Saturday, April 11, 2026
Home Blog Page 479

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से होने वाली हर मौत को लापरवाही मानने से किया इनकार

डिजिटल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुई मौत को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यह नहीं माना जा सकता है कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोरोना के कारण सभी मौतें चिकित्सा लापरवाही के कारण हुईं। उस ने कहा, अदालत ने महामारी की कठिन अवधि के दौरान ऑक्सीजन की कमी और आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल के कारण अपनी जान गंवाने वालों के रिश्तेदारों से मुआवजे की मांग करने वाली अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। दीपक राज सिंह की ओर से आवेदन दिया गया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी सलाह लेकर सक्षम प्राधिकारी के पास जाएं और उसे जमा करें.

कोर्ट ने पाया कि कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश को प्रभावित किया है और ऐसे में चिकित्सकीय लापरवाही जैसी सामान्य धारणा बनाना ठीक नहीं होगा. पीठ के अनुसार, जैसा कि आवेदन में कहा गया है कि कोरोना के कारण सभी मौतें चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई हैं, अदालत ऐसा नहीं मान सकती।

कैबिनेट से कपड़ा क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी, गन्ना उत्पादकों को राहत

कोर्ट ने कोरोना महामारी मामले का भी जिक्र किया, जिसके आधार पर स्वत: कार्रवाई की गई है। अदालत ने कहा कि महामारी के सभी पहलुओं पर गौर करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यबल का गठन किया गया है। पीठ ने आगे कहा कि शीर्ष अदालत ने 30 जून को भी कोरोना से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का आदेश जारी किया था. 30 जून के अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कानूनी दायित्व है कि वह कोरोना महामारी के पीड़ितों को न्यूनतम अनुग्रह सहायता की सिफारिश करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करे।

इसके बाद कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि उस फैसले में कोर्ट ने लापरवाही के कारण नहीं बल्कि मानवता पर विचार किया। सरकार ने अभी तक कोई नीति नहीं बनाई है। यदि आपके पास उस नीति के कार्यान्वयन के संबंध में कोई सुझाव है, तो आप सक्षम प्राधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

इन जगहों पर दोस्तों के साथ बिताएं खूबसूरत पल,प्रकृति के साथ वक़्त बितायें

डिजिटल डेस्क : आजकल हर किसी की ज़िन्दगी भाग दौड़ और थकान से भरी हुई और अगर ऐसी थकन और भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में अपने परिवार या दोस्तों के साथ कुछ सुकून के पल बिताने चाहते हैं।  तो आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताएँगे जहाँ पहुंचकर आप थकान भरी ज़िन्दगी में राहत पा सकते हैं।  इसके लिए आप देश की कई सरे जगहों और पिकनिक स्पॉट्स पर जा सकते हैं , लेकिन आज हम आपको कुछ ख़ास जगहों के बारे में बताएँगे जहाँ आपको घूमने फिरने में बेहद आनंद आएगा।  साथ ही ये जगहें सुरक्षा और स्वच्छता की दृस्टि से भी मशहूर हैं।  जहाँ आपको प्रकृति के साथ वक़्त बिताने का मौका मिलेगा।  तो आइये अब बताते हैं आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में –

आपके लिए सबसे पहली जगह है – रखज्जिया , चंपा 

razia tpo
razia tpo

खज्जियार चंपा में स्तिथ एक छोटा सा पर्यटन स्थल है , जिसकी डलहौजी से मात्र 24 किलोमीटर की दूरी है।  पश्चिमी हिमालय के भव्य पर्वत की तलहटी में बसा खज्जियार बेहद खूबसूरत जगह है।  खज्जियार की पठानकोट रेलवे स्टेशन से दूरी 95 किलोमीटर है।  यह खूबसूरत पर्यटन स्थल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्तिथ है।  यहाँ पर देखने लायक कई सारे धार्मिक स्थल हैं जिनमे नागा मंदिर , शिव मंदिर और हडिंबादेवी का मंदिर प्रसिद्द है।  इन् जगहों पर जाकर आप कई प्राचीन कथाओं से भी परिचित हो सकते हैं।  धार्मिक स्थलों के अलावा खज्जियार पैराग्लाइडिंग के लिए भी जाना जाता है इसलिए यहाँ पर आप वादियों के बीच अपने दोस्तों के साथ पैराग्लाइडिंग का मजा ले सकते हैं।

आपके घूमने लायक अगली जगह है – विल्सन हिल , गुजरात 

Vilsan Hills
Vilsan Hills

विल्सन हिल गुजरात का एक ख़ास हिल स्टेशन है , जो सूरत के पास धर्मपुर तहसील में स्तिथ है। यह हिल स्टेशन इतना खूबसूरत और शांति से भरा है कि यहाँ ज्यादातर वही लोग आते हैं जिन्हे शान्ति और सुकून कि तलाश होती है।  हरी भरी प्रकृति के खूबसूरत नज़रों के साथ ही यहाँ कई सारे पर्यटन स्थल हैं जैसे कि बरूमल शिव मंदिर, जिला विज्ञान केंद्र, लेडी विल्सन म्यूजियम, बिलपुड़ी ट्विन वाटरफॉल्स, ओजोन घाटी, सूर्योदय और सूर्यास्त प्वाइंट, संगमरमर छतरी, शंकर झरना पॉइंट।  इन् सब जगहों पर जाकर आप सुकून पा सकते हैं और अपनी हॉलिडे ट्रिप को यादगार बना सकते हैं।

Kanchan Jangha
Kanchan Jangha

रिंबिक, पश्चिम बंगाल 

रिंबिक पश्चिम बंगाल में बसा एक शानदार और खूबसूरत गाँव ह। जहाँ पर जाने वाले लोगों को एकांत और शान्ति का अनुभव होता है।  रिंबिक में कई सारे आकर्षक स्थल हैं जिनमे कंचनजंगा का मनोरम दृश्य कैची भी शामिल है।  वहीँ यहीं पर बसा पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क भी काफी मशहूर है, जहाँ पर आपका भरपूर मनोरंजन होगा।  इसके साथ ही रिंबिक में आप प्राकर्तिक खूबसूरती के साथ साथ ट्रैकिंग का मजा भी ले सकते हैं।  इसलिए जब कभी भी मन करे और सुकून के साथ साथ आनंद चाहिए हो तो एक बार रिंबिक जरूर जाएँ।

अब आखिरी जिस जगह के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वो है – लोहाघाट , उत्तराखंड 

लोहाघाट प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्तिथ एक हिल स्टेशन है।  इतिहासकारों के अनुसार 11 वीं और 12 वीं शताब्दी में लोहाघाट पर चंदवंश का शासन था।  यहाँ पर कई सारे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं इनके साथ ही यहाँ का बाणासुर का किला भी काफी मशहूर है। अन्य पर्यटन स्थलों में पंचेश्वर मंदिर, मायावती आश्रम, माउंट एबट आदि हैं। इन जगहों पर आप दोस्तों के साथ हॉलिडे सेलिब्रेट कर सकते हैं।

तो ये थीं कुछ ऐसी जगहें जहाँ पर आप अपने दोस्तों और फॅमिली के साथ एन्जॉय कर सकते हैं।  और अपनी बोरिंग थकन और भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में कुछ एक्सिटिंग कर सकते हैं जहाँ आपको शांति और सुकून का भी अहसास होगा।

 

लेओनार्दो डा विन्ची को एलियन क्यों कहते थे ? कोई वजह तो होगी ?

ज्ञान डेस्क : दुनिया में कलाकारों की कमी नहीं है हर कलाकार की एक खूबी होती जो जिससे दुनिया उसको जानती है जैसे हर म्यूजिशियन का गाने का अपना तरीका होता है वैसे ही हर पेंटर का अपना स्टाइल होता है हर आर्टिस्ट आर्ट को एक नई दृस्टि से देखता है और अपनी इसी भिन्नता के चलते वो आर्ट के एक नए फॉर्म को जन्म देता है। आर्टिस्ट तो कई होते है लेकिन अपनी कला से दुनिया पर अपनी छाप छोड़ने वाले कुछ ही होते।  आज हम एक ऐसे ही आर्टिस्ट के बारे में बात करेंगे जिसने दुनिया को मोना लिसा की पेंटिंग जैसा मास्टरपीस दिया है

जी है !!! आप बिलकुल सही समझे हम इटली के मशहूर चित्रकार लिओनार्दो दा विंची के बारे में ही बात कर रहे। वैसे तो सभी आर्टिस्ट और ग्रेट माइंडस के बारे ऐसा कहा जाता है ये ज़्यादा सोशल नहीं होते और कई केसेस में ये बात सही भी साबित हुई है। लेकिन डा विन्ची को लेकर ऐसा कहा जाता है की इनका सम्पर्क एलियंस के साथ था वही कई लोगों तो ये तक मानते है की वो खुद ही एक एलियन थे।

इस बात में कितनी हकीकत है और कितना फसाना? आज हम उसी के बारे में जानेंगे। 14वीं शताब्दी में यूरोप पुनर्जागरण के काल से गुजर रहा था। उस दौरान यूरोप में  राजनीतिक,सांस्कृतिक,  कलात्मक, आर्थिक, शैक्षिक आदि कई क्षेत्रों में बदलाव भी हो रहे थे। यूरोपीय पुनर्जागरण के इस काल को रेनेसा काल के नाम से भी जाना जाता है। यूरोपीय पृष्ठभूमि पर 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच ऐसे कई लोगों का जन्म हुआ, जिन्होंने समाज की चिंतनधारा को एक नया मोड़ दिया एक नई धारा को जन्म देने वाले ऐसे कई लोगों के नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज है । उन्हीं में से एक थे लिओनार्दो दा विंची। लिओनार्दो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे लेखक, चित्रकार, दार्शनिक, इंजीनियर, आर्किटेक्ट काफी कुछ थे। डा विन्ची के बनाए हुए चित्रो की कीमतें आज करोड़ो में है।  इस आधुनिक दौर में रिसर्चर उनके कार्यों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। जिसमे कई चौकाने वाली बातें सामने निकल कर आई हैैं।

da vinci के कार्यों का अध्ययन के बाद कई रिसर्चर ने इस बात का दावा किया कि लिओनार्दो दा विंची ने अपनी लाइफ में अपने work में जो भी किया वह कुछ एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ही था इतना ही नहीं उनमें कहीं-कहीं एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल लाइफ यानि की एलियन लाइफ का प्रभाव दिखता है। इतना ही नहीं दुनिया के अलग अलग हिस्सों में लोग डा विन्ची के बनाए चित्रों में छुपे हुए उस रहस्यमय संदेश को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, लोगो का मन्ना है की अगर इन पेंटिंग्स में छुपे राज़ सामने आ गए तो कई कई रहस्यों से पर्दा उठ सकता है के सवालो के जवाब मिल सकते है ।

एक रिसर्च ने इस बात का दावा किया है कि डा विन्ची की विश्व प्रसिद्द पेंटिंग मोनालिसा में एक जगह एलियन छिपा हुआ है। रिसर्च की माने तो अगर मोनालिसा की पेंटिंग को एक शीशे के बिल्कुल साथ में रखकर उसका रिफ्लेक्शन देखा जाए तो, उसमें आपको एक एलियन देखने को मिलेगा।

वहीँ कुछ लोग का मानना है की डा विन्ची खुद भी एक एलियन थे जिसमे लोकप्रिय यूएफओ ब्लॉगर स्कॉट सी भी शामिल है  स्कॉट के अनुसार लिओनार्दो दा विंची खुद भी एक एलियन थे और इसका जिक्र उन्होंने अपनी वेबसाइट पर किया है। स्कॉट के मुताबिक लिओनार्दो डा विन्ची की असीमित बुद्धि और मेधा इस बात की और इशारा करता है की वो धरती से नहीं थे बल्कि वो खुद एक एलियन थे। सकॉट का मन्ना है की लेओनार्दो डा विन्ची इस ग्रह के निवासी नहीं थे और उनकी बनाई गयी पेंटिंग में जो सेरेट मैसेज है अगर उसका पता चल जाये तो इस बात की पुष्टि हो सकती है की वो एलियन थे ।

लेकिन क्या आप जानते है की लोगो के ऐसा कहने की वजह क्या है ? या लोग इतने ग्रेट आर्टिस्ट लेओनार्दो डा विन्ची को एलियन क्यों कहते थे ? कोई वजह तो होगी ?

वजह है उनकी दूरदर्शी सोच समय से आगे का नज़रिया। लिओनार्दो की कई पेंटिंग्स को अगर आप देखे तो उनमे आपको उड़नतश्तरियों यानि UFO के चित्र देखने को मिलेंगे। लेकिन गौर करने वाली बात ये है की उस वक्त  उड़नतश्तरियों थी ही नहीं तो ऐसे में ये सवाल उठता है की लिओनार्दो को कैसे पता था कि ये मशीनें ऐसी दिखती हैं? जब उनका अविष्कार भी नहीं हुआ था। बात सिर्फ यही ही नहीं खत्म होती है बल्कि दा विंची ने उस समय हेलीकॉप्टर का भी कॉन्सेप्ट सबके सामने अपनी चित्रकारी के माध्यम से रखा था। इसके अलावा उनकी पेटिंग्स में ऐसी कई मशीनें देखी जा सकती हैं, जिनका उस समय अविष्कार भी नहीं हुआ था। उनकी इन सब खोजों और समय से भी आगे की चित्रकारी को देखने के बाद कई लोगों का कहना है कि हो ना हो लिओनार्दो दा विंची का संबंध किसी एलियन लाइफ से था या वो खुद ही एक एलियन थे।

कैबिनेट से कपड़ा क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी, गन्ना उत्पादकों को राहत

अब डा विन्ची एलियन थे या नहीं या उनका संबंध एलियन से था या नहीं इस बात पर तो अभी भी शोध चल रहा है और डिबेट्स जारी है इस पर सबका अपना नजरिया है लेकिन एक तो पक्की है की डा विन्ची की सोच अपने समय से बहुत आगे थी और उन्ही के जैसे कई ग्रेट माइंडस हमारे बीच जन्मे जिन्होंने दुनिया को अलग नज़रिये से देखते हुए उनका नक्शा ही बदल दिया हाँ ये हम सब से काफी अलग थे लकिन यही बात इनकी ताकत बनी और इन्होने अपनी अलग सोच से दुनिया को एक नई राह दिखाई नई दिशा दी नए इन्वेंशंस से अपनी संबंधित फील्ड को चेंज किया और दुनिया को दूसरे पर्सपेक्टिव से यूनिवर्स दिखाया।

सेक्स स्कैंडल को रोकने के लिए BCCI ला रहा है सख्त गाइडलाइंस!

डिजिटल डेस्क: बीसीसीआई में पहले भी आर्थिक भ्रष्टाचार के कई आरोप सामने आ चुके हैं। भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग के आरोपों से पूरी तरह मुक्त नहीं है। वित्तीय भ्रष्टाचार या मैच फिक्सिंग या अनुशासन भंग के आरोपों की स्थिति में आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर भी बोर्ड के पास स्पष्ट दिशानिर्देश हैं। लेकिन, अगर यौन शोषण का कोई आरोप लगता है तो आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी? या फिर जांच कैसे आगे बढ़ाई जाए, इस बारे में कोई स्पष्ट गाइडलाइन बोर्ड नहीं है।

बोर्ड उस गाइडलाइन को सौरव गांगुली युग के ऐतिहासिक फैसले के साथ तैयार करने जा रहा है। यह अफवाह है कि भारतीय क्रिकेट में सेक्स स्कैंडल को रोकने के लिए बीसीसीआई जल्द ही स्पष्ट दिशा-निर्देश लेकर आएगा। अंतिम फैसला 20 सितंबर को बोर्ड की शीर्ष परिषद की बैठक में लिया जाएगा। सच कहूं तो भारतीय क्रिकेट में अब तक यौन उत्पीड़न के ऐसे कोई आरोप नहीं लगे हैं। इसलिए बोर्ड ने ऐसे किसी कानून की जरूरत महसूस नहीं की। लेकिन हाल ही में बीसीसीआई के पूर्व सीईओ राहुल जौहरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। और उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया। तब से, बोर्ड ने सेक्स स्कैंडल को रोकने के लिए कानून लाने की आवश्यकता महसूस करना शुरू कर दिया है।

लेओनार्दो डा विन्ची को एलियन क्यों कहते थे ? कोई वजह तो होगी ?

एक और अहम मुद्दे पर 20 सितंबर को बोर्ड की शीर्ष परिषद की बैठक में चर्चा होगी। कोरोना महामारी के कारण कई घरेलू क्रिकेट मैच लगभग दो सीजन के लिए रद्द कर दिए गए हैं। नतीजतन, घरेलू क्रिकेटरों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। बोर्ड उन क्रिकेटरों को आर्थिक मुआवजा देने के लिए कदम उठा रहा है।

इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात में 19 सितंबर से शुरू हो रहे आईपीएल पर बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल की बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। आगामी टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर भी बातचीत होगी। हालांकि, बोर्ड के शिखर सम्मेलन में यौन उत्पीड़न विरोधी दिशा-निर्देश चर्चा का मुख्य विषय होंगे।

कैबिनेट से कपड़ा क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी, गन्ना उत्पादकों को राहत

 डिजिटल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक हुई. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अनुराग टैगोर ने कैबिनेट को फैसले की जानकारी दी। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को राहत दी है और किसानों के लिए एक बड़ा ऐलान भी किया है.

कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना की घोषणा की गई थी। अगले 5 वर्षों के लिए 10 अलग-अलग उत्पादों के लिए 10,683 करोड़ रुपये से अधिक का पैकेज दिया जाएगा। सरकार ने आलसी कपड़ा उद्योग को पुनर्जीवित करने या पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई में यह राशि आवंटित की थी। योजना के तहत छोटे शहरों की कंपनियों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। पीयूष गोयल ने कहा कि मुख्य रूप से गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा जैसे राज्यों को परियोजना से लाभ होगा। कपड़ा मंत्रालय ने पहले ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव या पीएलआई योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इस पैसे से सरकार ने गारमेंट्स में सुधार, रोजगार को बढ़ावा देने और निर्यात क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

पीएलआई योजना के तहत, केंद्र अधिशेष उत्पादन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा और कंपनियों को भारत में बने उत्पादों के निर्यात की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य निवेशकों को प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

उत्तराखंड के राज्यपाल ने दिया इस्तीफा, जानिए चुनाव से ये पदत्याग कितना अहम है

इतना ही नहीं केंद्रीय कैबिनेट ने गन्ना किसानों के लिए बड़ा ऐलान भी किया है. नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में गन्ना किसानों के लिए अब तक के सबसे ऊंचे उचित और लाभकारी मूल्य 290 रुपये प्रति क्विंटल को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा सरकार ने 2022-23 मार्केटिंग सीजन के लिए रॉबी फसल का एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है।

उत्तराखंड के राज्यपाल ने दिया इस्तीफा, जानिए चुनाव से ये पदत्याग कितना अहम है

 डिजिटल डेस्क : उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राष्ट्रपति को अपना त्याग पत्र सौंपा है। राज्यपाल के सचिव बीके संत ने मामले की पुष्टि की। बेनी रानी मौर्य ने 26 अगस्त को उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में अपना तीन साल का कार्यकाल समाप्त कर दिया।

दो दिन पहले नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद उनके इस्तीफे पर चर्चा तेज होने लगी थी। उत्तर प्रदेश बीजेपी में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने की बात हो रही है. वहीं, राज्य का नया राज्यपाल कौन होगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है।

हाल ही में बेबी क्वीन मौर्य ने राज्यपाल के रूप में तीन साल पूरे करने के बाद मीडिया से संपर्क किया। उन्होंने राज्य में महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण के मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाएं मेहनती और संघर्षरत हैं। राजभवन की ओर से महिलाओं को बेहतर सहयोग प्रदान करने के लिए भविष्य में विशेष प्रयास किए जाएंगे।

तीन साल पहले उत्तराखंड की राज्यपाल का पद संभालने वाली आगरा की रहने वाली बेबी रानी मौर्य राज्य की दूसरी महिला राज्यपाल थीं. इससे पहले मार्गरेट अल्वा राज्य की राज्यपाल थीं।

केंद्र का ऐतिहासिक फैसला, अब NDA में शामिल हो सकेंगी महिलाएं

यह उनका सार्वजनिक-राजनीतिक जीवन है

1995 से 2000 तक आगरा के मेयर रहे।

1997 में, वर्तमान अध्यक्ष और तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोबिंद ने कोषाध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के साथ काम किया।

– 2001 में राज्य समाज कल्याण बोर्ड के सदस्य।

2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य।

मान सम्मान-

– समाज रत्न 1996 में सामाजिक कार्य के लिए।

1997 में उत्तर प्रदेश रत्न।

– 1998 महिला रत्न

अब तक उत्तराखंड के राज्यपाल

यहां है टर्म

सुरजीत सिंह बरनाला – 09 नवंबर 2000 – 07 जनवरी 2003

सुदर्शन अग्रवाल – 08 जनवरी 2003 – 28 अक्टूबर 2007

बनवारी लाल जोशी – 29 अक्टूबर 2007 – 05 अगस्त 2009

मार्गरेट अल्वा – 06 अगस्त 2009 – 14 मई 2012

अजीज कुरैशी – 15 मई 2012 – 08 जनवरी 2015

कृष्णकांत पॉल – 08 जनवरी 2015- 25 अगस्त 2018

बेबी रानी मौर्य – 26 अगस्त 2018- 08 सितंबर 2021

केंद्र का ऐतिहासिक फैसला, अब NDA में शामिल हो सकेंगी महिलाएं

डिजिटल डेस्क: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में महिलाओं की भागीदारी को लेकर केंद्र ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब से महिलाएं भी एनडीए में शामिल हो सकेंगी। केंद्र ने तीनों सेना प्रमुखों से चर्चा के बाद यह फैसला लिया।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के माध्यम से भारतीय सेना (जल, भूमि और वायु) के तीनों डिवीजनों में अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश में सेना एक सम्मानजनक ताकत है. हालांकि, बल में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए और अधिक किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा, ‘हम सेना द्वारा महिलाओं को एनडीए में शामिल करने के लिए लिए गए फैसले से खुश हैं. हम जानते हैं कि यह सुधार रातोंरात नहीं हो सकता।’

देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की शिकायतों में 46 फीसदी की बढ़ोतरी

एनडीए में महिलाओं को कैसे शामिल किया जा सकता है, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है. देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र को प्रवेश प्रक्रिया के बारे में विवरण देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की गई है।

तालिबान संकट के बीच रूस के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार ने अजीत डोभाल से की मुलाकात

डिजिटल डेस्क: अमेरिकी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के प्रमुख विलियम बर्न्स ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। डोभाल ने बाद में बुधवार को रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलाई पेट्रोशेव से मुलाकात की। मंगलवार को तालिबान ने अपनी नई सरकार की घोषणा की। प्रधान मंत्री मोहम्मद हसन अखुंद हैं। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी है। इस लिहाज से भारत के साथ अमेरिका-रूस की मुलाकात का एक अलग ही महत्व माना जा रहा है।

रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलाई पेट्रोसेव दो दिवसीय यात्रा पर बुधवार को भारत पहुंचे। अजीत डोभाल बुधवार को उनके साथ बैठक में बैठे। पता चला है कि डोभाल से मुलाकात के अलावा वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी फोन पर बातचीत करेंगे. मोदी और पुतिन ने 24 अगस्त को फोन पर बात की थी। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत के बाद पेट्रोशेव भारत के दौरे पर हैं।

बेकार है ‘पीएचडी, मास्टर डिग्री! तालिबान के नए शिक्षा मंत्री का बयान

डोभाल और बर्न्स के बीच वास्तव में क्या कहा गया, इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि तालिबान की वापसी के पीछे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सुरक्षा स्थिति में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति भी उस चर्चा में सबसे आगे मानी जा रही है। इस बीच, जानकार सूत्रों ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली में सीआईए प्रमुख के साथ अजीत डोभाल की बैठक भी महत्वपूर्ण थी।

अफगानिस्तान में तालिबान शासन की मान्यता को लेकर पूरी दुनिया बंटी हुई है। पाकिस्तान, रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की मान्यता केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है। क्योंकि अमेरिका को घेरने के लिए मास्को और बीजिंग पिछले सात साल से तालिबान से बातचीत कर रहे हैं। वह प्रयास इस बार फलदायी रहा है। इसी तरह, अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए तालिबान इस्लामाबाद का मुख्य हथियार है। बाकी यूरोपीय देश और अमेरिका हैं। भले ही फिलहाल इसे मान्यता न दी गई हो, लेकिन तालिबान पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ऐसी स्थिति में अमेरिका और रूस भारत के साथ समय-समय पर मिलते रहते हैं।

देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की शिकायतों में 46 फीसदी की बढ़ोतरी

 डिजिटल डेस्क: क्या पिछले साल की तुलना में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं? राष्ट्रीय महिला आयोग को प्रस्तुत की गई शिकायतों की गणना भी यही दर्शाती है। जहां 2020 में 13 हजार 618 शिकायतें दर्ज की गईं, इस बार पहले 6 महीनों में 19 हजार 953 शिकायतें दर्ज की गईं। और इन शिकायतों में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से आया है। दूसरे शब्दों में कहें तो पिछले कुछ सालों की तरह महिलाओं के खिलाफ हिंसा के आरोपों में योगी साम्राज्य सबसे ऊपर है. फिर दिल्ली है। कुल मिलाकर शिकायतों की संख्या में पिछली बार से 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अखिल भारतीय मीडिया स्रोत के अनुसार, उत्तर प्रदेश से 10,064 शिकायतें दर्ज की गई हैं। संयोग से, पिछले साल यह बताया गया था कि पिछले चार वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दिल्ली से 2,147 शिकायतें मिली हैं। सूची के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र का स्थान है। इन दोनों राज्यों से क्रमश: 995 और 984 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। पश्चिम बंगाल सूची में शीर्ष चार राज्यों में नहीं है।

हांगकांग में बंद होने हो ने जा रहा विद्रोही मीडिया,पिछले साल बंद हुआ था “एप्पल डेली”

जुलाई में सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं। अकेले उस महीने में, 3,248 प्रतियां जमा की गईं। यह जून 2015 के बाद से एक महीने में दर्ज शिकायतों की सबसे अधिक संख्या है।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के आरोपों की संख्या क्यों बढ़ी? महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने कहा कि ऐसा आयोग के जागरूकता कार्यक्रम के प्रभाव के कारण हुआ है. उन्होंने दावा किया कि आयोग के लगातार अभियान के परिणामस्वरूप लोग अब पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो गए हैं. और यही वजह है कि शिकायतों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है। उनके शब्दों में, “आयोग महिलाओं के साथ खड़े होने के लिए नए कदम उठा रहा है। हमने एक पूर्णकालिक हेल्पलाइन भी शुरू की है।”

आयोग को किस तरह की शिकायत दर्ज कराई गई है। हेसाब का कहना है कि दायर की गई अधिकांश शिकायतें सम्मान के साथ जीने के अधिकार के बारे में हैं। 6 हजार 36. फिर घरेलू हिंसा की 4,269 शिकायतें हैं। उसके बाद विवाहिता पर उत्पीड़न के 2,923 आरोप लगे। बलात्कार और अभद्रता के क्रमशः 1,022 और 1,117 आरोप हैं।

बेकार है ‘पीएचडी, मास्टर डिग्री! तालिबान के नए शिक्षा मंत्री का बयान

डिजिटल डेस्क: तालिबान सरकार का ऐलान मंगलवार रात को हुआ. और फिर अफगानिस्तान के नए शिक्षा मंत्री ने बताया कि आजकल पीएचडी या मास्टर्स डिग्री का मूल्य नहीं है। क्योंकि किसी मुल्ला के पास ऐसा नहीं है। फिर भी वे सर्वश्रेष्ठ हैं।

शेख मौलवी नुरुल्ला मुनीर अफगानिस्तान के नए शिक्षा मंत्री बने हैं। और फिर उसने व्यावहारिक रूप से बम विस्फोट कर दिया। “आज, पीएचडी या मास्टर डिग्री बेकार है,” उन्होंने कहा। आप जानते हैं कि मुल्ला और तालिबान अब सत्ता में हैं। उनके पास कोई पीएचडी या एमए की डिग्री नहीं है। हाई स्कूल की डिग्री भी नहीं। फिर भी वे सर्वश्रेष्ठ हैं।”

तालिबान ने मंगलवार रात अपने नए कैबिनेट सदस्यों के नामों की घोषणा की। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रधान मंत्री मोहम्मद हसन अखुंद हैं। मुल्ला अब्दुर गनी बरादर उप प्रधान मंत्री के रूप में बैठे हैं। हालांकि, वह अकेले नहीं हैं, दूसरे डिप्टी मौलवी हनफी हैं। विदेश मंत्री अबास स्टानिकजई हैं, और रक्षा मंत्री मोल्ला याकूब हैं। गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी हैं। मुनीर शिक्षा मंत्री भी हैं। हालांकि, तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह वर्तमान में कार्यकारी कैबिनेट में है।

कुख्यात उग्रवादी हैं अफगानिस्तान के नए प्रधानमंत्री! कौन है यह मुल्ला अखुंद?

15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अंधकार युग फिर से शुरू हुआ। तब से पूरी दुनिया चिंतित है। पूरी दुनिया में तालिबान के आतंक का खौफनाक नजारा देखने को मिला है। जान बचाने के लिए आम लोग बेखौफ सड़कों पर दौड़ पड़े। प्रमुख लोगों को भी नहीं छोड़ा गया था। तालिबान के देश पर कब्जा करने के बाद एक राष्ट्रीय टीम का फुटबॉलर अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़ना चाहता था। लेकिन नेटिज़न्स विमान से गिरने के बाद उनकी मौत से सदमे में हैं। काबुलीवाला देश की उबड़-खाबड़ मिट्टी पर आज भी खून के धब्बे हैं। अफगान लोगों को काफी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। इस बात का डर बढ़ता जा रहा है कि आने वाले दिनों में देश का आर्थिक ढांचा चरमरा जाएगा.

 

ब्राजील-अर्जेंटीना मैच रद्द होने से नाराज फीफा, जानिए क्या है कारण ?

डिजिटल डेस्क: ब्राजील की पुलिस अर्जेंटीना के चार फुटबॉलरों से पूछताछ कर रही है। चारों पर साओ पाउलो में विश्व कप क्वालीफायर में खेलने के लिए आने पर झूठी सूचना देने का आरोप है।

पिछले रविवार को ब्राजील बनाम अर्जेंटीना विश्व कप क्वालीफायर मैच शुरू होने के सात मिनट के भीतर समाप्त हो गया। ब्राजील की स्वास्थ्य एजेंसी अंविसा के मुताबिक इंग्लैंड में खेल रहे चार फुटबॉलरों ने कोरोना के नियम तोड़े हैं। वे एमिलियानो मार्टिनेज, एमिलियानो बेंडिया, जियोवानी ला सेल्सो और क्रिश्चियन रोमेरो हैं। अन्विसा ने यह भी कहा कि अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ को पता था कि उनके चार फुटबॉल खिलाड़ी नियमों का पालन नहीं करते हैं। ब्राजील पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ संभावित उम्मीदवार कौन है? आज लगेगा मुहर

इस बीच, अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के कोच लियोनेल स्कालोनी ने बोलीविया के खिलाफ विवादास्पद चार फुटबॉलरों को नहीं खेलने का फैसला किया है। अर्जेंटीना का सामना 10 सितंबर को बोलीविया से होगा। मार्टिनेज को अपने क्लब में लौटने के लिए कहा गया है। गोलकीपर मार्टिनेज और मिडफील्डर बुएंडिया एस्टन विला में वापस आ गए हैं। रोमेरो और सेल्सो टोटेनहम लौट आए। हालांकि, अर्जेंटीना ने अभी तक यह घोषणा नहीं की है कि चारों की जगह कौन लेगा। फीफा जांच करने उतरी है। फीफा ने जांच के बाद मैच की तारीख की घोषणा करने का फैसला किया है।

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो अर्जेंटीना-ब्राजील मैच के रद्द होने से हैरान हैं। मैच अधिकारी के अलावा किसी को भी मैदान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इस निर्देश की अनदेखी करते हुए उस दिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मैदान में उतर आए। इस घटना से फीफा अध्यक्ष नाराज हैं। कॉनमेबोल ने फीफा को पूरी घटना की सूचना पहले ही दे दी है। फीफा पूरे मामले की जांच कर रही है। फीफा की अनुशासन समिति रेफरी और मैच कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर मैच के भाग्य का फैसला करेगी। फीफा के एक बयान में कहा गया है: “कॉनमेबोल ग्रुप में ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच मैच को बंद करने को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। दुनिया के दो सर्वश्रेष्ठ देशों के बीच फुटबॉल मैच देखने से लाखों दर्शक वंचित रह गए हैं। उसके लिए खेद है। अगला फैसला मैच मैनेजरों की रिपोर्ट की जांच के बाद लिया जाएगा।”

कुख्यात उग्रवादी हैं अफगानिस्तान के नए प्रधानमंत्री! कौन है यह मुल्ला अखुंद?

डिजिटल डेस्क: काफी अटकलों के बाद आखिरकार अफगानिस्तान की कैबिनेट का ऐलान हो गया है. उग्रवादी मंत्रिमंडल के नए प्रमुख मोहम्मद हसन अखुंद हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी अखुंद अब अफगानिस्तान के प्रधान मंत्री हैं। और यहाँ सवाल है। पिछले कुछ दिनों में तालिबान सरकार के चेहरे के रूप में मुल्ला बरादर या अखुंदजादा का नाम बार-बार सुना जा रहा है. उन्हें हटाने के बाद अचानक उस देश के मसनद में अखुंद को देखकर सवाल उठता है कि यह अखुंद कौन है? उन्हें सरकार के शीर्ष पर क्यों रखा गया है?

हमेशा से पाकिस्तान के करीबी रहे अखुंद 20 साल तक क्वेटा के क्वेटा सुरा के मुखिया भी रहे हैं. अपेक्षाकृत मध्यम। वह अखुंदजादा या मुल्ला बरादार जैसा कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं है। हालांकि अखुंद का नाम यूएन की आतंकियों की लिस्ट में है। ऐसे व्यक्ति को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री बनाना स्वाभाविक रूप से विवाद पैदा कर दिया है।

 ये भी पढ़े :  हांगकांग में बंद होने हो ने जा रहा विद्रोही मीडिया,पिछले साल बंद हुआ था “एप्पल डेली”

लेकिन यह तथ्य कि तालिबान सुप्रीमो हैबतुल्ला अखुंदजादा प्रधान मंत्री मोहम्मद हसन अखुंद के करीबी हैं, कम से कम आश्चर्य की बात नहीं है। पता चला है कि अखुंदजादा ने खुद अपने अनुयायी का नाम सुझाया है। इस बीच उनका पाकिस्तान से संबंध भी एक वजह माना जा रहा है.

पिछले शनिवार को आईएसआई प्रमुख फैयाज हामिद अफगानिस्तान पहुंचे। उन्होंने अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री गुलबुद्दीन हिकमतयार से मुलाकात की। उन्होंने मुल्ला बरादार से भी मुलाकात की। तालिबान सरकार के गठन के पीछे गुलबुद्दीन का विशेष प्रभाव है। इस बीच, मुल्ला को उप प्रधान मंत्री के रूप में सौंपा गया है। तालिबान सरकार के गठन में पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि इन दो प्रभावशाली लोगों के साथ आईएसआई प्रमुख की बैठक के बाद अखुंद को प्रधान मंत्री के रूप में चुना गया था।

कंधार में जन्मे, अखुंड ने पहले 1996-2001 तक तालिबान के विदेश मंत्री और उप प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया। माना जाता है कि इन सभी अनुभवों ने तब काम किया जब उनके नाम पर प्रधान मंत्री के रूप में विचार किया गया।

हांगकांग में बंद होने हो ने जा रहा विद्रोही मीडिया,पिछले साल बंद हुआ था “एप्पल डेली”

डिजिटल डेस्क: हांगकांग में चीन का उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। साम्यवादी देश ने प्रांत का विशेष दर्जा ले लिया है और लोकतंत्र की हत्या कर दी है। बीजिंग मीडिया पर शासन को उखाड़ फेंकने का दबाव बना रहा है। नतीजतन हॉन्ग कॉन्ग की ‘बागी’ मीडिया ‘नेक्स्ट डिजिटल’ इस बार बंद होने वाली है।

रविवार को जारी एक रिपोर्ट में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि कंपनी नेक्स्ट डिजिटल के साथ संबंध तोड़ने वाली थी। कंपनी के निदेशक मंडल के अधिकांश सदस्यों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया है। क्योंकि जिनपिंग प्रशासन के दबाव में कारोबार करना लगभग नामुमकिन सा हो गया है। यह कहना अच्छा है कि बीजिंग ने नेक्स्ट डिजिटल के बैंक खाते को पहले ही फ्रीज कर दिया है। संगठन के प्रमुख और लोकतंत्र समर्थक टाइकून जिमी लाई कई महीनों से जेल में हैं। कुल मिलाकर, बीजिंग हांगकांग में स्वतंत्र मीडिया को चुप कराने की कोशिश में कोई गलती नहीं कर रहा है।

बता दें कि हांगकांग का ‘बागी’ अखबार एप्पल डेली पिछले जून में बंद कर दिया गया था। पत्रिका करोड़पति लाई की कंपनी नेक्स्ट डिजिटल का चेहरा थी। Apple Corps ने चीन पर हांगकांग के विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। अखबार के प्रधान संपादक और पांच अन्य शीर्ष पत्रकारों को जून में गिरफ्तार किया गया था। यह अंत नहीं है, कंपनी की सारी संपत्ति बाद में फ्रीज कर दी गई है। नतीजतन, ऐप्पल डेली कर्मचारियों को भुगतान करने या कंपनी चलाने की क्षमता खो देता है।

य़े भी पढ़े :  भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ संभावित उम्मीदवार कौन है? आज लगेगा मुहर

Apple डेली का स्वामित्व हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक नेता और अरबपति जिमी लाई के पास है। अखबार ने हमेशा बीजिंग के उत्पीड़न और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई है। शी जिनपिंग के प्रशासन ने पिछले कुछ महीनों से स्वायत्त प्रांत में जिमी लाई को देशद्रोह के आरोप में हिरासत में लिया है। जून 2020 में, चीन ने हांगकांग पर एक विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा विधेयक पारित किया, जिसका अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में विरोध हुआ। विवाद को नजरअंदाज करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘हांगकांग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ नामक विधेयक पर हस्ताक्षर किए। इसने स्वायत्त प्रांत पर बीजिंग की भीड़ को और मजबूत किया है।

भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ संभावित उम्मीदवार कौन है? आज लगेगा मुहर

डिजिटल डेस्क : केवल 22 दिन। इस महीने के अंत तक भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 30 सितंबर को उपचुनाव होना है. जैसी कि उम्मीद थी, तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस सीट से चुनाव लड़ेंगी। लेकिन बीजेपी ने अभी यह तय नहीं किया है कि उम्मीदवार कौन होगा. हालांकि 8 नामों की सूची पहले ही दिल्ली भेजी जा चुकी है। शीर्ष नेतृत्व उनमें से एक के नाम पर मुहर लगाएगा।

सूची में कौन है? अभिनेता रुद्रनिल घोष, तथागत रॉय, अनीऱबन गांगुली, वकील प्रियंका टिबरेवाल, प्रताप बनर्जी) और बिस्वजीत सरकार। वह भाजपा नेता अभिजीत सरकार के दादा हैं, जिनकी कंकुरगाछी में हत्या कर दी गई थी। भाजपा नेता तथागत रॉय ने इससे पहले ट्विटर पर मृतक कार्यकर्ताओं के परिवार के सदस्यों की उम्मीदवारी की गुहार लगाई थी। कारण बताया गया कि मृतक भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों को अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों की जानकारी लोगों को देनी चाहिए। इनमें विश्वजीत सरकार का नाम लिस्ट में काफी अहम है।

भाजपा सांसद अर्जुन सिंह घर पर हामला, CRPF को भी बनाया गया निशाना

ममता बनर्जी का औसत भवानीपुर है. तो यह बिना कहे चला जाता है कि भाजपा उस सीट के लिए उम्मीदवारों के चयन में थोड़ी सावधानी बरत रही है। सुनने में आया है कि कई लोग उस सीट के लिए लड़ने को तैयार नहीं हैं। इसलिए भाजपा भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों पर हर तरफ से थोड़ा दबाव बना रही है। हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने मंगलवार को कहा कि भवानीपुर प्रत्याशी के नाम की घोषणा बुधवार को की जाएगी। कल साफ हो जाएगा कि कौन मुख्यमंत्री से आमने-सामने भिड़ेगा। इस बीच इन तमाम तनावों के बीच नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी मंगलवार को दिल्ली गए। वह अमित शाह के साथ बैठक करेंगे।

भाजपा सांसद अर्जुन सिंह घर पर हामला, CRPF को भी बनाया गया निशाना

डिजिटल डेस्क : गर्म भाटपारा इलाके में आधी रात को फिर बमबारी की गई. इस बार बराकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह पर हमला हुआ है. कथित तौर पर मंगलवार आधी रात को उनके घर पर तीन बम फेंके गए। हालांकि इस तरह से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घर की दीवार पर हमले के निशान हैं। आधी रात को हुई इस घटना से आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सांसद अर्जुन सिंह की शिकायत सिर्फ उनके घर की नहीं है. बदमाशों के निशाने पर उनकी सुरक्षा में तैनात केंद्रीय बलों के जवान भी थे। बराकपुर से बीजेपी सांसद पुलिस की निष्क्रियता के लिए जमीनी बदमाशों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

स्थानीय सूत्रों के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे भाटपारा में अर्जुन सिंह के घर पर बम फेंका गया. कुछ दीवारों को कथित तौर पर थोड़ा क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। कथित तौर पर उनके घर के सामने तैनात सीआरपीएफ जवानों के ठिकाने पर भी बमबारी की गई. कुछ देर के लिए जवानों को बचा लिया गया।

UN के ‘दागी’ आतंकवादी हैं आफगान प्रधान मंत्री, तालिबान द्वारा घोषित कैबिनेट

फिलहाल अर्जुन सिंह खुद भाटपारा में नहीं, दिल्ली में हैं। आधी रात को अपने घर पर बम हमले की खबर मिलने के बाद उन्होंने वहीं से अपनी अंतिम चिंता व्यक्त की. पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनके सुरक्षा गार्ड भी खतरे में हैं। बैरकपुर के भाजपा सांसद ने इसके लिए स्थानीय जमीनी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। सांसद के घर के सामने हुए बम विस्फोट की खबर मिलते ही जगदल पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस सूत्रों ने बताया कि मौके से नमूने एकत्र कर जांच शुरू कर दी गई है।

इस बीच, भाजपा नेतृत्व ने बराकपुर में एक भाजपा सांसद के घर के सामने हुए हमले की कड़ी निंदा की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के शब्दों में, ”आज ही नहीं, तृणमूल उस दिन से उन पर हमला बोल रही है, जब से वह तृणमूल छोड़कर हमारी पार्टी में शामिल हुए थे. राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है, यह इस घटना से साबित होता है। यहां तक ​​कि एक सांसद को भी कोई सुरक्षा नहीं है। लेकिन इस तरह अर्जुन सिंह का सिर नहीं झुकाया जा सकता। वह लड़ेगा। ” राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने घटना की खबर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक ट्वीट में घटना की सूचना देने में पुलिस की भूमिका की आलोचना की। स्थानीय नेतृत्व ने भाजपा सांसद के घर के सामने हुए बम विस्फोट में तृणमूल के शामिल होने से इनकार किया है।

इंडोनेशिया की एक जेल में लगा भीषण आग, आग लगने से 41 लोगों की मौत

डिजिटल डेस्क : इंडोनेशिया की एक जेल में भीषण आग लग गई। इस घटना में कम से कम 41 कैदियों के मारे जाने की खबर है। कई घायल हो गए।

एएफपी के अनुसार, इंडोनेशियाई द्वीप जावा की एक जेल में बुधवार तड़के आग लग गई। और आश्चर्यजनक रूप से लेलिहान की लौ बहुत जल्दी जेल में फैल गई। पूरा प्रांगण काले धुएं से ढका हुआ था। उस समय अधिकांश कैदी सो रहे थे। इतने सारे लोग समय निकालने के लिए बाहर नहीं आ सके। नतीजतन, दम घुटने और जलने के कारण कम से कम 40 कैदियों की मौत हो गई। कई अन्य बंदी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन का मानना ​​है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि घायलों में कई की हालत गंभीर है।

इंडोनेशिया की एक जेल में लगा भीषण आग, आग लगने से 41 लोगों की मौत

जकार्ता के पुलिस प्रमुख फादिल इमरान ने राजधानी जकार्ता के पास तंगेरांग जेल में हुई घटना पर एक बयान जारी किया है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ”इस घटना में 41 कैदियों की मौत हुई है. आठ कैदी गंभीर रूप से घायल हो गए। कम से कम 72 लोग घायल हो गए लेकिन उनकी हालत अब स्थिर है। मैंने घटनास्थल का दौरा किया। शुरूआत में ऐसा लग रहा है कि आग शार्ट सर्किट से लगी है। हालांकि, जांच जारी है।”

Time Management Tips : ऐसे करे अपने लक्ष्य को पूरा

ध्यान दें कि इंडोनेशिया की जेलों में भीड़भाड़ के आरोप हैं। वहीं, कई लोगों का दावा है कि इस लिहाज से अग्निशमन और सुरक्षा के मुद्दे को महत्व नहीं दिया जाता है। तंगेरांग जेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से ड्रग तस्करों के लिए किया जाता है। हालांकि, 600 की क्षमता वाली इस जेल में फिलहाल कम से कम 2,000 कैदी हैं। इस बार तंगरंग जेल की घटना स्थिति की भयावहता को फिर से स्पष्ट कर रही है।

UN के ‘दागी’ आतंकवादी हैं आफगान प्रधान मंत्री, तालिबान द्वारा घोषित कैबिनेट

डिजिटल डेस्क: अफगानिस्तान के मंत्रिमंडल की आखिरकार घोषणा कर दी गई है। तालिबान ने पंजशीर पर कब्जे और सांप्रदायिक तनाव के निपटारे के बाद मंगलवार रात कैबिनेट सदस्यों के नामों की घोषणा की। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रधान मंत्री मोहम्मद हसन अखुंद हैं। मुल्ला अब्दुर गनी बरादर उप प्रधान मंत्री के रूप में बैठे हैं। हालांकि, वह अकेले नहीं हैं, दूसरे डिप्टी मौलवी हनफी हैं।

अखुंद न केवल प्रधानमंत्री हैं, बल्कि तालिबान के सबसे शक्तिशाली विद्रोही सूरह समूह के प्रमुख भी हैं। अखुंदजादा के करीबी दोस्त मोहम्मद हसन अखुंद हमेशा से पाकिस्तान रहे हैं। प्रधानमंत्री पद के लिए खुद हेबतुल्लाह अखुंदजादाई ने अपना नाम प्रस्तावित किया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि हसन अखुंद की अफगानिस्तान के प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण है।

उसी दिन तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अफगान कैबिनेट के कई सदस्यों के नामों की घोषणा की। विदेश मंत्री अबास स्टानिकजई हैं, और रक्षा मंत्री मोल्ला याकूब हैं। गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी हैं। हालांकि, तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह वर्तमान में कार्यकारी कैबिनेट में है। उनकी घोषणा के अनुसार, तालिबान के सबसे शक्तिशाली पुनरुद्धार सूरह समूह का प्रमुख मोहम्मद हसम अखुंद-ए है।

कौन देखेगा WhatsApp का ‘लास्ट सीन’? आप तय करें, आ रहा है नया अपडेट

इस संदर्भ में यह कहना अच्छा है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के वर्तमान प्रधान मंत्री अखुंद के करीब है। वह कभी तालिबान के क्वेटा सूरह के प्रमुख थे। अपेक्षाकृत मध्यम। वह अखुंदजादा या मुल्ला बरादार जैसा कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं है। हालांकि अखुंद का नाम यूएन की आतंकियों की लिस्ट में है। ऐसे व्यक्ति को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री बनाना स्वाभाविक रूप से विवाद पैदा कर दिया है।

अस्पताल में भर्ती फुटबॉल के सम्राट पेले, जानिए कैसे हैं फुटबॉल सम्राट?

 

 

अस्पताल में भर्ती फुटबॉल के सम्राट पेले, जानिए कैसे हैं फुटबॉल सम्राट?

डिजिटल डेस्क: बीमार फुटबॉल सम्राट और ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी पेले। अस्पताल में भर्ती। वहां उनकी सर्जरी भी हुई थी। हालांकि, वह पहले की तुलना में तेजी से ठीक हो रहे हैं। साओ पाउलो अस्पताल ने प्रशंसकों को आश्वासन दिया है कि बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गई है।

नियमित कार्डियोवैस्कुलर और अन्य शारीरिक परीक्षाओं के दौरान पेल के कोलन में ट्यूमर पाया गया था। पैथोलॉजिकल टेस्ट के बाद ही डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि की। इसके बाद ही पेल पर संचालन करने का निर्णय लिया गया। 70 वर्षीय दिग्गज की पिछले शनिवार को साओ पाउलो के अल्बर्ट आइंस्टीन अस्पताल में सफल सर्जरी हुई थी। हालांकि वह फिलहाल इंटेंसिव केयर यूनिट में हैं, लेकिन मंगलवार को फुटबॉल बादशाह को वहां से बाहर लाया जाएगा। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पेल पहले से ज्यादा स्वस्थ हैं।

कोरोना कर्फ्यू में ढील: अब यूपी में बाजार रात 11 बजे तक खुले रहेंगे दुकानें

इससे पहले पेले को 31 अगस्त को रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह बात खुद फुटबॉल सम्राट ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कही। बाद में कोलन ट्यूमर का पता चलने के बाद फ़ुटबॉल सम्राट ने सर्जरी के बाद भी एक पद बनाया। साथ में लिखा, “सभी के संदेश के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। ईश्वर की अनंत कृपा। डॉ. फैबियो और डॉ. मिगुएल ने मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया। पिछले शनिवार को मेरे कोलन में ट्यूमर के लिए मेरी सर्जरी हुई थी। मैंने आपकी तरफ से बहुत कुछ जीता है। मैं यह मैच मुस्कान के साथ खेलूंगा। मेरे परिवार और दोस्तों के प्यार ने भी मुझे काफी ताकत दी है।”

एआईएमआईएम में शामिल अतीक अहमद की पत्नी, हमारा लक्ष्य भाजपा को हराना है: ओवैसी

पेले इतिहास के एकमात्र ऐसे फुटबॉलर हैं जिन्होंने तीन विश्व कप जीते हैं। उन्होंने अपने 21 साल के करियर में 1,383 मैचों में 1,281 गोल किए हैं। फुटबॉल के दिग्गज ने ब्राजील के लिए 91 मैचों में 6 गोल किए हैं। उन्होंने 1970 विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए फीफा गोल्डन बॉल पुरस्कार भी जीता। हालांकि, शरीर कई सालों से ठीक नहीं चल रहा है उन्होंने न्यूरोलॉजिकल समस्या के लिए 2015 में स्पाइनल सर्जरी भी करवाई थी। फुटबॉल के दिग्गज को किडनी और प्रोस्टेट की समस्या के साथ एक से अधिक बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें दिसंबर 2016 में मास्को में रूस विश्व कप में व्हीलचेयर पर देखा गया था। फिलहाल पेल के ठीक होने की खबर मिलने के बाद फुटबॉल प्रशंसक राहत की सांस ले रहे हैं हालांकि, फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि अस्पताल से निकलने के बाद वह क्या करेंगे?

कौन देखेगा WhatsApp का ‘लास्ट सीन’? आप तय करें, आ रहा है नया अपडेट

 डिजिटल डेस्क: व्यक्तिगत संचार के साधन के रूप में व्हाट्सएप की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इस बार पॉपुलर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म एक नया फीचर लाने जा रहा है, जिसका नेट वर्ल्ड के निवासी काफी समय से इंतजार कर रहे थे। अब आप अपना लास्ट सीन (अर्थात पिछली बार जब आपने व्हाट्सएप चेक किया था), स्टेटस और प्रोफाइल पिक्चर को अपनी इच्छानुसार गुप्त रख सकते हैं।

 Webitinfo के मुताबिक WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी सेटिंग्स में बदलाव करने जा रहा है। लास्ट सीन के लिए अब तक तीन प्राइवेसी सेटिंग्स हो चुकी हैं। एक तो सभी को आपका स्टेटस, प्रोफाइल पिक्चर और लास्ट सीन दिखाई देगा। इसके लिए आपको एवरीवनऑप्शन को सेलेक्ट करना था। दो, केवल आपके फ़ोन पर सहेजे गए नंबर, यानी आपके संपर्कके लोग इसे देखेंगे। उस स्थिति में माई कॉन्टैक्ट्सको चुनना था। तीसरा, आपका स्टेटस, प्रोफाइल पिक्चर और लास्ट सीन कोई नहीं देख पाएगा। जिसके लिए कोई नहींका चयन करना पड़ा। इस बार इसके साथ एक नया ऑप्शन जुड़ने जा रहा है।

 वह विकल्प माई कॉन्टैक्ट्स को छोड़करहै। यहां आप अपनी संपर्क सूची के उन नंबरों से विशिष्ट नंबर चुन सकते हैं जिन्हें आप नहीं देखना चाहते। यह नया फीचर एंड्रॉयड और आईओएस दोनों फोन पर उपलब्ध होगा।

 हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन नंबरों को कैसे जोड़ा जाएगा। लेकिन आप उन लोगों का आखिरी सीन नहीं देखेंगे जिन्हें आप अपना आखिरी सीन देखने की इजाजत नहीं देते हैं। हालांकि अभी पूरा मामला जांच के स्तर पर है। माना जा रहा है कि फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी जल्द ही इसकी घोषणा कर सकती है।

Time Management Tips : ऐसे करे अपने लक्ष्य को पूरा

चाहे वह आपकी नौकरी में हो या आपकी जीवनशैली में, [ Time Management Tips ]अपने समय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना सीखना आपको अधिक आराम, केंद्रित और नियंत्रण में महसूस करने में मदद कर सकता है। चार्टर्ड ऑक्यूपेशनल साइकोलॉजिस्ट एम्मा डोनाल्डसन-फील्डर कहती हैं, “अच्छे समय प्रबंधन का उद्देश्य अपनी इच्छित जीवनशैली संतुलन हासिल करना है।”

छत्तीसगढ़ के सीएम के पिता गिरफ्तार

अपने लक्ष्यों को पूरा करें

एम्मा कहती हैं, “आप कौन बनना चाहते हैं, जीवन में अपनी प्राथमिकताएं, और आप अपने करियर या निजी जीवन में क्या हासिल करना चाहते हैं, इस पर काम करें।” “यह तब मार्गदर्शक सिद्धांत है कि आप अपना समय कैसे व्यतीत करते हैं और आप इसे कैसे प्रबंधित करते हैं।”

एक बार जब आप [ Time Management Tips ] बड़ी तस्वीर पर काम कर लेते हैं, तो आप कुछ अल्पकालिक और मध्यम अवधि के लक्ष्यों पर काम कर सकते हैं। “अपने लक्ष्यों को जानने से आपको बेहतर योजना बनाने और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी जो आपको उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेंगी,” एम्मा कहती हैं।

कोरोना वैक्सीन को लेकर केरल सरकार को उच्च न्यायालय ने दिया दिशा-निर्देशित

[ Time Management Tips ] एक सूची बनाये

टू-डू लिस्ट संगठित रहने का एक अच्छा तरीका है। “इसे आज़माएं और देखें कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या काम करता है,” एम्मा कहती है। वह कई सूचियों का ट्रैक खोने से बचने के लिए एकल टू-डू सूची रखना पसंद करती है। “एक सूची रखने से आपको अपनी प्राथमिकताओं और [ Time Management Tips ] समय पर काम करने में मदद मिलेगी। यह आपको गैर-जरूरी कार्यों को बंद करने में मदद कर सकता है।” सुनिश्चित करें कि आप अपनी सूची को कहीं पहुंच योग्य रखें। उदाहरण के लिए, यदि आपके पास हमेशा आपका फोन है, तो इसे अपने फोन पर रखें।

Mysore : सिक्का निगलने से हुई 3 साल बच्ची की मौत

परिणामों पर ध्यान दें

काम पर अच्छे समय प्रबंधन का मतलब है उच्च गुणवत्ता वाला काम करना, उच्च मात्रा में नहीं। एम्मा सलाह देती हैं कि आप इस बात पर ध्यान केंद्रित न करें कि आप [ Time Management Tips] कितने व्यस्त हैं, बल्कि परिणामों पर ध्यान दें। “किसी चीज़ पर अधिक समय बिताने से जरूरी नहीं कि अधिक हासिल हो,” वह कहती हैं। “दिन के अंत में काम पर एक अतिरिक्त घंटे रहना आपके समय का प्रबंधन करने का सबसे प्रभावी तरीका नहीं हो सकता है।”

आफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं पर की फायरिंग, जानिए क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ के सीएम के पिता गिरफ्तार

सर्व ब्राह्मण समाज ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पिता नंद कुमार बघेल ने उत्तर प्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से “ब्राह्मणों का बहिष्कार” करने का आग्रह किया और उन्हें “विदेशी” करार दिया।

नंद कुमार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल को मंगलवार को रायपुर की एक स्थानीय अदालत ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने कहा। अग्रवाल ने कहा कि उन्हें अदालत में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। 86 वर्षीय नंद कुमार बघेल पर पिछले हफ्ते कथित तौर पर यह कहने के लिए मामला दर्ज किया गया था कि ब्राह्मणों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

कोरोना वैक्सीन को लेकर केरल सरकार को उच्च न्यायालय ने दिया दिशा-निर्देशित

धारा

अधिकारियों के मुताबिक सर्व ब्राह्मण समाज की शिकायत पर सीएम के पिता के खिलाफ अलग-अलग गुटों में दुश्मनी को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया गया है. “भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (1) (बी) (कारण के इरादे से, या संभावित रूप से) के तहत मामला दर्ज किया गया था। नंद कुमार बघेल (86) के खिलाफ जनता, या जनता के किसी भी वर्ग के लिए डर या अलार्म, जिससे किसी भी व्यक्ति को राज्य के खिलाफ या सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, “अजय यादव, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी , शनिवार को कहा।

Mysore : सिक्का निगलने से हुई 3 साल बच्ची की मौत

ब्राह्मण समाज

सर्व ब्राह्मण समाज ने छत्तीसगढ़ के सीएम के पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि नंद कुमार बघेल ने लोगों से “ब्राह्मणों का बहिष्कार” करने का आग्रह किया और उन्हें उत्तर प्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान “विदेशी” करार दिया।

आफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं पर की फायरिंग, जानिए क्या है पूरा मामला?

कोई भी कानून से ऊपर नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिता को बुक किए जाने के बाद “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है”। भूपेश भगेल ने कहा, “मेरी सरकार में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, भले ही वह मुख्यमंत्री के 86 वर्षीय पिता हों।” “मेरी सरकार के सामने हर व्यक्ति समान है। मेरे पिता के साथ मेरे वैचारिक मतभेदों के बारे में सभी जानते हैं।

हमारे राजनीतिक विचार और विश्वास अलग हैं। मैं उन्हें उनके बेटे के रूप में सम्मानित करता हूं लेकिन एक सीएम के रूप में मैं उन्हें ऐसे बयानों के लिए माफ नहीं कर सकता जो सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ते हैं, ”उन्होंने एक बयान में कहा।

कोरोना वैक्सीन को लेकर केरल सरकार को उच्च न्यायालय ने दिया दिशा-निर्देशित

 डिजिटल डेस्क: केरल उच्च न्यायालय ने कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी खुराक 74 दिन पूरे होने से पहले देने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने दोनों संगठनों के आवेदन पर यह आदेश दिया। स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में कॉइन विन पोर्टल के कर्मचारियों का टीकाकरण करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार ने आज कोविशील्ड की पहली खुराक के चार सप्ताह बाद दूसरी खुराक दी, जैसा कि दोनों एजेंसियों ने अनुरोध किया था।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सवाल किया कि अगर इन दोनों संगठनों के कर्मचारियों को विदेश जाने के लिए सुरक्षा मुहैया कराने के मकसद से को-शील्ड टिकर को मंजूरी दी गई तो दूसरे संगठनों के कर्मचारी जो काम के सिलसिले में विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें क्यों मंजूरी दी गई. या शिक्षा को यह अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। दोनों संगठनों ने अदालत को बताया कि उन्होंने प्रत्येक कर्मचारी और उसके परिवार के सदस्यों के लिए सरकार के टीकों पर निर्भर न होकर, अपनी पहल पर टीकाकरण की व्यवस्था की थी।

कोर्ट ने कहा, निजी क्षेत्र से पैसे का टीका लगवाने के लिए तैयार लोगों को वह मौका क्यों नहीं दिया जाना चाहिए? दोनों कंपनियों के मुताबिक, कोविशील्ड की दूसरी खुराक के लिए 84 दिन के वेटिंग नियम के चलते उनकी विदेश यात्राओं में देरी हो रही थी। इसलिए वे असाधारण रिहाई के लिए अदालत जाते हैं। उस मामले के फैसले में कोर्ट ने कोविशील्ड की खुराक में अंतर को कम करने का निर्देश दिया है.

कोविशील्ड में दो टिकों के बीच के समय अंतराल को लेकर पहले से ही कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। केंद्र पहले ही भारत में सबसे आम टीके की दो खुराक के बीच के समय अंतराल को एक से अधिक बार बढ़ा चुका है। कोविशील्ड के पहले टीकाकरण के बाद कम से कम 64 के बाद दूसरा टीका लगाने का नियम इस समय देश में लागू है। टीकाकरण की शुरुआत में यह अंतराल चार से छह सप्ताह का था। बाद में इसे थोड़ा बढ़ाकर 6 सप्ताह कर दिया गया। कोविशील्ड की दो खुराक के बीच के अंतराल को बाद में बढ़ाकर 12 सप्ताह कर दिया गया। यहीं से बहस शुरू होती है। इस बार हाईकोर्ट के फैसले से इस अंतर को कम किया गया।