Saturday, April 25, 2026
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रोजाना सुबह उठते ही मुख्य द्वार पर करें ये 5 काम, हमेशा के लिए दूर हो जाएगी आर्थिक तंगी

कोलकाता : किसी भी घर में उसका प्रवेश द्वार सबसे अहम माना जाता है। मान्यता है इसी प्रवेश द्वार के जरिए घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। कहा जाता है कि अगर आप अपने घर को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रखना चाहते हैं तो उसके मुख्य द्वार को वास्तु दोष से मुक्त रखें। मुख्य द्वार का वास्तु सही कर देने से उसमें अवांछित शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि बनी रहती है। आज हम आपको कुछ ऐसे काम बताने जा रहे हैं, जिन्हें करने से घर पर भगवान की हमेशा कृपा बनी रहती हैं…

* घर के मुख्य द्वार पर बनाएं रंगोली
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आपके पास सुबह समय होता है तो मुख्य द्वार के दोनों ओर आटे से रंगोली बनाएं। रोजाना समय न हों तो हफ्ते में एकाध बार भी रंगोली बना सकते हैं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और परिवार पर उनकी कृपा बरसती है।
* वास्तु के मुताबिक सुबह उठकर सबसे पहले भगवान को नमन करना चाहिए। उसके बाद मुख्य द्वार की देहरी को पानी से धोना चाहिए। आप चाहे तो इसमें थोड़ी सी हल्दी डाल सकते हैं। ऐसा करने से परिवार की आर्थिक तंगी दूर होती है और परिवार में कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती।
* देवी-देवताओं के लगाएं प्रतीक चिह्न
घर में खुशहाली लाने के लिए उसके मुख्य द्वार पर ओम, श्री गणेश या मां लक्ष्‍मी के चरण चिन्ह और शुभ लाभ का प्रतीक चिन्ह लगाने चाहिए। ऐसा करने से घर में हर समय सकारात्मक शक्तियों का वास रहता है और नकारात्मक शक्तियां घर में नहीं घुस पातीं। सुबह उठने के बाद इन प्रतीक चिन्हों के पास जाकर उन्हें प्रणाम जरूर करें।
* वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाना शुभ माना जाता है। यह तोरण आम, पीपल या फिर अशोक के पत्तों से बनता है। यह तोरण द्वार घर में खुशहाली लाता है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
* नहाने के बाद मुख्य द्वार पर लगाएं स्वास्तिक
रोजाना नहाने के बाद घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का निशान लगाएं। ऐसा करने से परिवार के लोगों से बीमारी दूर रहती है। साथ ही आर्थिक तंगी से भी निजात मिलती है। इससे परिवार में खुशहाली आती है।

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ऐसे ही लाल चंदन पर नहीं आया ‘पुष्‍पा’ का दिल! वाकई किस्‍मत बदल देते हैं इसके टोटके

नई दिल्‍ली : इस समय लोगों का दिल फिल्‍म ‘पुष्‍पा’ पर आया हुआ है। इस फिल्‍म के गानों से लेकर एक्‍टर अल्‍लू अर्जुन की एक्टिंग तक ने लोगों को अपना दीवाना बना दिया है। लाल चंदन की तस्‍करी पर बनी इस फिल्‍म ने गजब पॉपुलरिटी पाई है। लाल चंदन अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में जितना कीमती है, धर्म और ज्‍योतिष में भी इसकी उतनी ही अहमियत है। जिस पर लाल चंदन के टोटके-उपाय तो किस्‍मत बदलने की ताकत रखते हैं।

बहुत प्रभावशाली हैं लाल चंदन के टोटके
लाल चंदन को रक्‍त चंदन भी कहते हैं। कारोबार में तरक्‍की से लेकर, वास्‍तु दोष दूर करने, ढेर सारा पैसा कमाने, घर में सुख-समृद्धि, शांति लाने और शत्रु को मात देने जैसे तमाम कामों में लाल चंदन के टोटके बेहद कारगर हैं। इसके अलावा तंत्र-मंत्र के लिए तो लाल चंदन बहुत उपयोगी है। अधिकांश तंत्र प्रयोगों में लाल चंदन का उपयोग होता है।

हर तरह के कष्‍ट दूर करने का उपाय : यदि लाल चंदन की माला से मां काली के सिद्ध मंत्रों का जाप करें तो जीवन का बड़े से बड़ा कष्‍ट भी दूर हो जाता है।

सुख-समृद्धि पाने का उपाय : यदि हर शुक्रवार को मां लक्ष्‍मी की पूजा करें और उनका लाल चंदन से तिलक करें तो मां लक्ष्‍मी बहुत जल्‍दी प्रसन्‍न होकर खूब सुख-समृद्धि देती हैं।

कारोबार में तरक्‍की पाने का उपाय : हर मंगलवार को पीपल के 11 पत्‍तों में लाल चंदन से राम-राम लिखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाने से कुछ ही दिन में कारोबार दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्‍की करेगा। लेकिन कोशिश करें कि यह उपाय ऐसे करें कि कोई आपको देखे नहीं।

वास्‍तु दोष दूर करने के उपाय: लाल चन्दन के चूरा, अश्वगंधा और गोखरूचूर्ण में कपूर मिलाकर 40 दिन तक लगातार घर में हवन करने से बड़े से बड़ा दोष दूर हो जाता है। घर में सकारात्‍मक बढ़ेगी और चौतरफा फायदा होगा। घर में एक के बाद एक खुशियां आएंगी।

शत्रु को मात देने का उपाय : भोज पत्र के ऊपर लाल चंदन से शत्रु का नाम लिखें और पत्र को शहद में डुबों दें। इससे शत्रु से होने वाली परेशानी खत्‍म हो जाएगी।

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अपार पैसा पाने का उपाय : कड़ी मेहनत के बाद भी मनमाफिक धन कमाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं तो मंगलवार को लाल चंदन, लाल गुलाब के फूल और रौली को लाल कपड़े में बांधकर पैसे रखने की जगह पर रख दें। हर 6 महीने में ऐसा करते रहें। धन की आवक बढ़ेगी और हमेशा मालामाल बने रहेंगे।

 

सपने में इस तरह दिखे पानी, तो समझिए बड़ी मुसीबत आने वाली है…

स्वप्न शास्त्र ज्योतिष की एक शाखा है, जिसमें तमाम सपनों का विश्लेषण किया गया है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक सपने भी शुभ और अशुभ परिणाम देते हैं. हर सपने  के अलग मायने होते हैं. सपने में यदि आपको पानी दिखे तो ये सपना शुभ भी हो सकता है और अशुभ भी, क्योंकि पानी की अलग अलग स्थितियां जीवन की अलग अलग परिस्थितियों की ओर इशारा करती हैं. समुद्र का पानी, नदी का पानी, बारिश का पानी और साफ पानी, सबके अलग अलग मायने हैं. अगर आपको भी पानी से जुड़ा कोई सपना आया है, तो यहां आप इसका मतलब जान सकते हैं.

समुद्र का पानी दिखना
स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप सपने में समुद्र को देखते हैं, तो इसे शुभ नहीं माना जाता है. समुद्र काफी गहरा होता है और अपने भीतर काफी कुछ समेटे होता है. साथ ही इसका पानी भी नमकीन होता है. ऐसे में माना जाता है कि भविष्य में कुछ ऐसी परेशानियां सामने आ सकती हैं, जिनके बारे में आपने कल्पना भी न की हो. समुद्र का पानी धनहानि और किसी दुर्घटना का भी संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है.

नदी का पानी दिखना
स्वप्न शास्त्र के अनुसार नदी का पानी दिखना शुभ माना गया है. नदी को शास्त्रों में पवित्र माना गया है. नदी में स्नान करने से पाप कट जाते हैं. नदियों का पानी व्यक्ति के जीवन के लिए भी काफी उपयोगी है. ऐसे में अगर आपको नदी दिखाई देती है तो समझिए कि आपके जीवन की तमाम परेशानियों का अब अंत हो सकता है. आपकी तमाम इच्छाएं पूरी हो सकती है.

बारिश के पानी दिखना
बारिश का पानी व्यक्ति को सफलता दिलाने की ओर इशारा करता है. कहते हैं कि अगर आपको बारिश का पानी दिखाई दे, तो समझिए कि आपको धन का बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि बारिश का पानी फसल को पोषित करता है और फसल समृद्धि का प्र​तीक है. बारिश का पानी देखने से आपकी तमाम ख्वाहिशें पूरी हो सकती हैं. कुछ अटके हुए काम बन सकते हैं. ये नए वाहन के आगमन का भी संकेत है.

साफ पानी दिखना
स्वप्न शास्त्र के मुताबिक साफ पानी दिखना भी शुभ माना गया है. ये आपकी साफ सुथरी छवि की ओर इशारा करता है. अगर ऐसा कुछ दिखे तो समझिए वर्कप्लेस पर आपका कद बढ़ सकता है, ऐसे में आपको धन लाभ हो सकता है. इसके अलावा समाज में भी मान सम्मान बढ़ने की ओर इशारा करता है.

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अगर किसी शुभ काम को शुरू करना हो तो देखिए आज का पंचांग

ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं। उसके आधार पर अपने खास कर्मों को इंगित करते हैं। आज 12 मार्च शनिवार ( Saturday) का दिन है। फाल्गुन (Falgun) की शुक्ल पक्ष नवमी 08:07 AM तक उसके बाद दशमी तक है। सूर्य धनु राशि पर योग-सौभाग्य, करण- तैतिल और गर फाल्गुन मास है, आज का दिन बहुत ही शुभ फलदायक है। देखिए आज का पंचांग…

आज 12 मार्च का पंचांग हिन्दू मास एवं वर्ष शक सम्वत- 1943 प्लव विक्रम सम्वत- 2078 आज की तिथि तिथि-नवमी 08:07 AM तक उसके बाद दशमी आज का नक्षत्र-आर्द्रा 05:32 PM तक उसके बाद पुनर्वसु आज का करण-तैतिल और गर आज का पक्ष- शुक्ल पक्ष आज का योग- सौभाग्य आज का वार-शनिवार आज सूर्योदय- सूर्यास्त का समय (Sun Time) सूर्योदय-6:42 AM सूर्यास्त-6:30 PM आज चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय ( Moon Time) चन्द्रोदय- 1:11 PM चन्द्रास्त-3:18 AM सूर्य – सूर्य कुंभ राशि पर है आज चन्द्रमा की राशि (Moon Sign) चन्द्रमा-चन्द्रमा मिथुन राशि पर संचार करेगा। दिन- शनिवार माह- फाल्गुन व्रत- नहीं

आज का शुभ मुहूर्त (Today Auspicious Time) अभिजीत मुहूर्त-12:13 PM से 01:00 PM अमृत काल-नहीं ब्रह्म मुहूर्त-05:06 AM से 05:54 AM आज का शुभ योग (Aaj Ka Shubh Yoga) सर्वार्थ सिद्धि योग-नहीं है रवि पुष्य योग –पूरे दिन अमृतसिद्धि योग-नहीं है त्रिपुष्कर योग-नहीं है द्विपुष्कर योग-नहीं है अभिजीत मुहूर्त-12:13 PM से 01:00 PM आज का अशुभ समय( Today Bad Time) राहु काल-09:39 AM से 11:08 AM तक कालवेला / अर्द्धयाम-13:19PM से 14:07PM तक दुष्टमुहूर्त-08:16 AM से 09:04 AM यमगण्ड-2:05 PM से 3:33 PM भद्रा- नहीं है गुलिक काल-06:11AM से 07:40AM तक गंडमूल-नहीं है.

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Realme 9 5G, Realme 9 5G SE स्मार्टफोन मिड-रेंज सेगमेंट में धमाल मचाएंगे! जानें कीमत और फीचर्स की डिटेल्स

डिजिटल डेस्क : चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Realme ने भारत में दो नए स्मार्टफोन Realme 9 5G और Realme 9 5G SE लॉन्च किए हैं। रियलमी के ये लेटेस्ट मोबाइल 48 मेगापिक्सल ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप और 5000 एमएएच बैटरी के साथ आते हैं। आइए जानते हैं लेटेस्ट दो रियलमी स्मार्टफोन्स के प्राइस फीचर्स के बारे में-

रियलमी 9 5जी के फीचर्स
Realme 9 5G में 90Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.5 इंच का फुलएचडी+ डिस्प्ले है, जिसकी अधिकतम ब्राइटनेस 600 निट्स है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए यह मीडियाटेक डाइमेंशन 810 प्रोसेसर के साथ 6 जीबी एलपीडीडीआर4एक्स रैम के साथ आता है और फोन 11 जीबी तक वर्चुअल रैम को सपोर्ट करता है। 48 मेगापिक्सल के प्राइमरी कैमरे वाले फोन के पिछले हिस्से में मोनोक्रोम पोर्ट्रेट सेंसर और मैक्रो कैमरा सेंसर है। सेल्फी लेने के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा सेंसर मिलेगा। फोन में सुरक्षा के लिए फोन के बगल में जीपीएस, ए-जीपीएस, 5जी, वाई-फाई, 4जी एलटीई, ब्लूटूथ वर्जन 5.1 और फिंगरप्रिंट सेंसर है। 18W फास्ट चार्ज सपोर्ट के साथ 5000mAh की पावरफुल बैटरी दी गई है।

रियलमी 9 5जी स्पेसिफिकेशन
डिस्प्ले: 6.50 इंच (1800×2400)

प्रोसेसर: मीडियाटेक डाइमेंशन 810

ओएस: एंड्रॉइड 11

रैम: 6GB

स्टोरेज: 128GB

फ्रंट कैमरा: 16MP

रियर कैमरा: 48MP + 2.4MP

बैटरी: 5000mAh

Realme 9 5G भारत में कीमत और उपलब्धता
रियलमी 9 5जी फोन के 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 14,999 रुपये है, जबकि 6 जीबी रैम और 128 जीबी वेरिएंट की कीमत 17,499 रुपये है। आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई क्रेडिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड ईएमआई ट्रांजेक्शन पर 1500/- रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। फोन को दो कलर वेरिएंट Meteor Black और Stargaze White में लॉन्च किया गया है। फोन 14 मार्च को फ्लिपकार्ट और रीम की आधिकारिक साइटों पर बिक्री के लिए जाएगा।

रियलमी 9 5जी एसई के फीचर्स
फोन में 6.6 इंच का फुल-एचडी+ डिस्प्ले है जिसमें 144 हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट है, जिसकी अधिकतम ब्राइटनेस 600 निट्स है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए रियलमी के इस स्मार्टफोन में स्नैपड्रैगन 778जी प्रोसेसर के साथ 8 जीबी तक एलपीडीडीआर4एक्स रैम है और फोन 13 जीबी तक वर्चुअल रैम को सपोर्ट करता है। फोन के बैक पैनल में मोनोक्रोम पोर्ट्रेट कैमरा और मैक्रो कैमरा सेंसर के साथ 48-मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा सेंसर मिलेगा। सुरक्षा के लिए फोन में ए-जीपीएस, जीपीएस, वाई-फाई, 5जी, 4जी एलटीई, ब्लूटूथ वर्जन 5.1 और एक फिंगरप्रिंट सेंसर है। 30W क्विक चार्ज सपोर्ट के साथ शक्तिशाली 5000mAh की बैटरी फोन को जीवंत बनाती है।

रियलमी 9 5जी एसई स्पेसिफिकेशन
डिस्प्ले: 6.60 इंच (1080×2412)

प्रोसेसर: स्नैपड्रैगन 778G

ओएस: एंड्रॉइड 11

रैम: 8GB

स्टोरेज: 128GB

फ्रंट कैमरा: 16MP

रियर कैमरा: 48MP

बैटरी: 5000mAh

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Realme 9 5G SE की भारत में कीमत
इस लेटेस्ट रियलमी स्मार्टफोन के 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 19,999 रुपये, 8GB रैम और 128GB वेरिएंट की कीमत 22,999 रुपये है। आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई क्रेडिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड ईएमआई लेनदेन पर 2000/- रुपये की तत्काल छूट मिलेगी। फोन के दो कलर वेरिएंट Azure Glow और Starry Glow लॉन्च किए गए हैं। फोन की बिक्री 14 मार्च को फ्लिपकार्ट और रियलमी की आधिकारिक साइटों पर होगी।

यूपी चुनाव में भाजपा की जीत पर ममता बनर्जी ने EVM को लेकर उठाया सवाल 

 डिजिटल डेस्क : तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रभावी जीत पर संदेह जताया है. ममता ने कहा कि यह कोई लोकप्रिय आदेश नहीं है बल्कि ‘चुनाव तंत्र और केंद्रीय बलों और केंद्रीय एजेंसियों’ की मदद से मिली जीत है। कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए ममता ने कहा, “वे चुनावी मशीनरी और केंद्रीय बलों और एजेंसियों का उपयोग करके जीते हैं और बार-बार कूद रहे हैं। वह केतली ड्रम (नगड़ा / ढोलक) बजा रहा है, लेकिन गा नहीं सकता। इसके लिए हारमोनियम की जरूरत होती है। ,

तृणमूल सुप्रीमो ने कहा, ‘आप कहेंगे कि यूपी में बीजेपी की जीत हुई है, लेकिन अगर सही से हिसाब लगाया जाए तो अखिलेश (यादव) का वोट शेयर बढ़ गया है. अखिलेश की सीटें बढ़ी हैं और बीजेपी की सीटें घटी हैं. ईवीएम को लेकर शिकायतें थीं। एक डीएमए (वाराणसी के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) को बर्खास्त कर दिया गया है। अखिलेश यादव हार गए। अखिलेश निराश न हों, लोगों के बीच जाएं और ईवीएम की फॉरेंसिक जांच की मांग करें. उन्हें मशीनरी जनादेश मिला, लोकप्रिय जनादेश नहीं।

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गौरतलब है कि यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से बीजेपी ने 273 सीटों पर जीत हासिल की है. समाजवादी पार्टी को 125 सीटें मिली हैं. इसका मतलब है कि बीजेपी को सपा से दोगुने से ज्यादा जीत मिली है. चुनाव में सबसे खराब स्थिति कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच रही। प्रियंका गांधी भद्रा के नेतृत्व वाली कांग्रेस को केवल दो सीटें मिलीं, जबकि मायावती की बसपा ने केवल एक सीट जीती। अन्य के पास रजिस्टर में दो सीटें हैं।

जयंत, राजभर और मौर्य साथ थे फिर भी क्यों हार गए अखिलेश, जानिए…

डिजिटल डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे ने बीजेपी की जीत और सपा की हार तय कर दी है, लेकिन इसने सारे समीकरण भी बदल दिए हैं. चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपनी रणनीति बदलते नजर आए। माय यानी मुस्लिम यादव फैक्टर से चलने वाली सपा ने इस बार भी छोटी पार्टियों से हाथ मिलाया है, जो अलग-अलग जातियों में अपनी पहचान रखती हैं. उनका वोट प्रतिशत भी 22 के बजाय 32 प्रतिशत हो गया है। इसे अखिलेश यादव की सफलता माना जा रहा है, लेकिन यह भाजपा के वोट बैंक के सामने बौना साबित हुआ और वह विपक्ष में बने रहे।

जाति की राजनीति करने वाले नेताओं की लामबंदी काफी नहीं है

इसका सीधा अर्थ यह माना जाता है कि अखिलेश यादव के मुस्लिम, यादव प्लस फैक्टर भी बीजेपी को टक्कर नहीं दे पा रहे हैं. रालोद, सुभाषप, अपना दल, कामरावाड़ी, महान दल जैसी पार्टियों के साथ अखिलेश के गठबंधन की काफी चर्चा हुई, लेकिन यह रणनीति में जीत में नहीं बदल सका। अब सवाल यह है कि गलती कहां गई? इसके जवाब में राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि लाभार्थी वर्ग बीजेपी के लिए तुरुप का इक्का साबित हुआ है. इस वर्ग के लोग हर जाति और समुदाय में मौजूद हैं, जिसके एक हिस्से ने भाजपा को वोट दिया है। यही वजह थी कि पिछड़ों के नाम पर बीजेपी छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेता भी सपा को फायदा नहीं दे पाए और अपनी ही सीटें गंवा बैठे.

धारणा युद्ध में समाजवादी पार्टी कैसे पिछड़ गई?

यहां तक ​​कि यह कार्ड बेरोजगारी, महंगाई और आवारा पशुओं जैसे मुद्दों पर भी भारी था, जिसे लेकर लोगों में इस बात को लेकर खासा गुस्सा बताया जा रहा था. ऐसे में अखिलेश यादव भविष्य में बीजेपी को कड़ी चुनौती देने के लिए क्या कर सकते हैं? इसका उत्तर है कि उन्हें धारणा के स्तर पर लड़ना होगा। जाति आधारित नेताओं की लामबंदी के कारण उनका पूरा समाज एक साथ नहीं आता है। ऐसे में जमीनी स्तर पर उनके खिलाफ काम करने वाली उस धारणा की काट ढूंढनी होगी। सपा सरकार आते ही लौटेगी गुंडाराज, बेकाबू हो जाएंगे सपा कार्यकर्ता इसका जवाब एसपी को खोजना होगा।

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कानून-व्यवस्था के बारे में जनता को आश्वस्त नहीं कर सका

यूपी की राजनीति की समझ रखने वाले एक विश्लेषक ने कहा कि अखिलेश यादव पूरे चुनाव प्रचार के दौरान यह साबित नहीं कर पाए कि सरकार मिल गई तो पहले की तरह गलती नहीं होगी. वह कानून व्यवस्था दुरुस्त करेंगे। शायद यही वजह रही कि भाजपा ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर और लाभार्थी वर्ग के समर्थन के दम पर बड़ी बढ़त ले ली। इसके अलावा अखिलेश यादव ने नौकरी देने और पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का वादा किया था, लेकिन जनता को इस बारे में भी आश्वस्त नहीं कर पाए.

निर्णायक हार पर बोले सिद्धू , कहा- मुझे चुनाव परिणामों की परवाह नहीं

डिजिटल डेस्क : पंजाब विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद नवजोत सिंह सिद्धू का गुस्सा नरम पड़ गया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को कहा कि जो लोग पंजाब से प्यार करते हैं उन्हें चुनाव परिणामों की परवाह नहीं है। उनका लक्ष्य पंजाब का विकास है। सिद्धू पार्टी को विधानसभा चुनाव हारने से नहीं बचा सके और साथ ही खुद चुनाव हार गए। अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट पर सिद्धू को आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवन ज्योत कौर ने 6,750 मतों के अंतर से हराया।

अमृतसर पूर्व सीट से चुनाव हारने वाले सिद्धू ने कहा, “मेरा लक्ष्य पंजाब का विकास है। मैं पंजाब के समर्थन में खड़ा था और खड़ा रहूंगा। जो पंजाब से प्यार करता है उसे जीत या हार की परवाह नहीं है। ‘ कांग्रेस के फैसले को स्वीकार करते हुए राज्य में सत्ता बनाए रखने में विफल रहने के लिए सिद्धू ने कहा, “लोगों की आवाज भगवान की आवाज है।”

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पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिहाज से आम आदमी पार्टी ने राज्य में 92 सीटों पर जीत हासिल की है, सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने केवल 18 सीटों पर और भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की है. शिरोमणि अकाली दल (SAD) को तीन सीटें मिलीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी एक सीट जीतने में सफल रही। पंजाब में सभी स्टार चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी, प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू सभी आप उम्मीदवारों से हार गए।

यूक्रेन का दावा, रूस के शीर्ष कमांडर कर्नल आंद्रेई ज़खारोव मारे गए, टैंक नष्ट किए गए

डिजिटल डेस्क : यूक्रेन की सेना का कहना है कि उसने एक टैंक हमले में एक शीर्ष रूसी कमांडर को मार गिराया है। रूसी टैंकों को भी कीव शहर के बाहर पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया है। घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें यूक्रेन की राजधानी के उत्तर-पूर्व में ब्रोवरी शहर के पास रूसी टैंकों पर गोलीबारी करते हुए दिखाया गया है। पहले से ही कई रूसी टैंकों पर प्रोजेक्टाइल के साथ हमला किया जा रहा है। यूक्रेन ने दावा किया है कि हमले में कर्नल आंद्रेई ज़खारोव मारा गया था, लेकिन रूस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यूक्रेनी सैनिकों का कहना है कि उन्होंने रूसी टैंकों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (रूस-यूक्रेन युद्ध) पिछले 15 दिनों से चल रहा है। उस युद्ध में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना कीव पर कब्जा करने में विफल रही। अब तक दोनों तरफ से काफी नुकसान हो चुका है। युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोग यूक्रेन से भाग गए हैं। अब तक 23 लाख लोग यूक्रेन से भाग चुके हैं। इन लोगों ने पड़ोसी देशों यूक्रेन, हंगरी, रोमानिया और पोलैंड में शरण ली है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि युद्ध से यूरोप में शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

यूक्रेन ने अब तक पांच रूसी कमांडरों को मार गिराने का दावा किया है
इंटरफैक्स-यूक्रेन समाचार एजेंसी ने यूक्रेनी रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा कि रूसी सैनिकों को सैनिकों और सैन्य उपकरणों के नुकसान के बाद आत्मरक्षा मोड में जाने के लिए मजबूर किया गया था। इसने कहा कि यूक्रेन में एक हमले में रेजिमेंट कमांडर कर्नल आंद्रेई ज़खारोव मारा गया था। यूक्रेन ने दावा किया है कि दो सप्ताह पहले रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से कम से कम पांच रूसी कमांडर मारे गए हैं। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रूस युद्ध में लगातार जमीन खो रहा है। यूक्रेन के प्रतिरोध के कारण रूसी सेना की स्थिति खराब है।

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पुतिन ने दी विदेशी लड़ाकों को यूक्रेन भेजने की इजाजत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आक्रामक में शामिल होने के लिए मध्य पूर्व और यूक्रेन के अन्य हिस्सों से “स्वयंसेवक” सेनानियों को तैनात करने का आदेश दिया है। क्रेमलिन प्रतिलेख के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु का कहना है कि रूस मध्य पूर्वी देशों के “16,000 से अधिक याचिकाकर्ताओं” को जानता है जिन्होंने रूस को इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ने में मदद की थी। शोइगू का कहना है कि वह पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादी क्षेत्र के लिए लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह मुक्ति संग्राम में भाग लेना चाहते हैं। 2015 से, रूसी सेना सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन कर रही है, जिनके शासन का इस्लामिक स्टेट सहित विभिन्न समूहों द्वारा विरोध किया गया है। पुतिन ने शोइगु से कहा कि रूस को स्वयंसेवकों को “युद्ध के मैदान में जाने” में मदद करनी चाहिए।

जम्मू-कश्मीर: गुरेज सेक्टर में सेना का चीता हेलीकॉप्टर क्रैश, दो पायलटों की मौत, एक घायल

 डिजिटल डेस्क : जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में शुक्रवार को भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। भारतीय सेना के एक अधिकारी ने कहा कि दुर्घटना में दो पायलटों में से एक की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा में। हादसे की खबर मिलते ही सुरक्षाबलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी है. बचाव दल हेलीकॉप्टर के चालक दल को बचाने के लिए बर्फ क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। रक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी। माना जाता है कि पायलट और सह-पायलट सुरक्षित बच गए थे, लेकिन कोई आधिकारिक शब्द जारी नहीं किया गया था।

सूत्रों के मुताबिक, हेलीकॉप्टर गुरेज के तुलैल इलाके के लिए नियमित उड़ान पर था। इसी दौरान उनका एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। बाद में पता चला कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद भारतीय सेना और वायु सेना को तुरंत एक बचाव दल को गुजरांवाला इलाके में भेजना पड़ा।

सेना के पास 200 चीता हेलिकॉप्टर
चीता एक एकल इंजन वाला हेलीकॉप्टर है जिसमें मूविंग मैप डिस्प्ले, ग्राउंड प्रॉक्सिमिटी वार्निंग सिस्टम और वेदर रडार जैसी प्रमुख विशेषताओं का अभाव है। इसमें ऑटोपायलट सिस्टम का भी अभाव है, जो खराब मौसम में पायलटों को भ्रमित कर सकता है। सेना के पास 200 चीता हेलीकॉप्टरों का बेड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं जिनमें 40 से अधिक अधिकारी मारे गए हैं।

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नवंबर 2021 में रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों सहित सुरक्षा बलों के बेड़े की समय-समय पर समीक्षा की गई। सरकार ने इन हेलीकॉप्टरों को नौसेना उपयोगिता हेलीकॉप्टरों के साथ बदलने की योजना बनाई है, घरेलू लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), जिसे “बीवाई (इंडियन-आईडीडीएम)” परियोजना के तहत एचएएल द्वारा बनाया गया है और रूसी निर्मित केए -226 टी “बाय एंड बिल्ड (इंडियन) “.

जेएनयू छात्र शरजील इमाम ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती, अगली सुनवाई 26 मई को

डिजिटल डेस्क : जेएनयू छात्र शरजील इमाम के खिलाफ देशद्रोह और अन्य आरोपों में आरोप तय करने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनौती दी है। शरजील इमाम की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. दिल्ली हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी. इससे पहले बुधवार को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि देशद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किए गए जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को सीएए और एनआरसी से संबंधित एक निश्चित धार्मिक समुदाय का सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके खिलाफ भड़काते देखा गया है। सरकार मन में निराधार भय पैदा करती है।

2019 में सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भड़काऊ भाषण और हिंसा के आरोप में गिरफ्तार इमाम की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए यह बात कही. पुलिस ने तर्क दिया कि इमाम का भाषण स्पष्ट रूप से “सामुदायिक विभाजन” पर आधारित था, खासकर मुसलमानों के लिए। उन्होंने काल्पनिक डिटेंशन कैंप का जिक्र कर छात्रों को गुमराह भी किया।

क्राइम ब्रांच ने किया जमानत का विरोध
अंतरराज्यीय अपराध शाखा प्रकोष्ठ के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जवाब में कहा गया है कि अगर जमानत दी जाती है, तो आरोपी कानूनी कार्यवाही से बच सकता है और सार्वजनिक गवाह को धमका सकता है। इसलिए तथ्यों, मौजूदा स्थिति और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए याचिकाकर्ता/आरोपी की जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया जा रहा है.

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इमाम जमानत चाहते थे
इमाम ने अपने कथित भड़काऊ भाषण के लिए दायर एक मामले में जमानत मांगी, जिसके कारण जामिया मिलिया इस्लामिया में 15 दिसंबर, 2019 को सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। इमाम ने निचली अदालत के 22 अक्टूबर, 2021 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।

रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए हमले तेज किए, इवानोवो, फ्रैंकिव्स्क और लुत्स्की में हवाई हमले शुरू किए

डिजिटल डेस्क : रूस-यूक्रेनी युद्ध का आज 16वां दिन है. रूस यूक्रेन को घुटने टेककर उस पर कब्जा करना चाहता है। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की व्लादिमीर पुतिन के आगे झुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. अपने जिद्दी रुख और उत्तेजक यूएस-यूके रणनीति के बाद, रूस ने पश्चिमी यूक्रेनी शहरों इवानोवो, फ्रैंकिवस्क और लुत्स्क में हवाई हमले तेज कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने यूक्रेन पर रूस के हमले के मुख्य लक्ष्य से काफी दूर इवानो, फ्रैंकिवस्क और लुत्स्क के पश्चिमी यूक्रेन के शहरों में हवाई अड्डों के पास हमले किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इवानो-फ्रैंकिव्स्क के मेयर रुस्लान मार्टिंस्कीयेव ने हवाई हमले की चेतावनी जारी होने के बाद स्थानीय लोगों से खाली करने की अपील की है. लुत्स्क के मेयर ने यह भी कहा कि हवाई अड्डे के पास हवाई हमला हुआ। दोनों शहर रूस के मुख्य लक्षित क्षेत्र से बहुत दूर हैं। इन शहरों पर हमलों ने रूसी युद्ध में एक नए मोड़ का संकेत दिया।

रिपब्लिकन सांसदों ने बिडेन प्रशासन पर डाला दबाव
इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका में कई रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी स्थिति बदलने के लिए बिडेन प्रशासन पर दबाव डाला है, यह मांग करते हुए कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का मुकाबला करने के लिए मिग सेनानियों को पोलैंड भेजने की अनुमति दी जाए। चालीस रिपब्लिकन सांसदों ने आयोवा के सांसद जॉनी अर्न्स्ट और यूटा के सांसद मिट रोमनी के एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

पत्र में राष्ट्रपति जो बिडेन से पिछले सप्ताह के अंत में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से अमेरिकी सांसदों की अपील का जवाब देने के लिए कहा गया था कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका देश के हवाई क्षेत्र को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित नहीं कर सकता है, तो वह इससे निपटने के लिए कम से कम अतिरिक्त लड़ाकू जेट कीव भेज सकता है।

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बात हो गई, अब युद्धक विमान भेजो: अमेरिकी सांसद
संसद भवन में एक संवाददाता सम्मेलन में रोमनी ने कहा कि बातचीत काफी है। लोग मर रहे हैं। उन्हें आवश्यक लड़ाकू विमान भेजें। मेन से रिपब्लिकन सांसद सुसान कॉलिन्स का कहना है कि तबाही देखना दर्दनाक है। प्रसूति अस्पताल पर रूसी हमले जैसी घटनाओं को देखना विशेष रूप से दर्दनाक है। यह अस्वीकार्य है कि यूक्रेन को आवश्यक युद्धक विमान नहीं दिए गए हैं।

विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत पर प्रशांत किशोर क्या कहा जानें..

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है और इन राज्यों में बीजेपी की सरकार बनना लगभग तय है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है. भारतीय राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भाजपा के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी। इस जीत में प्रशांत किशोर ने कहा, भारत की असली लड़ाई 2024 में आएगी. प्रशांत किशोर ने आज एक ट्वीट में लिखा कि देश 2024 के लिए लड़ेगा और उसके बाद ही नतीजे आएंगे, इस विधानसभा चुनाव में नहीं। प्रशांत किशोर ने ट्वीट में आगे लिखा कि साहब जानते हैं! इसलिए रणनीति राज्य के नतीजों के जरिए विपक्ष के खिलाफ मनोवैज्ञानिक धारणा बनाने की है. इस झूठी कहानी को न पढ़ें और इसका हिस्सा न बनें।दरअसल, विधानसभा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि इन चुनावों ने 2024 का नतीजा तय कर दिया है.

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उल्लेखनीय है कि कल यानी 10 मार्च को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. बीजेपी ने पांच में से चार राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है. दूसरी ओर, पंजाब में आप ने कांग्रेस का सफाया कर दिया है और राज्य में सरकार बनाने की प्रक्रिया में है।

बीजेपी की जीत में मायावती और ओवैसी का योगदान: संजय राउत

डिजिटल डेस्क : शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में मायावती और ओवैसी के योगदान को बताया है. राउत ने कहा, ‘बीजेपी को बड़ी जीत मिली है, यूपी उनका राज्य था, फिर भी अखिलेश यादव की सीटें बढ़ी हैं. बीजेपी की जीत में मायावती और ओवैसी का योगदान, इन सभी को पद्म विभूषण और भारत रत्न देना होगा. हम खुश हैं, जीत गए हैं. नुकसान होते रहते हैं। आपकी खुशी में हम भी शामिल हैं।”

संजय राउत ने पंजाब में बीजेपी की हार पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा, “आप हमें बार-बार बताते हैं कि यूपी में शिवसेना को कितनी सीटें मिलीं? यूपी में कांग्रेस और शिवसेना की हार आपके लिए पंजाब में बदतर है। आप इस बारे में देश को कुछ मार्गदर्शन दें। चिंता करें। विषय यह है कि पंजाब की जनता ने भाजपा को पूरी तरह से नकार दिया है जो पंजाब में एक राष्ट्रीय पार्टी है। पीएम मोदी, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने वहां जमकर प्रचार किया, फिर भी भाजपा क्यों हार गई?

राउत ने पूछा- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री चुनाव क्यों हार गए?
संजय राउत ने कहा, “भाजपा ने 4 राज्यों में जीत हासिल की है। हमें चिंता करने की कोई बात नहीं है, हम आपकी खुशी का हिस्सा हैं। भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री चुनाव क्यों हार गए। गोवा में 2 उपमुख्यमंत्री हार गए। सबसे ज्यादा चिंता पंजाब की है, जहां भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।”

राउत का बयान पूरी तरह राजनीतिक, हकीकत इसके उलट
संजय राउत ने भले ही यह चुनावी हमला बीजेपी पर किया हो, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ उनके इस आरोप को पूरी तरह सही नहीं मानते हैं. इसका कारण यह है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कमजोर होने से न सिर्फ बीजेपी को फायदा हुआ है. लंबे समय से बसपा का वोट बैंक रहा दलित समुदाय कई विधानसभा सीटों पर सपा उम्मीदवारों का समर्थन करता नजर आया है. ऐसे दलित मतदाता जिनकी रोजी-रोटी पर कोरोना-लॉकडाउन का गहरा असर पड़ा, उनमें भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी थी। इन मतदाताओं ने सपा प्रमुख अखिलेश को सीएम योगी आदित्यनाथ के विकल्प के रूप में देखा।

जहां तक ​​एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बात है तो वह यूपी में बिहार जैसा कारनामा बिल्कुल नहीं कर पाए. AIMIM को आधे वोट भी नहीं मिले हैं. जानकारों का मानना ​​है कि मुस्लिम वोट सीधे सपा की तरफ गए हैं. मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में सपा के कई उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। यूपी के मुस्लिम मतदाताओं ने एकमत से ओवैसी को अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है.

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फडणवीस बोले- शिवसेना का मतलब ‘भाजपा सेना’… शिवसेना नहीं
वहीं बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि शिवसेना का मतलब ‘बीजेपी सेना’ है, शिवसेना नहीं। फडणवीस ने कहा, ‘शिवसेना की लड़ाई नोटा से है, बीजेपी से नहीं…(गोवा में), एनसीपी और शिवसेना के वोट नोटा से कम हैं। प्रमोद को नीचे लाने का दावा करने वाले सावंत खुद हार गए हैं। अब लड़ाई है मुंबई के साथ। मैं नगरपालिका चुनाव लड़ूंगा। हम किसी पार्टी के खिलाफ नहीं होंगे, हम रिश्वत और भ्रष्टाचार के खिलाफ होंगे। उत्तर प्रदेश सिर्फ एक झांकी है, महाराष्ट्र अभी आना बाकी है। ”

690 सीटों में से 54: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का स्कोर

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं. नतीजे आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ है। पांच राज्यों की कुल 690 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 54 सीटों का नुकसान हुआ है. इन राज्यों में कांग्रेस को महज 7.8 फीसदी सीटों पर जीत मिली थी. पंजाब में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है. वहीं, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में केवल 2.3 प्रतिशत वोट के साथ केवल दो सीटें जीतीं।

पार्टी के निराशाजनक नतीजों के बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी आदेश से सीख लेगी और देश के लोगों की भलाई के लिए काम करेगी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘विनम्रता से आदेश लें। जो बच गए उनके लिए शुभकामनाएँ। सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई। राहुल गांधी ने आगे कहा, “हम इससे सीखेंगे और भारत के लोगों के हित में काम करेंगे।”

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वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बहुत मेहनत की है लेकिन इस वोट को बदला नहीं जा सकता. कांग्रेस को इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन लोगों ने उसे सिरे से खारिज कर दिया. इस बार कांग्रेस ने कृषि कानूनों से भाजपा को घेरने की कोशिश की। किसान आंदोलन में कई बार कांग्रेस के बड़े नेताओं को उनका समर्थन करते देखा गया है। इस चुनाव में कांग्रेस ने इसे चुनावी रंग देने की कोशिश की. लेकिन अंत में यह प्रयास विफल रहा और वह जनता को आकर्षित करने में विफल रहे।

खुली जीप में पीएम मोदी, गुजरात में रोड शो, चार राज्यों में बीजेपी को झटका

 गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी: उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट से रोड शो की शुरुआत की. यहां बता दें कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद यानी शुक्रवार को नरेंद्र मोदी अपने ही राज्य का यह दौरा कर रहे हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव साल के अंत में होने हैं।

फूलों की माला से सजी खुली जीप में नरेंद्र मोदी
उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के एक दिन बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट से रोड शो की शुरुआत की. फूलों की मालाओं से सजी खुली जीप में सवार होकर मोदी ने रोड शो के दौरान सड़क पर जमा सैकड़ों समर्थकों और प्रशंसकों का हाथ हिलाया.

रोड शो हवाई अड्डे से शुरू होता है
प्रधानमंत्री मोदी का काफिला एयरपोर्ट से शुरू हुआ और गांधीनगर में बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय ‘कमलम’ के लिए रवाना हुआ. प्रदेश में भाजपा के एक नेता ने कहा है कि प्रधानमंत्री आज पंचायत संगठनों के एक लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों की सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी आज से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर आ रहे हैं. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद मोदी अपने गृह राज्य का दौरा कर रहे हैं।

साल के अंत में विधानसभा चुनाव
हम आपको बता दें कि पांच राज्यों में हुए चुनाव के नतीजे बीजेपी के पक्ष में रहे थे. इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। पीएम मोदी गुजरात में बीजेपी की वापसी पर जोर दे रहे हैं.

प्रधानमंत्री का कार्यक्रम
सुबह 10 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचें।

सुबह 10.15 बजे एयरपोर्ट से रोड शो के बाद वह 11.15 बजे प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचेंगे.

करीब 10 किलोमीटर के रोड शो में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता नजर आए। रोड शो रूट सरदार पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट-एयरपोर्ट सर्कल से इंदिरा ब्रिज सर्कल होते हुए भट सर्कल और फिर श्री कमलम तक चलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11.15 से 11.30 बजे के बीच कमला पहुंचेंगे, जहां राज्य नेतृत्व उनका स्वागत करेगा. सभी सांसद-विधायक, प्रदेश संगठन के तमाम बड़े नेता, 400 से 450 लोग मौजूद रहेंगे. यहां मोदी का भाषण भी होगा।

वे यहां दोपहर एक बजे तक रुकेंगे और फिर यहां से निकलकर गांधीनगर स्थित राजभवन पहुंचेंगे।

– वे अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में शाम 4 बजे गुजरात पंचायत आम सम्मेलन में शामिल होंगे। मोदी का भाषण शाम 4.25 बजे से शाम 5 बजे तक होगा.

वे शाम 5.30 बजे राजभवन पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी शाम 6 बजे से शाम 6.15 बजे तक सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक में शामिल होंगे.

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भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर यह है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का बुरा असर पड़ेगा

नई दिल्ली: अमेरिकी ब्रोकरेज हाउस मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के विकास अनुमान को घटाकर 7.9 प्रतिशत कर दिया है। यह ब्रोकरेज हाउस विश्व अर्थव्यवस्था में अपने प्रक्षेपण के लिए जाना जाता है। भारत के मामले में, नवीनतम अनुमान कच्चे तेल की कीमतों पर रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रभाव पर आधारित हैं।मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने भी भारत के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 6 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक की संतोषजनक सीमा से ऊपर है। साथ ही मौजूदा हालात ने महंगाई के कारण मंदी की आशंका भी जताई है।

ब्रोकरेज फर्म ने एक बयान में कहा: “हम मानते हैं कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव बाहरी जोखिमों को बढ़ा रहे हैं और अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति की मंदी की संभावना पैदा कर रहे हैं।” उच्च स्तर पर भी बना हुआ है।

आर्थिक स्थिति बिगड़ने का डर
विश्लेषकों ने विभिन्न तरीकों से भारत पर भू-राजनीतिक तनाव के प्रभाव का हवाला देते हुए कहा कि तेल और अन्य वस्तुओं में वृद्धि, व्यापार के पतन और व्यापारिक भावना के नुकसान के कारण आर्थिक स्थिति खराब होने की उम्मीद है।

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कई अन्य लोगों की मान्यताओं के विपरीत
एक तरफ मॉर्गन स्टेनली ने भारत के विकास के अनुमान को डाउनग्रेड कर दिया है, जबकि रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ेगी। क्रिसिल ने यह अनुमान 2022-23 में बुनियादी ढांचे के खर्च और निजी पूंजीगत खर्च में वृद्धि पर सरकार के जोर पर आधारित है। हालांकि, रूस और यूक्रेन ने संघर्ष और बढ़ती कमोडिटी की कीमतों के कारण विकास को धीमा करने के जोखिम से इंकार नहीं किया। 31 मार्च को खत्म हुए चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 7.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है.

खाड़ी देशों के बाद अब इजराइल तुर्की के साथ संबंध फिक्स कर रहा है, क्या है रणनीति?

 डिजिटल डेस्क : हाल के वर्षों में इस्राइल और तुर्की के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन आप जानते हैं कि इजराइल को मान्यता देने वाले देशों में तुर्की पहला मुस्लिम बहुल देश था। दुनिया की राजनीति में हो रहे बदलावों को देखते हुए दोनों देश एक बार फिर बेहतर संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग 9 मार्च को तुर्की पहुंचे।

2008 से बिगड़े रिश्ते

रिपोर्टों से पता चलता है कि 2008-2009 में गाजा पट्टी में इजरायल के सैन्य अभियान के बाद तुर्की और इजरायल के बीच संबंध बिगड़ गए। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कई मंचों पर इस्राइल की खुलकर आलोचना की है। हालांकि तुर्की और दुनिया की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर इस्राइल ने कहा था कि हमारा मकसद हमास समेत अन्य आतंकवादी संगठनों के रॉकेट हमलों को रोकना है।

दोनों देशों के बीच संबंध तब और बिगड़ गए जब 2010 में इजरायली कमांडो ने गाजा में मानवीय सहायता ले जा रहे जहाज पर सवार नौ तुर्की कार्यकर्ताओं को मार डाला। इसके बाद तत्कालीन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने गलतियों के लिए माफी मांगी और मुआवजे के रूप में तुर्की को 150 करोड़ रुपये दिए।

ऐसा क्यों लगता है कि इज़राइल तुर्की के करीब जा रहा है?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट बताती है कि तुर्की के साथ बेहतर संबंध बनाकर इज़राइल मुस्लिम दुनिया में अपनी छवि सुधार सकता है। इससे इजराइल तुर्की के साथ मिलकर ईरान पर शिकंजा कस सकता है। आपको बता दें कि तुर्की और ईरान के राजनयिक और व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन दोनों देशों के सुरक्षा हित अलग-अलग हैं। इराक में, दोनों देश वर्षों से गुरिल्ला युद्ध में संघर्ष कर रहे हैं।

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क्या है एर्दोगन की मजबूरी?

पिछले कुछ महीनों में, इज़राइल ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को जैसे देशों के साथ संबंध सामान्य किए हैं। और इसी कड़ी में तुर्की एक और देश है। आर्थिक संकट के कारण एर्दोगन सरकार की लोकप्रियता में लगातार गिरावट देखी गई है। जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहा तो एर्दोगन की सत्ता खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि तुर्की इस्राइल जैसे देशों के साथ बेहतर संबंध चाहता है। तुर्की ने हाल के महीनों में मिस्र और सऊदी अरब के साथ संबंध सुधारने की भी कोशिश की है। एर्दोगन सरकार अमेरिका और आर्मेनिया के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए भी काम कर रही है।

 यूनाइटेड किंगडम ने जब्त की रूसी संपत्ति , इस प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब के मालिक का नाम भी है शामिल

लंडन :यूक्रेन में जारी युद्ध (रूस-यूक्रेन युद्ध) के बीच रूस पर प्रतिबंधों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। ब्रिटेन ने गुरुवार को छह और रूसी टाइकून की संपत्ति पर प्रतिबंध लगा दिया। इन सभी के पास करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। जिन लोगों की संपत्ति जब्त की गई उनमें चेल्सी फुटबॉल क्लब के मालिक रोमन अब्रामोविच, रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के मालिक इगोर सेनचिन, रूसी बैंक के अध्यक्ष दिमित्री लेबेदेव, पाइपलाइन कंपनी के मालिक निकोलाई टोकरेव और कंपनी के एलेक्सी मिलर शामिल थे। गैस कंपनी गज़प्रोम। ब्रिटेन में अब तक 47 रूसी कुबेरों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

बोरिस जॉनसन ने गुरुवार को रूसी बैंकों, कंपनियों और अभिजात वर्ग पर अधिक प्रतिबंध लगाने, रूस में ब्रिटिश प्रौद्योगिकी आयात पर नियमों को सख्त करने और रूसी एयरलाइन एअरोफ़्लोत पर प्रतिबंध लगाने की कसम खाई। ब्रिटिश सरकार सभी प्रमुख रूसी बैंकों की संपत्ति को जब्त करने और उन्हें लंदन के वित्तीय बाजारों से बाहर निकालने के लिए नियम पेश करेगी। साथ ही रूसी बैंक वीटीबी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

बिडेन ने प्रतिबंध की घोषणा की
यूक्रेन पर रूस के हमले पर दुनिया भर के कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रूस पर और प्रतिबंधों की घोषणा की है। जो बिडेन ने रूस को धमकी देते हुए कहा है, “यूक्रेन पर हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी।” वहीं, संसद को संबोधित करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि पुतिन ने यूक्रेन के निर्दोष लोगों के खून में अपने हाथ रंगे हैं और ये दाग कभी नहीं मिटेंगे.

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रूस कमजोर होगा और बाकी दुनिया मजबूत होगी
बाइडेन के मुताबिक, ”अब रूस कमजोर होगा और बाकी दुनिया मजबूत होगी. रूस की वित्तीय प्रणाली अब डॉलर, यूरो, पाउंड या येन में व्यापार नहीं कर पाएगी। उसकी सैन्य व्यवस्था को भी नुकसान होगा। रूस के बैंकों के पास अब लगभग 1 ट्रिलियन की संपत्ति है। बाइडेन ने कहा, “हम भारत के साथ यूक्रेन संकट पर चर्चा करेंगे।”

आईएमएफ ने कहा है कि मोदी सरकार का प्रबंधन मजबूत है लेकिन … जानिए क्या है खतरा!

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक प्रबंधन की तारीफ हो रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एमडी क्रिस्टीना जॉर्जीवा ने कहा कि महामारी के दौरान भी मोदी सरकार का प्रबंधन मजबूत था लेकिन विश्व बाजार में बिजली की बढ़ती कीमतें संकट पैदा कर सकती हैं।

आईएमएफ के एमडी का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के प्रभाव से तेजी से उबर रही है. ईंधन की बढ़ती कीमतें भारत के लिए एक बाधा हो सकती हैं। यही एकमात्र चीज है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को अपने लक्ष्यों को पूरा करने से रोक सकती है। वर्तमान सरकार को विश्व बाजार में इस संकट से निकलने का रास्ता खोजना होगा।

महंगाई से बढ़ेगी लोगों की जेब पर बोझ
आईएमएफ की पहली डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने भी ऊर्जा संकट को भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया। उन्होंने अमेरिकी गठबंधन के समर्थन में बात की, लेकिन कहा कि रूस के लिए कुछ स्वतंत्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण था। चूंकि भारत अपनी अधिकांश ऊर्जा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में वृद्धि से इसके प्रभावित होने की अधिक संभावना है। खुदरा महंगाई पहले ही 6 फीसदी से ऊपर है और अगर यह और बढ़ती है तो लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा.

पहले जरूरतमंदों पर ध्यान दें
जॉर्जीवा ने कहा, “भारत को हमारी सलाह उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की है, जिनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।” अब न केवल ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, बल्कि खाद्य कीमतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में देश के उन लोगों को बचाना सबसे जरूरी है जो गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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मौद्रिक नीति में भी बदलाव की जरूरत
आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि भारत को जरूरत के मुताबिक अपनी मौद्रिक नीति में भी बदलाव करने की जरूरत है। मोदी सरकार चाहे तो अपने राजस्व घाटे के लक्ष्य को तय कर सकती है, लेकिन उसे समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए अपना खजाना खोलना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है।

‘कांग्रेस को टीएमसी में शामिल होना चाहिए’, 5 राज्यों में करारी हार पर मिला प्रस्ताव

नई दिल्ली :चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत और पांच राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एक बार फिर आक्रामक हो गई है. पार्टी नेताओं ने कांग्रेस को टीएमसी में शामिल होने की सलाह दी है। हालांकि, कांग्रेस ने टीएमसी पर भारतीय जनता पार्टी का ‘एजेंट’ होने का आरोप लगाया। गोवा चुनाव नतीजों को लेकर बीजेपी ने टीएमसी पर भी निशाना साधा. गौरतलब है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी चुनावी प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है.

टीएमसी नेता और राज्य सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी कैसे गायब हो रही है। हम भी इस पार्टी का हिस्सा थे। कांग्रेस को टीएमसी में शामिल होना चाहिए। यह सही समय है। फिर राष्ट्रीय स्तर पर हम महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों के खिलाफ गोडसे के सिद्धांतों के खिलाफ लड़ सकते हैं।’टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी कहा, ‘हम लंबे समय से कह रहे हैं कि कांग्रेस बीजेपी जैसी ताकत से नहीं लड़ सकती. हमें बीजेपी के खिलाफ लड़ने के लिए ममता बनर्जी जैसे नेता की जरूरत है. कांग्रेस को यह समझना चाहिए.’ टीएमसी के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ में कांग्रेस पर कई बार आरोप लगे हैं कि बीजेपी के खिलाफ मजबूत विपक्षी गठबंधन बनाने के बजाय पार्टी ट्विटर पर सिमट गई है.

गोवा में टीएमसी को चोट
गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइज़िन्हो फलेरियो को पार्टी में शामिल किए जाने से कांग्रेस आहत थी। हालांकि, टीएमसी ने राज्य में खराब प्रदर्शन किया और एक भी सीट नहीं जीत सकी। हालांकि, टीएमसी की गठबंधन पार्टी महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी (एमजीपी) ने दो सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि एमजीपी ने कहा है कि वह बीजेपी का समर्थन करेंगे.

कांग्रेस का निशाना
बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी के प्रस्ताव पर कहा, ”टीएमसी बीजेपी की सबसे बड़ी एजेंट है. अगर वह बीजेपी से लड़ने को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए.’

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बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, ”अगले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री पद का चेहरा होंगे. गुरुवार के विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि पश्चिम बंगाल के बाहर कोई टीएमसी नहीं है. दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की पार्टी है. पंजाब में भी सरकार बनाएगी. नतीजा यह है कि अब उन्हें यह तय करना होगा कि विपक्ष का चेहरा कौन होगा, ममता या केजरीवाल.’

रूस-यूक्रेन युद्ध: ‘रूस युद्ध समाप्त करना चाहता है’, मास्को का बयान में दावा

डिजिटल डेस्क: रूस-यूक्रेन युद्ध (रूस-यूक्रेन युद्ध) अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। कई बैठकों में रफसूत्र का मिलान नहीं हुआ। युद्ध लंबा चल सकता है, यह डर बढ़ता ही जा रहा है। रूस ने कहा है कि वह संघर्ष को तत्काल समाप्त करना चाहता है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक देश के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ऐसा कहा है.मास्को वास्तव में क्या चाहता है? रूस की राज्य समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, “मास्को ने कभी युद्ध नहीं चाहा है,” लावरोव ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा। और वे भी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तत्पर हैं। ” हालांकि, रूस के बयान के बावजूद, जानकार वर्ग इस बात को लेकर संशय में हैं कि क्या युद्ध वास्तव में अब समाप्त हो जाएगा।

रूसी सेना ने 24 फरवरी को यूक्रेन में प्रवेश किया। तब से भयानक लड़ाई शुरू हो गई है। पहले यह सोचा गया था कि रूस आसानी से कीव पर कब्जा कर लेगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, यूक्रेनी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। आम लोगों ने भी हथियार उठा लिए।

इस बीच, मास्को ने यूक्रेन के खिलाफ “वैक्यूम बम” का उपयोग करना स्वीकार किया है। अमेरिका ने कहा है कि रूस की सेना ने यूक्रेन में वैक्यूम बम का इस्तेमाल किया है। यह ‘वैक्यूम बम’ क्या है? यह उपकरण इतना भयानक क्यों है? युद्ध विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्यूम बम वास्तव में थर्मोबैरिक बम है। इसका मतलब है कि बम आसपास की हवा से सारी ऑक्सीजन सोख लेता है। तभी जोरदार धमाका हुआ। विशाल आग के गोले बनाए जाते हैं। विस्फोट से पैदा हुई भीषण गर्मी ने एक भयानक सदमे की लहर पैदा कर दी। इसकी गति इतनी तेज होती है कि लोग घर-घर जाकर पल भर में बिखर जाते हैं।

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कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, बम के प्रभाव ने इतनी गर्मी और झटके की लहरें पैदा कीं कि एक व्यक्ति तुरंत वाष्पित हो सकता था। रूस ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है कि बम का इस्तेमाल किया गया था।