Friday, April 3, 2026
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सिद्धारमैया की पत्नी से जुड़े केस में सीजेआई गवई को ईडी पर आया गुस्सा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को फटकार लगाते हुए कहा कि कानूनी कार्यवाही के जरिए राजनीतिक लड़ाई लड़ने का प्रयास न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला रद्द किए जाने पर ईडी की आपत्ति को लेकर नाराजगी जाहिर की है। ईडी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन इस दौरान मुख्य न्यायाधीश गवई काफी नाराज हो गए। तब ईडी की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील रखी और सीजेआई गवई ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि आपने हमें ईडी पर कठोर टिप्पणियां करने से बचा लिया।

राजनीतिक लड़ाई में आपका इस्तेमाल क्यों

यह मामला मैसुरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) में धन शोधन से जुड़ा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 7 मार्च को सिद्धरमैया की पत्नी बीएम पार्वती और कर्नाटक अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्टर बायरथी सुरेश के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यहा फैसला सुनाया, जिसे ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश गवई की बेंच मामले में सुनवाई कर रही थी। सीजेआई बीआर गवई ने ईडी से कहा कि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। राजनीतिक लड़ाई में आपका इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है ?

ईडी के बारे में बहुत कठोर कहना पड़ेगा – सीजेआई गवई

वही जस्टिस गवई ने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश महाराष्ट्र में मेरे ईडी के साथ कुछ ऐसे अनुभव रहे हैं। कृपा हमें कुछ कहने के लिए मजबूर न करें, वरना हमें ईडी के बारे में कुछ बहुत कठोर कहना पड़ेगा। ईडी की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद उन्होंने अपील वापस लेने की बात कही। सीजेआई गवई ने इस पर कहा हमें सिंगल जज के दृष्टिकोण में कोई त्रुटि नजर नहीं आ रही है। इसलिए हम ईडी की अपील को खारिज करते हैं। सीजेआई गवई ने कहा हमें एएसजी राजू का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने हमें कठोर टिप्पणियां करने से बचा लिया।

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4 साल की बच्ची से रेप के बाद स्कूल बंद, प्रबंधक फरार और आरोपी को जेल

राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर में चार साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने आरोपित स्कूली वैन चालक आरिफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं आरोपित प्रबंधक संदीप कुमार स्कूल बंद कर फरार हो गया। बच्ची की मां ने प्रबंधक पर भी साजिश का आरोप लगाया है। आरोप है कि उनकी शिकायत के बाद भी दो दिन तक प्रबंधक और प्रिंसिपल मामला दबाए रहे। पीड़िता की मां का आरोप है कि उन्होंने ड्राइवर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

विरोध पर स्कूल की बदनामी का हवाला देते हुए बेटे के अपहरण तक की धमकी दी थी। इंस्पेक्टर इंदिरानगर सुनील तिवारी ने बताया कि प्रबंधक को बयान दर्ज कराने के लिए मैसेज भेजा गया पर वह अभी तक थाने नहीं आए हैं। उनकी तलाश की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ चालक के खिलाफ दुष्कर्म पॉक्सो और एससी एसटी एक्ट, धमकी का मुकदमा दर्ज है।

प्रबंधन और वैन चालक का हो रहा विरोध

बच्ची की मां ने प्रबंधक पर भी धमकी समेत अन्य आरोप लगाए हैं। दोपहर पुलिस ने बच्ची का कोर्ट के समक्ष बयान दर्ज कराया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बच्ची ने बताया कि ड्राइवर अंकल उसे अपने पास आगे बैठाते थे। वह गंदी हरकत करते थे। बच्ची ने एफआईआर की बातों का समर्थन किया। उधर इंदिरा नगर मुंशी पुलिया के पास स्थित स्कूल भी बंद रहा। स्कूल के आस पास सन्नाटा पसरा रहा। आस पड़ोस के लोग भी बच्ची के साथ हुई गंदी हरकत के विरोध में प्रबंधन और वैन चालक को भला बुरा कह रहे थे। स्कूल से घर छोड़ने के दौरान वैन चालक ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के प्राइवेट पार्ट में जख्म हो गया था। घर पहुंचने और दर्द होने पर उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी थी।

मां ने प्रिंसिपल से की थी शिकायत

मां ने स्कूल पहुंचकर इसकी प्रिंसिपल से शिकायत की थी। मां का आरोप है कि इसके बाद भी प्रिंसिपल ने कोई सुनवाई नहीं की और टाल मटोल करने लगी। बेटी को अस्पताल लेकर पहुंची डॉक्टरों ने प्राइवेट पार्ट में जख्म की पुष्टि की। इलाज कराया अगले दिन प्रबंधक संदीप कुमार के पास पहुंचकर शिकायत की। उन्होंने स्कूल की बदनामी का हवाला देते हुए पुलिस में शिकायत करने से मना किया और कहा कि वह खुद चालक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। 17 सितंबर को बुलाया पहुंची तो प्रबंधक ने धमकी दी कहा कि अगर पुलिस में शिकायत की तो बच्ची को गायब कर दूंगा। अंजाम बुरा होगा उसकी जिम्मेदार खुद होगी। घटना की तहरीर इंदिरानगर थाने में दी। पुलिस ने आरोपित चालक आरिफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस उपायुक्त पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि चालक आरिफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वह लवकुश नगर आम्रपाली के पास का रहने वाला है।

बच्ची पर थी गलत निगाह

पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि आरिफ बेटी पर गलत निगाह रखता था। घर से स्कूल करीब आठ किमी है। वह रोजाना बेटी को लेने और छोड़ने आता था। बेटी ने बताया कि ड्राइवर उसे आगे अपनी सीट के बगल में बैठा कर लाता और ले जाता था। रास्ते में बेटी से छेड़छाड़ और बैड टच करते हुए आता-जाता था। बेटी के मना करने पर उसे पीटता, धमकाता था।

मना करने पर भी बच्ची को छोड़ने आता था

पुलिस की पूछताछ में पीड़ित मां के मुताबिक एक हफ्ते से वैन चालक बेटी को लेने आता था। वैन स्कूल प्रबंधक संदीप कुमार ने ही लगवाई थी। जबकि तय यह हुआ था कि चालक सिर्फ बेटी को घर से स्कूल ले जाने के लिए आएगा। दोपहर उसे स्कूल से घर नहीं लाएगा। इसके बाद भी वह घर लेकर बेटी को आता था। जब छुट्टी होने को थी तो चालक आरिफ को फोन कर कहा था कि वह बच्ची को लेकर न आए। क्योंकि वह खुद स्कूल आ रही हैं। इसके बाद भी वह नहीं माना और बच्ची को लेकर स्कूल से घर के लिए चल दिया। रास्ते में उसने गंदी हरकत की।

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मॉनसून सत्र में ही आएगा जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ?

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है और इस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव भी लाया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि 21 अगस्त तक चलने वाले सत्र में कुल 21 दिन तक सदन चलेगा। इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर भी चर्चा होगी। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा के मानसून सत्र में सरकार लेकर आएगी। इस प्रस्ताव पर अब तक 100 से ज्यादा सांसद अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। कांग्रेस के 40 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं।

पहलगाम हमले पर नियमानुसार होगी चर्चा

पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा को लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा “हम सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। चाहे पहलगाम हमला हो या ऑपरेशन सिंदूर, लेकिन नियम के अनुसार चर्चा होगी। हमने विपक्ष के सारे लोगों के सुझाव सुने हैं।” हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का कई बार दावा किया है। इस पर चर्चा के सवाल पर उन्होंने कहा कि विदेशी नेताओं के बयान पर सदन में चर्चा का सवाल ही नहीं है।

सांसदों ने किए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर

सूत्रों के मुताबिक सरकार की तरफ से सभी पार्टियों को एक कोटा दिया गया था और उस कोटे में किस पार्टी से कितने सांसद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकते हैं उसकी संख्या तय की गई थी। कांग्रेस पार्टी के 40 सांसदों को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने थे और सभी सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सभी पार्टियों को हस्ताक्षर कर संसदीय राज्य मंत्री को सौंपने थे। महाभियोग लाने के लिए लोकसभा में 100 और राज्य सभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर चाहिए होते हैं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि लोकसभा के 100 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

सर्वदलीय बैठक में 40 नेता शामिल

किरण रिजिजू ने बताया “आज बैठक में 51 पार्टी के तरफ से 40 लोग शामिल हुए। उन्होंने अपने-अपने विचार रखे। हमने आग्रह किया है कि सदन सही से चले ये सबकी जिम्मेदारी है। यह पक्ष-विपक्ष दोनों का विषय है। छोटी पार्टियों को ज्यादा समय मिले। इसकी बात हम बीएसी की बैठक में रखेंगे। नियम के तहत हर विषय को लेकर चर्चा की जाएगी।” सदन में पीएम मोदी की मौजूदगी को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा सदन में होते हैं। सिर्फ विदेश दौरे के दौरान या कोई विशेष होने पर ही नहीं होते हैं। हर समय पीएम को घसीटना अच्छी बात नहीं है, जिसके विभाग की चर्चा होती है, उस दौरान वे मंत्री होते ही हैं।

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छांगुर मामले में एक और गिरफ्तारी, सीजेएम कोर्ट का क्लर्क गिरफ्तार

अवैध धर्मांतरण से जुटे मामले की जांच कर रही यूपी एटीएस की टीम ने बलरामपुर जिला एवं सत्र न्यायालय के एक क्लर्क को गिरफ्तार किया है। आरोपी का नाम राजेश उपाध्याय है। राजेश की पत्नी के तार छांगुर बाबा से जुड़े हुए हैं। इसी वजह से राजेश को गिरफ्तार किया गया है। यूपी एटीएस के मुताबिक नवीन रोहरा और छांगुर ने महाराष्ट्र के पुणे जिले में कुनेनामा गांव में सोलह करोड़ रुपये की जमीन खरीदी थी। जमीन खरीद के एग्रीमेंट में जमीन से मिलने वाले मुनाफे में संगीता देवी का भी हिस्सा था।

संगीता सीजीएम बलरामपुर के ऑफिस में क्लर्क राजेश उपाध्याय की पत्नी हैं। इसी वजह से राजेश की गिरफ्तारी हुई है। छांगुर और उसके गैंग मेंबर्स के जमीन खरीद-फरोख्त मामले में एटीएस को राजेश उपाध्याय का भी हाथ मिला है। इसके बाद राजेश के खिलाफ कार्रवाई की गई है। एटीएस छांगुर मामले में अब तक आठ गिरफ्तारियां कर चुकी है।

स्विट्जरलैंड में था नीतू का बैंक अकाउंट

स्विट्जरलैंड में नीतू के नाम पर बैंक अकाउंट का खुलासा हुआ है। धर्मांतरण के नाम पर शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई के अलावा भारत में इक्कठा किए गए करोड़ो रुपये स्विट्जरलैंड में भेजे गए थे। छांगुर बाबा ने नीतू और नवीन के अलावा कई अन्य करीबियों के नाम पर और दर्जनों शेल कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले थे। इन्हीं बैंक अकाउंट के जरिए करोड़ों रुपये स्विट्जरलैंड ट्रांसफर किए गए। छांगुर का पनामा से अभी तक कोई सीधा कनेक्शन सामने नहीं आया है। अब तक 22 बैंक खातों में 60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं। 40 करोड़ की 10 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं।

छांगुर मामले में कब-कब हुई गिरफ्तारी

एटीएस ने सबसे पहले अवैध धर्मांतरण मामले में अप्रैल में छांगुर के बेटे महबूब और नवीन उर्फ जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पाँच जुलाई को यूपी एटीएस ने लखनऊ के एक होटल से छांगुर और नीतू उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया। 18 जुलाई को बलरामपुर से रशीद पकड़ा गया। 19 जुलाई को शहाबुद्दीन और मो सबरोज को गिरफ्तार किया गया। अब 21 जुलाई को राजेश उपाध्याय की गिरफ्तारी हुई है।

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कांवड़ियों पर फूल,उपद्रवियों पर डंडा,सीएम योगी की कड़ी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के मेरठ में कांवड़ियों पर फूल बरसाने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने असामाजिक तत्वों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा पूरी होने के बाद उन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने इसमें बाधा पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या भड़काई पोस्ट शेयर करने वाले लोगों के खिलाफ भी सरकार कार्रवाई करेगी।

इस बीच उन्होंने कांवड़ियों से सड़क और नदी साफ रखने की अपील की। कावड़ यात्रियों पर फूल बरसाने के बाद सीएम योगी ने कहा “हरिद्वार से गंगाजल लाने वालों का मैं स्वागत करता हूं। कावड़ यात्रा में युवा हैं, बच्चे हैं, सब आस्था के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इनका अभिनंदन होना चाहिए।

भक्ति को बदनाम करने की कर रहे कोशिश – सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि कांवड़ यात्रियों की सेवा के लिए कई सामाजिक संगठनों ने भी व्यवस्था की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा “हमें ध्यान रखना होगा कि इस उमंग और भक्ति को बदनाम करने के लिए कुछ तत्व प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसा किया जा रहा है। कुछ लोग उपद्रव कर रहे हैं और कावड़ यात्रा कि आड़ में छुपे हुए हैं, उन्हें बेनकाब करें। जो लोग शिव की भक्ति में लीन है। उनसे मेरा ये भी अनुरोध है कि वो दूसरों की परेशानी को भी समझें। कोई नदी या सड़क गंदी ना करें। कोई अगर आपकी कांवड़ को खंडित करता है तो आप पुलिस को सूचित करें।”

यात्रा को बदनाम करने वालों पर होगी कार्रवाई – सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों ने कावड़ यात्रा को बदनाम किया है, उनके सीसीटीवी वीडियो सरकार के पास हैं। कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद सबके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी। उपद्रवियों के पोस्टर कावड़ यात्रा के बाद चस्पा किए जाएंगे और सबका हिसाब होगा।

सीआरपीएफ जवान पर हमला करने वाले कांवड़िए गिरफ्तार

मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन टिकट को लेकर हुए विवाद के बाद सीआरपीएफ के एक जवान पर हमला करने के आरोप में तीन कांवड़ियों को गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का जवान ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस पकड़ने जा रहा था, जबकि कांवड़िये (भगवान शिव के भक्त) भी झारखंड के बैद्यनाथ धाम जाने के लिए उसी ट्रेन का टिकट खरीदना चाहते थे।

टिकट खरीदने को लेकर उनके बीच बहस हो गई। मौके पर तैनात जीआरपी जवानों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और बाद में सीआरपीएफ जवान की मदद के लिए और बल भेजा गया। जीआरपी ने बताया कि सीआरपीएफ जवान अपनी ड्यूटी के लिए मणिपुर जा रहा था और उन्होंने ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस में उसकी यात्रा में मदद की। जीआरपी ने कांवड़ियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जमानत पर रिहा कर दिया।

read more : महिला आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन रही योगी सरकार

महिला आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन रही योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य सरकार महिला आर्थिक सशक्तीकरण में भी शानदार प्रयास कर रही है। महिला आर्थिक सश्क्तीकरण (WEE) सूचकांक में लखनऊ, वाराणसी, झांसी, गौतमबुद्धनगर, प्रयागराज शीर्ष पर हैं। उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा, कौशल, सुरक्षा और सुरक्षा-परिवहन के आधार पर 75 जिलों का विश्लेषण किया गया है। 49 संकेतकों और 15 विभागों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट से महिला आर्थिक सशक्तीकरण की एक नई तस्वीर सामने आई है।

तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में भागीदारी बढ़ी

महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे निकलकर को नेतृत्व और स्वरोजगार को अपना रही हैं और इसमें सफलता भी मिल रही है। उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती में महिलाओं को प्राथमिकता मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। चैंपियन जिलों में सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और मजबूत संरचनात्मक समर्थन ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

शिक्षा, सुरक्षा और परिवहन में सुधार हो रहा है। तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों में महिलाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। मिशन शक्ति जैसे अभियानों ने सुरक्षा और सामाजिक चेतना को बढ़ावा दिया है।

महिला भागीदारी बढ़ी

‘चैंपियन’ जिलों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी, झांसी, सुलतानपुर, गौतमबुद्ध नगर, प्रयागराज, अयोध्या, सोनभद्र, रायबरेली, गोरखपुर, देवरिया, अम्बेडकरनगर, आगरा और गाजियाबाद जैसे जिले ‘चैंपियन’ श्रेणी में शामिल हैं। ODOP, उज्जवला, मिशन शक्ति जैसी योजनाओं से तस्वीर बदली है।

क्या है महिला आर्थिक सश्क्तीकरण सूचकांक ?

महिला आर्थिक सश्क्तीकरण सूचकांक (WEE) सूचकांक एक डेटा आधारित टूल है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि राज्य के किन जिलों में महिलाएं सरकारी योजनाओं और संसाधनों का सही लाभ उठा पा रही हैं और कहां योजनाएं सिर्फ फाइलों तक ही सिमटी हैं।

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read more :  लखनऊ में धर्म परिवर्तन का गंदा खेल, पत्नी और साली को भगा ले गया युवक

लखनऊ में धर्म परिवर्तन का गंदा खेल, पत्नी और साली को भगा ले गया युवक

यूपी की राजधानी लखनऊ में धर्म परिवर्तन का गंदा खेल खेलने वाले एक शख्स का पता लगा है। मामला मड़ियाव का है। लखनऊ में मड़ियांव निवासी एक निजी कंपनी कर्मी से उसके परिचित मौलाना सलमान ने दोस्ती बढ़ाई, विश्वास जीता। उसकी अनुपस्थिति में घर आने जाने लगा। इस बीच दोस्त की पत्नी और साली को इस्लामिक शिक्षा देने लगा, कलमा पढ़ाकर धर्मांतरण भी करा दिया। इसके बाद पत्नी, साली और पांच साल की बेटी लेकर फरार हो गया। यह आरोप लगाते हुए निजी कंपनी कर्मी ने मौलाना सलमान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने चारों की तलाश में दो टीमें गठित की हैं।

पीड़ित निजी कंपनी का कर्मी

पीड़ित के मुताबिक वह निजी कंपनी कर्मी है। कुछ महीने पहले उसकी मुलाकात सीतापुर सिधौली के जयरामपुर में रहने वाले सलमान शेख से हुई थी। दोस्ती बढ़ी तो वह घर भी आने-जाने लगा। पीड़ित के मुताबिक कई बार तो जब वह काम पर होता था तब भी सलमान घर आकर घंटों बैठा रहता था। सलमान के घर आने के कारण पत्नी और साली का रवैया बदल गया। वह पूजा पाठ में मन नहीं लगाती थी। वह अकसर इस्लामिक बाते करती थी। कलमा पढ़ती थी। विरोध पर वह झगड़ने लगती थी।

यह रवैया देखकर सलमान को घर आने से रोका। पीड़ित के मुताबिक सलमान घर आकर पत्नी और साली को इस्लामिक शिक्षा देता था। एक हफ्ते पहले काम पर से घर लौटा तो पत्नी, साली और बेटी नहीं थी। अलमारी खुली पड़ी थी। बक्सों का सामान बाहर पड़ा था। अलमारी में रखे जेवर और नकदी गायब थी। पत्नी, साली और सलमान को फोन किया तो वह स्विच ऑफ। मोहल्ले वालों से पूछा तो पता चला कि सलमान के साथ वह जाते दिखी थी। इसके बाद मड़ियांव थाने में तहरीर दी।

धर्म परिवर्तन कराकर अपने साथ ले गया

पीड़ित के मुताबिक, सलमान पत्नी, साली और बेटी का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें अपने साथ ले गया। इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा ने बताया कि सलमान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सलमान के अलावा दोनों महिलाओं और बच्ची की तलाश की जा रही है। सर्विलांस समेत दो टीमें लगाई गई हैं।दरगाह और मजारों पर ले जाकर करता था माइंडवाशपीड़ित का आरोप है की उसकी अनुपस्थिति में जब सलमान घर आता था। तो वह पत्नी, साली और बेटी को दरगाह और मजारों पर ले जाता था। सलमान पत्नी और साली को इस्लामिक शिक्षा देने के मजार और दरगाह पर ले जाकर उनका माइंडवाश करता था। इस लिए वह घर लौटने पर भी पूजा पाठ में मन नहीं लाती और नमाज, दरगाह और मजारों की बात करती थी। कई बार डांटा तो वह नाराज हो जाती थी।

सामने आया था छांगुर बाबा का मामला

छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन को एटीएस ने लखनऊ से गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों का अवैध धर्मांतरण कराया है। छांगुर बाबा लव जिहाद बिग्रेड चला रहा था। छांगुर ने रशीद नाम के शख्स को लव जिहाद बिग्रेड का कमांडर बनाया था। रशीद छांगुर का गाजी था। छांगुर उसे गाजी कहकर ही बुलाता था। रशीद धर्मांतरण के लिए गाजी का काम कर रहा था।

सीएम योगी का भी बयान आया था सामने

इस बाबा को लेकर सीएम योगी का भी बयान सामने आया था। सीएम योगी ने कहा था कि आपने देखा होगा किस प्रकार की साजिशें हो रही हैं। अभी बलरामपुर में हम लोगों ने बड़ी कार्रवाई को आगे बढ़ाया। आपने देखा होगा, उसने रेट तय किए, धर्मांतरण के कार्यक्रम को कैसे आगे बढ़ाना है। हिंदुओं में, ब्राह्मणों में, क्षत्रियों में, सिखों में, ओबीसी जातियों में, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों में, लोगों को कैसे धर्मांतरण करना है। सबके रेट उसने तय किए हुए थे।

विदेशों से धनराशि आ रही थीं। वही अब इस मामले में पुलिस की एक टीम सलमान के सीतापुर स्थित घर पर पहुंची। वहां उसके परिवारीजनों और रिश्तेदारों से बातचीत कर ब्योरा जुटा रही है। इस संबंध में पुलिस सलमान और उनके परिवारीजनों का छांगुर व धर्मांतरण गिरोह का कनेक्शन भी खंगाल रही है।

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कैसे दोस्त से जानी दुश्मन बना शेरू ? जानें कहानी चंदन मिश्रा की

बिहार में इन दिनों चंदन मिश्रा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वजह है चंदन मिश्रा की हत्या। चंदन मिश्रा गैंगस्टर हुआ करता था, लेकिन पटना के पारस अस्पताल में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। चंदन की हत्या किसी जमाने में उसके ही दोस्त रह चुके शेरू ने करवाई। ये हत्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अपराधियों ने खुलेआम अस्पताल में फायरिंग की और फिर हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। चंदन मिश्रा बचपन से ही अपराध की दुनिया में संलिप्त रहा है। आइये जानते हैं चंदन के पहले अपराध से लेकर उसकी हत्या तक की कहानी।

12 साल में पहला मर्डर

दरअसल, कहानी की शुरुआत साल 2007 से होती है, जब चंदन मिश्रा की उम्र सिर्फ 12 साल थी। उसके पिता मंटू मिश्रा उस समय पंचायत के मुखिया थे। इसी समय क्रिकेट खेलने के दौरान चंदन का झगड़ा अपने एक पाटीदार शशिकांत से हो गया। शशिकांत ने चंदन के मुखिया पिता को चोर और भ्रष्ट कह दिया था। इसके बाद चंदन अपने घर गया, पिता का लाइसेंसी हथियार लिया और शशिकांत को गोली मार दी, जिससे शशिकांत की मौत हो गई। घटना के बाद शशिकांत के भाइयों ने चंदन को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। हालांकि शशिकांत की मां ने चंदन को बचा लिया। चंदन इकलौता बेटा था, यह कहकर शशिकांत की मां ने उसे बचा लिया। अन्यथा उसी दिन चंदन मिश्रा मारा जाता।

चंदन मिश्रा और शेरू की दोस्ती

चंदन के बचने के बाद पिता मंटू मिश्रा उसे थाने ले गए और पुलिस के हवाले कर दिया। नाबालिग होने की वजह से चंदन को रिमांड होम भेजा गया। यहां चंदन ढाई साल तक यहां हिरासत में रहा। हिरासत में शेरू सिंह से उसकी दोस्ती हुई थी, जिसे एक व्यक्ति की बेटी के साथ छेड़खानी के आरोप में रिमांड पर लाया गया था। यहां लाए जाने से पहले शेरू को इतना पीटा गया था कि रिमांड में उसकी तबीयत काफी खराब हो गई थी। उसका चलना-फिरना तक मुश्किल था। इस दौरान चंदन ने शेरू की काफी मदद और देखभाल की।

शेरू ने चंदन मिश्रा के दिमाग में भरी जातीय नफरत

दरअसल, कुछ दिन पहले जब ये दोनों हिरासत में थे, उस दौरान खरहाटांड़ के सरपंच संतोष ओझा की हत्या हो गयी थी। यादव और मुस्लिम अपराधियों ने संतोष ओझा की हत्या की थी। राजपूत समाज से आने वाले शेरू ने उसी समय ब्राह्मण समाज के व्यक्ति संतोष ओझा की हत्या को लेकर चंदन के दिमाग में जातीय नफरत भड़काने की कोशिश की। शेरू ने चंदन को कहा कि आपके समाज के एक अच्छे व्यक्ति को मार दिया, इसका जवाब देना चाहिए। इसलिए हिरासत से निकलते ही एक दिन में दोनों ने तीन हत्याएं कीं। नौशाद मुखिया का नाम संतोष ओझा की हत्या में साजिशकर्ता के तौर पर आ रहा था। इसी तरह सेमरी के प्रमुख सुरेश खरवार और इस्लाम मियां की भूमिका भी सामने आयी थी। चन्दन और शेरू ने एक दिन में ही तीनों की हत्या कर दी।

एक ही दिन में तीन हत्याएं

रिमांड के दौरान चंदन के पिता मंटू मिश्रा ने भी शेरू की काफी मदद की। कानूनी लड़ाई में भी उसका साथ दिया। दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। इसी दौरान शेरू ने वहां भागने की योजना बनाई। चन्दन को भी इसके लिए तैयार किया और दोनों रिहाई के सिर्फ दो दिन पहले रिमांड होम से भाग गए। फरार होने के कुछ ही दिन बाद दोनों ने एक ही दिन में तीन हत्याएं की। दोनों ने मिलकर नौशाद मुखिया, इस्लाम मियां का लड़का और सुरेश खरवार इन तीनों की हत्या सिर्फ एक दिन में कर दी। तीनों से इनका कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था।

चंदन मिश्रा और शेरू में बढ़ी दूरियां

इसी समय शेरू का किसी बात को लेकर चंदन मिश्रा से विवाद हो गया। उम्र और क्राइम की दुनिया में शेरू जूनियर था और चंदन सीनियर था। 2014 में शुरू हुआ विवाद आगे बढ़ता गया। शेरू को एक हत्या मामले में पहले फांसी और फिर आजीवन कारावास की सजा हुई, जबकि चंदन को आजीवन कारावास की सजा हुई। चंदन के परिवार के अनुसार चंदन पर जेल में रहते कोई हत्या का आरोप नहीं लगा था। उसे उम्मीद थी कि उम्रकैद की सजा पूरी कर लेने के बाद वो रिहा हो जायेगा।

वर्चस्व बना चंदन पर हमले की वजह

हाल ही में अपने पिता और खुद के इलाज को लेकर ज़ब चंदन पैरोल पर बाहर आया, तो शेरू को लगा कि यदि ये बाहर आ गया तो फिर उसका वर्चस्व खत्म हो जायेगा। चंदन के रील और वीडियो देखकर उसे इस बात का और एहसास हुआ। पैरोल के दौरान चंदन के साथ काफी संख्या में लोग मिलने आ रहे थे, जिसका वीडियो भी सामने आ रहा था। चंदन के गांव से सिर्फ 2 किमी दूर शेरू का गांव था। पुरुलिया जेल में उसे सब जानकारी हो रही थी।

चंदन मिश्रा के पिताजी को लीवर की प्रॉब्लम थी। एम्स अस्पताल में पिता का इलाज कराने के बाद चंदन अपना इलाज पारस में कराने आया था। डॉक्टर पिंटू ने चंदन का ऑपरेशन किया था। 16 जुलाई को उसे रिलीज होना था, लेकिन डॉक्टर पिंटू ने कहा कि एक दिन और रुक जाएं, 17 जुलाई को रिलीज कर देंगे। चंदन को पेरोल खत्म होने पर 18 जुलाई को जेल में हाजिर भी होना था।

हलवदार और सिपाही की हत्या

उस समय से हत्या का जो सिलसिला चालू हुआ वो 7-8 महीने तक लगातार चलता रहा। एक साल बाद दोनों कोलकाता में पकड़े गए और फिर दोनों बक्सर जेल आ गए। कुछ समय बाद पेशी के दौरान शेरू ने कोर्ट में हवलदार को गोली मार दी और भाग गया, लेकिन चंदन जेल में ही रह गया। शेरू ने जेल से भागने के बाद आरा में एक व्यक्ति की हत्या कर दी। ये वही व्यक्ति था, जिसने अपनी बेटी से छेड़खानी के आरोप में शेरू की पिटाई की थी और वो रिमांड होम भेजा गया था।

दूसरी तरफ चंदन मिश्रा यहां से अपने परिवार के करीब होता गया। जेल में परिवार के लोग उससे आकर मिलते रहे। कुछ दिन बाद शेरू आरा में पकड़ा गया और आरा जेल में शिफ्ट हुआ। यहां शेरू ने जेल गेट पर तैनात एक सिपाही की हत्या करा दी। उस सिपाही की वजह से उसे मोबाइल का इस्तेमाल करने में काफी दिक्कत हो रही थी। इसके बाद शेरू को भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया।

हत्या से पहले चंदन मिश्रा को किया वीडियो कॉल

शेरू ने सबसे पहले चंदन मिश्रा का भरोसा जीतने की योजना बनाई। जब जेल से चंदन निकला तो शेरू ने चंदन को वीडियो कॉल किया। शेरू ने कहा- “का बाबा तू बड़ी घूम तार, पटना हम ना घूमेम, हम अंदरे रहेम? (आप बाहर घूम रहे हैं हैं, पटना हम नहीं घूमेंगे, हम अंदर ही रहेंगे?)। इसके बाद 15 जुलाई को जिस दिन चंदन का ऑपरेशन हुआ था, उस दिन भी शेरू ने वीडियो कॉल किया।

शेरू ने इस दिन अपनी पत्नी से भी चंदन मिश्रा की बात करवाई, फिर बेटे को भी कॉल पर जोड़ा। शेरू ने कहा बेटा के भी आशीर्वाद दे दीं। चंदन ने उस दिन शेरू से कहा तुम भी बाहर जब निकलोगे। हम लोगों को जो करना था वो हमने कर लिया, अब ये सब छोड़ देना है। अब आगे का जो काम है वह करना है। चंदन के करीबी लोगों का कहना है कि शेरू ने हत्या से पहले चंदन का भरोसा जीतने की कोशिश की।

सुपारी देकर करवाई चंदन मिश्रा की हत्या

चंदन मिश्रा के परिवार के अनुसार शेरू ने 10 लाख में तौसीफ को सुपारी दी थी। शेरू ने बक्सर के अपने 3 लड़के भी तौसीफ को दिए थे। तौसीफ़ ने अपने 2 लड़कों को साथ रखा। चंदन के परिवार के अनुसार चंदन को 32 गोली मारी गई थी। हॉस्पिटल में कमरे का गेट अंदर से लॉक नहीं होता था। इस वजह से सभी आरोपी अस्पताल के कमरे में घुसे और चंदन की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। आरोपियों की तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

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इजरायल ने सीरिया पर दागीं मिसाइलें तो भड़क गए राष्ट्रपति अल-शरा

इजरायल की ओर से किए जा रहे एयरस्ट्राइक के बीच सीरिया के कार्यकारी राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने हमारे ड्रूज लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया है कि उसे बख्शा नहीं जाएगा। दमिश्क में सीरियाई सेना के मुख्यालय के एंट्री गेट पर हमला करने के एक दिन बाद ड्रूज नागरिकों को संबोधित करते हुए अहमद अल-शरा ने कहा कि इजरायल हमारे समाज को तोड़ने में लगा हुआ है, लेकिन सीरिया में ये कर पाना किसी भी देश के लिए आसान नहीं है।

युद्ध से नहीं डरते, खतरा हुआ तो लड़ेंगे – राष्ट्रपति अल-शरा

राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा कि हम उन लोगों में से नहीं हैं जो युद्ध से डरते हैं। हमने अपना जीवन चुनौतियों का सामना करने और अपने लोगों की रक्षा करने में बिताया है। हमने सीरियाई लोगों के हित को मौत और विनाश से ऊपर रखा है। अगर हमारे लोगों की गरिमा को खतरा हुआ तो लड़ेंगे। हम ड्रूज क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी बुजुर्गों और स्थानीय गुटों को सौंप रहे हैं। सीरिया के कार्यकारी राष्ट्रपति ने कहा कि इजरायली सेना ने यहां के नागरिकों और सरकारी सुविधाओं को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया, जिससे स्थिति बड़े पैमाने पर बिगड़ गई। हालांकि अमेरिका, तुर्किए और अरब देशों की मध्यस्थता के हस्तक्षेप से यह क्षेत्र बच गया।

सीरिया को अराजकता में बदलना चाहता है इजरायल

सीरिया के राष्ट्रपति अल-शरा कहा कि इजरायल हमारी जमीन को अराजकता के अखाड़े में बदलना चाहता है। हम इस धरती के बच्चे हैं और इजरायल की कोशिशों को नाकाम करने में सक्षम हैं। हम उन लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने हमारे ड्रूज लोगों को नुकसान पहुंचाया है। उनके अधिकारों की रक्षा हमारी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। सीरिया के दक्षिणी प्रांत सुवैदा में अंतरिम अधिकारियों और ड्रूज समुदाय के बीच एक नया युद्ध विराम समझौता हुआ। इसके बाद सीरिया ने सुवैदा शहर से अपनी सेना को वापस बुलाना शुरू कर दिया।

ड्रूज लड़ाकों और सीरियाई अंतरिम सरकार के बलों के बीच हिंसक झड़पों के बीच इजरायल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स से 50 से अधिक ड्रूज नागरिक दक्षिणी सीरिया में दाखिल हो गए। यह घटना लेबनान के ड्रूज समुदाय की ओर से सोशल मीडिया पर सीरिया के दक्षिणी प्रांत सुवैदा में अपने समुदाय के समर्थन में की गई अपील के बाद हुई।

सैनिकों और आम नागरिकों की हुई मौत – राष्ट्रपति अल-शरा

इजरायल ने सीरिया के सुवैदा शहर और उसके आसपास सीरियाई सेना के काफिलों पर हवाई हमले किए, जिसमें कई सैनिक मारे गए और घायल हुए। इससे स्थानीय ड्रूज सशस्त्र समूहों, बेडौइन जनजातियों और सीरियाई अंतरिम सरकार की सेनाओं के बीच चल रही झड़पें और तेज हो गईं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने स्वेदा क्षेत्र में सीरियाई सेना और हथियारों पर हमले का आदेश दिया है। क्योंकि सीरियाई सरकार इनका इस्तेमाल ड्रूज समुदाय के खिलाफ करने की योजना बना रही थी। सीरिया ने इजरायल की इस कार्रवाई की निंदा की है और कहा कि इन हमलों में सैनिकों और आम नागरिकों की मौत हुई है।

read more : पायलट को गलत बताने वाली रिपोर्ट पर भड़का इंडियन पायलट फेडरेशन

पायलट को गलत बताने वाली रिपोर्ट पर भड़का इंडियन पायलट फेडरेशन

अहमदाबाद विमान हादसे के लिए पायलट को जिम्मेदार ठहराने वाली रिपोर्ट पर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने नाराजगी जताई है। संगठन के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने गुरुवार को इस मीडिया रिपोर्ट की आलोचना की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले महीने अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के विमान के कैप्टन ने जानबूझकर इंजन का ईंधन बंद कर दिया था। कैप्टन रंधावा ने इन दावों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और मीडिया संस्थान के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।

कैप्टन सी.एस. रंधावा ने इस बात पर जोर दिया कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि किसी पायलट ने इंजन तक तेल पहुंचाने वाला स्विच बंद किया था। कैप्टन सीएस रंधावा ने बताया, “रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि पायलट की गलती के कारण ईंधन नियंत्रण स्विच बंद हो गया था। मैं इस लेख की निंदा करता हूं। उन्होंने कहा कि यह पायलट की गलती थी। उन्होंने रिपोर्ट ठीक से नहीं पढ़ी है और हम उनके खिलाफ एफआईपी के माध्यम से कार्रवाई करेंगे।

लोगों से शुरुआती रिपोर्ट पर बयान न देने की अपील

कैप्टन रंधावा ने लोगों से एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर टिप्पणी न करने का आग्रह किया, क्योंकि इससे हवाई यात्रा के बारे में यात्रियों में भय पैदा हो सकता है। कैप्टन रंधावा ने कहा, “हमने कल एक बयान जारी किया था कि किसी भी चैनल, टिप्पणीकार या किसी भी एजेंसी के अध्यक्ष को ऐसी राय नहीं देनी चाहिए, जिसका कोई आधार न हो। विस्तृत रिपोर्ट में समय लगेगा। तब तक लोग बिना किसी आधार के अपनी राय दे रहे हैं, जो सही नहीं है।

2019 की घटना का जिक्र किया

कैप्टन रंधावा ने कहा, “न तो रिपोर्ट और न ही नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा है कि यह पायलट की गलती थी। आपको इसे एएनए एनएच 985 की घटना से जोड़ना चाहिए, जो 17 जनवरी, 2019 को हुई थी। लैंडिंग के समय, जब पायलट ने थ्रस्ट रिवर्सर्स का उपयोग किया, तो पायलट के ईंधन नियंत्रण स्विच को हिलाए बिना ही दोनों इंजन बंद हो गए। मैं बिल्कुल स्पष्ट हूं कि टीसीएमए (थ्रॉटल कंट्रोल मालफंक्शन एकोमोडेशन) में दोबारा गड़बड़ी हुई है। इसके लिए टीसीएमए की गहन जांच की जरूरत है। बोइंग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है और यह निर्देश जारी करने की भी कोशिश नहीं की है कि इन सभी विमानों की टीसीएमए कार्यों के लिए जांच की जानी चाहिए। दूसरी बात, जांच समिति में एक भी पायलट नहीं है।

जांच टीम में एक पायलट शामिल करने की मांग

कैप्टन रंधावा ने कहा कि उनका महासंघ नागरिक उड्डयन मंत्री से अनुरोध कर रहा है कि बोर्ड का पुनर्गठन किया जाए तथा इस जांच बोर्ड में टाइप रेटेड विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। जो पायलट, इंजीनियर और हवाई सुरक्षा विशेषज्ञ हैं। एफआईपी अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय पायलट दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पायलटों में से हैं। उन्होंने आगे कहा भारतीय पायलट दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पायलटों में से हैं। मैंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को अपनी राय नहीं दी। जिसने मुझसे भी संपर्क किया था। क्योंकि मैं इस अमेरिकी मीडिया के खिलाफ हूं। वे जानबूझकर इस रिपोर्ट पर अपने विचार दे रहे हैं। जबकि रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसलिए मैं वॉल स्ट्रीट जर्नल की इस रिपोर्ट की कड़ी निंदा करता हूं और हम इस पर कार्रवाई करेंगे।

एफआईपी ने जताया विरोध

इससे पहले बुधवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने अहमदाबाद में एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के संबंध में प्रारंभिक निष्कर्षों और सार्वजनिक चर्चा के संबंध में “गंभीर” चिंता व्यक्त की थी। एफआईपी ने एक आधिकारिक बयान में जांच प्रक्रिया से पायलट प्रतिनिधियों को बाहर रखे जाने पर असंतोष व्यक्त किया तथा प्रारंभिक रिपोर्ट की व्याख्या और सार्वजनिक प्रस्तुति के तरीके पर आपत्ति जताई।

यह बयान रॉयटर्स की उस रिपोर्ट के बाद आया है। जिसमें वॉल स्ट्रीट जर्नल का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि पिछले महीने दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के विमान के दो पायलटों के बीच कॉकपिट में हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि कैप्टन ने विमान के इंजनों में ईंधन के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले स्विच को बंद कर दिया था।

read more : यूपी समेत इन राज्यों में अगले दो दिनों तक होगी भारी बारिश – मौसम विभाग

यूपी समेत इन राज्यों में अगले दो दिनों तक होगी भारी बारिश – मौसम विभाग

उत्तर प्रदेश समेत तीन राज्यों में अगले दो दिनों तक बहुत भारी बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बहुत भारी बरसात होगी। इसके अलावा, अगले सात दिनों के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 17, 19 और 20 जुलाई को केरल में अलग-अलग जगहों पर अत्यधिक भारी बरसात हो सकती है। 17 को तटीय कर्नाटक, 17 व 18 जुलाई को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट – मौसम विभाग

उत्तर पश्चिम भारत की बात करें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 17-23 जुलाई के दौरान, पंजाब, हरियाणा में 17, 21-23 जुलाई, राजस्थान में 17-19 जुलाई के दौरान, बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, उत्तराखंड में 17, 20-23 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश, 18, 20 और 21 जुलाई, पूर्वी राजस्थान में 17 जुलाई, हिमाचल प्रदेश में 21-23 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, पूर्वी और मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश में 17, 18 और 21-23 जुलाई, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में 21-23 जुलाई, बिहार में 17, 20-23 जुलाई, अंडमान और निकोबार द्वीप में 17 जुलाई, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा में 19-23 जुलाई को भारी बारिश होने वाली है।

गरज, बिजली के साथ होगी बारिश – मौसम विभाग

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 जुलाई, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 20 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पश्चिमी भारत के लिए मौसम विभाग का कहना है कि कोंकण, गोवा में 17-23 जुलाई, मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों में 20-23 जुलाई, मराठवाड़ा में 17 जुलाई को अलग-अलग जगहों पर संभावित बरसात होगी। उत्तर पूर्वी भारत के लिए मौसम विभाग का कहना है कि अगले सात दिनों में उत्तर पूर्वी भारत में कई जगहों पर गरज, बिजली के साथ बरसात होने वाली है। इसमें से अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा में 17-22 जुलाई को भारी बारिश होगी, जबकि मेघालय में 19 जुलाई को बहुत भारी बरसात होगी।

read more :  आप का खुद अवैध संबंध और लगा रहीं रेप का आरोप – सुप्रीम कोर्ट

आप का खुद अवैध संबंध और लगा रहीं रेप का आरोप – सुप्रीम कोर्ट

रेप के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोप लगाने वाली महिला को ही खूब सुनाया। इसके अलावा आरोपी की अग्रिम जमानत भी बरकरार रखी। गुरुवार को हुई सुनवाई में बेंच ने महिला से कहा कि आप शादीशुदा हैं और उसके बाद भी अवैध तौर पर संबंध बनाए। ऐसे में आप कैसे रेप का आरोप लगा रही हैं। बेंच ने कहा कि आप एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रख रही थीं, जो अपने आप में एक अपराध है।

यही नहीं बेंच ने कहा कि शादी से इतर किसी अन्य शख्स से आपका शारीरिक संबंध बनाना गलत था और आप पर खुद इस मामले में केस चलना चाहिए। जस्टिस एम.एम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने महिला की ओर से दायर याचिका के जवाब में यह बात कही, जिसमें उसने कहा था कि आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज होनी चाहिए।

शादी का वादा किया और फिर मुकर गया

महिला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आरोपी ने शादी का वादा किया था और फिर मुकर गया। इस पर बेंच ने कहा कि आप एक शादीशुदा महिला हैं। आपके दो बच्चे हैं। आप परिपक्व थीं। आप जानती थीं कि शादी से इतर संबंध बनाना कैसे गलत है। इस पर महिला के वकील ने कहा कि आरोपी ने कई बार होटल में बुलाया था और संबंध बनाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप उससे मिलने बार-बार होटल क्यों गईं। इस पर भी बेंच ने महिला को ही सुनाया।

आप बार-बार होटल क्यों गईं – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप उसके कहने पर बार-बार होटल क्यों गईं ? आप अच्छी तरह से जानती थीं कि शादी से इतर संबंध बनाकर आप खुद भी एक गलती कर रही हैं। महिला और आरोपी की बातचीत सोशल मीडिया से शुरू हुई थी और तब से ही दोनों रिलेशनशिप में थे। महिला का कहना है कि शख्स से शादी के लिए उसने अपनी शादी तोड़ दी थी। पति से तलाक ले लिया और जब उससे शादी के लिए कहा तो वह मुकर गया। फिर इस मामले में महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

किस आधार पर हाई कोर्ट ने दी थी आरोपी को बेल

बिहार पुलिस में दर्ज एफआईआर में महिला ने आरोप लगाया कि युवक ने उसका यौन उत्पीड़न किया और लगातार वादा करता रहा कि वह उससे शादी करेगा। इस वादे के भरोसे ही वह उससे संबंध बनाती रही। इस मामले में पटना हाई कोर्ट ने यह कहते हुए शख्स को बेल दी थी कि तलाक के बाद महिला से उस शख्स ने कोई यौन संबंध नहीं बनाए थे। अब उसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।

read more : 2029 तक हम विपक्ष में आएंगे नहीं, आपको इधर आना है तो विचार कीजिए

2029 तक हम विपक्ष में आएंगे नहीं, आपको इधर आना है तो विचार कीजिए

महाराष्ट्र में ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) की एकजुटता के बाद राज्य की राजनीति रोज नए मोड़ लेती दिख रही है। ताजा मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में विपक्षी नेता उद्धव ठाकरे को साथ आने का खुला ऑफर दे दिया। नेता विपक्ष और उद्धव ठाकरे गुट वाले शिवसेना के नेता अम्बादास दानवे की विदाई के मौके पर सदन को संबोधित करते हुए और मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने मराठी में कहा कि देखिए उद्धव जी… 2029 तक तो हमारा वहां (विपक्ष में) आने का स्कोप नहीं है। लेकिन आपको इधर आना है तो विचार कीजिए। यह आप पर निर्भर है।

उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि

इसके साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि आपका (अंबादास दानवे) जन्म सोने के चम्मच के साथ नहीं हुआ। उन्होंने कहा अंबादास आप बस चालक के बेटे हैं। लोकसभा में भी आपको उसी बस में बैठना था। लेकिन ठीक है, इस पर ज्यादा बोलना उचित नहीं होगा। इस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि मेरे सहकारी अंबादास दानवे वो अपनी पहली टर्म पूरी कर रहे हैं। मैं नहीं कहूंगा कि वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं, कहिए — अंबादास, आप फिर से लौटकर आएंगे।

पक्ष या विपक्ष लेकिन असली विचार हिंदुत्ववादी

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि अम्बादास दानवे (उद्धव गुट नेता) कहीं भी हों पक्ष या विपक्ष में लेकिन उनके असली विचार हिंदुत्ववादी हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच भरी सदन में जुबानी जंग हो चुकी थी। एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में कहा कि जब अंबादास दानवे सदन में चुनकर आए थे। तो उनका अभिनंदन प्रस्ताव मैंने ही पेश किया था और आज उनके विदाई समारोह में बोल रहा हूं। ये पूर्ण विराम नहीं, अल्पविराम साबित हो, ऐसी मेरी कामना है।

read more :  जेल जाएंगे असम के सीएम, उन्हें नहीं बचा पाएंगे पीएम मोदी – राहुल गांधी

जेल जाएंगे असम के सीएम, उन्हें नहीं बचा पाएंगे पीएम मोदी – राहुल गांधी

असम के चायगांव में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरएसएस और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ आरएसएस नफरत, बांटने और लड़ाने की विचार और एक तरफ कांग्रेस जिसकी नफरत मिटाने की विचारधारा है। इस दौरान उन्होंने कहा कि असम के सीएम जेल जाएंगे। जिस पर हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें जवाब दिया।

पीएम मोदी भी हिमंत बिस्वा सरमा को नहीं बचा पाएंगे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा की मैं जो बोलता हूं, वो होता है। मैंने कोविड, नोटबंदी, गलत जीएसटी के समय जो बोला, उसका नतीजा सबको दिखा। मैं आज बोल रहा हूं कि कुछ ही समय में मीडिया वाले आपके मुख्यमंत्री को जेल जाता हुआ दिखाएंगे और उन्हें नरेंद्र मोदी, अमित शाह भी नहीं बचा पाएंगे। ये काम कांग्रेस पार्टी नहीं करेगी। ये काम असम के युवा, किसान, मजदूर और हर वर्ग के लोग करके दिखाएंगे। क्योंकि उन्हें पता है कि ये व्यक्ति भ्रष्ट है। ये व्यक्ति 24 घंटा असम की जमीन चोरी करता है। कहीं सोलर पार्क के नाम पर, कहीं रिसॉर्ट के बहाने अब ये बात असम का बच्चा-बच्चा जानता है।

rahul gandhi
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खुद को राजा समझते हैं असम के सीएम – राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि आज जो असम में हो रहा है वही पूरे देश में हो रहा है। यहां के मुख्यमंत्री खुद को राजा समझते हैं, लेकिन जब आप उनकी आवाज सुनेंगे, उनकी आंखों में देखेंगे, तो आपको उसके पीछे डर दिखेगा। वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, चिल्लाते हैं। लेकिन उनके दिल में डर है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो जानते हैं कि एक दिन कांग्रेस के बब्बर शेर उन्हें जेल में डाल देंगे। उन्हें अपने सारे भ्रष्टाचार का हिसाब असम की जनता को देना होगा।

राहुल गांधी के बयान पर हिमंत बिस्वा सरमा का जवाब

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के इस बयान पर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी असम आते हैं और मुझे जेल भेजने की बात करते हैं लेकिन वह भूल जाते हैं कि वह खुद जमानत पर बाहर हैं। एक्स पर पोस्ट कर हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि लिख कर ले लीजिए। हिमंत बिस्वा सरमा को जेल जरूर भेजेगा। यही यह वही वाक्य है।

जो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असम में कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति के साथ अपनी बंद बैठक में कहा लेकिन हमारे नेता जी यह कितनी आसानी से भूल गए कि वे स्वयं देशभर में दर्ज कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं, राहुल जी। आज के दिन असम की मेहमाननवाजी का आनंद लें।

लाखों लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा – राहुल गांधी

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर कहा कि महाराष्ट्र का चुनाव बीजेपी और चुनाव आयोग ने चोरी किया। वही काम अब बिहार में भी करने की कोशिश की जा रही है। ये लोग अब बिहार में नई वोटर लिस्ट तैयार करने का काम कर रहे हैं। उस वोटर लिस्ट से लाखों लोगों को हटाया जा रहा है। इसमें गरीब, मजदूर, किसान हैं और कांग्रेस – आरजेडी के वोटर शामिल हैं। हम बिहार में इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और इन पर दबाव बना रहे हैं। वही काम ये लोग असम में भी करेंगे, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।

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क्यूआर कोड वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का योगी सरकार को नोटिस

यूपी और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों और रेस्तरां संचालकों को आदेश दिया गया है कि वे क्यूआर कोड लगाएं और नाम भी लिखें। यह मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने पूछा कि आखिर इसकी जरूरत क्या है। अब इस केस की अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की गई है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और शिक्षाविद अपूर्वानंद झा व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख तय की।

कांवड़ यात्रा का प्रचलन यूपी सहित कई राज्यों में बढ़ा

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार का निर्देश, जिसमें दुकान मालिकों को ‘कानूनी लाइसेंस आवश्यकताओं’ के तहत धार्मिक और जातिगत पहचान बताने के लिए कहा गया है। दुकान, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने में शिवलिंगों का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा और अन्य नदियों से जल लेकर आते हैं। कई श्रद्धालु इस महीने में मांसाहार से परहेज करते हैं। कई लोग तो प्याज और लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खाते। कांवड़ यात्रा का प्रचलन पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलावा सूबे के अन्य हिस्सों और कुछ और राज्यों में भी बढ़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के निर्देशों पर लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल भाजपा शासित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश द्वारा जारी इसी तरह के निर्देशों पर रोक लगा दी थी। जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों को अपने मालिकों, कर्मचारियों के नाम और अन्य विवरण प्रदर्शित करने के लिए कहा गया था। उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा 25 जून को जारी एक प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए झा ने कहा कि नए उपायों में कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है। जिससे मालिकों के नाम और पहचान का पता चलता हो। इस तरह उसी भेदभावपूर्ण तरीके से पहचान की बात हो रही है। जिस पर पहले सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

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राहुल गांधी ने लखनऊ कोर्ट में किया सरेंडर, मानहानि मामले में मिली जमानत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एमपी-एमएलए कोर्ट ने भारतीय सैनिकों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने 20 हजार के मुचलके पर जमानत दी है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए बयान को लेकर दर्ज इस मामले में पहले पांच सुनवाइयों में हाजिर नहीं हुए थे। मंगलवार को उन्होंने एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सरेंडर किया और जमानत याचिका दाखिल की। लाइव लॉ के मुताबिक राहुल गांधी पांच सुनवाइयों में अनुपस्थित रहने के बाद इस बार एडिशनल चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।

दरअसल मई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद वह पेश हुए। यह याचिका उन्होंने मानहानि मामले और लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा फरवरी 2025 में पारित समन आदेश दोनों को चुनौती दी थी।

क्या था मामला

सीमा सड़क संगठन के सेवानिवृत्त निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने कोर्ट के समक्ष राहुल गांधी के ख़िलाफ़ मानहानि का परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि राहुल गांधी 16 दिसंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना का अपमान किया। उन्होंने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई झड़प का ज़िक्र करते मीडिया और लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि लोग भारत जोड़ो यात्रा के बारे में पूछेंगे लेकिन चीनी सैनिकों द्वारा हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक बार भी सवाल नहीं पूछेंगे।

राहुल गांधी के बयान से भावनाएँ हुई आहत

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों की कथित पिटाई के बारे में राहुल गांधी के बयान से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। वहीं, राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय सेना ने आधिकारी बयान भी जारी किया था। सेना ने कहा कि चीनी सेना भारतीय सीमा में अतिक्रमण कर रही थी जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। जिसके बाद चीनी सेना वापस चली गई।

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आखिरकार यमन में टली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी

केरल की नर्स निमिषा प्रिया को लेकर यमन से अहम खबर सामने आई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक निमिषा की फांसी को फिलहाल टाल दिया गया है। उन्हें 16 जुलाई को फांसी दी जानी थी। इस केस को लेकर भारत सरकार काफी कोशिश कर रही थी, आखिर में सजा टाल दी गई। यमन की एक अदालत ने निमिषा प्रिया को हत्या के मामले में फांसी की सजाई सुनाई थी। वे साल 2017 से यमन की जेल में बंद हैं।

निमिषा प्रिया पर यमन के नागरिक तलाल एब्दो महदी की हत्या का आरोप लगा था। वे इस मामले में दोषी भी पाई गईं। आरोप था कि उन्होंने महदी के पास जमा अपना पासपोर्ट हासिल करने के लिए बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया और दवाई का ओवरडोज होने की वजह से उसकी मौत हो गई। निमिषा के घरवालों और उसके समर्थकों के लिए ये राहत भरी खबर सामने आई है।

सूत्रों ने क्या बताया ?

सूत्रों ने जानकारी दी है कि भारतीय मूल की निमिषा प्रिया एक नर्स हैं। जिन्हें यमन के नागरिक हत्या की हत्या के आरोप में यमन उच्चतम न्यायालय द्वारा दोषी करार दिया गया था। 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जानी थी। फिलहाल उन्हें 16 जुलाई को फांसी की सजा नहीं दी जा रहीं है।

कैसे संभव हुआ ये फैसला ?

जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार इस मामले में शुरुआत से ही निमिषा प्रिया को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। हाल के दिनों में निमिषा प्रिया के परिवार को दूसरे पक्ष के साथ आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए और समय देने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसमें शामिल संवेदनशीलताओं के बावजूद, भारतीय अधिकारी स्थानीय जेल अधिकारियों और अभियोजक कार्यालय के साथ नियमित संपर्क में रहे हैं। जिसके कारण सजा में स्थगन का फैसला संभव हो पाया है।

निमिषा को क्यों हुई फांसी की सजा ?

आपको बता दें कि निमिषा प्रिया को साल 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। उस शख्स ने कथित तौर पर निमिषा प्रिया को प्रताड़ित किया और उसके साथ मारपीट की। निमिषा ने उस शख्स के कब्जे से अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए, कथित तौर पर उस यमनी व्यक्ति को बेहोश करने की कोशिश की। लेकिन ज़्यादा मात्रा में दवा लेने से उस शख्स की मौत हो गई। इसके बाद केरल की रहने वाली 37 वर्षीय निमिषा को यमन में मौत की सजा सुनाई गई थी।

निमिषा प्रिया को किस कानून के तहत मिली सजा

यमन में शरिया कानून चलता है। लिहाजा निमिषा को भी इसी कानून के तहत मौत की सजा दी गई। इस कानून में माफी का भी एक प्रावधान है। ब्लड मनी नाम की एक ऐसी प्रथा है, जिसके तहत हत्या के दोषी को माफी मिल सकती है। लेकिन उसे इसके लिए मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर मोटी रकम देनी होती है। निमिषा को भी इस कानून के तहत छोड़ा जा सकता है। लेकिन इसको लेकर किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

परिवार की भारत वापसी के बाद यमन में फंस गईं निमिषा

दरअसल केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा करीब दो दशक पहले अपने पति और बेटी के साथ यमन चली गई थीं। वे यहां काम कर रही थीं। यमन में गृहयुद्ध की वजह से साल 2016 में देश से बाहर जाने पर पाबंदी लग गई। लेकिन इससे पहले उनके पति और बेटी 2014 में ही भारत लौट आए। निमिषा वापसी नहीं कर सकीं। इसी के बाद 2017 में उन पर हत्या का आरोप लग गया।

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यौन उत्पीड़न पर कार्रवाई न होने से छात्रा ने किया आत्मदाह, प्रिंसिपल गिरफ्तार

ओडिशा के बालासोर जिले में एक 22 वर्षीय छात्रा द्वारा खुद को आग लगाए जाने के मामले में फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज के प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया है। छात्रा ने 1 जुलाई को कॉलेज के एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। उसने एक लंबा पत्र लिखकर कई महीनों से हो रहे उत्पीड़न और धमकियों का जिक्र किया था।

हालांकि, छात्रा के अनुसार, कॉलेज प्रशासन और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके 11 दिन बाद उसने कॉलेज परिसर में ही खुद को आग लगा ली। छात्रा को AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहां वह 90 प्रतिशत से अधिक जल चुकी है और जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है। इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद, छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन और शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। प्रशासन ने अब मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रिंसिपल को लापरवाही और शिकायतों की अनदेखी के आरोप में गिरफ्तार किया है।

यौन उत्पीड़न शिकायत पर चुप रहा कॉलेज प्रशासन

ओडिशा के बालासोर जिले के फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की बी.एड. की छात्रा ने 1 जुलाई को अपने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर समीर कुमार साहू के खिलाफ लगातार यौन उत्पीड़न और धमकियों की लिखित शिकायत कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति को सौंपी थी। छात्रा ने एक लंबा पत्र लिखा था, जिसमें उसने बताया कि कैसे कई महीनों से उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न हो रहा है। यह पत्र छात्रा ने सामाजिक मंच पर भी साझा किया था। जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित किया गया था।

प्रिंसिपल और आरोपी शिक्षक निलंबित

घटना के बाद पुलिस ने प्रोफेसर समीर साहू को गिरफ्तार कर लिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रोफेसर साहू के साथ-साथ कॉलेज के प्राचार्य दिलीप घोष को निलंबित कर दिया है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोर कार्रवाई होगी। जिले के पुलिस अधीक्षक राज प्रसाद ने बताया कि शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है। कई दल साक्ष्य जुटा रहे हैं और जो भी दोषी होगा, उसे सजा दी जाएगी।

12 दिन बाद आत्मदाह, छात्रा की हालत गंभीर

कॉलेज प्रशासन ने छात्रा से कहा था कि सात दिनों में कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बारह दिन बीत जाने पर भी जब कोई कदम नहीं उठाया गया। तो छात्रा ने 11 जुलाई को कॉलेज के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन के दौरान अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली। वह इस समय भुवनेश्वर स्थित अस्पताल में जीवन रक्षक प्रणाली पर है। चिकित्सकों के अनुसार, उसके शरीर का 95 प्रतिशत हिस्सा जल चुका है। उसे बचाने की कोशिश करने वाले एक और छात्र को 70 प्रतिशत जलने की चोटें आई हैं और उसका भी इलाज चल रहा है।

घटना से पहले छात्रा ने मांगी थी मदद

प्राचार्य दिलीप घोष ने बताया कि घटना वाले दिन छात्रा उनसे मिलने आई थी और कहा था कि वह मानसिक दबाव में है। उसने अनुरोध किया था कि शिक्षक साहू को बुलाया जाए। जिसे प्राचार्य ने तत्काल बुलाया भी और इस घटना का एक भयावह दृश्य सामने आया है। जिसमें छात्रा आग की लपटों में कॉलेज भवन के गलियारे में दौड़ती नजर आ रही है। एक व्यक्ति उसे बचाने की कोशिश करता है, लेकिन जब उसके कपड़े जलने लगते हैं तो वह पीछे हट जाता है। इसके बाद अन्य लोग दौड़कर आग बुझाने की कोशिश करते हैं।

परिवार पर दबाव डालने का आरोप

छात्रा के पिता ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने उनकी बेटी और परिवार पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया था। उनका कहना है कि मुझसे कहा गया कि यदि शिकायत नहीं हटाई। तो मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी बेटी को अस्पताल में देखा। मैं उसे पहचान तक नहीं सका।

राष्ट्रपति से मिलने की मांग

इस घटना को लेकर बीजू जनता दल और कांग्रेस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर उनसे मिलने का समय मांगा है। राष्ट्रपति इन दिनों ओडिशा की यात्रा पर हैं।

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सपा अध्यक्ष के भाई प्रतीक यादव से करोड़ों की ठगी और पॉक्सो एक्ट की धमकी

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भाई और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव से निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी की गई। रुपयों की मांग पर जालसाज ने उन्हें पॉक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी दी और बदनाम करने के लिए एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। विरोध पर उन्हें बदनाम करने की बात कहकर चार करोड़ रुपये की रंगदारी भी मांगी। इस मामले में प्रतीक यादव ने चिहनट में रहने वाले आरोपित कृष्णानंद पांडेय के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इसके साथ ही प्रतीक ने उनकी पत्नी और पिता पर भी जालसाजी में शामिल होने और धमकी का आरोप लगाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कृष्णानंद ने प्रतीक यादव के नाम पर की ठगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कृष्णानंद पांडेय से प्रतीक यादव की मुलाकात साल 2011-12 में हुई थी। इसके बाद में कृष्णानंद ने रियल स्टेट नाम की कंपनी बनाई और निवेश के नाम पर प्रतीक यादव से ठगी की। जब प्रतीक ने पैसे वापस मांगे तो धमकी देने लगा। पीड़ित का कहना है कि सख्ती से पैसे मांगने पर आरोपी ने पॉक्सो एक्ट में फंसाने और फर्जी वीडियो वायरल करने की धमकी देना लगा। यहां तक कि इसके एवज में 5 करोड़ की रंगादारी भी मांगी।

प्रतीक यादव प्रमोटर के तौर पर शामिल हुए

प्रतीक यादव के मुताबिक जब लखनऊ का विस्तार हो रहा था। तब शहीद पथ के आसपास कृष्णानंद ने जमीन खरीदने के लिए बोला था। उसने कहा था कि आगे चलकर इस जमीन से ज्यादा मुनाफा होगा। प्रतीक तब कृष्णानंद पांडेय की बातों में आ गए। साल 2015 में एक कंपनी का गठन हुआ और इसमें निदेशक कृष्णानंद पांडेय बना। जबकी प्रतीक प्रमोटर के तौर पर शामिल हुए। तब उन्होंने कंपनी में निवेश किया।

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सुप्रीम कोर्ट का हेट स्पीच पर केंद्र और राज्यों को तुरंत लगाम लगाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को हेट स्पीच पर सख्त निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नफरत फैलाने वाले भाषणों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इस पर लगाम लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत दर्ज होने का इंतजार किए बिना, पुलिस को स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषणों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह एक “बड़ा खतरा” बनता जा रहा है जिसे बढ़ने से रोकना होगा। नफरती भाषण पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

नफरती भाषणों पर तुरंत लगाएं रोक

वही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे नफरती भाषण चिंताजनक हैं और इन पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। इन दिनों ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर सब कुछ जायज ठहराने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद खतरनाक है। कोर्ट ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषणों से देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को खतरा है और इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी लगाई जमकर फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आईपीसी (IPC) की धारा 153A, 153B, 295A और 505 के तहत स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करें, भले ही कोई शिकायत दर्ज न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट को कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने मीडिया, खासकर टीवी चैनलों को भी फटकार लगाई है और कहा है कि एंकरों की यह जिम्मेदारी है कि वे नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को हेट स्पीच के मुद्दे को तुच्छ नहीं मानना चाहिए और इसे रोकने के लिए एक तंत्र विकसित करना चाहिए।

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दीवार फांदकर शहीद स्थल पहुंचे सीएम उमर अब्दुल्ला, हुए थे हाउस अरेस्ट

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़कर मजार-ए-शुहादा (शहीद स्मारक) की चारदीवारी फांदकर 1931 में डोगरा शासन के विरोध में मारे गए कश्मीरियों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सुरक्षा बलों ने उन्हें श्रीनगर के पुराने शहर में स्थित स्मारक तक पहुंचने से रोक दिया। जम्मू-कश्मीर में रविवार, 13 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सोमवार को बिना किसी को बताए वहां पहुंच गए, क्योंकि रविवार को उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें नज़रबंद कर दिया गया था।

बिना बताए मैं चला आया – सीएम उमर अब्दुल्ला

सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो लोग कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी बताते हैं। उनके आदेश पर हमें कल यहां फ़ातिहा पढ़ने की इजाज़त नहीं दी गई। लोगों को उनके घरों तक ही सीमित रखा गया। जब दरवाज़े खुले और मैंने कंट्रोल रूम को बताया कि मैं यहां आना चाहता हूं। तो मेरे दरवाज़े के सामने एक बंकर बना दिया गया और देर रात तक उसे हटाया नहीं गया। आज मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया। बिना बताए मैं कार में बैठ गया और यहां चला आया।

उनकी बेशर्मी तो देखिए – सीएम उमर अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि सुरक्षा बलों ने आज भी उन्हें स्मारक तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की और पूछा कि किस क़ानून के तहत ऐसा किया गया। सीएम ने कहा, “उनकी बेशर्मी देखिए। आज भी उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की। हमने नौहट्टा चौक पर गाड़ी खड़ी की। उन्होंने हमारे सामने बंकर बना दिया और हमारे साथ बदसलूकी करने की कोशिश की।

वर्दीधारी ये पुलिसवाले कभी-कभी क़ानून भूल जाते हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आज उन्होंने किस क़ानून के तहत हमें रोकने की कोशिश की? ये पाबंदियां तो कल की बात हैं। वो कहते हैं कि ये आज़ाद देश है, लेकिन कभी-कभी उन्हें लगता है कि हम उनके गुलाम हैं। हम किसी के गुलाम नहीं हैं। अगर हम गुलाम हैं, तो हम जनता के गुलाम हैं।

13 जुलाई को शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है ?

13 जुलाई 1931 को श्रीनगर जेल के बाहर तत्कालीन महाराजा हरि सिंह डोगरा की सेना ने कश्मीरी प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर गोली चलाई थी। प्रदर्शनकारियों ने अब्दुल कादिर का समर्थन किया था। जिन्हें कश्मीरियों से डोगरा शासक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का आह्वान करने के कारण जेल में डाल दिया गया था और उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। उस दिन हुई गोलीबारी में 22 प्रदर्शनकारी मारे गए थे। पिछले 70 सालों से 13 जुलाई को कश्मीर में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाया जाता है और इसे कश्मीर के पहले राजनीतिक जागरण के रूप में चिह्नित किया जाता है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जुलाई को बेसिक शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि 06 से 14 वर्ष की आयु का एक भी बच्चा विद्यालय से वंचित नहीं रहना चाहिए। विद्यालय प्रबन्ध समिति (प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान) इसे सुनिश्चित कराएं। इस दिशा में ‘स्कूल चलो अभियान’ को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। ताकि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न छूटे।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने, बच्चों की शत-प्रतिशत विद्यालयी उपस्थिति सुनिश्चित करने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए।

50 से अधिक छात्रों वाले स्कूल…

उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत प्रत्येक छात्र के अभिभावक के बैंक खाते में यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्टेशनरी एवं पाठ्य सामग्री हेतु ₹1,200 की सहायता राशि को डीबीटी के माध्यम से शीघ्रता से अंतरित किया जाए। उन्होंने कहा कि 50 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालय स्वतंत्र रूप से संचालित हों। यह कार्य पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए। ताकि लाभार्थियों को समय पर मदद मिल सके और विद्यालयीन सामग्री की व्यवस्था बाधित न हो।

स्कूल चलो अभियान को अधिक प्रभावी बनाये

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार सीएम ने कहा कि कोई बच्चा स्कूल से वंचित न रहे। विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुदृढ़ हो, संसाधनों की उपलब्धता में कोई कमी न हो। सीएम योगी ने कहा कि स्कूल पेयरिंग से गुणवत्ता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिया है कि रिक्त पदों पर अधियाचन भेज कर शीघ्र की नियुक्ति जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक-छात्र अनुपात आदर्श स्थिति में हो। मुख्यमंत्री ने प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल, ‘स्कूल चलो अभियान’ को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।

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