प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने मंगलवार को (2 अगस्त) दिल्ली स्थित नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में छापा मारा है। नेशनल हेराल्ड केस में ईडी ने हाल ही में सोनिया गांधी से पूछताछ की थी | इतना ही नहीं इससे पहले राहुल गांधी से भी इस मामले में पूछताछ की गई थी |
ईडी द्वारा नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से पूछताछ के कुछ दिनों बाद, जांच एजेंसी दिल्ली में अखबार के कार्यालयों और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़े कई अन्य परिसरों सहित लगभग 12 स्थानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी तलाशी के बाद इन संपत्तियों को कुर्क कर सकती है।

कांग्रेस का पलटवार
छापेमारी पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों पर विपक्ष के सवालों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। पार्टी ने कहा कि वे देश की जनता को जवाब देने में असमर्थ हैं इसलिए सरकार असहज सवाल पूछने वालों को अपमानित करने और ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही है।
क्या है नेशनल हेराल्ड?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही AJL के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।
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