Thursday, April 30, 2026
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कोविड -19: भारत में नए मामलों में 20% की गिरावट, संक्रमण दर 15.7% से घटकर 11.6% हुई

नई दिल्ली: Covid-19: देश में रोजाना कोरोना के मामले में भारी कमी आई है. पिछले 24 घंटों में कोरोना ने 1,67,059 नए मामले दर्ज किए हैं। कोरोना के मामलों में करीब 20 फीसदी की कमी आई है. कल देश में 2.09 लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे. वहीं, देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 1,192 मौतें दर्ज की गई हैं. हालांकि, मरने वालों की संख्या में केरल में 638 मौतों का एक बैकलॉग भी जोड़ा गया है।

देश में संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी और ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने से भी सक्रिय मामलों की संख्या में कमी आई है. देश में सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 18,43,059 हो गई है। कल देश में 18.31 लाख एक्टिव केस थे। वहीं, कुल मामलों में सक्रिय मुकदमेबाजी की हिस्सेदारी 4.20 फीसदी रही।

पिछले 24 घंटे में देश में ठीक होने वालों की संख्या 2,54,076 दर्ज की गई है, तो ठीक होने वालों की कुल संख्या 3,92,30,198 हो गई है।

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देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी के साथ ही दैनिक सकारात्मकता की दर में भी कमी आई है। देश में दैनिक सकारात्मकता दर 11.69 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि साप्ताहिक सकारात्मकता दर 15.25 प्रतिशत है।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक देश में 18.7 करोड़ टीके दिए जा चुके हैं। वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के लिए 14,28,672 परीक्षण किए गए हैं, इसके बाद देश में अब तक कुल 73.06 करोड़ कोरोना परीक्षण हुए हैं।

फटे होंठों से राहत देंगे ये 3 असरदार तरीके, तुरंत होगा फायदा

नई दिल्ली : सर्दियों के मौसम में स्किन से जुड़ी कई समस्याएं हो जाती हैं और इससे आपके होंठ भी फटने लगते हैं। अगर आप भी इस मौसम में होंठों के फटने की समस्या से परेशान हैं तो कुछ आसान तरीके अपनाएं। इससे तुरंत फायदा मिलेगा।

शहद
सर्दियों में फटे होंठ से निजात पाने के लिए शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। शहद में एंटीबैक्टीरियल और घाव भरने वाले हीलिंग गुण होते हैं, जो होंठों के फटने की समस्या को दूर करेंगे।

मलाई
मलाई का इस्तेमाल इसे आप स्वाद के लिए तो अक्सर खाते होंगे, लेकिन मलाई को होंठों पर लगाने से फटे होंठ की समस्या से राहत मिल सकती है।

नारियल तेल
नारियल तेल का इस्तेमाल भी होंठों के फटने की समस्या को दूर करेगा। नारियल तेल में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं, जो होंठों के फटने की समस्या को दूर करते हैं। रात को सोते समय होंठों पर नारियल तेल लगाएं। खाने में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

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सिंह व कुंभ राशि के जातक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें, पढ़ें अपना मंगलवार का राशिफल

आज मौनी अमावस्या है तथा श्रवण नक्षत्र है तथा चन्द्रमा व सूर्य एकसाथ मकर राशि में रहेंगे। शनि मकर व मंगल शुक्र धनु में है। गुरु कुम्भ में गोचर कर रहे हैं। शेष ग्रह स्थितियां पूर्ववत हैं। आज मेष व कन्या राशि के जातक व्यवसाय में सफलता की प्राप्ति करेंगे। वृष व तुला राशि के छात्र जॉब में नवीन अवसरों की प्राप्ति करेंगे। सिंह व कुंभ राशि के जातक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें तो बेहतर है। आइए अब आज का विस्तृत राशिफल जानते हैं।

1 फरवरी 2022 राशिफल: मेष- आज का दिन आपके लिए बहुत ही अनुकूल है। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा। काम में देरी से लाभ की मात्रा सीमित होगी। आर्थिक मामलों को गंभीरता से लें। नौकरी और व्यावसायिक स्थान पर वातावरण अनुकूल रहेगा। आज आप अपने ऑफिस या परिवार के सदस्यों के लिए भी भाग्यशाली साबित होने वाले हैं। इस अवसर का लाभ उठाएं और दूसरों की मदद करें। वह आपको इस मदद के लिए ढेर सारी आशीषें देंगे। हर कदम सावधानी से उठाने की जरूरत है। जोखिम भरी गतिविधियों से दूर रहें। लेनदेन के मामले में शुल्क लिया जा सकता है। आंतरिक ऊर्जा को बाहर निकालने का प्रयास करें।

वृष राशिफल – आज आपके प्रेम जीवन में माता-पिता के विचारों का बोलबाला रहेगा, आप अपने पुराने साथी से आश्चर्यजनक रूप से मिलेंगे। आपको लगेगा कि आप कल साथ थे। पुरानी यादें ताजा होंगी। आज आपको बिजनेस का कोई बड़ा मौका मिलने वाला है।

मिथुन- आज आपका दिन पहले से बेहतर रहेगा. आप अपनी ऊर्जा का उपयोग अच्छे कार्यों में कर सकते हैं। इस राशि का लाभ सरकारी कर्मचारियों को मिल सकता है। आपको अपनी मेहनत के अनुसार फल मिल सकता है। नए व्यवसाय के सिलसिले में की गई यात्रा लाभकारी हो सकती है।

कर्क- आज का दिन आपके और आपके परिवार के लिए सुख-शांति लेकर आएगा. प्रकृति ने आपको आत्मविश्वास और तेज दिमाग का आशीर्वाद दिया है। इसलिए इनका भरपूर उपयोग करें। यह आसपास के लोगों के साथ मिलकर काम करने का दिन है। घर से जुड़ी योजनाओं पर विचार करने की जरूरत है।

सिंह – इस समय काम की मांग के अनुसार आपको काफी मेहनत करनी पड़ सकती है. इस समय आपका करियर और कार्यक्षेत्र बदल रहा है, इसलिए आपको मेहनत करनी चाहिए। इसलिए आपको अपने क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों को समझने के लिए कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए। इस मामले में आप जितना अधिक समय व्यतीत करेंगे, आपको आने वाले समय में उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।

कन्या- आज आप कोई जरूरी घरेलू काम निपटाने में सफल रहेंगे. प्रेम-संबंध में आपको कोई सुखद सरप्राइज मिलेगा, जिससे आपका दिन बेहतर बनेगा। दोस्तों के साथ आउटिंग पर जाने से आपको खुशी मिलेगी। पैसों से जुड़ी चिंताएं दूर होंगी। साथ ही रुका हुआ पैसा भी मिलेगा।

तुला- आज आप अपने जीवन को लेकर कुछ तनाव में रहेंगे। तनाव कम करने के लिए आपको अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर जाना चाहिए। अगर आप आज किसी सामाजिक समारोह में जा रहे हैं तो वहां आपको कई लोगों से मिलने का मौका मिलेगा। आज आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। लेकिन अति उत्साही होने से बचें। दूसरों की सलाह लें। दबी हुई समस्याएं फिर से उभर सकती हैं और आपको मानसिक तनाव दे सकती हैं।

वृश्चिक- अचानक कोई खोई हुई वस्तु मिलेगी। यह एक प्यारा उपहार, कोई मूल्यवान चीज या कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हो सकता है। जो भी हो, इसे अभी रखें और इसे पाने की खुशी के लिए अपने सितारों को धन्यवाद दें। आज आपका प्यार रोजमर्रा की जिंदगी में आम बात हो जाने की उम्मीद है। इससे बचने के लिए आप कुछ उपाय करें तो बेहतर होगा।

धनु- नौकरीपेशा जातकों के लिए आज का दिन लाभकारी है। उन्हें काम से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिलेगा। सही योजना से आप अपने करियर में बदलाव लाने में सक्षम होंगे। कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करने में आप सफल रहेंगे। आपके सुखद व्यवहार से घर में खुशियों का माहौल बनेगा। जीवनसाथी के साथ रोमांटिक शाम का कार्यक्रम बनेगा, जिससे संबंधों में मधुरता आएगी। आपका दिन शानदार रहेगा।

मकर- आज आपको रोजगार में सफलता मिलेगी, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. रोमांस के मामले में दिन अच्छा है, दूसरों को अनचाही सलाह न दें। मन में नए विचार आ सकते हैं, नए मित्र बन सकते हैं। किसी अनजान व्यक्ति पर विश्वास न करें। किसी से वाद-विवाद हो सकता है। आप परिवार के सदस्यों और भाई-बहनों के साथ खुशी-खुशी समय बिता पाएंगे। प्रतिस्पर्धियों को परास्त करने में सफल रहेंगे।

कुंभ- आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यह काफी हद तक संभव है कि ऑफिस में आपको कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे आपको आर्थिक लाभ मिलेगा। आर्थिक सफलता आपके जीवन में न सिर्फ नई चमक लाएगी बल्कि तरक्की के और भी कई रास्ते खुलेंगे।

मीन राशि- आज आपमें आत्मविश्वास की अधिकता हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। आज आप परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा की योजना बना सकते हैं। आप व्यापार में लाभ कमा सकते हैं, जिससे आपका दिन अच्छा रहेगा। आपका स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा।

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भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र से जुड़ी है रथ सप्तमी की कथा !

हर साल बसंत पंचमी  के बाद सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है. इसे सूर्य देव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि इसी दिन ही कश्यप ऋषि और अदिति के संयोग से भगवान सूर्य का जन्म हुआ था. सूर्य देव अपने सात घोड़े वाले रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे. इस कारण ये दिन रथ सप्तमी के नाम से जाना जाता है. रथ सप्तमी के दिन को लोगों को रोग मुक्त करने वाला और पुत्र कामना की पूर्ति करने वाला भी माना जाता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र भी रथ सप्तमी के दिन ही सूर्य का ​तप करने के बाद रोग मुक्त हुए थे. इस कारण इस दिन को आरोग्य सप्तमी  और पुत्र सप्तमी  के नाम से भी जाना जाता है. इस बार रथ सप्तमी 7 फरवरी 2022 को मनाई जाएगी. इस मौके पर जानिए रथ सप्तमी की व्रत कथा और महत्व के बारे में.

ये है व्रत कथा
रथ सप्तमी के दिन की कथा भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब से जुड़ी हुई है. कथा के अनुसार एक बार सांब को अपने शारीरिक बल पर बहुत अभिमान हो गया. सांब कभी भी किसी का भी अपमान कर देता था. एक दिन दुर्वासा ऋषि भगवान श्रीकृष्ण से मिलने आए, तो वो काफी दुर्बल नजर आ रहे थे. सांब ने जैसे ही उसे देखा तो मजाक बनाना शुरू कर दिया. दुर्वासा ​ऋषि का खूब मजाक बनाया.

दुर्वासा ऋषि काफी क्रोधी स्वभाव के थे, तो उन्हें सांब की इस उदंडता पर क्रोध आ गया और उन्होंने उसे कुष्ठ रोगी होने का श्राप दे दिया. इससे परेशान सांब ने जब पिता श्रीकृष्ण से इस पाप का प्रायश्चित पूछा तो उन्होंने सूर्य उपासना करने के लिए कहा. कहा जाता है कि सांब ने पिता की बात मानकर सूर्य उपासना की, इसके बाद रथ सप्तमी के दिन वो रोगमुक्त हो गया. तब से लोगों के बीच ये मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन सूर्यदेव की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलती है.

रथ सप्तमी का महत्व
रथ सप्तमी को सूर्य पूजन के अलावा दान-पुण्य के लिहाज से काफी शुभ माना जाता है. इस दिन सूर्य से जुड़ी चीजें जैसे तांबा, गुड़, लाल वस्त्र आदि दान करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन सूर्य की पूजा व व्रत करने से तमाम बीमारियों से मुक्ति मिलती है. कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रबल होती है. इसके अलावा नि:संतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है. करियर में आ रहीं बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को तरक्की मिलती है.

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सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि अपनी भव्यता के लिए भी प्रसिद्ध हैं सूर्य के ये पांच प्रमुख मंदिर

सनातन परंपरा से जुड़े देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो न सिर्फ अपनी आस्था के लिए बल्कि अपनी भव्यता और रोचक तथ्यों के लिए जाने जाते हैं. प्रतिदिन प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले सूर्य देव  के देश में कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं. ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर  से लेकर गुजरात के मोढ़ेरा स्थित सूर्य मंदिर तक सभी सूर्य मंदिर के साथ कोई न कोई धार्मिक कथा या कोई अनोखा धार्मिक-आध्यात्मिक राज छिपा हुआ है. आइए देश के ऐसे पांच प्रमुख सूर्य मंदिर  के बारे में विस्तार से जानते हैं.

कोणार्क का सूर्य मंदिर
भगवान सूर्यदेव के प्रसिद्ध मंदिरों में कोणार्क का नाम सबसे पहले आता है. ओडिशा में स्थित कोणार्क के सूर्य मंदिर देश के 10 बड़े मंदिरों में गिना जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने की थी. अपने भीतर तमाम तरह के रहस्य को समाहित किये हुए यह मंदिर ओडिशा राज्य के पुरी शहर से लगभग 23 मील दूर चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित है. मंदिर का निर्माण कुछ ऐसे किया गया है जैसे एक रथ में 12 पहिए लगे हों. इन पहियों को 12 महीने का प्रतीक माना जाता है. इस मंदिर की अद्वितीय मूर्तिकला और इससे जुड़ी कहानियां इस मंदिर को खास बनाती हैं. इस मंदिर की खासियत है कि सूर्योदय की पहली किरण मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से टकराती है.

औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर
बिहार के औरंगाबाद जिले में भगवान सूर्यदेव का एक ऐसा अनोखा सूर्य मंदिर है, जिसके द्वार पूर्व की बजाय पश्चिम की ओर है. देव सूर्य मंदिर  या फिर कहें देवार्क सूर्य मंदिर को त्रेतायुग का माना जाता है, जहां पर सात रथों पर सवार भगवान सूर्यदेव के तीन स्वरूप के दर्शन होते हैं. इसमें उदयाचल- उदित होते हुए, मध्याचल- अर्थात् दिन के मध्य समय और अस्ताचल- यानी अस्त हो रहे सूर्य का दर्शन होता है. इस सूर्य मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसका द्वार एक रात में अपने आप दूसरी दिशा की ओर बदल गया था.

मोढेरा का सूर्य मंदिर
मोढेरा सूर्य मंदिर गुजरात के पाटन नामक स्थान से 30 किलोमीटर दक्षिण की ओर मोढेरा गॉव में निर्मित है. यह सूर्य मन्दिर विलक्षण स्थापत्य और शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है. जिसे सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ई. में बनवाया था. मोढेरा का सूर्य मंदिर दो हिस्से में बना है, जिसमें पहला हिस्सा गर्भगृह का और दूसरा सभामंडप का है. मंदिर को कुछ तरह से बनाया गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें गर्भगृह में आती हैं. मंदिर के सभामंडप के पास ही सूर्यकुंड है. जिसे राम कुंड के नाम से जाना जाता है.

कश्मीर का मार्तंड मंदिर
देश के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में कश्मीर में स्थित मार्तंड मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध है. यह मंदिर कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में मार्तण्ड नामक स्थान पर है. मान्यता है कि इस सूर्य मंदिर को आठवीं सदी में कारकोटा वंश के राजा ललितादित्य ने बनवाया था. जिसे पंद्रहवी शताब्दी में सिकंदर बुतशिकन ने नष्ट कर दिया था. इस मंदिर में एक बड़ा सरोवर भी है.

आंध्र प्रदेश का सूर्यनारायण मंदिर
आंध्रप्रदेश में श्रीकाकुलम जिले के अरसावल्ली गांव से करीब 1 किमी पूर्व दिशा में भगवान सूर्य का लगभग 1300 साल पुराना भव्य मंदिर है. यहां पर भगवान सूर्य नारायण अपनी पत्नियों उषा और छाया के साथ पूजे जाते हैं. इस मंदिर की विशेषता है कि यहां साल में दो बार सीधे मूर्ति पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है. मान्यता है कि यहां पर भगवान सूर्य की मूर्ति को कभी कश्यप ऋषि ने विधि-विधान से प्रतिष्ठित किया था. इस मंदिर में भगवान सूर्यदेव के दर्शन मात्र से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

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भगवान शिव और रुद्राक्ष में क्या है संबंध, कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति?

 देवों के देव महादेव कहे जाने वाले भगवान शिव  बहुत दयालु हैं. भगवान भोलेनाथ  के अनेक भक्त हैं जो उन्हें प्रसन्न करने के लिए सोमवार का व्रत रखते हैं. भगवान शिव अपने भक्तों को संकट से उबारते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं. भगवान शिव को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं  प्रचलित हैं. जिसमें उनके बारे में बहुत सी बातें उल्लेखित है. आपने भगवान शिव को रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए देखा होगा. भगवान शिव से जुड़े होने के कारण रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि रुद्राक्ष को धारण करने मात्र से ही जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई. आइए जानते हैं.

दो शब्दों से मिलकर बना
दरअसल, रुद्राक्ष दो शब्दों से मिल कर बना है. जिसमें पहला शब्द रुद्र और दूसरा अक्ष. रुद्र का अर्थ होता है शिव और अक्ष का अर्थ आंख होता है.

देवी भागवत पुराण के अनुसार
देवी भागवत पुराण के अनुसार एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस त्रिपुरासुर था जिसे अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था. जिसके चलते उसने धरती पर सभी को परेशान करना शुरु कर दिया. उनसे देवताओं और ऋषियों को भी नहीं छोड़ा. उस राक्षस के बल के आगे देव या ऋषि कोई भी उसे हराने में कामयाब नहीं हुए. परेशान होकर ब्रह्मा, विष्णु और दूसरे देवता भगवान शिव के पास त्रिपुरासुर के वध की प्रार्थना लेकर गए. भगवान ने यह सब सुना तो वे द्रवित हुए और अपनी आंखें योग मुद्रा में बंद कर लीं.

जिसके थोड़ी देर बाद भगवान शिव ने अपनी आंखें खोली तो उनकी आंखों से आंसू धरती पर टपके. मान्यता है कि जहां जहां भगवान शिव के आंसू गिरे वहां-वहां रुद्राक्ष के वृक्ष उगे. रुद्र का अर्थ है ‘शिव’ और अक्ष मतलब ‘आंख’ जिसका अर्थ है शिव का प्रलयंकारी तीसरा नेत्र. इसलिए इन पेड़ों पर जो फल आए उन्हें ‘रुद्राक्ष’ कहा गया. इसके बाद भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से राक्षस त्रिपुरासुर का वध कर पृथ्वी और देवलोक को उसके अत्याचार से मुक्त कराया.

एक अन्य मान्यता के अनुसार माता सती ने जब हवनकुंड में कूद कर आत्मदाह कर लिया था तब महादेव ने उनके जले हुए शरीर को लेकर तीनों लोकों में विलाप करते हुए विचरण किया था. कहा जाता है शिव के विलाप के कारण जहां-जहां भगवान शिव के आंसू टपके वहां-वहां रूद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए.

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इन जगहों पर हैं रुद्राक्ष के वृक्ष
रुद्राक्ष के वृक्ष दक्षिण एशिया में जावा, भारत, नेपाल, मलेशिया और ताइवान में मुख्य रूप से पाए जाते हैं. वहीं भारत में असम, अरुणाचल प्रदेश और देहरादून जैसी जगहों पर रुद्राक्ष के पेड़ देखने को मिलते हैं.

 पंचांग: मंगलवार को है मौनी अमावस्या, पवित्र नदी में स्नान कर दान पुण्य करें, पढ़ें पंचांग

आज माघ माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। आज मौनी अमावस्या को पवित्र नदी में स्नान कर दान पुण्य करें। आज श्रवण नक्षत्र है। भगवान राम जी की उपासना के साथ हनुमान जी की पूजा भी करें। आज उड़द दान का बहुत महत्व है। विष्णु जी की विधिवत पूजा करें व श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। आज बजरंगबाण के पाठ करने का अनन्त पुण्य है। मंगल के बीज मंत्र के जप का दिवस है। चन्द्रमा मकर में है।

प्रातःकाल पंचांग का दर्शन, अध्ययन व मनन आवश्यक है। शुभ व अशुभ समय का ज्ञान भी इसी से होता है। अभिजीत मुहूर्त का समय सबसे बेहतर होता है। इस शुभ समय में कोई भी कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। विजय व गोधुली मुहूर्त भी बहुत ही सुंदर होता है। राहुकाल में कोई भी कार्य या यात्रा आरम्भ नहीं करना चाहिए।

आज का पंचांग 01 फरवरी 2022 (Today Panchang)

दिनांक 01 फरवरी 2022
दिवस मंगलवार
माह माघ, कृष्ण पक्ष
तिथि अमावस्या
सूर्योदय 07:09 am
सूर्यास्त 05:59 pm
नक्षत्र श्रवण
सूर्य राशि मकर
चन्द्र राशि मकर
करण नागव
योग व्यतिपात

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शुभ मुहूर्त- अभिजीत 12:15 pm से12:55 pm तक
विजय मुहूर्त 02:24 pm से 03:08 pm तक
गोधुली मुहूर्त 05:50 pm से 06:19 pm तक
राहुकाल का समय दोपहर 03 बजे से 04:30 बजे तक है। इस दौरान शुभ काम को करने से परहेज करें।

आईपीएल 2022: लखनऊ ने लॉन्च किया सुपरजायंट्स का लोगो

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग IPL के अगले सीजन (IPL-2022) में 2 नई टीमें शामिल होंगी। उनमें से एक लखनऊ फ्रेंचाइजी है जिसे लखनऊ सुपर जायंट्स कहा जाता है। टीम ने सोमवार को अपने लोगो का अनावरण किया। आरपी संजीव गोयनका के स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी ने भी सोशल मीडिया पर लोगों के बारे में कहानियां साझा कीं। लखनऊ टीम के लोगो में बाज के आकार में पंखों वाला बल्ला दिखाया गया है। फ्रेंचाइजी का पूरा नाम नीचे लिखा है।

लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने तलवार की तरह नुकीले जलते हुए बल्ले को छूती हुई गेंद का एक वीडियो क्लिप भी साझा किया। लोगो के बीच में एक गेंद के साथ एक बल्ला होता है। फ्रेंचाइजी का पूरा नाम नीचे लिखा है जो नीले रंग में है।

एक संदेश में कहा गया है कि लखनऊ फ्रेंचाइजी का लोगो प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित है। इनमें चील भी शामिल हैं, जिन्हें हवा में सबसे तेज गति वाला माना जाता है। ईगल ने हमें टीम का एक पंख वाला प्रतीक बनाने के लिए प्रेरित किया है। चील हर भारतीय संस्कृति में सर्वव्यापी है। यूनिट के तिरंगे पंख प्रतीकात्मक रूप से लखनऊ सुपर जायंट्स की अखिल भारतीय अपील का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसमें आगे लिखा है, ‘पक्षी का शरीर नीले बल्ले से क्रिकेट का प्रतिनिधित्व करने के लिए बना है, इसमें नारंगी रंग की सीम के साथ लाल गेंद भी है। यह एक खुश ‘जॉय तिलक’ की तरह है। लखनऊ सुपर जायंट्स हर भारतीय टीम है। यह एक ऐसी टीम है जो देश को एकजुट करती है।

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केएल राहुल लखनऊ टीम के कप्तान होंगे, जो 17 करोड़ रुपये में टीम से जुड़े थे। इससे पहले, उन्होंने पंजाब किंग्स का नेतृत्व किया। राहुल आईपीएल में अब तक के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी हैं, जिन्होंने हाल ही में एकदिवसीय श्रृंखला में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम की कमान संभाली है।

 अखिलेश यादव के बाद बीजेपी ने शिवपाल को घेरा, विवेक शाक्य को यशवंतनगर से बनाया उम्मीदवार

डिजिटल डेस्क : यूपी विधानसभा चुनाव (यूपी चुनाव 2022) के दौरान बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच जोरदार जंग छिड़ी हुई है. भाजपा आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल को मैनपुरी में करहल विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ खड़ा किया गया है, उसके बाद यशवंतनगर निर्वाचन क्षेत्र से उनके चाचा और प्रगतिशील इटावर हैं। समाजवादी पार्टी शिवपाल के खिलाफ विवेक शाक्य को टिकट दिया गया है। युवा नेता सिंह यादव

उल्लेखनीय है कि भाजपा ने अभी तक अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन सपा प्रमुख के नामांकन के बाद अचानक केंद्रीय मंत्री और आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल ने भी नामांकन दाखिल कर दिया. वहीं भाजपा सांसद के नामांकन के कुछ देर बाद ही भाजपा ने करहल सीट के अलावा इटावर यशोत्नगर विधानसभा से विवेक शाक्य और हमीरपुर से मनोज प्रजापति समेत तीन उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी.

जानिए कौन है विवेक
भाजपा ने जिस उम्मीदवार के साथ चुनाव लड़ा है वह यशवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के मलजानी के बाद नगला भिखर का रहने वाला है। विवेक शाक्य के पिता मनोज शाक्य इटावर जाने-माने समाजसेवी हैं। इतना ही नहीं विवेक 2012 से बीजेपी से जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के साथ मिलकर योगी सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम किया है.

यशवंतनगर एक समाजवादी किला है
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी अब तक यशवंतनगर विधानसभा चुनाव जीतने में नाकाम रही है, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने विरोधियों को चुनौती दी है। यादव वोटरों की बसी यह सीट समाजवादी पार्टी या फिर मुलायम परिवार के लिए फायदेमंद मानी जाती है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने बार-बार अपने उम्मीदवारों के माध्यम से समाजवादी पार्टी को प्रभावी रूप से चुनौती दी है, लेकिन कोई भी इस किले को तोड़ नहीं पाया है। हालांकि इस सीट पर यादव वोट बैंक के अलावा शाक्य, दलित लोधी और ठाकुर वोटरों की संख्या भी अहम है.

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उल्लेखनीय है कि मुलायम सिंह यादव पहली बार 1967 में यशोबंतनगर विधानसभा से चुने गए थे। तब से इस सीट पर मुलायम सिंह यादव के परिवार का कब्जा है। जहां 1996 से मुलायम सिंह यादव के भाई पीएसपीएल प्रमुख शिवपाल सिंह यादव विधायक के रूप में इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और छठी बार चुनाव मैदान में हैं.

 WHO ने भारत की आपत्तियों की दी चेतावनी ,जानिए क्या है मामला ?

डिजिटल डेस्क : सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट पर भारत की गलत मैपिंग का मुद्दा उठाया है। दरअसल, WHO के कोविड डैशबोर्ड में भारत का गलत नक्शा दिखाया गया था. यह भारत के जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में और अरुणाचल प्रदेश को चीन के हिस्से के रूप में दिखाता है। भारत सरकार ने WHO पर आपत्ति जताते हुए संसद में बयान जारी किया है. विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, “हमने इस मुद्दे को डब्ल्यूएचओ के सामने उठाया है और अपनी आपत्ति व्यक्त की है।”

हालांकि भारत की आपत्तियों को लेकर डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी किया है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, “डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर भारत के नक्शे को गलत तरीके से पेश करने का मुद्दा डब्ल्यूएचओ के साथ उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि भारत सरकार हमेशा अपनी सीमाओं के बारे में स्पष्ट रही है और डब्ल्यूएचओ और सीमाओं के सटीक विवरण के संबंध में भारत सरकार की स्थिति को दोहराया है।

भारत के गलत नक्शे पर क्या है WHO का दावा?
विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट पर भारत के नक्शे को गलत तरीके से पेश करने का मुद्दा डब्ल्यूएचओ सहित उच्चतम स्तर पर उठाया गया है, जहां कहा गया है कि” इस सामग्री की प्रस्तुति विश्व स्वास्थ्य संगठन या संगठन की ओर से किसी भी राय की अभिव्यक्ति का मतलब नहीं है। . अनुमानित सीमा रेखा को मानचित्र पर बिंदुओं और रेखाओं का उपयोग करके दिखाया गया है। अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।”

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तृणमूल सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
तृणमूल सांसद डॉ शांतनु सेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत का गलत नक्शा दिखा रहा है. सांसद ने लिखा, “जब मैंने WHO Covid19.int साइट पर क्लिक किया, तो एक दुनिया का नक्शा दिखाई दिया, और जब मैंने भारतीय हिस्से को ज़ूम इन किया, तो यह आश्चर्यजनक रूप से जम्मू-कश्मीर के लिए दो अलग-अलग रंग था। एक नीला नक्शा दिखाई दिया।” उन्होंने कहा कि जब उन्होंने नीले हिस्से पर क्लिक किया तो नक्शा उन्हें भारत का डेटा दिखा रहा था, लेकिन दूसरा हिस्सा पाकिस्तान का डेटा दिखा रहा था.

यूपी चुनाव 2022: भाजपा के कथनी और करनी में अंतर – काजल निषाद

यूपी चुनाव 2022, काजल निषाद: समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर की कैंपियरगंज विधानसभा सीट से अभिनेत्री काजल निषाद को मैदान में उतारा है। चुनाव प्रचार में जुटी काजल निषाद की मानें तो जनता चुनाव लड़ रही है, वह नहीं।

काजल निषाद को है जीत का पूरा भरोसा
समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर के कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र से सात भाषाओं में फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में अभिनय करने वाली अभिनेत्री काजल निषाद को मैदान में उतारा है। काजल निषाद बीजेपी उम्मीदवार और मौजूदा विधायक फतेह बहादुर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में जब बीजेपी घर-घर जाकर प्रचार कर रही है तो काजल निषाद ने अपनी और सपा की साख बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी है. काजल निषाद का कहना है कि लोग चुनाव लड़ रहे हैं, उनके नहीं। काजल निषाद अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं।

शिक्षा प्रसार का लक्ष्य है काजल निषाद
काजल निषाद के मुताबिक चुनाव जीतने के बाद उनका लक्ष्य शिक्षा का विस्तार करना होगा. उन्होंने कहा कि वह गोरखपुर के कैंपियरगंज में 300 टोला में लोगों से मिलने गए थे. वह गांव की कई महिलाओं से मिल चुका है। वह गांव के अंदर जा रहा है। एक महिला होने के नाते उन्हें कई तरह के फायदे मिल रहे हैं, जो वे घर से ही प्रचार कर सकती हैं। घर-घर जाकर घर का हाल देखा।

भाजपा के कथनी और करनी में अंतर
सपा प्रत्याशी काजल निषाद ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। सारा काम कागजों पर होता है। बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर इसका प्रचार-प्रसार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में काम नहीं हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य पर काम कर रहे हैं।

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काजल निषाद को फतेह बहादुर सिंह से होगी कड़ी टक्कर
काजल निषाद को मौजूदा भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह से कड़ी टक्कर मिलने वाली है, क्योंकि काजल कैंपियरगंज के लोगों के लिए अभी भी एक नया चेहरा हैं। 2012 से पहले, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें कैंपियरगंज से टिकट मिला। वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वह किस तरह लोगों की नजरों से ‘काजल’ चुराकर उनके दिलों में जगह बना लेते हैं.

यूपी चुनाव: अलग चुनावी समीकरण पर बैठी कांग्रेस, इस बार खुशी दुबे की मां और मुनब्बर राणा की बेटी को दिया टिकट

लखनऊ: विधानसभा चुनाव (यूपी विधानसभा चुनाव 2022) में हर पार्टी अलग-अलग तरीके से चुनावी समीकरण बनाने में लगी हुई है। कांग्रेस की बात करें तो इस बार पार्टी महिलाओं को सामने लाने का काम कर रही है. टीम ऐसे चेहरों के साथ आ रही है जो पहले से ही प्रसिद्ध हैं या किसी न किसी कारण से प्रसिद्ध चेहरों के करीब हैं। इस कड़ी में टीम ने दो नए महिला चेहरों को टिकट दिया है। बिकरू कांड में पति के गुनाहों की सजा भुगत रही खुशी दुबे की मां गायत्री तिवारी को कांग्रेस ने सोमवार को ब्राह्मणों की मदद के लिए टिकट दिया. वहीं लंबे समय से योगी सरकार पर निशाना साधने वाले कवि मुनव्वर राणा की बेटी उरुसा राणा को भी टिकट देकर मैदान में उतारा गया है.

प्रियंका का वादा निभा रही है टीम
उल्लेखनीय है कि यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश की आधी आबादी यानी महिलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. कांग्रेस ने सबसे पहले यूपी में किसानों, युवाओं, महंगाई और ग्रामीण-गरीबों से जुड़े मुद्दों को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया। अब पार्टी लगातार चुनाव में महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतार रही है। दरअसल, यूपी विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी द्वारा महिलाओं को दिए गए 40 फीसदी टिकट को भरने के लिए कांग्रेस ने 125 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची में 50 महिलाओं को टिकट दिया है.

कांग्रेस ने फिर 41 उम्मीदवारों की दूसरी सूची में 36 महिलाओं को और 69 उम्मीदवारों की तीसरी सूची में 36 महिलाओं को और फिर 8 उम्मीदवारों की पांचवीं सूची में 24 महिला उम्मीदवारों के साथ 71 उम्मीदवारों की चौथी सूची में 3 महिलाओं को टिकट दिया. उम्मीदवार। ऐसे में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस द्वारा घोषित कुल 322 उम्मीदवारों में से अब तक 130 महिलाओं पर दांव लगाया है, जो कुल टिकटों का 40 फीसदी से अधिक है.

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टीम अब तक कई नामी चेहरों को टिकट दे चुकी है। इनमें उन्नाव के उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा सिंह, कानपुर की खुशी दुबे की मां गायत्री तिवारी और लखीमपुर पंचायत चुनाव में एक ट्वीट का शिकार हुई महिला भी शामिल हैं. उन्नाव ने मुनब्बर राणा की बेटी उरुसा राणा, किसान आंदोलन में एक कार्यकर्ता पूनम पांडे, सीएए-एनआरसी के विरोध में जेल जाने वाले सदफ जफर और बिकनी गर्ल अर्चना गौतम को भी नामित किया। मेरठ के हस्तिनापुर।

विक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी 23 फरवरी तक स्थगित

 डिजिटल डेस्क : शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी 23 फरवरी तक के लिए टाल दी है। अदालत ने मजीठिया को 23 फरवरी को संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने और ड्रग मामले में जमानत के लिए आवेदन करने को भी कहा।इससे पहले, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मजीठिया की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी से तीन दिन की राहत दी थी ताकि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। कोर्ट ने देश नहीं छोड़ने समेत कुछ शर्तें भी जारी कीं। पता चला है कि मजीठिया शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साले और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं।

क्या है मजीठिया के खिलाफ ड्रग केस?
मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। वह ड्रग मामले में आरोपी है। मोहाली थाने की राज्य अपराध शाखा ने मामले में 49 पन्नों की प्राथमिकी दर्ज की है। दरअसल, 2013 में 6,000 करोड़ रुपये का ड्रग रैकेट लीक हुआ था। मामले के मुख्य आरोपी जगदीश भोला ने पूछताछ के दौरान ब्रिकॉम सिंह मजीठिया का नाम लिया।

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कांग्रेस पर उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने का आरोप लगाया गया है
मजीठिया ने बुधवार को पंजाब की कांग्रेस सरकार पर उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मजीठिया ने चुनाव आयोग से उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने, उनके आवास पर छापेमारी करने और उनके परिवार को परेशान करने के लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराने की अपील की. विक्रम सिंह मजीठिया मजीठा निर्वाचन क्षेत्र के साथ-साथ अमृतसर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से सिद्धू फिर से चुनाव लड़ रहे हैं।

 एसपी सिंह बघेल ने करहल से अखिलेश के खिलाफ संभाला मोर्चा

डिजिटल डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की लड़ाई दिन पर दिन दिलचस्प होती जा रही है. इस चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं और एक-दूसरे की पार्टियां इन दोनों को अपने-अपने गढ़ में घेरने की कोशिश कर रही हैं. इसी प्रयास के तहत सपा जहां गोरखपुर से मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा ने कभी आगरा से मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ), एमपी और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को करहल से मैदान में उतारा है. खास बात यह है कि आज अखिलेश यादव नामांकन दाखिल करते हैं, फिर थोड़ी देर बाद सत्यपाल सिंह बघेल (एसपी सिंह बघेल) और उनका फॉर्म भर जाता है।

माना जाता है कि एसपी सिंह बघेल का ब्रज क्षेत्र में काफी प्रभाव है। पता चला है कि उस इलाके में बघेल समुदाय के करीब 35 से 40 हजार वोट हैं. भाजपा से तनातनी के चलते अखिलेश को करहले में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, करहल का जातीय गणित और इतिहास समाजवादी पार्टी के पक्ष में है। पता चला है कि उस इलाके में एक लाख से ज्यादा यादव वोट हैं. यह अखिलेश यादव के लिए काफी सुरक्षित सीट मानी जा रही है. फिर भी बीजेपी एसपी सिंह बघेल के जरिए अखिलेश के करहल को घेरना चाहती है.

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कभी मुलायम के करीबी थे बघेल
बघेल का जीवन और उनका राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प है। 1989 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद, सत्यपाल सिंह बघेल उनकी सुरक्षा टीम में शामिल हो गए और तब से उन्हें उनका करीबी माना जाता है। 1998 में समाजवादी पार्टी ने बघेल को जलेसर निर्वाचन क्षेत्र से नामित किया और वह जीत गए। वह दो बार सांसद चुने गए लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान सपा छोड़ दी और बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। बघेल 2010 में बसपा से राज्यसभा सांसद बने। 2014 में उन्होंने फिरोजाबाद लोकसभा से राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के सामने चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर टूंडला से जीत हासिल की और राज्य सरकार में मंत्री बने। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें आगरा से टिकट दिया और बघेल ने भी यहां से प्रचंड जीत दर्ज की. बीजेपी ने उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाया है.

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, एक हजार लोगों के जमावड़े की इजाजत

डिजिटल डेस्क : भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक अब 10 लोगों की जगह 20 लोगों को घर-घर जाकर प्रचार करने की इजाजत होगी. वहीं इनडोर मीटिंग में 300 की जगह 500 लोग शामिल हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने 22 जनवरी को कोविड-19 मामले के मद्देनजर शारीरिक रैलियों और रोड शो पर लगी रोक को 31 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया था.

पिछली बैठक में पहले और दूसरे चरण की विधानसभा की अनुमति दी गई थी। आयोग ने राजनीतिक दलों या प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को 28 जनवरी से 22 जनवरी तक और दूसरे चरण के लिए 1 फरवरी से शारीरिक रैलियां करने की अनुमति दी है। इसके मुताबिक 500 की जगह 1000 लोगों के इकट्ठा होने की इजाजत होगी।

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इससे पहले, घर-घर प्रचार के लिए पांच लोगों की सीमा सुरक्षा कर्मियों और वीडियो वैन के अपवाद के साथ, प्रतिबंध प्रतिबंधों के साथ निर्दिष्ट खुले स्थानों में अभियान चलाने के लिए 10 लोगों तक बढ़ा दी गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 लोगों तक कर दिया गया है। यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव 10 फरवरी से 7 मार्च तक होंगे। वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी।

73 बनाम 23,000 के आंकड़ों के साथ, प्रधानमंत्री मोदी अखिलेश और योगी सरकार के बीच अंतर को समझाया

 डिजिटल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को यूपी चुनाव के लिए पहली वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने अखिलेश का नाम लिए बिना 2012 से 2017 तक अपने शासन और योगी सरकार के पांच साल के कार्यकाल के बीच के अंतर पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत काम में अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पांच साल में नोएडा में केवल 73 घर बनाए थे, जबकि भाजपा सरकार ने 23,000 घर बनाए थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सहारनपुर में पिछली सरकार ने गरीबों के लिए केवल 221 घर बनाए थे। योगी सरकार ने इन पांच वर्षों में 18,000 से अधिक घर बनाए हैं और सहारनपुर में गरीबों को दिए हैं। योगी सरकार ने गरीबों को घर उपलब्ध कराए हैं।” इन तीन शहरों में 33,000 से अधिक गरीब हैं। हालांकि पिछली सरकार पूरे यूपी में केवल कुछ हजार घर बना पाई थी, योगी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में गरीबों के लिए 33 लाख घर बनाए हैं। के नाम पर माँ और बहन।

‘100 साल के सबसे बड़े संकट में गरीबों का ख्याल रखें’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत हर गरीब परिवार की देखभाल कर रहे हैं. डबल इंजन सरकार उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है। ये है वो उत्तर प्रदेश जहां 5 साल पहले राशन की दुकानों से गरीबों का राशन चोरी हो गया था. गरीब सरकार की प्राथमिकता क्या है, यह दुनिया के 100 साल के सबसे बड़े संकट से निकली है। इतनी बड़ी महामारी आने पर जिस तरह से सरकार ने गरीबों के लिए काम किया, उससे देश आज पीड़ित है। प्रधानमंत्री ने गरीबों के कल्याण के लिए अन्य योजनाओं के तहत देश के प्रत्येक नागरिक का ध्यान रखा है।

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‘एमएसपी पर दोगुने से ज्यादा खरीदारी’
प्रधान मंत्री मोदी ने कहा, “हमारा लक्ष्य था लूट को रोकना, बेईमानी को रोकना, किसानों को दी गई सरकारी सब्सिडी की मदद से यूपी के छोटे किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में मदद करना। छोटे किसानों को लाभ हुआ है। एमएसपी खरीद से अधिक है पिछले पांच वर्षों में 2017 की तुलना में दोगुना हो गया है। गन्ना किसानों की समस्याओं को समझते हुए हमने उनके बकाया का जल्द से जल्द भुगतान करने का लक्ष्य रखा है। हमने इस लक्ष्य को बहुत जल्दी पूरा कर लिया है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डबल इंजन वाली सरकार दोगुनी रफ्तार से यूपी के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।आज यूपी में एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हो रही है।

यूपी में सपा शासन को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ….

 डिजिटल डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद पहली बार रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भूमि ने 1857 की क्रांति में देश को एकजुटता का संदेश दिया था. कमल के फूल और रोटी ने देश को बांटने वालों को हमेशा उचित जवाब दिया है। अगर हम एकजुट हैं तो हमें कोई नहीं हरा सकता। हर प्रयास उत्तर प्रदेश को वह ऊंचाई देगा जिसके वह हमेशा हकदार हैं। पांच साल पहले जब मैं चुनाव के दौरान पश्चिमी यूपी आया था, तो मैंने कहा था कि हम यूपी के विकास में कोई प्रयास नहीं करेंगे। इन 5 वर्षों में योगी जी के नेतृत्व में योगी सरकार ने पूरी ईमानदारी से आपकी सेवा करने का प्रयास किया है, यूपी का विकास किया है। 5 साल पहले यूपी को लेकर हुई चर्चा को कोई नहीं भूल सकता.

मोदी ने कहा, ‘पांच साल पहले दंगाइयों और दंगाइयों के खिलाफ कानून था। उनके आदेश नियम थे। व्यापारियों ने लूटा, लड़कियां अपने घर छोड़ने से डरती थीं और सरकारी सुरक्षा में माफिया खुलेआम घूमते थे। पश्चिमी यूपी के लोग उस खुशी को कभी नहीं भूलेंगे, जो सरकार ने उस समय मनाई थी जब यह इलाका दंगों की चपेट में था। 5 साल पहले भी गरीब, दलित, वंचित और पिछड़े लोगों के घरों और दुकानों पर अवैध कब्जा समाजवाद का प्रतीक था। आए दिन लोगों के देश छोड़कर जाने की खबरें आती रहती थीं। अपहरण की फिरौती, रंगदारी ने मध्यमवर्गीय व्यवसायी को तबाह कर दिया। 5 साल में योगी सरकार ने यूपी को इस स्थिति से उबारा है. यह कोई मामूली बात नहीं है। मैं भी साल दर साल राज्य का मुख्यमंत्री था, ऐसी विकट परिस्थिति से राज्य को उबारने, दंगा मुक्त करने के लिए आज यूपी के किसानों, व्यापारियों, कर्मचारियों या अभिभावकों को सुरक्षा और सम्मान मिल रहा है.

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पीएम मोदी ने कहा, ‘जो लोग खुद को कानून से ऊपर समझते थे, उन्हें यूपी की बीजेपी सरकार ने कानून का मतलब समझाया है. इसलिए आज इस चुनावी माहौल में वह अपनी सारी शक्ति का इस्तेमाल किसी न किसी तरह ठगों का मौका तलाशने में कर रहे हैं, उन्हें खेल को आसान बनाने के लिए सरकार की जरूरत है। हम यूपी में बदलाव पर खर्च कर रहे हैं, जबकि वे आपका बदला लेने के लिए कृतसंकल्प हैं। टिकट देने वालों की भाषा, इतिहास, हरकत और शोषण इसका सबूत है। उसकी एकमात्र चिंता बदला है। इसलिए मैं यूपी के लोगों को इन दंगाइयों से सावधान देखकर खुश हूं। यूपी की जनता पुराने दिनों में वापस नहीं जाना चाहती। इन बदला लेने वालों के बयानों को देखकर यूपी की जनता ने तय कर लिया है कि इस बार वे बीजेपी को पहले से ज्यादा वोटों से जीतेंगे. हमारा काम और उनका शोषण, उनका काम देखकर इस बार यूपी की जनता बीजेपी को पूरा आशीर्वाद देने आ रही है.

AIMIM भागीदारी परिवर्तन मोर्चा ने जारी की आठवीं लिस्ट

डिजिटल डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस मैदान में सभी राजनीतिक दल अपनी किस्मत आजमाने में जुटे हुए हैं. सभी राजनीतिक दलों की ओर से अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जा रहा है. इस कड़ी में सोमवार को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-एत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भागीदारी परिवर्तन मोर्चा के तहत 4 उम्मीदवारों की आठवीं सूची जारी की है. पार्टी ने डॉ निहालउद्दीन को बस्ती जिले की रुधौली विधानसभा सीट से उम्मीदवार के रूप में उतारा है.

कुशीनगर की पडरौना विधानसभा सीट से जावेद युनुस खान को चेहरा बनाया गया है. इस के बाद बबलू सिंह उर्फ गोल्डी को फिरोजाबाद विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है. कानपुर नगर की सीसामऊ सीट से रिया सिद्दकी को उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी ने इसे पहले शुक्रवार को प्रत्याशियों की सातवीं लिस्ट जारी की थी. इस लिस्ट में 12 प्रत्याक्षियों के नाम की घोषणा की गई थी. एआईएमआईएम की नई लिस्ट के साथ ही अब तक 57 प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा जा चुका है.

सातवीं लिस्ट में वसीम वकार को लखनऊ की लखनऊ पूर्व, सलमान सिद्दीकी को लखनऊ की सेंट्रल, मोहम्मद आदिल को अमरोहा की नवगांव सादात सीट से टिकट दिया गया है. गीता रानी को अमरोहा की धनौरा, मुनीर बेग बिजनौर से, याशिर अराफत तुर्क को बिजनौर की चांदपुर से टिकट दिया गया है.अख्तर वासिम को कुशीनगर की कद्दा, शाफी अहमद को कुशीनगर सीट से उतारा गया है. मोहिउद्दीन को कानपुर नगर की कानपुर कैंट, सुनील कुमार को कन्नौज, हफीजअतौर रहमन को हरदोई और रविशंकर जायसवाल को भदोही से टिकट दिया गया है.

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छठी लिस्ट में इन्हे मिली जगह
इससे पहले छठी लिस्ट में मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से रईस मलिक को उम्मीदवार बनाया गया है. इनके अलावा मुरादाबाद ग्रामीण से मोहिद फरघानी, मुरादाबाद शहर से वाकी रसीद, हसनपुर अमरोहा से मौलाना एहतेशाम राजा हाशमी, शाहजहांपुर से नौशाद कुरैशी, फिरोजाबाद से आसिफ इकबाल, कानपुर के आर्यनगर से दिलदार गाजी बनाया गया है. बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने कुछ छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर नया गठबंधन बनाया है, जिसे भागीदारी परिवर्तन मोर्चा का नाम दिया गया है.

 

UP Election 2022 : इस सीट से चुनाव लड़ेंगे ओम प्रकाश राजवर

डिजिटल डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सहयोगी सुभाषप (SUBSP) ने घोषणा की है कि ओम प्रकाश राजभर गाजीपुर के जहराबाद से चुनाव लड़ेंगे। वहीं वाराणसी के शिबपुर से अरविंद राजभर मैदान में उतरेंगे. इससे पहले सुभाष सपा ने तीन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी। इनमें संडीला से सुनील अर्कबांग्शी, बल्हा से ललिता पासवान और मिस्र से मनोज राजबांग्शी शामिल हैं। बीजेपी छोड़ने के बाद ओमप्रकाश रजवार इस बार समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव में उतरे हैं. समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को 39 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इस सूची में सपा ने सीतापुर में मिस्र की सीट से उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि सुभास्पी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजवर ने दावा किया कि हरदोई में संडीला और सीतापुर में मिस्र की सीट उनके खाते में गई है.

अखिलेश यादव ने हरदोई के संडीला निर्वाचन क्षेत्र में मंचा से रीता सिंह को भी मैदान में उतारा। लेकिन सुभाष सुनील ने संदिल से अर्कबांग्शी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इस संबंध में ओमप्रकाश राजवर ने कहा कि सपा ने मिस्र की सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, लेकिन चुनाव चिन्ह सुभाष होगा. उन्होंने कहा कि मनोज राजबंशी सपा नेता हैं, लेकिन सुभाषप के चुनाव चिह्न के लिए ही लड़ेंगे. इस बारे में एसपी से बात की।

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सुभाषप को मिलेगी गठबंधन में कितनी सीटें?
गुरुवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसयूवीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजवर ने गुरुवार को टीवी9 इंडिया के शक्ति सम्मेलन में कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 14 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी. समाजवादी पार्टी से जुड़े ओमप्रकाश रजवार ने टीवी9 भारतवर्त सत्ता सम्मेलन में भी संकेत दिया था कि उनकी पार्टी 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि 2022 में बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर देना चाहिए. अब वह समय आ गया है। 10 मार्च को बाजा खेलेंगे। ओम प्रकाश राजवर कहते हैं कि अखिलेश यादव के साथ मेरा करार है। किसी भी हाल में मुझे 14 सीटें जीतनी हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि वह 16 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। इशारा काफी विचारशील है।

मैनपुरी कलेक्ट्रेट में अखिलेश यादव ने करहल से भरा पर्चा

 डिजिटल डेस्क :  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विधानसभा क्षेत्र से करहल को प्रत्याशी बनाने के लिए विजय रथ समाहरणालय पहुंचे हैं. अखिलेश यादव जल्द भरेंगे राहुल सीट से पर्चा. इससे पहले उन्होंने समाजवादी रथ की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा था कि ‘नामांकन’ एक ‘मिशन’ है क्योंकि यूपी का यह चुनाव अगली सदी के लिए राज्य और देश का इतिहास लिखेगा! आइए प्रगतिशील सोच के साथ सकारात्मक राजनीति के इस आंदोलन में भाग लें – हारें और नकारात्मक राजनीति से छुटकारा पाएं! खुशी हिंद! सूत्रों के मुताबिक प्रोफेसर राम गोपाल यादव मैनपुरी पहुंच चुके हैं और शिवपाल यादव भी सैफई से नामांकन की तैयारी के लिए निकल चुके हैं.

वहीं, नामांकन से पहले अखिलेश यादव ने मीडिया से कहा कि बीजेपी विकास की बात नहीं करना चाहती. भाजपा को यह जानने की जरूरत है कि महंगाई क्यों बढ़ी है। उन्हें कहना चाहिए कि अगर दिल्ली और लखनऊ की सरकारें एक साथ किसानों की आय दोगुनी नहीं कर सकतीं तो उन्हें इस पर बहस करनी चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि 2022 तक किसानों की आय कैसे दोगुनी हो जाएगी। लोगों की आमदनी आधी हो गई है। दोगुनी हो गई है महंगाई, कैसे आएगी खुशियां? अब गुजरात मॉडल भी लीक हो गया है कि गुजरात मॉडल एक धोखा था।

करहल यादव का निवास स्थान है
अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. अखिलेश फिलहाल आजमगढ़ से सांसद हैं। समाजवादी पार्टी करहल विधानसभा सीट पर सात बार कब्जा कर चुकी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की लहर के बावजूद सपा प्रत्याशी सोबरन यादव को एक लाख से ज्यादा वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रेम शाक्य को 38,000 से ज्यादा वोटों से हराया. पिछली बार बीजेपी ने यह सीट करीब 20 साल पहले 2002 में जीती थी. उस वक्त सोबरन यादव बीजेपी के उम्मीदवार थे.

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मुलायम सिंह मैनपुरी से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं
अखिलेश यादव के पिता, सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव, वर्तमान में मैनपुरी से सांसद हैं। वे यहां से पांचवीं बार सांसद चुने गए हैं। मैनापुरी निर्वाचन क्षेत्र से पिछले नौ बार से केवल सपा सांसद चुने गए हैं। मुलायम का करहल से करीबी रिश्ता है। उन्होंने यहां के जैन इंटर कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और यहां के शिक्षक भी थे। यादव निर्वाचन क्षेत्र में यादव मतदाताओं का दबदबा है। यहां इस समुदाय की आबादी 28 फीसदी है. क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की 16 फीसदी, टैगोर की 13 फीसदी, ब्राह्मण की 12 फीसदी और मुस्लिमों की 5 फीसदी हिस्सेदारी है। भाजपा ने करहल सीट से अखिलेश की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए कहा कि अगर सपा अध्यक्ष करहल को अपने लिए सुरक्षित सीट मानते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में गलतफहमी दूर हो जाएगी।

पंजाब विधानसभा चुनाव: दो सीटों से मुख्यमंत्री मनोनीत करने के पीछे कांग्रेस की क्या रणनीति है?

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दूसरी सीट के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब कुछ दिन पहले पंजाब का दौरा करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी राज्य में अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करेगी। उसके बाद चन्नी की दूसरी सीट की घोषणा ने तरह-तरह के कयासों को हवा दे दी है. आइए एक नजर डालते हैं उनसे जुड़े पहलुओं पर।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को दो सीटों से उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस नेतृत्व ने बड़ा दांव खेला है. उन्हें चमकौर साहब और बरनाला की भदौर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है. 2017 में भदौर में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी। इतना ही नहीं बरनाला जिला पिछले चुनाव में आप का गढ़ साबित हुआ था। आप ने जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है।

पिछली बार आपने श्री चमकौर को बरनाला जीतने की चुनौती दी थी
बरनाला में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं- बरनाला, महल कलां और वदौर। 2017 के विधानसभा चुनाव में आप ने तीनों सीटों पर जीत हासिल की थी। बरनाला में आप के गुरमीत सिंह ने मिट हेयर कांग्रेस के केवल सिंह ढिल्लों को 2,432 मतों से हराया। महल कलां में आप के कुलवंत सिंह पंडोरी ने शिरोमणि अकाली दल के अजीत सिंह शांत को 27,064 मतों के अंतर से हराया। यहां कांग्रेस को केवल 20% वोट मिले। वदौर में आप के पीरमल सिंह धौला ने शिरोमणि अकाली के संत बलवीर सिंह घुनस को 20,784 मतों के अंतर से हराया। यहां कांग्रेस को 20 फीसदी वोट भी नहीं मिल सका.

2017 में, श्री चमकौर ने कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी। उस समय कांग्रेस के एकमात्र उम्मीदवार चरणजीत सिंह चन्नी थे। उन्होंने आप के चरणजीत सिंह को 12,308 मतों से हराया। चन्नी को करीब 42 फीसदी वोट मिले। जबकि आप के चरणजीत सिंह को 33.53 फीसदी के करीब वोट मिले हैं।

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चन्नी के दो सीटों से दो गोल- आप की चुनौती और सीएम उम्मीदवार
उल्लेखनीय है कि चरणजीत सिंह चन्नी ने 2007 का चुनाव मिस्टर चमकौर से निर्दलीय के रूप में जीता था। इसके बाद वे कांग्रेस में आए और 2012 और 2017 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। दूसरे शब्दों में यह सीट उनके लिए लगभग सुरक्षित कही जा सकती है। ऐसे में जानकारों के मुताबिक आप के गढ़ में दूसरी सीट पर चन्नी को उतारने के पीछे कांग्रेस के दो मकसद हो सकते हैं. सबसे पहले, आपको सीधे चुनौती देने के लिए। क्योंकि इस समय पंजाब में कांग्रेस को आप से सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है. कहा जा रहा है कि आप सरकार बनाने की भी मांग कर रही है। दूसरा कारण कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लगभग कर लिया है। एक-दो दिन में घोषणा हो सकती है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी यही प्रभाव डालने के लिए उन्हें दूसरे निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारने का भी फैसला किया गया है।

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इटावा: प्रोग्रेसिव सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पार्टी क्यों छोड़ दी और समाजवादी पार्टी के साथ फिर से जुड़ गए? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए सपा और पीएसपी के बीच हुए गठबंधन को देखकर सभी के मन में यह सवाल था. लेकिन अब इसकी वजह खुद शिवपाल यादव ने बताई है. इटावा पहुंचे शिवपाल यादव ने रविवार को यहां कहा, ”क्षेत्र के लोगों और नेताजी मुलायम सिंह यादव के अनुसार उन्होंने भाजपा सरकार को हटाने के लिए अपने पिछले अपमान को सहा है और अपनी पार्टी का त्याग कर सपा के साथ शांति कायम की है.”

शिवपाल यादव ने आगे कहा, ‘बीजेपी उन्हें शुरू से ही लुभा रही थी. सामाजिक न्याय की यात्रा के दौरान भाजपा ने एक केंद्रीय मंत्री और तीन एमएलसी रखने की पेशकश भी की, लेकिन परिवार की एकता के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।

प्रोस्पर प्रमुख शिवपाल सिंह ने यहां बसरेहर प्रखंड के क्षेत्रीय नेताओं की बैठक में यशवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी जीत की मांग की है. इसके अलावा, उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में उनका कोई विरोध नहीं है।

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शिवपाल यादव ने इन नेताओं से कहा कि इस बार राज्य में अखिलेश यादव की सरकार बनेगी, लेकिन वह अपने-अपने बूथों पर सक्रिय रूप से जीत हासिल करने की कोई कवायद नहीं छोड़ेंगे. अपनी टीमों को अभी सक्रिय करके पीआर से संपर्क करें।