Tuesday, February 3, 2026
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एनडीए का विकेट आउट, चिराग की उम्मीदवार सीमा का नॉमिनेशन रद्द

बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर है। चुनाव से पहले ही एनडीए को बड़ा झटका लगा है। एक सीट पर एनडीए हिट विकेट आउट हो गया है। मढ़ौरा विधानसभा सीट से एनडीए की प्रत्याशी और अभिनेत्री सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया है। बंटवारे में मढ़ौरा सीट चिराग पासवान की लोजपा-आरवी के खाते में गई थी। सीमा सिंह ने लोजपा के सिंबल से नौमिनेशन दाखिल किया था। शनिवार को पहले चरण के नामांकन पत्रों की जांच की गई। इसी दौरान सीमा सिंह का नॉमिनेशन रिजेक्ट कर दिया गया।

इस सीट पर सीमा सिंह समेत 4 उम्मीदवारों का नामांकन शनिवार को नामांकन रद्द हो गया है। जिन लोगों का नामांकन स्कूटनी के दौरान नामांकन रद्द हुआ उनमें सीमा सिंह के अलावा बसपा से आदित्य कुमार, जदयू से बागी निर्दलीय अल्ताफ़ आलम राजू, विशाल कुमार निर्दलीय का नाम शामिल है।

मढ़ौरा से कुल चार प्रत्याशी मतदान से पहले ही कंटेस्ट से बाहर हो गए। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सीमा सिंह के नामांकन रद्द होने से लोजपा के समर्थकों में निराशा फैल गई है। जबकि विपक्षी दल इसे अपनी संभावनाओं के लिए सकारात्मक अवसर मान रहे हैं। अब मढ़ौरा विधानसभा का चुनावी समीकरण फिर से नए सिरे से आकार ले रहा है।

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अयोध्या दीपोत्सव: रामायण थीम पर सेल्फी प्वाइंट, 80 हजार दीयों से रंगोली

अयोध्या में राम की पैड़ी पर 80 हजार दीयों से सजी रंगोली बनेगी। वहीं, अयोध्या धाम को और भव्य स्वरूप देने के लिए 20 विशेष सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं। इस बार का नवम दीपोत्सव-2025 अयोध्या को नयी सांस्कृतिक ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है। रामनगरी न केवल लाखों दीपों की रोशनी में नहाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की लोक कला, परंपरा और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम भी प्रस्तुत करेगी। इस वर्ष राम की पैड़ी का दृश्य सबसे अलग होगा, जहां 80 हजार दीयों से सजाई जा रही रंगोली अद्भुत दृश्य पेश करेगी, जो भक्तिभाव, सौंदर्य और कला की गहराई को एक साथ दर्शाएगी। अयोध्या दीपोत्सव के इतिहास में पहली बार राम की पैड़ी पर इतनी बड़ी दीप-रंगोली बनाई जा रही है।

80 हजार दीपों से सजाया जाएगा

यह पारंपरिक चौक पूरने की कला पर आधारित है, जिसमें मिट्टी के दीयों, रंगों और फूलों का संयोजन किया जा रहा है। इस अद्वितीय रंगोली में लगभग 80 हजार दीपों को इस प्रकार सजाया जाएगा कि ऊपर से देखने पर यह ईश्वर आमंत्रण के प्रतीकात्मक रूप में नजर आएगी। रंगोली की डिज़ाइन में कलश, स्वास्तिक और कमल पुष्प जैसे पारंपरिक प्रतीकों का समावेश किया गया है।

कलश समृद्धि और मंगल का प्रतीक है, स्वास्तिक शुभता और सकारात्मकता का संकेत देता है और कमल पुष्प भक्ति, पवित्रता और श्रीराम के दिव्य जीवन का प्रतीक माना गया है। लोक संस्कृति में ‘चौक पूरना’ वह शुभ क्षण होता है। जब किसी देवता को आमंत्रित किया जाता है। यह कला न केवल सजावट का माध्यम है, बल्कि यह उस संवाद का प्रतीक भी है। जो मनुष्य और ईश्वर के बीच होता है।

अनूठी दीप-रंगोली को किया जा रहा तैयार

इस अनूठी दीप-रंगोली को डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या की कला विभाग की टीम तैयार कर रही है। 50 छात्राओं ने मिलकर इस रंगोली को डिजाइन और तैयार किया है। रंगोली की प्रमुख संयोजक और कला विभाग की प्रतिभाशाली कलाकार डॉ सरिता द्विवेदी ने बताया राम की पैड़ी पर बनाई जा रही है। यह रंगोली हमारे लिए केवल एक कला नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है।

20 सेल्फी प्वाइंट को हो रहा निर्माण

दीपोत्सव 2025 केवल प्रकाश पर्व न होकर, श्रद्धा, संस्कृति और डिजिटल अनुभव का ऐसा संगम बने जो विश्व को अयोध्या की नई पहचान दे। इसी कड़ी में अयोध्या धाम को और भव्य स्वरूप देने के लिए 20 विशेष सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं और ये सेल्फी प्वाइंट रामायण के विभिन्न अध्यायों पर आधारित होंगे और धर्मपथ, लता चौक, राम की पैड़ी तथा रामकथा पार्क सहित प्रमुख स्थलों पर स्थापित किए जा रहे हैं।

रामायण थीम पर होगा सेल्फी प्वांइट

हर सेल्फी प्वाइंट की थीम रामायण के किसी खास प्रसंग से जुड़ी होगी। इनमें सुमेरु पर्वत को लेकर उड़ते हुए हनुमान जी, भगवान श्रीराम को वर्षा से बचाने के लिए केले के पत्ते के नीचे खड़े हनुमान, श्रीराम और लक्ष्मण को कंधे पर लेकर उड़ते हनुमान, जटायु से वार्तालाप करते प्रभु श्रीराम, अशोक वाटिका में मां सीता से भेंट करते हनुमान, रावण वध का दृश्य, भगवान राम और माता सीता से मिलते केवट, रावण पर बाण चलाते श्रीराम, लंका दहन करते हनुमान, अग्नि परीक्षा देती मां सीता जैसे भावनात्मक व प्रेरक दृश्य शामिल हैं।

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भूपेंद्र पटेल कैबिनेट शपथ, हर्ष संघवी डिप्टी सीएम, रिवाबा जडेजा फिर बनी मंत्री

गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नए मंत्रिमंडल का आज गठन हो गया है। सबसे पहले हर्ष संघवी ने शपथ ली है, उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया है। उनके बाद जीतूभाई वाघाणी और पुरुषोत्तम सोलंकी ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए हैं। भूपेंद्र पटेल सरकार की नई कैबिनेट में 25 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इनमें 3 महिलाएं हैं। पटेल समाज से CM समेत 8 मंत्री होंगे। 8 OBC, 3 SC, 4 ST और 3 महिलाएं हैं। 19 नए चेहरे हैं।

बता दें कि गुजरात में नई कैबिनेट के गठन से एक दिन पहले गुरुवार को सीएम भूपेंद्र पटेल को छोड़कर राज्य के सभी 16 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। गुजरात मंत्रिमंडल में सीएम पटेल सहित 17 मंत्री थे। 8 कैबिनेट स्तर के मंत्री थे जबकि इतने ही राज्य मंत्री (एमओएस) थे।

पूरा मंत्रिमंडल क्यों बदला गया ?

माना जा रहा है कि सीएम से गुजरात के लोग खुश हैं लेकिन मंत्रियों की ग्राउंड रिपोर्ट ठीक नहीं है। दूसरी वजह स्थानीय निकाय के चुनाव हैं जो बहुत जल्द होने वाले हैं। इसके साथ साथ बीजेपी कुछ पुराने दिग्गजों की भी वापसी की तैयारी कर रही है। साथ ही जिन मंत्रियों को हटाया गया है, उन्हें बड़े पद दिए जाएंगे। आपको बता दें कि गुजरात विधानसभा कुल 182 सदस्यों वाली है। सीएम भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर, 2022 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली थी।

पीएम मोदी संग हुई थी बड़ी बैठक

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात भाजपा के नेतृत्व, जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शामिल थे, उनके साथ लंबी बैठक की थी। इस बैठक में कैबिनेट विस्तार समेत संगठन की भूमिकाओं में नए चेहरों को शामिल करने पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि कार्यभार संभालने वाले सभी नए चेहरे गुजरात के लोगों से जुड़ें और अपनी भूमिका संभालने के तुरंत बाद उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दें।

भूपेंद्र पटेल कैबिनेट 3.0 में कौन-कौन ?

1 –   प्रफुल्ल पैंसेरिया

2 –   कुँवरजीभाई बावलिया

3 –    ऋषिकेश पटेल

4 –    कनु देसाई

5 –    परसोतम सोलंकी

6 –    हर्ष सांघवी

7 –    प्रद्युम्न वाज

8 –    नरेश पटेल

9 –     पीसी बरंडा

10 –  अर्जुन मोढवाडिया

11 –  कांति अमृतिया

12 –  कौशिक वेकारिया

13 –  दर्शनाबेन वाघेला

14 –   जीतूभाई वाघाणी

15 –   रीवाबा जाडेजा

16 –   डॉ.जयराम गामित

17 –   त्रिकमभाई छंगा

18 –   ईश्वर सिंह पटेल

19 –   मनीषा वकील

20 –   प्रवीण माली

21 –  स्वरूपजी ठाकोर

22 –  संजय सिंह महीडा

23 –  कमलेश पटेल

24 –  रमन सोलंकी

25 –  रमेश कटारा

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गुजरात में सियासी भूचाल, सभी मंत्रियों ने सीएम भूपेंद्र पटेल को सौंपा इस्तीफा

गुजरात की राजनीति से बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को छोड़कर राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। सरकार के कुल 16 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है।ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि गुजरात में भाजपा सरकार कैबिनेट का विस्तार करने जा रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर गुजरात सरकार के नए मंत्रिमंडल का शपथ समारोह का आयोजन होगा।

कुछ मंत्रियों को बरकरार रखे जाने की उम्मीद

गुजरात की भाजपा सरकार के कैबिनेट विस्तार में मंत्रिमंडल के लगभग 5 मंत्रियों को बरकरार रखे जाने की उम्मीद है जबकि कई पुराने चेहरों का पत्ता कट सकता है। वहीं, कैबिनेट में 16 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। दो महिला नेताओं को मंत्री बनाए जाने की संभावना है। नई कैबिनेट में लगभग 20 से 23 सदस्य होने की उम्मीद है।

पीएम मोदी संग हुई थी बड़ी बैठक

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात भाजपा के नेतृत्व, जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शामिल थे, उनके साथ लंबी बैठक की थी। इस बैठक में कैबिनेट विस्तार समेत संगठन की भूमिकाओं में नए चेहरों को शामिल करने पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि कार्यभार संभालने वाले सभी नए चेहरे गुजरात के लोगों से जुड़ें और अपनी भूमिका संभालने के तुरंत बाद उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दें।

गुजरात सरकार के मंत्रियों की लिस्ट –

1 –     कनुभाई देसाई           –    फाइनेंस, एनर्जी और पेट्रोकेमिकल्स (पारडी)

2 –     बलवंतसिंह राजपूत       –     इंडस्ट्रीज़, लेबर और एम्प्लॉयमेंट (सिद्धपुर)

3 –     ऋषिकेश पटेल           –     हेल्थ, फैमिली वेलफेयर और हायर एजुकेशन (विसनगर)

4 –     राघवजी पटेल            –    एग्रीकल्चर, एनिमल हस्बैंड्री और फिशरीज़ (जामनगर रूरल)

5 –     कुंवरजीभाई बावलिया    –    वॉटर सप्लाई और सिविल सप्लाईज़ (जसदन)

6 –     भानुबेन बाबरिया          –   सोशल जस्टिस और विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट (राजकोट रूरल)

7 –     मुलुभाई बेरा               –   टूरिज्म, फॉरेस्ट और एनवायरनमेंट (खंभालिया)

8 –     कुबेर डिंडोर               –   एजुकेशन और ट्राइबल डेवलपमेंट (संतरामपुर ST)

  9 –      नरेश पटेल              –    गणदेवी

10 –    बच्चूभाई खबाद           –   देवगढ़ बारिया

11 –     परषोत्तम सोलंकी         –    मजूरा

13 –    जगदीश विश्वकर्मा         –    निकोल

14 –   मुकेशभाई ज़िनाभाई पटेल –    ओलपाड

15 –   कुंवाजीभाई हलपति        –    मांडवी (ST)

16 –   भिकुभाई चतुरसिंह परमार –    मोडासा

क्या है कैबिनेट गठन का नियम ?

गुजरात के मंत्रिपरिषद में अब तक मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समेत 17 मंत्री थे। इनमें 8 कैबिनेट स्तर के मंत्री थे जबकि इतने ही राज्य मंत्री थे। आपको बता दें कि गुजरात विधानसभा कुल कुल 182 सदस्यों वाली है। इनमें से कुल संख्या के 15 प्रतिशत या 27 मंत्री हो सकते हैं। इसी महीने की शुरुआत में गुजरात सरकार में राज्य मंत्री जगदीश विश्वकर्मा, केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल की जगह गुजरात भाजपा के अध्यक्ष बने थे। सीएम भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर, 2022 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली थी।

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सीजेआई गवई पर जूता फेंकने वाला राकेश किशोर अवमानना केस में फंसा

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश करने वाले राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने जूताकांड में राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने की अपनी मंजूरी दे दी है। भगवान विष्णु पर सीजेआई गवई की टिप्पणी से नाराज राकेश किशोर ने छह अक्टूबर को उन पर भरी कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में सीजेआई ने उन्हें माफ करते हुए कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था।

अटॉर्नी जनरल द्वारा अवमानना की मंजूरी दिए जाने की बात की जानकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तब दी, जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने इस मामले को उठाया। कोर्ट की अवमानना क नियम सेक्शन 15 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ इसकी कार्रवाई शुरू किए जाने से पहले अटॉर्नी जनरल की मंजूरी की जरूरत होती है। सीजेआई गवई पर जूता फेंकने के मामले में अटॉर्नी जनरल की ओर से यह मंजूरी दी गई है।

जूता फेकना नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी और एजी वेकंटरमणी को पत्र लिखा था। विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को कल लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा जूता फेंकने के मामले को ऐसे ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। राकेश किशोर को जूता फेंकने पर कोई पछतावा नहीं है। मैंने अटॉर्नी जनरल से मंजूरी मांगी थी और इसे कल लिस्ट किया जा सकता है। सोशल मीडिया इस मामले में पागल हो गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस मामले को गंभीर बताया है।

राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी शुरू

विकास सिंह ने कहा राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। संस्था की ईमानदारी दांव पर है। कुछ कार्रवाई की जरूरत है। हालांकि इतना सब सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस घटना को जाने देना ही सबसे बेहतर होगा। मेहता और सिंह ने अदालत से सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट करने पर रोक से संबंधी आदेश पारित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि हर तरह की अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। पीठ ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता है।

इसने सोशल मीडिया की अनियमित प्रकृति के दुष्प्रभावों की ओर इशारा किया और कहा कि हम सामग्री के उत्पाद और उपभोक्ता दोनों हैं। हालांकि, कोर्ट ने मामले की कल मामले की सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया है। जस्टिस कांत ने कहा कि देखते हैं एक हफ्ते में क्या होता है और भी बिकने वाली चीजें पढ़ेंगे। वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि शायद छुट्टियों के बाद कुछ और बिकने वाली चीजें सामने आएंगी।

क्या था मामला ?

प्रधान न्यायाधीश पर जूता फेंकने के प्रयास की यह अभूतपूर्व घटना छह अक्टूबर को हुई। उस दिन सुबह करीब 11:35 बजे अदालत कक्ष संख्या-एक में 71-वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने अपने जूते उतारकर उन्हें प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी अधिवक्ता को तुरंत हिरासत में ले लिया। अदालती कार्यवाही के दौरान हुई इस घटना से अविचलित प्रधान न्यायाधीश ने अदालत के अधिकारियों और अदालत कक्ष में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से इसे नजरअंदाज करने और राकेश किशोर नामक दोषी वकील को चेतावनी देकर छोड़ देने को कहा था।

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बिहार विधानसभा चुनाव: बीजेपी की दूसरी लिस्ट जारी, मैथिली ठाकुर को टिकट

वही आज बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। इस सूची में 12 कैंडिडेट के नाम हैं। मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर को अलीनगर से टिकट मिला है। वहीं, बक्सर सीट से पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि पहली कैंडिडेट लिस्ट में भाजपा ने 71 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए थे। एनडीए के अंदर 101 सीटों पर लड़ रही भाजपा ने अब तक 83 सीटों पर कैंडिडेट के नाम घोषित कर दिए हैं।

बिहार में कब हैं विधानसभा चुनाव ?

बिहार में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए 2 फेजों में चुनाव होंगे। पहले फेज के लिए 6 नवंबर को वोटिंग होगी और दूसरे फेज के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी। पहले चरण में 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 122 सीटों पर वोटिंग होगी। चुनाव का रिजल्ट 14 नवंबर को जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि बिहार में इस बार का चुनाव दिलचस्प होने वाला है क्योंकि इस बार नई पार्टी जनसुराज भी मैदान में है। ऐसे में देखना ये होगा कि बिहार की जनता नई पार्टी पर भरोसा जताती है या फिर पुरानी पार्टी को ही सत्ता की कमान सौंपती है।

यहां देखें बीजेपी की दूसरी लिस्ट –

विधानसभा का नाम                                        उम्मीदवार का नाम

अलीनगर                                                                 मैथिली ठाकुर
हायाघाट                                                                  रामचंद्र प्रसाद
मुजफ्फरपुर                                                              रंजन कुमार
गोपालगंज                                                                सुभाष सिंह
बनियानपुर                                                             केदारनाथ सिंह
छपरा                                                                     छोटी कुमारी
सोनपुर                                                                  विनय कुमार सिंह
रोसड़ा (अजा)                                                         बीरेंद्र कुमार
बाढ़                                                                      सियाराम सिंह
अगिआंव (अजा)                                                     महेश पासवान
शाहपुर                                                                  राकेश ओझा
बक्सर                                                              आनंद मिश्रा, आईपीएस

मैथिली ठाकुर कौन हैं ?

मैथिली ठाकुर का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ था। वह संगीत की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम हैं। उनके पिता रमेश ठाकुर भी एक मैथिल संगीतकार और संगीत शिक्षक हैं। उनकी माता भारती ठाकुर हैं। मैथिली इसी साल जुलाई में 25 साल की हुई हैं और पारंपरिक गायन करती हैं। उन्होंने लोक गायिका के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में उनकी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार के संगठन प्रभारी विनोद तावडे और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात हुई थी। इसके बाद से ये अनुमान लगाया जा रहा था कि मैथिली बीजेपी की तरफ से चुनाव लड़ सकती हैं।

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पारिवारिक विवाद में मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के सांसद मोहबुल्ला नदवी को सख्त आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि चौथी पत्नी रुमाना नदवी को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर हर महीने 30 हजार रुपये का गुजारा भत्ता दिया जाए। कोर्ट ने यह आदेश आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। दरअसल सांसद ने आगरा के फैमिली कोर्ट के एक आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने केस की सुनवाई के दौरान कहा, पारिवारिक विवाद का संभावित समाधान खोजा जाए। कोर्ट ने इस पारिवारिक विवाद को हल करने के लिए मध्यस्थ को नियुक्त किया है। यही नहीं कोर्ट ने मध्यस्थ को तीन महीने का समय दिया है। ताकि वह मध्यस्थता के परिणाम से संबंधित अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर सकें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा, इस मामले को बेंच के साथ लंबित या आंशिक रूप से सुना हुआ नहीं माना जाएगा।

क्या थी सांसद की याचिका

सांसद के खिलाफ 2020 में उनकी चौथी पत्नी रुमाना परवीन ने केस दर्ज कराया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर सीआरपीसी की धारा 127 में मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में एक अप्रैल 2004 को आगरा की फैमिली कोर्ट के अपर प्रधान न्यायाधीश ने एक आदेश दिया था, जिसे रद्द कराने के लिए रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सांसद के वकील ने कोर्ट से इस मामले की मध्यस्थता केंद्र को भेजने का आग्रह किया था।

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दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर ग्रीन पटाखों को सुप्रीम कोर्ट की सशर्त मंज़ूरी

दीवाली पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के लोगों को बड़ा तोहफा दिया है। कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की बिक्री पर लगी रोक हटा दी और पटाखे जलाने की भी इजाजत दी है। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने कहा कि कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एमिकस क्यूरी के सुझावों पर विचार किया। जिसमें उन्होंने त्योहार पर पटाखा उत्पादकों और लोगों को यह राहत देने की सिफारिश की थी।

सीजेआई गवई ने कहा कि ग्रीन पटाखों के अलावा दूसरे पटाखों की तस्करी चिंता का विषय है। हमें संतुलित रवैया अपनाना होगा। कोर्ट ने कहा कि हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में हैं यानी राज्य का 70 प्रतिशत हिस्सा पटाखे पर रोक से प्रभावित है। पिछली सुनवाई में एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया था कि लोगों को त्योहार पर पटाखे जलाने की इजाजत दी जाए।

पटाखा उत्पादकों ने भी दलील दी थी कि पराली जलाने और वाहनों के प्रदूषण पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन सिर्फ पटाखों को निशाना बनाया जा रहा है। कोर्ट ने भी सरकार से पूछा था कि क्या साल 2018 में पटाखों पर बैन के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में कमी आई है। तो कोर्ट को बताया गया कि कुछ खास असर नहीं पड़ा है।

कौन बेच सकता है पटाखे ?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखों पर रोक से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। हमें उत्सव की भावना और पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों के हित का भी ध्यान रखना होगा। एनसीटी और केंद्र सरकार ने भी कोर्ट से पटाखों को लेकर रियायत का अनुरोध किया था। हालांकि, पटाखों की बिक्री की छूट सिर्फ उन्हीं उत्पादकों को मिली है। जिनके पास नेशनल इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) का लाइसेंस है।

नियमित जांच करेगा गश्ती दल

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने 14 अक्टूबर 2024 के आदेश का हवाला दिया। जिसमें दिल्ली सरकार ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। जिसे पूरे एनसीआर में लागू कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि हमें संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। हरित पटाखों के क्यूआर कोड वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि गश्ती दल ग्रीन पटाखा निर्माताओं की नियमित जांच करेगा।

किस समय तक पटाखे जलाने की इजाजत ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नीरी से लाइसेंस्ड उत्पादकों को 18 से 20 अक्टूबर तक सीमित स्थानों पर पटाखा बेचने की इजाजत है। सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोलिंग टीम को निगरानी करने का भी निर्देश दिया और कहा कि सैंपल की जांच की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्यूआर (QR) कोड वाले पटाखे बेचें और गलत पटाखे बेचने वाले पर कार्रवाई हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि दीवाली से पहले वाले दिन और दीवाली वाले दिन सुबह 6 से 7 तक और शाम में 8 से 10 बजे तक पटाखे जलाने की इजाजत है।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

वही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनसीआर के प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिवाली के बाद प्रदूषण पर रिपोर्ट देने को कहा है। दिल्ली-एनसीआर के बाहर से लाकर कोई भी पटाखा यहां नहीं बेचा जा सकेगा और अगर ऐसा पाया गया तो विक्रेताओं का लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की तस्करी की जाती है और ये हरित पटाखों की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

दिल्ली में बढ़ रहा है वायु प्रदूषण

बता दें कि सर्दियों के आगमन के साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगभग तीन महीने के बाद ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 211 दर्ज किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में पिछली बार 11 जुलाई को वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया था। उसके बाद से मानसून की बारिश के कारण शहर में प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आयी थी। लेकिन मौसम के बदलते मिजाज और सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ने लगा है।

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बीजेपी ने जारी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, 71 नामों पर लगी मुहर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में 71 कैंडिडेट के नाम शामिल है। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीदवारों के नामों का औपचारिक ऐलान किया। एनडीए के अहम घटक दल के रूप में बीजेपी इस बार जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरेगी। एनडीए में हुए सीटों के बंटवारे के तहत बीजेपी इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

बीजेपी की सीट और कैंडिटेट की लिस्ट :-

 विधानसभा क्षेत्र                                         उम्मीदवार का नाम

  बेतिया                                                            रेणु देवी

    रक्सौल                                                       प्रमोद कुमार सिन्हा

    पिपरा                                                       श्यामबाबू प्रसाद यादव

    मधुबन                                                       राणा रणधीर सिंह

    मोतिहारी                                                     प्रमोद कुमार

    ढाका                                                        पवन जायसवाल

    रीगा                                                         बैद्यनाथ प्रसाद

   बथनाहा                                                    अनिल कुमार राम

   परिहार                                                     गायत्री देवी

   सीतामढ़ी                                                   सुनील कुमार पिंटू

   बेनीपट्टी                                                    विनोद नारायण

   झाखजौली                                                 अरुण शंकर प्रसाद

   बिस्फी                                                     हरिभूषण ठाकुर बचौल

   राजनगर                                                   सुजीत पासवान

   झंझारपुर                                                   नीतीश मिश्रा

   छातापुर                                                    नीरज कुमार सिंह बबलू

   नरपतगंज                                                  देवंती यादव

   फारबिसगंज                                               विद्यासागर केसरी

   सिकटी                                                    विजय कुमार मंडल

   किशनगंज                                                 स्वीटी सिंह

   बनमनखी                                                 कृष्ण कुमार ऋषि

   पूर्णिया                                                    विजय कुमार खेमका

   कटिहार                                                  तारकिशोर प्रसाद

   प्राणपुर                                                    निशा सिंह

   कोढ़ा                                                     कविता देवी

  सहरसा                                                  आलोक रंजन झा

   गौरा बौराम                                              सुजीत कुमार सिंह

   दरभंगा                                                   संजय सरावगी

   केवटी                                                     मुरारी मोहन झा

   जाले                                                      जीवेश मिश्रा

   औराई                                                    रमा निषाद

   कुढ़नी                                                   केदार प्रसाद गुप्ता

   बरुराज                                                 अरुण कुमार सिंह

   साहेबगंज                                               राजू कुमार सिंह

   बैकुंठपुर                                                मिथिलेश तिवारी

    सीवान                                                 मंगल पांडेय

   दरौंदा                                                  कर्णजीत सिंह

   गोरेयाकोठी                                           देवेश कांत सिंह

   तरैया                                                  जनक सिंह

  अमनौर                                                कृष्ण कुमार मंटू

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क्या है आईआरसीटीसी घोटाला ? जिससे लालू परिवार की बढ़ गईं मुश्किलें

बिहार चुनाव से पहले तेजस्वी यादव आईआरसीटीसी होटल भ्रष्टाचार मामले में फंस गए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी समेत केस के अभियुक्तों पर आरोपों का गठन कर दिया है। हालांकि लालू यादव और राबड़ी देवी ने आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल फेस करने की बात कही है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।कोर्ट से फैसले से लालू परिवार को बिहार चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। सीबीआई की ओर से लगाए गए आरोपों को कोर्ट ने सही बताया है। आईपीसी की धारा 420 और 120बी के अलावे अन्य कुछ धाराओं में आरोप गठित किया गया है।

घोटाला लालू प्रसाद यादव की जानकारी में हुआ – कोर्ट

कोर्ट की ओर से कहा गया है कि यह घोटाला लालू प्रसाद यादव की जानकारी में हुआ। उनकी जानकारी में परिवार के सदस्यों को सस्ते दर पर जमीनें दी गई। आरोपियों की ओर से दी गई दलीलों को कोर्ट ने इनकार कर दिया। अदालत की ओर से कहा गया है कि सबूतों की पूरी चेन है। इस स्कैम के मुख्य साजिशकर्ता लालू यादव ही है। इससे पहले कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, पूर्व सीएम राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। पेशी के लिए लालू, राबड़ी और तेजस्वी रविवार को दिल्ली पहुंच गए थे।

कोर्ट का निर्णय विधानसभा चुनावों पर बड़ा असर डाल सकता है। अदालत के आदेश से यह तय हो गया कि इस मामले में लालू यादव समेत परिवार के सदस्यों पर मुकदमा चलेगा । यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान आईआरसीटीसी होटलों के रखरखाव के ठेकों के आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है।

क्या है आरोप लालू यादव के परिवार पर

लालू यादव समेत परिवार से सदस्यों समेत 14 लोगों पर आरोप है कि आईआरसीटीसी होटलों के रखरखाव के ठेके लालू से जुड़ी एक बेनामी कंपनी से हासिल की गई तीन एकड़ कीमती जमीन के बदले में दिए गए थे। 7 जुलाई, 2017 को सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की और लालू प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े पटना, नई दिल्ली, रांची और गुरुग्राम स्थित 12 ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई ने दावा किया है कि सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। वहीं लालू प्रसाद के वकील ने तर्क दिया है कि उनके खिलाफ इस मामले में मुकदला चलाए रखने का कोई वैधानिक तर्क नहीं है।

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जेल से बाहर आते ही सपा नेता आजम खान को वापस मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की सुरक्षा को बहाल कर दिया गया है। अब उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड और गनर उनके पास भेज दिए गए हैं। सपा नेता आजम खान को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी लेकिन कोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता भी खत्म हो गई थी। इसके चलते उनकी सुरक्षा को वापस ले लिया गया था। मगर बाद में उनकी सुरक्षा को बहाल कर दिया था। इस बीच वह सीतापुर जेल गए। उनके जेल जाने के बाद सुरक्षा को वापस बुलाया गया था।

जेल से आने पर पहले दिन वापस कर दी थी सुरक्षा

23 माह बाद जेल से जमानत पर बाहर आए सपा नेता आजम खान को पहले ही दिन पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए जवानों को भेजा गया था। लेकिन उस समय आजम खान ने सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था। उनके घर पहुंचे गार्ड और गनर को वापस पुलिस लाइन भेज दिया था। लेकिन अब फिर एक बार उनको सुरक्षा प्रदान कर दी गई है। पूर्व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा सरकार ने सपा नेता आजम खान पर जुल्म किए हैं। यह जुल्म लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धब्बा हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि उनकी आजम खां से मुलाकात राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि औपचारिक और आदरभाव से हुई है।

23 माह बाद आजम जेल से आए बाहर 

अब 23 माह बाद आजम खान जेल से जमानत पर बाहर आ गए हैं। उनके जेल से आने के बाद से ही घर पर मिलने वालों को आना लगातार जारी है। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने उनको मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा को भी वापस कर दिया है। आरआई विनोद कुमार ने बताया कि आजम खान की वाई श्रेणी की सुरक्षा को शुक्रवार शाम को ही वापस कर दिया गया था। शनिवार से गार्ड और गनर उनके पास भेज दिए गए हैं।

आजम खान से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य

शनिवार दोपहर स्वामी प्रसाद मौर्य की आजम खान से करीब दो घंटे तक मुलाकात चली। इसके बाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में हत्या,दहेज हत्या, महिला उत्पीड़न, दलित उत्पीड़न और अन्य अपराधों में नंबर एक है। 2027 में भाजपा को हटाने के लिए उनकी जनता पार्टी यूपी की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। स्वामी प्रसाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर आजम पर मुर्गी- बकरी चोरी जैसे आरोप लगाकर उनके पूरे परिवार को सालों-साल तक प्रताड़ित किया। ऐसा अत्याचार तो आपातकाल (इमरजेंसी) में भी किसी के साथ नहीं हुआ था।

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प्रशांत किशोर पर राघोपुर में केस दर्ज, आचार संहिता के उल्लंघन में फंसे

जन सुराज के संस्थापक और बिहार के विधानसभा चुनाव में ताल ठोंक रहे प्रशांत किशोर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। प्रशांत किशोर के खिलाफ वैशाली जिले के राघोपुर थाने में केस दर्ज किया गया है। प्रशांत किशोर पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि प्रशांत किशोर सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ राघोपुर पहुंचे थे। अंचलाधिकारी के आवेदन पर मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि शनिवार को प्रशांत किशोर राघोपुर विधानसभा पहुंचे थे। यहीं से उन्होंने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की।

राघोगढ़ से शुरू की प्रशांत ने चुनावी रैली

बता दें कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के गढ़ राघोपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत की। उन्होंने दावा किया कि वह तेजस्वी को उनके ही क्षेत्र में अमेठी जैसी हार देंगे। वैशाली के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे प्रशांत किशोर का यहां कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया। यह इलाका पटना से करीब 50 किलोमीटर दूर गंगा के उस पार स्थित है और तेजस्वी यादव का पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।

प्रशांत किशोर ने साधा तेजस्वी पर निशाना

प्रशांत किशोर ने राघोपुर में कहा कि आपका विधायक दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुका है। क्या कभी उसने आपकी समस्याएं सुनीं ? इस पर कई ग्रामीणों ने बताया कि वे तेजस्वी यादव से मिलने में भी सक्षम नहीं हैं। राघोपुर रवाना होने से पहले पटना में उन्होंने ने कहा, ‘‘सुनने में आ रहा है कि तेजस्वी यादव इस बार दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। अगर उन्हें डर लग रहा है, तो दो जगह से लड़ लें। लेकिन राघोपुर में उनका हाल 2019 में राहुल गांधी जैसा होगा, जब वे दो सीटों से लड़े थे और अमेठी हार गए थे।

क्या राघोपुर से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत ?

हालांकि जब प्रशांति किशोर से पूछा गया कि क्या वह खुद राघोपुर से तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे ? इस पर उन्होंने कहा कि जनसुराज पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की जब बैठक होगी। तब राघोपुर से मिले फीडबैक के आधार पर सबसे उपयुक्त उम्मीदवार तय किया जाएगा। यह कहना अभी संभव नहीं कि वह मैं होऊंगा या कोई और होगा।

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पाक पर अफगानिस्तान का कहर, 58 पाक सैनिक ढेर, 25 चौकियों पर कब्जा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बीते कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। पाकिस्तानी एयर अटैक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तानी सेना पर हमला कर दिया है। अभी तक की प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हमले में 58 पाकिस्तानी जवानों की मौत हो गई है और 30 से अधिक घायल हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की 25 चौकियों पर कब्जा कर लिया है।

हेलमंद सूचना एवं संस्कृति निदेशक राशिद हेलमंदी ने अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज को बताया कि अफगान सुरक्षा बलों ने कल रात हेलमंद के बहरामचा के शाकिज, बीबी जानी और सालेहान इलाकों में तीन घंटे तक अभियान चलाया। इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों से पांच कलाश्निकोव, एक राइफल, एक नाइट विजन स्कोप और एक शव बरामद किया। इन अभियानों के दौरान 25 पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। वहीं अब तक 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और 30 से अधिक घायल हैं।

क्या है पूरा मामला ?

मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर तनाव चल रहा है। इसी के तहत पाकिस्तान ने 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान के काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में टीटीपी चीफ नूर वली मेहसूद को टारगेट किया था और उन पर एयर अटैक किया था। अब अफगानिस्तान की कार्रवाई में पाक सैनिकों की मौत को जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है और साथ में कहा जा रहा है कि ये अफगानिस्तान का पाकिस्तान को पैगाम है कि वो भी जवाबी अटैक करने की क्षमता रखता है।

मिली जानकारी के मुताबिक, अफगान सेना ने नंगरहर और कुनार प्रांतों में डुरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला किया। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार है, जिसे अपने फैसलों की वजह से कट्टर माना जाता है।

अफगानिस्तान का तीन चौकियों पर कब्जा

टोलो न्यूज के सूत्रों से पता लगा है कि अफगानिस्तानी सेना ने पाकिस्तान की 25 चौकियों को कब्जे में ले लिया है। इस संघर्ष में पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को भी जोरदार पटखनी दी है। यहां पर ये बात ध्यान रखना जरूरी है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर उस वक्त अटैक किया था, जब तालिबान शासन के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी 8 दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं।

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पवन सिंह बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, बोले- पार्टी का सच्चा सिपाही हूं

भोजपुरी सिनेमा और संगीत के सुपरस्टार पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। पवन सिंह ने एक्स पर लिखा, मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और नाहीं मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा।

गौरतलब है कि पवन सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने राजनीतिक रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से शेखपुरा स्थित उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर ज्योति ने साफ किया कि उनका कोई चुनावी मकसद नहीं है।

ज्योति सिंह ने कहा, “मैं किसी चुनाव में भाग लेने या टिकट के लिए नहीं आई हूं। मेरे साथ जिस तरह का अन्याय हुआ है, वह किसी और महिला के साथ न हो। मैं उन सभी महिलाओं की आवाज बनना चाहती हूं जो अन्याय का सामना कर रही हैं। हाल ही में लखनऊ में पवन सिंह के घर पहुंची उनकी पत्नी ज्योति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह भावुक और रोती हुई नजर आईं। इस वीडियो के बाद पवन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद और ज्योति पर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी। इस घटना ने बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों में नया मोड़ पैदा कर दिया है।

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योगी की तारीफ,अखिलेश पर हमला, मायावती ने लखनऊ रैली में दिखाई ताकत

बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्य तिथि के अवसर पर पार्टी प्रमुख मायावती ने लखनऊ में बड़ी रैली की। ये रैली लखनऊ के कांशीराम स्मारक में हुई। रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने बीजेपी, कांग्रेस और सपा पर जमकर निशाना साधा। रैली में मायावती ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी बसपा 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। मायावती ने कहा कि गठबंधन करने से हमेशा ही उनकी पार्टी को नुकसान हुआ है।

बसपा अब किसी से नहीं करेगी गठबंधन

मायावती ने कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी। बसपा किसी से गठबंधन नहीं करेगी। यूपी या देश के दूसरे हिस्से में हमारी पार्टी ने गठबंधन में लड़ा कोई फायदा नहीं हुआ। हमारा वोट तो ट्रान्सफर हो जाता है लेकिन दूसरी पार्टी हमे वोट ट्रांसफर नहीं होता। हमारा वोट प्रतिशत कम होता है। गठबंधन में सरकार बनती है तो ज़्यादा दिन नहीं चल पाती है। एक बार कांग्रेस, एक बार सपा के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा 67 ही सीट जीत पाये। अकेले हमने 2007 में बहुमत की सरकार बनाई।

मायावती ने की योगी सरकार की तारीफ

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार थी और मान्यवर कांशीराम के आदर-सम्मान में यह स्मारक स्थल बनाया गया था तो उसी समय हमारी सरकार ने ये व्यवस्था की थी कि हम लोग यहां आने वालों से टिकट लेंगे। जिसका पैसा लखनऊ में बनाए गए स्मारक और पार्कों के रख-रखाव में इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन दुख की बात यह है कि वर्तमान भाजपा की सरकार से पहले यहां सपा की सरकार थी तो सपा सरकार ने उस टिकट के पैसे को दबाकर रखा… हालत बहुत जर्जर हो चुकी थी।

मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखित चिट्ठी के जरिए कहा और आग्रह किया कि टिकटों के पैसे को रखरखाव पर लगाया जाए। उत्तर प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार ने इस मामले को संज्ञान में लेकर हमसे वादा किया कि जो भी पैसा टिकटों के जरिए आता है वह इन स्थलों के रखरखाव के लिए लगाया जाएगा। मायावती ने कहा कि मैं राज्य सरकार की आभारी हूं कि कांशीराम स्मारक की मरम्मत कराई। टिकट के पैसे अपने पास नहीं रखा। टिकट के पैसे से मरम्मत कराई।

अखिलेश यादव पर मायावती ने साधा निशाना

अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार के पहले जब सपा सरकार थी तो सपा सरकार ने पैसा दबा कर रखा था। सभी स्मारकों को बुरा हाल था। सब पैसा दबा कर रखा। तब सपा सरकार में मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी की टिकट के पैसे से स्मारक के रखरखाव करे लेकिन कुछ नहीं किया। अब सत्ता से बाहर हैं तो काशीराम की पुण्यतिथि पर गोष्ठी करेंगे। जब सरकार में रहते हैं तो पीड़ीए नहीं याद आता।

मायावती ने कहा कि मैं अखिलेश यादव से पूछना चाहती हूं कि जब उनकी सरकार थी तो कांशीराम के नाम पर नगर, यूनिवर्सिटी के नाम क्यों बदले? सत्ता में नहीं रहते हैं तो महापुरुष और पीडीए याद आता है। कांशीराम स्मारक की मरम्मत नहीं होने के वजह से यहां पुष्प नहीं अर्पित नहीं कर पा रहे थे लेकिन अब मरम्मत हो गई। पहले से ज़्यादा भीड़ आई है।

सपा पर गुमराह करने का लगाया आरोप

रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति के स्वार्थ में पीड़ीए की बात करके लोगों को गुमराह कर रही है। जब सपा सरकार थी तो आरक्षण में पक्षपात किया। सपा सरकार ने माफिया गुंडों को बढ़ावा दिया, कानून व्यवस्था खराब कर दी। वही आज़म ख़ान का नाम लिए बिना मायावती ने कहा कि पिछले महीने से अफवाह फैलाना शुरू कर दिया था कि दूसरे दल से फलाना बसपा में आ रहे हैं और दिल्ली लखनऊ में मायावती से मिले हैं। मैं तो किसी से नहीं मिली मैं छुप कर किसी से नहीं मिलती।

बीजेपी और कांग्रेस पर मायावती ने साधा निशाना

मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कही कि बीजेपी सरकार में भी वही स्थिति है। यूपी में कांग्रेस की सरकारों ने दलितों के लिए कुछ नहीं किया। अब इनके संविधान को हाथ में लेकर नाटक करते रहते है। कांग्रेस ने कभी भी बाबा साहब अंबेडकर और कांशीराम को सम्मान नहीं दिया। मायावती ने कहा कि बीजेपी सरकार भी दलितों के लिए झूठे वादे करती है। इसलिए बसपा को मज़बूत बनाकर केंद्र और प्रदेश में सत्ता में वापस लाइए। दूसरे राज्यों में जहां चुनाव है वहां भी बसपा को मज़बूत कीजिए। यूपी में तो फिर से बसपा की बहुमत की सरकार बनाना बहुत ज़रूरी है।

बसपा को कमजोर करने की हो रही साजिश

बसपा प्रमुख ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में भी बसपा को मज़बूत करें। अब पूरे देश में बसपा को कमजोर करने के लिए नया षड्यंत्र हो रहा है। कुछ लोगों ने दलित समाज से स्वार्थी और बिकाऊ लोगों का इस्तेमाल करके संगठन बना दिए हैं, जिससे बसपा कमजोर हो। आपको ऐसे लोगों को वोट देकर अपना वोट ख़राब नहीं करना है। बसपा को वोट करें जिससे यूपी में बसपा फिर सरकार बना सके।

आकाश आनंद को लेकर कहा…..

बसपा प्रमुख ने मायावती ने अपने भतीजे को लेकर कहा कि आकाश आनंद भी पार्टी से जुड़ गए हैं। ये अच्छी बात है। जैसे पार्टी के लोग मेरे साथ खड़े रहे हैं। वैसे ही आप पार्टी के लोग आकाश आनंद के साथ खड़े रहेंगे। आनंद कुमार ने भी बहुत काम किया है साथ ही मायावती ने कहा कि सभी धर्म का सम्मान करना चाहिए। सदियों से चली आ रही परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए लेकिन आई लव कैंपेन भी नहीं होनी चाहिए।

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नवी मुंबई एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी हब बनेगा – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल हवाई अड्डों में शुमार नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। यह परियोजना देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में से एक है, जो आने वाले वर्षों में भारत की विमानन उद्योग को पूरी तरह बदलकर नया रूप देगी। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि नवी मुंबई एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी हब बनेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज मुंबई का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो गया। अब मुंबई को अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राप्त हो गया है। यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र को एशिया का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने आगे कहा कि आज मुंबई को पूर्णतः भूमिगत मेट्रो सुविधा भी मिल गई है। इससे शहर में यातायात और सुगम होगा तथा लोगों का समय भी बचेगा। यह भूमिगत मेट्रो उभरते भारत का एक जीवंत प्रतीक है। मुंबई जैसे हलचल भरे शहर में, भूमि के नीचे तथा ऐतिहासिक भवनों को सुरक्षित रखते हुए इस शानदार मेट्रो का निर्माण किया गया है। मैं इससे जुड़े सभी श्रमिकों और अभियंताओं को हार्दिक बधाई देता हूं।

देश में एयरपोर्ट की संख्या 160 के पार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि जब सपनों को साकार करने का दृढ़ संकल्प हो तथा देशवासियों तक तेजी से विकास का लाभ पहुंचाने की मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो परिणाम अवश्य प्राप्त होते हैं। हमारी विमानन सेवा और इससे संबंधित उद्योग इसका प्रमुख उदाहरण हैं। आपको याद होगा कि वर्ष 2014 में जब देश ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी, तब मैंने कहा था कि मेरा सपना है कि चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके। इस सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए देश में नए-नए हवाई अड्डों का निर्माण आवश्यक था। हमारी सरकार ने इस लक्ष्य पर तत्परता से कार्य प्रारंभ किया। पिछले 11 वर्षों में देश में एक के बाद एक हवाई अड्डे विकसित होते रहे। वर्ष 2014 में हमारे देश में मात्र 74 हवाई अड्डे थे, जबकि आज भारत में हवाई अड्डों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

राष्ट्रनीति ही राजनीति का आधार – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा-हम उन संस्कारों में पले-बड़े हैं, जहां राष्ट्रनीति ही राजनीति का आधार है। हमारे लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगने वाला एक-एक पैसा देशवासियों की सुविधा और सामर्थ्य को बढ़ाने का माध्यम है लेकिन दूसरी तरफ देश में एक ऐसी राजनीतिक धारा भी रही है जो जनता की सुविधा नहीं, सत्ता की सुविधा को ऊपर रखती है। यह वे लोग हैं जो विकास के काम में रुकावट डालते हैं, घोटाले-घपले करके विकास के काम को पटरी से उतार देते हैं। आज जिस मेट्रो लाइन का लोकार्पण हुआ है, यह उन लोगों के कारनामों की याद भी दिलाता है।

मैं इसके भूमिपूजन में शामिल हुआ था। तब मुंबई के लाखों परिवारों में आशा जगी थी कि उनकी कठिनाइयां कम होंगी, लेकिन उसके बाद आई सरकार ने इस परियोजना को ही ठप कर दिया। उन्हें सत्ता प्राप्त हुई, लेकिन देश को हजारों-करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ तथा वर्षों तक असुविधा सहनी पड़ी। अब इस मेट्रो लाइन से 2-2.30 घंटे का सफर मात्र 30-40 मिनट में पूरा हो सकेगा। जहां मुंबई में प्रत्येक मिनट का मूल्यवान महत्व है, वहां 3-4 वर्षों तक इस सुविधा से वंचित रहना किसी पाप से कम नहीं है।

पीएम मोदी ने की जीएसटी पर भी चर्चा की

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीएसटी में हुए अगली पीढ़ी के सुधारों से, जिन वस्तुओं के दाम कम हुए हैं, उसके फलस्वरूप देशवासियों की आर्थिक क्षमता और मजबूत हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष नवरात्रि के दौरान बिक्री के कई नए रिकॉर्ड बन गए हैं। हमारी सरकार आगे भी ऐसे कदम उठाती रहेगी, जो देशवासियों के जीवन को सुगम बनाएं और राष्ट्र को शक्ति प्रदान करें। लेकिन मैं आपसे एक अनुरोध भी करता हूं कि स्वदेशी का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि गर्व से कहो, हम स्वदेशी हैं। यह हर घर और बाजार का मूल मंत्र बन जाना चाहिए।

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शिल्पा शेट्टी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, 60 करोड़ जमा करे और जाए विदेश

शिल्पा शेट्टी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के 60 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में सुनवाई की है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा से कहा है कि अगर वे लॉस एंजिल्स और अन्य विदेशी देशों की यात्रा करना चाहते हैं तो पहले उन्हें 60 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। बता दें यह आदेश उस याचिका के बाद आया है, जिसमें दंपति ने उनके खिलाफ दर्ज 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े एफआईआर मामले में जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) को रद्द करने की मांग की थी।

कब होगी अगली सुनवाई ?

इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी। अदालत की यह शर्त ऐसे समय में आई है जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) 60 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कपल ने व्यावसायिक और निजी यात्रा के लिए लॉस एंजिल्स जाने की अदालत से अनुमति मांगी थी, लेकिन पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि भारी सुरक्षा जमा राशि के बिना यात्रा नहीं की जा सकती।

कोठारी ने लगाया ये आरोप

शुरुआत में यह 12% ब्याज पर एक कर्ज माना जा रहा था। हालांकि, शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने कथित तौर पर उन्हें इसे निवेश में बदलने के लिए मना लिया, मासिक रिटर्न और मूल राशि की पूरी अदायगी का वादा किया। कोठारी ने दावा किया कि उन्होंने अप्रैल 2015 में 31.95 करोड़ रुपये और उसी साल सितंबर में 28.53 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, अब उनका कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल व्यवसाय विस्तार के बजाय निजी खर्चों के लिए किया गया।

शिल्पा शेट्टी और राज के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर

सितंबर में आर्थिक अपराध शाखा ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा दोनों के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया, जिससे उन्हें बिना पूर्व अनुमति के देश छोड़ने से रोक दिया गया। पिछले हफ्ते आर्थिक अपराध शाखा ने शिल्पा शेट्टी से चार घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की, हालांकि उनकी संलिप्तता का सटीक विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं है।

क्या है पूरा मामला

ये मामला अगस्त में सामने आया था। लोटस कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक और व्यवसायी दीपक कोठारी ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा पर 60 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। कोठारी के बयान के अनुसार ये घटनाएं 2015 से 2023 के बीच हुईं। उन्होंने दावा किया कि दंपति ने अपनी कंपनी, बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड के लिए 75 करोड़ रुपये का ऋण मांगने के लिए उनसे संपर्क किया था। यह कंपनी लाइफस्टाइल उत्पादों को बढ़ावा देने और एक ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म चलाने के लिए शुरू की गई थी।

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आजम खान से मिलने रामपुर पहुंचे अखिलेश यादव, सांसद नदवी नहीं रहे साथ

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पूर्व मंत्री आजम खान से मिलने उनके घर रामपुर पहुंच गए हैं। इस दौरान रामपुर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी नहीं दिखे। आजम खान अखिलेश यादव को रिसीव करने खुद गए। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात अभी भी जारी है। गौरतलब है कि आजम खान ने रामपुर सांसद से मिलने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ही मिलेंगे। लगभग दो साल जेल में बिताने के बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से आजम के रिहा होने के बाद दोनों के बीच यह पहली मुलाकात है।

2024 में भी अखिलेश ने की थी आजम से मुलाकात

इससे पहले अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी जेल में खान से मुलाकात की थी। कुछ दिन पहले सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप ने पार्टी के आग्रह पर रामपुर में आजम खान से मुलाकात की थी।

रामपुर सांसद नदवी से नहीं मिलेंगे आजम खान

रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को लेकर आजम खान ने कहा कि मैं उनको जानता नहीं वह बहुत बड़े आदमी हैं। आलिम हैं, फाजिल हैं.. इतने बड़े आदमी को मैं नहीं जानता। बता दें कि आजम टिकट मिलने के बाद से ही मोहिबुल्लाह नदवी का विरोध करते रहे हैं। जेल से छूटने के बाद रामपुर के सांसद को मिलने का भी आजम ने अब तक समय नहीं दिया। आज अखिलेश यादव के साथ मुहीबुल्ला नदवी भी रामपुर आ रहे हैं। लेकिन पहले आजम खान ने कह दिया है कि मुलाकात सिर्फ अखिलेश यादव से ही करेंगे।

सपा के कद्दावर नेता हैं आजम खान

बता दें कि आजम खान 10 बार विधायक और एक बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद रहे हैं। वह मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। आजम सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी सहयोगी रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में आज भी उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता है।

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एसआईआर पूरी तरह से चुनाव आयोग की जिम्मेदारी – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा कि एसआईआर का मामला पूरी तरह से केंद्रीय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह बात एक याचिका की सुनवाई के दौरान कही। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि देश में कुछ लोग अनधिकृत रूप से रह रहे हो सकते हैं, जो अपनी पहचान उजागर होने के डर से सामने नहीं आना चाहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों से कहा कि कम से कम उन लोगों की एक सूची तो उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जो वास्तव में एसआईआर से प्रभावित हुए हैं।

चुनाव आयोग के पास अपना तंत्र है, उसे काम करने दे

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में अन्य राज्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर पूरी तरह से चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और यह उसका विशेषाधिकार (प्रोगेटिव) है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘हम हर काम अपने हाथ में क्यों लें ? चुनाव आयोग के पास अपना तंत्र है, उसे काम करने दिया जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि वे क्यों चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट सारे काम अपने नियंत्रण में ले ले।

देश में बिना इजाजत रह रहे लोगों पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

वही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि देश में कुछ लोग बिना अनुमति के रह रहे हैं। वे सामने आने से डरेंगे क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची से हटने पर उनकी पहचान उजागर हो सकती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे कम से कम 100 ऐसे लोगों की सूची प्रस्तुत करें। जिनका दावा है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए। लेकिन उन्हें कोई आदेश नहीं मिला। जिसके कारण वे अपील नहीं कर पा रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें उन लोगों की एक इलस्ट्रेटिव लिस्ट चाहिए, जिन्हें यह शिकायत है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिया ये मौखिक सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मौखिक रूप से सुझाव दिया कि वह एक विस्तृत नोट तैयार करे। जिसमें 3.66 लाख हटाए गए नामों और बाद में जोड़े गए 21 लाख नामों का पूरा ब्योरा और उनके कारणों का उल्लेख हो। कोर्ट ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए जोर दिया कि एसआईआर चुनाव आयोग का कार्यक्षेत्र है और उसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर को तय की है। बता दें कि बिहार चुनावों में एसआईआर का मुद्दा जोर-शोर से छाया हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बेहद अहम मानी जा रही है।

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दो चरणों में होगा बिहार का चुनाव, 14 नवंबर को आएगा रिजल्ट

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे। इलेक्शन कमिशन ने बताया कि पहले राउंड में 121 सीटों पर मतदान होगा और फिर दूसरे राउंड में 122 पर वोटिंग होगी। इस चुनाव का नतीजा 14 नवंबर को घोषित होगा। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को तो दूसरे का 11 नवंबर को होगा। पहले राउंड के मतदान के लिए 10 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर होगी और वापस लेने की लास्ट डेट 20 अक्टूबर रहेगी। इसके अलावा दूसरे चरण के लिए 13 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। 20 अक्टूबर को नामांकन की आखिरी तारीख होगी और 23 तारीख तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान इलेक्शन कमिशन की ओर से हो रहा है।

देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में 7.42 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में कई नई चीजें शुरू हो रही हैं और उन्हें देश भर में आगे चलकर लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधाओं के लिए तय किया है कि एक पोलिंग बूथ पर 1200 से ज्यादा वोटर ना रहें। बिहार में 90 हजार 700 पोलिंग बूथ रहेंगे। इनमें से महिलाओं द्वारा 1044 बूथ संचालित होंगे। इसके अलावा मॉडल पोलिंग बूथ 1000 के करीब रहेंगे।

बिहार के दौरे पर जिलाधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि हर जगह पोलिंग स्टेशन ग्राउंड फ्लोर पर ही होंगे। इससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुविधा रहेगी। उन्होंने कहा कि हमने बिहार के दौरे पर जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी तरह से उम्मीदवारों और मतदाताओं को धमकी मिलने जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चाहेंगे कि हर कोई मतदान करे और उसके लिए पर्याप्त सुविधा रहे। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अवैध लेनदेन, कैश आदि पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा उम्मीदवारों के खर्चों पर भी नजर रहेगी। उन्होंने कहा कि हम कुल 17 नए कदम उठा रहे हैं, जो बाद में देश के अन्य चुनावों में भी लागू होंगे।

बिहार में पहली बार वोट डालेंगे 14 लाख मतदाता

उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में नए जुड़े हैं या फिर जिनके पते आदि बदल गए हैं, उन्हें नए वोटर आईडी कार्ड दिए गए हैं। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 15 दिनों के अंदर हमने इस पर अमल किया है। चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार चुनाव में 14 लाख मतदाता ऐसे होंगे, जो पहली बार वोट डालेंगे। इन सभी लोगों को वोटर कार्ड दे दिए गए हैं। बिहार चुनाव में मतदाताओं को यह सुविधा रहेगी कि वे पोलिंग बूथ तक मोबाइल ले जा सकेंगे। वे पोलिंग स्टेशन के ठीक बाहर मोबाइल जमा करा सकेगा और बाहर निकलकर उसे ले लेगा।

बिहार में कुल कितने वोटर्स हैं ?

बिहार का चुनाव इस बार कई मायनों में खास है। ऐसा इसलिए क्योंकि 22 साल बाद बिहार में वोटर लिस्ट में रिविजन हुआ है और नई वोटर लिस्ट तैयार हुई है। एसआईआर से पहले बिहार में करीब 7 करोड़ 89 लाख वोटर्स थे। एसआईआर के बाद अब बिहार में 7 करोड़ 42 लाख लोग वोट डालेंगे। वोटर लिस्ट रिवीजन के बाद करीब 65 लाख वोटरों के नाम कटे हैं जबकि करीब 21 लाख नए वोटर जुड़े हैं। इस बार चुनाव में पहले के मुकाबले करीब 47 लाख वोटर्स कम हैं। जो कुल वोटर्स का करीब 6 फीसदी है।

महिला और पुरुष वोटर्स की संख्या ?

चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई बिहार में नई वोटर लिस्ट के मुताबिक, राज्य में 3 करोड़ 92 लाख पुरुष वोटर्स हैं। जबकि महिला वोटर्स की संख्या 3 करोड़ 50 लाख के करीब है। 18 से 19 साल के नए वोटर 14 लाख हैं। वहीं 85 साल से ऊपर के वोटर्स की संख्या 4 लाख 3 हजार है।

हर सीट के लिए होगा पर्यवेक्षक, 1950 होगा हेल्पलाइन नंबर

ECINET के माध्यम से बीएलओ से संपर्क किया जा सकेगा। इसके अलावा इलेक्शन कमिशन से बात करने के लिए 1950 डायल कर सकते हैं। इस नंबर को डायल करने से पहले +91 लिखना है और संबंधित एरिया का एसटीडी कोड लिखना है। फिर 1950 डायल करना है। हर सीट पर एक पर्यवेक्षक होगा। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। जो अलग-अलग राज्यों से आएंगे। इनके नंबर भी ECINET और वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। कुल साढ़े 8 लाख चुनाव कर्मी मतदान संपन्न कराएंगे और रिजल्ट में शामिल होंगे।

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