Saturday, April 4, 2026
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बौखलाए पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद, शिमला समझौता रद्द करने दी धमकी

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर दी है। पाकिस्तान पर सबसे बड़ा एक्शन सिंधु नदी जल समझौते को निलंबित करने का है। भारत की कड़ी कार्रवाई के बाद  पाकिस्तान की सरकार ने भी बड़ी बैठक की है। भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक की और कहा है कि भारत की ओर से पानी रोके जाने को जंग जैसा माना जाएगा।

पाकिस्तान सरकार की एनएससी की बैठक में शीर्ष नागरिक और सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया और भारत की ओर से की गई कार्रवाई पर चर्चा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पानी 24 करोड़ लोगों की लाइफलाइन है। इसे युद्ध जैसा माना जाएगा। पानी रोकना भारत का एकतरफा फैसला है। पाकिस्तान इसको खारिज करता है।

पाकिस्तान में खलबली

इस बैठक में सेना के तीनों प्रमुख शामिल हुए हैं। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर, नौसेना प्रमुख एडमिरल और पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर इस बैठक में शामिल हुए हैं। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। भारत सरकार द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद पाकिस्तान ने अपने एयरस्पेस को भारतीय विमानों के लिए बंद कर दिया है। साथ ही भारतीयों के दिए जाने वाले वीजा को भी रद्द कर दिया गया है और बाघा बार्डर को भी बंद कर दिया गया है। बता दें कि भारत ने सिंधु जल समझौते को भी रोक दिया है। इसके बाद पाकिस्तान सरकार का कहना है कि पानी रोकना युद्ध जैसी कार्रवाई है।

पाकिस्तान ने भारत के लिए बंद किया एयरस्पेस

भारत सरकार द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के स्वामित्व वाली या भारतीय संचालित एयरलाइनों के लिए अपने एयरस्पेस को तत्काल रूप से बंद कर दिया है। साथ ही भारतीयों के दिए जाने वाले वीजा को भी रद्द कर दिया गया है और बाघा बार्डर को भी बंद कर दिया गया है।

शिमला समझौता रद्द करने की पाकिस्तान ने दी धमकी

इस बैठक में पाकिस्तान सरकार की तरफ से कई अहम फैसले लिए गए हैं, जैसे पाकिस्तान तत्काल प्रभाव से बाघा सीमा चौकी को बंद कर देगा। साथ ही इस मार्ग से भारत से सभी सीमा पार पारगमन को भी किसी अपवाद के निलंबित कर दिया जागा। साथ ही जो लोग वैध वीजा के साथ सीमा पार कर चुके हैं, वे तुरंत उसी रास्ते से 30 अप्रैल से पहले भारत लौट जाएं। पाकिस्तान ने भारतीय नागरिकों को जारी किए गए SAARC वीजा छूट योजना के तहत सभी वीजा को निलंबित कर दिया है। हालांकि सिख धार्मिक तीर्थयात्रइयोंको छोड़कर सभी वीजा को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा SVES के तहत वर्तमान में पाकिस्तान में मौजूद भारतीय नागरिकों को (सिख तीर्थयात्रियों को छोड़कर) 48 घंटे के भीतर पाकिस्तान से बाहर निकलने का निर्देश दिया गया है।

पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है। उन्हें 30 अप्रैल 2025 से पहले पाकिस्तान छोड़ने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पाकिस्तान सरकार ने भारतीय उच्चायोग में काम करने वाले लोगों और सलाहकारों को भी भारत लौटने का निर्देश दे दिया है। बता दें कि 30 अफ्रैल 2025 से इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग की क्षमता को घटाकर 30 राजनयिक और कर्मचारी कर दिया जाएगा साथ ही पाकिस्तान ने शिमला समझौता को भी रद्द करने की धमकी दी है।

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पाकिस्तान पर मोदी सरकार के एक्शन के क्या मायने हैं, आईये जाने

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पूरे एक्शन के मोड में है। पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न मोर्चों से प्रहार शुरू हो गया है। शुरुआती फैसलों में जहां पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रोक दिया गया है वहीं अटारी बॉर्डर से आवाजाही बंद कर दी गई है।

पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा को कैंसिल कर दिया गया है और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ना होगा। इस लेख में हम मोदी सरकार द्वारा लिए गए एक्शन की डिटेल्स को समझने की कोशिश करेंगे और फिर इन फैसलों के असर बारे में जानने की कोशिश करेंगे।

जिस वक्त पहलगाम में टूरिस्टों पर आतंकी हमला हुआ उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी अपना दौरा बीच में छोड़कर वापस लौट आए। शाम में पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पांच बड़े फैसले लिए गए। इन फैसलों का उद्देश्य पाकिस्तान पर कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव डालना है।

सिंधु जल समझौते पर रोक

भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इस समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों का बंटवारा होता है। यह कदम पाकिस्तान पर आर्थिक और पर्यावरणीय दबाव डालने के लिए उठाया गया।

पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द

सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है। उनके वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए है। भारत सरकार का यह कदम सुरक्षा और कूटनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी दूतावास पर कार्रवाई

नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना, और वायुसेना सलाहकारों को अवांछित घोषित कर एक सप्ताह में भारत छोड़ने का आदेश दिया गया। साथ ही, उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 करने का निर्णय लिया गया, जो 1 मई 2025 से लागू होगा।

पाकिस्तान में भारतीय दूतावास बंद

भारत ने इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग से सैन्य सलाहकारों और सहायक कर्मचारियों को वापस बुलाने का फैसला किया, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध और सीमित हो गए।

अटारी-वाघा बॉर्डर चेकपोस्ट बंद

भारत-पाकिस्तान के बीच अटारी बॉर्डर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। इस बॉर्डर के सील होने से दोनों देशों देशों के बीच व्यापार और आवागमन पर रोक लग गई।

वहीं अब हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि मोदी सरकार के इन फैसलों का पाकिस्तान पर क्या असर हो सकता है।

1. कूटनीतिक प्रभाव

>> भारत-पाकिस्तान संबंधों में और गिरावट आ सकती है। दूतावास बंद करने और वीजा रद्द करने जैसे फैसले से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध समाप्त हो सकते हैं। यह 1971 के युद्ध के बाद सबसे गंभीर कूटनीतिक टकराव हो सकता है।

>> भारत का यह एक्शन अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश को दर्शाता है। अमेरिका, रूस, और यूरोपीय देश भारत के साथ खड़े हो सकते हैं, जबकि चीन और कुछ इस्लामी देश पाकिस्तान का समर्थन कर सकते हैं।

>> सिंधु जल समझौते को तोड़ने का मुद्दा वर्लड बैंक और संयुक्त राष्ट्र में उठ सकता है। क्योंकि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के तहत हुआ था। सार्क जैसे क्षेत्रीय मंच और निष्क्रिय हो सकते हैं।

2. आर्थिक प्रभाव

>> सिंधु जल समझौता खत्म होने से पाकिस्तान को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहां की कृषि में सिंधु नदी से होने वाली सिंचाई का काफी महत्व है। यहां की 80% से अधिक खेती सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। भारत द्वारा इस समझौते को खत्म करने से पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन (हाइड्रोपावर), और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे पाकिस्तान में सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

>> अटारी-वाघा बॉर्डर बंद होने से पाकिस्तान का भारत के साथ सीमित व्यापार रुक जाएगा। भारत के इस कदम से उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा।

>> वहीं भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान पर निर्भर नहीं है, इसलिए व्यापार बंदी का भारत पर नहीं के बराबर असर होगा। हालांकि, सिंध जल समझौता तोड़ने से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।

3. सामरिक और सुरक्षा प्रभाव

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई सीमा के इलाकों में घुसपैठ या आतंकी वारदातों को अंजाम देना हो सकता है। लेकिन भारत इनसे मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। CCS की बैठक के बाद ऐसा लग रहा है कि भारत सर्जिकल स्ट्राइक या सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। इससे नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव से दीर्घकाल में आतंकी संगठनों की फंडिंग और आतंक को मिलने वाला समर्थन कमजोर पड़ सकता है।

4. क्षेत्रीय और सामाजिक प्रभाव

>> सिंधु समझौते पर रोक लगने से जल संकट और आर्थिक दबाव से पाकिस्तान में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। सरकार और सेना के बीच तनाव भी बढ़ सकता है, क्योंकि जनता में असंतोष उभरेगा।

>> भारत में इसका राजनीतिक प्रभाव दिख सकता है। भारत में इन फैसलों को जनता और विपक्ष द्वारा “मजबूत नेतृत्व” के रूप में देखा जा सकता है, जिससे मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ सकती है। हालांकि, विपक्ष इसकी आलोचना कर सकता है यदि यह युद्ध या आर्थिक लागत की ओर ले जाता है।

>> इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है। दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने से अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

5. अंतरराष्ट्रीय और कानूनी प्रभाव

>> सिंधु जल समझौते को तोड़ने से भारत को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारत इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” का मामला बताकर बचाव कर सकता है।

>> पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी होने के नाते, चीन CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) और सैन्य समर्थन के जरिए हस्तक्षेप कर सकता है। इससे भारत-चीन तनाव भी बढ़ सकता है।

>> दोनों देशों के परमाणु हथियारों के कारण, किसी भी सैन्य टकराव में वृद्धि का खतरा बना रहता है, हालांकि दोनों पक्ष इसे टालने की कोशिश करेंगे।

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आतंकियों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी – पीएम मोदी

मधुबनी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करने से पहले पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए दो मिनट मौन रखा। प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले पर दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि जिनको हमने खोया उन्हें नमन। भाषण से पहले पीएम मोदी ने मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी।

बिहार ने पंचायतों मे 50% आरक्षण दिया

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य था, जहां पंचायतों मे 50% आरक्षण की सुविधा दी गए और इसलिए मैं नितीश का अभिनंदन करता हूं। आज बहुत बड़ी संख्या में गरीब, दलित, महादलित, पिछड़े, अति पिछड़े समाज की बहन बेटियां बिहार में जनप्रतिनिधि बनाकर सेवाएं दे रही हैं यही सच्चा सामाजिक न्याय है।

हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण

आज पंचायती राज दिवस के मौके पर पूरा देश बिहार से जुड़ा है। यहां बिहार के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। बिजली रेल और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न कार्यों से बिहार में रोजगार के नए मौके बनेंगे। बीते दशक में 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायत को इंटरनेट से जोड़ा गया है 5.30 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर गांव में बने हैं। पंचायत के डिजिटल होने से एक और फायदा हुआ है जीवन-मृत्यु प्रमाण पत्र, भूमि धारण प्रमाण पत्र ऐसे कई दस्तावेज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

आतंकियों को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने मासूम देशवासियों को जिस बेरहमी से मारा है। इस दुख की घड़ी में पूरा देश साथ खड़ा है। इस आतंकी हमले में किसी ने बेटा, किसी ने भाई, किसी ने जीवनसाथी खोया है, कोई बांग्ला, कोई कन्नड़ा, कोई मराठी, कोई उड़िया, कोई गुजराती, कोई बिहार का लाल था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारा दुख, आक्रोश एक जैसा है। ये हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है। देश के दुश्मनों ने भारत की आस्था पर हमला करने का दुस्साहस किया। हमला करने वाले आतंकियों और साजिश रचने वालों को कल्पना से बड़ी सजा मिलेगा। सजा मिलकर रहेगी। आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि आतंकी साजिश रचने वालों को भी कड़ी सजा मिलेगी। पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए पीएम ने कहा कि साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहलगाम में आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और सभी को चुन-चुनकर उनके कर्मों की सजा दी जाएगी। पीएम मोदी ने यह भी साफ किया कि किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।

पीएम मोदी ने आतंक के खिलाफ संदेश देते हुए कहा……….

पीएम मोदी ने भाषण के अंत में आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया को संदेश देते हुए कहा “Today from the soil of Bihar, I say to the whole world, India will identify, track, and punish every terrorist and their backers. We will pursue them to the ends of the earth. The spirit of India will never be broken by terrorism. Terrorism will not go unpunished. Every effort will be made to ensure that justice is served. The entire nation stands firm in this resolve. Everyone who believes in humanity is with us. I thank the people of various countries and the leaders who have stood with us in these times.

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यूपी में बदल गए कई जिलों के आईपीएस अफसर, सरकार ने जारी किया आदेश

यूपी सरकार ने बीती रात कई आईपीएस का ट्रांसफर कर दिया। बांदा के एसपी रहे अंकुर अग्रवाल को सीतापुर का एसपी बना दिया गया है और सीतापुर के वर्तमान एसपी चक्रेश मिश्र को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का एसपी नियुक्त कर दिया गया है। जानकारी दे दें कि यह आदेश देर रात अमिताभ यश के सिग्नेचर से जारी किए गए, आगे आदेश में बताया गया कि आईपीएस पलाश बंसल को बांदा जिले की कमान सौंपी गई और आईपीएस प्रबल प्रताप सिंह को महोबा का एसपी बनाया गया।
बदले गए यूपी के कई जिलों के आईपीएस अफसर
बदले गए यूपी के कई जिलों के आईपीएस अफसर

अरविंद मिश्रा बने कानपुर देहात के एसपी

इसके अलावा, सुधा सिंह को लखनऊ में पुलिस उपमहानिरीक्षक बनाया गया है, ये झांसी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। वहीं, मुरादाबाद पीएसी में सेनानायक पूजा यादव को अलीगढ़ पीएसी की कमान सौंप दी गई है। साथ ही बीबीजीटीएस मूर्थी को झांसी में एसएसपी बना दिया गया है। आईपीएस मूर्थी कानपुर देहात में एसपी हैं। इसके अलावा, अरविंद मिश्रा को कानपुर देहात का एसपी बना दिया गया है और अमित कुमार II को अलीगढ़ पीएसी से मुरादाबाद पीएसी ट्रांसफर कर दिया गया है।

बदले गए यूपी के कई जिलों के आईपीएस अफसर
बदले गए यूपी के कई जिलों के आईपीएस अफसर

आईपीएस रोहित बने लखनऊ रेलवे के एसपी

इसके अलावा, आलोक प्रियदर्शी को गाजियाबाद कमिश्नरेट में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त बना दिया गया है। अभिषेक यादव को पीलीभीत का एसपी बना दिया गया है। पीलीभीत के वर्तमान एसपी अविनाश पांडेय को लखनऊ 1वीं एसएसएफ का सेनानायक बना दिया गया। साथ ही आईपीएस प्रशांत वर्मा को प्रयागराज रेलवे पुलिस का एसपी बनाया गया है। आईपीएस आरती सिंह को फतेहगढ़ एसपी और आईपीएस रोहित मिश्रा को लखनऊ रेलवे का एसपी नियुक्त किया गया है।

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पहलगाम आतंकी हमला: आतंकियों ने आईबी ऑफिसर की कर दी हत्या

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी को आतंकियों ने उनकी पत्नी और बच्चों के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। अधिकारी मनीष रंजन बिहार के रहने वाले थे और हैदराबाद में तैनात थे।

आईबी अधिकारी मनीष रंजन अपने परिवार के साथ लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) यात्रा पर पहलगाम आए थे और ऑफिसर अपने परिवार और अन्य टूरिस्टों के साथ ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले पहलगाम की बैसरन घाटी में थे, जब आतंकियों ने उन पर हमला किया। इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए हैं और कई लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

सऊदी अरब की यात्रा छोड़ भारत पहुंचे पीएम मोदी

बता दें कि पीएम मोदी अपनी सऊदी अरब की यात्रा छोड़कर भारत वापस आ गए हैं और आज कैबिनेट की बड़ी मीटिंग हो सकती है। गृह मंत्री अमित शाह पहले ही श्रीनगर पहुंच गए हैं।

तेलंगाना के सीएम ने गहरा दुख व्यक्त किया

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जम्मू-कश्मीर में हुए इस आतंकी हमले पर गहरा दुख व्यक्त किया और इस घिनौने कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए, सीएम ने कहा कि इस तरह के कायराना हमले भारतीय जनता की भावना और सहनशीलता को हिला नहीं सकते। उन्होंने केंद्र सरकार से आतंकवादी समूहों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हमले में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

आतंकियों की हो रही खोज, सर्च ऑपरेशन जारी

पहलगाम के बैसारन घाटी में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू हो गया है और इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की विक्टर फोर्स, स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और सीआरपीएफ शामिल है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की विक्टर फोर्स लगाई गई है जो घाटी में आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए जानी जाती है।

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पहलगाम आतंकी हमला: अमित शाह ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग, जाएंगे कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में सेना और इंटेलिजेंस के बड़े अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि इस हमले के बाद की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा सके। अमित शाह कश्मीर भी जाएंगे।

पहलगाम के बैसराणा इलाके में आतंकवादियों ने पर्यटकों के समूह को निशाना बनाया है। इस हमले में अब तक 12 पर्यटकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने आई है। वहीं, एक पर्यटक की मौत भी हो गई है। घायलों को अनंतनाग के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद सुरक्षाबलों के जवानों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन को शुरू कर दिया है। आतंकवादियों ने करीब 3 से 5 मिनट तक गोलीबारी की और फिर वहां से भाग निकले।

आतंकियों के खिलाफ कश्मीर में ऑपरेशन शुरू

भारतीय सेना विक्टर फोर्स और स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की एसओजी और सीआरपीएफ द्वारा ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। सेना के जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान घटनास्थल पर मौजूद हैं। सेना के अधिकारी भी अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सेना के 15 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंचे हैं। भारतीय सेना की विक्टर फोर्स के जवान आतंकवादियों की तलाश के लिए घाटी के शीर्ष पर पहुंच गए हैं। आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हो गया है।

धर्म पूछा और फिर गोली मारी

इस आतंकी हमले की चश्मदीद एक महिला पर्यटक ने बताया कि आतंकियों ने पहले लोगों से उनका नाम और धर्म पूछा और उसके बाद उन्हें गोली मारी। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद एक महिला ने पीसीआर को फोन किया, उसने बताया कि 6-7 सैलानियों को गोली लगी है। उसने बताया कि एक आतंकी ने गोली चलाई। आतंकियों ने मजहब पूछकर शख्स को गोली मारी। पत्नी के हाथ में चूड़ा देखा, फिर मजहब पूछकर पति को गोली मार दी गई है।

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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे डीपफेक स्कैम वीडियो के बारे में अपने खाताधारकों और आम जनता को अलर्ट किया है। एसबीआई ने PUBLIC CAUTION NOTICE जारी कर डीपफेक विडियो को लेकर अगाह किया है।

वीडियो में झूठा दावा किया गया है कि एसबीआई ने भारत सरकार और बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ मिलकर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है जो निवेशकों को बंपर रिटर्न प्रदान करता है। धोखाधड़ी वाले वीडियो में एसबीआई द्वारा एक एआई-बेस्ड इन्वेस्टमेंट प्लेटाफॉर्म लॉन्च करने का दावा किया गया है। हालांकि, एसबीआई ने कहा है कि ये दावे पूरी तरह से झूठे हैं।

एसबीआई ने ग्राहकों को किया अलर्ट

एसबीआई ने अपने ग्राहकों और आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी जानकारी को एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट, अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स, या नजदीकी ब्रांच से ही सत्यापित करें। बैंक ने यह भी कहा है कि ऐसी डीपफेक वीडियो से बचें और उनके झांसे में न आएं। एसबीआई ने अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने ग्राहकों और आम जनता को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही डीपफेक वीडियो को लेकर सतर्क करता है।

इन वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए लाभकारी निवेश योजनाओं को एसबीआई भारत सरकार और कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर लॉन्च करने का झूठा दावा किया जा रहा है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी योजना का कोई अस्तित्व नहीं है और लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।

डीपफेक वीडियो स्कैम कैसे काम करता है ?

स्कैमर अब डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे मशहूर लोगों या वरिष्ठ अधिकारियों की नकली वीडियो बना रहे हैं। ये वीडियो इतने असली लगते हैं कि लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं। वीडियो में फर्जी स्कीम्स को प्रमोट किया जाता है ताकि लोग धोखे में आकर पैसे निवेश कर दें।

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2 दिन की यात्रा पर सऊदी पहुंचे पीएम मोदी, वार्ता में ये मुद्दे होंगे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के जेद्दा पहुंचे। जहां उनकी दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। सऊदी अरब के एफ-15 लड़ाकू विमानों ने विशेष सम्मान के तहत प्रधानमंत्री के विमान को सुरक्षा प्रदान की। जो दोनों देशों के बीच गहरे रक्षा सहयोग का प्रतीक है। सऊदी अरब को भारत का एक मूल्यवान साझेदार बताते हुए पीएम मोदी ने अरब न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘भारत और सऊदी अरब न केवल अपने लिए, बल्कि विश्व की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ेंगे।

सऊदी युवराज से विभिन्न मुद्दों पर होगी वार्ता

प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब को समुद्री पड़ोसी, विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक सहयोगी करार देते हुए दोनों देशों के संबंधों में असीम संभावनाओं की बात कही। उन्होंने सऊदी ‘विजन 2030’ और भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के बीच समानताएं रेखांकित कीं और कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय निवेश संधि पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते की भी सराहना की, जो क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों को नया आयाम दे सकता है। मंगलवार शाम को सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान के साथ होने वाली वार्ता में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

लगातार मजबूत होते भारत-सऊदी रिश्ते

पीएम मोदी ने सऊदी नेतृत्व की दूरदर्शिता और साझेदारी को मजबूत करने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। विदेश मंत्रालय ने सऊदी जेट विमानों द्वारा पीएम मोदी के विमान को सुरक्षा प्रदान करने का वीडियो जारी किया, जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत और सऊदी अरब का स्वाभाविक हित है। हमारा बढ़ता रक्षा और सुरक्षा सहयोग आपसी विश्वास का प्रतिबिंब है।’ बता दें कि भारत और सऊदी अरब के बीच के रिश्ते 2019 में रणनीतिक साझेदारी परिषद के गठन के बाद से लगातार मजबूत हुए हैं।

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सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। दिल्ली में गोल्ड की कीमत 1650 रुपये की ताजा बढ़त के साथ 1 लाख रुपये के बेहद करीब पहुंच गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 99,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

जबकि पिछले हफ्ते शुक्रवार को इसकी कीमत 98,150 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसके साथ ही, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव भी 1600 रुपये की तेजी के साथ 99,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें

सोने की कीमतों में जारी इस बेकाबू तेजी के पीछे यूं तो कई कारण हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदा नीतियों से सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा और अहम असर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बीच ब्याज दरों में कटौती को लेकर बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं।

इसके अलावा, कमजोर पड़ रहे अमेरिकी डॉलर की वजह से भी सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की जा रही है। एमसीएक्स पर सोने की कीमत 99,178 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई।

एमसीएक्स पर भी लाइफटाइम हाई पर पहुंचा सोना

एमसीएक्स पर जून 2025 की समाप्ति के लिए सोने का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ₹98,753 प्रति 10 ग्राम पर खुला और ओपनिंग बेल के कुछ ही मिनटों के अंदर ₹99,178 प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की आलोचना ने अमेरिकी डॉलर को 3 साल के निचले स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। आज सोने की कीमतों के नए रिकॉर्ड पर पहुंचने का यही मुख्य कारण है।

इस साल 26.41 प्रतिशत महंगा हुआ सोना

सोने की कीमत पिछले साल 31 दिसंबर, 2025 से अभी तक 20,850 रुपये या 26.41 प्रतिशत प्रति 10 ग्राम बढ़ चुकी हैं। लेकिन खरीदारों का दर्द सिर्फ सोने की कीमतों पर ही खत्म नहीं हो जाता है। सोना खरीदने के लिए ग्राहकों को 3 प्रतिशत का जीएसटी चुकाना होता है और मेकिंग चार्ज के तौर पर एक मोटी रकम भी देनी होती है।

लेकिन जैसे-जैसे सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे-वैसे जीएसटी और मेकिंग का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है, जो सोने की ओवरऑल कीमत को सीधे 7वें आसमान पर पहुंचा दे रहा है।

जीएसटी और मेकिंग चार्ज ने गहराया जख्म

उदाहरण के लिए आज सोने का भाव 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अगर आप 10 ग्राम की एक चेन खरीदते हैं तो इसके लिए आपको सोने का 1,00,000 रुपये, 3 प्रतिशत जीएसटी का 3000 रुपये और 15 प्रतिशत मेकिंग का 15,000 रुपये अलग से देना होगा।

इस तरह से आपको 10 ग्राम सोने की चेन के लिए कुल 1,18,000 रुपये चुकाने होंगे। अगर यही सोना 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम होता तो आपको जीएसटी के लिए 1500 रुपये और मेकिंग के लिए 7500 रुपये ही देने होते।

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जहरीली रहती है दिल्ली की हवा, रेस्पिरर लिविंग साइंस की रिपोर्ट में खुलासा

सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा जहरीली बनी रहती है और लोगों का सांस लेना मुश्किल बना रहता है लेकिन अब रिपोर्ट बता रही है कि दिल्ली की हवा में जहर सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं है। बल्कि सालों भर हवा में जहर घुला रहता है यानी हर मौसम में दिल्ली की हवा प्रदूषित रहती है।

इस रेस्पिरर लिविंग साइंस अपनी रिपार्ट में ये दावा किया है। इस रिपोर्ट में एटलस AQi से लिए गए डेटा के आधार पर बीते चार साल का विश्लेषण किया गया है। इसके आधार पर बताया गया है कि दिल्ली में पीएम 10 का स्तर पूरे साल तय मानकों से अधिक बना रहता है।

स्पिरर लिविंग साइंसेज की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

स्पिरर लिविंग साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति बदलती रहती है और सर्दियों में तो हर सप्ताह प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की जाती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली का औसत पीएम 2.5 स्तर 243.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

जारी की गई इस रिपोर्ट में हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी का उपयोग करके शहरी भारत में प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान की गई है।

आईये जाने क्या कहती है रिपोर्ट ?

>> रिपोर्ट में 500×500 मीटर के रिज़ॉल्यूशन के साथ वायु गुणवत्ता के रुझान दिखाए गए हैं, जिससे नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और नागरिकों को कार्रवाई योग्य जानकारी प्राप्त हो रही है।

>> रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक भागीदारी व्यक्तिगत जागरूकता बढ़ाने के अलावा स्वच्छ शहरों के लिए साझा इच्छा को बढ़ावा देती है।

>> दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी क्षेत्रों में गंभीर प्रदूषण की घटनाएं जारी हैं, लेकिन वाराणसी जैसे शहरों ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

>> संक्षेप में, रेस्पिरर लिविंग साइंसेज की रिपोर्ट में भारत में वायु गुणवत्ता की स्थिति और प्रदूषण के हॉटस्पॉट के बारे में चिंताजनक जानकारी दी गई है।

>> रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक भागीदारी और हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती है।

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यूपीएससी सिविल सर्विस का रिजल्ट जारी, शक्ति दुबे बनीं टॉपर

यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। यह रिजल्ट लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर तय किया गया है। इंटरव्यू जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच हुए थे। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में शामिल होने वाले अभ्यर्थी अपना फाइनल रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर देख सकते हैं।

यूपीएससी ने आधिकारिक वेबसाइट पर शॉर्टलिस्ट फॉर्मेट में रिजल्ट जारी किया है। जिसमें यूपीएससी सीएसई पास कर चुके उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर दिए गए हैं।

1000 से अधिक उम्मीदवारों ने पास की यूपीएससी

इस परीक्षा में कुल 1009 उम्मीदवारों को पास घोषित किया गया है। इनमें से 335 जनरल कैटेगरी, 109 ईडब्ल्यूएस, 318 ओबीसी, 160 एससी, 87 एसटी कैटेगरी के उम्मीदवार हैं।

अब इन्हें IAS, IFS और IPS आदि सेवाओं में नौकरी दी जाएगी। जानकारी दे दें कि साल 2024 की यूपीएससी परीक्षा में शक्ति दुबे ने ऑल इंडिया रैंक 1 यानी टॉप किया है। इसके साथ ही आयोग ने 230 उम्मीदवारों की एक रिजर्व लिस्ट भी बनाई है।

टॉप 10 उम्मीदवारों के नाम

1 – शक्ति दुबे

2 – हर्षिता गोयल

3 – डोंगरे आर्चित पराग

4 – शाह मार्गी चिराग

5 – आकाश गर्ग

6 – कोमल पूनिया

7 – आयुषी बंसल

8 – राज कृष्णा झा

9 – आदित्य विक्रम अग्रवाल

10 – मयंक त्रिपाठी

अन्य उम्मीदवारों के नाम नीचे दिए लिंक में देखे

यूपीएससी सिविल सर्विस का रिजल्ट हुआ जारी

आपको जानकारी दे दें कि इन पास हुए उम्मीदवारों के मार्क्स रिजल्ट की घोषणा करीबन 15 दिन बाद की जा सकती है। यूपीएससी 2024 की परीक्षा के लिए इंटरव्यू 17 अप्रैल तक आयोजित किए गए थे। इसकी शुरुआत 7 जनवरी 2025 से हुई थी। साल 2024 में यूपीएससी ने आईएएस, आईपीएस समेत कई सर्विसेज में 1132 पदों पर भर्ती निकाली थी।

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कभी भी आ सकता है यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का परिणाम, जानें अपडेट

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा में शामिल हुए छात्र-छात्राएं अपने परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। ऐसी उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से रिजल्ट को अप्रैल के आखिरी वीक में कभी भी जारी किया जा सकता है। परिणाम को घोषित करने से पहले बोर्ड एक नोटिफिकेशन जारी करेगा। जिसमें रिजल्ट जारी किए जाने का विवरण होगा। हालांकि, बोर्ड ने अभी तक आधिकारिक तौर पर घोषणा की सही तारीख और समय की पुष्टि नहीं की है। बता दें कि लाखों स्टूडेंट्स(10वीं और 12वीं कक्षा) अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

यहाँ कर सकेंगे परिणाम चेक

रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाकर अपने परिणाम को चेक कर सकेंगे। बता दें कि लाखों छात्र-छात्राएं यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। वैसे बता दें कि हर वर्ष यूपी बोर्ड परिणाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जारी किया जाता है। ऐसे में इस साल भी यूपी बोर्ड परिणाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए घोषित किया जाएगा।

पूरा हो चुका है मूल्यांकन का काम

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा उत्तर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। तय समय सीमा के अंदर कॉपियों की चेकिंग का काम पूरा कर लिया गया है। इस बार यूपी बोर्ड में हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की संख्या 27,32,216 और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों की संख्या 27,05,017 है।

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के एक दिन जारी होंगे परिणाम

यूपी बोर्ड की तरफ से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परिणाम अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ घोषित किए जाएंगे। घोषित होने के बाद छात्र-छात्राएं अपने परिणाम को चेक कर सकेंगे। यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित करने के साथ-साथ टॉपर लिस्ट भी जारी करेगा। रिजल्ट से पहले एक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

इन वेबसाइट्स पर देख सकेंगे यूपी बोर्ड परिणाम

लाखों स्टूडेंट्स अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्र-छात्राएं निम्नवत वेबसाइट्स से परिणाम देख सकेंगे।

>>   upmsp.edu.in

>>   upresults.nic.in

>>   upmspresults.up.nic.in

ऐसे कर सकेंगे परिणाम चेक

>>   सबसे पहले छात्र-छात्राओं को आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाना होगा।

>>   इसके बाद छात्र-छात्राओं को होमपेज पर यूपी बोर्ड 10वीं/12वीं कक्षा के परिणाम वाले लिंक पर क्लिक करना होगा।

>>   इतना करते ही आपके सामने एक अलग विंडो खुल जाएगी।

>>   अब छात्र-छात्राएं मांगी गई डिटेल को भरें।

>>   इसके बाद उसे सबमिट करें।

>>   इसके बाद छात्र-छात्राओं के सामने परिणाम खुल जाएगा।

>>    अब परिणाम को डाउनलोड करें।

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मुर्शिदाबाद हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई से किया इनकार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बीते दिनों हुई हिंसा की चर्चा पूरे देश में हुई थी। इस हिंसा के दौरान जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी। इस दौरान 3 लोगों की हत्या भी हुई और कई लोग घायल हुए। घटना के बाद बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोगों ने पलायन किया था।

मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से एक उचित याचिका दाखिल करने को कहा है।

वकील ने कहा कि मुर्शिदाबाद ………

सुनवाई के दौरान वकील शशांक शेखर ने कहा- “पालघर साधुओं के मामले पर मैंने ही याचिका दायर की थी। यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन का है और राज्य में कानून व्यवस्था बहुत खराब है।” सुप्रीम कोर्ट ने पूछा आपको जानकारी कहां से मिली। क्या ये सही है। इस पर वकील ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर है। वकील शशांक ने कहा कि वहां लोग सड़कों पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप बहुत जल्दी में हैं। इस पर वकील ने कहा मुझे याचिका वापस लेकर संशोधन की मंजूरी दें।

याचिका दायर करते समय सावधान रहना होगा – सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंसा के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड की अदालत है। भावी पीढ़ी देखेगी। आपको लगता है कि इसकी रिपोर्ट आदि की जाएगी, लेकिन आपको याचिका दायर करते समय या आदेश पारित करते समय सावधान रहना होगा। क्या इन कथनों का होना ज़रूरी है? हम बार के हर सदस्य का सम्मान करते हैं। लेकिन जिम्मेदारी की भावना के साथ।

सुप्रीम कोर्ट का उचित याचिका दाखिल करने का निर्देश

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुर्शिदाबाद में हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं से एक उचित याचिका दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने वकीलों को फटकार लगाई और कहा कि वकीलों को जिम्मेदारी के साथ उचित याचिकाएं दाखिल करने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपना मामला वापस लेने और बेहतर सामग्री और कथनों के साथ मामला दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है।

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निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना पर बयान देने के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे विपक्षी आलोचना का सामना तो कर ही रहे हैं, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लेटर पिटिशन भी दाखिल की गई है। वहीं, बीजेपी सांसद के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर अब सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक में कहा है कि केस फाइल कीजिए, इसके लिए अनुमति की जरूरत नहीं है।

क्या है पूरा मामला ?

बता दें कि निशिकांत दुबे ने शीर्ष अदालत को निशाना बनाते हुए कहा था कि यदि सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है तो संसद एवं विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने सीजेआई संजीव खन्ना पर निशाना साधते हुए उन्हें देश में ‘सिविल वॉर’ के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि बीजेपी ने दुबे के बयान से खुद को अलग कर लिया। लेकिन कानून के जानकार इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के तौर देख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि……..

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता से कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई संजीव खन्ना की आलोचना करने को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर करने के लिए बेंच की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

इस मामले का उल्लेख जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने दुबे की टिप्पणियों के बारे में हाल में आए एक समाचार का हवाला दिया और कहा कि वह अदालत की अनुमति से अवमानना ​​याचिका दायर करना चाहते हैं। जस्टिस गवई ने कहा, ‘‘आप इसे दायर करें। दायर करने के लिए आपको हमारी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

बीजेपी की कवायद ‘डैमेज कंट्रोल’ – कांग्रेस

कांग्रेस ने भी बीजेपी के सांसदों निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा सुप्रीम कोर्ट की आलोचना किए जाने के बाद उनके बयानों से पार्टी के किनारा करने की कवायद को ‘‘डैमेज कंट्रोल’’ करार दिया और कहा कि सांसदों को पार्टी से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दुबे के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि उम्मीद है कि अटॉर्नी जनरल बिना देरी किए आपराधिक अवमानना ​​के लिए सहमति देंगे।

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क्या है “लिविंग अपार्ट टुगेदर” ट्रेंड ? जानिए इसमें कैसे और क्या करते हैं कपल्स

पिछले कुछ सालों में रिलेशनशिप में बड़े बदलाव आए हैं। शादी से पहले डेटिंग, लिव इन रिलेशनशिप, बैंचिंग और शादी के बाद लिविंग अपार्ट टुगेदर जैसे नए ट्रेंड्स सामने आ रहे हैं। पहले शादी को लोग सात जन्मों का रिश्ता समझकर निभाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अगर रिश्ते में एक दूसरे से बन नहीं रही, एक दूसरे के साथ रहना मुश्किल हो रहा है तो आप आसानी से तलाक लेकर अलग हो सकते हैं। कुछ लोग शादी के बाद अपनी प्राइवेसी, करियर और अपनी लाइफ को जीना चाहते हैं ऐसे लोगों को लिविंग अपार्ट टुगेदर जैसे नए ट्रेंड काफी पसंद आ रहे हैं।

जानिए लिविंग अपार्ट टुगेदर (Living Apart Together) में कैसे रहते हैं कपल्स और क्या होता है ?

क्या है लिविंग अपार्ट टुगेदर

लिविंग अपार्ट टुगेदर में शादीशुदा लोग एक रिश्ते में होते हुए भी अलग-अलग घरों में रहते हैं। लेकिन एक दूसरे के साथ अक्सर मिलते रहते हैं। कुछ घंटे या दिन साथ में बिताते हैं, एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं, जरूरत के वक्त साथ होते हैं और फिर अलग-अलग रहने लगते हैं।

युवाओं के बीच ये इसलिए ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि इसमें उन्हें आजादी मिलती है। इसके अलावा वो एक डीप रिलेशनशिप में रहते हैं। कुछ लोग एक घर में रहते हुए भी अलग-अलग रहते हैं। जिसमें अलग-अलग कमरे में या फिर अलग फ्लोर पर रहना पसंद करते हैं।

और क्यों पसंद किया जा रहा है ये ट्रेंड

फ्रीडम –  साथ रहने पर कपल्स अक्सर एक दूसरे की पसंद ना पसंद में इंटरफेयर करते हैं। जो युवाओं को पसंद नहीं आ रहा है। लिविंग अपार्ट टुगेदर में कपल्स को पर्सनल स्पेस मिलता है और वो अपना रुटीन फॉलो कर पाते हैं।

पर्सनल डेवलप्मेंट-   जो लोग करियर पर ज्यादा फोकस करना चाहते हैं उन्हें ये ट्रेंड काफी पसंद आ रहा है। इससे आप अपने पर्सनल गोल्स पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं। कमिटमेंट न होने के कारण आप खुद को ज्यादा समय दे पाते हैं।

रिश्ते में रोमांच – हर रोज साथ रहने से कई बार एक दूसरे के लिए रोमांच नहीं बचता है। ऐसे में जब आप एक दूसरे से दूर रहते हैं तो कपल्स के बीच मिलने की चाहत, उत्सुकता और रोमांच बना रहता है।

फाइनेंशियल फ्रीडम और नो एक्सपेक्टेशन – इस तरह रहने से आप एक दूसरे से किसी तरह की कोई एक्सपेक्टेशन नहीं करते हैं। सोशल प्रेशर से बचते हैं और खुद के लिए ज्यादा फाइनेंशियल फ्रीडम महसूस करते हैं।

लिविंग अपार्ट टुगेदर के फायदे

इस तरह अलग-अलग रहने से कपल्स का पर्सनल डेवलप्मेंट अच्छा होता है। लोग अपनी रुचि को बढ़ाते हैं और उसे जीते हैं। जिससे आप खुश रहते हैं और रिश्ता भी मजबूत बनता है। इस तरह के रिश्ते में किसी तरह की अपेक्षा नहीं होती है। इसलिए आप एक दूसरे के लिए ज्यादा करना चाहते हैं। लड़ाई झगड़े कम होते हैं, जिससे तनाव कम होता है।

लिविंग अपार्ट टुगेदर के नुकसान

ऐसे रिश्ते में कई बार इमोशनल दूरी बढ़ सकती है। कई बार आप खुद को अकेला महसूस करते हैं। खासकर जब आप किसी परेशानी से जूझ रहे हों या कोई मुश्किल वक्त से गुजर रहे हों। कई बार ऐसे लोगों में इमोशनल इनस्टेबिलिटी हो सकती है।

read more :   शॉपिंग मॉल में खुलेंगी शराब की दुकानें, 4 शहरों में शुरू होगी बिक्री

शॉपिंग मॉल में खुलेंगी शराब की दुकानें, 4 शहरों में शुरू होगी बिक्री

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की नई आबकारी नीति पॉलिसी के तहत राज्य में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत मल्टीप्लेक्स वाले शॉपिंग मॉल में बीयर, वाइन जैसे कम अल्कोहल वाले ड्रिंक्स की बिक्री को मंजूरी दे दी गई है। यूपी के आबकारी अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है।

अधिकारियों के मुताबिक, सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कम अल्कोहल वाली ड्रिंक्स की खुदरा बिक्री को बढ़ाना और छोटे कारोबारियों के लिए बिजनेस में एंट्री करना और इसे आसान बनाना है।

मिलेगा FL-4D लाइसेंस

सरकार के इस नए प्रोजेक्ट के तहत राज्य के आबकारी विभाग ने FL-4D लाइसेंस के लिए ऐप्लिकेशन लेना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल ये प्रोजेक्ट दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के अलावा आगरा और लखनऊ में पायलट बेसिस पर शुरू किया जाएगा।

मल्टीप्लेक्स वाले मॉल में कम अल्कोहल के ड्रिंक्स बेचने के लिए जिस FL-4D लाइसेंस की जरूरत होगी, उसका सालाना खर्च 6 लाख रुपये तय किया गया है। बताते चलें कि इससे पहले यूपी में शराब बेचने के लिए सिर्फ FL-4C लाइसेंस ही मिलता था, जिसका सालाना खर्च 25 लाख रुपये है। FL-4C लाइसेंस के साथ मॉल में प्रीमियम शराब बेचने की इजाजत होती थी।

सिनेमाघर में शराब बेचने और पीने पर होगा प्रतिबंध

गौतमबुद्ध नगर जिले के आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार ने बताया कि मल्टीप्लेक्स वाले मॉल में कम अल्कोहल वाले ड्रिंक्स की बिक्री शुरू होगी, लेकिन सिनेमा हॉल के अंदर किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री या सेवन पर पूरी तरह से सख्त प्रतिबंध रहेगा। ये दुकानें मॉल के अंदर खुलेंगी, लेकिन इन्हें सिनेमा घर के अंदर नहीं खोला जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि नोएडा सेक्टर 43 के एक मॉल ने FL-4D लाइसेंस के लिए पहले ही अप्लाई कर दिया था। इसके अलावा अभी दो अन्य जगहों से भी ऐप्लिकेशन फाइल की गई है।

read more  :   धर्म बदलने वाले आदिवासियों से आरक्षण वापस लिया जाए – चंपई सोरेन

धर्म बदलने वाले आदिवासियों से आरक्षण वापस लिया जाए – चंपई सोरेन

झारखंड भाजपा के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने बड़ी मांग की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जिन आदिवासियों ने दूसरा धर्म अपना लिया है उन सभी से आरक्षण को वापस ले लिया जाए। इसके सात ही चंपई सोरेन ने ये भी मांग की है कि दो आदिवासी महिलाएं अपने समुदाय से बाहर शादी कर रही हैं उनसे भी आरक्षण की सुविधा वापस ले ली जानी चाहिए। आइए जानते है कि पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने इस मामले में और क्या कुछ कहा है।

चंपई सोरेन ने कहा……..

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन गुरुवार को बोकारो जिले के बालीडीह जाहेरगढ़ में सरहुल/बाहा मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने आरक्षण की सुविधा को लेकर ये टिप्पणी की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंपई ने दूसरा धर्म अपनाने वाले आदिवासियों और आदिवासी समुदाय से अलग शादी करने वाली आदिवासी महिलाओं को आरक्षण दिए जाने का विरोध किया। इस दौरान चंपई ने संथाल परगना के मौजूदा हालात पर चिंता भी व्यक्त की।

आदिवासियों का अस्तित्व मिट जाएगा – चंपई सोरेन

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने आदिवासी समुदाय से जागने की अपील की है। चंपई सोरेन ने आदिवासियों से कहा कि- “अगर हम अभी नींद से नहीं जागे तो समुदाय का कोई भी व्यक्ति हमारे जाहेरस्थान, सरना स्थल और देशावली (सभी पूजा स्थलों) पर प्रार्थना करने के लिए नहीं बचेगा।” चंपई सोरेन ने कहा कि अगर दूसरा धर्म अपनाने वालों और दूसरे समुदाय में शादी करने वाले आदिवासियों को लिस्ट से बाहर नहीं किया गया तो आदिवासी समुदाय का अस्तित्व मिट जाएगा।

बांग्लादेशी घुसपैठी जमीन हड़प रहे – चंपई सोरेन

संथाल परगना की हालात पर चर्चा करते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि आदिवासी दूसरा धर्म अपनाने वाले और बांग्लादेशी यानी दो ओर से मार झेल रहे हैं। चंपई ने कहा कि एक ओर रिजर्व सीटों पर दूसरा धर्म अपनाने वाले आदिवासी कब्जा कर रहे हैं। तो वहीं, बांग्लादेशी घुसपैठी आदिवासियों की जमीन हड़प रहे हैं और आदिवासी महिलाओं से शादी कर के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसके बाद ये बांग्लादेशी घुसपैठी स्थानीय निकाय चुनाव में इन्हीं आदिवासी महिलाओं को उतारते हैं और आरक्षण पर अप्रत्यक्ष तौर पर अतिक्रमण करते हैं। चंपई सोरेन ने कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

read more :    भगोड़े मेहुल चोकसी के 2,565 करोड़ रुपये की संपत्तियों की होगी नीलामी

भगोड़े मेहुल चोकसी के 2,565 करोड़ रुपये की संपत्तियों की होगी नीलामी

भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मुंबई की एक विशेष अदालत ने चोकसी की 2,565 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों को बेचने की अनुमति दी है। इन संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि को प्रभावित बैंकों के नाम पर सावधि जमा (FD) के रूप में रखा जाएगा, ताकि पीड़ितों को उनकी राशि वापस की जा सके।

अब तक, गीतांजलि जेम्स लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों की बिक्री से 125 करोड़ रुपये की राशि पीड़ितों को लौटाई जा चुकी है। इन संपत्तियों में मुंबई के सांताक्रूज स्थित छह फ्लैट, दो फैक्ट्रियां और गोदाम शामिल हैं।

मेहुल चोकसी पर कसा शिकंजा

मेहुल चोकसी की जब्त की संपत्तियों में मालाबार हिल इलाके की वह भी प्रॉपर्टी है जो प्राइम लोकेशन पर है। ईडी ने जिसे जब्त किया है। उसके नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है। गोकुल अपार्टमेंट मालाबार हिल जिसके 9/10 मंजिल पर मेहुल चोकसी का डुप्लेक्स फ्लैट है। उसने 11 वे मंजिल पर अवैध निर्माण किया है।

फ्लैट के दरवाजे और दीवारों पर ईडी, सीबीआई अलग-अलग बैंक के नोटिस, बीएमसी सोसायटी बिजली बिल की नोटिस पड़ी है। फ्लैट करीबन सात हज़ार स्क्वायर फीट का है जिसकी क़ीमत करीबन 70 करोड़ है जो अब खण्डर बन गया है। फ्लैट से पेड़ पौधे उग बाहर निकल आए हैं।

जिस से निचले फ्लाइट्स और सोसायटी के दीवारों को नुकसान पहुंच रहा है। बता दें कि मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर 2018 में पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

भारत में जब्त मेहुल चोकसी की संपत्तियां

ईडी ने 2018 में मेहुल चोकसी और उनके समूह की 41 संपत्तियों को ₹1,217.2 करोड़ की राशि के साथ जब्त किया था। इनमें शामिल हैं –

>>    मुंबई में 15 फ्लैट्स और 17 कार्यालय परिसरों..

>>    कोलकाता में एक मॉल…

>>   अलीबाग में 4 एकड़ का फार्म हाउस….

>>   नागपुर, पनवेल (महाराष्ट्र) और तमिलनाडु के विलुपुरम में 231 एकड़ भूमि…

>>    हैदराबाद के रंगा रेड्डी जिले में 170 एकड़ का पार्क, जिसकी अनुमानित कीमत ₹500 करोड़ से अधिक है

>>    मुंबई के बोरीवली (पूर्व) और सांताक्रूज़ (पूर्व) क्षेत्रों में फ्लैट्स….

>>    मुंबई के सांताक्रूज़ इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (SEEPZ) में दो कारखाने और गोदाम भी जब्त किए गए हैं।

read more  :    सीएसके के पास अभी भी प्लेऑफ में एंट्री करने का बन सकता है मौका

सीएसके के पास अभी भी प्लेऑफ में एंट्री करने का बन सकता है मौका

चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के लिए आईपीएल का मौजूदा सीजन अच्छा नहीं गया है और बहुत ही ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहा है। सीएसके के बीच सीजन में ही टीम के नियमित कप्तान रुतुराज गायकवाड़ कोहनी की चोट की वजह से पूरे सीजन से बाहर हो गए और फिर उन्हें महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाना पड़ा।

सीएसके टीम कई प्लेयर्स को मौजूदा सीजन में आजमा चुकी है और कोई भी अच्छा प्रदर्शन नहीं दिखा पाया। टीम मौजूदा सीजन में 5 मुकाबले हार चुकी है। इसके बाद भी सीएसके की टीम के पास आईपीएल के प्लेऑफ में पहुंचने का एक मौका है।

धोनी को दिखाना होगा पुराना कमाल

मौजूदा सीजन में अगर चेन्नई सुपर किंग्स को प्लेऑफ में पहुंचना है, तो महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में कमाल दिखाना होगा, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। पिछले मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ वह फॉर्म में लौटने का संकेत दे चुके हैं। एलएसजी (LSG) के खिलाफ उन्होंने 11 गेंदों में 26 रन बनाए, जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल रहा। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड भी मिला।

आखिरी पायदान पर है सीएसके की टीम

मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने अभी तक कुल 7 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से 2 में जीत हासिल की है और पांच मैच हारे हैं। चार अंकों के साथ उसका नेट रन रेट 1.276 है और वह प्वाइंट्स टेबल में आखिरी पायदान पर है।

सीएसके को कम से कम 6 मैच तो जीतने होंगे

अभी मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स के 7 मुकाबले बचे हुए हैं। अगर सीएसके को प्लेऑफ में जाने का ख्वाब पालना है, तो उसे अपने बाकी बचे मैचों में से कम से कम 6 मुकाबले जीतने होंगे, जिससे उसके कम से कम 16 अंक हो जाएं। इसके अलावा उसे टारगेट चेज करते समय कम ओवर्स में हासिल करना होगा।

डिफेंड करते समय से ज्यादा रनों से मुकाबला अपने नाम करना होगा। तभी उसका नेट रन रेट बढ़ पाएगा। फिर उसके बाद उसके लिए प्लेऑफ में पहुंचने का एक चांस बन सकता है।

सीएसके को होम ग्राउंड में खेलने हैं तीन मैच

इसके लिए चेन्नई सुपर किंग्स की टीम को एकजुट होकर प्रदर्शन करना होगा। अभी तक मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम अपना सही टीम संयोजन नहीं तलाश कर पाई है। चेपॉक का ग्राउंड सीएसके का होम ग्राउंड और गढ़ रहा है।

यहां सीएसके को हराना किसी भी टीम के लिए मुश्किल है, लेकिन मौजूदा सीजन में सीएसके ने यहां चार मुकाबले खेले हैं और जिसमें से तीन हारे हैं। अभी होम ग्राउंड पर उसके तीन मैच बचे हुए हैं। प्लेऑफ का रास्ता इन 3 मैचों में जीत दर्ज करके ही निकलेगा। क्योंकि यहां की परिस्थिति से टीम अच्छी तरह से वाकिफ है।

read more :    बांग्लादेश अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे – विदेश मंत्रालय

बांग्लादेश अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे – विदेश मंत्रालय

वक्फ संशोधन कानून को लेकर पश्चिम बंगाल के मुर्शिादबाद में हुई हिंसा को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की टिप्पणियों को भारतीय विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को नसीहत दी है कि पहले वह अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की घटनाओं को लेकर बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं।

ये बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत की चिंताओं के साथ तुलना करने की एक कोशिश है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ ऐसे अपराध करनेवाले अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुचित टिप्पणियां करने के बजाय बांग्लादेश को अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

दरअसल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव ने भारतीय अधिकारियों से आह्वान किया था कि वे मुर्शिदाबाद हिंसा से प्रभावित अल्पसंख्यकों मुस्लिम समुदायों की रक्षा करें।

बता दें कि इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह की अनुचित टिप्पणियां करने के बजाय बांग्लादेश को अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, केंद्र सरकार को राहत

वक्फ संशोधन कानून को लेकर आज फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। आपको बता दे कि इस दौरान केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल वक्फ कानून पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया है। देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगले आदेश तक वक्फ में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी है। बता दें कि वक्फ कानून के खिलाफ 70 से ज्यादा याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई है।

जवाब देने के लिए 7 दिन का वक्त

भारत सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार महता ने एक सप्ताह का समय मांगा है। शीर्ष अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित यूजर्स द्वारा वक्फ सहित वक्फों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश :

>> अगली सुनवाई तक वक्फ बोर्ड और परिषदों में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी।​

>> वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।​

>> केंद्र सरकार को सात दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।​

>> सिर्फ पांच प्रमुख याचिकाकर्ता ही अगली सुनवाई में उपस्थित होंगे, बाकी याचिकाओं को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा।​ अदालत ने साफ कहा कि सभी पक्ष आपस में तय करें कि उनकी पांच मुख्य आपत्तियां क्या हैं।

वही केंद्र सरकार ने इस कानून को पारदर्शिता बढ़ाने और वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक बताया है। हालांकि, विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने इस कानून को मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है।​

अगली सुनवाई में सरकार का जवाब और कोर्ट का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा।​

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वक्फ संशोधन बिल पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, केंद्र सरकार को नोटिस जारी

सुपीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की तीन जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की। वक्फ अधिनियम के खिलाफ कई विपक्षी दलों और नेताओं द्वारा याचिकाएं दायर की गई हैं। जिनमें कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम, आदि शामिल हैं। अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे गैर सरकारी संगठनों और संगठनों ने भी इसके खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। जानते हैं कि सुनवाई के दौरान किसने क्या-क्या दलील दी।

वफ्क बिल कानून के खिलाफ नहीं – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में किसी के लिए किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पर “जबरन और एकतरफा” कब्जा करने का कोई प्रावधान न हो। वहीं, वक्फ अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह कानून “मुसलमानों और मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन करता है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कही ये बातें

सीजेआई ने कहा कि हम सभी को नहीं सुन सकते। इसलिए तय कर देंगे कि कौन बहस करेगा। हम एक-एक कर नाम लेंगे। कोई भी दलील दोहराएगा नहीं। तमाम रिट याचिकाएं हैं और सभी ब्रीफ नोट तैयार करेंगे। दूसरा किन आधारों पर तर्क रखेंगे। वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि मैं वरिष्ठ हूं, मुझे मौका दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी डेकोरम बनाएं रखें। सीजेआई ने कहा दो सवाल हैं- क्या मामला हाईकोर्ट भेजें… आपके तर्कों के आधार क्या हैं।

मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने वफ्क कानून का किया विरोध

वक्फ संशोधन अधिनियम, 2024 पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा, “हमारी सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट से हैं। सरकार सभी राज्यों में वक्त संशोधन अधिनियम लागू करने के लिए मजबूर है। यह एक काला कानून है जो सभी वक्फ संपत्तियों को नष्ट कर देगा। पहली बार ऐसा हो रहा है कि राज्य सरकारें वक्फ बिल के पक्ष में हैं। 6 राज्यों की सरकारें वक्फ बिल के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट गई हैं। इससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल दे रहे हैं दलील

एक याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल दलील दे रहे हैं। कोर्ट से उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद मूवेबल और इमूवेबल संपत्ति जो धर्म संबंधी है। उनको संरक्षित करता है। सिब्बल ने कहा कि मैं मोटे तौर पर बता दूं कि चुनौती किस बारे में है। संसदीय कानून के माध्यम से जो करने की कोशिश की जा रही है, वह एक धर्म के आवश्यक और अभिन्न अंग में हस्तक्षेप करना है। मैं अनुच्छेद 26 का उल्लेख करता हूं और अधिनियम के कई प्रावधान अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करते हैं।

सिब्बल ने कहा कि वक्फ के मामले में पर्सनल लॉ लागू होता है और मैं ऐसे में किसी अन्य का अनुसरण क्यों करूंगा। सिब्बल ने कहा कि 2025 अधिनियम की धारा 3 (आर) का संदर्भ देते हुए- वक्फ की परिभाषा देखिए- सिब्बल ने पढ़ा। यदि मैं वक्फ स्थापित करना चाहता हूं, तो मुझे यह दिखाना होगा कि मैं 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हूं। यदि मैं मुस्लिम पैदा हुआ हूं, तो मैं ऐसा क्यों करूंगा? मेरा व्यक्तिगत कानून लागू होगा।

महिलाओं को विरासत से वंचित नहीं किया जा सकता – सिब्बल

सिब्बल ने कहा कि धारा 3(ए)(2)- वक्फ-अल-औलाद के गठन से महिलाओं को विरासत से वंचित नहीं किया जा सकता। इस बारे में कहने वाला राज्य कौन होता है? सीजेआई ने कहा कि हिंदू में भी सरकार ने कानून बनाया है। संसद ने मुसलमानों के लिए भी कानून बनाया है। सीजेआई ने कहा कि अनुच्छेद 26 धर्मनिरपेक्ष है, सभी समुदायों पर लागू होता है।

सीजेआई ने कही ये बातें

वही सीजेआई ने कहा कि ऐसे कितने मामले होंगे? मेरी समझ से, व्याख्या आपके पक्ष में है। अगर इसे प्राचीन स्मारक घोषित किए जाने से पहले वक्फ घोषित किया गया है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह वक्फ ही रहेगा, आपको तब तक आपत्ति नहीं करनी चाहिए जब तक कि इसे संरक्षित घोषित किए जाने के बाद वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता।

जमीयत उलेमा ए हिन्द के वकील ने दी दलील

मौलाना अरशद मदनी की जमीयत उलेमा ए हिन्द के वकील के तौर पर कपिल सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि कलेक्टर का प्रोसेस न्यायिक प्रक्रिया नहीं है। सिब्बल ने धारा 7(ए) का हवाला देते हुए कहा कि इसमें 20 साल लगेंगे। इस पर सीजेआई ने कहा लेकिन यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। क्या कलेक्टर का फैसला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है? सिब्बल ने कहा कि कानून की धारा ऐसा नहीं कहती।

तुषार मेहता ने कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से ऐसा कहा गया है। विश्वनाथन ने कहा कि मत उलझाओ, संपत्तियां धर्मनिरपेक्ष हो सकती हैं। केवल संपत्ति का प्रशासन ही इसके लिए उत्तरदायी हो सकता है, बार-बार अनिवार्य धार्मिक प्रथा न कहें। सिब्बल ने कहा कि कृपया धारा 9 देखें। कुल सदस्य संख्या 22 है, 10 मुस्लिम होंगे। सीजेआई ने कहा कि दूसरा प्रावधान देखें। क्या इसका मतलब यह है कि पूर्व अधिकारी को छोड़कर केवल दो सदस्य ही मुस्लिम होंगे?

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा

अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि 8 लाख में से 4 वक्फ हैं, जो उपयोगकर्ता के द्वारा हैं। सीजेआई ने कहा कि क्षमा करें, हम बीच में नहीं बोलना चाहते, हमें बताया गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट वक्फ की जमीन पर बना है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि वक्फ की सभी जमीनें गलत हैं, लेकिन इसमें वास्तविक चिंता है।

वही अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अयोध्या के 118वें फैसले में कहा गया है कि यह बहुत पुरानी अवधारणा है। क्या आपने आधार हटा दिया है? 2(आर)(आई) हटा दिया गया है, लेकिन क्या आप फैसले का आधार हटा सकते हैं? व्यावहारिक रूप से देखें। अगर मैं देखूं कि संसद वक्फ है, तो आपका आधिपत्य स्वीकार नहीं करेगा, लेकिन अवधारणा खराब नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दिया ये दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने अब तर्क देना शुरू किया। हेगड़े ने कहा कि आप पंजाब से हैं, आपको पता होगा कि अमृतसर गैर-सिख नियंत्रण में था और इसके लिए पूरे अकाली दल आंदोलन की आवश्यकता थी। अन्य वकीलों ने भी कानून पर रोक लगाने की मांग की.. सीजेआई ने कहा कि बस हो गया। अब हमें मौका दीजिए।

मूल रूप से अनुच्छेद 31 को हटा दिया

सीनियर एडवोकेट राजीव शकधर ने कहा कि मूल रूप से अनुच्छेद 31 को हटा दिया गया था। वे संपत्ति के साथ कब छेड़छाड़ कर सकते हैं? नैतिकता, स्वास्थ्य आदि के अधीन, किसी को मुस्लिम के रूप में प्रमाणित करने के लिए उन्हें 5 साल की परिवीक्षा अवधि की आवश्यकता होती है।

कानून को बनाने के लिए जेपीसी का गठन था हुआ

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘अदालत इस समय उस कानून पर सुनवाई कर रही है, जिसे व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के बाद लाया गया है। अब मैं वह सच्चाई सामने रख रहा हूं, जिसे याचिकाकर्ता नजरअंदाज कर रहे हैं। इस कानून को बनाने के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया गया था। इस समिति ने 38 बैठकें कीं, देश के प्रमुख शहरों का दौरा किया, विभिन्न पक्षों से परामर्श किया और प्राप्त हुए 29 लाख सुझावों पर गंभीरता से विचार किया।

धार्मिक व्यवस्था पर नहीं, बल्कि कानून पर कर रहे बात

एसजी तुषार मेहता ने कहा, ‘पहले परिभाषा खंड पर एक नज़र डालें‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ सबसे विवादास्पद है। मैं इसे स्पष्ट कर दूं।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, ‘क्या आप कह रहे हैं कि यदि ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’, निर्णय द्वारा या अन्यथा स्थापित किया जाता है, तो आज उसकी कोई वैधता नहीं है?’ इस पर एसजी ने जवाब दिया कि जो प्रस्तुत किया गया है, वह सही वैधानिक योजना नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘मैं हिंदू हूं, मैं एक ट्रस्ट बनाता हूं, और कहता हूं कि सभी ट्रस्टी हिंदू होंगे। प्रशासन चैरिटी कमिश्नर के पास होगा। वहीं इस्लामी कानून में, संपत्ति को धर्मार्थ उद्देश्य के लिए अल्लाह को समर्पित किया जाता है। एक वक्फ होना चाहिए जो ट्रस्ट का निपटान करता है, और वह कहेगा कि इसका संचालन मुतवल्ली द्वारा किया जाएगा।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यहां धार्मिक व्यवस्था पर नहीं, बल्कि कानून पर बात कर रहे हैं।

ट्रस्ट का उदाहरण न दिया जाए – सीजेआई 

सीजेआई ने कहा कि हम इस समय केवल ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ के विषय पर हैं। इस दौरान जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि ट्रस्ट का उदाहरण न दिया जाए, क्योंकि सबसे अधिक संभावना है कि वह हिंदू बंदोबस्ती का ही होगा, और आमतौर पर उसका प्रशासन हिंदू समुदाय ही करता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर दिया कि वे किसी भी तरीके से शासित हो सकते हैं, लेकिन अंततः वे वैधानिक ढांचे द्वारा ही नियंत्रित होते हैं। सीजेआई ने एसजी से कहा कि वे कोई उदाहरण प्रस्तुत करें। इस पर मेहता ने कहा, ‘ठीक है, इस पर नहीं जाते हैं।

जो वक्फ पंजीकृत हैं, वे वक्फ संपत्ति के रूप में रहेंगे

इसके बाद सीजेआई ने टिप्पणी की, ‘मेहता जी, जब हम हिंदुओं की बंदोबस्ती की बात करते हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह आमतौर पर हिंदुओं की ही बंदोबस्ती होती है।’ इसके बाद मेहता ने कहा, अब हम मेरे संकलन पर आते हैं। 2025 अधिनियम से पहले जो वक्फ पंजीकृत हैं, वे वक्फ संपत्ति के रूप में बने रहेंगे। लेकिन यदि कोई यह कहता है कि वे पंजीकृत नहीं हैं, तो केवल वे संपत्तियां जो विवादों में हैं, उन्हें छोड़कर बाकी सब वक्फ संपत्ति मानी जाएंगी।’ इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की, ‘यह वक्फ संपत्ति क्यों नहीं रहेगी ? इसे सिविल कोर्ट को तय करने दिया जाना चाहिए।

सरकारी संपत्ति को लेकर एसजी ने कहा…

सीजेआई ने कहा कि अधिकांश मामलों में जैसे कि जामा मस्जिद, उसे ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ के रूप में माना जाएगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रतिक्रिया दी, ‘उन्हें पंजीकरण कराने से किसने रोका ? जस्टिस विश्वनाथन ने इस पर कहा, ‘सीजेआई जो कह रहे हैं, उसका तात्पर्य यह है कि यदि धारा 3(सी) लागू होती है, और सरकार यह दावा करती है कि वह संपत्ति उसकी है, तो क्या होगा? भूमि अतिक्रमण अधिनियम के तहत कानून कहता है कि इस प्रकार के वास्तविक विवादों पर अदालत विचार करेगी।’ इस पर एसजी ने कहा, ‘माय लॉर्ड्स, कृपया मुझे अपना उत्तर पूरा करने दें। ऐसे कई फैसले हैं जो यह कहते हैं कि सरकार ट्रस्टी के रूप में ऐसी संपत्तियों को विनियमित कर सकती है।

यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई संपत्ति सरकारी है, तो कलेक्टर इसका निर्धारण करेगा। यह प्रावधान इसलिए लाया गया ताकि कोई इस पर विवाद न कर सके, क्योंकि सरकारी संपत्ति, सरकारी संपत्ति के अलावा कुछ और नहीं हो सकती।’ इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की, ‘ऐसे में तो फिर आप पहले से की गई किसी भी घोषणा को रद्द करें जिसमें यह कहा गया हो कि संपत्ति वक्फ संपत्ति है।

कानून द्वारा स्थापित किसी चीज को खत्म करने जैसा होगा

सीजेआई ने कहा, ‘मुझे अब भी मेरा जवाब नहीं मिल पाया है।’ इस पर एसजी मेहता ने कहा, ‘अगर वह वक्फ पंजीकृत है, तो मैं उस पर हलफनामे के माध्यम से जवाब देने को तैयार हूं।’ सीजेआई ने आगे कहा, ‘यह कानून द्वारा स्थापित किसी चीज को खत्म करने जैसा होगा। आप इसे कैसे पंजीकृत करेंगे ? उप-धारा 2 पर गौर करें। जहां तक ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ का सवाल है, इसे पंजीकृत करना मुश्किल है। आपकी यह बात सही है कि इसका दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि ‘उपयोगकर्ता द्वारा’ कोई भी वक्फ वास्तविक नहीं हो सकता। अगर आप इस तरह की संपत्तियों को वक्फ के रूप में चिह्नित करते हैं, तो यह गंभीर समस्या उत्पन्न करेगा। उप-धारा 2 का प्रावधान तो पूरी तरह इसके विपरीत है।

सीजेआई ने आगे टिप्पणी की, ‘कोई विधायिका (legislature) अदालत के किसी निर्णय या डिक्री को अमान्य घोषित नहीं कर सकती। आप कानून का आधार भले ही हटा सकते हैं, लेकिन किसी न्यायिक निर्णय को अप्रभावी नहीं ठहरा सकते। वह बाध्यकारी रहेगा।’ इस पर मेहता ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि ये शब्द क्यों आए हैं। कृपया उस हिस्से को अनदेखा करें। मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो खुद को मुस्लिम वक्फ बोर्ड के अधीन नहीं मानना चाहता। अगर कोई मुसलमान दान करना चाहता है, तो वह ट्रस्ट के माध्यम से भी ऐसा कर सकता है। इसके बाद एसजी और कपिल सिब्बल के बीच थोड़ी बहस शुरू हो गई, जिसे सीजेआई ने रोक दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया

सीजेआई ने पूछा, “वक्फ बाय यूजर का रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? यह बताने वाला कहां से आएगा कि वक्फ मैंने किया है? वक्फ कानून का दुरुपयोग होता आया है, लेकिन वक्फ बाय यूजर को पूरी तरह रोक देना सही नहीं लगता। अंग्रेजों के ज़माने में प्रिवी काउंसिल ने भी वक्फ बाय यूजर को मान्यता दी थी।

इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा, “नया कानून मुसलमानों को खुद ट्रस्ट बनाने की अनुमति देता है और उनके लिए वक्फ को ही संपत्ति सौंपने की बाध्यता नहीं है। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर-मुसलमानों के होने से वक्फ के काम पर कोई असर नहीं पड़ता। यह काफी हद तक एक एडवाइजरी संस्था है और इसमें केंद्र की तरफ से नामित प्रतिनिधि शुरू से हैं। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 2 पूर्व जज भी होंगे।” इस पर सीजेआई ने कहा, “वह गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।

मैं लिखित हलफनामा दे सकता हूं – एसजी तुषार मेहता

एसजी ने जवाब दिया, “इस हिसाब से तो आप भी इस मामले को नहीं सुन सकते। सीजेआई ने तुरंत कहा, “यह तुलना मत कीजिए। बेंच पर बैठे जज इन बातों से अलग हटकर सुनवाई करते हैं। एसजी ने कहा, “मैं सिर्फ याचिकाकर्ताओं की उस दलील की व्यर्थता के बारे में समझा रहा था। 22 में से अधिकतम 2 सदस्य ही गैर-मुस्लिम होंगे। सीजेआई ने पूछा, “क्या हम इस बात को रिकॉर्ड करें? एसजी ने कहा, “मैं लिखित हलफनामा दे सकता हूं। काउंसिल में शिया और दूसरे वर्गों के मुसलमानों को भी जगह दी गई है। 2 मुस्लिम महिलाओं को भी जगह दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इनके बाद नोटिस जारी किया और केंद्र सरकार को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एसजी ने कहा, “हम दो हफ्ते में जवाब दाखिल कर देंगे।

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