाईकोर्ट को याचिकाकर्ता को जमानत देनी चाहिए।

पीठ ने कहा, “उन्होंने कौन सा गंभीर अपराध किया है? वह मादक पदार्थ माफिया या आतंकवादी नहीं है। उन्होंने 302 (हत्या) नहीं की है। वह एनडीपीएस (मादक पदार्थ निषेध से संबंधित कानून) अपराधी नहीं है। आपके पास कोई प्रणाली या सॉफ्टवेयर होना चाहिए। आप जांच पूरी करें। उन्होंने सब कुछ खो दिया है और उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिलेगी।

दिल्ली पुलिस के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध

दिल्ली पुलिस के वकील ने पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को अग्रिम जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं। पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पर आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए 2022 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी देने का आरोप है।

उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। यूपीएससी ने पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई कीं, जिसमें फर्जी पहचान के जरिए सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करना भी शामिल है। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ विभिन्न अपराधों के लिए एफआईआर भी दर्ज की है।

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सोनिया-राहुल गांधी ने अपराध से कमाए 142 करोड़ रुपये, ईडी का बड़ा दावा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित तौर पर 142 करोड़ रुपये की आपराधिक आय से लाभ उठाया है। कोर्ट ने इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य को नोटिस जारी किया है। ईडी के विशेष वकील ने तर्क दिया कि आपराधिक गतिविधि के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की गई कोई भी संपत्ति अपराध की आय के रूप में योग्य है। इसमें न केवल अनुसूचित अपराधों से संपत्तियां शामिल हैं, बल्कि उन संपत्तियों से जुड़ी आय भी शामिल है।

ईडी के विशेष वकील ने दावा किया कि आरोपियों द्वारा प्राप्त 142 करोड़ रुपये की किराये की आय को अपराध की आय के रूप में माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी, जिनके पास सामूहिक रूप से यंग इंडियन में 76% हिस्सेदारी है, ब्रीच ऑफ ट्रस्ट में शामिल थे। ईडी के अनुसार, यंग इंडियन ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से सिर्फ 50 लाख रुपये में 90.25 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की। ईडी ने कहा कि जब आरोपियों ने अपराध की आय अर्जित की है तो उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग की, लेकिन उस आय को अपने पास रखे रहना भी मनी लॉन्ड्रिंग माना जाता है। यह न केवल प्रत्यक्ष है, बल्कि अप्रत्यक्ष भी है, जो अपराध की आय का अधिग्रहण है।

ईडी ने चार्जशीट में केंद्रीय एजेंसी का लिया सहारा

वही ईडी ने अपनी चार्जशीट में केंद्रीय एजेंसी ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए आयकर विभाग के 2017 के मूल्यांकन आदेश का सहारा लिया है। इसमें दावा किया गया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के प्रमुख सदस्यों ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन के प्रमुख अधिकारियों के साथ मिलकर एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण पाने के लिए आपराधिक साजिश रची, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 2,000 करोड़ रुपये है। गौरतलब है कि एजेएल एक गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी है, जो ऐतिहासिक रूप से नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशन से जुड़ी हुई है।

ईडी ने पहले ही दाखिल कर दी थी चार्जशीट

पिछले महीने दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में ईडी ने सोनिया, राहुल और कई अन्य लोगों पर 988 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था। यह चार्जशीट दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की कई धाराओं के तहत दाखिल की गई थी। चार्जशीट में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को आरोपी नंबर 1 बनाया गया है, जबकि उनके बेटे राहुल गांधी, जो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं, उन्हें आरोपी नंबर 2 बनाया गया है। अब इस मामले की सुनवाई हो रही है। ईडी की चार्जशीट दाखिल होने के बाद राउज ऐवन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा समेत अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले आरोपियों के पक्ष को सुनने का अधिकार को छीना नहीं जा सकता है।

ईडी ने यंग इंडिया कंपनी को लेकर कोर्ट में रखी बात

वही ईडी ने कोर्ट से कहा कि यंग इंडिया कंपनी का स्वामित्व हमेशा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास रहा है। उसने दावा करते हुए कहा कि यंग इंडिया ने कभी कोई बिजनेस एक्टिविटी नहीं थी, उसका काम बस सोनिया गांधी और राहुल गांधी को फायदा पहुंचाना था। हमने 21 जगहों पर रेड की थी, जिसमें 51 लाख के आसपास कैश बरामद हुआ था और कई आपत्तिजनक साक्ष्य भी बरामद हुए।

अभिषेक मनु सिंघवी ने की सुनवाई टालने की मांग

अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की सुनवाई जुलाई तक टालने की मांग की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि उनको हाल ही में चार्जशीट की कॉपी मिली है, जिसको पढ़ने में समय लगेगा। ईडी की तरफ से विशेष वकील ने सुनवाई टालने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि पिछली सुनवाई पर ही चार्जशीट की कॉपी दी गई थी और उसके बाद आज सुनवाई के लिए केस लगा था। उस समय किसी भी तरह की आपत्ति नहीं जताया गई थी, लेकिन अब सुनवाई टालने की मांग की जा रही है। हम आज ही सुनवाई के लिए तैयार है।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस

नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यह अखबार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस पार्टी का मुखपत्र बन गया। इसे एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी कि एजेएल प्रकाशित करती थी, जिसकी स्थापना 1937 में हुई थी। एजेएल के पास दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और अन्य शहरों में कई बेहद महंगी प्रॉपर्टी थीं, जो उन्हें सरकारी रियायतों पर मिली थीं। समय के साथ वित्तीय कठिनाइयों और घाटे की वजह से 2008 में अखबार का प्रकाशन बंद हो गया। उस समय एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक कोर्ट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की। स्वामी ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) नाम की कंपनी के जरिए एजेएल की संपत्तियों को धोखे से हासिल किया। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी और इसका मकसद 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर कब्जा करना था।

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान को दी अंतरिम जमानत, एसआईटी गठित

हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कमेंट करने पर पुलिस ने बीते रविवार को उनको गिरफ्तार किया था। प्रोफेसर अली खान के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एक जठेड़ी गांव के सरपंच और भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य योगेश जठेड़ी ने दर्ज कराई थी और दूसरी राज्य महिला आयोग ने नोटिस की अवमानना के तहत दर्ज कराई थी।

हालांकि इस मामले में प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम बेल मिल गई है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर कई शर्ते भी लगाई हैं। आइए जानते हैं कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या-कुछ कहा है।

इस केस की होगी जांच

अभी इस केस की जांच की जाएगी और इसके लिए तीन सदस्यों की एसआईटी टीम बनाई गई है। जो कि सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। इस टीम में एक महिला अधिकारी भी शामिल है। प्रोफेसर से बेंच ने कहा है कि जांच पूरी होने तक वे पहलगाम या फिर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया में किसी तरह की कोई पोस्ट नहीं करेंगे। अगर उन्होंने ऐसा किया तो बेल की शर्त का उल्लंघन माना जाएगा और अंतरिम जमानत भी खत्म हो जाएगी। उन्हें अपना पासपोर्ट सोनीपत की अदालत में सरेंडर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन पूरा करने का निर्देश दिया है और प्रोफेसर अली खान को जांच में शामिल होने और जांच में पूरा सहयोग करने को कहा है।

चलिए जानें कि प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर कौन सी धाराएं लगी थीं और इसमें कितने दिन की सजा मिलती है।

कौन कौन सी धाराएं लगीं

प्रोफेसर पर आरोप हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया में ऐसी बातें कही हैं जिससे सेना की गरिमा को ठेस पहुंचती है और भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों का अपमान है। प्रोफेसर अली खान पर धारा 152 लगी है, जिसमें देश को नुकसान पहुंचाने वाला कार्यों से संबंधित है। जो कि संज्ञेय है और गैर-जमानती है। धारा 196 (1) विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ाना, धारा 197 (1) देश की संप्रभुता को खतरे में डालकर झूठी जानकारी देना और धारा 299 किसी धर्म का अपमान करना।

इसमें कितनी सजा मिलती है

धारा 152 गैर-जमानती है जिसमें सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ-साथ जुर्माने का प्रावधान है। धारा 196 (1) के तहत अपराध करने पर अधिकतम तीन साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकते हैं। अगर अपराध किसी पूजा स्थल पर हुआ है तो सजा पांच साल तक हो सकती है। धारा 197 (1) में तीन साल की जेल या फिर जुर्माना दोनों शामिल हो सकता है। आईपीसी की धारा 299 सदोष हत्या (culpable homicide) से संबंधित है। इसके तहत सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसमें 10 साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है। अगर सदोष हत्या का इरादा मृत्यु का हो तो सजा आजीवन जेल या फिर फांसी भी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान की ओर से वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे। अली खान की पोस्ट की भाषा पर सवाल उठते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “हमें यकीन है कि वह बहुत शिक्षित हैं। आप दूसरों को चोट पहुंचाए बिना बहुत सरल भाषा में अपनी बात कह सकते थे। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर सकते थे जो सरल और सम्मानजनक हों।

राक्षसों ने हमारे लोगों पर हमला किया – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कांत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। क्या यह सब बात करने का समय है? देश पहले से ही इन सब से गुजर रहा है। राक्षस आए और हमारे लोगों पर हमला किया और इस समय हमें एकजुट होना चाहिए। ऐसे मौकों पर सस्ती लोकप्रियता क्यों हासिल की जाए? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाले समाज के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जानबूझकर शब्दों का चयन दूसरे पक्ष को अपमानित करने और असहज करने के लिए किया जाता है।

जस्टिस कांत ने आगे कहा कि एक प्रोफेसर होने के नाते उनके पास इस्तेमाल करने के लिए डिक्सनरी के शब्दों की कमी नहीं होनी चाहिए। वह ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, एक तटस्थ भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता था।

यहां समझें क्या था पूरा मामला

बता दें कि पुलिस ने बीते 18 मई को एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उन पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगा था। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने भी हाल ही में एसोसिएट प्रोफेसर को एक नोटिस जारी किया था।

आपको बताते चले कि कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया था। इस ऑपरेशन में 100 के करीब आतंकी मारे गए थे। इसका बाद पाकिस्तानी सेना के दुस्साहस का जवाब देते हुए भारतीय बलों ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान को सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा था।

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ये ट्रेलर था, सही समय पर पूरी पिक्चर भी दिखाएंगे – राजनाथ सिंह

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज शुक्रवार को भारत-पाकिस्तान सीमा के पास भुज एयरबेस का दौरा कर रहे हैं। राजनाथ सिंह यहां वायु योद्धाओं से बातचीत कर रहे हैं। बता दें कि भुज एयरबेस भारत के उन केंद्रों में से एक था जिसे पिछले सप्ताह पाकिस्तानी सेना द्वारा निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एयरबेस पर वायु योद्धाओं को संबोधित किया है। वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल ए.पी. सिंह भी राजनाथ सिंह के साथ पहुचे हैं।

एयरफोर्स की पहुँच पाकिस्तान के हर कोने तक

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भुज में कहा, ”यह कोई छोटी बात नहीं है कि हमारी एयरफोर्स की पहुँच पाकिस्तान के हर कोने तक है। यह बात पूरी तरह साबित हो चुकी है। आज स्थिति यह है कि भारत के फाइटर प्लेन बिना सरहद पार किए ही, यहीं से उनके हर कोने तक प्रहार करने में सक्षम है। पूरी दुनिया ने देख लिया है कि कैसे आपने पाकिस्तान की धरती पर मौजूद, आतंकवाद के नौ ठिकानों को ध्वस्त कर दिया, बाद में की गई कारवाई में उनके अनेक एयरबेस तबाह कर दिए।

पाकिस्तान को दिन में दिखाए तारे – रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की तारीफ की। उन्होंने कहा, ”ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत को तो पाकिस्तान ने खुद स्वीकार किया है। हमारे देश में एक कहावत काफी पुरानी है और वह है – दिन में तारे दिखाना। मगर भारत मे बनी ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान को रात के अंधेरे में दिन का उजाला दिखा दिया है। भारत के जिस एयर डिफेंस सिस्टम की तारीफ हर तरफ हो रही है, उसमें डीआरडीओ (DRDO) द्वारा बनाये गए ‘आकाश’ और अन्य राडार सिस्टम की जबरदस्त भूमिका रही है।”

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को पहुंचाया भारी नुकसान

भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाक के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। इंडियन एयर फोर्स ने इस दौरान अहम भूमिका निभाई। भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 5 एयरक्राफ्ट मार गिराए। इसमें 2 फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इंडियन एयरफोर्स ने केवल पराक्रम ही नहीं दिखाया है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने प्रमाण भी दिया है। प्रमाण इस बात का कि अब भारत की युद्ध नीति और तकनीकी दोनों बदल चुकी है।

आपने नए भारत का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह संदेश है कि अब भारत केवल विदेशों से लिए गए हथियारों और प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि भारत में बने अस्त्र और शस्त्र भी हमारी सैन्य शक्ति का हिस्सा बन चुके हैं। अब भारत में बने और भारतीय हाथों से बने हथियार भी अचूक और अभेद हैं, यह पूरे विश्व ने देख लिया है।

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर बधाई देता हूँ – राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने जवानों से कहा कि मैं आप सबको, एक बार फिर, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर बधाई देता हूँ। मैं बस इतना कहूँगा, कि आपके पराक्रम ने यह दिखा दिया, कि यह वो सिन्दूर है, जो श्रृंगार का नहीं, बल्कि शौर्य का प्रतीक है। यह वो सिन्दूर है, जो सौंदर्य का नहीं, बल्कि संकल्प का प्रतीक है। यह सिन्दूर, खतरे की वह लाल लकीर है, जो भारत ने अब आतंकवाद के माथे पर खींच दी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं इस अवसर पर, आप सभी के साथ-साथ, देश की जनता का भी आभार प्रकट करता हूं। भारत की जनता ने, एकजुटता और समझदारी का परिचय देते हुए, आपका सहयोग किया। इस लड़ाई में न केवल सरकार, आर्म्ड फोर्सेज और सुरक्षाबल एकजुट थे, बल्कि भारत का हर नागरिक, एक सिपाही की तरह इसमें भागीदार बना।

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शिक्षा निदेशालय के आदेश को दिखाया ठेंगा, फिर काटा बच्चों का नाम

दिल्ली के द्वारका स्थित डीपीएस स्कूल का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज फिर सुबह-सुबह जब 32 बच्चे स्कूल गए तो स्कूल परिसर ने उन्हें भगा दिया। बता दें कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने आदेश दिया था कि बच्चों को फीस जमा नहीं होने के कारण पढ़ाई से वंचित नहीं किया जाए। इतना ही नहीं डीपीएस द्वारका ने स्कूल गेट पर बाउंसर तैनात कर रखे हैं, जिन्होंने लड़कियों को स्कूल में घुसने पर हाथ से रोक दिया। बता दें कि अब पैरेंट्स ने इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की ओर रूख किया है। पैरेंट्स ने आज कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट का मामला डाला, जिसे पर हाईकोर्ट आज सुनाई करेगा।

डीपीएस ने बाउंसर कर रखे हैं गेट पर तैनात

वहीं, पैरेंट्स ने स्कूल द्वारा तैनात किए गए बाउंसरों पर आरोप लगाया है कि जब कुछ बच्चों ने स्कूल में एंट्री करने की कोशिश की, जिसमें कुछ लड़कियां भी शामिल थी तो उन पुरुष बाउंसरों ने लड़कियों को हाथ लगाकर रोका जिसके बाद अभिभावकों ने कहा कि ये पुरुष बाउंसर लड़कियों का हाथ कैसे लगा सकते हैं। इसके अलावा, डीपीएस द्वारका ने इन बच्चों के अभिभावकों को भी आज होने वाली पीटीएम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी।

फिर 32 बच्चों का काटा नाम

जानकारी दे दें कि आज एक बार फिर से फीस ना जमा करने के चलते डीपीएस द्वारका ने 32 बच्चे जिनका नाम काट दिया था और उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया। शिक्षा निदेशालय के ताज़ा आदेश के बावजूद स्कूल परिसर में एंट्री नहीं करने दिया गया। स्कूल प्रशासन द्वारा स्कूल के बाहर बाउंसर भी लगाए गए हैं।

पूर्व सीएम आतिशी ने लिखा पत्र

आज सुबह इस मामले में आप नेता अतिशी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक पत्र भी लिखा है, बता दें कि कल भी अभिभावकों ने डीपीएस द्वारका के बाहर प्रदर्शन करा था। 9 मई को डीपीएस द्वारका ने 29 छात्रों को स्कूल ने तत्काल प्रभाव से निकाल दिया था, जिसके बाद अभिभावक लगातार स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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तुर्किए पर हमला करने का मतलब सीधे तौर पर अमेरिका पर हमला करना

भारत और पाकिस्तान विवाद के बीच देश ने देख लिया है कौन हमारा दोस्त है और कौन हमारा दुश्मन है। जिस तुर्किए में भूकंप से तबाही मचने पर भारत ने दिल खोलकर मदद की थी, उसी ने पीठ में खंजर घोंपा है। यही वजह है कि देश में तुर्किए और उसके सामानों का बायकॉट किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए पाकिस्तान की मदद करने के बाद बेनकाब हो चुका है। लेकिन अमेरिका भारत के दुश्मन से दोस्ताना व्यवहार निभा रहा है।

अमेरिका तुर्किए को मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल बेच रहा है। अमेरिका का विदेश विभाग तुर्किए को 225 मिलियन डॉलर की मिसाइलें बेच रहा है। वहीं अब भारत और अमेरिका के रिश्ते भी कुछ खास ठीक नहीं हैं। ऐसे में अगर भारत या कोई अन्य देश तुर्किए पर हमला करने की सोचता है तो क्या वो हमला अमेरिका पर भी माना जाएगा,  चलिए जानते है ऐसा क्यों है।

राष्ट्रपति ट्रंप के रवैये की हो रही आलोचना

दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरीके से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का क्रेडिट लेने की कोशिश की। उसके बाद से उनके रवैये की जमकर आलोचना की जा रही है। क्योंकि विदेश मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान में संघर्ष विराम का समझौता सीधे डीजीएमओ (DGMO) के स्तर पर हुआ है और वो भी पाकिस्तान की तरफ से अनुरोध करने पर। इसका कारण यह था कि भारतीय वायुसेना की कार्रवाई बहुत प्रभावी थी, इसीलिए पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा।

तुर्किए और अमेरिका का रिश्ता क्या कहलाता है

वहीं तुर्किए और अमेरिका के भले ही सीधे संबंध न हों, लेकिन दोनों देश नाटो के सदस्य हैं। नाटो का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य साधनों द्वारा मित्र राष्ट्रों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा करना है। नाटो ट्रान्साटलांटिक समुदाय का प्रमुख सुरक्षा साधन है और इसके कॉमन लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति है।

नाटो के तीन मुख्य कार्य हैं, पहला है सामूहिक रक्षा करना, दूसरा है संकट निवारण और प्रबंधन, और तीसरा सहकारी सुरक्षा है। ये कार्य उत्तरी अटलांटिक संधि के बाद, गठबंधन द्वारा अपनी नीतियों, सैन्य क्षमताओं और परिचालन कार्रवाई को परिभाषित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रमुख दस्तावेज 2022 की रणनीतिक अवधारणा में निहित हैं।

अमेरिका क्यों कर रहा तुर्किए की मदद

ऐसे में अमेरका ने जो तुर्किए को 304 मिलियन डॉलर मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दी है। यह कदम नाटो सहयोगी व्यापार और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए उठाया है। एक तरफ ट्रंप भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में अपनी दखलअंदाजी का झूठ बता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ तुर्किए को मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं। दो दिन पहले तो ट्रंप ने उस आतंकी से भी हाथ मिलाया था, जिस पर कभी अमेरिका ने करोड़ों का इनाम रखा था और जेल भी भेजा था।

लेकिन जिस तरीके से अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ यूटर्न लिया है, ये भारत के लिए खतरा हो सकता है। पूरी दुनिया जानती है कि ट्रंप का रवैया कैसा है, वो क्रेडिट लेने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। भले ही वो काम उन्होंने किया हो या न किया हो। यही उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीजफायर के दौरान भी करने की कोशिश की।

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समय-सीमा तय करने के फैसले पर राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे सवाल

राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा तय करने के फैसले पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सवाल खड़े किए हैं। दरअसल 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह फैसला सुनाया या था। इस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल पूछे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रियाओं का दौर लंबे समय तक जारी रहा है। सत्ताधारी दल हो या विपक्ष दोनों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस फैसले को संवैधानिक मूल्यों और व्यवस्थाओं के विपरीत होने के साथ-साथ संवैधानिक सीमाओं का भी अतिक्रमण बताया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से 14 संवैधानिक प्रश्नों पर उनकी राय मांगी है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे सवाल

1 |   अनुच्छेद 200 के अंतर्गत विधेयक प्रस्तुत किए जाने पर राज्यपाल के पास क्या संवैधानिक विकल्प उपलब्ध हैं ?

2 |  क्या राज्यपाल इन विकल्पों का प्रयोग करने में मंत्रिपरिषद की सलाह से बाध्य हैं ?

3  क्या अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के विवेक का प्रयोग न्यायिक समीक्षा के अधीन है ?

4 |  क्या अनुच्छेद 361, अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के कार्यों की न्यायिक जांच पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है?

5 |  क्या न्यायालय संवैधानिक समयसीमा के अभाव के बावजूद अनुच्छेद 200 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय राज्यपालों के लिए समयसीमा निर्धारित कर सकते हैं और प्रक्रियाएं निर्धारित कर सकते हैं ?

6 | क्या अनुच्छेद 201 के अंतर्गत राष्ट्रपति का विवेक न्यायिक समीक्षा के अधीन है ?

7 |क्या न्यायालय अनुच्छेद 201 के अंतर्गत राष्ट्रपति के विवेकाधिकार के प्रयोग के लिए समयसीमा और प्रक्रियागत आवश्यकताएं निर्धारित कर सकते हैं ?

देश की राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट से पूछे सवाल

8 | क्या राज्यपाल द्वारा आरक्षित विधेयकों पर निर्णय लेते समय राष्ट्रपति को अनुच्छेद 143 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की राय लेनी चाहिए ?

9 |  क्या अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा लिए गए निर्णय, किसी कानून के आधिकारिक रूप से लागू होने से पहले न्यायोचित हैं ?

10 | क्या न्यायपालिका अनुच्छेद 142 के माध्यम से राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रयोग की जाने वाली संवैधानिक शक्तियों को संशोधित या रद्द कर सकती है ?

11 | क्या अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल की स्वीकृति के बिना कोई राज्य कानून लागू हो जाता है ?

12 | क्या सर्वोच्च न्यायालय की किसी पीठ को पहले यह निर्धारित करना होगा कि क्या किसी मामले में पर्याप्त संवैधानिक व्याख्या शामिल है और फिर उसे अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ को भेजना होगा ?

13 | क्या अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियां प्रक्रियात्मक मामलों से आगे बढ़कर ऐसे निर्देश जारी करने तक विस्तारित हैं जो मौजूदा संवैधानिक या वैधानिक प्रावधानों का खंडन करते हैं ?

14 |  क्या संविधान सर्वोच्च न्यायालय को अनुच्छेद 131 के अंतर्गत मुकदमे के अलावा किसी अन्य माध्यम से संघ और राज्य सरकारों के बीच विवादों को सुलझाने की अनुमति देता है ?

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मंत्री विजय शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट हुआ नाराज़

कर्नल सोफिया कुरैशी पर कैबिनेट मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने का स्वत: संज्ञान लिया था। इस मामले में महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने आदेश के पालन में विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। एफआईआर की कॉपी देखने के बाद सरकार के जवाब और एफआईआर की ड्राफ्टिंग पर हाईकोर्ट ने ऐतराज जताया है।

हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि एफआईआर इस तरीके से ड्राफ्ट की गई है। जिसमें अभियुक्त की करतूतों का ज़िक्र ही नहीं किया गया है। एफआईआर में लापरवाही को जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर मामले को चुनौती दी गई, तो ये इस एफआईआर के दम पर ये आसानी से रद्द हो सकती है। ऐसे में हाईकोर्ट के कहने के बावजूद भी अदालत के विश्वास पर एफआईआर खरी नहीं उतरती है। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश एफआईआर में फिर से सुधार किया जाए। बिना किसी हस्तक्षेप और दबाव के एफआईआर और जांच आगे बढ़े। वेकेशन के बाद टॉप ऑफ़ द लिस्ट में मामले पर सुनवाई होगी।

राहत के लिए खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

अब इस मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के 14 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी है, जिस पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी फटकार मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने विजय शाह को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि उच्च पदों पर बैठे लोगों से इस तरह की बयानबाजी की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इस तरह की बयानबाजी का ये बिल्कुल भी समय नहीं है। खासतौर पर जब देश ऐसे समय से गुजर रहा है। अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में कल होनी है।

https://x.com/KrVijayShah/status/1922684450036433348

मंत्री विजय शाह ने मांगी माफी

कैबिनेट मंत्री ने एक वीडियो जारी करके आज माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि अगर उसकी वजह से किसी भी समाज की भावना आहत हुई है, तो इसके लिए मैं दिल से न सिर्फ शर्मिंदा हूं बल्कि बेहद दुखी भी हूं और सभी से माफी चाहता हूं। उन्होंने सोफिया कुरैशी को लेकर आगे कहा हमारे देश की वो बहन सोफिया कुरैशी जिन्होंने राष्ट्र धर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर जो काम किया है। उन्हें हमारी सगी बहन से भी ऊपर सम्मानित मानता हूं। उनके इस बयान के बात इस्तीफे की मांग भी बढ़ गई है।

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5 राज्‍यों में काम कर रहीं तुर्की की कंपनियां, खत्‍म हो सकती है पार्टनरशिप

भारत और पाकिस्‍तान में जारी तनाव के बीच तुर्की ने खुलकर पाकिस्‍तान का पक्ष लिया और उसे इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है। भारतीय सैलानियों ने पहले ही तुर्की के लिए अपनी बुकिंग कैंसिल कराके जोरदार झटका दे दिया है और अब सरकार भी सबक सिखाने के मूड में है। तुर्की की कई कंपनियां यूपी, दिल्‍ली सहित देश के 5 राज्‍यों में विभिन्‍न प्रोजेक्‍ट पर काम कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्‍द ही इनके कामकाज की समीक्षा करेगी और इन कंपनियों को प्रोजेक्‍ट से हटा सकती है।

तुर्की को सिर्फ पर्यटन से ही नहीं व्‍यापार से भी चोट देने की तैयारी चल रही है। खुदरा व्‍यापारियों के सबसे बड़े संगठन कैट सहित कई उद्योग संगठनों ने तुर्की से कारोबार बंद करने और उसका बहिष्‍कार करने की मांग उठाई है। देशभर में तुर्की के खिलाफ बायकाट का अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे निगेटिव सेंटिमेंट के दौरान मोदी सरकार भारत में तुर्की के कारोबारी करार प्रोजेक्‍ट की समीक्षा करने की तैयारी में है। मामले से जुड़े एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि ऐसे सभी प्रोजेक्‍ट जिसमें तुर्की की कंपनियां शामिल हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी।

क्‍या काम करती हैं तुर्की की कंपनियां

एक अधिकारी के अनुसार, सरकारी और निजी सेक्‍टर के किसी भी प्रोजेक्‍ट में शामिल तुर्की कंपनियों का डाटा जुटाया जा रहा है। इसके बाद इनके कामकाज की समीक्षा की जाएगी। तुर्किश कंपनियां आईटी, मेट्रो रेल और टनल सहित कई तरह के प्रोजेक्‍ट में काम कर रही हैं। इनकी ज्‍यादातर हिस्‍सेदारी पांच राज्‍यों गुजरात, महाराष्‍ट्र, यूपी, दिल्‍ली और जम्‍मू-कश्‍मीर में है। दोनों देशों के बीच वित्‍तवर्ष 2023-24 में 10.4 अरब डॉलर (करीब 92 हजार करोड़ रुपये) का द्विपक्षीय कारोबार रहा है।

एफडीआई भी तुर्की से आता है

वाणिज्‍य मंत्रालय के ट्रस्‍ट की ओर से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में तुर्की 45वें नंबर पर आता है। अप्रैल, 2000 से सितंबर, 2024 तक तुर्की से 24 करोड़ डॉलर का एफडीआई आया है। तुर्की ने भारत में निर्माण, विनिर्माण, एविएशन, मेट्रो रेल इन्‍फ्रा, एडुकेशन और मीडिया सेक्‍टर में भी निवेश किया है। कंस्‍ट्रक्‍शन और टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में तुर्की कई सालों से भारत का पार्टनर रहा है।

किस शहर में चल रहा काम

एक रिपोर्ट के अनुसार, कई तुर्किश कंपनियां लखनऊ, पुणे और मुंबई में भारतीय कंपनियों के साथ मेट्रो रेल प्रोजेक्‍ट पर काम कर रही हैं। इसके अलावा तुर्की की एक कंपनी ने भारतीय इंडस्‍ट्री के साथ गुजरात में मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट लगा रही है। इतना ही नहीं तुर्किश कंपनी भारतीय एयरपोर्ट का संचालन भी करती है। इससे पता चलता है कि तुर्किश कंपनियों की भारत में हिस्‍सेदारी कम नहीं है। यह कंपनियां न सिर्फ इन्‍फ्रा सेक्‍टर से जुड़ी हैं, बल्कि सीधे पब्लिक सर्विस से भी जुड़ी हैं।

तुर्की में हर भारतीय खर्च कर रहा 3 लाख

आपको बताते चले तुर्की और अजरबैजान के लिए भारत कितना बड़ा बाजार है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 में चीन के बाद तुर्की जाने वाले सबसे ज्‍यादा पर्यटक भारतीय थे। बीते साल 2.70 लाख भारतीय पर्यटकों ने तुर्की का सफर किया, जबकि अजरबैजान में यह संख्‍या 2.43 लाख रही है। अजरबैजान जाने वाले हर भारतीय पर्यटक ने 1 से सवा लाख रुपये तक खर्च किए हैं, जबकि तुर्की में खर्च का यह पैसा 3 लाख रुपये से लेकर 3.35 लाख रुपये तक रहा है।

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सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी, 48 घंटे में सेना ने 6 आतंकी हुए ढेर

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से सुरक्षाबलों ने फैसला कर लिया है कि जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को पूरी तरह से साफ कर देना है। सुरक्षाबल लगातार पूरे प्रदेश में आतंकियों की खोज में तलाशी अभियान चला रहे हैं और एनकाउंटर में आतंकियों को ढ़ेर कर रहे हैं। अब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में भी सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई है। इस एनकाउंटर में 3 आतंकियों को मार गिराया गया है।

त्राल इलाके में हुई मुठभेड़

दरअसल सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच ये मुठभेड़ जम्मू कश्मीर के त्राल के नादिर गांव में हुई है। ये इलाका दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के अंतर्गत आता है। सुबह में मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने इलाके में 02 से 03 आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई थी। आखिरकार सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने एंटी टेरर ऑपरेशन में तीनों आतंकियों को मार गिराया है।

पुलिस ने जारी किया बयान

त्राल इलाके में त्राल सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ को लेकर कश्मीर जोन की पुलिस ने भी बयान जारी किया था। पुलिस ने कहा- “अवंतीपोरा के नादेर, त्राल इलाके में एनकाउंटर शुरू हो गया है। पुलिस और सुरक्षा बल काम पर लगे हुए हैं। आगे की डिटेल्स जारी की जाएगी।”

तीन और हुए आतंकी ढ़ेर

इससे पहले जम्मू कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। ये तीनों आतंकी लश्कर-तैयबा के थे। भारतीय सेना ने बताया है कि इन आतंकियों को ऑपरेशन केलर के तहत आतंकी संगठन के तीन सदस्यों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट को शोकल केलर, शोपियां के सामान्य क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद मुठभेड़ में तीन कट्टर आतंकवादियों को मार गिराया गया। फिलहाल ऑपरेशन जारी है।

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समय से पहले मॉनसून देगा दस्तक, मौसम विभाग ने दिया अपडेट

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मौसम को लेकर अपडेट जारी करते हुए बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी भाग, अंडमान सागर के दक्षिणी भाग, निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर के उत्तरी भाग के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने पिछले दो दिनों में निकोबार द्वीपसमूह में हुई मध्यम से भारी वर्षा का हवाला देते हुए बताया कि इस अवधि में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण, निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ा है। इसके अलावा इस क्षेत्र में ‘आउटगोइंग लांगवेव रेडिएशन’ (ओएलआर) में भी कमी दर्ज की गई है, जो बादल छाए रहने का संकेत देता है। आईएमडी ने स्पष्ट किया कि ये सभी स्थितियां इस क्षेत्र में मॉनसून के आगमन के लिए अनुकूल मानकों को पूरा करती हैं।

मौसम विभाग ने आगे जानकारी दी कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण अरब सागर, मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र के अधिकतर भाग, दक्षिण बंगाल की खाड़ी के अधिकतर क्षेत्रों, संपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अंडमान सागर के शेष भागों और मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

कब दस्तक देगा मॉनसून?

प्राथमिक वर्षा प्रणाली के सामान्य तिथि 01 जून से पहले, 27 मई को केरल पहुंचने की संभावना जताई गई है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो 2009 के बाद यह पहला मौका होगा जब मॉनसून भारतीय भूमि पर समय से पहले दस्तक देगा। 2009 में मॉनसून 23 मई को केरल में शुरू हुआ था।

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 01 जून तक केरल में प्रवेश करता है और लगभग एक महीने बाद 08 जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू होता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है।

सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना – मौसम विभाग

अप्रैल में मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 2025 के मॉनसून के मौसम में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया था। साथ ही, मौसम विभाग ने ‘अल नीनो’ की स्थिति की संभावना को भी खारिज कर दिया था, जो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा का कारण बनती है। ‘अल नीनो’ एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब होती है जब पूर्वी प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के पास समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

मॉनसून भारत के कृषि क्षेत्र के लिए जीवन रेखा की तरह है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके अतिरिक्त, यह देश भर में पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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यूक्रेन छोड़िए, व्लादिमीर पुतिन तो अब इस देश पर कर रहे कब्जे का प्लान

यूक्रेन पर हमले के बाद अब रूस की गतिविधियां एक नए मोर्चे की ओर इशारा कर रही हैं। सैटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ है कि रूस ने फिनलैंड की सीमा के बेहद करीब चार अहम ठिकानों पर बड़ी सैन्य तैनाती शुरू कर दी है। ऐसे वक्त में जब यूक्रेन और रूस के बीच तुर्किये में संभावित बैठक की चर्चा चल रही है, व्लादिमीर पुतिन की ये चुपचाप तैयारी यूरोप को गहरी चिंता में डाल रही है। स्वीडन के राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर SVT ने Planet Labs की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें रूस के चार ठिकानों कामेनका, पेत्रोजावोडस्क, सेवेरोमॉर्स्क-2 और ओलेन्या पर तेज़ी से सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिख रही हैं।

कामेनका फिनलैंड बॉर्डर से सिर्फ 35 मील दूर स्थित है। इस इलाके में फरवरी से अब तक 130 से ज्यादा मिलिट्री टेंट लगाए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि यहां करीब 2,000 सैनिकों को रखा जा सकता है। वहीं पेत्रोजावोडस्क फिनलैंड सीमा से 109 मील की दूरी पर यहां तीन बड़े स्टोरेज हॉल बनाए गए हैं, जहां 50-50 बख्तरबंद वाहन रखे जा सकते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये हॉल असली संख्या छिपाने के लिए बनाए गए हैं। तीसरी जगह है सेवेरोमॉर्स्क-2, यहां सेटेलाइट तस्वीरों में कई हेलिकॉप्टर देखे गए हैं। ये बेस रूस के एयर ऑपरेशन्स के लिहाज़ से अहम माना जाता है। चौथा है ओलेन्या, यूक्रेन के मुताबिक इस बेस से कई बार उनकी जमीन पर हमले किए गए हैं। यहां भी नई हलचल देखी गई है।

फिनलैंड-स्वीडन के नाटो में शामिल होने के बाद बढ़ा तनाव

रूस की ये तैयारी ऐसे वक्त में हो रही है जब फिनलैंड और स्वीडन हाल ही में नाटो का हिस्सा बने हैं। यूक्रेन पर 2022 में रूस के हमले के बाद फिनलैंड ने अप्रैल 2023 में नाटो जॉइन किया। इसके बाद मार्च 2024 में स्वीडन भी नाटो का हिस्सा बना। रूस लगातार नाटो पर आक्रामक होने का आरोप लगाता रहा है और कहा है कि वो जरूरी कदम उठाएगा। अब ये तस्वीरें उसी चेतावनी को सच साबित करती दिख रही हैं।

क्या रूस फिर यूक्रेन जैसा कदम उठाएगा ?

सेटेलाइट तस्वीरों ने 2021 की यादें ताज़ा कर दी हैं, जब यूक्रेन बॉर्डर पर ऐसी ही गतिविधियों के बाद 2022 में रूस ने हमला कर दिया था। फिनलैंड के डिप्टी चीफ ऑफ डिफेंस लेफ्टिनेंट जनरल वेसा विर्टानेन का कहना है कि रूस नाटो की एकता को परख रहा है। स्वीडन के डिफेंस चीफ माइकल क्लेसन ने भी कहा, “हम जब नाटो में शामिल हुए थे, तब रूस ने कहा था कि वो प्रतिक्रिया देगा, अब वो सच साबित हो रहा है।

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आदमपुर एयरबेस पर सेना के जवानों से पीएम मोदी ने मुलाकात की

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पीएम मोदी ने सेना के जवानों से मुलाकात की है। आदमपुर एयरबेस पर पीएम मोदी पहुंचे और यहां उन्होंने जवानों से मुलाकात की। इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार की रात आठ बजे देश को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने जवानों के शौर्य और साहस को सलाम किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सेना ने अपना लक्ष्य हासिल किया है। हमने अपनी सेना को आतंकियों को मिटाने के लिए पूरी छूट दे रखी है।

भारत ने लॉन्च किया ऑपरेशन सिंदूर

बता दें कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर 06-07 मई की रात एयरस्ट्राइक की थी। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादियों के 9 ठिकानों पर स्ट्राइक की। इसमें कई आतंकवादी भी मारे गए। भारत ने इस स्ट्राइक को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद का एक्शन बताया। इसके साथ ही भारत ने कहा कि इस हमले में पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया और न ही किसी आम नागरिक को इससे क्षति पहुंची है। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया।

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पीएम मोदी का पाकिस्तान को साफ संदेश

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद देश को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी का भाषण बिल्कुल स्पष्ट था। पीएम मोदी ने साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान अगर अपने यहां आतंकियों को पनाह देना बंद नहीं करता है तो उसे इसका और अधिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का मत एकदम स्पष्ट है, टेरर और टॉक एक साथ नहीं हो सकते, टेरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता। पीएम मोदी ने कहा- ‘हमारी घोषित नीति रही है, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर (पीओके) पर ही होगी।

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असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के साथ आईएमएफ को भी लिया आड़े हाथ

भारत – पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और ऐसे में इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) की तरफ से पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर का नया लोन दिए जाने ने राजनीतिक हलकों में उबाल ला दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तान के साथ आईएमएफ को भी आड़े हाथों लिया।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “हमारी जमीन पर, हमारे घरों पर, हमारे जवानों पर हमले हो रहे हैं और इनको आईएमएफ से 1 बिलियन डॉलर की मदद दी जा रही है। यह क्या अंतरराष्ट्रीय न्याय है ? उन्होंने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि इनको न सरकार चलानी आती है और न अर्थव्यवस्था। ये केवल भारत में अमन बिगाड़ने और हिंदू-मुस्लिम तनाव फैलाने की योजना बना रहे हैं।

आतंकी के जनाजे में पाक सेना और सरकार के लोग मौजूद

असदुद्दीन ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए लश्कर और जैश के टॉप आतंकियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि जो आतंकी भारत में हमलों के लिए जिम्मेदार थे। उनके जनाजे में पाक सेना के लेफ्टिनेंट जनरल और पंजाब पुलिस के आईजी शामिल होते हैं। यह देश किस नीति पर चल रहा है ? उन्होंने बहावलपुर और मुरीदके में आतंकी समारोहों का उल्लेख करते हुए कहा जिसे अमेरिका ने आतंकी घोषित किया है। वह वहां नमाज-ए-जनाजा पढ़ा रहा है। यह आतंक को आधिकारिक संरक्षण देने जैसा है।

पाकिस्तान ड्रोन से हमला कर रहा है, मासूम मर रहे हैं

असदुद्दीन ओवैसी ने पूंछ, राजौरी और श्रीनगर में हुए हालिया हमलों का जिक्र करते हुए कहा पाकिस्तान अब ड्रोन से हमला कर रहा है। जिसमें आम नागरिक और बच्चे मारे जा रहे हैं। पूंछ में चार मासूम मुसलमान बच्चे भी मारे गए। उन्होंने कहा कि क्या पाकिस्तान ये बताना चाहता है सिर्फ वही जन्नत में जाएंगे ? इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ने का अधिकार तुम्हें किसने दिया है ?

जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान का चीन से समझौता और इस्लाम की बातें ?

असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जब तुम्हारा जमात-ए-इस्लामी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता करता है और फिर इस्लाम की बात करता है, तब तुम्हारी मंशा पर संदेह होता है। जिनजियांग में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर तुम्हारी जुबान नहीं खुलती।

आईएमएफ का नाम अब इंटरनेशनल मिलिटेंट फंड – असदुद्दीन ओवैसी

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आईएमएफ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “ये अब इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड नहीं, इंटरनेशनल मिलिटेंट फंड बन गया है। जो आतंकियों की सरकार को मदद दे रहा है, जबकि हमारे सैनिक शहीद हो रहे हैं।

भारत को एकजुट रहना होगा – असदुद्दीन ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि “कांग्रेस और बीजेपी को आपसी आरोप – प्रत्यारोप छोड़कर एकजुट होकर पाकिस्तान जैसे दुनिया के लिए खतरा बने मुल्क के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। पाकिस्तान के न्यूक्लियर बम को बैन किया जाना चाहिए। आप इस्लाम के नाम पर बच्चों को मार रहे हो और कहते हो कि तुम जन्नत में जाओगे ? हमने 1947 में तुम्हारी टू नेशन थ्योरी को खारिज कर दिया था और आज भी खारिज करते हैं।

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