मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने उठाये राम मंदिर पर सवाल……..

अयोध्या में राम लला की प्राणप्रतिष्ठा को लेकर 22 जनवरी के दिन भव्य आयोजन कराया जायेगा। जिसके लिए ना सिर्फ अयोध्या वासी बल्कि पूरा देश उत्साह में शामिल होने के लिए तैयार है। 2020 में जब राम मंदिर की नीव राखी गयी थी, तबसे लेकर अब तक इतने लम्बे सफर के बाद 22 जनवरी को राम लला की मूर्ति स्थापित हो जाएगी। अब ऐसे में राजनीती में खलबली मची हुई है। कुछ धुर विरोधी पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कह रहे है कि पीएम मोदी सभी धर्मो को एक सामान नहीं मानते है उन्ही में से है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी जिन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए अपनी ही छवि ख़राब कर ली है।

अयोध्या में जो हो रहा वो क्रूरता पर आधारित – मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी

दरसल शनिवार (13 जनवरी) को जारी एक बयान में मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल खड़ा किया उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लेटर हेड पर जारी अपने बयान में कहा है, “अयोध्या में जो हो रहा है वह सरासर क्रूरता पर आधारित है। कोर्ट ने कानून से अलग बहुसंख्यक संप्रदाय के एक वर्ग की ऐसी आस्था के आधार पर यह फैसला दिया है जिसका उल्लेख हिंदू भाइयों के पवित्र ग्रंथों में नहीं है। यह निश्चित रूप से देश के लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला है।

L&T, other companies offer to construct Ram temple in Ayodhya, says VHP | Mint

मुसलमानों के दिलों को ठेस पहुंची – मौलाना रहमानी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने मुसलमानों के दिलों को ठेस पहुंचाई है। मौलाना रहमानी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार एक मस्जिद की जगह पर राम मंदिर का निर्माण हो रहा‌ है, जहां सैकड़ों वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है। उसमें सरकार और मंत्रियों की विशेष रुचि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन न्याय और धर्मनिरपेक्षता की हत्या है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए देशभर में इसका प्रचार अल्पसंख्यकों के घावों पर नमक छिड़कना है। इसलिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सरकार के इस गैर-धर्मनिरपेक्ष और अलोकतांत्रिक रवैये की कड़ी निंदा करता है।

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