Thursday, April 2, 2026
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करूर भगदड़: टीवीके की सीबीआई जांच की मांग, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

तमिलनाडु के करूर में अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की रैली के दौरान मची भगदड़ ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 10 बच्चों समेत 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। अब यह मामला अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। आपको बता दे टीवीके प्रमुख विजय की करूर रैली में जहां 10,000 लोगों की क्षमता थी, वहां करीब 27,000 लोग पहुंच गए। डीजीपी के अनुसार, विजय जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और उनका वाहन अंदर दाखिल हुआ। वह पहले से मौजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी उनके साथ अंदर घुस आए और पहले से मौजूद भीड़ में मिल गए। इससे अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया और हालात बिगड़ गए।

विजय ने किया मुआवजे ऐलान, सीएम स्टालिन पहुंचे अस्पताल

अभिनेता विजय ने अपने संदेश में कहा कि उनका दिल टूट गया है और वह गहरे दुख में हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। विजय ने कहा “यह अपूरणीय क्षति है। आपके परिवार के सदस्य के रूप में मैं इस दुख में आपके साथ हूं। वही दूसरी तरफ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी करूर पहुंचे और अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया और कहा कि सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हाईकोर्ट से स्वतंत्र जांच की मांग – टीवीके

टीवीके ने बताया कि वह इस हादसे की स्वतंत्र जांच के लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का आरोप है कि यह भगदड़ आकस्मिक नहीं बल्कि ‘साजिश’ का परिणाम थी। टीवीके ने भीड़ में पथराव और कार्यक्रम स्थल पर पुलिस लाठीचार्ज की ओर भी इशारा किया। टीवीके के वकील अरिवाझगन ने एक निजी चैनल को बताया कि पार्टी ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें अदालत से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने या मामले को केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।

अरिवाझगन ने राज्य सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि करूर रैली में सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ था। सूत्रों के अनुसार, मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन. सेंथिलकुमार सोमवार शाम 4:30 बजे इस मामले में दायर तत्काल याचिका पर सुनवाई करेंगे। याचिका में मांग की गई है कि करूर भगदड़ की जांच पूरी होने तक टीवीके को किसी भी सार्वजनिक सभा आयोजित करने से रोका जाए।

टीवीके प्रमुख के आने से पहले हुई बत्ती गुल

बता दे कि हादसे के गवाहों ने बताया कि विजय के आने से ठीक पहले अचानक बिजली गुल हो गई। संकरी सड़कों और बढ़ती भीड़ ने अफरा-तफरी को और बढ़ा दिया। भगदड़ के बीच कई परिवार बिछड़ गए, महिलाएं और बच्चों का दम घुटने लगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स में भी कई मौतों का कारण दम घुटना सामने आया है। घटना स्थल पर बिखरे जूते-चप्पल, फटे कपड़े और टूटी बोतलें हादसे की भयावहता बयान कर रही थीं।

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कानपुर में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां कानूनगो आलोक दुबे की एक गलती ने उनके काले कारनामों की पोल खोल दी। जांच में उनके पास 41 संपत्तियों का खुलासा हुआ है। जमीन के अवैध बैनामा (विक्रय विलेख) के मामले में फंसने के बाद जिलाधिकारी (डीएम) के आदेश पर आलोक दुबे को कानूनगो के पद से हटाकर लेखपाल बना दिया गया है। आरोपी कानूनगो के खिलाफ मार्च 2025 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस पर जल्द चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।

41 संपत्तियों का खुलासा और कार्रवाई

मार्च 2025 में थाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद आलोक दुबे के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित कर दिया गया। सहायक महानिरीक्षक निबंधन की रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि दुबे 41 संपत्तियों में संलिप्त थे। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने विवादित जमीनों के अवैध बैनामे किए, बिना अनुमति संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की, और सरकारी आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

क्या थी कानूनगो आलोक दुबे की एक गलती ?

कानूनगो आलोक दुबे की मुश्किलें तब शुरू हुईं, जब संदीप सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर सिंहपुर कठार और रामपुर भीमसेन की विवादित जमीनों की जांच हुई। ये जमीनें न्यायालय में विचाराधीन थीं, और न तो विक्रेता का नाम खतौनी में दर्ज था, न ही इनके बिक्री की कानूनी अनुमति थी। इसके बावजूद, आलोक दुबे ने 11 मार्च 2024 को इन जमीनों पर पहले वरासत (उत्तराधिकार) दर्ज की और उसी दिन बैनामा भी कर दिया। इसके बाद, गाटा संख्या 207 की जमीन 19 अक्टूबर 2024 को आरएन इंफ्रा नामक निजी कंपनी को बेच दी गई। जांच में पाया गया कि दुबे ने अपने पद का दुरुपयोग किया, मिलीभगत की और हितों के टकराव को बढ़ावा दिया। यह गलती उनकी गिरफ्तारी का कारण बनी।

कानूनगो के पद से हटाकर लेखपाल बनाया

जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए दुबे को कानूनगो के पद से हटाकर लेखपाल बना दिया। इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल अरुणा द्विवेदी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। डीएम ने स्पष्ट किया कि राजस्व अभिलेखों में धोखाधड़ी और साठगांठ जैसे अपराध जनता के विश्वास को तोड़ते हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी कानूनगो आलोक दुबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई एसडीएम सदर स्तर पर जारी है। पुलिस जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। यह मामला राजस्व प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों पर में भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि है कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कोई ऐसा विभाग बचा नहीं है जहां घोटाले नहीं हैं। इस पर मुख्यमंत्री को सामने आकर जवाब देना चाहिए। जन सुराज के प्रशांत किशोर पहले ही सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, मंगल पांडे, सम्राट चौधरी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और बीजेपी सांसद पर करप्शन के गंभीर आरोप लगा चुके हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जदयू-भाजपा से अधिक बिहार के भ्रष्ट अधिकारी डरे हुए हैं। खासकर डीके गिरोह की छत्र छाया में काम कर रहे। अधिकारी अधिक चिंतित हैं। इन्हीं अधिकारियों ने पिछली बार विपक्ष को सत्ता में आने से रोका था। लेकिन इस बार जनता सतर्क और सचेत है। महागठबंधन सरकार बनने पर ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की खैर नहीं। तेजस्वी यादव ने कहा कि इंजीनियर के यहां करोड़ों की संपत्ति मिल रही है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अधिकारी, मंत्री अपने बेटे-बेटी, नाते-रिश्तेदारों के नाम पर देश-दुनिया में निवेश कर रहे हैं। सबकी सूची मेरे पास है जिसका आने वाले दिनों में खुलासा किया जाएगा।

पीएम ने 31 घोटाले गिनाए – तेजस्वी यादव

पीएम ने एक सभा में 31 घोटाले गिनाए थे। ईडी-सीबीआई उनके पास ही है तो क्यों नहीं कार्रवाई हो रही है। लेकिन,भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर विपक्ष पर ही कार्रवाई हो रही है। इससे पहले प्रशांत किशोर ने कहा था कि जदयू-बीजेपी के नेताओं और सरकार के मंत्रियों ने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। पीके के मुताबिक मंत्री अशोक चौधरी ने अपने प्रभाव से 200 करोड़ से अधिक मूल्य की जमीन खरीदी। सभी जमीनें अशोक चौधरी की बेटी की सगाई के बाद से लेकर विवाह होने तक खरीदी गईं। प्रशांत के आरोपों पर अशोक चौधरी ने उन्हें 100 करोड़ की मानहानि का लीगल नोटिस भेजा। पीके ने इसका जवाब दे दिया है।

अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज पर किया कब्ज़ा – पीके

पीके ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर दिलीप जायसवाल से पैसे लेकर मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाने में मदद करने और दिल्ली में पत्नी के नाम फ्लैट खरीदने का आरोप लगाया। मंलग पांडे का जवाब आने के बाद कहा कि दिलीप जायसवाल से 25 लाख कर्ज लेने की बात कर रहे हैं जबकि उनकी पत्नी के बैंक खाते में 2.13 करोड़ रुपये थे। यह राशि कहां से आई, इसका भी हिसाब देना चाहिए। उन्होंने दिलीप जायसवाल पर अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज पर गलत तरीके अपनाकर कब्जा कर लेने और राजेश साह की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। कहा कि नेताओं और अधिकारियों के संबंधियों को कॉलेज में दाखिला देकर डॉक्टर बनाया। तत्कालीन एसपी और जांच प्रभारी से मिलीभगत कर उन्होंने राजेश साह मर्डर केस को रफा-दफा कराया। राजेश की हत्या मामले में मां और बहन की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर कराई गई है।

बिल के भुगतान फर्जी और बढ़ा कर लिया – पीके

प्रशांत ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर बार-बार नाम बदलने और सातवीं पास होने के बावजूद गलत तरीके से डीलिट की उपाधि लेने का आरोप लगाया। कहा कि कामराज यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने की बात करते हैं जो यूनिवर्सिटी है ही नहीं। मैट्रिक पास किया नहीं और यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया से डीलिट की उपाधि ले ली। पीके ने सांसद संजय जायसवाल के बारे में कहा कि पेट्रोल पंप के लिए फोर लेन सड़क का अलाएनमेंट बदलवा दिया।

वही साथ ही फर्जी बिल बनाकर अपने भाई के पंप से नगर निगम के नाम पर इंधन घपला करने का आरोप लगाया। पीके ने बताया कि नगर निगम की सफाई की गाड़ियों के बिल के नाम पर पांच करोड़ 86 लाख का भुगतान पेट्रोल पंप को नगर निगम ने किया। स्थाई समिति की पांच बैठकों में यह पाया गया कि इनमें से ज्यादातर भुगतान फर्जी थे और ज्यादा बढ़ा कर लिया गए थे। 15 अगस्त के बाद से उनके भाई के पंप से इंधन लेने पर रोक लगा दी गयी।

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कब्रिस्तान विवाद को लेकर दो गुटों में फायरिंग, इलाका पुलिस छावनी में तब्दील

बिहार के मुंगेर ज़िले में कब्रिस्तान की ज़मीन को लेकर दो गुटों के बीच ज़बरदस्त विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से जमकर पथराव और फायरिंग हुई, जिसमें कम से कम दो लोग घायल हो गए हैं। तनाव को देखते हुए पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना सफ़ियासराय थाना क्षेत्र के फरदा गाँव में आज सुबह हुई। बताया जाता है कि कब्रिस्तान की ज़मीन की घेराबंदी को लेकर दो गुटों में बहस शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।

इस दौरान गोलियाँ भी चलीं और पथराव भी हुआ। गंगा स्नान करके घर लौट रहे एक युवक अंकुश कुमार गोलीबारी की चपेट में आ गया और उसके पैर में गोली लग गई। उसे तुरंत मुंगेर सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। एक अन्य घायल व्यक्ति ने बताया कि पेट्रोल पंप पर उसे दूसरे गुट के लोगों ने पीटकर घायल कर दिया।

https://x.com/munger_police/status/1971868211579965533

क्यों हुआ विवाद ?

बताया जाता है कि साफियशराय थाना क्षेत्र के फरदा गांव में आज सुबह कब्रिस्तान की जमीन की घेराबंदी को लेकर दो गुटों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि गोलियां भी चलने लगीं और पथराव भी होने लगा। इसी बीच गंगा स्नान कर अपने घर को जा रहा युवक अंकुश कुमार गोलीबारी की चपेट में आ गया। उसके पैर में गोली लग गई। उसे इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल मे भर्ती कराया गया जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेज दिया गया।

दोनों पक्षों के लोग गिरफ्तार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराया। इस मामले में दोनों पक्षों के करीब 20 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इस झड़प का वीडियो भी सामने आया है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि लोग एक दूसरे को गाली गलोज करते हुए पथराव करते हुए भी नजर आ रहे हैं,वहीं इस मामले घायल एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि वो पेट्रोल लेने पेट्रोल पंप पर गया था तो दूसरे समुदाय के लोगों ने पेट्रोल पंप मे घुस कर उसकी पिटाई कर दी जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गया।

पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील

वहीं इस मामले सूचना मिलते ही पुलिस ने मौका-ए- वारदात पर पहुंच कर हालात को काबू में किया। फिलहाल पुलिस फोर्स घटनास्थल पर कैम्प कर रही है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग एक-दूसरे को गाली-गलौज करते हुए पथराव करते नज़र आ रहे हैं। मुंगेर के एसपी सैय्यद इमरान मसूद खुद घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों के करीब 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए फरदा गाँव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और पुलिस बल लगातार कैंप कर रहा है।

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बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा गिरफ्तार, 48 घंटे के लिए इंटरनेट बंद

उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार (26 सितंबर) को हुए बवाल के मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बरेली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जुमे की नमाज के बाद पुलिस फोर्स के साथ धक्का मुक्की करने की कोशिश की गई। इस मामले में 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं और मौलाना तौकीर रजा सहित 8 लोग गिरफ्तार हुए हैं। मौलाना को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

इसके साथ ही पुलिस ने 39 लोग हिरासत में लिए हैं। पुलिस ने बताया कि 7 दिनों से इसकी साजिश चल रही है और इस साजिश में बाहरी लोग भी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में 10 एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें से 7 में मौलाना का नाम दर्ज है। वहीं बरेली हिंसा पर एसएसपी अनुराग आर्या ने खुलासा किया है कि 7 दिन से इस हिंसा की साजिश चल रही थी। चाकू, तमंचे, ब्लेड और पेट्रोल की बोतलें बरामद की गई हैं।

विकास कार्य रोकने के लिए की गई साजिश – डीएम

डीएम अविनाश सिंह ने शुक्रवार के घटनाक्रम के बाद शनिवार को शहर का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न इलाकों में जाकर व्यापारियों से बात की। लोगों को शांति व्यवस्था का आश्वासन दिया। निरीक्षण के बाद अपने कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि शुक्रवार का घटनाक्रम एक सुनियोजित साजिश है। प्रदेश में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। बरेली जिला प्रदेश की औसत विकास रफ्तार से 12 फीसदी अधिक पर चल रहा है। इस सबको प्रभावित करने के लिए साजिश रची जा रही है। लोगों को भड़काकर हिंसा कराई गई है। इन घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

48 घंटे के लिए बरेली की इंटरनेट बंद

बतादें कि कानपुर प्रकरण को लेकर शुक्रवार को बरेली में बवाल की स्थिति बनी रही। नमाज के बाद कोतवाली के खलील तिराहे से बवाल शुरू हुआ और फिर शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई। इसको लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। शनिवार को प्रशासन की ओर से 48 घंटे के लिए बरेली की इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश जारी होते ही शहर की इंटरनेट व्यवस्था पूरी तरह से बंद हो गई। हालांकि कुछ देर तक एक नेटवर्क चलते रहे, लेकिन बाद में वह भी बंद कर दिए गए।

2010 के दंगे का भी आरोपी है मौलाना तौकीर

बरेली में बवाल के बाद आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा का नाम एक बार फिर चर्चा में है। आईएमसी प्रमुख 2010 में बरेली में हुए दंगे का आरोपी है। हालांकि मामला कोर्ट में लंबित है। इतना ही नहीं मौलाना ने ज्ञानवापी ढांचे में पूजा शुरू होने के बाद भी जेल भरो आंदोलन की घोषणा की थी। मौलाना पहले भी विवादित बयानबाजी कर चुके हैं।

सीएम योगी ने उपद्रवियों को चेताया

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक दिन पहले बरेली में पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प को लेकर कड़ा रुख अख्तार करते हुए शनिवार को कहा कि दंगाइयों को ऐसा सबक सिखाएंगे कि आने वाली पीढ़ी दंगा करना भूल जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने सख्त संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था में खलल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हिंसा में 22 पुलिसकर्मी घायल

बता दें कि बरेली में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद एक मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुए स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। जिले में धारा 163 लागू है। पुलिस ने बताया कि घटना के दौरान 22 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और घटनास्थल से कारतूसों वाली पिस्तौल, पेट्रोल की बोतलें और डंडे बरामद किए गए हैं। पुलिस ने आगे कहा कि भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने और हिंसा भड़काने की कोशिश की थी। सीसीटीवी फुटेज, मैनुअल इंटेलिजेंस और अन्य जांच तकनीकों का इस्तेमाल करके, अधिकारी हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान कर रहे हैं।

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मौलाना भूल गया किसका शासन है, याद आएंगी 7 पीढ़ियां – सीएम योगी

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बरेली में शुक्रवार को हुई हिंसा पर बयान दिया है। आज शनिवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि कभी-कभी लोगों की बुरी आदतें नहीं जाती हैं तो उसके लिए उनकी डेंटिंग पेंटिंग करवानी पड़ती है, जिससे उनकी बुरी आदतें ठीक की जा सकें और यही डेंटिंग पेंटिंग कल आपने बरेली के अंदर देखा। सीएम योगी ने कहा कि साल 2017 के बाद हमने कर्फ्यू नहीं लगने दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को उनकी ही भाषा में समझाकर और उन्हें सजा दिलाने का काम किया गया।

डेंटिंग पेंटिंग करवानी पड़ती है – सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा, “पर्व और त्योहारों के दौरान आपने देखा होगा कि जब भी पर्व आते थे तब उत्पात शुरू हो जाता था। अब उत्पातियों और उपद्रवियों को पता लगेगा और उन्हें उनकी सात पीढ़ियां याद आएंगी क्योंकि कभी-कभी लोगों की बुरी आदतें नहीं जाती हैं तो उसके लिए उनकी डेंटिंग पेंटिंग करवानी पड़ती है, जिससे उनकी बुरी आदतें ठीक की जा सकें और यही डेंटिंग पेंटिंग कल आपने बरेली के अंदर देखा होगा।

 न जाम होगा और न ही कर्फ्यू लगेगा – सीएम योगी

सीएम योगी ने आगे कहा कि वह मौलाना भूल गया कि शासन किसका है, उसे लगता था कि धमकी देंगे और जबरदस्ती जाम कर देंगे। लेकिन हमने कहा कि न जाम होगा और न ही कर्फ्यू लगेगा। लेकिन कर्फ्यू का सबक तुम्हें ऐसा सिखा देंगे कि तुम्हारी आने वाली पीढ़ी दंगा करना भूल जाएगी। क्या तरीका है ये आप सिस्टम को ब्लॉक करना चाहते हैं। 2017 के पहले यही यूपी के अंदर होता था और हम यही कह सकते हैं कि 2017 के बाद हमने कर्फ्यू भी नहीं लगने दिया। ऐसे लोगों को उनकी ही भाषा में समझाकर उन्हें सजा दिलाने का काम किया है। उत्तर प्रदेश के ग्रोथ स्टोरी यहीं से शुरू होती है।

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लेह हिंसा पर बड़ा अपडेट, पुलिस ने सोनम वांगचुक को किया गिरफ्तार

लद्दाख के जाने-माने ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जिस समय उपद्रवी बेकाबू हुए, उस दौरान सोनम वांगचुक ने किसी को रोका नहीं और धरनास्थल से चुपचाप उठकर चल दिए। इसके अलावा उनके कुछ बयानों को भी हिंसा का कारण माना जा रहा है। इस बीच सोनम वांगचुक का एक बयान भी गिरफ्तारी से पहले का सामने आया है। सोनम वांगचुक ने कहा था कि किसी भी समय मेरी गिरफ्तारी हो सकती है। इस कारण से ऐसा होने पर मुझे खुशी ही होगी।

गृह मंत्रालय की एक टीम ने हालात का जायजा लिया

इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम ने शुक्रवार को लेह शहर में लगातार तीसरे दिन कर्फ्यू जारी रहने के बीच समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए कई बैठकें कीं। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर केंद्र के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जिसमें चार लोगों की मौत हो गयी और 90 अन्य घायल हो गए थे।

प्रतिबंधों में दी जा सकती है ढील

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि लद्दाख में सुरक्षा स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रही। लोगों को आवश्यक वस्तुएं खरीदने की अनुमति देने के लिए प्रतिबंधों में बाद में ढील दिए जाने की संभावना है। व्यापक झड़पों के बाद 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। जबकि करगिल सहित अन्य प्रमुख शहरों में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाने वाली निषेधाज्ञा के तहत सख्त पाबंदियां लागू रहीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान सुनसान सड़कों पर गश्त करते देखे गए। कई इलाकों में लोगों ने शिकायत की कि उनके पास राशन, दूध और सब्जियों सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी हो रही है।

सोनम वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए रद्द

इससे पहले गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए रद्द कर दिया था। इसका मतलब ये हुआ कि सोनम वांगचुक का एनजीओ अब विदेश से कोई अंशदान नहीं ले सकता है। बता दें कि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के सबूत मिले थे और इसी को लेकर फॉरेन कंट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी गई। सोनम वांगचुक के एनजीओ को 20 अगस्त को ही नोटिस जारी किया गया था। लेकिन जो जबाव दिया गया। उसमें वित्तीय अनियमितता पर कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिल सका। सोनम वांगचुक पर मनी लॉन्ड्रिंग के भी आरोप लगा हैं।

दो दिनों के लिए सभी शैक्षणिक संस्थान बंद

लेह के ज़िला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोंक ने शुक्रवार से दो दिनों के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार को लेह पहुंची। उन्होंने एलएबी के प्रतिनिधियों के अलावा उपराज्यपाल, नागरिक और पुलिस अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं थी।

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जुमे की नमाज के बाद बवाल: तोड़फोड़ और पथराव, पुलिस का लाठीचार्ज

यूपी के बरेली में शुक्रवार को बवाल हो गया। जुमे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग आई लव मोहम्मद लिखी तख्तियां ओर पोस्टर लेकर सड़कों पर निकल पड़े और नारेबाजी करते हुए इस्लामिया ग्राउंड व खलील स्कूल चौक की ओर बढ़े। जैसे ही भीड़ इन इलाकों में पहुंची, माहौल गर्मा गया। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की लेकिन लोग बेकाबू हो गए। इसी बीच किसी ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

क्या है पूरा मामला

इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने 26 सितंबर को नमाज-ए-जुमा के बाद नामूसे-रिसालत को लेकर इस्लामिया ग्राउंड में भीड़ एकत्र कर वहां से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करने का ऐलान किया था। मौलाना के ऐलान के बाद ही शहर भर में मुस्लिम समाज के लोग जुमे की नमाज के बाद इकट्ठा हुए थे। वहीं मौलाना के ऐलान के बाद शहर में भारी मात्रा में पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया था। प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस-प्रशासन ने पांच एडिशनल एसपी और 13 सीओ के नेतृत्व में पुलिस व पीएसी के 47सौ जवान सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके अलावा सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों को भी लगाया गया है।

पुलिस पर किया पथराव

शुक्रवार को नमाज खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और नारेबाजी करते हुए खलील तिराहा पहुंचे। जब इन लोगों ने इस्लामिया की ओर जाने का प्रयास किया। तो मौके पर मौजूद पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। पुलिस के रोकने पर भीड़ हिंसक हो गई और उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान उपद्रवियों ने कम से कम दो मोटरसाइकिलों में तोड़फोड़ की और एक दुकान को भी निशाना बनाया। स्थिति को नियंत्रण में लाने और उपद्रव को शांत करने के लिए पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज के बाद भीड़ तितर-बितर हो गई।

इलाके में पुलिस बल तैनात

उपद्रव वाले क्षेत्र, खलील तिराहा के करीब 200 मीटर के दायरे में चप्पलें, जूते और पत्थर बिखरे पड़े दिखाई दिए। जो बवाल की गंभीरता को दर्शाते हैं। हालात बिगड़ने की सूचना मिलते ही डीआईजी अजय साहनी, एसपी सिटी सहित पुलिस और प्रशासनिक विभाग के आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने इलाके में फ्लैगमार्च किया है। ताकि शांति व्यवस्था बहाल की जा सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। फिलहाल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

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महिला शिक्षक सस्पेंड : बीएसए ने खुद पर हमले के बाद किया सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बीएसए और प्रिंसिपल के बीच विवाद के चलते चर्चा में आई शिक्षिका अवंतिका गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। बीएसए ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यह कार्रवाई की है। अवंतिका गुप्ता वही शिक्षिका हैं, जिन्हें लेकर प्रधानाध्यापक और बीएसए के बीच विवाद हुआ था। स्कूल के बच्चों ने भी कैमरे पर कहा था कि वो स्कूल नहीं आती हैं। जब आती भी हैं तो देर से आती हैं और जल्दी चली जाती हैं।

शिक्षिका का वेतन रोकने का आदेश भी जारी हो चुका है। बता दे निलंबन आदेश में बताया गया है कि शिक्षिका को बीएसए में पेश होकर 21 अगस्त 2025 से 20 सितंबर 2025 तक स्कूल में अनुपस्थित रहने को लेकर जवाब देने का निर्देश दिया गया था। वह 23 सितंबर को सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुईं। इस आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

आखिर क्या है मामला ?

महमूदाबाद के प्राथमिक विद्यालय नदवा के प्रिंसिपल ने बेल्ट से बीएसए की पिटाई की थी। इस घटना के बाद पूरी कहानी सामने आई। प्रिंसिपल बृजेन्द्र वर्मा की पत्नी सीमा वर्मा ने बताया कि उनके पति को एक शिक्षिका की अटेंडेंस लगाने के लिए बाध्य किया जाता था। वह लगातार इसके लिए मना कर रहे थे।

इसलिए बीएसए अखिलेश सिंह उनके पति को परेशान कर रहे थे। पहले उनके पति से स्कूल में हुए कार्यों का तीन साल का ब्यौरा मांगा गया। जब उन्होंने ब्यौरा दे दिया तो दस साल का ब्यौरा मांगा गया। जब वह भी दे दिया तो दबाव बनाने के लिए बीएसए आफिस बुलाया गया। वहां कहासुनी हुई और उनके पति ने गुस्से में बीएसए की पिटाई कर दी।

शिक्षक को भी पीटा गया – सांसद राकेश राठौर

सीतापुर के सांसद राकेश राठौर ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षा का मंदिर जहां संचालित होता हो, बच्चों को शिक्षा मिलती हो, वहां यह घटना होना बेहद निंदनीय है, लेकिन इसके पीछे के आक्रोश को भी समझने की बेहद जरूरत है कि आखिर एक शिक्षक इतना आक्रोशित क्यों हो गया। मुझे सूचना मिली है कि शिक्षक को भी पीटा गया। उनकी भी एफआईआर दर्ज हो। इस मामले में बीएसए ही सबसे ज्यादा राजनीति करते हैं। मैं दिल्ली जा रहा हूं, लौटकर आऊंगा तो रणनीति बनाकर काम करूंगा और कार्रवाई कराऊंगा।

बच्चों ने स्कूल में किया प्रदर्शन, बीएसए का बयान

बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह को बेल्ट से पीटने के आरोपी प्राथमिक विद्यालय नदवा के प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा को बुधवार सुबह निलंबित कर दिया गया। उधर, नदवा विद्यालय के बच्चों ने बुधवार सुबह स्कूल के बाहर अभिभावकों के साथ शिक्षिका अवंतिका के खिलाफ नारेबाजी की और बृजेंद्र वर्मा को बहाल करने की मांग उठाई। विरोध के कारण स्कूल में पढ़ाई ठप रही। बीएसए ने बुधवार को एक शिक्षक को विद्यालय में भेजा, लेकिन अभिभावकों ने उन्हें पढ़ाने नहीं दिया।

बीएसए सीतापुर अखिलेश प्रताप सिंह ने बयान दिया कि प्राथमिक विद्यालय नदवा में अब राजनीति हो रही है। प्रधानाध्यापक को सस्पेंड कर दिया गया है। बुधवार सुबह एक दूसरे शिक्षक को स्कूल भेजा गया था। ग्रामीणों ने उन्हें पढ़ाने नहीं दिया। वह प्रदर्शन करते रहे। ग्रामीणों को समझाकर जल्द स्कूल में पढ़ाई शुरू कराएंगे।

पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा ने कहा……..

सपा के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा ने बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी और वहां नियुक्त शिक्षिका एक ही जनपद के रहने वाले हैं। शिक्षिका काफी समय से स्कूल नहीं आ रही थीं। प्रधानाध्यापक के ऊपर दबाव था। महीने में एक दिन आएंगी और हाजिरी पूरे महीने की लगवा लेना। शिक्षिका को सीतापुर अटैच किया गया था। मेरी खुद बीएसए से टेलीफोन पर बात हुई थी। अगले दिन शिक्षिका का फोन मेरे पास आ गया। प्रधानाध्यापक को टॉर्चर किया जा रहा था। शायद इसी कारण शिक्षक हिंसक हुआ।

क्या है विवाद की जड़ ?

प्राथमिक विद्यालय नदवा के प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा के विरुद्ध 24 जुलाई को जनसुनवाई पोर्टल पर हैलेपारा ग्राम पंचायत के फूलचंद्र सिंह ने वित्तीय अनियमितता को शिकायत की थी। आरटीई के तहत विद्यालय में कंपोजिट ग्रांट के आय व्यय का ब्योरा तलब किया। इस पर बीएसए ने 26 अगस्त को प्रधानाध्यापक को पत्र जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के लिए कहा। इसमें प्रधानाध्यापक बेदाग निकले। इसके बाद इसी स्कूल के शिक्षक संतोष कुमार वर्मा पर सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्ट करने व विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहने का आरोप लगा। इसको शिकायत विधायक महमूदाबाद आशा मौर्या ने बीएसए से की। इसपर शिक्षक को निलंबित कर दिया गया। स्कूल में बची एकमात्र शिक्षिका अवंतिका गुप्ता को बीएसए ने प्रतियोगी परीक्षा के उड़नदस्ते में शामिल करा दिया।

शिक्षक संतोष के निलंबित होने व अवंतिका गुप्ता के अटैच होने से विद्यालय में पढ़ाई बाधित होने लगी। प्रधानाध्यापक ने शिक्षिका अवंतिका गुप्ता को पत्र भेजकर अटैच करने संबंधी कागजात मांग लिए। यही बात पूरे विवाद की जड़ बन गई। अवंतिका को नोटिस देने से नाराज बीएसए ने प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने के लिए कहा। बृजेंद्र बीएसए कार्यालय पहुंचे तो बात मारपीट तक पहुंच गई।

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75 लाख महिलाओं को बड़ी सौगात, पीएम मोदी ने खाते में भेजे 10 हजार रुपये

पीएम मोदी ने बिहार की महिलाओं को बड़ी सौगात दी। महिला रोजगार योजना के तहत पीएम मोदी 75 लाख महिलाओं के बैंक अकाउंट में आज दस-दस हजार रुपये यानी कुल 7,500 करोड़ रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर की। सुबह 11 बजे वर्चुअल माध्यम से पीएम मोदी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम नीतीश कुमार भी इस कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर इस योजना को बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है।

बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्व-रोजगार एवं आजीविका के अवसरों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। यह योजना राज्य के प्रत्येक परिवार की एक महिला को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी और वे अपनी पसंद का रोजगार या आजीविका गतिविधियां शुरू कर सकेंगी। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

योजना का मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्व-रोजगार एवं आजीविका के अवसरों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। यह योजना राज्य के प्रत्येक परिवार की एक महिला को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी और वे अपनी पसंद का रोजगार या आजीविका गतिविधियां शुरू कर सकेंगी। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना समुदाय-संचालित होगी और इसमें वित्तीय सहायता के साथ-साथ, स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सामुदायिक संसाधन व्यक्ति उनके प्रयासों को समर्थन देने के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे। उनकी उपज की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए, राज्य में ग्रामीण हाट-बाजारों का और विकास किया जाएगा।

सीएम नीतीश ने पीएम मोदी का जताया आभार

इस कार्यक्रम के दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने योजना के लिए राशि प्रदान करने को लेकर पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने बिहार में लगातार हो रहे विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी। वही सीएम नीतीश कुमार के संबोधन के बाद पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की लाभार्थी महिलाओं की बात सुनी। लाभार्थी महिलाएं एक-एक करके पीएम मोदी से अपने बात कह रही हैं। इस दौरान महिलाओं ने अपने रोजगार और उन्नति के बारे में पीएम मोदी को जानकारी दी।

योजना से आगे बढ़ेंगी महिलाएं – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि हर महिला को इस योजना का लाभ मिलेगा ही मिलेगा। अगर महिला इस रुपये से अच्छा काम करती है तो उसे दो लाख रुपये तक मिलेगा। इसकी मदद से मेरी बिहार की बहनें किराना, बर्तन, कॉस्मेटिक, खिलौने और स्टेशनरी जैसी छोटी-छोटी दुकानें खोल सकती हैं। इससे महिलाएं आगे बढ़ सकती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में आज मुझे बिहार की नारी शक्ति के साथ उनकी खुशियों में शामिल होने का अवसर मिला। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर आप सबका आशीर्वाद, हम सबके लिए एक बहुत बड़ी शक्ति है। मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

जब सपनों को नए पंख लग जाते हैं – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि आज से ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार’ योजना शुरू की जा रही है। इस योजना से अब तक 75 लाख बहनें जुड़ चुकी हैं। अभी एक साथ इन सभी 75 लाख बहनों के बैंक अकाउंट में 10–10 हजार रुपये भेजे गए हैं। जब यह प्रक्रिया चल रही थी, तब मैं सोच रहा था कि आज नीतीश जी की सरकार ने बिहार की बहनों-बेटियों के लिए कितना बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जब कोई बहन या बेटी रोजगार या स्वरोजगार करती है, तो उसके सपनों को नए पंख लग जाते हैं, और समाज में उसका सम्मान और भी बढ़ जाता है।

खाते न खुलवाते तो कैसे भेज पाते रुपये – पीएम मोदी

वही पीएम मोदी ने कहा कि दूसरी बात जो मेरे मन में आई, वो ये थी कि अगर हमने 11 साल पहले, जब आपने मुझे प्रधान सेवक के रूप में सेवा का अवसर दिया, तब जनधन का संकल्प न लिया होता, और जनधन योजना के तहत बहन-बेटियों के बैंक खाते न खुलवाए होते, और बैंक खाते को मोबाइल से न जोड़ा होता तो क्या आज हम ये पैसे आपके बैंक खाते में भेज पाते? पहले एक प्रधानमंत्री कहा करते थे कि दिल्ली से अगर एक रुपया भेजा जाता है, तो सिर्फ 15 पैसा पहुंचता है, 85 पैसे कोई पंजा मार लेता है। आज ये जो 10–10 हजार रुपये भेजे गए हैं, इन्हें कोई लूट नहीं सकता।

महिलाओं ने गांव, समाज और परिवार का रुतबा बदला – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में ही मुझे ‘जीविका निधि साख सहकारी संघ’ शुरू करने का अवसर मिला था। अब इस व्यवस्था की ताकत ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार’ योजना के साथ जुड़ जाएगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने केंद्र सरकार के लखपति दीदी अभियान को भी नई मजबूती दी है। केंद्र सरकार ने देश में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। अब तक 2 करोड़ से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। उनकी मेहनत से गांव बदला है, समाज बदला है और परिवार का रुतबा भी बदला है।

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‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ विवाद, समीर वानखेड़े ने शाहरुख पर लगाए आरोप

आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने मानहानि का मुकदमा माननीय दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया है। यह याचिका स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा, घोषणा और हर्जाने की मांग से संबंधित है। मुकदमा अभिनेता शाहरुख़ खान और गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट प्रा. लि., ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ्लिक्स और अन्य पक्षों के खिलाफ दायर किया गया है।

2 करोड़ रुपये हर्जाने की हुई मांग

मुकदमे में आरोप है कि यह सीरीज, रेड चिलीज़ द्वारा निर्मित और नेटफ्लिक्स द्वारा प्रसारित की गई है। साथ ही कहा गया कि ये समीर वानखेड़े की छवि को झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक तरीके से प्रस्तुत करती है। इस शो में नशीली दवाओं के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भ्रामक और नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिससे जनता का कानून व्यवस्था पर से विश्वास कमजोर होता है।

वही साथ ही सीरीज़ की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के भी विपरीत है। क्योंकि इसमें अश्लील और आपत्तिजनक प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस याचिका में 2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई है। जिसे टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल में कैंसर रोगियों के इलाज हेतु दान करने की बात कही गई है।

क्या है समीर वानखेड़े का दावा

विशेष रूप से मुकदमे में बताया गया है कि इस सीरीज की अवधारणा और क्रियान्वयन जानबूझकर समीर वानखेड़े की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है, जबकि समीर वानखेड़े और अभिनेता आर्यन खान से जुड़ा मामला बॉम्बे उच्च न्यायालय और एनडीपीएस विशेष न्यायालय, मुंबई के समक्ष लंबित है। मुकदमे में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीरीज में एक पात्र ने “सत्यमेव जयते” के नारे के बाद अश्लील इशारा किया है, जिसमें बीच वाली उंगली दिखाई गई है। ह कृत्य राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 का गंभीर उल्लंघन है, जिसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप – समीर वानखेड़े

इसके अतिरिक्त इस सीरीज के कंटेंट को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करती है क्योंकि यह अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। मुकदमे में यह भी मांग की गई है कि इस मामले के संबंध में टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को ₹2 करोड़ का दान दिया जाए, जो कैंसर रोगियों के इलाज के लिए काम करता है।

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इरफान सोलंकी को राहत, गैंगस्टर केस में भी हाईकोर्ट से मिली जमानत

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में भी उनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच इरफान की याचिका मंजूर करते हुए, उनके भाई रिजवान को भी राहत दी है। रिजवान की याचिका भी मंजूर हो गई है। इरफान दो साल से जेल की सलाखों में हैं। कानपुर की शीशामऊ सीट से इरफान विधायक थे। सजा के बाद उनकी विधायकी चली गई थी। उपचुनाव में इरफान की पत्नी ही यहां से विधायक चुनी गई थीं।

इरफान सोलंकी 24 महीनों से जेल में हैं बंद

इरफान सोलंकी, उनके भाई रिजवान सोलंकी और इजरायल आटेवाला के खिलाफ कानपुर के जाजमऊ थाने में 26 दिसंबर 2022 को गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि इरफान सोलंकी ने गैंग बनाकर आर्थिक लाभ के लिए आम जनता को भयभीत किया। इस मामले में इरफान सोलंकी पिछले 24 महीनों से महाराजगंज जेल में बंद हैं, जबकि अन्य चार आरोपी कानपुर जेल में हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2 सितंबर 2025 को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इरफान सोलंकी की ओर से अधिवक्ता इमरान उल्ला और विनीत विक्रम ने दलीलें पेश कीं। जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत का विरोध किया।

अन्य मामलों में भी इरफान सोलंकी को मिली जमानत

इरफान सोलंकी को हाल ही में अन्य मामलों में भी जमानत मिल चुकी है। मार्च 2025 में रंगदारी के एक मामले में उन्हें और उनके भाई रिजवान सोलंकी को जमानत मिली थी। इसके अलावा, 1 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेशी नागरिक के फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने के आरोप में उन्हें जमानत मिली थी। इसके अलावा इरफान सोलंकी को जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में नजीर फातिमा के घर में आगजनी के मामले में कानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 7 जून 2024 को सात साल की सजा सुनाई थी।

इस सजा के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में 14 नवंबर 2024 को जमानत तो दी। लेकिन सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उनकी विधायकी बहाल नहीं हो सकी।

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सुप्रीम कोर्ट से राहत, 100 साल पुरानी रामलीला पर लगी रोक हटी

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला में एक स्कूल मैदान पर चल रहे रामलीला उत्सव पर हाई कोर्ट ने रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने यह कहते हुए रामलीला उत्सव की अनुमति दे दी कि इससे छात्रों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी समय में याचिका दायर करने वाले से भी सख्त सवाल-जवाब किए और पूछा कि आखिर यह उत्सव 100 सालों से उसी मैदान पर हो रहा है।

तो अब उसकी नींद क्यों टूटी है ? तीन जजों वाली पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले पर जनहित याचिका दायर करने वाले मूल याचिकाकर्ता से पूछा कि यह उत्सव तो पिछले 100 सालों से होता आ रहा है। फिर अब आपने आखिरी समय में सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया ? आप पहले क्यों नहीं आए ?

पीठ और वकील के बीच तीखी बहस

इस पर मूल याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि रामलीला कं मंचन से स्कूल में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इस पर जस्टिस कांत ने फिर पूछा, लेकिन आप ना तो छात्र हैं, न ही छात्र के अभिभावक और न ही संपत्ति के मालिक हैं। फिर आपने जनहित याचिका क्यों डाली ? इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, अगर सभी धार्मिक त्योहार स्कूल के खेल के मैदान में ही मनाए जाएंगे। तो वहां बच्चे खेल भी नहीं सकते सीमेंट की ईंटें बिछाई जा रही हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि छात्र या अभिभावकों की शिकायतें कहाँ है ? और पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गईं ? जस्टिस सूर्यकांत देश के भावी सीजेआई हैं क्योंकि इस साल के अंत तक मौजूदा सीजेआई जस्टिस गवई के रिटायर होने के बाद पद संभालेंगे।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था ?

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर विचार करते हुए पाया था कि स्कूल के खेल के मैदान में सीमेंट की इंटरलॉकिंग टाइलें बिछाई जा रही हैं। ताकि उसे रामलीला जैसे आयोजनों के लिए स्थायी स्थल बनाया जा सके। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि स्कूल के मुख्य द्वार का नाम बदलकर ‘सीता राम द्वार’ कर दिया गया है और झूले लगा दिए गए हैं। जिससे पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और बच्चों को खेल के मैदान से वंचित होना पड़ सकता है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ श्रीनगर रामलीला महोत्सव समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या बात और शर्त ?

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रामलीला आयोजन समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के स्थगन आदेश पर रोक लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूँकि उत्सव शुरू हो चुके हैं। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 11 पर रोक लगाई जाती है। वहां इस शर्त के साथ उत्सव जारी रहेंगे कि बच्चे खेलना या खेल गतिविधियाँ जारी रखेंगे। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह याचिकाकर्ता और अन्य सभी हितधारकों की बात सुनें।

राज्य के अधिकारियों ने बचाव करते हुए तर्क दिया था कि पिछले 100 वर्षों से वहाँ रामलीला का आयोजन होता आ रहा है और यह प्रतिदिन शाम सात से 10 बजे तक ही होता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि टाइलें जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बिछाई गई थीं। उच्च न्यायालय ने इन तर्कों पर असहमति जताते हुए आयोजन के लिए स्कूल के मैदान के उपयोग पर रोक लगा दी थी।

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विधानसभा आसपुर में विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

संवाददाता- सादिक़ अली, डूँगरपुर। आसपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश डामोर ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नान्दली सागौरा और रायकी ग्राम पंचायतों के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में लैपटॉप और प्रोजेक्टर का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

वही अपने दौरे के दौरान विधायक डामोर ने विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लैपटॉप और प्रोजेक्टर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये उपकरण बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ेंगे और उनकी सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक व प्रभावी बनाएंगे।

विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर
विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

प्रत्येक बच्चा आधुनिक शिक्षा प्राप्त करे – विधायक डामोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक डामोर ने कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे। ये उपकरण बच्चों को न केवल पढ़ाई में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें समय के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए भी तैयार करेंगे। उन्होंने आगे यह भी आश्वासन दिया कि क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, रोजगार और सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर
विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

भारत आदिवासी पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें बीसीसी प्रभारी हीरालाल हारमोर खरोड़िया, देवापुरी मंडल अध्यक्ष धनजी भाई बुज, तथा कुरजी पारगी, भीमराज, ईश्वर सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। विधायक के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। उपस्थितजनों ने विधायक उमेश डामोर को इस सार्थक कदम के लिए धन्यवाद दिया और इसे ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को ऊँचाई पर ले जाने वाली ऐतिहासिक पहल बताया।

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रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन का बोनस, सरकार की मंजूरी

रेलवे कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे कर्मचारियों के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) देने के लिए मंजूरी दे दी है। इस पर कुल ₹1865.68 करोड़ का खर्च आएगा, जिससे 10,91,146 रेलवे कर्मचारियों को लाभ होगा। प्रत्येक योग्य रेलवे कर्मचारी को अधिकतम ₹17,951 की बोनस राशि मिलेगी। रेलवे का वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। इस दौरान रेलवे ने 1614.90 मिलियन टन का रिकॉर्ड कार्गो लोड किया और लगभग 7.3 अरब यात्रियों को यात्रा कराई।

किन कर्मचारियों को मिलेगा बोनस ?

योग्य रेलवे कर्मचारियों को हर साल दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले यह बोनस दिया जाता है। इस साल भी, लगभग 10.91 लाख अराजपत्रित (नॉन-गजेटेड) रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी दिया जाएगा। उत्पादकता-आधारित बोनस का भुगतान रेलवे के प्रदर्शन में सुधार हेतु रेलवे कर्मचारियों को प्रेरित करने हेतु एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है। रेलवे कर्मचारियों को बोनस की राशि सीधे कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी और इसका भुगतान जल्द शुरू किया जाएगा।

जानिए किन कर्मचारियों मिलेगा बोनस

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रेलवे कर्मचारियों को बोनस मिलने के फायदे

रेलवे कर्मचारियों को बोनस से कई तरह के फायदे होते हैं, खासकर जब ये त्योहारी मौसम से पहले दिया जाता है। कर्मचारी बोनस का उपयोग खरीदारी, यात्रा, मनोरंजन आदि में करते हैं, जिससे स्थानीय बाजारों और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। बोनस कर्मचारियों को उनके मासिक वेतन के अतिरिक्त राशि के रूप में मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। बोनस मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे अपने काम के प्रति और अधिक प्रेरित होते हैं। इससे कार्यक्षमता और उत्पादन में सुधार होता है।

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लद्दाख में युवाओं का आंदोलन हुआ हिंसक, बीजेपी कार्यालय फूंका

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन तब हिंसक रूप ले लिया। जब प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी के दफ्तर पर पत्थरबाजी करने के बाद उस पर हमला बोल दिया और वहां आग लगा दी। आंदोलनकारी युवाओं को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। इससे लोग और उग्र हो गए और पत्थरबाजी करने लगे। पुलिस कार्रवाई से भड़के प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस वैन को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने उग्र छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया है।

पुलिस और युवाओं में हुई भिड़ंत

इसी दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों की पुलिस से भिड़ंत हो गई और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक रूप अध्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की फिर सीआरपीएफ की गाड़ियां फूंक दी। भाजपा दफ्तर को भी आग के हवाले कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हालात को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।15 दिनों से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल परबता दें कि स्थानीय लोगों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में लद्दाख बंद का आह्वान किया था।

इसके बाद सैकड़ों लोग लेह की सड़कों पर उतर आए थे। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके कई साथी 10 सितंबर से 35 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को लद्दाख के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। इसमें लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सदस्य शामिल हैं।

बीजेपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा वाहन को लगाई आग

एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने लेह में भाजपा कार्यालय के बाहर एक सुरक्षा वाहन को आग लगा दी। उन्होंने बताया कि व्यवस्था बहाल करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के समर्थन में है। इसी मांग को लेकर मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगुचक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हीं के समर्थन में छात्रों का बड़ा हुजूम लेह की सड़कों पर उतर आया और केंद्र सरकार से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करने लगा।

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की उठ रही मांग

आपको बताते चले कि प्रदर्शनकारियों की चार मांगें हैं। पहली लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। दूसरी, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। तीसरी, लद्दाख में लोकसभा सीटें बढ़ाकर दो की जाएं और चौथी लद्दाख की जनजातियों को आदिवासी का दर्जा दिया जाए। छात्रों ने इन मांगों के समर्थन में रैली भी निकाली है।

बता दें कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त करते हुए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश जबकि लेह, लद्दाख और करगिल को मिलाकर एक प्रदेश बनाया गया था। अब उसी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठ रही है।

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सत्येंद्र जैन के खिलाफ ईडी का बड़ा ऐक्शन, 7.44 करोड़ की प्रॉपर्टी की जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के पूर्व मंत्री और आप नेता सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कथित रूप से उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों से जुड़ी 7.44 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने 24 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ई) के तहत सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की थी।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र कुमार जैन ने दिल्ली सरकार में मंत्री के रूप में पदस्थ रहते हुए 14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017 की अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। सीबीआई ने 3 दिसंबर 2018 को सत्येंद्र कुमार जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।

आमदनी से ज्यादा बनाई संपत्ति

दरअसल, ईडी की ये जांच सीबीआई द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर पर आधारित है, जो 24 अगस्त 2017 को दर्ज हुई थी। इसमें आरोप था कि मंत्री रहते हुए (फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच) सत्येन्द्र जैन ने अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाई। ईडी ने इससे पहले 31 मार्च 2022 को जैन से जुड़ी कंपनियों की 4.81 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त की थी और 27 जुलाई 2022 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस पर अदालत ने संज्ञान भी ले लिया था।

सत्येंद्र जैन के करीबियों ने जमा किए करोड़ों रुपये

पहले जांच में सामने आया कि नोटबंदी के तुरंत बाद (नवंबर 2016 में) सत्येन्द्र जैन के करीबी अंकुश जैन और वैभव जैन ने दिल्ली के बैंक ऑफ बड़ौदा, भोगल ब्रांच में 7.44 करोड़ रुपये कैश जमा किए थे। यह पैसा उन्होंने इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (IDS) के तहत एडवांस टैक्स के रूप में भरा था। उन्होंने दावा किया कि यह पैसा उनकी चार कंपनियों अकिनचन डेवेलपर्स, प्रयास इंफोसोल्यूशंस, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स से आया है।

लेकिन आयकर विभाग और अदालतों ने माना कि ये कंपनियां असल में सत्येन्द्र जैन की ही हैं और अंकुश-वैभव सिर्फ उनके बेनामी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही इस पर मुहर लगाई और अंकुश-वैभव की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

कुल 12.25 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त

ईडी ने यह जानकारी सीबीआई को भी दी, जिसके आधार पर सीबीआई ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की और सत्येंद्र जैन की बेनामी संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ा दिया। वहीं, अब ईडी ने सत्येंद्र जैन की 7.44 करोड़ की और संपत्ति जब्त कर ली है। इस तरह अभी तक कुल 12.25 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त हो चुकी है। जो पूरी तरह से सत्येंद्र जैन की कथित तौर पर अर्जित अवैध संपत्ति मानी जा रही है।

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अयोध्या: धन्नीपुर मस्जिद योजना खारिज, आरटीआई में कारण उजागर

अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए प्रस्तुत की गई योजना को खारिज कर दिया है। एडीए (ADA) ने सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने का हवाला दिया है। बता दें कि यह जमीन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित की गई थी। एक आरटीआई के जवाब में, एडीए ने 16 सितंबर को लिखे एक पत्र में कहा कि मस्जिद ट्रस्ट का आवेदन जो 23 जून, 2021 को प्रस्तुत किया गया था उसे खारिज कर दिया गया है। यह आवेदन लोक निर्माण, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई, राजस्व, नगर निगम और अग्निशमन सेवा विभागों से मंजूरी के अभाव के कारण खारिज किया गया था।

कोर्ट के फैसले के बाद दी गई थी जमीन

दरअसल, सालों से विवादित अयोध्या राम जन्ममूमि बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले के मुताबिक अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर मस्जिद और संबंधित सुविधाओं के निर्माण के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा ने अयोध्या शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में जमीन का कब्ज़ा हस्तांतरित कर दिया। आरटीआई के जवाब में एडीए ने यह भी पुष्टि की कि मस्जिद ट्रस्ट ने परियोजना के लिए आवेदन और जांच शुल्क के रूप में 4,02,628 रुपये जमा किए थे।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने जताई हैरानी

इस अस्वीकृति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन का आवंटन किया था और उत्तर प्रदेश सरकार ने भूखंड आवंटित किया था। मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि सरकारी विभागों ने अनापत्ति क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद की योजना को क्यों खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्थल निरीक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग ने पहुंच मार्ग को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन के मानदंडों के अनुसार यह कम से कम 12 मीटर चौड़ा होना चाहिए।

जबकि स्थल पर सड़क केवल लगभग छह मीटर चौड़ी है और मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार पर केवल चार मीटर चौड़ी है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा मुझे अन्य विभागों की आपत्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए, 23 महीने बाद मिली राहत

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा हो गए हैं। सफेद कुर्ता-पायजामा, काली जैकेट और आंखों पर काला चश्मा पहने आजम सीतापुर जेल से बाहर आए तो कार में बैठकर बेटों के साथ रामपुर रवाना हो गए। इस दौरान मीडिया ने उसने बात करने की काफी कोशिशें कीं लेकिन आजम ने किसी से बात नहीं की। यहां तक कि उन्होंने कार का शीशा तक नीचे नहीं किया।

जेल से आजम खान की रिहाई पर खुशी जाहिर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि आज उनके साथ न्याय हुआ है। उन्होंने आजम को समाजवादी पार्टी परिवार का वरिष्ठ सदस्य बताया और कहा कि सपा की सरकार बनते ही उन पर लगे सभी झूठे मुकदमे खत्म किए जाएंगे।

उधर, आजम खान की रिहाई से कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव का भी बयान आया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें गलत सजाएं दी थीं। अदालत ने मुकदमों में राहत दी है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं।

रिहाई में आई कानूनी अड़चन

दरअसल आजम की रिहाई की कागजी कार्रवाई के दौरान सुबह 9 बजे नया पेंच सामने आया। आजम ने रामपुर में चल रहे एक केस पर कोर्ट में जुर्माना नहीं भरा था। इसके चलते उनकी रिहाई रोक दी गई थी। दरअसल आजम पर एक केस में दो धाराओं में 3 और 5 हजार रुपए का जुर्माना लगा था, जिसे उन्होंने जमा नहीं किया। फिर ये तय हुआ कि 10 बजे रामपुर कोर्ट खुलने के बाद जुर्माने की रकम जमा की जाएगी। इसके बाद वहां से फैक्स से सूचना सीतापुर जेल भेजी जाएगी, फिर उनकी रिहाई होगी।

आजम के समर्थकों में अखिलेश यादव के लिए नाराजगी

आजम खान लंबे समय से जेल में बंद थे और उनके समर्थक सपा मुखिया अखिलेश यादव से नाराज थे क्योंकि उन्होंने ना इस मामले को बहुत तवज्जो दी और ना कोई ऐसा बयान, जो आजम को राहत पहुंचा सके। एक समय था जब आजम खान यूपी में सपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। जब प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी तो आजम बहुत पावरफुल हुआ करते थे और उनकी तूती बोलती थी। लेकिन वक्त ने करवट लिया और यूपी में बीजेपी की सरकार आते ही आजम खान के दिन पलट गए और वह तमाम मुकदमों की वजह से सलाखों के पीछे पहुंच गए।

लंबे समय से जेल में आजम खान

आजम खान ने बहुत कोशिश की लेकिन वह जेल से बाहर नहीं निकल पाए। एक तरफ उनके ऊपर दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़ती रही और दूसरी तरफ उनके जेल में रहने के दिन भी बढ़ते गए। फिलहाल उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है लेकिन जानकार मानते हैं कि जेल से बाहर भी उनका जीवन पहले की तरह आसान नहीं होगा।

आजम खान से मिलने सीतापुर पहुंची रुचि वीरा

मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा सीतापुर पहुंची। उन्होंने कहा कि 23 महीने बाद आजम खान निकल रहे हैं, हम सब उनको मिलना चाहते हैं। लोगों के दुआओं का असर है कि आज वह बाहर आ रहे हैं। इस सरकार के जुल्म ज्यादती के कारण वह अंदर रहे, अब बाहर निकल रहे हैं। रुचि वीरा ने कहा कि तमाम नेताओं कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगह पर रोका जा रहा है, हम किस तरीके से यहां तक पहुंच पाए यह हम ही जानते हैं।

उनके आने पर 2027 के चुनाव में एक बड़ा असर पड़ेगा। उनके आवाज को लोग सुनते हैं। आजम के बहुजन समाज पार्टी में जाने की खबरों के अटकलें पर रुचि वीरा ने कहा कि तमाम चीज मैंने मीडिया में ही सुनी है। इस तरीके की बातें कहीं सत्य नहीं है। बाकी जो भी सच्चाई होगी वह आजम खान खुद बताएंगे।

आजम खान की बसपा में जाने की अटकलें

खबरें ये भी हैं कि आजम खान सपा और अखिलेश यादव की बेरुखी से नाराज होकर बसपा ज्वाइन कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती एक बड़े सम्मेलन का आयोजन कर रही हैं। इसी दिन आजम बसपा ज्वाइन कर सकते हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है।

किसी और पार्टी में शामिल नहीं होंगे आजम खान – शिवपाल यादव

समाजवादी पार्टी के नेता और पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि सपा महासचिव आजम खान किसी और पार्टी में शामिल नहीं होंगे। आजम खान दो साल जेल में रहने के बाद जमानत पर मंगलवार की दोपहर सीतापुर जेल से निकले हैं। आजम को जेल से लेने उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समेत पार्टी के कई नेता पहुंचे थे। आजम खान को सुबह ही निकलना था लेकिन लगभग 8000 रुपये का चालान जमा नहीं होने के कारण रिहाई में देरी हो गई। चालान जमा होने के बाद वो जेल से छूट गए हैं।

शिवपाल सिंह यादव ने इटावा में पत्रकारों से कहा कि आजम खान सपा छोड़कर किसी भी अन्य दल में नहीं जायेंगे। उन्होंने आजम की रिहाई पर कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। शिवपाल ने आरोप लगाया कि आजम खान को सैकड़ों झूठे केस में फंसाया गया था। समाजवादी पार्टी खान की पूरी मदद कर रही है और आगे भी करेगी। शिवपाल ने आजम खान के मायावती की बसपा या चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के सवाल पर साफ-साफ कहा कि यह सब झूठी बातें हैं, झूठी अफवाह है।

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लालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट करेगा रोजाना सुनवाई

दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा आदेश दिया है। अब लैंड फॉर जॉब केस की 13 अक्टूबर से सुनवाई रोज़ाना यानी डे-टू-डे आधार पर होगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई अब हर दिन होगी। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपियों को केस से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स की साफ और पढ़ने लायक कॉपी मिलनी चाहिए। इसके लिए ईडी, जांच अधिकारी और आरोपियों के वकील मिलकर कोर्ट रिकॉर्ड देखेंगे।

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला ?

बता दें कि यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप ‘डी’ की नियुक्तियों से संबंधित है। मामले में लालू पर वर्ष 2004 से 2009 तक यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहते हुए उनके और परिवार द्वारा जमीन के बदले लोगों को नौकरी देने का आरोप है। सीबीआई द्वारा मामले में लालू के साथ उनके परिवार पर भी केस दर्ज किया गया है और आरोप है कि लालू ने परिजनों के नाम पर नौकरी के बदले जमीनें रिश्वत में ली थी। लालू पर आरोप है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए ही बिना कोई विज्ञापन जारी कर रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के लिए कई लोगों की भर्ती की थी।

>>    2004 से 2009 तक लालू यादव UPA-1 में रेल मंत्री थे।

>>    लालू यादव के मंत्री रहते रेलवे में ग्रुप-डी में भर्तियां की गई।

>>    अभ्यर्थियों से नौकरी के बदले घूस में जमीन ली गई।

>>    लालू यादव और उनके परिवार को 7 जगहों पर जमीनें मिलीं।

>>    वही लालू यादव और उनके परिवार पर 600 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

लालू यादव की बढ़ेगी मुश्किलें

लैंड फॉर जॉब्स स्कैम में लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने का आरोप है। इस मामले में ईडी ने पहले चार्जशीट दायर की थी और अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हुई है। कोर्ट का आदेश 20 सितंबर को आया और अब 13 अक्टूबर से इस केस की रोज़ाना सुनवाई शुरू होगी। साफ है कि अब ये मामला तेजी से आगे बढ़ेगा।

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कॉकपिट गेट खोलने की कोशिश, हाइजैक अलर्ट पर 9 लोग हिरासत में

एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेंगलुरु-वाराणसी विमान का उड़ान के दौरान हवा में कॉकपिट खोलने की कोशिश के बाद हाइजैंक की आशंका के मद्देनजर नौ पैसेंजर को लैंडिग के बाद हिरासत में लेकर वाराणसी में पूछताछ चल रही है। सुबह 10.22 बजे वाराणसी पहुंचे विमान में दो यात्रियों ने कॉकपिट के गेट के बगल में बने कोड पैनल में कुछ नंबर डाला, जिससे पायलटों को अलर्ट आया कि कोई कॉकपिट में घुसना चाहता है। पायलट ने सीसीटीवी कैमरे में अनचान चेहरों को देखकर रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर दिया। पैसेंजर्स ने यह कोशिश बार-बार की और पायलट ने हर बार कॉकपिट खोलने के आग्रह को रिजेक्ट कर दिया।

फ्लाइट के इंजन में लगी आग

अब तक मिली जानकारी के अनुसार पैसेंजर्स ने कॉकपिट में घुसने के लिए कुछ कोड भी डाला था जो सही था या गलत, अभी साफ नहीं है लेकिन उस कोड को डालने से पायलट को पता चला कि कोई अंदर आना चाहता है। कॉकपिट में लगे स्क्रीन पर केबिन का फुटेज देखकर पायलट ने यह समझ लिया कि ये कोई क्रू मेंबर नहीं है तो उसने कॉकपिट में घुसने का आग्रह ठुकरा दिया। पैसेंजर ने बार-बार यह कोशिश की और पायलट उसे हर बार रिजेक्ट करता रहा। पायलट को हाईजैक की कोशिश की आशंका हुई और उसने गेट नहीं खोला और इस तरह की कोशिश की जानकारी एटीसी को दी। वहां सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट कर दी गईं।

कॉकपिट का गेट खोलने की हुई कोशिश

बता दें कि ज्यादातर हवाई जहाज के कॉकपिट को अंदर से ही खोला जा सकता है। वाराणसी में लैंडिंग के बाद दोनों यात्रियों के साथ सफर कर रहे सात और यात्रियों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जहां डीसीपी उनसे पूछताछ कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पैसेंजर ने बताया है कि वो पहली बार हवाई जहाज में चढ़ा था और उसने कॉकपिट को टॉयलेट समझकर गेट खोलने की कोशिश की थी। यात्री ने दावा किया है कि फ्लाइट के क्रू मेंबर ने जब उसे बताया कि उसने कॉकपिट का गेट खोलने की कोशिश की है तो वो चुपचाप अपनी जगह पर लौट गया। डीजीसीए के प्रोटोकॉल के मुताबिक लैंडिंग के बाद संबंधित यात्रियों को पहले सीआईएसएफ के हवाले किया, जिसने उन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया है।

कॉकपिट बाहर से नहीं अंदर से खुलता है

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद कॉकपिट खोलने की कोशिश करने वाले दो लोगों समेत कुल नौ यात्रियों को हिरासत में लिया गया है। सभी को बाबतपुर पुलिस चौकी लाकर पूछताछ की जा रही है। वाराणसी वरुणा जोन के डीसीपी आकाश पटेल भी यात्रियों से पूछताछ के लिए पहुंचे हैं। विमान में 163 यात्री सवार थे। विमान का वाराणसी पहुंचने का निर्धारित समय 10.45 बजे है, लेकिन वह समय से पहले 10.22 बजे ही उतर गया।

फ्लाइट सर्विस में समये से पहले लैंडिंग आम बात है। अनुभवी पायलट और कॉकपिट क्लासेज संस्थान के निदेशक कैप्टन अरविंद पांडेय ने कॉकपिट खोलने के तौर-तरीकों के सवाल पर कहा कि बाहर से कॉकपिट नहीं खोला जा सकता है। अंदर से पायलट जब कॉकपिट खोलेगा, तभी कोई अंदर से बाहर या बाहर से अंदर जा सकता है। जब उनको पैंसेंजर द्वारा पास कोड डालने की बात बताई गई तो उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई कोड ज्यादातर विमानों में नहीं है।

एयर इंडिया के कॉकपिट में क्या हुआ

कैप्टन अरविंद पांडेय ने बताया कि जिस विमान की बात की जा रही है वो बोइंग की 737 मैक्स 8 है। इस जहाज के कॉकपिट के गेट पर एक पैनल है, जिसके जरिए केबिन क्रू मेंबर कॉकपिट में आने के लिए पायलट से इजाजत मांगते हैं। पांडेय ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी तो सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ के बाद ही देंगी लेकिन अनुमान है कि पैसेंजर का कोड सही रहा हो या गलत लेकिन इससे पायलट को बटन दबाने से यह पता चल गया होगा कि कोई अंदर आना चाहता है। पायलट ने कैमरे में देखा होगा कि गेट पर केबिन क्रू नहीं बल्कि कोई यात्री है तो उन्होंने रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर दिया होगा।

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पाक सेना का कारनामा ! अपने ही देश में बरसा डाले बम, 30 लोगों की मौत

पड़ोसी देश पाकिस्तान की वायु सेना ने अपने ही देश के लोगों पर कहर बरपाया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी वायु सेना के हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। यह घटना करीब 2 बजे हुई जब पाक लड़ाकू विमानों ने तिराह घाटी स्थित मत्रे दारा गाँव पर आठ बम गिरा दिए। जिससे गांव और आसपास के इलाके में भारी तबाही मच गई। ये LS-6 कैटगरी के विनाशकारी बम थे, जो चीनी JF-17 लड़ाकू विमानों से गिराए गए थे। मारे गए सभी लोग नागरिक हैं।

इस हमले पर अभी तक पाकिस्तानी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आ सका है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बमबारी में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, जब गांव के लोग सो रहे थे, तभी तेज धमाकों से उनकी नींद खुली। बमबारी इतनी भयानक थी कि गांव का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है।

विचलित करने वाली तस्वीरें और वीडियो

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट में घटनास्थल की विचलित करने वाली तस्वीरों और वीडियो में बच्चों समेत कई लोगों के शव वहीं पड़े दिखाई दे रहे हैं। बचाव दल मलबे के नीचे शवों की तलाश में लगे हुए हैं। इससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। खैबर पख्तूनख्वा में पहले भी कई आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए जा चुके हैं, जिनमें इस क्षेत्र से कई नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं।

पाक की अंदरूनी कलह उजागर

रिपोर्ट में कहा गया है कि घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश मलबों में की जा रही है। यह घटना पाकिस्तान के अंदरूनी हालात और कलह को भी उजागर कर रही है। खैबर पख्तुनख्वा इलाका लंबे समय से अशांत रहा है। जहां पाक सरकार की नहीं चल पाती है।जनवरी से अगस्त के बीच प्रांत में 605 आतंकी घटनाएंखैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इससे पहले भी कई आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए गए हैं और इस क्षेत्र से कई नागरिकों की मौत की खबरें पहले भी आई हैं।

पाक सेना ने बम गिराकर कार्रवाई की

खैबर पख्तूनख्वा की पुलिस के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच प्रांत में 605 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिनमें कम से कम 138 नागरिक और 79 पाकिस्तानी पुलिसकर्मी मारे गए। अकेले अगस्त में 129 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें छह पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक संघीय कांस्टेबुलरी कर्मियों की हत्या भी शामिल थे। ये इलाका आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। संभव है कि उन्हीं आतंकी ठिकानों पर पाक सेना ने बम गिराकर कार्रवाई की हो। भारत भी लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की सलाह देता रहा है। लेकिन भारत का फोकस पीओके और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में पनपे आतंकी ठिकानों पर रहा है।

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