Saturday, April 4, 2026
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किसी को शूद्र मत कहना, जब कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से बोले अखिलेश यादव

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में अनिरुद्धाचार्य और सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव के साथ नजर आ रहे हैं। इसमें अखिलेश यादव अनिरुद्धाचार्य से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। अखिलेश यादव कथावाचक से कहते दिख रहे है कि आगे से कभी किसी को शूद्र मत कहना। इस पर कथावाचक मुस्‍कुराते दिखते हैं। हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसका पता नहीं चल पाया है। AVP24NEWS इसकी सत्यता की पुष्टि भी नहीं करता है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह वीडियो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे का बताया जा रहा है।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और अखिलेश की हुई मुलाकात

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बीच एक मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को समझाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान अखिलेश यादव तीखी टिप्पणी करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में अखिलेश कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर एक सवाल पूछ लेते हैं। इस पर अनिरुद्धाचार्य जवाब देते हैं लेकिन अखिलेश यादव इससे संतुष्ट नहीं दिखते हैं। इसके बाद अखिलेश यादव कहते हैं कि खूब प्रचार करो आप। आपको बहुत बधाई और शुभकामनाएं पर बात यहीं नहीं खत्म हुई।

अखिलेश यादव ने की तल्ख टिप्पणी

अखिलेश यादव तल्ख अंदाज में जाते हैं और अखिलेश यादव कहते हैं कि बस यहीं से हमारा और आपका रास्ता अलग हो गया। इसके अलावा अखिलेश यादव तीखी टिप्पणी भी करते हैं और कहते हैं कि इसलिए आइंदा कभी किसी को शूद्र मत कहना। इसके बाद सपा प्रमुख वहां से रवाना हो जाते हैं। इस मुलाकात का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। यही नहीं इस वायरल वीडियो पर लोग जमकर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

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राष्ट्रपति मूर्मू का बड़ा कदम, लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले

हरियाणा और गोवा में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा लद्दाख में भी फेरबदल किया गया है। यहां अब कविंद्र गुप्ता उपराज्यपाल होंगे, जबकि अब तक एलजी रहे ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। हरियाणा में अब प्रोफेसर असीम कुमार घोष राज्यपाल होंगे। यही नहीं गोवा में गजपति राजू को राज्यपाल बनाकर भेजा गया है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इनकी नियुक्ति की जानकारी दी है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले
लद्दाख, गोवा और हरियाणा के राज्यपाल बदले 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम हैं कविंद्र गुप्ता

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सीनियर नेता कविंद्र गुप्ता को लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। जब जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी थी, उस समय कविंद्र गुप्ता को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। कविंद्र गुप्ता को लद्दाख की राजनीति, संस्कृति और अन्य चीजों के बारे में अच्छी जानकारी है। ऐसे में उन्हें लद्दाख में एलजी पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति माना जा रहा है। कविंद्र गुप्ता दशकों से भाजपा के समर्पित नेता रहे हैं।

गोवा के राज्यपाल बने पशुपति अशोक गजपति राजू

टीडीपी के सीनियर नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी पशुपति अशोक गजपति राजू को गोवा का नया राज्यपाल बनाया गया है। वह भारत सरकार में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। दशकों लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने आंध्र प्रदेश और केंद्र दोनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

हरियाणा में अब तक बंडारू दत्तात्रेय थे राज्यपाल

अब तक हरियाणा में बंडारू दत्तात्रेय राज्यपाल थे और अब उनकी जगह प्रोफेसर असीम कुमार घोष लेंगे। बंडारू दत्तात्रेय 2021 से ही हरियाणा के राज्यपाल थे। अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि बंडारू दत्तात्रेय को अब क्या जिम्मेदारी मिलेगी। गजपति राजू तेलुगु देशम पार्टी के नेता रहे हैं और अब गोवा में राज्यपाल के तौर पर काम देखेंगे।

ऐसा पहली बार है, जब मोदी सरकार में शामिल किसी गठबंधन सहयोगी के नेता को राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक सरकार की नीति भाजपा के नेताओं, सैन्य सेवा में रहे लोगों को ही राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी देने की रही है। ऐसा पहली बार है, जब किसी गैर-भाजपा दल के नेता को यह मौका मिला है।

read more : अर्चिता फुकन की एआई तस्वीरें और फेक प्रोफाइल वायरल, आरोपी गिरफ्तार

अर्चिता फुकन की एआई तस्वीरें और फेक प्रोफाइल वायरल, आरोपी गिरफ्तार

असम के डिब्रूगढ़ में प्रतीम बोरा नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। जिसने अर्चिता फुकन का फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें अपलोड की थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रतीम बोरा अर्चिता फुकन का पूर्व साथी रहा है। उसने महिला को बदनाम करने और उत्पीड़न के मकसद से आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड किया था। टिनसुकिया का निवासी प्रतीम बोरा कई हफ्तों से इस फेक प्रोफाइल को ऑपरेट कर रहा था। जिसके बाद फुकन के भाई की शिकायत पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

केंड्रा लस्ट के साथ मॉर्फ करके शेयर की तस्वीर  

अर्चिता फुकन को बेबीडॉल अर्ची के नाम से जाना जाता है। उसने बताया कि फर्जी अकाउंट से उनकी तस्वीरों को अमेरिकी एडल्ट स्टार केंड्रा लस्ट के साथ मॉर्फ करके शेयर किया गया। असम की इस युवती ने कहा कि उनके दोस्तों और परिचितों ने सोशल मीडिया पर वायरल इन मॉर्फ्ड तस्वीरों को देखा। पुलिस ने बताया कि प्रीतम बोरा छिप गया था, लेकिन उसका फोन ट्रेस करके उसे टिनसुकिया के एक किराए के अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया। उसके फोन और लैपटॉप को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

अर्चिता फुकन के साथ बोरा ने ऐसा क्यों किया

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी प्रतीम बोरा ने स्वीकार किया कि उसने फुकन के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट से तस्वीरें लेकर उन्हें एडिट किया था। उसने बताया कि रिश्ता खत्म होने के बाद गुस्से और भावनात्मक निराशा के कारण उसने यह फर्जी अकाउंट बनाया। आरोपी प्रतीम बोरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी, मानहानि, पहचान हेरफेर, अश्लीलता और गोपनीयता के उल्लंघन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। प्रतीम बोरा पुलिस हिरासत में है और जल्द ही उसे अदालत में पेश किया जाएगा।

read more : पीडीए मतलब परिवार डेवलपमेंट एजेंसी और अखिलेश चैयरमैन – केशव प्रसाद

पीडीए मतलब परिवार डेवलपमेंट एजेंसी और अखिलेश चैयरमैन – केशव प्रसाद

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों–खासतौर से समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका पीडीए ‘परिवार डेवलपमेंट एजेंसी’ है। जिसमें अखिलेश यादव ‘चेयरमैन’ और उनके परिवार के लोग ‘डायरेक्टर’ हैं। केशव प्रसाद मौर्य गोंडा जिले में मनकापुर रियासत के पूर्व राजा और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री दिवंगत कुंवर आनंद सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके पुत्र केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं सांसद कीर्तिवर्धन सिंह तथा परिजनों से भेंटकर शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि बीजेपी 2027 में प्रचंड बहुमत से तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि सपा, बसपा (बहुजन समाज पार्टी) या कांग्रेस चाहे मिलकर लड़ें या अलग-अलग पर उनका हाल वही होगा जो 2017 में हुआ था। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि “उनका पीडीए ‘परिवार डेवलपमेंट एजेंसी’ है। जिसमें अखिलेश यादव ‘चेयरमैन’ और उनके परिवार के लोग ‘डायरेक्टर’ हैं।

सपा गुंडों और माफियाओं की पार्टी – उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद

अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एकता पर जोर दिया और उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीट में कांग्रेस के साथ मिलकर 43 सीट पर जीत दर्ज की। इनमें 37 सीट अकेले सपा ने जीती हैं। उसके बाद से यादव ने ‘पीडीए’ एकजुटता को लेकर मुहिम शुरू की है। केशव प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि सपा गुंडों, अपराधियों और माफियाओं की संरक्षक पार्टी है तथा उनका कोई भविष्य नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के किसी भी नेता को बर्दाश्त नहीं कर सकते और इसी वजह से अखिलेश यादव उनसे (केशव प्रसाद) डरते हैं। केशव प्रसाद मौर्य ने खुद को गरीब किसान परिवार का बेटा बताते हुए कहा कि वह कार्यकर्ता से उपमुख्यमंत्री तक पहुंचे हैं और इसी वजह से अखिलेश यादव उनके राजनीतिक कद से भयभीत रहते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को कहा अहंकारी

वरिष्ठ बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को अहंकारी करार देते हुए कहा कि उनकी भाषा का स्तर बेहद निम्न है और जब इतिहास लिखा जाएगा। तो उनका यह रवैया सबके सामने आएगा। चार बार के सांसद एवं कई बार विधायक तथा प्रदेश के कृषि मंत्री रहे कुंवर आनंद सिंह का बीते सात जुलाई को लखनऊ में निधन हो गया। उनके पुत्र गोंडा से बीजेपी सांसद और विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने पिता को मुखाग्नि दी थी। केशव प्रसाद मौर्य ने आनंद सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज सेवा और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। इसके बाद में उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा किया तथा प्रशासन द्वारा लगाई गई विकास कार्यों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

सत्ता में थे तब पिछड़ों, दलितों याद नहीं आई

बहराइच में बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल की सास के निधन पर उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि “वह पीडीए के नाम पर वोट तो लेना चाहते हैं। लेकिन 2012 से 2017 तक जब सत्ता में थे। तब उन्हें पिछड़ों, दलितों एवं अगड़ों की याद नहीं आई। उस समय तो केवल तुष्टीकरण एवं गुंडागर्दी की राजनीति उनकी सत्ता का मुख्य आकर्षण रहा।

तड़पन यूं ही बरकरार रहेगी – उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सत्ता के वियोग में अखिलेश यादव एवं उनके गुंडे माफिया उसी तरह तड़प रहे हैं। जिस तरह बिना पानी के मछली तड़पती है। उन्होंने दावा किया कि हम 2027 में 2017 का प्रदर्शन दोहराएंगे। उनकी तड़पन यूं ही बरकरार रहेगी। बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर मौर्य ने कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा एवं दिल्ली में मिली जीत की तरह इस बार बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी जीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की होगी।

read more : वीजा खत्म हुआ तो खतरनाक गुफा में रहने लगी दो बच्चो के साथ रूसी महिला

वीजा खत्म हुआ तो खतरनाक गुफा में रहने लगी दो बच्चो के साथ रूसी महिला

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के कुमता तालुक में रामतीर्थ पहाड़ियों की एक दुर्गम गुफा से 40 वर्षीय रूसी महिला नीना कुटीना उर्फ मोही और उसके दो छोटे बच्चों को बचाया गया। यह परिवार लगभग दो सप्ताह से पूरी तरह से एकांत में रह रहा था। अधिकारियों ने शनिवार को पुष्टि की कि शुक्रवार को एक नियमित गश्त के दौरान स्थानीय पुलिस ने यह बचाव अभियान चलाया।

यह परिवार पिछले लगभग दो हफ्तों से घने जंगलों और खड़ी ढलानों से घिरी इस गुफा में रह रहा था, जहां मोही आध्यात्मिक शांति की तलाश में पूजा और ध्यान में लीन रहती थी। हाल ही में हुए भूस्खलन के बाद नियमित गश्त के दौरान पुलिस टीम ने गुफा के पास कपड़े सूखते हुए देखे, जिसके बाद इस परिवार का पता चला।

दिन पूजा और ध्यान करने में बिताती थी

मोही ने गुफा को एक आध्यात्मिक स्थल में बदल दिया था, जिसमें एक रुद्र मूर्ति स्थापित की थी और अपने दिन पूजा और ध्यान करने में बिताती थी। बताया जा रहा है कि वह जमीन से ही गुजारा कर रही थी, हालांकि पुलिस अभी भी इस बात की जांच कर रही है कि जंगल में रहने के दौरान वह और उसके बच्चे भोजन और पानी का प्रबंध कैसे करते थे। उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक एम नारायण ने कहा, “यह आश्चर्यजनक था कि एक महिला दो छोटे बच्चों के साथ ऐसे एकांत में रह रही थी। सौभाग्य से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा और अपेक्षाकृत अच्छे स्वास्थ्य में थे।

2017 में समाप्त हो गई थी वीजा अवधि

मोही भारत में एक बिजनेस वीजा पर आई थी, जिसकी अवधि 2017 में समाप्त हो गई थी। वह कब से भारत में रह रही है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि वह गोवा से इस गुफा तक पहुंची होगी। हिंदू धर्म और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से प्रभावित होकर उसने अपने दो बच्चों, प्रेया (6) और अमा (4) के साथ गोकर्ण के जंगली पहाड़ों में एकांतवास करने का फैसला किया।

निर्वासन प्रक्रिया की गई शुरू

आपको बता दे कि इस बचाव अभियान के बाद पुलिस ने मोही और उसके बच्चों के लिए गोकर्ण में एक साध्वी द्वारा चलाए जा रहे आश्रम में अस्थायी आवास की व्यवस्था की है। एक स्थानीय एनजीओ की सहायता से रूसी दूतावास से संपर्क किया गया है और आधिकारिक निर्वासन (deportation) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कानूनी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में परिवार को बेंगलुरु ले जाने की उम्मीद है।

read more : शाम होते ही शुरू हुई मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

शाम होते ही शुरू हुई मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

दिल्ली-एनसीआर में मानसून एक्टिव हो गया है। शनिवार की सुबह से उमस रही और दिनभर बादलों का आना जाना लगा रहा, शाम होते ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई है, जिससे मौसम सुहावना हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले सप्ताह भी राष्ट्रीय राजधानी में तेज बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा है कि 13 जुलाई तक तापमान में एक बार फिर से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और उसके बाद हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए अगले कुछ दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि दिल्ली के आस-पास मानसून का ट्रफ बना हुआ है और यह इस वीकेंड तक बना रहेगा जिसके कारण हल्की से तेज बारिश होगी। विभाग के मुताबिक इसके बाद अगले सप्ताह यह ट्रफ दुबारा उत्तर की तरफ बनेगा।

जिसकी वजह से अगले सप्ताह दिल्ली और आस-पास के इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। आईएमडी ने जानकारी दी है कि रविवार 13 जुलाई की रात से बारिश की तीव्रता बढ़ने लगेगी और 17 जुलाई तक तेज बारिश की संभावना है। ऐसा 17 जुलाई तक रहेगा इसके बाद बारिश में धीरे धीरे कमी आने लगेगी।

read more : बंगाल में एक और रेप कांड, IIM कलकत्ता के हॉस्टल में छात्रा के साथ बलात्कार

बंगाल में एक और रेप कांड, IIM कलकत्ता के हॉस्टल में छात्रा के साथ बलात्कार

पश्चिम बंगाल के भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता (IIM-C) में पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता के कैंपस में ही उसके साथ एक सहपाठी ने बलात्कार किया। उसने देर शाम हरिदेवपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर लिया गया। घटना उस समय हुई जब पीड़िता अपने परिचित छात्र के बुलावे पर संस्थान के हॉस्टल परिसर में पहुंची थी।

पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता और बेंगलुरु का रहने वाला आरोपी परमानंद टोप्पाउनवार संस्थान के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। पहले से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों की मुलाकात पहले ऑनलाइन माध्यम से हुई थी, जो बाद में पढ़ाई और करियर से संबंधित बातचीत में बदली।

आरोपी ने युवती को कैंपस में बुलाया

वही आरोपी ने युवती को यह कहकर कैंपस में बुलाया कि वह उसे एक काउंसलिंग सेशन में मदद करेगा। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब वह संस्थान में पहुंची तो उसे विजिटर रजिस्टर में नाम दर्ज करने से मना कर दिया गया। इसके बावजूद, आरोपी पर भरोसा कर वह परिसर के अंदर चली गई। आरोपी ने लड़की को काम का बहाना बनाकर लड़कों के हॉस्टल ले गया, जहां उसने उसे पिज्जा और एक पेय पदार्थ दिया।

युवती का आरोप है कि पेय पीने के कुछ देर बाद उसे चक्कर आने लगे और वह अस्थिर महसूस करने लगी। युवती ने बताया कि जब उसने वॉशरूम जाने की बात कही, तो आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। जब उसने इसका विरोध किया और आरोपी को थप्पड़ मारा तो वह हिंसक हो गया और उसके साथ मारपीट करने के बाद कथित तौर पर दुष्कर्म किया।

पीड़ित छात्रा मित्र से संपर्क कर पहुंची पुलिस स्टेशन

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह कुछ समय तक अर्ध-बेहोशी की हालत में रही और फिर बेहोश हो गई। शाम को जब उसे होश आया तो वह खुद को हॉस्टल रूम में अकेला पाई। इसके बाद उसने किसी मित्र से संपर्क किया और किसी तरह संस्थान से बाहर निकलकर पुलिस स्टेशन पहुंची। पीड़िता ने पहले ठाकुरपुकुर थाने और फिर हरीदेवपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार) और 123 (जानबूझकर विष या अन्य हानिकारक पदार्थ के माध्यम से चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया है।

आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी

आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। यह घटना उस समय सामने आई है जब महज दो सप्ताह पहले एक लॉ कॉलेज की छात्रा के साथ उसके कॉलेज के सीनियर छात्रों और एक पूर्व छात्र द्वारा गैंगरेप की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया था और सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा की यह घटना बेहद गंभीर है।

पीड़िता की मेडिकल जांच कराई जा रही है और हम डिजिटल फुटेज, हॉस्टल एंट्री रिकॉर्ड और संस्थान के कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा रहे हैं। घटना के बाद से आईआईएम कलकत्ता का कहना है कि पीड़िता संस्थान की छात्रा नहीं है और वह अपनी सहेली के साथ हॉस्टल में ठहरी थी। हालांकि छात्रों और अभिभावकों के बीच इस घटना को लेकर गंभीर चिंता और नाराजगी देखने को मिल रही है।

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एयर इंडिया क्रैश रिपोर्ट से कौन से शक हुए दूर, क्या रहस्य अब भी बरकरार

अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ी एयर इंडिया की फ्लाइट आखिर कैसे टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई? एक महीने तक कई तरह की अटकलों के बाद एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की पहली रिपोर्ट आ गई है। 12 जून को 260 यात्रियों की जान लेने वाले इस हादसे को लेकर अब कई शक दूर हो गए हैं तो कुछ सवाल अब भी कायम हैं।

कैसे क्रैश हुआ एयर इंडिया का विमान ?

प्राथमिक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि दोनों इंजन के फ्यूल स्विच कटऑफ हो गए थे। दोनों स्विच RUN से CUTOFF पोजिशन पर चले गए। ऐसा महज एक सेकेंड के अंतराल पर हुआ। जैसे ही दोनों इंजन के लिए फ्यूल कटऑफ हुआ इसमें पावर कम होने लगी। हालांकि, इस रिपोर्ट से यह साफ नहीं हुआ है कि स्विच कैसे ऑफ हुआ? क्या यह मानवीय गलती थी? मैकेनिकल दिक्कत थी या इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी? यह सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है और आगे की जांच में सबसे अधिक फोकस इसी पर होगा।

हादसे को लेकर क्या-क्या शक दूर?

विमान हादसे के बाद कई तरह की आशंकाएं जाहिर की जा रही थीं। अब प्राथमिक रिपोर्ट ने कई थ्योरीज को पूरी तरह नकार दिया है। मौसम का फैक्टर- रिपोर्ट में पता चला है कि मौसम पूरी तरह अनुकूल था। आसमान साफ था और हवा की स्पीड बहुत कम थी। पक्षी से टक्कर- सीसीटीवी फुटेज और फिजिकल एग्जामिनेशन में इस तरह का कोई सबूत नहीं मिला है। एयर क्राफ्ट की स्थिति- टेक ऑफ के लिए फ्लैप्स सही तरीके से 5 डिग्री पर सेट थे और लैडिंग गियर सामान्य काम कर रहे थे। वेट और बैलेंस- एयरक्राफ्ट का वजन सामान्य और सीमा में था। फ्यूल क्वॉलिटी- एयरपोर्ट पर फ्यूल ट्रक्स से सैंपल लेकर जांच की गई और इसकी गुणवत्ता संतोषजनक थी। इंजन में पहले से दिक्कत- रिपोर्ट से पता चला है कि फ्यूल कटऑफ होने तक दोनों इंजन सामान्य रूप से काम करते हुए प्रतीत होते हैं।

एयर इंडिया विमान क्रैश के लिए जिम्मेदार पायलट हैं ?

अभी तक यह साफ नहीं है। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग से एक अहम बातचीत का पता चला है। एक पायलट दूसरे से कहता है कि तुमने फ्यूल क्यों कटऑफ कर दिया। दूसरा जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया है। इससे पता चलता है कि एक पायलट ने नोटिस किया कि फ्यूल कटऑफ हो गया है जबकि साथी ने ऐसा करने से इनकार किया। दूसरे पायलट की ओर से इनकार करना इस बात को पूरी तरह से खत्म नहीं करता है कि कोई मानवीय भूल नहीं हुई। लेकिन यह बताता है कि फ्यूल कट अनैच्छिक हो सकता है।

एयर इंडिया विमान के कॉकपिट में क्या हुआ ?

विमान को फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर पायलट फ्लाइंग (PF) के रूप में ऑपरेट कर रहे थे और कैप्टन सुमीत सभरवाल मॉनिटरिंग (पायलट मॉनिटरिंग-PM) कर रहे थे। सामान्य रूप से होता यह है कि जूनियर पायलट विमान को उड़ता है जबकि सीनियर कैप्टन निगरानी करता है। रिपोर्ट में कॉकपिट में सिर्फ इस बातचीत का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक पायलट ने पूछा और दूसरे ने जवाब दिया। अभी यह नहीं पता कि किसने पूछा था और किसने जवाब दिया था। अडिशनल कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की जांच के बाद और ज्यादा डिटेल सामने आने की उम्मीद है।

क्या प्लेन को दोबारा ऊपर उठाया जा सकता था ?

विमान को बचाने के लिए पायलट ने पूरी कोशिश की। फ्यूल कटऑफ के 10-14 सेकेंड्स के भीतर दोनों स्विच RUN पोजिशन पर कर दिए गए। (इंजन 1 – 08:08:52 UTC, इंजन- 2 at 08:08:56 UTC). दोनों इंजन रिस्टार्ट होने लगे। लेकिन रिकवरी संभव नहीं हो पाई क्योंकि विमान की ऊंचाई तब बहुत कम थी। पर्याप्त ऊंचाई और समय नहीं होने की वजह से विमान को दोबारा ऊपर नहीं किया जा सका। विमान तब महज 625 फीट की ऊंचाई पर था।

read more : राधिका और पूर्व कोच की चैट्स ने बढ़ाई हलचल, न्यायिक हिरासत में आरोपी

राधिका और पूर्व कोच की चैट्स ने बढ़ाई हलचल, न्यायिक हिरासत में आरोपी

गुरुग्राम में स्टेट लेवल टेनिस प्लेयर राधिका यादव की हत्या के बाद जांच तेज हो गई है। राधिका मर्डर केस में पुलिस आरोपी पिता दीपक से पूछताछ कर रही है। इस बीच दीपक को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बता दें कि आरोपी दीपक ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह पिछले 15 दिनों से सोया नहीं था। घर में बेचैन घूमता रहता था। घर में किसी से बात तक नहीं करता था। पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, राधिका यादव अपने पिता दीपक की काउंसलिंग भी करती थी। कुछ समय पहले दीपक के दबाव के चलते राधिका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स भी डिलीट कर दिए थे। दीपक बार-बार राधिका यादव को एकेडमी बंद करने को भी बोलता था।

पूछताछ में दीपक ने किए ये खुलासे

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दीपक लोगों के ताने से परेसान था। राधिका ने कई बार दीपक को उसपर भरोसा करने के लिए बोला। दरअसल दीपक लोगों की कही जा रही बातों से परेशान था। लोग दीपक को बेटी की कमाई के नाम पर ताने देते थे। दीपक ने कई बार राधिका को एकेडमी बंद करने को कहा। राधिका ने अपने पिता को समझाने की कई बार कोशिश भी की। राधिका अपने पिता दीपक को कहती थी कि उसके ऊपर ढाई करोड़ खर्च किए है। उन पैसों को बर्बाद नहीं होने दूंगी। अपनी प्रतिभा से बच्चों को टेनिस के लिए ट्रेन करूंगी। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने रेवाड़ी के पास से जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।

पूर्व कोच के साथ राधिका यादव की चैट आई सामने

इस बीच राधिका के पूर्व कोच के साथ राधिका की चैट्स सामने आई है। इस चैट में राधिका कह रही है कि यहां काफी पाबंदियां हैं। वह कुछ टाइम एंजॉय करना चाहती है और अकेले स्वतंत्र रूप से रहना चाहती है। इसके साथ ही चैट से ये भी पता चल रहा है कि राधिका विदेश भी जाना चाहती थी। राधिका दुबई या ऑस्ट्रेलिया जाने की प्लानिंग भी कर रही थी। राधिका का जो चैट सामने आया है, उसमें राधिका कहती है कि चीन में खाने की बहुत दिक्कत है। फिलहाल पुलिस इस चैट की भी जांच कर रही है।

इसके अलावा राधिका यादव आगे चैट में बोलती है कि वह अपने पापा दीपक से बात कर रही है। उसके पापा ने सब सुनकर मना कर दिया है। चैट में राधिका यादव कहती है कि उसके पापा बोल रहे हैं कि कितने पैसे बचेंगे। राधिका की चैट से साफ पता चल रहा है कि पिता दीपक और राधिका के बीच पैसों को लेकर बात होती थी। यहां तक की राधिका पर कई तरह की पाबंदियां भी घर वालों की तरफ से लगाई जाती थी।

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गेंद बदलने के बाद हुआ बड़ा बवाल, शुभमन गिल अंपायर से हुए गुस्सा

भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट मुकाबला खेला जा रहा है। इस मैच में इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इसके बाद इंग्लैंड के लिए जो रूट ने अच्छी बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया। उनकी वजह से ही टीम 300 रनों के पार पहुंची है। लेकिन मैच में अंपायर्स द्वारा गेंद बदलने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल बिल्कुल खुश नजर नहीं आए।

गेंद बदलने के बाद अंपायर से गुस्सा शुभमन गिल

दूसरे दिन की शुरुआत में जसप्रीत बुमराह ने अच्छी गेंदबाजी की और उन्होंने जो रूट, बेन स्टोक्स और क्रिस वोक्स के विकेट जल्दी चटकाए। इसके बाद जब गेंद की शेप बिगड़ गई, तो उसे बदलना पड़ा। फिर बदले में भारत को जो गेंद मिली। उससे भारतीय कप्तान शुभमन गिल बिल्कुल खुश नजर नहीं आए। भारतीय टीम की तरफ से अंपायर से शिकायत की गई और कहा गया कि यह लगभग 10 ओवर पुरानी गेंद है।

इसके बाद कप्तान गिल अंपायर्स के साथ बातचीत करते हुए नजर आए। इस दौरान वह गुस्से में भी दिखे। क्रिकबज के मुताबिक गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने भी कहा कि यह 10 ओवर पुरानी गेंद है।

जो रूट ने लगाया दमदार शतक

इंग्लैंड की टीम के लिए जो रूट ने अच्छी बल्लेबाजी की है। उन्होंने बेहतरीन शतक लगाया और 104 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान बेन स्टोक्स ने 44 रनों का योगदान दिया। ओली पोप ने भी 44 रन बनाए थे। इंग्लैंड ने अभी तक 8 विकेट के नुकसान पर 367 रन बना लिए हैं। भारत के लिए जसप्रीत बुमराह ने सबसे ज्यादा विकेट अपने नाम किए हैं। नितीश रेड्डी ने दो विकेट चटकाए। वहीं रवींद्र जडेजा और मोहम्मद सिराज के खाते में एक विकेट गया है।

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खाटू श्याम: बारिश से बचने शरण ली तो दुकानदारों ने श्रद्धालुओं को पीटा

स्टेट हेड – सादिक़ अली, राजस्थान। सीकर जिले के खाटू श्याम मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों के बीच मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दुकानदारों को श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडों से हमला करते हुए देखा जा सकता है। फिलहाल मारपीट की इस घटना में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि क्षणिक आवेश में आने की वजह से इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

बारिश में छिपने को लेकर श्रद्धालुओं से हुआ विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह खाटू श्याम जी में तेज बारिश हो रही थी। इस दौरान मध्य प्रदेश से कई श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आए थे। बाबा श्याम के दर्शन के बाद बारिश होने लगी। इस बीच श्रद्धालु बारिश से बचने के लिए पास की दुकानों की ओर भागे। इसी बीच एक परिवार पास में मौजूद एक दुकान में शरण लेने पहुंचा। इस पर दुकानदार ने उन्हें बाहर निकलने को कहा। बारिश की वजह से परिवार ने थोड़ी देर रुकने की गुहार लगाई। इस पर भी दुकानदारों ने श्रद्धालुओं की बात नहीं मानी और धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

दुकानदारों ने श्रद्धालुओं से की मारपीट

बात बढ़ने पर दुकानदारों ने श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जवाब में श्रद्धालुओं ने भी प्रतिरोध किया और दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो वहां मौजूद किसी ने बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। हालांकि स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि दुकानदारों ने बिना उकसावे के हमला किया, जबकि दुकानदारों का कहना है कि श्रद्धालु बिना अनुमति दुकान में घुसे और हंगामा किया। यह घटना श्रद्धालुओं में रोष का कारण बन रही है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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75 साल का मतलब रिटायर हो जाना – आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत की एक टिप्पणी की बहुत चर्चा हो रही है। इस टिप्पणी के बहाने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना का कहना है कि उन्होंने 75 साल में रिटायरमेंट की बात करके पीएम नरेंद्र मोदी को संकेत दिया है। मोहन भागवत के बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल है। दिलचस्प तथ्य यह है कि खुद मोहन भागवत इस साल 11 सितंबर को 75 वर्ष के हो जाएंगे और फिर 17 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी 75 साल के हो जाएंगे। ऐसे में उनके बयान को प्रधानमंत्री से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन उनकी टिप्पणी के एक हिस्से की बजाय पूरे बयान को सुनने पर पता चलता है कि जो बात वायरल हो रही है, वह उनके अपने शब्द ही नहीं हैं।

मोहन भागवत के बयान का विपक्ष उठा रहा लाभ

वहीं, दूसरी ओर विपक्ष ने मोहन भागवत की टिप्पणी को भाजपा और आरएसएस के बीच कथित मतभेद के संकेत के रूप में उछाल दिया। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी ने हमेशा वरिष्ठ नेताओं को पीछे हटाकर युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात कही है और अब आरएसएस भी उसी बात को याद दिला रहा है। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह एक साफ संदेश है और बीजेपी और आरएसएस के बीच जो कुछ भी चल रहा है। वह उनके बयान से साफ नजर आ रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जब 2014 में बीजेपी ने सरकार बनाई थी, तब 75 साल से ऊपर के सभी नेताओं को ‘मार्गदर्शक मंडली’ में डाल दिया गया था। अब 11 साल बाद आरएसएस भाजपा को उसकी वही बात को याद दिला रहा है। उनके बीच का आंतरिक टकराव अब सार्वजनिक हो चुका है। लेकिन इसका अंजाम क्या होगा, यह कोई नहीं जानता है।

वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुटकी लेते हुए कहा क्या शानदार स्वागत है। घर लौटते ही आरएसएस प्रमुख ने याद दिला दिया कि वे 17 सितंबर 2025 को 75 साल के हो जाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री भी आरएसएस प्रमुख से कह सकते हैं कि वे भी 11 सितंबर, 2025 को 75 साल के हो जाएंगे। एक तीर से दो निशाने।

जाने मोहन भागवत ने क्या दिया था बयान ?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मोहन भागवत ने जो कहा वह आरएसएस के एक दिवंगत प्रचारक और सीनियर नेता मोरोपंत पिंगले की टिप्पणी थी। मोहन भागवत ने उनके जीवन पर आधारित पुस्तक ‘मोरोपंत पिंगले: द आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्जेंस’ का नागपुर में विमोचन किया तो उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्सों का जिक्र करने लगे।

इसी दौरान मोहन भागवत ने 75 साल में रिटायरमेंट वाली पिंगले की बात का जिक्र किया। जिसे पीएम नरेंद्र मोदी के लिए उनकी सलाह बताया जा रहा है। मोहन भागवत ने दरअसल मोरोपंत पिंगले के 75 साल के होने पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके बयान का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आपको 75 साल का होने पर शॉल ओढ़ाए जाने का मतलब है कि आपको रिटायर हो जाना चाहिए।

लोग मुझे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे

मोरोपंत पिंगले के बयान को उद्धृत करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वृंदावन में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग थी। वहां कार्यकर्ता आ रहे थे। उसी दौरान एक कार्यक्रम में शेषाद्री जी ने कहा कि आज अपने मोरोपंत पिंगले जी के 75 साल पूरे हुए हैं औऱ इस अवसर पर उन्हें शॉल ओढ़ा कर सम्मान करते हैं। फिर मोरोपंत पिंगले जी से बोलने का आग्रह किया गया। इस दौरान कार्यकर्ता मुस्कुरा रहे थे। मोरोपंत पिंगले खड़े हुए कहा कि मैं उठता हूं तो लोग हंसते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है कि शायद लोग मुझे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। मुझे लग रहा है कि जब मैं मर जाऊंगा तो लोग पत्थर मारकर देखेंगे कि मैं मर गया हूं या नहीं। 75 साल की शॉल जब ओढ़ी जाती है तो उसका अर्थ यह होता है कि आपने बहुत किया और अब दूसरों को मौका दिया जाए।

रामजन्मभूमि आंदोलन के रणनीतिकार थे मोरोपंत पिंगले

इसके आगे मोहन भागवत ने कहा कि मुझे मोरोपंत पिंगले जी का जिक्र करते हुए गर्व होता है। हम जो हासिल करते हैं या महिमा पाते हैं तो उससे चिपक जाते हैं। चिपकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मोरोपंत महान व्यक्ति थे, उन्होंने कभी चर्चा पाने या महत्व के लिए कार्य नहीं किया। वह रामजन्मभूमि आंदोलन के रणनीतिकार थे, लेकिन कभी आगे नहीं आए। इसकी बजाय अशोक सिंघल जी को आगे किया। भागवत ने कहा, ‘मोरोपंत पूर्ण निस्वार्थता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अनेक काम यह सोचकर किए कि यह कार्य राष्ट्र निर्माण में सहायक होगा।

मोरोपंत पिंगले की सही हुई भविष्यवाणी

आपातकाल के बाद राजनीतिक मंथन के दौरान पिंगले की भविष्यवाणियों का हवाला देते हुए भागवत ने कहा, जब चुनाव का मुद्दा चर्चा में आया। तो मोरोपंत ने कहा था कि अगर सभी विपक्षी दल एकजुट हो जाएं तो लगभग 276 सीटें जीती जा सकती हैं। जब नतीजे आए, तो जीती गई सीटों की संख्या 276 ही थी। फिर भी मोरोपंत पिंगले ने कभी इसका श्रेय नहीं लिया।

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राधिका यादव मर्डर केस: तीन थ्योरीज़ जो बना रही हैं सवालों का तूफान

25 साल की बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी और कोच राधिका यादव की गुरुवार की हत्या कर दी गई। आरोप है कि राधिका के पिता ने ही पीछे से बेटी पर निशाना साधते हुए पांच गोलियां दागीं, जिनमें से तीन ने बेटी के जिस्म को भेद दिया। मां के जन्मदिन पर किचन में कुछ पका रही राधिका की पिता ने आखिर क्यों इस तरह जान ले ली ? इस सवाल के जवाब में अभी तीन तरह की थ्योरी सामने आई है, लेकिन तीनों पर सवाल भी उठ रहे हैं। राधिका यादव के पिता दीपक यादव और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ के आधार पर पुलिस वारदात की वजह तलाशने में जुटी है।

थ्योरी -1  तानों से तंग आकर बेटी को मार डाला

बेटी की हत्या के बाद गिरफ्तार किए गए 49 साल के दीपक ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा कि उसने बेटी को टेनिस अकैडमी बंद करने को कहा था। जिसके लिए वह तैयार नहीं थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दीपक ने कहा है कि लोग उसे इस बात के लिए ताने देते थे कि वह बेटी की कमाई खा रहा है।

गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता संदीप सिंह ने कहा राधिका एक टेनिस अकादमी चलाती थीं और उनके पिता इससे खुश नहीं थे। पूछताछ के दौरान दीपक ने कहा कि समाज में उसका मजाक उड़ाया जा रहा था। एफआईआर की कॉपी के आधार पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दीपक ने पुलिस को बताया कि आलोचना की वजह से उसके सम्मान को ठेस पहुंच रहा था और इस वजह से वह 15 दिन से डिप्रेशन में था।

क्या उठ रहे सवाल ?

दीपक की ओर से दी गई दलील पर सवाल उठ रहा है कि वह एक बेहद संपन्न इलाके में रहता है। वहां उसे इस तरह के ताने कौन दे रहा था ? यदि दीपक की सोच दकियानूसी होती तो क्या उसने बेटी को खिलाड़ी बनने दिया होता ? यदि उसके आसपास ताने वाले लोग थे तो उन्होंने तब भी दीपक को चिढ़ाया होगा जब वह खेल के मैदान में अपना मुकाम बना रही थी। उसने तब तो बेटी को नहीं रोका ? अब क्यों अचानक उसे ताने बर्दाश्त नहीं हुए ? यदि सच में वह तानों से परेशान था तो नुकसान तो वह उन्हें पहुंचाता जो उनका मजाक उड़ा रहे थे?

थ्योरी-2  राधिका यादव के रील्स की वजह से नाराज था पिता

राधिका की हत्या के बाद गुरुवार को गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप कुमार ने शुरुआती तौर पर कहा था कि रील्स को लेकर बाप-बेटी में बहस की बात सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक परिवार के करीबी और सुशांत लोक एक्सटेंशन के रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन प्रेजिडेंट पवन यादव ने कहा कुछ स्थानीय लोग छोटी सोच के थे और राधिका की सफलता बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। उन्होंने राधिकी की एक रील को लेकर कॉमेंट किया था। जो उसने अपने गेम और कोचिंग को लेकर बनाया था। उसके परिजनों ने इस पर आपत्ति जाहिर की और राधिका को अपना अकाउंट डिलीट करना पड़ा।

इस थ्योरी पर क्या है सवाल ?

जैसा कि पवन ने बताया कि राधिका अपना सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर चुकी थी। तो सवाल उठता है कि उसने परिवार की बात मान ली थी। तो अब नाराजगी क्यों थी ? यदि उसने पहले ही सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट कर दिए थे। तो पिता रील्स को लेकर हत्या क्यों करेगा ?

थ्योरी-3 राधिका के म्यूजिक वीडियो की वजह से हत्या

एक थ्योरी यह भी सामने आई है कि पिता राधिका से एक म्यूजिक वीडियो की वजह से नाराज थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राधिका का इस म्यूजिक वीडियो में काम करना पिता को पसंद नहीं आया था और इस वजह से दोनों के बीच तनाव बन गया था।

क्यों हजम नहीं हो रही भी यह दलील ?

पुलिस ने कहा है कि वीडियो पर नाराजगी की बात को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस वीडियो की बात हो रही है वह तो जून 2024 में ही रिलीज हुआ था। यदि पिता इस वीडियो से गुस्से में था तो उसने एक साल बाद क्यों वारदात को अंजाम दिया ? यदि उसने यह बर्दाश्त नहीं था तो उसने रिलीज के तुरंत बाद ऐसा कदम उठाया होता।

रिमांड पर लेकर पुलिस खोलेगी राजदीपक को गुरुग्राम पुलिस ने अदालत में पेश किया और दो दिन की रिमांड मांगी। हालांकि कोर्ट ने एक दिन की रिमांड ही दी है। पुलिस दीपक से पूछताछ के जरिए यह जानने का प्रयास करेगी कि आखिर उसने क्यों और कैसे यह खौफनाक कदम उठाया। क्या हत्या की असली वजह वही है जो उसने शुरुआती पूछताछ में बताया या फिर अभी इसमें और भी राज हैं ?

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गैंगस्टर एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती, योगी सरकार से मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थिति इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम कानूनी प्रश्न उठाते हुए कहा है कि जब भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 में संगठित अपराधों को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। तो फिर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की अब क्या आवश्यकता रह गई है ? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि बीएनएस के लागू होने के बाद गैंगस्टर एक्ट के प्रावधान अप्रासंगिक हो गए हैं। अदालत ने इस सवाल को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार समेत सभी प्रतिवादियों से तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है और साथ ही जांच में सहयोग की शर्त पर याची की गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगा दी है।

गैंगस्टर का मुकदमा राजनीतिक द्वेष पर आधारित

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने मिर्जापुर निवासी विजय सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। विजय सिंह के खिलाफ हलिया थाना क्षेत्र में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। याची के अधिवक्ता अजय मिश्रा ने कोर्ट में दलील दी कि विजय सिंह जिन मामलों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत नामजद हैं। उन सभी मामलों में वह पहले ही जमानत पर रिहा हैं। उनके खिलाफ दर्ज गैंगस्टर का मुकदमा राजनीतिक द्वेष और झूठे आरोपों पर आधारित है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता ने दावा किया कि विजय सिंह संगठित अपराध का हिस्सा है और इस मुकदमे में प्रत्यक्ष रूप से लिप्त है।

गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई तार्किक नहीं – इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 111 में संगठित अपराध को लेकर बहुत ही स्पष्ट और विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं। इस धारा के अंतर्गत अपहरण, डकैती, वसूली, साइबर अपराध, मानव तस्करी, सुपारी किलिंग, भूमि कब्जा और अवैध कारोबार जैसे गंभीर अपराधों को शामिल किया गया है। इतना ही नहीं अपराध में मदद करने, छुपाने या सहयोग करने वाले व्यक्तियों के लिए भी कठोर सजा का प्रावधान रखा गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब जब बीएनएस में संगठित अपराध को लेकर व्यापक व्यवस्था मौजूद है। तो गैंगस्टर एक्ट के तहत की जा रही अलग कार्रवाई विधिक दृष्टिकोण से तार्किक नहीं लगती है।

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गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर बाइक, ट्रैक्टर और ऑटो पर लगेगा टोल टैक्स

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर अब बाइक ट्रैक्टर और ऑटो पर भी टोल टैक्स लगेगा। यह भुगतान कैश में किया जाएगा। गाड़ी ओनर को पास की भी सुविधा होगी, लेकिन इससे वह 20 यात्राएं ही कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इन टोल की दरें भी तय कर दी हैं। यह दरें टोल प्लाजा के बीच की दूरी और संरचना के आधार पर तय की गई हैं। जागरण डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, नई दरें फिलहाल टोल प्लाजा और बूथ के सिस्टम में इन्स्टॉल की जा रही है। खबर के मुताबिक, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर बाइक, आटो और ट्रैक्टर को एक समान कर देना होगा। यानी सभी के लिए एक ही टोल टैक्स होगा। अगर फास्टैग नहीं होगा तो कैश में रुपये लिए जाएंगे।

भगवानपुर से चौदह परास का टोल टैक्स

यूपीडा की तरफ से भगवानपुर से चौदह परास टोल प्लाजा पर बाइक, ऑटो और ट्रैक्टर को एक तरफ से 140 रुपये टोल लगेंगे। अगर आप दोनों तरफ का टोल देना चाहेंगे तो आपको 230 रुपये देने होंगे। इसी तरह, कार, जीप और वैन को एक तरफ से 285 रुपये टोल लगेंगे। अगर आप दोनों तरफ का टोल देना चाहेंगे तो आपको 455 रुपये देने होंगे।

मिनी बस है तो एक तरफ का टोल 440 रुपये लगेगा, जबकि दोनों तरफ के लिए 705 रुपये तय किया गया है। बस या ट्रक के लिए एक तरफ से 840 रुपये और दोनों तरफ से 1345 रुपये टोल देने होंगे। इसके बाद तीन से छह एक्सेल वाली गाड़ियों को एक तरफ से 1335 रुपये और दोनों तरफ से 2140 रुपये देने होंगे। सात से ज्यादा एक्सल वाली गाड़ियों के लिए एक तरफ से 1745 रुपये और दोनों तरफ से 2790 रुपये टोल देने होंगे।

भगवानपुर से सिकरीगंज के लिए टोल टैक्स

बाइक, ऑटो और ट्रैक्टर के लिए एक तरफ का टोल टैक्स 20 रुपये होगा। दोनों तरफ का टोल देना चाहेंगे तो आपको 35 रुपये देने होंगे। इसी तरह, कार, जीप और वैन को एक तरफ से 45 रुपये टोल लगेंगे। अगर आप दोनों तरफ का टोल देना चाहेंगे तो आपको 70 रुपये देने होंगे।

मिनी बस है तो एक तरफ का टोल 70 रुपये लगेगा, जबकि दोनों तरफ के लिए 110 रुपये देने होंगे। बस या ट्रक के लिए एक तरफ से 140 रुपये और दोनों तरफ से 225 रुपये टोल देने होंगे। इसके बाद तीन से छह एक्सेल वाली गाड़ियों को एक तरफ से 215 रुपये और दोनों तरफ से 345 रुपये देने होंगे। सात से ज्यादा एक्सल वाली गाड़ियों के लिए एक तरफ से 275 रुपये और दोनों तरफ से 440 रुपये टोल देने होंगे।

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बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन जारी रहेगा, सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार

बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा की जा रही सत्यापन की प्रक्रिया पर रोक लगाने से किया इनकार कर दिया है। विपक्ष को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग के पास हलफनामा दाखिल करने का पर्याप्त समय है, उसे प्रक्रिया पूरी करने दें।

जस्टिस धूलिया ने कहा कि हम 28 जुलाई को मामले की सुनवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी दलीलें 28 जुलाई से पहले पूरी करनी होंगी। बता दें कि कांग्रेस, आरजेडी समेत इंडिया गठबंधन की 9 पार्टियों ने वोटर लिस्ट सत्यापन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। दूसरी ओर वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर कर कहा है कि केवल भारतीय नागरिकों को ही वोट देने का हक मिलना चाहिए।

इन 9 पार्टियों ने दायर की है याचिका

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इंडिया गठबंधन की पार्टियों कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, सीपीएम, एनसीपी (शरद पवार गुट), सीपीआई, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने याचिका दायर कर वोटर लिस्ट सत्यापन पर सवाल उठाए हैं। इनका दावा है कि इस प्रक्रिया से गरीबों और महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। इसके अलावा, दो सामाजिक कार्यकर्ता अरशद अजमल और रुपेश कुमार ने भी सत्यापन प्रक्रिया को चुनौती दी है।

केवल भारतीय नागरिक ही वोटर लिस्ट में रहें

वहीं वकील अश्विनी उपाध्याय ने चुनाव आयोग के समर्थन में याचिका दायर की है। उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट आयोग को निर्देश दे कि सत्यापन इस तरह हो कि केवल भारतीय नागरिक ही वोटर लिस्ट में रहें। अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया कि अवैध घुसपैठ की वजह से देश के 200 जिलों और 1500 तहसीलों में जनसंख्या का ढांचा बदल गया है। उनकी याचिका में कहा गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए सत्यापन जरूरी है।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में साफ की पूरी बात

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ वही नाम रहेंगे जो इसके योग्य होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘2003 के बाद वोटर लिस्ट का बड़े पैमाने पर सत्यापन नहीं हुआ। पूरी जांच के बाद केवल योग्य भारतीय नागरिक ही वोटर लिस्ट में रहेंगे।’ आयोग ने देश के हर राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन करने का फैसला किया है ताकि गैर-भारतीयों के नाम लिस्ट से हटाए जा सकें। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बिहार के बाद असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में वोटर सत्यापन अभियान चलाया जाएगा, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद 2029 तक उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में भी सत्यापन की योजना है।

बिहार में विपक्षी दलों का जोरदार प्रदर्शन

बिहार में वोटर लिस्ट सत्यापन के खिलाफ विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किए। बुधवार को पटना में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभाला। नवादा में तेजस्वी ने कहा, ‘लालू जी कहते हैं, वोट का राज यानी छोट का राज। ये लोग आपके अधिकार छीनना चाहते हैं। गरीबों के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने की साजिश है। अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है, तो ये कहेंगे आप इस देश के नागरिक नहीं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ राहुल गांधी ने भी इसे गरीबों का हक छीनने की साजिश बताया। वहीं, बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर पलटवार करते सवाल उठाया कि विपक्ष सत्यापन के खिलाफ क्यों है, जबकि यह सुनिश्चित करेगा कि केवल भारतीय नागरिक ही वोट दें। जानें सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

सभी याचिकाओं की प्रतियां नहीं मिली – चुनाव आयोग

 वहीं चुनाव आयोग ने याचिकाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसे सभी याचिकाओं की प्रतियां नहीं मिली हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी और साझा कानूनी सवालों पर विचार किया जाएगा। चुनाव आयोग की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल पैरवी कर रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से गोपाल शंकरनारायणन और कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील दलीलें पेश कर रहे हैं। सिब्बल ने कहा कि वे आरजेडी नेता मनोज झा की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

शंकरनारायणन ने इसे बताया भेदभावपूर्ण

गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि 2003 के मतदाता सूची की तुलना आज से नहीं की जा सकती, क्योंकि अब बिहार में करीब 8 करोड़ मतदाता हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का सघन पुनरीक्षण बड़े पैमाने पर मतदाताओं को सूची से बाहर कर सकता है। आयोग ने 1 जनवरी 2003 के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वालों के लिए दस्तावेज जमा करना अनिवार्य किया है, जो 2003 से पहले के मतदाताओं पर लागू नहीं है। शंकरनारायणन ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि 11 दस्तावेजों को अनिवार्य करना पक्षपातपूर्ण है।

शंकरनारायणन ने यह भी तर्क दिया कि मतदाता सूची की समीक्षा हर साल नियमित रूप से होती है और इस साल यह प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है। ऐसे में दोबारा सघन पुनरीक्षण की जरूरत नहीं है। शंकरनारायणन ने सुझाव दिया कि आधार कार्ड को सत्यापन का सरल तरीका बनाया जा सकता था, क्योंकि अधिनियम में संशोधन के तहत आधार को पहचान के दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई है।

आधार प्रक्रिया से बाहर क्यों 

शंकरनारायणन ने सवाल उठाया कि जब 2022 के चुनाव आयोग के सत्यापन नियमों में आधार शामिल है, तो इसे इस प्रक्रिया से क्यों हटाया गया। उन्होंने कहा कि कई दस्तावेज, जो आधार के आधार पर जारी किए जाते हैं, स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन आधार को ही बाहर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब चुनाव आयोग को देना होगा।

आधार नागरिकता का वैध प्रमाण नहीं

चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि आधार नागरिकता का वैध प्रमाण नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं रखता, क्योंकि यह गृह मंत्रालय का कार्यक्षेत्र है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता की जांच के लिए सख्त अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत होती है। जस्टिस धूलिया ने स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति मतदाता सूची में पहले से मौजूद है और उसे हटाया जाता है, तो उसे नागरिकता साबित करने की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो उसे आगामी चुनाव में वोट देने से वंचित कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या सघन पुनरीक्षण नियमों के तहत है और यह कब किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र को नहीं, बल्कि पुनरीक्षण के तरीके को चुनौती दे रहे हैं। जस्टिस बागची ने बताया कि आरपी एक्ट की धारा 21 की उपधारा 3 के तहत आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार है, जिसे वह उचित तरीके से कर सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह प्रक्रिया प्रस्तावित चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू की जाती है, तो यह मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं के साथ है सुप्रीम कोर्ट

कपिल सिब्बल ने कहा कि मतदाता सूची से किसी को हटाने से पहले आयोग को यह साबित करना होगा कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है। उन्होंने बिहार सरकार के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि बहुत कम लोगों के पास पासपोर्ट (2.5%), मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र (14.71%), निवास प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज हैं। आधार, जन्म प्रमाण पत्र और मनरेगा कार्ड को भी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एक भी योग्य मतदाता को वोटिंग के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वह इस मामले में याचिकाकर्ताओं के साथ है।

मतदाता सूची को शुद्ध करना में कोई गलती नहीं – सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस धूलिया ने कहा कि 2003 की तारीख इसलिए चुनी गई, क्योंकि यह कंप्यूटराइजेशन के बाद पहली मतदाता सूची थी, जिसमें एक तर्कसंगत आधार है। हालांकि, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या नियमों में सघन पुनरीक्षण का समय स्पष्ट है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि उन्हें यह साबित करना होगा कि आयोग का तरीका गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन इसे चुनाव से ठीक पहले करना उचित नहीं हो सकता।

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भाजपा छीन रही गरीबों से शिक्षा का अधिकार, विद्यालय बंद खुल रही मधुशालाएं

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आवाहन पर जिला कांग्रेस कमेटी हरदोई के जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय व शहर अध्यक्ष अनुपम दीक्षित साथ ही प्रदेश उपाध्यक्ष ओबीसी (obc) विभाग के शिवा पाल के नेतृत्व में जिला कमेटी के सभी उपाध्यक्ष/ महामंत्री/ सचिव व सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गांधी भवन से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया गया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जो प्राइमरी/ जूनियर के 5000 से अधिक विद्यालयों को (मर्ज) करने के नाम पर बंद किए जा रहा है। उसके संबंध में विरोध प्रदर्शन किया गया।

            भाजपा सरकार गरीबों के शिक्षा का अधिकार छीन रही

जिलाध्यक्ष विक्रम पांडे ने कहा कि भाजपा सरकार गरीबों के शिक्षा का अधिकार छीन रही है। जो गरीबों के बच्चे अपने गांव में शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। उनको सुदूर स्कूलों में जबरन भेजने के पीछे यह मंशा है कि वे गरीबों के बच्चे पढ़ ना सकें। यह शिक्षा के अधिकार का पूर्णत: हनन है। शहर अध्यक्ष अनुपम दीक्षित ने कहा भाजपा सरकार वैसे भी देश के युवाओं को रोजगार नहीं देना चाहती है।

इस तरह से वह युवाओं को शिक्षक बनने की राह को हमेशा के लिए बंद कर रही है। भाजपा सरकार पाठशाला बंद कर रही है और मधुशाला खोल रही है। प्रदेश उपाध्यक्ष ओबीसी (obc) शिवा पाल ने कहा विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को वैसे भी सरकार विद्यालय में पढ़ाने नहीं देना चाहती है। उनसे विभिन्न तरीके के अन्य कार्य करवाये जाते हैं। अब इस प्रकार से विद्यालय बंद करके शिक्षकों की भी तमाम तरीके से सरकार परेशान कर रही है।

कार्यक्रम में मुख्य रुप से हरदोई जिला व शहर कमेटी के तमाम पदाधिकारियों सहित लोकसभा प्रभारी डॉ राजीव सिंह, महिला अध्यक्ष सुनीता देवी सहित समस्त जिला उपाध्यक्ष भुट्टो मियां,मोहन सिंह,जमील अहमद गाजी,अजीत विशाल नंदवंशी सहित समस्त महासचिव लक्ष्मी प्रकाश मिश्रा,विनोद गुप्ता,आशुतोष गुप्ता,अमीर अहमद साहित समस्त सचिव अनिल सेन,शरद सिंह,पिंटू भारती,राज वर्मा,अहद खान,सहित फ्रंटल अध्यक्ष शब्बू खान,छोटेलाल वर्मा,इस्लाम,अभय कुशवाहा सहित सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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बीजेपी को महिला अध्यक्ष मिलना तय, जाने नड्डा के बाद कौन बनेगा पार्टी अध्यक्ष

सबसे बड़े सियासी दल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में करीब ढाई साल की देरी हो चुकी है। लेकिन अब माना जा रहा है कि इस महीने निश्चित तौर पर केंद्र में सत्ताधारी दल को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। क्योंकि ज्यादातर राज्यों को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल चुका है और नई कार्यकारिणी तय हो चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में इसी नई कार्यकारिणी की ही भूमिका रहने वाली है। इस बीच खबर ये भी है कि बीजेपी को पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकती है। इसके लिए जो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है वो है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का है। ऐसा इसलिए क्योंकि निर्मला सीतारमण पीएम नरेंद्र मोदी की भरोसेमंद भी हैं और दक्षिण भारत से आती हैं। काफी पढ़ी-लिखी और कई भाषाओं की जानकार हैं।

बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही भाजपा

दरअसल केंद्र में पिछले 11 वर्षों से सत्ता पर काबिज बीजेपी इस बार बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। इसी क्रम पार्टी इस बार किसी महिला को बीजेपी की कमान सौंप सकती है। यह बीजेपी का वुमन फैक्टर ही है कि हाल में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली के सीएम पद की कमान महिला को सौंपी गई। इसीलिए आधी अबादी के फैक्टर को ध्यान में रखते हुए इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान पार्टी किसी महिला को सौंप सकती है। इस नाम के लिए सबसे ज्यादा चर्चा निर्मला सीतारमण की हो रही है।

दक्षिण भारतीय होना बड़ा फैक्टर ?

वित्त मंत्री के तौर पर कार्यरत निर्मला सीतारमण ने पार्टी में भी अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। केंद्र सरकार में भी करने का उनका लंबा अनुभव रहा है। हाल ही में बीजेपी हेडक्वार्टर में उनकी जेपी नड्डा और पार्टी महासचिव बीएल संतोष के साथ मीटिंग भी हुई है। निर्मला सीतारमण का दक्षिण भारतीय होना भी एक बड़ा फैक्टर है। उनके अध्यक्ष बनने से पार्टी को दक्षिण भारत में विस्तार करने का रास्ता मिल सकता है।

बीजेपी का आधी आबादी पर फोकस

बीजेपी ने महिलाओं को केंद्र में रखकर कई योजनाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया। पीएम मोदी ने महिला वोटर फोकस किया और चुनावों में महिलाओं की समस्याओं और उनके सामाधान की भी बात की। बीजेपी को चुनावों में इसका लाभ भी मिला। शौचालय को महिलाओं के मान सम्मान से जोड़ा, उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ सिलेंडर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को 60 प्रतिशत मालिकाना हक दिया और महिला रिजर्वेशन बिल संसद से पास कराया। ऐसे में पार्टी ने अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद की कमान महिला को सौंप कर एक नया दांव चलना चाहती है।

निर्मला सीतारमण का राजनीतिक करियर

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जेएनयू से निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमिक्स में एमफिल की डिग्री हासिल की। उन्होंने 2008 में बीजेपी में शामिल होकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआतद की। 2010 में उन्हें वाकपटुता और आर्थिक मामलों की गहरी समझ होने के चलते राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी के पक्ष को मजबूती से रखा और एक प्रखर वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

मोदी सरकार में निर्मला की भूमिका

2014 से 2017 तक वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर उन्होंने काम किया। सितंबर 2017 में वे देश की पहली महिला रक्षा मंत्री बनीं। उन्होंने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया और कई रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को गति प्रदान की। 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल में उन्हें वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा गया।

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हाईकोर्ट का ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ मानने से इनकार, हिंदू पक्ष को झटका

मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि- शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने शाही ईदगाह को विवादित परिसर मानने से इनकार कर दिया है। यह फैसला जस्टिस राम मनोहर मिश्रा की सिंगल बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मौजूद तथ्यों और याचिका के आधार पर ईदगाह को फिलहाल विवादित ढांचा घोषित नहीं किया जा सकता। हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि ईदगाह का निर्माण श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर स्थित प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया।

हिंदू पक्ष के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में 5 मार्च 2025 को मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किए जाने की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस पर 23 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।

वहां पहले मंदिर था…

हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने मासिर ए आलम गिरी से लेकर मथुरा के कलेक्टर रहे एफएस ग्राउस तक के समय में लिखी गई इतिहास की पुस्तकों का हवाला देते हुए कोर्ट के समक्ष कहा था कि वहां पहले मंदिर था। वहां पर मस्जिद होने का कोई साक्ष्य आज तक शाही ईदगाह मस्जिद पक्ष न्यायालय में पेश नहीं कर सका और साथ ही न खसरा खतौनी में मस्जिद का नाम है और तो और न ही नगर निगम में उसका कोई रिकॉर्ड है। न कोई टैक्स दिया जा रहा। उनका दावा है कि शाही ईदगाह प्रबंध कमेटी के खिलाफ बिजली चोरी की रिपोर्ट भी भी हो चुकी है, फिर इसे मस्जिद क्यों कहा जाए ऐसे में मस्जिद विवादित ढांचा घोषित हो।

क्या था हिंदू पक्ष का दावा ?

बहस के दौरान खास बात ये रही कि सभी हिन्दू पक्षकारों ने महेंद्र प्रताप सिंह की ही दलीलों का समर्थन किया था और 23 मई को इस मामले में न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र के न्यायालय में बहस पूरी हो गई। जिसमे महेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट में कहा कि भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण में यह सब स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने मुकदमे की प्रकृति को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी की जमीन पर अतिक्रमण करके बैठ जाने से वह जमीन उसकी नहीं हो सकती है। साथ ही उन्होंने कोर्ट को बताया था कि जो प्रकरण अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का था, ठीक ऐसा मामला मथुरा में भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि का है।

बाबरी मस्जिद को पहले विवादित ढांचा घोषित किया – हिंदू पक्ष

हिंदू पक्ष के मुताबिक न्यायालय ने अयोध्या मामले में अपना निर्णय देने से पहले बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया था। इसलिए शाही ईदगाह मस्जिद को भी विवादित ढांचा घोषित किया जाए। महेंद्र प्रताप सिंह ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि इसके संबंध में सभी साक्ष्य पहले ही प्रस्तुत कर चुके हैं और जितने भी विदेशी यात्री भारत आए। उन सभी ने यहां भगवान का मंदिर बताया। किसी ने भी वहां मस्जिद होने का जिक्र नहीं किया।

मुस्लिम पक्ष को मिली बड़ी राहत

महेंद्र प्रताप सिंह की दलीलों का अन्य हिंदू पक्षकारों ने भी न्यायालय में समर्थन किया था। हालांकि मस्जिद पक्ष ने इसका पुरजोर विरोध किया था। हालांकि मुस्लिम पक्ष द्वारा इस आवेदन पर लिखित आपत्ति दायर की गई थी। कोर्ट द्वारा हिंदू पक्ष की अर्जी खारिज होने के बाद मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है। हिंदू पक्ष की 18 याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।

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नेशनल हेराल्ड केस: ईडी ने कहा किराए की रसीदें फर्जी थीं, कोर्ट ने पूछा……..

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड मामले की सुनवाई हुई। यह सुनवाई विशेष सीबीआई/ईडी न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में हुई, जिसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सांसद राहुल गांधी समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा कि लोग सालों से फर्जी अग्रिम किराया दे रहे थे। किराए की रसीदें फर्जी थीं। सीनियर कांग्रेस नेताओं के निर्देश पर ही एजेएल (AJL) को विज्ञापन का पैसा दिया गया। ईडी ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी से हुई कोई भी इनकम अपराध की आय है।

फर्जी लेन-देन का जिक्र

ईडी ने कहा कि कुछ दान देने वाले जो पार्टी के जाने-माने बड़े नाम और वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने किराए के रूप में कुछ राशि का भुगतान किया है। इसलिए यदि यह अपराध की आय माना जाएगा। तो उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया जाएगा ? एक आरोपी सुमन दुबे ने सोनिया गांधी को शेयर ट्रांसफर किए। ऑस्कर फर्नांडीज ने राहुल गांधी को शेयर ट्रांसफर किए और राहुल ने इसे वापस ऑस्कर फर्नांडिस को भेज दिया। ये सभी फर्जी लेन-देन हैं। ये केवल कागजों पर मौजूद हैं। ईडी ने कहा कि 2015 तक केवल दो व्यक्ति ही लाभ लेने वालों में हैं, वो राहुल और सोनिया गांधी हैं। लाभकारी व्यक्ति वह होता है, जिसका कंपनी पर नियंत्रण है।

कोर्ट ने ईडी से पूछा, “क्या किराया, विज्ञापन की रकम आदि भी अपराध से प्राप्त संपत्ति यानी प्रोसीड ऑफ क्राइम मानी जा रही हैं। ईडी की तरफ से एएसजी एसवी राजू ने कहा, “हां, जो भी धोखाधड़ी से अर्जित संपत्ति है, वह पीओसी (POC) में आएगी।

पीओसी को लेकर कोर्ट ने पूछा सवाल

राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा, “इन तीनों श्रेणियों को स्पष्ट रूप से पीओसी (POC) के रूप में दिखाया नहीं गया है। इन्हें सिर्फ कुछ बिंदुओं के रूप में पेश किया गया है। किराया भी दो कैटगरी में है एक 29 करोड़ और दूसरा 142 करोड़। जहां 142 करोड़ को पीओसी (POC) कहा गया है। वहीं 29 करोड़ को ऐसा नहीं कहा गया है।

उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया – राउज एवेन्यू कोर्ट

राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा हम ये इसलिए पूछ रहे हैं। क्योंकि कुछ दानदाता जिनके बारे में आप कह रहे हैं कि उन्होंने नकली दान दिया। वे भी उसी पार्टी के सदस्य हैं और कुछ तो प्रमुख चेहरे भी हैं। लेकिन उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। यदि अग्रिम किराया और दान पीओसी माने जाएं। तो क्या वे व्यक्ति रेस्पोंटेड की कैटगरी में नहीं आएंगे।

कोर्ट के सवाल पर ईडी का जवाब

इस सवाल पर ईडी ने जवाब देते हुए कहा कि हम इस मुद्दे की जांच कर रहे हैं कोई संपत्ति पीओसी में तब आती है। जब उसे प्राप्त किया जाता है या उससे पहले। कोर्ट ने कहा हमारा उद्देश्य केवल यह समझना है कि ईडी किन चीजों को पीओसी मान रही है और किन्हें नहीं। ईडी ने कहा, “वर्तमान चरण में हम इन चीजों को पीओसी मानते हैं। आगे जांच कर सकते हैं और इसे सप्लिमेंट्री चार्जशीट में शामिल किया जाएगा। ईडी ने कहा कि हम इस मामले में आगे सप्लिमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल करेंगे।

read more :  27 लाख बिजली कर्मचारी करेंगे हड़ताल, सप्लाई पर पड़ सकता है बुरा असर

देशभर के बिजली कर्मचारी करेंगे हड़ताल, हो सकती है बिजली गुल

उत्तर प्रदेश में दो पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ देश भर में काम करने वाले करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी 9 जुलाई को हड़ताल करेंगे। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का निजीकरण करने का फैसला किया है। ये वितरण कंपनियां राज्य के 75 में से 42 जिलों में बिजली सप्लाई करती हैं।

पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के निजीकरण का हो रहा विरोध

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा अगर हड़ताल की वजह से बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। तो हम उसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। शैलेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और सरकार के कुछ बड़े अधिकारी चुनिंदा निजी घरानों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं। वे लाखों करोड़ रुपये की डिस्कॉम संपत्तियों को निजी घरानों को औने-पौने दामों पर बेचना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर डिस्कॉम का निजीकरण किया गया तो किसान और गरीब लोग कई लाभों से वंचित हो जाएंगे। बिजली कर्मचारी मुख्य रूप से हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम, विजयवाड़ा, चेन्नई, बेंगलुरु, मुंबई, नागपुर, रायपुर, भोपाल, जबलपुर, वडोदरा, राजकोट, गुवाहाटी, शिलांग, कोलकाता, भुवनेश्वर, पटना, रांची, श्रीनगर, जम्मू, शिमला, देहरादून, पटियाला, जयपुर, कोटा, हिसार और लखनऊ में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

इस प्रदर्शन पूरे देश में प्रभावित हो सकती है पावर सप्लाई

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (NCCOEEE) के आह्वान पर देश भर के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और इंजीनियरों ने डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के निजीकरण के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए हैं। शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश की दो बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के निजीकरण के खिलाफ 9 जुलाई को 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से देश में पावर आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

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अमेरिकियों को ही यूएस से बाहर करेंगे ट्रंप, जानिए किसको किया जाएगा डिपोर्ट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने को बड़ा बयान देते हुए कुछ अमेरिकी नागरिकों को देश से बाहर निकालने की वकालत की है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ऐसे लोग जिन्होंने गंभीर अपराध किए हैं। जैसे कि किसी को बेसबॉल बैट से मारना, उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट किया जाना चाहिए। भले ही वे यहीं पैदा हुए हों। फ्लोरिडा में एक प्रवासी हिरासत केंद्र के दौरे के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा ये लोग हमारे देश के लिए नए नहीं हैं। ये यहीं के हैं, इनमें से कई यहीं पैदा हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनका इरादा गंभीर अपराध करने वाले नागरिकों को भी देश से निकालने का है। उन्होंने इसे अपनी अगली सरकार का लक्ष्य बताया।

इन लोगो को देश से नहीं निकल सकते – डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी कानून के मुताबिक, जन्म से नागरिकता पाने वाले व्यक्ति को देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता, जब तक कि नागरिकता धोखे से न मिली हो। डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान की मानवाधिकार संगठनों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने आलोचना की है।

डोनाल्ड ट्रंप ने किया न्यूयॉर्क शहर का जिक्र

डोनाल्ड ट्रंप यहीं नहीं रुके उन्होंने न्यूयॉर्क शहर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं। जो हादसे नहीं बल्कि जानबूझकर किए गए अपराध थे। उन्होंने आगे कहा अगर हम बाकी सबको भूल भी जाएं तो न्यूयॉर्क में कुछ बहुत बुरी घटनाएं हुई हैं और वे हादसे नहीं थे। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान न सिर्फ संविधानिक विवाद खड़ा कर रहा है। बल्कि चुनावी साल में उनके कानून-व्यवस्था के एजेंडे को फिर से चर्चा में ले आया है। इस बयान पर ट्रंप की आलोचना करते हुए मानवाधिकार संगठनों ने इसे असंवैधानिक और खतरनाक विचार बताया है।

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