Tuesday, February 3, 2026
Home Blog Page 4

‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ विवाद, समीर वानखेड़े ने शाहरुख पर लगाए आरोप

आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने मानहानि का मुकदमा माननीय दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया है। यह याचिका स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा, घोषणा और हर्जाने की मांग से संबंधित है। मुकदमा अभिनेता शाहरुख़ खान और गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट प्रा. लि., ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ्लिक्स और अन्य पक्षों के खिलाफ दायर किया गया है।

2 करोड़ रुपये हर्जाने की हुई मांग

मुकदमे में आरोप है कि यह सीरीज, रेड चिलीज़ द्वारा निर्मित और नेटफ्लिक्स द्वारा प्रसारित की गई है। साथ ही कहा गया कि ये समीर वानखेड़े की छवि को झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक तरीके से प्रस्तुत करती है। इस शो में नशीली दवाओं के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भ्रामक और नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिससे जनता का कानून व्यवस्था पर से विश्वास कमजोर होता है।

वही साथ ही सीरीज़ की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के भी विपरीत है। क्योंकि इसमें अश्लील और आपत्तिजनक प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस याचिका में 2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई है। जिसे टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल में कैंसर रोगियों के इलाज हेतु दान करने की बात कही गई है।

क्या है समीर वानखेड़े का दावा

विशेष रूप से मुकदमे में बताया गया है कि इस सीरीज की अवधारणा और क्रियान्वयन जानबूझकर समीर वानखेड़े की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है, जबकि समीर वानखेड़े और अभिनेता आर्यन खान से जुड़ा मामला बॉम्बे उच्च न्यायालय और एनडीपीएस विशेष न्यायालय, मुंबई के समक्ष लंबित है। मुकदमे में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीरीज में एक पात्र ने “सत्यमेव जयते” के नारे के बाद अश्लील इशारा किया है, जिसमें बीच वाली उंगली दिखाई गई है। ह कृत्य राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 का गंभीर उल्लंघन है, जिसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप – समीर वानखेड़े

इसके अतिरिक्त इस सीरीज के कंटेंट को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करती है क्योंकि यह अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। मुकदमे में यह भी मांग की गई है कि इस मामले के संबंध में टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को ₹2 करोड़ का दान दिया जाए, जो कैंसर रोगियों के इलाज के लिए काम करता है।

Read More :  इरफान सोलंकी को राहत, गैंगस्टर केस में भी हाईकोर्ट से मिली जमानत

इरफान सोलंकी को राहत, गैंगस्टर केस में भी हाईकोर्ट से मिली जमानत

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में भी उनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच इरफान की याचिका मंजूर करते हुए, उनके भाई रिजवान को भी राहत दी है। रिजवान की याचिका भी मंजूर हो गई है। इरफान दो साल से जेल की सलाखों में हैं। कानपुर की शीशामऊ सीट से इरफान विधायक थे। सजा के बाद उनकी विधायकी चली गई थी। उपचुनाव में इरफान की पत्नी ही यहां से विधायक चुनी गई थीं।

इरफान सोलंकी 24 महीनों से जेल में हैं बंद

इरफान सोलंकी, उनके भाई रिजवान सोलंकी और इजरायल आटेवाला के खिलाफ कानपुर के जाजमऊ थाने में 26 दिसंबर 2022 को गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि इरफान सोलंकी ने गैंग बनाकर आर्थिक लाभ के लिए आम जनता को भयभीत किया। इस मामले में इरफान सोलंकी पिछले 24 महीनों से महाराजगंज जेल में बंद हैं, जबकि अन्य चार आरोपी कानपुर जेल में हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2 सितंबर 2025 को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इरफान सोलंकी की ओर से अधिवक्ता इमरान उल्ला और विनीत विक्रम ने दलीलें पेश कीं। जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत का विरोध किया।

अन्य मामलों में भी इरफान सोलंकी को मिली जमानत

इरफान सोलंकी को हाल ही में अन्य मामलों में भी जमानत मिल चुकी है। मार्च 2025 में रंगदारी के एक मामले में उन्हें और उनके भाई रिजवान सोलंकी को जमानत मिली थी। इसके अलावा, 1 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेशी नागरिक के फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने के आरोप में उन्हें जमानत मिली थी। इसके अलावा इरफान सोलंकी को जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में नजीर फातिमा के घर में आगजनी के मामले में कानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 7 जून 2024 को सात साल की सजा सुनाई थी।

इस सजा के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में 14 नवंबर 2024 को जमानत तो दी। लेकिन सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उनकी विधायकी बहाल नहीं हो सकी।

Read More :  सुप्रीम कोर्ट से राहत, 100 साल पुरानी रामलीला पर लगी रोक हटी

सुप्रीम कोर्ट से राहत, 100 साल पुरानी रामलीला पर लगी रोक हटी

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला में एक स्कूल मैदान पर चल रहे रामलीला उत्सव पर हाई कोर्ट ने रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने यह कहते हुए रामलीला उत्सव की अनुमति दे दी कि इससे छात्रों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी समय में याचिका दायर करने वाले से भी सख्त सवाल-जवाब किए और पूछा कि आखिर यह उत्सव 100 सालों से उसी मैदान पर हो रहा है।

तो अब उसकी नींद क्यों टूटी है ? तीन जजों वाली पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले पर जनहित याचिका दायर करने वाले मूल याचिकाकर्ता से पूछा कि यह उत्सव तो पिछले 100 सालों से होता आ रहा है। फिर अब आपने आखिरी समय में सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया ? आप पहले क्यों नहीं आए ?

पीठ और वकील के बीच तीखी बहस

इस पर मूल याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि रामलीला कं मंचन से स्कूल में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इस पर जस्टिस कांत ने फिर पूछा, लेकिन आप ना तो छात्र हैं, न ही छात्र के अभिभावक और न ही संपत्ति के मालिक हैं। फिर आपने जनहित याचिका क्यों डाली ? इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, अगर सभी धार्मिक त्योहार स्कूल के खेल के मैदान में ही मनाए जाएंगे। तो वहां बच्चे खेल भी नहीं सकते सीमेंट की ईंटें बिछाई जा रही हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि छात्र या अभिभावकों की शिकायतें कहाँ है ? और पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गईं ? जस्टिस सूर्यकांत देश के भावी सीजेआई हैं क्योंकि इस साल के अंत तक मौजूदा सीजेआई जस्टिस गवई के रिटायर होने के बाद पद संभालेंगे।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था ?

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर विचार करते हुए पाया था कि स्कूल के खेल के मैदान में सीमेंट की इंटरलॉकिंग टाइलें बिछाई जा रही हैं। ताकि उसे रामलीला जैसे आयोजनों के लिए स्थायी स्थल बनाया जा सके। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि स्कूल के मुख्य द्वार का नाम बदलकर ‘सीता राम द्वार’ कर दिया गया है और झूले लगा दिए गए हैं। जिससे पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और बच्चों को खेल के मैदान से वंचित होना पड़ सकता है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ श्रीनगर रामलीला महोत्सव समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या बात और शर्त ?

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रामलीला आयोजन समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के स्थगन आदेश पर रोक लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूँकि उत्सव शुरू हो चुके हैं। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 11 पर रोक लगाई जाती है। वहां इस शर्त के साथ उत्सव जारी रहेंगे कि बच्चे खेलना या खेल गतिविधियाँ जारी रखेंगे। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह याचिकाकर्ता और अन्य सभी हितधारकों की बात सुनें।

राज्य के अधिकारियों ने बचाव करते हुए तर्क दिया था कि पिछले 100 वर्षों से वहाँ रामलीला का आयोजन होता आ रहा है और यह प्रतिदिन शाम सात से 10 बजे तक ही होता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि टाइलें जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बिछाई गई थीं। उच्च न्यायालय ने इन तर्कों पर असहमति जताते हुए आयोजन के लिए स्कूल के मैदान के उपयोग पर रोक लगा दी थी।

Read More :  विधानसभा आसपुर में विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

विधानसभा आसपुर में विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

संवाददाता- सादिक़ अली, डूँगरपुर। आसपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश डामोर ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नान्दली सागौरा और रायकी ग्राम पंचायतों के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में लैपटॉप और प्रोजेक्टर का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

वही अपने दौरे के दौरान विधायक डामोर ने विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लैपटॉप और प्रोजेक्टर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये उपकरण बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ेंगे और उनकी सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक व प्रभावी बनाएंगे।

विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर
विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

प्रत्येक बच्चा आधुनिक शिक्षा प्राप्त करे – विधायक डामोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक डामोर ने कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे। ये उपकरण बच्चों को न केवल पढ़ाई में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें समय के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए भी तैयार करेंगे। उन्होंने आगे यह भी आश्वासन दिया कि क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, रोजगार और सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर
विधायक उमेश डामोर ने बांटे लैपटॉप और प्रोजेक्टर

भारत आदिवासी पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें बीसीसी प्रभारी हीरालाल हारमोर खरोड़िया, देवापुरी मंडल अध्यक्ष धनजी भाई बुज, तथा कुरजी पारगी, भीमराज, ईश्वर सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। विधायक के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। उपस्थितजनों ने विधायक उमेश डामोर को इस सार्थक कदम के लिए धन्यवाद दिया और इसे ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को ऊँचाई पर ले जाने वाली ऐतिहासिक पहल बताया।

Read More :  रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन का बोनस, सरकार की मंजूरी

रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन का बोनस, सरकार की मंजूरी

रेलवे कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे कर्मचारियों के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) देने के लिए मंजूरी दे दी है। इस पर कुल ₹1865.68 करोड़ का खर्च आएगा, जिससे 10,91,146 रेलवे कर्मचारियों को लाभ होगा। प्रत्येक योग्य रेलवे कर्मचारी को अधिकतम ₹17,951 की बोनस राशि मिलेगी। रेलवे का वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। इस दौरान रेलवे ने 1614.90 मिलियन टन का रिकॉर्ड कार्गो लोड किया और लगभग 7.3 अरब यात्रियों को यात्रा कराई।

किन कर्मचारियों को मिलेगा बोनस ?

योग्य रेलवे कर्मचारियों को हर साल दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले यह बोनस दिया जाता है। इस साल भी, लगभग 10.91 लाख अराजपत्रित (नॉन-गजेटेड) रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी दिया जाएगा। उत्पादकता-आधारित बोनस का भुगतान रेलवे के प्रदर्शन में सुधार हेतु रेलवे कर्मचारियों को प्रेरित करने हेतु एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है। रेलवे कर्मचारियों को बोनस की राशि सीधे कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी और इसका भुगतान जल्द शुरू किया जाएगा।

जानिए किन कर्मचारियों मिलेगा बोनस

>>   ट्रैक मेंटेनर

>>   लोको पायलट

>>    ट्रेन मैनेजर (गार्ड)

>>    स्टेशन मास्टर

>>    सुपरवाइजर

>>    तकनीशियन

>>    तकनीशियन हेल्पर

>>     पॉइंट्समैन

>>    मिनिस्ट्रियल स्टाफ

>>    अन्य ग्रुप ‘सी’ स्टाफ

रेलवे कर्मचारियों को बोनस मिलने के फायदे

रेलवे कर्मचारियों को बोनस से कई तरह के फायदे होते हैं, खासकर जब ये त्योहारी मौसम से पहले दिया जाता है। कर्मचारी बोनस का उपयोग खरीदारी, यात्रा, मनोरंजन आदि में करते हैं, जिससे स्थानीय बाजारों और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। बोनस कर्मचारियों को उनके मासिक वेतन के अतिरिक्त राशि के रूप में मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। बोनस मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे अपने काम के प्रति और अधिक प्रेरित होते हैं। इससे कार्यक्षमता और उत्पादन में सुधार होता है।

Read More :   लद्दाख में युवाओं का आंदोलन हुआ हिंसक, बीजेपी कार्यालय फूंका

लद्दाख में युवाओं का आंदोलन हुआ हिंसक, बीजेपी कार्यालय फूंका

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन तब हिंसक रूप ले लिया। जब प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी के दफ्तर पर पत्थरबाजी करने के बाद उस पर हमला बोल दिया और वहां आग लगा दी। आंदोलनकारी युवाओं को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। इससे लोग और उग्र हो गए और पत्थरबाजी करने लगे। पुलिस कार्रवाई से भड़के प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस वैन को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने उग्र छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया है।

पुलिस और युवाओं में हुई भिड़ंत

इसी दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों की पुलिस से भिड़ंत हो गई और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक रूप अध्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की फिर सीआरपीएफ की गाड़ियां फूंक दी। भाजपा दफ्तर को भी आग के हवाले कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हालात को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।15 दिनों से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल परबता दें कि स्थानीय लोगों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में लद्दाख बंद का आह्वान किया था।

इसके बाद सैकड़ों लोग लेह की सड़कों पर उतर आए थे। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके कई साथी 10 सितंबर से 35 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को लद्दाख के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। इसमें लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सदस्य शामिल हैं।

बीजेपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा वाहन को लगाई आग

एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने लेह में भाजपा कार्यालय के बाहर एक सुरक्षा वाहन को आग लगा दी। उन्होंने बताया कि व्यवस्था बहाल करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के समर्थन में है। इसी मांग को लेकर मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगुचक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हीं के समर्थन में छात्रों का बड़ा हुजूम लेह की सड़कों पर उतर आया और केंद्र सरकार से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करने लगा।

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की उठ रही मांग

आपको बताते चले कि प्रदर्शनकारियों की चार मांगें हैं। पहली लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। दूसरी, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। तीसरी, लद्दाख में लोकसभा सीटें बढ़ाकर दो की जाएं और चौथी लद्दाख की जनजातियों को आदिवासी का दर्जा दिया जाए। छात्रों ने इन मांगों के समर्थन में रैली भी निकाली है।

बता दें कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त करते हुए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश जबकि लेह, लद्दाख और करगिल को मिलाकर एक प्रदेश बनाया गया था। अब उसी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठ रही है।

Read More :  सत्येंद्र जैन के खिलाफ ईडी का बड़ा ऐक्शन, 7.44 करोड़ की प्रॉपर्टी की जब्त

सत्येंद्र जैन के खिलाफ ईडी का बड़ा ऐक्शन, 7.44 करोड़ की प्रॉपर्टी की जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के पूर्व मंत्री और आप नेता सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कथित रूप से उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों से जुड़ी 7.44 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने 24 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ई) के तहत सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की थी।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र कुमार जैन ने दिल्ली सरकार में मंत्री के रूप में पदस्थ रहते हुए 14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017 की अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। सीबीआई ने 3 दिसंबर 2018 को सत्येंद्र कुमार जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।

आमदनी से ज्यादा बनाई संपत्ति

दरअसल, ईडी की ये जांच सीबीआई द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर पर आधारित है, जो 24 अगस्त 2017 को दर्ज हुई थी। इसमें आरोप था कि मंत्री रहते हुए (फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच) सत्येन्द्र जैन ने अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाई। ईडी ने इससे पहले 31 मार्च 2022 को जैन से जुड़ी कंपनियों की 4.81 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त की थी और 27 जुलाई 2022 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस पर अदालत ने संज्ञान भी ले लिया था।

सत्येंद्र जैन के करीबियों ने जमा किए करोड़ों रुपये

पहले जांच में सामने आया कि नोटबंदी के तुरंत बाद (नवंबर 2016 में) सत्येन्द्र जैन के करीबी अंकुश जैन और वैभव जैन ने दिल्ली के बैंक ऑफ बड़ौदा, भोगल ब्रांच में 7.44 करोड़ रुपये कैश जमा किए थे। यह पैसा उन्होंने इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (IDS) के तहत एडवांस टैक्स के रूप में भरा था। उन्होंने दावा किया कि यह पैसा उनकी चार कंपनियों अकिनचन डेवेलपर्स, प्रयास इंफोसोल्यूशंस, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स से आया है।

लेकिन आयकर विभाग और अदालतों ने माना कि ये कंपनियां असल में सत्येन्द्र जैन की ही हैं और अंकुश-वैभव सिर्फ उनके बेनामी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही इस पर मुहर लगाई और अंकुश-वैभव की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

कुल 12.25 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त

ईडी ने यह जानकारी सीबीआई को भी दी, जिसके आधार पर सीबीआई ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की और सत्येंद्र जैन की बेनामी संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ा दिया। वहीं, अब ईडी ने सत्येंद्र जैन की 7.44 करोड़ की और संपत्ति जब्त कर ली है। इस तरह अभी तक कुल 12.25 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त हो चुकी है। जो पूरी तरह से सत्येंद्र जैन की कथित तौर पर अर्जित अवैध संपत्ति मानी जा रही है।

Read More :  अयोध्या: धन्नीपुर मस्जिद योजना खारिज, आरटीआई में कारण उजागर

अयोध्या: धन्नीपुर मस्जिद योजना खारिज, आरटीआई में कारण उजागर

अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए प्रस्तुत की गई योजना को खारिज कर दिया है। एडीए (ADA) ने सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने का हवाला दिया है। बता दें कि यह जमीन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित की गई थी। एक आरटीआई के जवाब में, एडीए ने 16 सितंबर को लिखे एक पत्र में कहा कि मस्जिद ट्रस्ट का आवेदन जो 23 जून, 2021 को प्रस्तुत किया गया था उसे खारिज कर दिया गया है। यह आवेदन लोक निर्माण, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई, राजस्व, नगर निगम और अग्निशमन सेवा विभागों से मंजूरी के अभाव के कारण खारिज किया गया था।

कोर्ट के फैसले के बाद दी गई थी जमीन

दरअसल, सालों से विवादित अयोध्या राम जन्ममूमि बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले के मुताबिक अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर मस्जिद और संबंधित सुविधाओं के निर्माण के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा ने अयोध्या शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में जमीन का कब्ज़ा हस्तांतरित कर दिया। आरटीआई के जवाब में एडीए ने यह भी पुष्टि की कि मस्जिद ट्रस्ट ने परियोजना के लिए आवेदन और जांच शुल्क के रूप में 4,02,628 रुपये जमा किए थे।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने जताई हैरानी

इस अस्वीकृति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन का आवंटन किया था और उत्तर प्रदेश सरकार ने भूखंड आवंटित किया था। मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि सरकारी विभागों ने अनापत्ति क्यों नहीं दी और प्राधिकरण ने मस्जिद की योजना को क्यों खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्थल निरीक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग ने पहुंच मार्ग को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन के मानदंडों के अनुसार यह कम से कम 12 मीटर चौड़ा होना चाहिए।

जबकि स्थल पर सड़क केवल लगभग छह मीटर चौड़ी है और मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार पर केवल चार मीटर चौड़ी है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के अलावा मुझे अन्य विभागों की आपत्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

Read More :  आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए, 23 महीने बाद मिली राहत

आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए, 23 महीने बाद मिली राहत

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा हो गए हैं। सफेद कुर्ता-पायजामा, काली जैकेट और आंखों पर काला चश्मा पहने आजम सीतापुर जेल से बाहर आए तो कार में बैठकर बेटों के साथ रामपुर रवाना हो गए। इस दौरान मीडिया ने उसने बात करने की काफी कोशिशें कीं लेकिन आजम ने किसी से बात नहीं की। यहां तक कि उन्होंने कार का शीशा तक नीचे नहीं किया।

जेल से आजम खान की रिहाई पर खुशी जाहिर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि आज उनके साथ न्याय हुआ है। उन्होंने आजम को समाजवादी पार्टी परिवार का वरिष्ठ सदस्य बताया और कहा कि सपा की सरकार बनते ही उन पर लगे सभी झूठे मुकदमे खत्म किए जाएंगे।

उधर, आजम खान की रिहाई से कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव का भी बयान आया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें गलत सजाएं दी थीं। अदालत ने मुकदमों में राहत दी है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं।

रिहाई में आई कानूनी अड़चन

दरअसल आजम की रिहाई की कागजी कार्रवाई के दौरान सुबह 9 बजे नया पेंच सामने आया। आजम ने रामपुर में चल रहे एक केस पर कोर्ट में जुर्माना नहीं भरा था। इसके चलते उनकी रिहाई रोक दी गई थी। दरअसल आजम पर एक केस में दो धाराओं में 3 और 5 हजार रुपए का जुर्माना लगा था, जिसे उन्होंने जमा नहीं किया। फिर ये तय हुआ कि 10 बजे रामपुर कोर्ट खुलने के बाद जुर्माने की रकम जमा की जाएगी। इसके बाद वहां से फैक्स से सूचना सीतापुर जेल भेजी जाएगी, फिर उनकी रिहाई होगी।

आजम के समर्थकों में अखिलेश यादव के लिए नाराजगी

आजम खान लंबे समय से जेल में बंद थे और उनके समर्थक सपा मुखिया अखिलेश यादव से नाराज थे क्योंकि उन्होंने ना इस मामले को बहुत तवज्जो दी और ना कोई ऐसा बयान, जो आजम को राहत पहुंचा सके। एक समय था जब आजम खान यूपी में सपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। जब प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी तो आजम बहुत पावरफुल हुआ करते थे और उनकी तूती बोलती थी। लेकिन वक्त ने करवट लिया और यूपी में बीजेपी की सरकार आते ही आजम खान के दिन पलट गए और वह तमाम मुकदमों की वजह से सलाखों के पीछे पहुंच गए।

लंबे समय से जेल में आजम खान

आजम खान ने बहुत कोशिश की लेकिन वह जेल से बाहर नहीं निकल पाए। एक तरफ उनके ऊपर दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़ती रही और दूसरी तरफ उनके जेल में रहने के दिन भी बढ़ते गए। फिलहाल उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है लेकिन जानकार मानते हैं कि जेल से बाहर भी उनका जीवन पहले की तरह आसान नहीं होगा।

आजम खान से मिलने सीतापुर पहुंची रुचि वीरा

मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा सीतापुर पहुंची। उन्होंने कहा कि 23 महीने बाद आजम खान निकल रहे हैं, हम सब उनको मिलना चाहते हैं। लोगों के दुआओं का असर है कि आज वह बाहर आ रहे हैं। इस सरकार के जुल्म ज्यादती के कारण वह अंदर रहे, अब बाहर निकल रहे हैं। रुचि वीरा ने कहा कि तमाम नेताओं कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगह पर रोका जा रहा है, हम किस तरीके से यहां तक पहुंच पाए यह हम ही जानते हैं।

उनके आने पर 2027 के चुनाव में एक बड़ा असर पड़ेगा। उनके आवाज को लोग सुनते हैं। आजम के बहुजन समाज पार्टी में जाने की खबरों के अटकलें पर रुचि वीरा ने कहा कि तमाम चीज मैंने मीडिया में ही सुनी है। इस तरीके की बातें कहीं सत्य नहीं है। बाकी जो भी सच्चाई होगी वह आजम खान खुद बताएंगे।

आजम खान की बसपा में जाने की अटकलें

खबरें ये भी हैं कि आजम खान सपा और अखिलेश यादव की बेरुखी से नाराज होकर बसपा ज्वाइन कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती एक बड़े सम्मेलन का आयोजन कर रही हैं। इसी दिन आजम बसपा ज्वाइन कर सकते हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है।

किसी और पार्टी में शामिल नहीं होंगे आजम खान – शिवपाल यादव

समाजवादी पार्टी के नेता और पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि सपा महासचिव आजम खान किसी और पार्टी में शामिल नहीं होंगे। आजम खान दो साल जेल में रहने के बाद जमानत पर मंगलवार की दोपहर सीतापुर जेल से निकले हैं। आजम को जेल से लेने उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समेत पार्टी के कई नेता पहुंचे थे। आजम खान को सुबह ही निकलना था लेकिन लगभग 8000 रुपये का चालान जमा नहीं होने के कारण रिहाई में देरी हो गई। चालान जमा होने के बाद वो जेल से छूट गए हैं।

शिवपाल सिंह यादव ने इटावा में पत्रकारों से कहा कि आजम खान सपा छोड़कर किसी भी अन्य दल में नहीं जायेंगे। उन्होंने आजम की रिहाई पर कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। शिवपाल ने आरोप लगाया कि आजम खान को सैकड़ों झूठे केस में फंसाया गया था। समाजवादी पार्टी खान की पूरी मदद कर रही है और आगे भी करेगी। शिवपाल ने आजम खान के मायावती की बसपा या चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के सवाल पर साफ-साफ कहा कि यह सब झूठी बातें हैं, झूठी अफवाह है।

Read More :  लालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट करेगा रोजाना सुनवाई

लालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट करेगा रोजाना सुनवाई

दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा आदेश दिया है। अब लैंड फॉर जॉब केस की 13 अक्टूबर से सुनवाई रोज़ाना यानी डे-टू-डे आधार पर होगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई अब हर दिन होगी। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपियों को केस से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स की साफ और पढ़ने लायक कॉपी मिलनी चाहिए। इसके लिए ईडी, जांच अधिकारी और आरोपियों के वकील मिलकर कोर्ट रिकॉर्ड देखेंगे।

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला ?

बता दें कि यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप ‘डी’ की नियुक्तियों से संबंधित है। मामले में लालू पर वर्ष 2004 से 2009 तक यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहते हुए उनके और परिवार द्वारा जमीन के बदले लोगों को नौकरी देने का आरोप है। सीबीआई द्वारा मामले में लालू के साथ उनके परिवार पर भी केस दर्ज किया गया है और आरोप है कि लालू ने परिजनों के नाम पर नौकरी के बदले जमीनें रिश्वत में ली थी। लालू पर आरोप है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए ही बिना कोई विज्ञापन जारी कर रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के लिए कई लोगों की भर्ती की थी।

>>    2004 से 2009 तक लालू यादव UPA-1 में रेल मंत्री थे।

>>    लालू यादव के मंत्री रहते रेलवे में ग्रुप-डी में भर्तियां की गई।

>>    अभ्यर्थियों से नौकरी के बदले घूस में जमीन ली गई।

>>    लालू यादव और उनके परिवार को 7 जगहों पर जमीनें मिलीं।

>>    वही लालू यादव और उनके परिवार पर 600 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

लालू यादव की बढ़ेगी मुश्किलें

लैंड फॉर जॉब्स स्कैम में लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने का आरोप है। इस मामले में ईडी ने पहले चार्जशीट दायर की थी और अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हुई है। कोर्ट का आदेश 20 सितंबर को आया और अब 13 अक्टूबर से इस केस की रोज़ाना सुनवाई शुरू होगी। साफ है कि अब ये मामला तेजी से आगे बढ़ेगा।

Read More :   कॉकपिट गेट खोलने की कोशिश, हाइजैक अलर्ट पर 9 लोग हिरासत में

कॉकपिट गेट खोलने की कोशिश, हाइजैक अलर्ट पर 9 लोग हिरासत में

एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेंगलुरु-वाराणसी विमान का उड़ान के दौरान हवा में कॉकपिट खोलने की कोशिश के बाद हाइजैंक की आशंका के मद्देनजर नौ पैसेंजर को लैंडिग के बाद हिरासत में लेकर वाराणसी में पूछताछ चल रही है। सुबह 10.22 बजे वाराणसी पहुंचे विमान में दो यात्रियों ने कॉकपिट के गेट के बगल में बने कोड पैनल में कुछ नंबर डाला, जिससे पायलटों को अलर्ट आया कि कोई कॉकपिट में घुसना चाहता है। पायलट ने सीसीटीवी कैमरे में अनचान चेहरों को देखकर रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर दिया। पैसेंजर्स ने यह कोशिश बार-बार की और पायलट ने हर बार कॉकपिट खोलने के आग्रह को रिजेक्ट कर दिया।

फ्लाइट के इंजन में लगी आग

अब तक मिली जानकारी के अनुसार पैसेंजर्स ने कॉकपिट में घुसने के लिए कुछ कोड भी डाला था जो सही था या गलत, अभी साफ नहीं है लेकिन उस कोड को डालने से पायलट को पता चला कि कोई अंदर आना चाहता है। कॉकपिट में लगे स्क्रीन पर केबिन का फुटेज देखकर पायलट ने यह समझ लिया कि ये कोई क्रू मेंबर नहीं है तो उसने कॉकपिट में घुसने का आग्रह ठुकरा दिया। पैसेंजर ने बार-बार यह कोशिश की और पायलट उसे हर बार रिजेक्ट करता रहा। पायलट को हाईजैक की कोशिश की आशंका हुई और उसने गेट नहीं खोला और इस तरह की कोशिश की जानकारी एटीसी को दी। वहां सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट कर दी गईं।

कॉकपिट का गेट खोलने की हुई कोशिश

बता दें कि ज्यादातर हवाई जहाज के कॉकपिट को अंदर से ही खोला जा सकता है। वाराणसी में लैंडिंग के बाद दोनों यात्रियों के साथ सफर कर रहे सात और यात्रियों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जहां डीसीपी उनसे पूछताछ कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पैसेंजर ने बताया है कि वो पहली बार हवाई जहाज में चढ़ा था और उसने कॉकपिट को टॉयलेट समझकर गेट खोलने की कोशिश की थी। यात्री ने दावा किया है कि फ्लाइट के क्रू मेंबर ने जब उसे बताया कि उसने कॉकपिट का गेट खोलने की कोशिश की है तो वो चुपचाप अपनी जगह पर लौट गया। डीजीसीए के प्रोटोकॉल के मुताबिक लैंडिंग के बाद संबंधित यात्रियों को पहले सीआईएसएफ के हवाले किया, जिसने उन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया है।

कॉकपिट बाहर से नहीं अंदर से खुलता है

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद कॉकपिट खोलने की कोशिश करने वाले दो लोगों समेत कुल नौ यात्रियों को हिरासत में लिया गया है। सभी को बाबतपुर पुलिस चौकी लाकर पूछताछ की जा रही है। वाराणसी वरुणा जोन के डीसीपी आकाश पटेल भी यात्रियों से पूछताछ के लिए पहुंचे हैं। विमान में 163 यात्री सवार थे। विमान का वाराणसी पहुंचने का निर्धारित समय 10.45 बजे है, लेकिन वह समय से पहले 10.22 बजे ही उतर गया।

फ्लाइट सर्विस में समये से पहले लैंडिंग आम बात है। अनुभवी पायलट और कॉकपिट क्लासेज संस्थान के निदेशक कैप्टन अरविंद पांडेय ने कॉकपिट खोलने के तौर-तरीकों के सवाल पर कहा कि बाहर से कॉकपिट नहीं खोला जा सकता है। अंदर से पायलट जब कॉकपिट खोलेगा, तभी कोई अंदर से बाहर या बाहर से अंदर जा सकता है। जब उनको पैंसेंजर द्वारा पास कोड डालने की बात बताई गई तो उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई कोड ज्यादातर विमानों में नहीं है।

एयर इंडिया के कॉकपिट में क्या हुआ

कैप्टन अरविंद पांडेय ने बताया कि जिस विमान की बात की जा रही है वो बोइंग की 737 मैक्स 8 है। इस जहाज के कॉकपिट के गेट पर एक पैनल है, जिसके जरिए केबिन क्रू मेंबर कॉकपिट में आने के लिए पायलट से इजाजत मांगते हैं। पांडेय ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी तो सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ के बाद ही देंगी लेकिन अनुमान है कि पैसेंजर का कोड सही रहा हो या गलत लेकिन इससे पायलट को बटन दबाने से यह पता चल गया होगा कि कोई अंदर आना चाहता है। पायलट ने कैमरे में देखा होगा कि गेट पर केबिन क्रू नहीं बल्कि कोई यात्री है तो उन्होंने रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर दिया होगा।

Read More :  पाक सेना का कारनामा ! अपने ही देश में बरसा डाले बम, 30 लोगों की मौत

पाक सेना का कारनामा ! अपने ही देश में बरसा डाले बम, 30 लोगों की मौत

पड़ोसी देश पाकिस्तान की वायु सेना ने अपने ही देश के लोगों पर कहर बरपाया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी वायु सेना के हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। यह घटना करीब 2 बजे हुई जब पाक लड़ाकू विमानों ने तिराह घाटी स्थित मत्रे दारा गाँव पर आठ बम गिरा दिए। जिससे गांव और आसपास के इलाके में भारी तबाही मच गई। ये LS-6 कैटगरी के विनाशकारी बम थे, जो चीनी JF-17 लड़ाकू विमानों से गिराए गए थे। मारे गए सभी लोग नागरिक हैं।

इस हमले पर अभी तक पाकिस्तानी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आ सका है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बमबारी में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, जब गांव के लोग सो रहे थे, तभी तेज धमाकों से उनकी नींद खुली। बमबारी इतनी भयानक थी कि गांव का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है।

विचलित करने वाली तस्वीरें और वीडियो

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट में घटनास्थल की विचलित करने वाली तस्वीरों और वीडियो में बच्चों समेत कई लोगों के शव वहीं पड़े दिखाई दे रहे हैं। बचाव दल मलबे के नीचे शवों की तलाश में लगे हुए हैं। इससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। खैबर पख्तूनख्वा में पहले भी कई आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए जा चुके हैं, जिनमें इस क्षेत्र से कई नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं।

पाक की अंदरूनी कलह उजागर

रिपोर्ट में कहा गया है कि घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश मलबों में की जा रही है। यह घटना पाकिस्तान के अंदरूनी हालात और कलह को भी उजागर कर रही है। खैबर पख्तुनख्वा इलाका लंबे समय से अशांत रहा है। जहां पाक सरकार की नहीं चल पाती है।जनवरी से अगस्त के बीच प्रांत में 605 आतंकी घटनाएंखैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इससे पहले भी कई आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए गए हैं और इस क्षेत्र से कई नागरिकों की मौत की खबरें पहले भी आई हैं।

पाक सेना ने बम गिराकर कार्रवाई की

खैबर पख्तूनख्वा की पुलिस के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच प्रांत में 605 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिनमें कम से कम 138 नागरिक और 79 पाकिस्तानी पुलिसकर्मी मारे गए। अकेले अगस्त में 129 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें छह पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक संघीय कांस्टेबुलरी कर्मियों की हत्या भी शामिल थे। ये इलाका आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। संभव है कि उन्हीं आतंकी ठिकानों पर पाक सेना ने बम गिराकर कार्रवाई की हो। भारत भी लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की सलाह देता रहा है। लेकिन भारत का फोकस पीओके और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में पनपे आतंकी ठिकानों पर रहा है।

Read More :  डल झील में सफाई के दौरान मिला पाकिस्तानी मिसाइल का मलबा, जांच जारी

डल झील में सफाई के दौरान मिला पाकिस्तानी मिसाइल का मलबा, जांच जारी

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस दौरान भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच झड़प भी हुई थी। दोनों देशों की ओर से एक दूसरे पर मिसाइल भी दागे गए थे। अब जम्मू-कश्मीर में डल झील में फटे हुए मिसाइल का मलबा बरामद किया गया है। झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से शनिवार को झील की सफाई के दौरान मलबे को बरामद किया गया है।

श्रीनगर में हुए थे जोरदार धमाके

दरअसल, बीते 10 मई को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई थी। डल झील में एक मिसाइल जैसी चीज गिरी थी। अधिकारियों के मुताबिक, जब यह चीज डल में गिरी तो झील की सतह से धुआं उठ रहा था। बाद में सुरक्षाबलों ने मलबा निकाला था। उसी दिन, शहर के बाहरी इलाके लासजान से एक और संदिग्ध वस्तु बरामद की गई। 10 मई को श्रीनगर में कई विस्फोट हुए थे।

मलबे को पुलिस स्टेशन को सौंपा गया

शनिवार को डल झील की नियमित सफाई के दौरान, काम कर रहे लोगों को एक शेल के टुकड़े मिले जो मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फटे थे। कर्मचारियों ने मलबे को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए नजदीकी पुलिस स्टेशन को सौंप दिया है।

क्या था ऑपरेशन सिंदूर ?

आपको बता दें कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार डाला था। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने पीओके (PoK) और पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंप्स को निशाना बनाया जिसमें सैकड़ों आतंकी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया जिसे भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। इस दौरान कई पाकिस्तानी विमान भी मार गिराए गए। भारत ने इसके बाद पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए। इसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और उसने सीजफायर की मांग की। तब जाकर ये झड़प बंद हुई।

Read More :  जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत, पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन

जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत, पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कल से जीएसटी बचत उत्सव के शुरुआत का ऐलान किया है। उन्होंने देशवासियों को कल से शुरू होने वाले नवरात्रि उत्सव की भी शुभकामनाएं दी है। पीएम मोदी यह संबोधन नवरात्रि की पूर्व संध्या पर हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन से जीएसटी दरों में कटौती लागू होगी और इससे बड़ी संख्या में उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी समय-समय पर राष्ट्र को संबोधित करते रहे हैं। वर्ष 2016 में नोटबंदी का ऐलान भी उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन के जरिए दिया था। वहीं कोविड के दौरान लॉकडाउन का ऐलान भी उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में किया था।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद राष्ट्र के नाम दिया था संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जहां सैनिकों के शौर्य की सराहना की थी वहीं दुनिया को यह संदेश भी दिया था भारत न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं बर्दाश्त करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकियों और उनके सरपरस्तों की कमर तोड़ने भी भारत नहीं चूकेगा।

कल से जीएसटी बचत उत्सव

कल से शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। आपको हार्दिक शुभकानाएं। पहले दिन से भारत आत्मनिर्भर अभियान के लिए बड़ा कदम उठा रहा है। नवरात्रि के प्रथम दिवस सूर्योदय के साथ ही नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म लागू हो जाएंगे। कल से देश में जीएसटी बचत उत्सव में शुरू होने जा रहा है। आपकी बचत बढ़ेगी और आसानी से चीजों को खरीद पाएंगे। गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, महिलाएं, सभी को इस बचत उत्सव का बहुत फायदा है।

जीएसटी के अब दो ही स्लैब रहेंगे – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि कल से नेक्सट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म लागू हो रहे हैं। मुख्य रूप से अब सिर्फ 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत ही टैक्स स्लैब रहेंगे। इससे रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें और सस्ती हो जाएंगी। अनेकों सामान, अनेकों सेवाएं या तो टैक्स फ्री हो जाएंगी या बेहद सस्ती हो जाएंगी। जिन सामनों पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था उनमें से से 99 प्रतिशत चीजों 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गई हैं।

पीएम मोदी ने दिया नागरिक देवो भव: का मंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “नागरिक देवो भव: के जिस मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जीएसटी नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म में इसकी झलक दिखाई देगी। इनकम टैक्स और जीएसटी को लेकर एक साल में जो फैसले हुए हैं। इससे देश के लोगों को ढाई लाख करोड़ से ज्यादा की बचत होगी। विकसित भारत के लक्ष्य के रास्ते पर चलने के लिए हमें आत्म निर्भर बनना ही होगा।

सामान खरीदें जो मेड इन इंडिया हो – पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ‘हम वो सामान खरीदें जो मेड इन इंडिया हो। जिसमें हमारे नौजवानों की मेहनत लगी हो, उनका पसीना लगा हो। हमें हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाना है। गर्व से कहो मैं स्वदेशी खरीदता हूं। हर दुकानदार कहे कि मैं स्वदेशी सामान बेचता हूं। तभी भारत विकसित होगा। सभी राज्य सरकारों से भी आग्रह है कि विकसित भारत के लिए स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के संकल्प को अपनाएं।

जीएसटी रिफॉर्म्स भारत की ग्रोथ स्टोरी को एक्सेलरेट करेंगे

पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म्स भारत की ग्रोथ स्टोरी को एक्सेलरेट करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब आपने 2014 में हमें अवसर दिया। तो हमने जनहित और राष्ट्रहित में जीएसटी को अपनी प्राथमिकता बनाया। सबको साथ लेकर आज़ाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार लागू किया गया। केंद्र और राज्य के प्रयासों का ही परिणाम था कि देश दर्जनों करों के जाल से मुक्त हुआ। एक राष्ट्र, एक कर का सपना साकार हुआ। सुधार एक सतत प्रक्रिया है। जब समय बदलता है, जब देश की ज़रूरतें बदलती हैं। तो अगली पीढ़ी के सुधार भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसीलिए ये नए जीएसटी सुधार लागू किए जा रहे हैं।

Read More :  बांग्लादेश में भूकंप के जोरदार झटके, भारत के भी कई राज्यों में हिली धरती

बांग्लादेश में भूकंप के जोरदार झटके, भारत के भी कई राज्यों में हिली धरती

बांग्लादेश में 4.0 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में था, हालांकि यह भारत की सीमा के बिल्कुल पास था। वहीं इस भूकंप की वजह से भारत के भी कई राज्यों की धरती हिल गई। इस भूकंप का सबसे ज्यादा असर मेघालय में देखने को मिला। हालांकि अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश से लगती मेघालय की सीमा के पास भारतीय समयानुसार सुबह 11.49 बजे भूकंप महसूस किया गया। उन्होंने कहा कि मेघालय में किसी भी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। मेघायल के अलावा त्रिपुरा, असम और मिजोरम के भी कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए।

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का अंदाजा

4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है। 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है। 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं। 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है। 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है।

भारत में क्या हैं भूकंप के जोन

भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग के लगभग 59 फीसदी हिस्से को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने भारत में भूकंप क्षेत्र को जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5 यानी 4 भागों में विभाजित किया है। जोन-5 के इलाकों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 कम संवेदनशील माना जाता है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है। यहां 7 से अधिक तीव्रता के भी भूकंप आ सकते हैं जिससे बड़ी तबाही हो सकती है। भारत में हिमालय क्षेत्र और कुछ अन्य फॉल्ट लाइनों (जैसे कच्छ, पूर्वोत्तर भारत) के कारण भूकंप का खतरा अधिक है, क्योंकि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।

क्यों आते हैं भूकंप ?

हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं। हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है। इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है। भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है।

Read More :  शाम 5 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, क्या होगा कोई बड़ा ऐलान ?

शाम 5 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, क्या होगा कोई बड़ा ऐलान ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फिर एकबार देश को संबोधित करने जा रहे हैं। पीएम मोदी आज शाम पांच बजे राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं। कल नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। इसके बाद लोगों की जरूरत कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। पीएम मोदी के संबोधन के विषय को लेकर जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इस बात की संभावना है कि वह इस मौके पर वह देशवासियों के लिए कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से उन्होंने कहा था कि यह दिवाली लोंगों के लिए डबल गिफ्ट वाली होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने नोटबंदी और कोरोना काल में लॉकडाउन की घोषणा अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के माध्यम से की थी।

इन मुद्दों पर हो सकता है पीएम का संबोधन

इससे पहले भी पीएम मोदी जीएसटी की नई दरों को लागू करने के फायदे बता चुके हैं। इसके अलावा पीएम मोदी लगातार वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत की बात करते आ रहे हैं। पीएम मोदी के संबोधन का फोकस इस ओर भी हो सकता है, जिससे देश की अर्थवस्था को मजबूत बनाया जा सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश को जिस तरह से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उसे लेकर भी पीएम मोदी बोल सकते हैं।

फिलहाल प्राथमिक के तौर पर यही माना जा रहा है कि पीएम मोदी जीएसटी की नई दरों पर ही कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अब जीएसटी की नई दरें लागू होने में कुछ ही घंटे रह गए हैं, ऐसे में यह संबोधन मुख्य रूप से इसी पर केंद्रित माना जा रहा है।

क्या हैं जीएसटी की नई दरें ?

बता दें कि जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर को 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब को हटाते हुए 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब को मंजूरी दी। बैठक में 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब को खत्म करने का निर्णय लिया गया। ऐसे में 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के नए दोनों स्लैब अब 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी में यह सुधार आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने और राहत दिलाने के लिए किया गया है।

पीएम मोदी ने कब-कब किया है राष्ट्र को संबोधित

2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सेना की वीरता पर गर्व व्यक्त किया और देशवासियों को एकजुट रहने का आह्वान किया। 8 नवंबर 2016 को उन्होंने अचानक राष्ट्र को संबोधित कर 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की। यह उनके सबसे ऐतिहासिक और चर्चित संबोधनों में से एक माना जाता है। कोरोना महामारी के दौरान कई बार राष्ट्र को संबोधित किया।

22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। बाद में ताली-थाली बजाने और दीया जलाने की अपील की, जिससे जनता को मनोबल और सामूहिक एकजुटता का संदेश मिला। वैक्सीन अभियान शुरू होने पर उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बताया। आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा 12 मई 2020 को राष्ट्र के नाम संबोधन में की गई। स्टार्टअप्स, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को भी कई बार संबोधनों के माध्यम से जनता तक पहुंचाया।

Read More :  दुल्हन के हाथों में सजी रह गई मेंहदी, निकाह से पहले भागा दूल्हा

दुल्हन के हाथों में सजी रह गई मेंहदी, निकाह से पहले भागा दूल्हा

काशीराम आवास कॉलोनी में एक दुल्हन अपने हाथों में मेंहदी लगाकर अपने दूल्हे का इंतजार करती रह गई, लेकिन निकाह के कुछ समय पहले ही दूल्हे ने शादी से इनकार कर दिया। दूल्हे के परिवार ने दहेज में छह लाख रुपये की मांग रखी, नहीं मानने पर दूल्हे ने निकाह से इनकार कर दिया। यह सुनकर दुल्हन के पिता की आंखों में आंसू आ गये और जिस घर में शहनाइयां बज रही थीं उस घर में वीराना छा गया।

पेशे से मजदूरी करने वाले पिता बेटी की शादी की पूरी तेयारी कर चुके थे बस बारात आनी थी, लेकिन बारात नहीं आई। शादी की तैयारी चल रही थी दुल्हन के हाथों पर मेहंदी सज चुकी थी, हलवाइयों ने बारातियों के लिये तमाम पकवान भी तैयार कर लिये थे लेकिन लड़के वालों द्वारा अचानक निकाह से इनकार कर देने के कारण सारी खुशियां काफूर हो गईं।

शादी की तैयारियां हो चुकी थीं पूरी 

घटना सिविल लाइंस थाना क्षेत्र इलाके का है। यहां काशीराम आवास कालोनी में रहने वाले एक शख्स ने अपनी तीसरी बेटी का निकाह अपने ही निकट रिश्तेदारी में तय कर दिया था। शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। बारात उझानी के पठान टोला से आनी थी, जब शादी तय हुई थी तो वर पक्ष ने 2 लाख नगद की डिमांड की थी इस पर वधू पक्ष ने उनकी यह डिमांड पूरी भी कर दी थी, अन्य कार्यक्रमों के दौरान दहेज का अन्य सामान भी दे दिया था।

भागा दूल्हा और दुल्हन करता रही इंतजार

शहर के लकी मैरिज लॉन में बारात आनी थी, सारे रिश्तेदार आ चुके थे। इस बीच आज सुबह दूल्हे के पिता अंसार ने लड़की के पिता को फोन किया और कहा कि बारात तब आएगी जब आप छह लाख रुपये कैश और एक बुलेट मोटरसाइकिल देंगे। लोगों ने बताया कि बुलेट की डिमांड पूरी नहीं होने पर दूल्हा घर से भाग गया और हाथों में मेंहदी सजाए दुल्हन उसका इंतजार करता रही।

कुछ भी करो बारात अब नहीं आएगी…..

शादी तय करवाने वाले ने कहा कि जब हमने शादी तय करवाई तो लड़के वालों की डिमांड दो लाख रुपये की थी फिर उन लोगों ने बुलेट मोटरसाइकिल और 6 लाख की और डिमांड कर दी। इनकार करने पर लड़के वालों ने बारात लाने से इनकार कर दिया और लड़के को घर से फरार कर दिया। अब कह रहे हैं कि आप चाहे पुलिस ले आओ या कुछ भी करो बारात अब नहीं आएगी।

वहीं लड़की के पिता का कहना है कि मैंने पहले ही दो लाख रुपये दे दिए थे। शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं। उनके कहने पर हमने बैंकट हॉल भी लिया। अब लड़के वालों ने बारात लाने से मना कर दिया। कह रहे हैं कि लड़का घर से भाग गया। हम गरीब आदमी हैं हम तो किसी लायक नहीं बचे। हमारी पूरी बिरादरी में बेज्जती हो गई। अब हमने भी तय कर लिया है कि हम अपनी बेटी की शादी उस घर में नहीं करेंगे।

Read More :  एच-1बी वीज़ा पर ट्रंप के आदेश के बाद इमिग्रेशन कंपनियों में खलबली

एच-1बी वीज़ा पर ट्रंप के आदेश के बाद इमिग्रेशन कंपनियों में खलबली

राष्ट्रपति ट्रंप ने एच-1बी वीजा धारकों को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने एच-1बी से जुड़े एक ऐसे अध्यादेश पर हस्ताक्षर किया है। जिसमें यह वीजा रखने वालों को अमेरिका में तभी प्रवेश मिल सकेगा, जब उन्होंने करीब 1 लाख डॉलर या 88 लाख रुपये इसके लिए अतिरिक्त फीस जमा की हो। ट्रंप के इस आदेश के बाद अमेरिकी कंपनियों में भी खलबली मच गई है। ऐसे में अमेरिका के इमिग्रेशन वकीलों और कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को चेतावनी जारी करते कहा कि जो वीज़ा धारक अमेरिका के बाहर हैं। वे तुरंत वापस लौट आएं, नहीं तो 21 सितंबर से लागू होने वाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई घोषणा के चलते वे अमेरिका में फंस सकते हैं या फिर उन्हें दोबारा प्रवेश नहीं मिल पाएगा।

भारत पर भी असर

ट्रंप के इस आदेश का भारत जैसे देशों के उन पेशेवरों पर भी असर पड़ेगा जो एच-1बी वीज़ा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। अब वकीलों और कंपनियों ने चेतावनी दी है कि जो एच-1बी वीज़ा धारक या उनके परिवार के सदस्य अगर काम या छुट्टियों के लिए अभी अमेरिका से बाहर हैं तो वे तुरंत अमेरिका लौट आएं नहीं तो वापसी का रास्ता बंद हो सकता है। खासकर भारत में फंसे एच-1बी धारकों के लिए शायद समय निकल चुका है। क्योंकि कोई भी डायरेक्ट फ्लाइट अब समय पर अमेरिका नहीं पहुंच सकती। लेकिन हो सकता है कि कोई व्यक्ति अभी भी किसी तरह कैलिफोर्निया में 21 सितंबर की मध्यरात्रि से पहले पहुंच जाए।

वकीलों और कंपनियों में खलबली

ट्रंप के आदेश से अमेरिका के इमिग्रेशन वकीलों और कंपनियों में हलचल पैदा कर दी है। प्रसिद्ध इमिग्रेशन वकील साइरस मेहता ने ‘एक्स’ पर कहा कि एच1बी वीज़ा धारक जो अभी अमेरिका से बाहर हैं। चाहे व्यवसायिक दौरे पर या छुट्टी पर, अगर 21 सितंबर की मध्यरात्रि से पहले अमेरिका नहीं लौटे। तो वे फंस सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने एच-1बी कर्मचारियों को चेतावनी दी है। जिसमें कहा गया है कि वे अमेरिका से बाहर न जाएं और अगर बाहर हैं। तो तुरंत लौट आएं। कंपनी ने यह भी कहा कि कर्मचारी अगले आदेश तक अमेरिका में ही रहें ताकि उन्हें वापसी में दिक्कत न हो।

एच-1बी वीज़ा धारक के परिवारों का क्या होगा ?

एच-1बी वीज़ा धारकों के आश्रितों (एच-4 वीज़ा पर अमेरिका में रहने वाले परिवारजन) को भी सलाह दी जा रही है कि वे देश में ही रहें। भले ही राष्ट्रपति की घोषणा में उनके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है। कैटो इंस्टीट्यूटके इमिग्रेशन स्टडीज डायरेक्टर डेविड बीयर ने कहा कि भारतीय एच-1बी वर्कर्स ने अमेरिका में अनगिनत योगदान दिए हैं। इनमें सैकड़ों अरब डॉलर टैक्स में, अरबों डॉलर फीस में, और ट्रिलियनों डॉलर सेवाओं में खर्च किए हैं। ये लोग सबसे शांतिप्रिय, बुद्धिमान और दिलचस्प समुदायों में से हैं, लेकिन बदले में उन्हें क्या मिला ? सिवा बदनामी और भेदभाव के।

21 सितंबर से लागू होगा ट्रंप का यह आदेश

ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणा-पत्र (proclamation) पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके अनुसार अब “स्पेशलिटी ऑक्युपेशन” में काम कर रहे नॉन-इमिग्रेंट्स को तभी अमेरिका में प्रवेश मिलेगा जब उनकी एच-1बी याचिका के साथ $100,000 की अतिरिक्त फीस जमा की गई हो। यह नया नियम 21 सितंबर 2025 को सुबह 12:01 बजे से लागू हो जाएगा।

भारतीयों ग्रीन कार्ड नहीं देने से डेविड बीयर खफा

कैटो इंस्टीट्यूट के इमिग्रेशन स्टडीज निदेशक डेविड बियर ने कहा कि अमेरिका की कानूनी इमिग्रेशन प्रणाली भारतीयों के खिलाफ हर स्तर पर भेदभाव करती है। दशकों से इन्हें ग्रीन कार्ड नहीं दिया जा रहा, सिर्फ इसलिए कि वे कहां पैदा हुए। इन पर ऐसे नियम लागू होते हैं जो न किसी और पर होते हैं। नियोक्ता को नौकरियों का विज्ञापन दूसरों के लिए देना पड़ता है।

भारी फीस और वकील का खर्च उठाना पड़ता है, नौकरी या लोकेशन बदलना बेहद मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि इनके बच्चे जो छोटे उम्र में अमेरिका आए और अब पूरी तरह अमेरिकी हैं। उन्हें कानून कहता है कि वे 18 साल के बाद देश छोड़ दें या ग्रीन कार्ड की ‘लॉटरी’ जीतें और अगर वे जीत भी गए, तो भी अपने माता-पिता की तरह भेदभाव झेलें।

Read More :  आरएसएस नेताओं और शंकराचार्यों से हुई थी यासीन मलिक की मुलाकात

आरएसएस नेताओं और शंकराचार्यों से हुई थी यासीन मलिक की मुलाकात

दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख और दोषी आतंकवादी यासीन मलिक ने हाल ही में अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। इसमें उसने अपने कथित राजनीतिक, धार्मिक और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ाव का विवरण दिया है। मलिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में 25 अगस्त को दाखिल हलफनामे में कहा है कि देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, विदेशी राजनयिकों और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने वर्षों तक उनके साथ बातचीत की थी। उसने यहां तक कहा कि दो अलग-अलग मठों के शंकराचार्य कई बार उसके श्रीनगर स्थित घर आए और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ सार्वजनिक रूप से भी वह दिखाई दिया।

आरएसएस के नेताओं के साथ की बैठक – यासीन मलिक

मलिक का दावा है कि साल 2011 में उसने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं के साथ करीब पांच घंटे लंबी बैठक की थी। यह बैठक सेंटर फॉर डायलॉग एंड रिकॉन्सिलिएशन नामक थिंक टैंक की मदद से हुई थी। उसका कहना है, ”यह सोचने वाली बात है कि इतने गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति से दूरी बनाने के बजाय, समाज के प्रभावशाली लोग उससे खुलकर संवाद करते रहे। वाजपेयी सरकार के ‘रमजान युद्धविराम में भूमिका का हलफनामे में मलिक ने यह भी दावा किया है कि वर्ष 2000-01 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा घोषित रमजान सीजफायर में उसकी अहम भूमिका रही।

उसने कहा कि दिल्ली में उसकी मुलाकात अजीत डोभाल से हुई, जिसने उसे उस समय के खुफिया ब्यूरो प्रमुख श्यामल दत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से मिलवाया। मलिक का कहना है कि वाजपेयी के करीबी आर.के. मिश्रा ने उसे अपने घर बुलाया और ब्रजेश मिश्रा के साथ नाश्ते पर मुलाकात करवाई। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) नेताओं और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल प्रमुख सैयद सलाउद्दीन से संपर्क साधा।

यासीन मलिक ने यह भी कहा कि…….

यासीन मलिक का दावा है कि इसी प्रयास से हुर्रियत नेताओं (अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और अब्दुल गनी लोन) ने युद्धविराम के पक्ष में संयुक्त बयान दिया। यासीन मलिक ने यह भी कहा कि वाजपेयी और तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी उसके प्रयासों के पक्ष में थे और इसी दौरान उस पहली बार पासपोर्ट मिला। 2001 में जारी हुए इस पासपोर्ट के जरिए वह अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब और पाकिस्तान गया और वहां कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के नाम पर अहिंसक लोकतांत्रिक संघर्ष की वकालत की।

मनमोहन सिंह से मुलाकात का दावा – यासीन मलिक

यासीन मलिक ने आगे दावा किया कि फरवरी 2006 में उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने औपचारिक वार्ता के लिए बुलाया। उसके मुताबिक, उस बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत कश्मीर मुद्दे के समाधान की गंभीर कोशिश कर रहा है और उन्होंने आश्वासन दिया था कि मैं इस मुद्दे को हल करना चाहता हूं।

यासीन मलिक को फांसी की सजा – एनआईए

गौरतलब है कि 11 अगस्त को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने यासीन मलिक को आतंकी फंडिंग मामले में मृत्युदंड देने की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यासीन मलिक को चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। सरकार का आरोप है कि मलिक अलगाववाद और आतंकवादी गतिविधियों के जरिए भारत की संप्रभुता को चुनौती देता रहा है और पाकिस्तान समर्थित आतंकियों से उसके गहरे संबंध रहे हैं।

Read More :   रॉयल एनफील्ड की फ्लिपकार्ट पर एंट्री, अब घर बैठे खरीद सकेंगे बुलेट

रॉयल एनफील्ड की फ्लिपकार्ट पर एंट्री, अब घर बैठे खरीद सकेंगे बुलेट

देसी टू-व्हीलर कंपनी रॉयल एनफील्ड ने अपने ग्राहकों के लिए फेस्टिव सीजन से पहले गुड न्यूज दी है। दरअसल, अब 22 सितंबर, 2025 से बेंगलुरु, गुरुग्राम, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई के ग्राहक अपनी पसंदीदा 350cc बाइकें सीधे फ्लिपकार्ट (Flipkart) से घर बैठे खरीद सकते हैं। इनमें बुलेट 350, क्लासिक 350, हंटर 350, गोअन क्लासिक 350 और नई मेटियोर 350 शामिल हैं। डिलीवरी और आफ्टर-सेल्स सर्विस कंपनी के ऑथोराइज्ड डीलरों के जरिए मैनेज की जाएगी।

क्या कहती है कंपनी

इस ऑनलाइन खरीद में फ्लेक्सिबल पेमेंट ऑप्शंस भी मिलेंगे और पूरे जीएसटी (GST) लाभ का फायदा ग्राहकों को सीधे मिलेगा। डिलीवरी और आफ्टर-सेल्स सर्विस कंपनी के ऑथोराइज्ड डीलरों के जरिए मैनेज की जाएगी। जिससे ग्राहकों को पूरी तरह पर्सनल और भरोसेमंद अनुभव मिलेगा। रॉयल एनफील्ड के एमडी और सीईओ बी. गोवेंद्रन ने कहा कि यह पहल डिजिटल-फर्स्ट ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। इससे बाइक खरीदना और भी आसान हो जाएगा।

रॉयल एनफील्ड की पहुंच होगी आसान

रॉयल एनफील्ड की शुरुआत 1901 में हुई थी और 1955 से चेन्नई में मैन्युफैक्चरिंग जारी है। कंपनी की लाइनअप में क्लासिक 650, इंटरसेप्टर 650, हिमालयन 450, स्क्रैम 440 और बुलेट 350 जैसी आइकॉनिक बाइकें शामिल हैं। बता दें कि भारत में कंपनी के 2000 से ज्यादा स्टोर्स हैं और दुनिया भर में 850 से ज्यादा स्टोर्स हैं। अब फ्लिपकार्ट के जरिए यह ब्रांड सीधे ग्राहकों के घर तक पहुंचकर डिजिटल खरीदारी का नया अनुभव दे रहा है।

Read More :   चुनाव आयोग का ऐक्शन, 474 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन किया खत्म

चुनाव आयोग का ऐक्शन, 474 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन किया खत्म

चुनाव आयोग ने गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों पर बड़ा ऐक्शन लिया है। चुनाव आयोग ने ऐसी 474 राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया है। इससे पहले अगस्त में भी चुनाव आयोग ने बड़ा ऐक्शन लिया था और 334 दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के मुताबिक किसी भी पंजीकृत दल को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना होता है। यदि वह लगातार 6 साल तक इलेक्शन से दूर रहता है तो उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है। इसी नियम के तहत इलेक्शन कमिशन ने यह कार्रवाई की है। इस तरह अगस्त से लेकर अब तक 808 पार्टियों का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है।

चुनाव आयोग कर रहा कार्रवाई

किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को टैक्स छूट समेत कई रियायतें मिलती हैं। लेकिन बीते 6 साल से चुनाव ना लड़ने के बाद भी ऐसी रियायतों का लाभ लेते रहने वाले दलों पर ऐक्शन हुआ है। राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन को लेकर जो गाइडलाइंस हैं, उसके मुताबिक यदि कोई दल 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ता है तो फिर उसका पंजीकरण समाप्त किया जा सकता है। 2019 के बाद से ही चुनाव आयोग ऐसे दलों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसी के तहत पहले राउंड में 9 अगस्त को ऐक्शन हुआ था और फिर 18 सितंबर को दूसरा ऐक्शन हुआ। इस तरह दो महीने के अंतराल में ही 808 राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म हुआ है।

चुनाव आयोग के राडार पर और भी राजनीतिक दल

इसके अलावा 359 ऐसे अन्य राजनीतिक दल भी राडार पर हैं, जिन्होंने बीते 6 सालों में चुनाव तो लड़ा है। किंतु बीते तीन सालों से उन्होंने अपनी फाइनेशिंयल ऑडिट की जानकारी नहीं दी है। चुनाव आयोग ने जिन दलों के खिलाफ ऐक्शन लिया है, वे 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हैं। सबसे ज्यादा 121 दल यूपी से पंजीकृत थे। इसके अलावा बिहार के 15, हरियाणा के 17 और मध्य प्रदेश के 23 दल शामिल हैं, जिनका पंजीकरण खत्म हुआ है। महाराष्ट्र के 44 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन समाप्त हुआ है। पंजाब के 21 दलों का पंजीकरण खत्म हुआ है।

Read More :  उदयपुर में मूसलाधार बारिश, हाइवे की सर्विस रोड पर कारें डूबी

उदयपुर में मूसलाधार बारिश, हाइवे की सर्विस रोड पर कारें डूबी

स्टेट हेड – सादिक़ अली, राजस्थान। राजस्थान के उदयपुर जिले में एक नए परिसंचरण तंत्र के प्रभाव से बीते 24 घंटे में अति भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुवार इस नए परिसंचरण तंत्र के कारण बीते 24 घंटे के दौरान राजस्थान के उदयपुर जिले में अतिभारी तथा चित्तौड़गढ़ व प्रतापगढ़ जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई।

एमपी में मानसून की सक्रियता का असर

जाते मानूसन में बरसात का यह दौर 12 दिन बाद लौटा है। इससे पहले 6 सितंबर को बरसात हुई थी। मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता का असर मेवाड़ सहित दक्षिण राजस्थान पर हुआ। सुबह से तीखी धूप और दिन भर आसमान साफ था, लेकिन दोपहर बाद बरसात होने का आभास होने लगा। जिले में शाम होते-होते मौसम पलट गया और कई जगह पर बारिश हुई।

डूबी नजर आई कारें

इसी दौरान राज्य के कुछ अन्य स्थानों पर भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। पश्चिमी राजस्थान में मौसम शुष्क रहा। सर्वाधिक 117.0 मिलीमीटर बारिश मावली (उदयपुर) में हुई। शहर के देहलीगेट, बापूबाजार, फतहपुरा, आरके सर्कल, शोभागपुरा, केशवनगर, रूपसागर रोड, आरटीओ रोड आदि क्षेत्रों में तेज बरसात की जानकारी मिली। ट्रांसपोर्ट नगर के पास पेसेफिक यूनिवर्सिटी मेन रोड पर एकाएक भरे पानी से यहां खड़ी कारें डूबी नजर आईं।

22 सितंबर तक इन जिलों में हो सकती है बारिश

चूरू में अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस तंत्र के प्रभाव से 22 सितंबर तक भरतपुर, कोटा, उदयपुर और जयपुर संभाग के कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग के अधिकांश भागों में आगामी दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क बने रहने की प्रबल संभावना है।

Read More :  राहुल गांधी के खुलासे की वजह से परेशान हुआ युवक, बंद करना पड़ा फोन