Friday, April 3, 2026
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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपनी मांग सामने रखी है। राहुल गांधी कई दिनों से कांशीराम के समर्थन में बयानबाजी कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगर नेहरू जीवित होते तो कांग्रेस की तरफ से कांशीराम को मुख्यमंत्री बनाया जाता। हालांकि, यूपी सरकार के मंत्री ने कहा कि कांशीराम ने कांग्रेस के विरोध में ही बहुजन समाज पार्टी बनाई थी।

जब कांशीराम ने किया बसपा का गठन

राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। उन्‍होंने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता तो कांशीराम कभी सफल नहीं होते। नेहरू का निधन 1964 में हुआ था। वहीं कांशीराम 1978 में पिछड़े वर्गों के हितों की वकालत करने वाले संगठन बामसेफ की स्थापना के साथ राजनीतिक परिदृश्य में उभरे। इसके बाद उन्होंने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठन किया।

तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते

राहुल गांधी ने कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से दो दिन पूर्व इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित संविधान सम्मेलन में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की सराहना की। राहुल ने कहा, “कांशीराम जी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीराम जी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीराम जी कभी सफल न होते।” उन्होंने कहा, “अगर जवाहर लाल नेहरू जिंदा रहे होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।”

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा

कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग

राहुल ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी की है। राहुल ने कहा, “संविधान कहता है कि यह देश सबका है और सभी लोग समान हैं, लेकिन आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है और फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है।” उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर और कांशीराम तथा सावरकर के बीच एक बड़ा अंतर है। उन्होंने ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, “गांधी (महात्मा गांधी) जी 10-15 साल जेल में रहे, लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया।

कांशीराम ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया – राहुल गांधी

बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन समझौता नहीं किया। कांशीराम ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया क्योंकि वह ऐसा कर ही नहीं सकते थे। यह कार्यक्रम कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) विभागों तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सहयोग से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया। पार्टी ने मंच से प्रस्ताव पारित कर कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की। कांग्रेस का यह कदम 2027 चुनाव में दलितों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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गंगा किनारे अतिक्रमण पर विस्तृत रिपोर्ट दें केंद्र सरकार – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों पर हुए अवैध निर्माणों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। जी हां सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों पर हुए अवैध निर्माणों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।

अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी भी दे। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से गंगा के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित अधिसूचना के कार्यान्वयन और निष्पादन के लिए अब तक उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

क्या है मामला ?

शीर्ष अदालत पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने एनजीटी के 30 जून, 2020 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एनजीटी ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील बाढ़ के मैदानों पर अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा ?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने दलील दी कि नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है, जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नदी के इन किनारों के कुछ हिस्सों में ताजे पानी की डॉल्फिन बड़ी संख्या में पाई जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि गंगा नदी के मैदानी इलाकों और किनारों को सभी तरह के अतिक्रमणों से पूरी तरह मुक्त करने वाली अधिसूचना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्राधिकरण इस अदालत से किस तरह के निर्देश चाहता है।

कैसे मुक्त होगा गंगा किनारे का अतिक्रमण ?

पीठ ने कहा, “ऊपर बताए गए नोटिफिकेशन को बेहतर और प्रभावी ढंग से लागू करने में अथॉरिटी के रास्ते में कौन सी रुकावटें या बाधाएं आ रही हैं ? ऊपर बताए गए सभी राज्यों से होकर बहने वाली गंगा नदी की सुरक्षा के लिए अथॉरिटी क्या कदम उठाने का इरादा रखती है। यह सुनिश्चित करने के लिए क्या करेगी।

नदी के मैदान और किनारे सभी तरह के अतिक्रमणों से मुक्त हों ? अदालत ने गंगा बेसिन के कई राज्यों को नोटिस जारी किए। वही साथ ही कहा कि इस मुद्दे के लिए अलग-अलग मामलों से परे एक व्यापक जांच की आवश्यकता है। यह मामला अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल को सूचीबद्ध है।

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निजी संपत्ति में नमाज अदा करने पर कानूनी रोक नहीं – इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक सभा या नमाज अदा करने पर कानूनन कोई प्रतिबंध नहीं है। हाईकोर्ट ने बदायूं जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे एक निजी परिसर में स्थित मस्जिद में शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ रहे लोगों के कार्य में कोई हस्तक्षेप न करें या कोई अड़चन ना डालें।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह आदेश बदायूं के निवासी अलिशेर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी संपत्ति के एक हिस्से में वक्फ मस्जिद रजा स्थित है। अलिशेर का आरोप था कि स्थानीय अधिकारी उसे, उसके परिजनों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को वहां शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा करने से रोक रहे हैं या बाधा डाल रहे हैं।

धार्मिक गतिविधियों के आयोजन पर रोक नहीं – हाईकोर्ट

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विवेक शरण की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने एक समन्वय पीठ के पुराने विचार से सहमति जताते हुए कहा कि निजी परिसर में धार्मिक गतिविधियों के आयोजन के खिलाफ कानून में कोई रोक नहीं है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया, “हम समन्वय पीठ के निर्णय से सहमत हैं। प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के परिसर के भीतर नमाज अदा किए जाने में किसी भी तरह से हस्तक्षेप न करने का निर्देश देते हैं।

सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्टीकरण

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मरांथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में एक खंडपीठ द्वारा 27 जनवरी को दिए गए एक निर्णय का हवाला दिया। इस रिट याचिका को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने 25 फरवरी को दिए निर्णय में 27 जनवरी के निर्णय के आधार पर याचिकाकर्ताओं को राहत दी। वही स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर किसी कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस कानून के मुताबिक पर्याप्त कार्रवाई कर सकती है।

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ईरान की ट्रंप को बड़ी धमकी, तेल संयंत्रों को बना देंगे राख का ढेर

इजरायल और अमेरिका से चल रही 15 दिनों की भीषण जंग के बीच ईरान ने अमेरिका को बड़ी धमकी दी है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका से जुड़ी तेल सुविधाओं को “राख का ढेर” बना देगा। करीब दो सप्ताह पहले मध्-पूर्व में शुरू हुआ युद्ध अब वैश्विक तेल संकट की बड़ी वजह बन गया है। दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा का भारी संकट हो गया है। साथ ही तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल ढांचे पर हमले जारी रहे। तो मिडिल-ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी सभी प्रमुख तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। जिससे वे “राख का ढेर” बन जाएंगी। यह धमकी ऐसे समय में आई है, जब मध्य पूर्व में चल रहा दो सप्ताह पुराना युद्ध अब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल और संकट का कारण बन चुका है।

अमेरिका की ओर से शुक्रवार को खर्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर ईरान के तेल, आर्थिक या ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया। तो उसका तुरंत जवाब दिया जाएगा।

ईरान के सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर उसके देश के अंदर मौजूद तेल, आर्थिक या ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ। तो पूरे क्षेत्र में उन ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा जिनका संबंध अमेरिका से है। जो लोग वाशिंगटन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिका का हमला

वही बता दे कि खार्ग पर अमेरिका ने हमला किया है। द्वीप पर 15 धमाके सुने गए हैं। दुश्मन ने सेना के एयर डिफेंस, जोशान नेवल बेस, एयरपोर्ट कंट्रोल टॉवर और हेलीक़ॉप्टर हैंगर को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। खार्ग पर हमले में तेल संयंत्रों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। खार्ग का एयर डिफेंस सिस्टम हमले के एक घंटे बाद फिर से शुरू हो गया है। ईरान पहले ही कह चुका है ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया गया। तो पूरे इलाके में अमेरिका की हिस्सेदारी वाले हर ऊर्जा संयंत्र पर हमला होगा।

भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिली राहत

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम ने एक इंटरव्यू में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत को रियायत देने के सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि अधिकांश भारतीयों का दिल ईरान के साथ है। मैं तो यह भी कह सकता हूं कि वे युद्ध के खिलाफ हैं।

हमने ईरान में अपने लोगों को भारत में अपने भाइयों और बहनों की एकजुटता से अवगत कराया। हमने उन्हें यह भी बताया कि वे इस समय गैस और पेट्रोल की कमी से जूझ रहे हैं। हम उनकी मदद और समर्थन करते हैं। हमारे दूतावास ने भी इस मुद्दे पर कई बार मदद करने और भारत में हमारे भाइयों और बहनों की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया।

होर्मुज से गुजरा भारत का दूसरा एलपीजी टैंकर

अमेरिका-इजरायल और ईरान बीच छिड़े युद्ध का असर गैस सप्लाई पर दिखा है। भारत के नजरिए से देखों तो राहत भरी खबर सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत का दूसरा एलपीजी कैरियर जहाज नंदा देवी निकल चुका है। 17 मार्च को सुबह करीब 4 बजे यह भारत के गुजरात में कांडला पोर्ट पर पहुंचेगा।

होर्मुज में जारी रहेगी नाकाबंदी

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने एक दिन पहले जारी बयान में साफ कहा कि वह अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत का बदला लेंगे और होर्मुज को बंद रखेंगे। इस बीच ईरानी अधिकारियों ने जानकारी दी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और क्षेत्रीय हमलों के कारण दुनिया के पांचवें हिस्से से अधिक तेल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है। तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। जिसमें भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंचेगी खेप

अधिकारियों के अनुसार जहाज शिवारिक 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। जबकि नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। सरकार ने यह भी बताया कि फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 24 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से दो अब भारत की ओर आ चुके हैं। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज बाकी हैं। इन जहाजों में कुल 611 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं और सभी सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।

एलपीजी सप्लाई पर नजर

इस बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण एलपीजी सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि अभी तक देश में कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा घबराहट में गैस बुकिंग कराने के कारण मांग अचानक बढ़ गई है।

सरकार के अनुसार पहले जहां एलपीजी की बुकिंग करीब 75 से 76 लाख थी। वहीं अब यह बढ़कर करीब 88 लाख तक पहुंच गई है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है ताकि आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो। अधिकारियों ने यह भी कहा कि देश में कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में मस्जिद के भीतर नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के सरकारी तर्क को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हर परिस्थिति में कानून का शासन सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। यदि स्थानीय अधिकारियों जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लगता है कि वे कानून के शासन को लागू करने में पर्याप्त सक्षम नहीं हैं तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर स्थानांतरण की मांग करनी चाहिए।

रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा

हाईकोर्ट ने कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा करने में सक्षम हो और यदि वह निजी संपत्ति है तो राज्य से किसी अनुमति के बिना पूजा की जा सकती है। न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि राज्य का हस्तक्षेप केवल वहीं आवश्यक है और अनुमति ली जानी चाहिए। जहां प्रार्थना या धार्मिक कार्य सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों या वे सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहे हों।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मुनाजिर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। सुनवाई के दौरान याची की ओर से गया कि उसे गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याची के अधिवक्ता के अनुसार वहां मस्जिद स्थित है। याची ने मस्जिद या उस पूजा स्थल की कोई भी तस्वीर दाखिल नहीं की है। जहां नमाज अदा की जानी है।

गाटा संख्या 291 के स्वामित्व पर विवाद

​राज्य सरकार की ओर से गाटा संख्या 291 के स्वामित्व पर विवाद बताया गया है। कहा गया कि राजस्व अभिलेखों में यह मोहन सिंह और भूराज सिंह (दोनों सुखी सिंह के पुत्र) के नाम पर दर्ज है। हालांकि केवल बीस नमाजियों को नमाज अदा करने की अनुमति भी दी गई है। जबकि याची का कहना है कि रमजान का समय होने के कारण परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं।

कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य – हाईकोर्ट

सरकारी वकील ने कहा कि कानून व्यवस्था की संभावित स्थिति को देखते हुए नमाजियों की संख्या सीमित करने का ऐसा आदेश किया गया है। हाईकोर्ट ने इसी तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि हर परिस्थिति में कानून का शासन सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि अगर लोकल अथॉरिटी यानी एसपी और डीएम को लगता है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है।

जिसकी वजह से वे नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करना चाहते है। अगर उन्हें लगता है कि वे कानून का राज लागू करने में काबिल नहीं हैं। तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर ट्रांसफर मांग लेना चाहिए।

हाईकोर्ट ने मामले पर क्या कहा ?

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य की ड्यूटी है कि वह हर स्थिति में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत पहले ही एक मामले में कह चुकी है कि प्राइवेट प्रॉपर्टी पर पूजा या इबादत के लिए पूर्व अनुमति लेने की सरकार से कोई जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। जबकि याचिकाकर्ता ने नमाज अदा करने के स्थान को दर्शाने के लिए तस्वीर और राजस्व अभिलेख दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी है।

16 मार्च को फिर होगी सुनवाई

इस पर राज्य सरकार की ओर से इस मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया। याची ने यह दिखाने के लिए समय की मांग की कि नमाज कहां अदा की जानी है। उसने नमाज के स्थान के फोटो और राजस्व रिकॉर्ड पेश करने के लिए पूरक शपथ पत्र दाखिल करने को कहा। इस पर हाईकोर्ट अगली सुनवाई के लिए मामले को 16 मार्च को फ्रेश केस के रूप में शीर्ष दस मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

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राजधानी लखनऊ में चौक के लाजपतनगर में गुरुवार को संदिग्ध हालात में चार वर्षीय अर्नव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके साथ हुई बेरहमी का पता चला है। उसके पिता और सौतेली मां ने दीवार पर पटका था। इसके पहले डंडे और थप्पड़ों से उसे इतना पीटा कि पूरा शरीर नीला पड़ गया। पूरे शरीर पर 21 चोटें मिली हैं और सिर की हड्डी टूटने से उसकी मौत हुई है। अर्नव की मौत से आक्रोशत उसके मामा ने पोस्टमार्टम हाउस में पिता से सवाल-जवाब किए तो दोनों में हाथापाई हो गई। बवाल बढ़ता देख पुलिस ने उन्हें अलग कराया।

पिता ने की दूसरी शादी

मासूम के मामा रोहित ने बताया कि उसकी बहन स्वाती (अर्नव की मां) का विवाह भीष्म से 23 नवंबर 2020 को हुई था। मैट्रिमोनियल साइट से रिश्ता भीष्म के बारे में जानकारी हुई थी। 16 अक्तूबर 2021 को स्वाती ने अर्नव को जन्म दिया था। स्वाती बेटे के जन्म के बाद से बहुत खुश थी। इसके कुछ महीने बाद वह बीमार हो गया। अप्रैल 2022 में स्वाती की मौत हो गई थी। चूंकि अर्नव छोटा था। परवरिश के लिए उसे अपने घर शुक्लागंज लेकर चला गया था। वहां उसे रखा था। इस बीच भीष्म ने रागिनी से दूसरी शादी कर ली। कोर्ट के आदेश पर अर्नव की कस्टडी उसके पिता भीष्म को अगस्त 2025 में मिल गई।

बुरी तरह दोनों पीटते थे, दूध तक नहीं देते थे

रोहित ने बताया कि अर्नव को उसके पिता भीष्म और सौतेली मां रागिनी बुरी तरह पीटती थी। यह जानकारी उसके पड़ोसियों ने कई बार दी थी। भीष्म और उसकी दूसरी पत्नी, अर्नव को भूखा रखते थे पीने को दूध तक नहीं देते थे। भीष्म की शादी के बाद एक दो बार अर्नव को देखने के लिए उसके घर आया था। भीष्म का व्यवहार ठीक न होने के कारण नहीं आता था।

शरीर पर मिले 21 चोटों के निशान

शरीर पर 21 चोटों के निशान मिले है। जिसमे सिगरेट से दागा, प्रेस से जलने के निशान शामिल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अर्नव के हाथ-पैर, कूल्हे, पीठ और चेहरे में कुल मिलाकर 21 एंटीमार्टम इंजरी यानी मौत से पूर्व दी गई चोटें मिली हैं। बेरहमी से दी गई चोटों के कारण अर्नव का पूरा शरीर नीला पड़ चुका था। रोहित के मुताबिक कई जगह की तो खाल उधड़ी सी गई थी। ऐसा लग रहा है जैसे प्रेस से जलाया और सिगरेट से शरीर को दागा गया हो।

गुस्से में मार दिया

पुलिस की पूछताछ में आरोपी भीष्म और रागिनी ने पहले बरगलाने की कोशिश की। पुलिस को बताया कि अर्नव बाथरूम में गिर गया था। फिर बोले जीने से गिर गया। इसलिए इतनी चोटें मिली हैं। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्यों पर सवाल किए। पुलिस ने सख्ती की तो दंपति ने कबूला कि-गुस्से में हाथ से पीटा था, अचानक गश खाकर गिरा और मर गया।

रोहित ने बताया कि उसने जब चौक कोतवाली में तहरीर देने की बात कही तो भीष्म ने कहा कि वह अधिवक्ता है। मुकदमा दर्ज कराने से भी कुछ नहीं होगा। उल्टा रोहित को धमकाते हुए बोला कि जेल नहीं भेज पाओगे। अधिवक्ता हूं, छूट जाऊंगा।

पिता और मां दोनों गिरफ्तार

उन्नाव में शुक्लागंज स्थित अंबिकापुरम निवासी अर्नव की नानी सुधा की तहरीर पर चौक पुलिस ने पिता भीष्म और सौतेली मां रागिनी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। दोनों को हिरासत में ले लिया गया है और पुलिस टीम पूछताछ कर रही है। भीष्म यहां लाजपतनगर में रहता है। केजीएमयू के पास उसकी फोटो स्टेट की दुकान है। इसके अलावा वह अधिवक्ता भी है। गुरुवार को घर के अंदर अर्नव की मौत हो गई थी। उसके शरीर पर चोटों के निशान थे।

अर्नव के मामा रोहित कश्यप और आलमबाग निवासी मौसी काजल ने हत्या का आरोप लगाया था। शुक्रवार को अर्नव के शव का पोस्टमार्टम हुआ। उसमें हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस ने हत्यारोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया है।

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शराब याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीजेआई ने उठाए ड्राफ्टिंग पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में शराब से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई भड़क उठे। उन्होंने याचिका लगाने वाले वकील को चेतावनी दी। सीजेआई ने कहा कि दोबारा ऐसी याचिका लगाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यह एक और उदाहरण है। जिसमें बिना दिमाग लगाए याचिका दायर की जाएगी।

सीजेआई ने इस याचिका को बेबुनियाद बताया और कहा कि अपील साफ नहीं हैं। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाता है। यह खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण है। बार एंड बेंच के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। इस याचिका में शराब की तय मात्रा का सुझाव जरूरी करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही तामसिक भोजन को लेकर भी नियम बनाने के लिए कहा गया था।

याचिका में क्या मांग की गई ?

सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा खुद पिटीशनर के तौर पर फाइल की गई कई जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने गुस्से में कहा, “आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?” पिटीशन में शराब के फिक्स्ड प्रिस्क्रिप्शन को जरूरी बनाने और तामसिक खाने पर रेगुलेशन की अपील की गई थी। पिटीशन में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के मुद्दों वगैरह का भी जिक्र किया गया।

सीजेआई की अगुआई वाली बेंच ने क्या कहा ?

सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि यह पिटीशन दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण है। मांग साफ नहीं हैं, बेबुनियाद हैं और खारिज कर दी गई हैं। यह खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण है। अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम बहुत ज्यादा खर्च के साथ याचिका खारिज करते। इस मामले में कोर्ट ने कोई जुर्माना नहीं लगाया।

लेकिन दोबारा ऐसा होने पर याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की बात कही। सीजेआई ने कहा कि यह याचिका कैज़ुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है। अगली बार जब आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे। तो बहुत ज्यादा जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने गुस्से में कहा कि तुम लोगों ने ऐसी बहुत दुकानें चला रखी हैं।

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मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर राज्यसभा में विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया बयान

मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर आज राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

तेहरान में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर कही ये बात

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान में फंसे कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की है। छात्रों को देश से बाहर स्थानांतरित करने के लिए दूतावास ने सक्रिय सहयोग किया। उन्होंने आगे बताया कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते निकालकर वापस भारत लौटने में सहायता प्रदान की गई। दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट मोड पर है। हम भारतीय समुदाय की सुरक्षा और सहायता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमने दो भारतीय नाविकों (व्यापारिक जहाज पर) को खो दिया है। एक अभी भी लापता है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय – एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय है। हम एक पड़ोसी क्षेत्र हैं और पश्चिम एशिया की स्थिरता हमारे लिए बहुत अहम है। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ईरान में भी अध्ययन या रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय हैं। यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है।

इसमें तेल और गैस के कई महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता शामिल हैं। आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान और अस्थिरता का माहौल गंभीर मुद्दे हैं। जयशंकर ने कहा कि संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र में सुरक्षा के हालतों में गिरावट सामने आई है। ये संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है और विनाश बढ़ता जा रहा है। सामान्य जीवन और गतिविधियां स्पष्ट रूप से प्रभावित हो रही हैं।

तीन जहाजों को डॉक करने की मांगी थी अनुमति- एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि ईरान ने भारत से अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी। जिसे 1 मार्च को मंजूरी दे दी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का मानना ​​है कि यह ‘सही कदम’ था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया कि तीनों जहाजों में से एक 4 मार्च को दक्षिणी बंदरगाह कोच्चि पर पहुंचा। उसका चालक दल भारतीय नौसेना सुविधाओं में ठहरा हुआ था। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संसद के निचले सदन को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।

लोकसभा में एस जयशंकर के भाषण पर विपक्ष का हंगामा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष और इस संकट पर भारत के रुख के संबंध में लोकसभा में अपना संबोधन शुरू कर दिया है। विपक्षी सांसदों ने लोकसभा भवन को घेर लिया है। जोर-जोर से नारे लगाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर के पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा में दिए जा रहे भाषण को बाधित किया।

विपक्ष ने सरकार की चुप्पी की आलोचना की

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इससे संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की “चुप्पी” की कड़ी आलोचना की। लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने के बाद विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। जिसके चलते सदन की कार्यवाही 3 बजे तक स्थगित कर दी गई।

दूसरा मोशन लाने का क्या मतलब है – किरेन रिजिजू

लोकसभा में पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि विदेश मंत्री गल्फ देशों के हालात पर सदन को संबोधित कर रहे हैं। वे वहां मौजूद भारतीयों की स्थिति के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने सारी बातों का जवाब दिया है। इस बीच किरेन रिजिजू ने कहा- विपक्ष को पता ही नहीं वो क्या करना चाहते हैं। वे कंफ्यूज है, पहले विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नोटिस दिया। लेकिन अब ये दूसरा नोटिस दे रहे हैं, दूसरा मोशन लाने का क्या मतलब है ? मैंने आज तक इतना गैर जिम्मेदाराना विपक्ष नहीं देखा है। आप लोग एक पार्टी, एक आदमी, एक पार्टी से बाहर आना नहीं चाहते हैं क्या ?

मिडिल ईस्ट पर सरकार का चर्चा से इनकार

सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार मिडिल ईस्ट के हालातों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के बाद फिलहाल अब चर्चा के पक्ष में नहीं है। जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर आ रहा है और हंगामा कर रहा है। अनुराग ठाकुर ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। अब जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो उसे भाग रहे हैं। आप दूसरे नोटिस की बात कर रहे हैं। अगर हम दूसरे मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होंगे। तो फिर वह एक तीसरा मुद्दा लेकर आ जाएंगे। क्योंकि उनका नेतृत्व ही दिशा विहीन है।

सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है – कांग्रेस

कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि हम मिडिल ईस्ट संकट और उससे पैदा हुए एनर्जी संकट पर थोड़ी देर की चर्चा चाहते थे। ऐसा लगता है कि अमेरिका के प्रेसिडेंट हमारे बॉस बन गए हैं। जो हमें बता रहे हैं कि तेल किससे खरीदना है। ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई ? हम भारत की फॉरेन पॉलिसी, एनर्जी संकट से बचाव, भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा चाहते हैं। ऐसे में बयान जारी करने का कोई फायदा नहीं है। क्योंकि हम सरकार से कोई सवाल नहीं पूछ सकते। क्यूंकि सरकार चर्चा से भाग रही है।

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केजरीवाल-सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को नोटिस, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में सीबीआई द्वारा दायर की गई उस याचिका पर सुनवाई की। जिसमें निचली अदालत (राउज़ एवेन्यू कोर्ट) द्वारा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 पक्षों को नोटिस जारी कर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को तय की गई है।

चुनिंदा कारोबारियों के लिए मैनिपुलेट हुई नीति

सीबीआई की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली आबकारी नीति को जानबूझकर इस तरह तैयार किया गया था। जिससे कुछ खास कारोबारियों को फायदा पहुंचाया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि नीति को मैनिपुलेट करके बनाया गया। इसका उद्देश्य चुनिंदा व्यापारियों को लाभ पहुंचाना था। हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर आरोपी पक्ष राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाता है। लेकिन इससे जांच के तथ्यों की गंभीरता कम नहीं हो जाती।

सीबीआई ने अदालत के सामने गवाहों के बयानों का भी हवाला दिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि धारा 164 के तहत दर्ज बयान, धारा 161 के बयानों से गुणात्मक रूप से अलग होते हैं। क्योंकि 164 के तहत गवाह को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है और उससे पूछा जाता है कि वह किसी दबाव में तो नहीं है। सीबीआई के अनुसार मामले में 164 के तहत कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इन बयानों में कथित साजिश, पैसे के लेन-देन और रिश्वत के भुगतान के बारे में विस्तार से बताया गया है।

एसजी ने कहा कि कृपया जांच का स्तर देखिए। हमारे पास ईमेल और व्हाट्सएप चैट्स हैं। यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है। हम किसी तरह उन्हें मना नहीं पाए। मेरे एएसजी (ASG) ने 10 दिनों तक बहस की। कुछ ही दिनों में फैसला आ गया। शीघ्र न्याय हमारा लक्ष्य है, लेकिन यह अन्याय में परिणत नहीं होना चाहिए। एसजी ने कहा कि यह आदेश आपराधिक कानून को पूरी तरह से उलट रहा है। गवाहों के बयानों को मुकदमे की सुनवाई तक पुष्टि की आवश्यकता नहीं होती। उनसे गवाहों से जिरह की जा सकती है।

हाईकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस

इसके साथ ही, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शराब नीति घोटाले के हवाला ईडी (ED) के मामले में आगे कोई सुनवाई नहीं होगी। जब तक हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपमुक्त आरोपियों को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगाएगा। जिसमें सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के कुछ ऑब्जर्वेशन तथ्यात्मक रूप से गलत थे। हाईकोर्ट में सुनवाई होने तक ईडी (ED) के मामले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपी आरोपमुक्त नहीं हो सकेंगे।

सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। उन्होंने अदालत से कहा, “यह इस देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। मैं इसे राष्ट्रीय शर्म कहूंगा।” एसजी मेहता ने यह भी कहा कि मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई है और जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। शराब नीति को जानबूझकर कुछ व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया।

जल्दी न्याय पर नतीजा गलत नहीं होना चाहिए – एसजी मेहता

सीबीआई की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा कि भ्रष्टाचार का साफ मामला- रिश्वत ली गई। इस्तेमाल की गई, मीटिंग हुईं, फोरेंसिक सबूत हैं। मैंने किसी भी एजेंसी को इतने बारीकी से सबूत इकट्ठा करते नहीं देखा। मैं कोई बढ़ा-चढ़ाकर बयान नहीं दे रहा हूं। मैं इसे सही साबित करना चाहता हूं। एसजी मेहता ने कहा कि कई डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा किए गए, गवाहों से पूछताछ की गई। हमने ईमेल, व्हाट्सप्प (WhatsApp) चैट इकट्ठा किए हैं। यह कोई हवा में उड़ने वाली बात नहीं है। बदकिस्मती से हम मना नहीं पाए। लेकिन सबमिशन पूरे किए और कोर्ट ने 12 दिनों के अंदर 600 पेज का जजमेंट दे दिया। जल्दी न्याय एक लक्ष्य है, लेकिन इसका नतीजा गलत नहीं होना चाहिए।

एसजी मेहता ने कहा कि जब हम साजिश का आरोप लगाते हैं। तो हमें हर हिस्से को साबित करना होता है। ट्रायल में इसे साजिश बताने के लिए सभी हिस्सों को जोड़ना पड़ता है। साजिश कभी भी खुलेआम नहीं रची जाती। डिस्चार्ज ऑर्डर में भी इस पर यकीन नहीं किया जाता, बरी करने के ऑर्डर में नहीं। सीबीआई के वकील- कोर्ट को केस के बारे में बता रहे हैं। वकील ने कहा- हवाला के माध्यम से और कई किश्तों में पैसा ट्रांसफर किया गया। ऐसे मामले में कोई पक्ष बदले की भावना का आरोप लगा सकता है। सभी प्रमुख गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए।

निचली अदालत का फैसला कितना गलत है – एसजी मेहता

सीबीआई के वकील- कुल 164 बयान दर्ज किए गए थे। ऐसे गवाह हैं। जिन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि साजिश कैसे रची गई। रिश्वत कैसे दी गई और किस-किस को दी गई। एक व्यक्ति विजय नायर है, जो उस राजनीतिक दल का कम्युनिकेशन इंचार्ज है। लोगों को दिए गए फायदों के बदले 19 करोड़ से 100 करोड़ तक की रिश्वत दी गई। इसमें से 44.50 करोड़ हवाला के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। मामले में जांच से यह भी दिखाया गया है कि यह पैसा पार्टी के गोवा चुनाव के फंड के लिए भेजा गया था।

एसजी ने कहा कि गवाह को अदालत के समक्ष गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया है। न ही उससे पूछताछ की गई है और न ही जिरह की गई है। उसकी गवाही मजिस्ट्रेट के समक्ष है। किसी का भी यह मामला नहीं है कि वह धमकी या दबाव के तहत गवाह बना। एसजी ने बताया कि निचली अदालत के आदेश के कुछ हिस्से तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। एसजी ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन कर रहा हूं कि आरोप मुक्त करना पुष्टि प्राप्त करने का चरण नहीं है। लेकिन चूंकि निर्णय में बार-बार पुष्टि के अभाव की बात की गई है। इसलिए मैं यह दिखा रहा हूं कि पुष्टि मौजूद थी। लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया है।

एसजी मेहता ने कहा कि मैं दिखाऊंगा कि निचली अदालत का फैसला कितना गलत है। अप्रूवर के बयानों को ट्रायल के स्टेज के अलावा कन्फर्मेशन की ज़रूरत नहीं होती। क्या कोर्ट शक या ट्रायलेबल केस ढूंढकर आरोपी पर ट्रायल चलाएगी ? गवाहों के बयान हैं। जांच ट्रायल के स्टेज पर होनी चाहिए, डिस्चार्ज स्टेज पर नहीं।

हाईकोर्ट ने मेहता से पूछा कि इंडिपेंडेंट गवाह कौन

दिल्ली हाईकोर्ट ने मेहता से पूछा कि इंडिपेंडेंट गवाह कौन हैं ? एसजी मेहता ने कहा कि गवाह संख्या- 20 और होटल रिकॉर्ड्स। तुषार मेहता ने सरकारी गवाह का बयान पढ़ते हुए कहा कि मैं नाम नहीं बता रहा हूं। मैं नेताओं के नामों को सनसनीखेज नहीं बनाना चाहता। जब उसने पैसे जमा किए, तो उसने सबकुछ बता दिया। डिस्चार्ज कन्फर्मेशन के स्टेज के लिए नहीं है। सीबीआई ने एक के बाद एक गवाह दिए हैं। जो इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।

एसजी ने कहा कि दिनेश अरोड़ा के बयान की पुष्टि अशोक कौशिक के बयान से होती है। जो रिश्वत देने वाले का पीए (PA) है। एसजी तुषार मेहता ने कहा कि जब हम साजिश का आरोप लगाते हैं। तो हमें हर हिस्से को साबित करना होता है। ट्रायल में इसे साजिश बताने के लिए सभी हिस्सों को जोड़ना पड़ता है। साजिश कभी भी खुलेआम नहीं रची जाती। डिस्चार्ज ऑर्डर में भी इस पर यकीन नहीं किया जाता, बरी करने के ऑर्डर में नहीं। एसजी ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि मुझे आपको बताना होगा। ये सभी नोट आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले थे। इस संबंध में निचली अदालत ने कोई आदेश नहीं सुनाया है। हमने साक्ष्य नष्ट करने के कई उदाहरण दर्ज किए हैं। 170 फोन नष्ट किए गए थे।

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जेडीयू में शामिल हुए निशांत कुमार, पिता नीतीश को लेकर कही बड़ी बात

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली की ओर चल पड़े हैं। तो वहीं उनके बेटे निशांत कुमार आखिरकार सक्रिय राजनीति का हिस्सा हो गए हैं। परिवारवाद से दूर रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने जेडीयू जॉइन कर ली है। जेडीयू पार्टी में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद निशांत कुमार पिता नीतीश से मिलने पहुंचे। उन्हें मिठाई खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। इसकी पहली तस्वीर भी सामने आ रही है।

दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि वह पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट निशांत कुमार को पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में जेडीयू में शामिल किया गया।

नीतीश कुमार इस कार्यक्रम में नहीं आए

हैरानी की बात ये है कि बेटे निशांत कुमार के जेडीयू में शामिल होने के दौरान जो कार्यक्रम हुआ, उसमें नीतीश कुमार नहीं आए। ऐसे में इस बात की सियासत में काफी चर्चा रही।

सदस्यता ग्रहण करने के बाद क्या बोले निशांत ?

जेडीयू पार्टी ऑफिस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए निशांत कुमार ने कहा, “यहां पर मौजूद आप सभी लोगों का अभिनंदन करता हूं। आप सब अपना कीमती समय निकालकर यहां आए। मैं आपका स्वागत और नमन करता हूं। मैं जेडीयू के पार्टी कार्यालय में जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करने आया हूं। मैं एक सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी का ख्याल रखने की कोशिश करूंगा। मेरे पिताजी ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। ये उनका निजी फैसला है। मैं उसे स्वीकार करता हूं और उनका आदर करता हूं। हम सब मेरे पिता नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेंगे। पार्टी और जनता ने जो विश्वास मुझ पर जताया है, मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा।

निशांत ने कहा कि एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में मैं पार्टी को मजबूत करने की कोशिश करूंगा। पापा ने जो 20 साल में किया, उसे जन-जन में पहुंचाने की कोशिश करूंगा। जनता के दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश करूंगा। मेरे पिताजी ने जो 20 साल में किया है, वह सबको याद रहेगा। पूरे देश और प्रदेश को मेरे पिता नीतीश कुमार पर गर्व है। आप सब मेरे पिताजी नीतीश कुमार पर अपना विश्वास बनाए रखें।

गौरतलब है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है। ऐसे में बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत हैं। नीतीश के बेटे निशांत को भी पार्टी की सदस्यता इसीलिए ग्रहण कराई गई है, जिससे उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सके।

पैर छूकर ल‍िया आशीर्वाद

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पार्टी का पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। निशांत ने उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मंच पर मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, मदन सहनी, मो. जमा खान, सुनील कुमार, श्रवण कुमार, लेशी सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं, विधायकों एवं विधान पार्षदों की मौजदूगी में निशांत कुमार को भरपूर समर्थन मिला।

इससे पहले प्रदेश जेडीयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने जेडीयू में निशांत कुमार के शामिल होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार पार्टी के भविष्य हैं, आज का दिन ऐतिहासिक है। जेडीयू पार्टी की सदस्यता लेने के बाद निशांत ने पिता नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने वाले फैसले पर पहली बार अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पापा के राज्यसभा जाने के फैसले को व्यक्तिगत निर्णय है। जिसे स्वीकार करता हूं। निशांत कुमार ने कहा कि पिताजी के मार्गदर्शन में जो भी पार्टी कहेगी वे करेंगे।

क्या निशांत कुमार होंगे डिप्टी सीएम ?

जेडीयू कार्यालय में आगमन पर निशांत का जोरदार स्वागत हुआ। जेडीयू पार्टी कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर जमा हुए और पार्टी का झंडा लहराते हुए ढोल बजाते दिखे। इस बीच अटकलें हैं कि निशांत को नई सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। नीतीश कुमार के एक करीबी सहयोगी ने शनिवार को दावा किया कि एक सर्वसम्मत निर्णय लिया गया था। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार में निशांत को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।

विधान परिषद सदस्य चुने जाएंगे निशांत कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। हरनौत से जेडीयू के विधायक हरि नारायण सिंह ने दावा किया कि निशांत को अगले महीने राज्य विधान परिषद का सदस्य चुना जाएगा।

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क्या ईरान में घुसेगी अमेरिका की स्पेशल फोर्स ? ट्रंप ने कही ये बातें

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल ने ईरान में स्पेशल फोर्स भेजने की संभावना पर चर्चा की है। इस ऑपरेशन का मकसद ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करना हो सकता है। यह जानकारी एक्सिऑस (Axios) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

जिसमें चार सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऐसा कदम युद्ध के अगले चरण में उठाया जा सकता है। इस बीच यूएस के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचाता है या उन्हें कहीं भी धमकी देता है। तो अमेरिका उसे ढूंढ कर खत्म कर देगा। यह बयान यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आधिकारिक अकाउंट के जरिए साझा किया गया है।

21 सेकंड का वीडियो भी किया शेयर

यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस चेतावनी के साथ 21 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया। जिसमें हाल के सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिकी सेना की ओर से वाहनों और इमारतों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अमेरिकी सेना किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने किया बड़ा दावा

इसी बीच यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया गया है। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप कहा कि यह कदम दुनिया से एक बड़े खतरे को हटाने जैसा है। यूएस प्रेसिडेंट ने कहा कि युद्ध में अमेरिका को बड़ी बढ़त मिली है। ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है।

राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना को लगभग खत्म कर दिया गया है और 44 जहाज नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अधिकांश लड़ाकू विमान और मिसाइल क्षमताओं को भी नष्ट कर दिया गया है। उनके अनुसार मिसाइल बनाने वाले कई कारखानों पर भी हमले किए गए हैं। जिससे ईरान की सैन्य क्षमता काफी कम हो गई है।

स्कूल पर हमले को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप ?

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि लगभग 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर भी नष्ट कर दिए गए हैं। जो ईरान के लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि युद्ध के बीच एक स्कूल पर हुए बम हमले को लेकर भी सवाल उठे। रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर बम गिरा है। इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इसके लिए अमेरिका जिम्मेदार नहीं है। उनका दावा है कि यह घटना ईरान के अपने हथियारों की गलत दिशा या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई हो सकती है।

कब तक चलेगा ईरान युद्ध ?

युद्ध की समय सीमा को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी होगा। उनके अनुसार ईरान की सेना अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है। लेकिन अमेरिका अभी आगे की रणनीति पर फैसला कर रहा है। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी भी बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पहले हुई बातचीत में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के लिए तैयार नहीं दिखा।

यूरेनियम इनरिचमेंट करने का अधिकार – ईरान

ईरान ने कहा था कि उसे यूरेनियम इनरिचमेंट करने का अधिकार है। उसके पास 60 प्रतिशत तक समृद्ध ईंधन मौजूद है। जो लगभग 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है। इस कारण अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता और बढ़ गई है। यह पूरा संकट 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के बाद और तेज हो गया।

इस ऑपरेशन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए। इन हमलों में बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे देशों का भी जिक्र किया गया है।

इजरायल रक्षा बल ने भी दी जानकारी

इसी दौरान इजरायल रक्षा बल ने भी जानकारी दी कि इजरायली वायु सेना ने तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इजरायली सेना के अनुसार इन हमलों में ईरान की सैन्य इकाइयों को ईंधन देने वाले भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। इजरायली सेना का कहना है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य व्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उसके सैन्य ठिकानों को और कमजोर किया गया है। वही बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले विदेशी नागरिकों के लिए भी खतरा बढ़ गया है।

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ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से मांगी माफी, सरेंडर पर दिया बड़ा बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने हाल ही में कई खाड़ी देशों में किए गए अपने हमले के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि जब तक पड़ोसी देशों की ओर से ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक ईरान उन पर मिसाइल या ड्रोन हमले करना बंद कर देगा।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इस फैसले को ईरान की अस्थायी नेतृत्व परिषद ने मंजूरी दे दी है और इसे क्षेत्र में कई दिनों से चल रही भीषण लड़ाई के बाद तनाव कम करने की दिशा में पहला स्पष्ट कदम माना जा रहा है। पेजेश्कियन ने युद्ध के कारण उत्पन्न अस्थिरता के लिए पड़ोसी देशों से माफी मांगी और कहा कि ईरान नहीं चाहता कि यह संकट पूरे क्षेत्र में फैले।

पड़ोसी देशों पर हमले के लिए मांगी माफी

एएफपी के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, “मुझे अपनी ओर से और ईरान की ओर से उन पड़ोसी देशों से माफी मांगनी चाहिए। जिन पर ईरान ने हमला किया है। यह बयान उस युद्ध के बाद आया है जो पिछले हफ्ते अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले के बाद शुरू हुआ था।

इन हमलों में कथित तौर पर ईरान के सुप्रील लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत सैकड़ों अन्य लोग मारे गए थे। तभी से ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हितों से जुड़े कई स्थानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन जारी झड़पों ने मीडिल-ईस्ट में व्यापक युद्ध की आशंकाओं को काफी हद तक बढ़ा दिया है।

लेकिन शर्त के साथ मांगी माफी

ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों के लिए माफी मांगते हुए कहा, ‘तेहरान इन हमलों को रोकेगा और कहा कि ये हमले रैंकों में गलतफहमी की वजह से हुए थे। ईरान के राष्ट्रपति ने शर्त रखते हुए आगे कहा, ‘हम पड़ोसी देशों पर तब तक हमला नहीं करेंगे।

जब तक पड़ोसी देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता। ईरान ने अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए अपने पड़ोसी देशों पर बीते कुछ दिनों में कई हमले किए हैं। वहीं यूएई में दुबई एयरपोर्ट के पास भी हमला किया गया। जिससे मिडिल ईस्ट के इन देशों में दहशत का माहौल बन गया।

अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनी

ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से बिना शर्त सरेंडर के बातचीत नहीं करेंगे। इसके साथ ही अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान को आने वाले बमबारी अभियान की लेकर चेतावनी दी है। अधिकारियों का कहना है कि अगला हमला एक हफ्ते तक चलने वाले संघर्ष में अब तक का सबसे तेज अटैक होगा। अमेरिका ने इजरायल को 151 डॉलर मिलियन के नए हथियारों की बिक्री को भी मंजूरी दे दी है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान की मिलिट्री क्षमता लीडरशिप और न्यूक्लियर प्रोग्राम को निशाना बनाया है।

ईरान ने इजरायल पर दागी मिसाइल

वही ईरान के यूएन राजदूत ने अमेरिका को जवाब देते हुए कहा देश अपनी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। आज शनिवार सुबह भी इजरायल की राजधानी यरुशलम में तेज धमाके सुनाई दिए। ईरान से आ रही मिसाइलों की वजह से लोग पूरे इजरायल में बम शेल्टर की ओर भाग रहे हैं। इन हमलों से इजरायल की इमरजेंसी सेवाओं से किसी के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

ईरान ने कही सरेंडर न करने की बात

पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का संकेत देते हुए ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान इजरायल या संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने भाषण में उन्होंने कहा कि ईरानी जनता कभी सरेंडर नहीं करेगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के सरेंडर की उम्मीद करने वालों को सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश अपनी रक्षा करना जारी रखेगा। एएफपी के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, “दुश्मनों को ईरानी जनता के सरेंडर की अपनी इच्छा को अपने साथ कब्र में ले जाना चाहिए।

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केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, चॉपर में भरा धुआं

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की शनिवार को लखनऊ एयरपोर्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वह हेलिकॉप्टर से ला मार्टस् से कौशांबी जा रहे थे, तभी तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।

जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ से कौशांबी के लिए रवाना हुए थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही ला मार्टिनियर ग्राउंड से उड़ान भरी, तभी पायलट को तकनीकी खराबी का अहसास हुआ। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के भीतर अचानक धुआं भरने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि आपातकालीन लैंडिंग का निर्णय सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियात के तौर पर लिया गया था।

लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई हेलिकॉप्टर की लैंडिंग

पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और हेलिकॉप्टर को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। एयरपोर्ट पर पुख्ता इंतजामों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। वही, चॉपर में सवार सभी यात्री सही सलामत हैं। इस घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर की जांच में जुट गई है।

कौशाम्बी जा रहे थे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य

बता दें कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आज सुबह लखनऊ से कौशाम्बी जा रहे थे। यहां दोपहर 11.30 बजे तक केशव प्रसाद मौर्य को कौशाम्बी पहुंचना था, लेकिन हेलीकॉप्टर में खराबी की वजह से उनके हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। कौशाम्बी में होने वाले कार्यक्रमों की बात करें तो केशव प्रसाद मौर्य यहां सरस महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे।

यह कार्यक्रम कौशाम्बी के शीतला देवी अतिथि गृह के पास आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा वह पार्टी के पदाधिकारियों से भी संवाद करने वाले थे। केशव प्रसाद मौर्य के अन्य कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक और विभिन्न परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण भी शामिल था।

सभी लोग सुरक्षित

अधिकारियों ने बताया कि उड़ान के दौरान अचानक हेलीकॉप्टर में धुआं भर जाने के बाद आपातकालीन लैंडिंग की गई। सूचना मिलते ही पायलट ने तुरंत हेलीकॉप्टर को लखनऊ की ओर मोड़ दिया और एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि आपातकालीन लैंडिंग का निर्णय सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियात के तौर पर लिया गया था।अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। किसी को चोट नहीं आई है।

सुरक्षा कारणों की जांच शुरू

इस घटना के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। इस दौरान सुरक्षा कारणों से हेलीकॉप्टर की पूरी जांच की जा रही है। फिलहाल उनको अभी एयरपोर्ट पर ही ठहराया गया है। हेलीकॉप्टर में तकनीकी कमियों की जांच में टीम जुट गई है। फिलहाल इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की आशंका नहीं है।

कौशांबी में वे सरस महोत्सव के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इस बीच वे पार्टी पधाकारियों से संवाद भी करते। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों के साथ उनकी बैठक भी होने वाली थी। वहीं डिप्टी सीएम कई परियोजनाओं पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करने वाले थे।

डिप्टी सीएम दूसरे हेलीकॉप्टर से हुए रवाना

थाना प्रभारी निरीक्षक राजदेव राम प्रजापति ने बताया कि हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने के कारण इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। उपमुख्यमंत्री अब दूसरे हेलीकॉप्टर से अपने निर्धारित कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।

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अमेरिका का एआई आक्रमण, ईरान के 1000 से ज्यादा लक्ष्यों को बनाया निशाना

अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ जंग की शुरुआत में एआई (AI) का जमकर इस्तेमाल किया है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सेना ने एआई (AI) की मदद से पहले 24 घंटों में करीब एक हजार टारगेट्स पर हमला किया। इस दौरान पहले 12 घंटों में ही लगभग 900 मिसाइलें ईरान में अलग-अलग टारगेट्स पर दागी गईं। इन शुरुआती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के कंपाउंड पर भी हमला हुआ। जिसमें उनकी मौत हो गई। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ जंग की शुरुआत की थी।

मैवेन स्टार सिस्टम ने की काफी मदद

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई (AI) ने सेना को बहुत तेजी से लक्ष्य चुनने और हमले करने में मदद की। जिससे ईरान जवाबी कार्रवाई करने में नाकाम रहा। इस ऑपरेशन में मुख्य भूमिका मैवेन स्मार्ट सिस्टम (Maven Smart System) ने निभाई। जो अमेरिकी कंपनी पैलेंटीर टेक्नोलॉजी ने बनाया है। यह एक बहुत उन्नत डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म है।

जो सैटेलाइट, निगरानी सिस्टम और अन्य सैन्य स्रोतों से आने वाली बड़ी मात्रा में गुप्त खुफिया जानकारी को एनालाइज करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम रीयल-टाइम में जानकारी प्रोसेस करता है और कमांडरों को टारगेट्स देता है। यह टारगेट्स को उनकी अहमियत के आधार पर प्राथमिकता भी देता है।

मेवन सिस्टम ने ईरान में क्या किया ?

पहले डाटा के विशाल भंडार में से एक घंटे में 1,000 आब्जेक्ट की पहचान दोस्त या दुश्मन के तौर पर करनी होती थी। अब यही काम एआइ रियल टाइम में कर रहा है। छह दिन में 2,000 टारगेट पर हमला अमेरिका ने पिछले छह दिन में ईरान में 2,000 टारगेट को निशाना बनाया है और इसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर का कहना है कि इसने हमलों की संख्या और तीव्रता को दोगुना कर दिया है।

कैसे तैयार हुआ मेवन सिस्टम ?

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, मेवन सिस्टम के विकास की शुरुआत 2017 में हुई थी। अमेरिकी रक्षा विभाग ने महसूस किया कि उनके पास ड्रोन फुटेज का इतना विशाल भंडार है। उसे देखने के लिए पर्याप्त इंसान ही नहीं हैं। शुरुआत में अमेरिकी सेना ने गूगल के साथ साझेदारी की। गूगल के पास दुनिया का सबसे उन्नत इमेज रिकग्निशन साफ्टवेयर था।

सेना चाहती थी कि गूगल का टेंसरफ्लो उनके ड्रोन फुटेज में मौजूद कारों, इंसानों और इमारतों की पहचान करना सीखे। जब गूगल के कर्मचारियों को पता चला कि उनका कोड युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है, तो 3,000 से अधिक कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 2018 में गूगल ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। बाद में पेंटागन ने एंड्रुइल इंडस्ट्रीज और पैलेंटीर जैसी छोटी टेक कंपनियों पर दांव लगाया।

इन कंपनियों ने लाखों घंटों के पुराने युद्ध फुटेज को एआइ को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया। एआइ ने सीखा कि एक साधारण ट्रक और राकेट ले जाने वाले ट्रक में क्या अंतर होता है। मेवन का सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब इसे ड्रोन के भीतर ही फिट कर दिया गया। इसका मतलब है कि ड्रोन अब डाटा को बेस पर भेजने का इंतजार नहीं करता, बल्कि उड़ते समय खुद ही संदिग्ध गतिविधियों को भांपता है और आपरेटर को अलर्ट भेजता है।

लक्ष्य की पहचान

यह सिस्टम भीड़ में से दुश्मन की गाडि़यों, हथियारों के डिपो, और छिपे हुए ठिकानों को पहचान सकता है।

सटीकता : यह शोर और सिग्नल के बीच अंतर कर सकता है। जिससे नागरिकों की मौत की संख्या कम करने और सटीक हमले करने में मदद मिलती है।

एआई मॉडल की भी रही भूमिका

मैवेन प्लेटफॉर्म में एंथ्रोपिक कंपनी का जेनरेटिव एआई (AI) मॉडल क्लाउड लगा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि क्लाउड खुफिया जानकारी का विश्लेषण करता है। संभावित लक्ष्यों को पहचानता है और उन्हें रणनीतिक महत्व के आधार पर रैंक करता है। हमले शुरू होने के बाद यह सिस्टम हमलों के प्रभाव का आकलन भी करता है।

ताकि कमांडर जल्दी से प्लान बदल सकें। एंथ्रोपिक और पैलेंटीर की पार्टनरशिप से यह टेक्नोलॉजी अमेरिकी सेना के लिए उपलब्ध हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका की सेना और बड़े पैमाने पर एआई (AI) का इस्तेमाल करने जा रही है।

अमेरिकी सेना में एआई का बढ़ रहा इस्तेमाल

मैवेन स्मार्ट सिस्टम (Maven Smart System) अब अमेरिकी सेना का बहुत महत्वपूर्ण टूल बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 तक 20000 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य कर्मी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे। वे सैटेलाइट और निगरानी सिस्टम से आने वाली जानकारी को रीयल-टाइम में प्रोसेस करते हैं।

कमांडर इस सिस्टम पर इतना निर्भर हो गए हैं कि बड़ी मात्रा में संवेदनशील डेटा को तेजी से समझने में यह बहुत मददगार साबित हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई पर निर्भरता बहुत अधिक बढ़ गई है। एंथ्रोपिक के सीईओ (CEO) डेरियो अमोडी सेना को यह टेक्नोलॉजी इस्तेमाल न करने को कहें। तो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सरकारी अधिकारों का इस्तेमाल कर इसे जारी रख सकता है।

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बीजेपी ने राज्यसभा के लिए घोषित किए नाम, नितिन नवीन का नाम भी शामिल

राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर चुनावी सरगर्मी चरम पर है। नामांकन प्रक्रिया में केवल एक दिन शेष हैं। इससे ठीक पहले बीजेपी ने राज्यसभा के लिए 9 नामों की घोषणा कर दी है। इस लिस्ट में नितिन नवीन का नाम भी शामिल है। बीजेपी ने नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा भेजने के लिए नामित किया है। इसके अलावा बीजेपी ने पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा का नाम भी राज्यसभा के लिए भेजा है।

इन राज्यों में राज्यसभा के लिए चुनाव

निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन राज्यों में राज्यसभा के लिए चुनाव होना है उनमें महाराष्ट्र (7 सीट), ओडिशा (4 सीट), तेलंगाना (2 सीट), तमिलनाडु (6 सीट), छत्तीसगढ़ (2 सीट), पश्चिम बंगाल (5 सीट), असम (3 सीट), हरियाणा (2 सीट), हिमाचल प्रदेश (1 सीट) और बिहार (5 सीट) के नाम शामिल हैं। इन सभी सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी।

बीजेपी की लिस्ट में 9 नाम

भाजपा की ओर से जारी लिस्ट की बात करें तो इसमें बिहार से 2, असम से 2, ओडिशा से 2 और छत्तीसगढ़, हरियाणा और ओडिशा से एक-एक उम्मीदवारों के नाम है। बीजेपी ने बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार का नाम दिया है। इसके अलावा असम से तेराश गोवाला और जेगेन मोहन का नाम है।

छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा का नाम है। इस लिस्ट में आगे हरियाणा से संजय भाटिया और पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा का नाम भी है। इसके अलावा बीजेपी की लिस्ट में ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार दो लोगों के नाम हैं।

इन राज्यों में राज्यसभा के लिए चुनाव

निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन राज्यों में राज्यसभा के लिए चुनाव होना है उनमें महाराष्ट्र (7 सीट), ओडिशा (4 सीट), तेलंगाना (2 सीट), तमिलनाडु (6 सीट), छत्तीसगढ़ (2 सीट), पश्चिम बंगाल (5 सीट), असम (3 सीट), हरियाणा (2 सीट), हिमाचल प्रदेश (1 सीट) और बिहार (5 सीट) के नाम शामिल हैं। इन सभी सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी।

जेडीयू से निशांत कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों खाली हो रही हैं। खाली हो रही पांचों सीटों पर बीजेपी से कोई सांसद नहीं हैं। अभी जो रिटायर हो रहे हैं। उनमें आरजेडी के दो, जेडीयू के दो और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए की तरफ से उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। जेडीयू की तरफ से सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उच्च सदन भेजे जाने की चर्चा है। जेडीयू अपने कोटे की दो सीटों पर उम्मीदवार देगी।

एनडीए के नेता पांचों सीट पर कर रहे जीत का दावा

बिहार में विधायकों की संख्या के हिसाब से एनडीए चार राज्यसभा सीटों पर आराम से जीत सकती है। एक राज्यसभा सांसद के लिए 41 विधायकों के वोटों की जरूरत है। चार राज्यसभा सांसदों के चुनाव के बाद भी एनडीए के पास 38 विधायकों का वोट बचेगा। पांचवें उम्मीदवार को जिताने के लिए तीन और विधायकों की जरूरत है। एनडीए के नेता पांचों सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं।

नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च

जहां तक बात विपक्षी महागठबंधन की है। तो विपक्ष के पास कुल 41 विधायक हैं। इनमें एआईएमआईएम (AIMIM) के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक महागठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। महागठबंधन की तरफ से आरजेडी का उम्मीदवार हो सकता है। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 5 मार्च है।

नितिन नवीन ने क्या कहा ?

बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नवीन ने कहा, “होली का त्योहार बिहार आए बिना अधूरा है। घर पर, परिवार के साथ, अपने चुनाव क्षेत्र में, कार्यकर्ताओं और बिहार के लोगों के साथ होली मनाने का मज़ा ही कुछ और है। यह एक ऐसा त्योहार है जो न सिर्फ़ हर घर को रंग देता है बल्कि उसे खुशियों और आपसी भाईचारे से भी भर देता है। मैं बिहार और देश के सभी लोगों को होली की दिल से बधाई देता हूँ। होली में बुराई की हार होती है और अच्छाई की जीत होती है। बिहार अच्छाई और विकास की ओर बढ़े।

बांकीपुर से विधायक हैं नितिन नवीन

नितिन नवीन अभी बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने बिहार के मंत्री पद से तो इस्तीफा दे दिया था। लेकिन विधानसभा के सदस्य बने हुए हैं। अगर वो राज्यसभा के सदस्य बन जाते हैं। तो उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।

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ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका में आये भूकंप के कई झटके

अमेरिका-इजरायल के हमलों और युद्ध के बीच ईरान में आज दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के गेराश इलाके में 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। कुछ रिपोर्ट्स में तीव्रता 4.5 तक बताई गई है, लेकिन यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की ऑफिशियल जानकारी 4.3 की है।

मिसाइल के हमलों के बीच भूकंप से फैली दहशत

ये झटके फारस प्रांत में महसूस हुए, जहां लोग पहले से ही युद्ध की वजह से तनाव में थे। धमाकों और बमबारी के बीच ये भूकंप आया। तो लोगों में दहशत फैल गई। कई लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए। अभी तक किसी बड़े नुकसान, मौत या घायलों की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने कहा कि ये इलाका पहले से ही भूकंप वाला सेस्मिक एक्टिव जोन है। इसलिए ये नैचुरल टेक्टॉनिक एक्टिविटी लगती है।

सोशल मीडिया पर न्यूक्लियर टेस्ट के उठे सवाल

सोशल मीडिया पर अफवाहें फैल रही हैं कि कहीं ये ईरान का न्यूक्लियर टेस्ट तो नहीं? क्योंकि युद्ध में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हो रहे हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसे साफ किया कि 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप न्यूक्लियर टेस्ट जैसा नहीं होता। टेस्ट में आमतौर पर ज्यादा तीव्रता और अलग पैटर्न होता है। ये इलाका ईरान में भूकंपों के लिए जाना जाता है। जहां साल में कई छोटे-मोटे झटके आते रहते हैं।

ईरान पर अमेरिका-इजरायल की एयरस्ट्राइक्स जारी

ये घटना ऐसे समय आई है जब तेहरान में अमेरिका-इजरायल की एयरस्ट्राइक्स जारी है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी है और गल्फ देशों में ड्रोन-मिसाइल अटैक हो रहे हैं। कुल मौतों का आंकड़ा 1200 के पार हो चुका है। तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। अभी कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है। लेकिन युद्ध और प्राकृतिक आपदा का ये कॉम्बिनेशन हालात और खराब कर सकता है।

अमेरिका का गुप्त टोनोपाह टेस्ट रेंज

नेवादा राज्य में पिछले कुछ दिनों से भूकंपों का सिलसिला थम नहीं रहा है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, टोनोपाह के पूर्वोत्तर इलाके में जहां अमेरिका का सीक्रेट टोनोपाह टेस्ट रेंज (जिसे ‘एरिया 52’ भी कहा जाता है) स्थित है। वहां पिछले तीन दिन से भूकंप आ रहे हैं।

इस एरिया में आए भूकंप के कई झटके

यूएसजीएस के अनुसार रविवार (1 मार्च) से अब तक कई भूकंप झटके दर्ज किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश भूकंप के झटके 2.5 से ऊपर की तीव्रता वाले हैं। सबसे मजबूत झटका रविवार सुबह 4.3 मैग्नीट्यूड का है। इसका केंद्र टोनोपाह से लगभग 48 मील (77 किमी) पूर्वोत्तर में रहा।

ट्रंप ने पहले ही दी चेतावनी

अमेरिका के परमाणु परीक्षण स्थल के पास भूकंप के झटके ऐसे समय आए हैं। जब अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध के हालात हैं। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि युद्ध की ‘सबसे बड़ी लहर’ अभी तक आई ही नहीं है।

तनाव से गुजर रहा ईरान

ईरान में पहले से ही तनाव है। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर उसके ऊपर हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई। इस हमले में ईरान के कई अन्य बड़े लीडर भी मारे गए हैं। घटना में खामेनेई के परिजनों की भी मौत हुई है, जिसके बाद से देश में हड़कंप मचा हुआ है।

हालांकि ईरान ने अभी अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने नहीं टेके हैं और वह लगातार इजरायल और अन्य क्षेत्रों में हमले कर रहा है। युद्ध की आग में धधक रहे ईरान में अब भूकंप के झटकों ने भी दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा है। हालही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को शुरुआती तौर पर अनुमानित 4 से 5 सप्ताह की समय सीमा से कहीं अधिक समय तक जारी रखने में सक्षम है।

बढ़ सकता है वैश्विक तनाव

अमेरिका के नेवादा यह घटना ऐसे समय में हो रही है। जब अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने परमाणु क्षमता से जुड़े मुद्दों पर सख्त बयान दिए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे वैश्विक तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है कि बड़े पैमाने पर परमाणु विस्फोटक परीक्षण शुरू किए गए हैं। इसका मतलब है कि नेवादा के सीक्रेट टोनोपाह टेस्ट रेंज में आ रहे भूकंप नेचुरल घटना सकती है।

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इजरायल में नेतन्याहू के दफ्तर को निशाना बनाकर ईरान ने किया हमला

इस वक्त की बड़ी खबर मिडिल-ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच से सामने आ रही है। दरअसल, ईरान ने दावा किया है उन्होंने इजरायल में नेतन्याहू के दफ्तर को निशाना बनाकर हमला किया है। आईआरजीसी ने भी दावा किया है कि नेतन्याहू के कार्यालय पर आज सुबह हमला हुआ, फिलहाल उनकी हालत अज्ञात है। हालांकि इजरायल ने ईरान के इस दावे को झूठ बताया है।

इजरायल ने नेतन्याहू के कार्यालय पर हुए हमले को पूरी तरह से नकार दिया है। वहीं ईरान द्वारा इजरायल पर नए मिसाइल हमले के बाद अलर्ट जारी किया गया है। इजरायली सेना द्वारा ईरान से आने वाली मिसाइलों की चेतावनी के मद्देनजर तेल अवीव और यरुशलम में सायरन बज रहे हैं। यह भी जानकारी मिली है कि यरुशलम के अल-कुद्स में भीषण विस्फोट हुए हैं।

ईरान में परमाणु प्रतिष्ठान को कोई नुकसान नहीं

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने मिडिल ईस्ट की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमलों और तेहरान के जवाबी मिसाइल हमलों के बाद संयम बरतने का आग्रह किया। ग्रॉसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है। ईरान में किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया गया है या उस पर हमला किया गया है।

इजरायल भी ईरान पर कर रहा हमला

दूसरी तरफ इजरायल की सेना का कहना है कि ईरान पर हुए हमलों की पहली लहर में दो वरिष्ठ ईरानी खुफिया अधिकारी मारे गए हैं। सोमवार को जारी सैन्य बयान में मृतकों की पहचान सैयद याह्या हामिदी और जलाल पूअर हुसैन के रूप में की गई है। बयान में कहा गया है।

हामिदी इजरायल मामलों के खुफिया उप मंत्री थे और उन्होंने “ईरान और विदेशों में यहूदियों, पश्चिमी तत्वों और शासन के विरोधियों को निशाना बनाकर आतंकवादी गतिविधियों का नेतृत्व किया”। बयान में यह भी दावा किया गया है कि हुसैन ईरान के खुफिया मंत्रालय में जासूसी विभाग के प्रमुख थे। बयान में कहा गया है, “उनके साथ, अन्य वरिष्ठ आतंकवादियों को भी मार गिराया गया।

नेतन्याहू के लिए खून और पैसा बहा रहे राष्ट्रपति ट्रंप – लारीजानी

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने X पर पोस्ट करके कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ‘विशफुल थिंकिंग’ (मतिभ्रम वाली सोच) ने पूरे क्षेत्र को एक अनावश्यक जंग में धकेल दिया है।

लारीजानी ने लिखा कि अब ट्रंप सही में अमेरिकी सैनिकों की और मौतों से चिंतित हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ये बहुत दुखद है कि ट्रंप अमेरिकी धन और खून को इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की गैरकानूनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए कुर्बान कर रहे हैं।

अपनी खुद की सरकार बनाये ईरान की जनता – राष्ट्रपति ट्रम्प

दरअसल, शनिवार को मिडिल-ईस्ट में स्थिति तब गंभीर हो गई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई इलाकों पर हमले किए, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का कार्यालय भी शामिल था। रविवार को ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की भी एक हमले में मौत हो गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुसार, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर काम जारी रखे हुए है और अमेरिका पर हमला करने वाली मिसाइलें विकसित करने में लगा हुआ है। एक वीडियो संदेश में, राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरानी जनता से खामेनेई शासन के खिलाफ खड़े होने और अपनी खुद की सरकार बनाने की अपील की।

बाल-बाल बची सऊदी की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Aramco ने आज अपनी सबसे बड़ी रिफाइनरी रास तनूरा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ये फैसला एक ड्रोन अटैक की कोशिश के बाद लिया गया। जिससे इलाके में छोटी आग लग गई थी। सऊदी डिफेंस मिनिस्ट्री और इंडस्ट्री सोर्सेज के मुताबिक, स्थिति अब कंट्रोल में है। कोई मौत नहीं हुई और आग पर जल्दी काबू पा लिया गया।

तुर्किये में अमेरिकी बेस तक पहुंची ईरानी मिसाइलें

ईरान की मिसाइलें तुर्किये में अमेरिका के बेस तक पहुंच गई हैं। यानी अब ईरानी मिसाइलों के निशाने पर अमेरिका का एक और एयरबेस है। इजरायल ने साउथ लेबनान और बेरुत के अल-दाहिए में रॉकेट से हमले तेज कर दिए हैं। वहीं लेबनान में इजरायली हमले में 40 लोगों की मौत हो गई है। यू ए ई (UAE) के सुपरमार्केट्स में सामान की सप्लाई घट गई है।

ईरान से 3,000 से ज्यादा चीनी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला

चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान से अब तक 3,000 से ज्यादा चीनी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। मंत्रालय ने कहा कि ईरान में रहने वाले बाकी चीनी नागरिकों को जितनी जल्दी हो सके। देश छोड़कर निकल जाना चाहिए। साथ ही ये भी कन्फर्म किया कि तेहरान में हुए हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हो गई है। चीन के विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘हमारी सरकार ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत एक्शन लिया।

3,000 से ज्यादा लोग पहले ही सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। हम बाकी लोगों से अपील करते हैं कि वो उपलब्ध सबसे जल्दी रास्ते से ईरान छोड़ दें। मंत्रालय ने ये भी कहा कि वो ईरान में रहने वाले चीनी लोगों को हरसंभव मदद दे रहा है। जिसमें ट्रांसपोर्ट, शेल्टर और इमरजेंसी सपोर्ट शामिल है।

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अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच भारत में अलर्ट, चौकसी बढ़ाई गई

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को लेकर भारत सरकार अलर्ट मोड में है। खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को ऐहतियात बरतने के लिए पत्र लिखा है। दरअसल इसमें सांप्रदायिक हिंसा भड़कने की आशंका को लेकर सतर्क रहने की बात कही गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बात भारत में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

28 फरवरी को जारी पत्र में चेतावनी दी गई है कि विदेश में हो रहे घटनाक्रमों का असर घर में हो सकता है। इसमें खासतौर से धार्मिक आयोजनों में होने वाली बयानबाजी का जिक्र किया गया है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि खुफिया जानकारी को तेज़ी से साझा किया जाए और समय रहते कदम उठाए जाएं ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े।

एडवाइजरी में क्या कहा

एडवाइजरी में गृह मंत्रालय ने कहा है कि भड़काऊ भाषण देने वाले ईरान समर्थक उपदेशकों की पहचान करने और नजर रखने के लिए कहा गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दिल्ली में अधिकारी इस बात को लेकर भी चिंतित हैं।अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का फायदा उठाकर चरमपंथी तत्व स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा सकते हैं। सरकार की तरफ से जारी एडवाइजरी में खासतौर से भाषण और बयानों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।

ईरान नहीं करेगा अमेरिका से बातचीत

पीटीआई भाषा के अनुसार एक शीर्ष ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि वे वॉशिंगटन से बातचीत नहीं करेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को संकेत दिया था। वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने पत्रिका ‘द अटलांटिक’ से कहा कि वे बात करना चाहते हैं। मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है। इसलिए मैं उनसे बात करूंगा। हालांकि ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने ‘एक्स’ पर चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि हम अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इजरायल ने रविवार को ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए। बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर बम गिराए और युद्धपोत भी तबाह कर दिए।

हिजबुल्ला ने इजरायल पर हमलों का किया दावा

ईरानी नेताओं के मुताबिक, इन हमलों की शुरुआत से अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बमबारी जारी रहने के साथ यह संघर्ष अमेरिका, इजरायल और ईरान से बाहर भी फैलने का खतरा पैदा हो गया। लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने इजरायल पर हमलों का दावा किया। जिस पर इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की। खाड़ी देशों ने उनके अहम ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम पांच आम नागरिकों की मौत के बाद चेतावनी दी कि वे ईरान के खिलाफ जवाबी कदम उठा सकते हैं।

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आईये जानते है किसने ईरान पर हमले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को भड़काया

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अपने जिंदा रहते हमेशा इस्लाम के नाम पर मुस्लिम मुल्कों को साथ लाने की कोशिश करते रहे। उनकी मौत के बाद हुए खुलासे ने इस्लामिक देशों में हड़कंप मचा दिया है। अब खुलासा हुआ है कि वो सऊदी अरब ही था। जिसने बार-बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए उकसाया। वॉशिंगटन पोस्ट के दावे के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई बार प्राइवेट कॉल की थी। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले का फैसला तब लिया। जब मोहम्मद बिन सलमान ने बार-बार तेहरान पर हमले के लिए लॉबिंग की।

कई बार राष्ट्रपति ट्रंप को की प्राइवेट कॉल

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने 4 लोगों का हवाला देते हुए बताया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप को कई बार प्राइवेट कॉल की। इस दौरान वो बार-बार ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए उकसाते रहे। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप डिप्लोमेटिक समाधान निकालना चाहते थे। लेकिन सलमान बार-बार हमले पर जोर दे रहे थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति पर बना रहा था दबाव

सऊदी अरब के अलावा इजरायल पहले से ही ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बना रहा था। मतलब साफ है कि नेतन्याहू के अलावा मोहम्मद भी सलमान ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर प्रेशर बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ईरान को लेकर दोहरा रवैया अपना रहे थे। क्योंकि एक तरफ वो सार्वजनिक तौर पर ईरान के पक्ष में बयान दे रहे थे। जबकि अंदर से वो हमला करने के लिए लॉबिंग कर रहे थे।

मोहम्मद बिन सलमान ने पर्दे के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा दिलाया कि ईरान को सिर्फ और सिर्फ सैन्य कार्रवाई के जरिए ही रोका जा सकता है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ये भी कहा था कि अगर अमेरिका ने हमला नहीं किया। तो ईरान और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा। इतना ही नहीं बल्कि मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को आश्वासन दिया था कि अगर ईरान जवाबी हमला करता है। तो सऊदी अरब तेल की आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को संभालने में मदद करेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर हमले के लिए किया लामबंद

सऊदी प्रिंस ने डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ अपने करीबी रिश्तों का इस्तेमाल कर व्हाइट हाउस के अंदर अपनी बात को मजबूती से रखा। बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वजह से ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते पहले से काफी बेहतर भी हो गए थे। लेकिन इसके बावजूद मोहम्मद बिन सलमान ने इजरायल के साथ मिलकर ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए लामबंद किया।

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अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने पर भारत में कहां-कहां हुआ प्रदर्शन

इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं। अयातुल्ला अली के समर्थक सड़कों पर मातम मना रहे हैं और अमेरिका-इजरायल का विरोध कर रहे हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के मातम से भारत भी अछूता नहीं है। यहां कश्मीर में कई जगहों पर लोग खामेनेई की तस्वीरों के साथ सड़कों पर उतरे और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। लोग ‘खामेनेई जिंदाबाद’ जैसे नारे भी लगा रहे थे।

कश्मीर में प्रदर्शन की वजह यह है कि अयातुल्ला अली खामेनेई को फिलिस्तीन समर्थक नेता के तौर पर जाना जाता था। इसके अलावा शिया समुदाय के मुसालमान अयातुल्ला अली खामेनेई से काफी हमदर्दी रखते थे। कश्मीर के शिया मुसलमानों में अयातुल्ला अली खामेनेई की काफी लोकप्रियता थी।

इसीलिए लोग उनकी मौत का मातम मनाने सड़कों पर उतर पड़े हैं। वहीं बेंगलुरु के पास शिया बहुल एक गांव में सन्नाटा पसरा है। लोगों का कहना है कि वे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से बेहद दुखी हैं।

पुलवामा और श्रीनगर में सड़कों पर उतरे लोग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर के पुलवामा और श्रीनगर में शिया बहुल इलाकों में लोग काले झंडे और बैनर लेकर सड़कों पर निकल पड़े और इजरायल-अमेरिका विरोधी नारे लगाने लगे। रविवार को ही ईरान ने अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। इसके बाद ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का ऐलान भी कर दिया है। अली खामेनेई के बेटे मोर्तजा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी है।

लखनऊ इमामबाड़े में भी हुआ प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिया मुसलमानों की संख्या काफी है। लखनऊ के घंटाघर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पुरुषों ने भी जोरदार विरोध जताया है। इस बीच उन्होंने दुख जाहिर करते हुए अमेरिका और इजराइल पर जमकर नारेबाजी की है। वहीं भारी संख्या में लोग बड़े इमामबाड़े पर मौजूद होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की तरफ से अमेरिका और इजराइल मुर्दाबाद के भी नारे लग रहे हैं।

इस प्रदर्शन में पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी भारी तादाद में शामिल हैं। सभी अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर अपना दुख जाहिर कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, अमेरिका बात भी कर रहा था और युद्ध की धमकी भी दे रहा था। हमारे नेता ने घुटने नहीं टेके। एक हजार खामेनेई खड़े हो जाएंगे और जंग होकर रहेगी। लखनऊ में शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक का भी ऐलान किया है।

सहारनपुर में हुआ विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शिया समुदाय ने अपने रहबर माने जाने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर पर गहरा शोक जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। जुलूस शिया मस्जिद से शुरू होकर चौकी सराय, कोतवाली नगर की ओर बढ़ा। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए और अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी हिस्सा लिया. कई महिलाएं रो-रोकर अपने गम का इजहार करती नजर आईं। हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और जुलूस को आधे रास्ते से ही वापस कर दिया।

कांग्रेस ने भी की इजरायल-अमेरिका के हमले की निंदा

जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया और रविवार के लिए तय सभी राजनीतिक गतिविधियां स्थगति कर दीं।अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। पीसीसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ईरान के सर्वोच्च नेता पर किए गए इन हवाई हमलों की कड़ी निंदा करती है और इसे अमेरिका व इजराइल की ओर से अमानवीय, बर्बर और कायरतापूर्ण कृत्य करार देती है।

खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भी बवाल

खामेनेई की मौत के बाद दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान में भी माहौल बिगड़ता नजर आया। कराची स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट पर पाकिस्तानी शिया समुदाय के लोगों ने हमला कर दिया।

इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी

नई दिल्ली के जामिया नगर इलाके में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत की खबर के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जमकर नारे लगाए. “इजराइल मुर्दाबाद” और “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगातार गूंजते रहे। कई लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे। जिन पर विरोध के संदेश लिखे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे ईरान के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सड़कों पर आए हैं।

जामिया नगर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक देश का मामला नहीं है। बल्कि पूरी उम्मत और इंसाफ का सवाल है। उनका कहना था कि वे किसी तरह की हिंसा नहीं चाहते है। बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। वहीं कुछ स्थानीय निवासियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर स्थानीय माहौल ज्यादा न बिगड़े, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

40 दिन का शोक और काम-काज किया ठप

उत्तर प्रदेश के अमेठी में शिया समुदाय के लोग ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर सड़कों पर उतर आए। शिया धर्मगुरु मौलाना जिशान हैदर अली ने समुदाय की ओर से 40 दिनों के शोक का आधिकारिक पैगाम जारी किया है। विरोध स्वरूप स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानों और दैनिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया। समुदाय के लोगों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल ने पीठ पीछे वार करके अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमले को अंजाम दिया है। इस घटना के बाद पूरे जिले के शिया बाहुल्य इलाकों में माहौल गमगीन और तनावपूर्ण बना हुआ है।

अयातुल्ला अली खामेनेई के नाम पर अस्पताल

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में स्थित अलीपुरा गांव में गहरा शोक का माहौल है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर से यहां के निवासी स्तब्ध और दुखी हैं। अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने कर दी है। यह गांव शिया मुस्लिम बहुल है, जहां लगभग 30 हजार निवासियों में अधिकांश शिया समुदाय से हैं।

गांव में अयातुल्ला अली खामेनेई के नाम पर एक अस्पताल भी बना हुआ है, जो उनकी याद में समर्पित है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सुनकर गांव में सदमा लगा। निवासियों ने इसे एक बड़ा झटका बताया और कहा कि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। गांव में तीन दिनों का शोक घोषित किया गया है।

गांव में शोक सभा के दौरान लोग काले कपड़े पहने, काले झंडे लहराते हुए जुलूस निकाला। उन्होंने अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लीं और अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा करते हुए नारे लगाए।गांव की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद रहे।

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इजरायल और अमेरिका के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की हुई मौत

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की अब आधिकारिक पुष्टि हो गई है। सरकारी प्रेस टीवी और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई मारे गए हैं। यह खबर सामने आते ही ईरान और पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला उस समय हुआ जब 86 साल के खामेनेई एक गुप्त और सुरक्षित स्थान पर अपने दो सबसे वफादार करीबियों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल थे।

सूत्रों के अनुसार अयातुल्ला अली खामेनेई सुरक्षा परिषद के सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) प्रमुख मोहम्मद पाकपूर से मुलाकात कर रहे थे। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट की मुताबिक खुफिया एजेंसियां लंबे समय से अली शमखानी पर नजर रख रही थीं।

जैसे ही वे खामेनेई से मिलने उस सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, उसी समय संयुक्त हवाई हमला किया गया। बताया जा रहा है कि हमला बेहद सटीक और तेज था। जिस जगह बैठक चल रही थी, उसी स्थान को निशाना बनाया गया। अमेरिका और इजरायल की ज्वाइंट कार्रवाई में खामेनेई की बेटी, पोती, बहू और दामाद भी मारे गए है।

अमेरिका और इजरायल का संयुक्त ऑपरेशन

सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई थी। जिसमें अमेरिका और इजरायल दोनों शामिल थे। हालांकि इस ऑपरेशन के तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हमले के बाद उस स्थान को पूरी तरह सील कर दिया गया। बचाव और जांच दल तुरंत मौके पर पहुंचे। सरकारी सूत्रों ने बाद में पुष्टि की कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है।

कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई ?

अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1989 में अपने पूर्ववर्ती अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद देश के सुप्रीम लीडर की कमान संभाली थी। रूहोल्लाह खुमैनी वो शख्स थे, जिन्होंने ईरान की क्रांति का नेतृत्व किया। लेकिन वो अली खामेनेई ही थे, जिन्होंने ईरान के मिलिट्री और पैरामिलिट्री सिस्टम को तैयार किया। जिसने न सिर्फ ईरान पर हमलों का मुकाबला किया बल्कि देश के बाहर भी जाकर प्रॉक्सी तैयार किए। सुप्रीम लीडर बनने से पहले खामेनेई ने 1980 के दशक में इराक के साथ खूनी युद्ध के दौरान राष्ट्रपति के तौर पर ईरान का नेतृत्व किया था।

अयातुल्ला अली खामेनेई की भूमिका और असर

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उनके पास सेना की कमान, बड़े अधिकारियों की नियुक्ति और महत्वपूर्ण फैसलों का अंतिम अधिकार था। उनकी मौत से ईरान की राजनीति और क्षेत्रीय हालात पर बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में देश की सत्ता और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

ईरान में शोक और सुरक्षा बढ़ाई गई

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कई सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों पर अलर्ट जारी किया गया है। देशभर में शोक की लहर है। उच्च स्तर की बैठकों का दौर जारी है और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा हो रही है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेंगे – ईरानी सेना

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरानी सेना इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का बयान भी सामने आ गया है। ईरानी सेना ने कहा हमने एक महान नेता खो दिया है। हम उनके शोक में बैठे हैं। जो अपनी रूह की पवित्रता, ईमान की ताकत, मामलों में दूरदर्शिता, अत्याचारियों के सामने साहस और अल्लाह की राह में जिहाद के मामले में अपने युग में अद्वितीय थे। हालांकि उनकी शहादत हमें और ताकतवर बनाएगी। हम अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेंगे। जो अल्लाह की राह में मारे गए हों, उन्हें मुर्दा न समझो, बल्कि वे अपने रब के पास जीवित हैं।

ईरानी सेना ने आगे कहा, “इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, इस्लामी गणराज्य के सशस्त्र बल और विशाल जन-बसीज अपने इस नेता की अनमोल विरासत की रक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ अपने मार्गदर्शक के रास्ते को जारी रखेंगे। देश के खिलाफ आंतरिक और बाहरी साजिशों का मुकाबला करने और आक्रमणकारियों को सबक सिखाने के लिए अडिग रहेंगे।

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अमेरिका के सैन्य बेस पर ईरान ने भी जवाबी हमला किया शुरू

इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बहुत बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले में अमेरिका के एफ-22 रैफ्टॉर फाइटर जेट भी शामिल हुए हैं। एक साथ तेहरान में 30 जगहों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से यह हमला किया गया है। इसके बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट कर दिया गया है।

हमले के बाद ट्रंप ने ईरान पर हमले की वजह बताई है। अब ईरान ने भी जवाबी हमला शुरू कर दिया है। ईरान ने इजरायल पर 30 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यमन और लेबनान से हिजबुल्लाह भी ईरान के साथ जंग में शामिल हो गए हैं।

ईरान ने अमेरिकी बेस पर किया हमला

बहरीन में अमेरिका के सैन्य बेस पर ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। उधर कतर में अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकाने को खाली करवा लिया है। इसके साथ ही यूएई में स्थित अमेरिका के नेवल (नौसैनिक) बेस को भी निशाना बनाया है। इसके साथ ही ईरान ने कतर, कुवैत और जोर्डन स्थित अमेरिका के सैन्य बेस पर भी बड़ा जवाबी हमला किया है।

ईरान की ट्रंप को बड़ी धमकी

अब ईरान ने ट्रंप को बड़ी धमकी देते हुए कहा कि अब तक उन्होंने उन्हीं मिसाइलों से हमले किए हैं, जिन्हें दुनिया ने देखा था। अब वह उन हथियारों का इस्तेमाल करेंगे, जिनके बारे में दुनिया को कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ईरान ने इजरायल पर भी दोबारा कई मिसाइलें दागी हैं।

खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सरकार ने शनिवार को कई टारगेट पर अपने हमलों की पुष्टि की, जिनमें बहरीन, कुवैत, कतर और यूनाइटेड अरब अमीरात शामिल हैं। इन सभी जगहों पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, ईरान की अधिकतर मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया गया और इनसे अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है।

ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे – राष्ट्रपति ट्रंप

वही ईरान पर हमले के बाद ट्रंप का पहला बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे। 47 साल से हम देखते आ रहे हैं कि उन्होंने बहुत लोगों की हत्या की। अमेरिकी लोगों को भी मारा। ऑपरेशन मिडनाइट हैमर लांच कर दिया गया है। हमने ईरान के फोर्दो, इस्फहान पर हमला किया है। ईरान ने हमारे सारे ऑफर ठुकराये। ईरान पर हमला ही आखिरी विकल्प था। खामेनेई अब हथियार डालें या मौत का सामना करें।

बुर्ज खलीफा को खाली कराने की खबर

यूएई के दुबई में बुर्ज खलीफा को खाली कराए जाने की खबर है। दुनिया की सबसे बड़ी इमारतों में से एक बुर्ज खलीफा पर हमला होने का डर है। इसी वजह से इस इमारत को खाली कराया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

बहरीन में बज रहे सायरन

बहरीन के गृह मंत्रालय का कहना है कि पूरे देश में सायरन बज रहे हैं। इससे पहले ईरान की तरफ से बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के कई वीडियो जारी किए गए थे। बहरीन ने भी मिसाइल हमले की बात स्वीकारी है। हालांकि, इसके साथ ही दावा किया है कि अधिकतर मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया।

इजराइल में सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध, स्कूल बंद

इजराइल ने सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, स्कूल और कार्यस्थल बंद कर दिए हैं और अस्पताल के मरीजों को भूमिगत सुविधाओं में स्थानांतरित कर दिया है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने देश भर में आपातकाल की घोषणा की और जनता को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी दी। पुलिस ने सुरक्षा और आपातकालीन वाहनों को सुचारू रूप से आवागमन की अनुमति देने के लिए गैर-जरूरी यात्रा न करने का आग्रह किया।

कतर-सऊदी अरब का तनाव रोकने पर जोर

कतर और सऊदी अरब ने तनाव रोकने पर जोर दिया है। दोनों देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। ऐसे में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने बाचतीत के दौरान तुरंत तनाव रोकने की बात कही। इस बीच अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमले जारी हैं।

कुवैत ने हवा में रोकी ईरानी मिसाइलें

कुवैत की तरफ से बताया गया है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। ईरान की तरफ से कुवैत समेत आठ देशों पर हमले की जानकारी दी गई थी। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता, कर्नल स्टाफ सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा, “अली अल-सलेम एयर बेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला हुआ। सुबह, कुवैती एयर डिफेंस फोर्स ने उन्हें सफलतापूर्वक रोक लिया, जिसके कारण इंटरसेप्शन ऑपरेशन के टुकड़े और मलबा बेस के आस-पास गिर गए।

दुबई एयरपोर्ट बंद

ईरान की तरफ से लगातार पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में दुबई एयरपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यूएई के अलावा कई अन्य देशों ने भी अपने हवाई क्षेत्र में विमानों का संचालन रोक दिया है, ताकि किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सके।

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